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₹ 1 लाख के लोन पर 5,10,15 साल के लिए कितनी EMI चुकानी होगी


₹ 1 लाख के लोन पर 5,10,15 साल के लिए कितनी EMI चुकानी होगी

Rajanish Kant गुरुवार, 27 जुलाई 2017
अपने PF खाते से 90% पैसे निकालकर आप घर खरीद सकते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना चाहिए
अगर आपकी सैलरी में से कुछ पैसे आपके ईपीएफ या पीएफ खाते में ट्रांसफर किये जाते हैं, तो सरकार ने आपके लिए एक नई व्यवस्था की है। आप अपने घर खरीदने, घर का निर्माण करने या फिर होम लोन की ईएमआई भरने के अपने पीएफ खाते से नौकरी करते हुए ही 90% तक पैसे निकाल सकते हैं। 

इसके लिए EPFO ने नियम में संशोधन किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईपीएफ स्कीम, 1952 के 68 BD में एक नया पैराग्राफ जोड़ा गया जिससे ईपीएफ अकांउट के  जरिए अब घर खरीदा जा सकता है और ईएमआई का भुगतान किया जा सकता है। अधिकारी ने बताया कि श्रम मंत्रालय ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है जिससे अब यह स्कीम संसोधित हो चुकी है।

नए नियमों के तहत कम से कम 10 सबस्क्राइबर्स को मिलकर एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन करना होगा। तभी वे घर खरीदने या घर के बनाने या उसके लिए जमीन खरीदने के लिए पीएफ अकाउंट से रकम निकाल सकेंगे। 

सरकार ने तो इसका फैसला कर लिया, लेकिन सवाल है कि क्या आपको अपना घर खरीदने या फिर उसकी मरम्मती के लिए पीएफ खाता से 90 प्रतिशत रकम निकालना सही होगा या नहीं । या फिर होम लोन लेना बेहतर विकल्प होगा। 

जानकारों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि सरकार के इस फैसले से ईपीएफओ सदस्यों को एक महत्वपूर्ण वित्तीय उद्देश्य हासिल करने के लिए अपना खुद का पैसा हासिल करना आसान हो जाएगा। हम आप तो जानते ही हैं कि घर खरीदना कितना मुश्किल काम होता है। लेकिन, अब सरकार द्वारा सुझाए गए  ईपीएफओ में संशोधन निश्चित रूप से अधिक से अधिक व्यक्तियों को अपने घर खरीदने के लिए जरूरी पैसे जुटाने में मदद करेगा। 

लेकिन, अगर आप अपने पीएफ का 90 प्रतिशत पैसा निकालकर घर खरीदना चाह रहे हैं या उसकी मरमम्त करवाना चाह रहे हैं, तो पहले कई बातों पर विचार कर लीजिएगा...

सबसे पहले आप देख लीजिएगा कि घर खरीदने या फिर उसकी मरम्मत में कितनी लागत आ रही है। साथ ही आपके पीएफ खाते से कितनी रकम निकलने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि आपके पीएफ खाते में काफी अधिक पैसे हों और रिटायरमेंट के कम से  कम 10 साल बचे हों, तो पीएफ रकम का इस्तेमाल आप घर खरीदने या उसकी मरम्मती में कर सकते हैं। लेकिन, ध्यान रहे कि पीएफ के पूरे 90 प्रतिशत रकम आप इसी काम में इस्तेमाल ना करें। ऐसा करने से हो सकता है कि रिटायरमेंट के बाद आपको कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ जाए। 

मसलन, अगर पीएफ का 70% रकम घर खरीदने या बनाने के लिए काफी है तो आप केवल पीएफ का 20% -30% पैसे का ही इस्तेमाल करें। बाकी की जरूरत आकर्षक होम लोन लेकर पूरा करें।  इससे आपके दोनों उद्देश्य पूरे हो जाएंगे। आपका घर भी हो जाएगा और रिटायरमेंट के बाद आरामदायक जिंदगी जीने के लिए काफी पैसे भी बचे रह जाएंगे। 

उदाहरण के लिए, आपके पास 12 लाख रुपये का पीएफ बैलेंस है और आप 20 लाख रुपये का घर खरीदना चाहते हैं। ऐसे में आप पीएफ जमा से 2.5 लाख रुपये से 4 लाख रुपये तक निकालने सकते हैं और 16 लाख रुपये से 17.5 लाख के आकर्षक होम लोन ले सकते हैं। 

>ईपीएफ विकल्प के अपनाने के फायदे
- यह आपको बिना ब्याज या कम ब्याज का भुगतान कर घर खरीदने या
बनाने की सहुलियत देता है। 
-उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिनको घर खरीदने या बनाने के उद्देश्य को पूरा 
करने के लिए कुछ रुपये की जरूरत होती है। 

>ईपीएफ विकल्प का नुकसान: लेकिन, अगर आप पीएफ विकल्प अपनाते हैं तो इसके कुछ नुकसान भी हैं...
- रिटायरमेंट कॉरपस को घर खरीदने और निर्माण के महंगे सौदे के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- आप सेवानिवृत्ति के बाद का आनंद लेने के लिए बहुत कम या लगभग कुछ भी नहीं छोड़ते हैं
-अन्य बचत किए बिना पीएफ विकल्प प्राप्त करना आपके वित्तीय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है
> ईपीएफ विकल्प का लाभ किसे उठाना चाहिए और किसे नहीं ?
​​भविष्य निधि जमा का उपयोग करना चाहिए या नहीं, यह  समग्र ईपीएफ योगदान, वित्तीय स्थिति और  व्यक्ति के लक्ष्यों पर निर्भर करता है। अगर आपके रिटायरमेंट में काफी लंबा वक्त है और पीएफ में काफी पैसे पड़े हैं, तो फिर कुछ होम लोन लेकर घर का सौदा कर सकते हैं। लेकिन, नए लोगों को अपने पीएफ के पैसे का इस्तेमाल घर खरीदने या उसकी मरम्मती के लिए करने से बचना चाहिए और कुछ समय का इंतजार करना चाहिए। 

आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ईपीएफ का प्राथमिक उद्देश्य अपने सदस्यों के लिए सेवानिवृत्ति में आय सुनिश्चित करना है। यदि आप इस फंड से वापस लेते हैं, तो आपको लंबे समय तक बढ़ने वाले ग्रोथ रिटर्न के फायदे से बाहर निकलना होगा। फिर आपको अपनी सेवानिवृत्ति निधि फिर से बनाने के लिए एक नया रास्ता चुनना पड़ेगा जो कि चुनौतीपूर्ण से कम नहीं होगा। 

तो. यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आपको अपने पीएफ के पैसे से घर चाहिए या फिर आरामदायक रिटायरमेंट। 
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Rajanish Kant मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
होम लोन का बोझ करें कम, बेस रेट से MCLR की ओर चलें हम, जानें कैसे
भई, होम लोन की दरों को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन है। एक मेरे मित्र हैं, वो अक्सर इसको लेकर रोना रोते हैं। मैंने पूछा क्या हुआ। उन्होंने कहा कि देखिये ना, बैंक वाले कर्ज की दर में कटौती तो करते हैं लेकिन मेरा होम लोन का ब्याज जस का तस है। ना तो ईएमआई राशि में कमी आती है,ना ही होम लोन की अवधि में और ना ही ब्याज दर में। मैंने पूछा कि आपने होम लोन कब लिया था, उन्होंने कहा कि 2010 में। तब मैं सारा मामला उनको समझाया। दरअसल, ब्याज दर के मामले में कई होम लोन ग्राहकों को इन दिनों इस तरह के उलझन से गुजरना पड़ रहा है। 

हुआ यूं कि अप्रैल 2016 से कर्ज पर ब्याज दर तय करने की नई व्यवस्था लागू की गई है जो कि  एमसीएलआर यानी Marginal Cost Of  Funds Lending Rates (कोष की सीमांत लागत उधारी दर) कहलाती है। इसकी खासियत ये है कि लोन देने की लागत यानी कॉस्ट ऑफ फंडिंग पर ये दर घटती-बढ़ती है। यानी अगर कॉस्ट ऑफ फंडिंग बढ़ती है तो ब्याज दर तुरंत बढ़ा दी जाती है और अगर कॉस्ट ऑफ फंडिंग घटती है तो ब्याज दर में तुरंत कमी कर दी जाती है। यही वजह है कि जब भी रिजर्व बैंक रेपो रेट कम करता है, बैंक भी कर्ज पर ब्याज दरों में कमी कर देते हैं। लेकिन, इसका फायदा सिर्फ नए ग्राहकों को ही मिलता है या फिर जिन लोगों ने एमसीएलआर पर कर्ज ले रखा है, उनको मिलता है। 


शायद, अब भी आप नहीं समझे होंगे कि आपका कर्ज सस्ता क्यों नहीं होता है, मैंने अपने मित्र से पूछा। उन्होंने हां में सर हिलाया। फिर मैंने उनको स्पष्ट किया कि आपने या तो बेस रेट के आधार पर या फिर बीपीएलआर यानी बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट्स के आधार पर होम लोन लिया होगा। तब उन्होंने कहा कि उन्होंने बेस रेट के आधार पर कर्ज लिया है। मैंने उनसे कहा कि एमसीएलआर में बदलाव का फायदा उन्हीं को मिलता है जिनलोगों ने इसके तहत लोन लिया है। हां, अगर बैंक बेस रेट या बीपीएलआर में कटौती करते हैं तभी इसके तहत रेट्स में कमी होती है। फिलहाल बीपीएलआर या बेस रेट एमसीएलआर के मुकाबले ज्यादा है। अलग-अलग बैंक अलग-अलग ब्याज दर वसूलते हैं।   

तब उन्होंने पूछा कि बेस रेट या बीपीएलआर से एमसीएलआर में लोन ट्रांसफर करने का तरीका क्या है और क्या ऐसा करने से उनको फायदा होगा। ये सवाल शायद आपको भी परेशान करता होगा। तो, आइए जानते हैं कि जानकार इस बारे में क्या कहते हैं.....

-लोन ट्रांसफर करने से पहले आप इससे होने वाले फायदा और ट्रांसफर की लागत देख लीजिए। 

-एक बात और एमसीएलआर फ्लोटिंग प्रोडक्ट नहीं है बल्कि हाइब्रिड प्रोडक्ट है। मतलब, आपने जिस रेट पर लोन लिया है, वही रेट लागू नहीं रहेगा, बल्कि आगे जब भी इसमें बदलाव होगा, आपके रेट में भी बदलाव हो जाएगा। 

-अगर आप पूरी तरह से फ्लोटिंग रेट वाला लोन चाहते हैं तो आप ये देखें सबसे कम समय में रेट में बदलाव करने वाला बैंक कौन है

-बेस रेट से एमसीएलआर में लोन ट्रांसफर करने पर आपको कंवर्जन फीस देनी पड़ेगी। आमतौर पर यह फीस बैंक और लोन ट्रांसफर करने वाले पर 
निर्भर करती है। हां, अगर अगली बार रेट तय होने की तारीख तक आप मौजूदा बेस रेट से ईएमआई चुकाते हैं तो शायद आपको कंवर्जन फीस से मुक्त रखा जा सकता है। 

-अगर आप एक बैंक से दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर करते हैं तो उसमें शामिल होने वाले चार्ज हैं- लीगल चार्ज, वैल्यूएशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, स्टैम्प ड्यूटी और अन्य चार्ज। माना जाता है कि कुल मिलाकर ये सभी चार्ज आपके बकाये लोन का 2-3% बैठ जाता है। 


चलिये, आपको दिखाते हैं एक जादू कि अगर कर्ज पर  ब्याज दर कम कराते हैं तो कैसे आपके पैसे बचते हैं। इसे एक  उदाहरण से समझाते  हैं कि लोन पर ब्याज दर में कमी से कैसे आपकी ईएमआई का बोझ कम होगा.....

मान लिया, आपने 20 लाख रुपए का होम लोन 15 साल के लिए 10% सालाना ब्याज पर लिया था। तो आपकी ईएमआई बनती है करीब-करीब 21492 रुपए प्रति माह। अब अगर आपको इतने ही होम लोन पर इतने ही साल के लिए 8.5% सालाना की दर से ब्याज देना पड़े तो आपकी ईएमआई होगी करीब 19695 रुपए यानी आपकी बचत हुई  21492-19695= 1797 रु.प्रति माह। 

अगर आपकी होमलोन की अवधि यानी 15 साल यानी 180 महीने के हिसाब से आपकी बचत की गणना की जाए तो यह होगी 180X1797=323460रु.। तो, ब्याज दर कम कराने से कितना फायदा होता है, ये तो समझ गए होंगे। 

अब सवाल उठता है कि क्या आप अगर बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट्स (बीपीएलआर) या फिर बेस रेट सिस्टम से बदलकर अपना होम लोन एमसीएलआर सिस्टम में करवाते हैं तो फायदा होगा या नहीं। 

जानकारों के मुताबिक, ऐसा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें कि क्या आपके लिए लोन ट्रांसफर करने का ये सही वक्त है...लोन ट्रांसफर करते समय बकाया लोन समेत ट्रांसफर में होने वाले दूसरे खर्चों मसलन, स्टैंप ड्यूटी या जहां लोन ट्रांसफर कर रहे हैं वहां की प्रोसेसिंग फीस  बगैरह और जिस बैंक में आपका मौजूदा लोन वहां पर ट्रांसफर करने के एवज में लिया जाने वाला चार्ज अगर कोई हो तो, इन सबको जोड़ना चाहिए, तब लोन ट्रांसफर करनेका फायदा या नुकसान का पता चलेगा। इसके अलावा, कुछ बैंक लोन ट्रांसफर के समय बकाया लोन का कुछ प्रतिशत जुर्माना के रूप में लेते हैं। यानी लोन ट्रांसफर के समय आप केवल ये ना देखें कि आपकी हर महीने ईएमआई की कितनी बचत हो रही है, बल्कि लोन ट्रांसफर के समय चुकाई गई स्टैंप ड्यूटी, प्रोसेसिंग फीस और बकाया लोन पर लगा जुर्माना भी शामिल कर लीजिएगा। तभी पता चलेगा कि लोन ट्रांसफर से आपको फायदा हो रहा है या नहीं। 

जानकारों के मुताबिक, आप लोन ट्रांसफर करें, यदि 

-जहां आपका मौजूदा लोन है और जहां आप लोन ट्रांसफर करना
चाहते हैं, दोनों के बीच कर्ज की दरों में कम से कम 0.50% का अंतर हो

-मौजूदा लोन चुकाने की अवधि 5 साल से अधिक हो

-मौजूदा कर्जदाता की सेवा से आप संतुष्ट ना हों

तो, अब आप समझ गए होंगे बीपीएलआर, बेस रेट, एमसीएलआर का घनचक्कर। 

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Rajanish Kant सोमवार, 30 जनवरी 2017
SBI, PNB और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कर्ज भी हुए सस्ते, जानिए कहां मिलेगा सबसे सस्ता लोन
नोटबंदी की वजह से बैंकों में खासकर सरकारी बैंकों के बीच कर्ज सस्ता करने की होड़ मच गई है जिसका फायदा ग्राहकों को मिल रहा है।  आईडीबीआई और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर के बाद देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी एमसीएल आर यानी Marginal Cost Of Funds Lending Rates (कोष की सीमांत लागत) घटाकर ग्राहकों को नए साल का तोहफा दिया है। इन बैंकों  ने अपनी विभिन्न परिपक्वता अवधि (Maturity Period) के कर्ज की मानक दरों में 0.9% तक की कटौती की घोषणा की है। 

SBI ने कहा है कि उसके एक साल की अवधि वाले कर्ज की सीमान्त कोष लागत आधारित कर्ज दर 8.90% से घटाकर 8% की गई है। इसी प्रकार 1, 3 और 6 माह की अवधि के कर्ज के लिए भी ब्याज दरों में कटौती की गई है।

बैंक ने दो साल और तीन साल की अवधि के लिए एमसीएलआर घटाकर 8.10% और 8.15% कर दिया है। इसी के साथ पीएनबी और यूबीआई ने भी अपनी मानक दरों में 0.9% तक की कटौती की है।

पीएनबी ने एक वर्ष की अवधि वाले कर्ज के लिए एमसीएलआर 0.7% घटाकर 8.45% कर दिया है। इसी प्रकार तीन वर्ष की अवधि के लिए यह 8.60% और पांच वर्ष की अवधि के लिए 8.75% किया गया है।

यूबीआई ने एमसीएलआर में 0.65 से 0.90% की कटौती की है. एक वर्ष की अवधि के लिए एमसीएलआर को घटाकर 8.65% किया गया है।

पिछले दिनों ने आईडीबीआई ने एक साल की एमसीएलआर और बेस रेट में 0.15%-0.15%  की कमी करते हुए इसे क्रमश: 9.15% और 9.50% कर दिया है। वहीं एसबीआई के सहयोगी बैंक स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी) ने बेस रेट में 0.30% की कमी की है, जबकि एक साल अवधि वाली एमसीएलआर को 0.25% कम करते हुए इसे 9.45%  से 9.20% कर दिया था। 

बता दें कि 2016 के अप्रैल से कर्ज की दर तय करने की नई व्यवस्था एमसीएलआर लागू की गई है। ये बैंकों के वेटेड (Weighted)एवरेज  कॉस्ट ऑफ फंडिंग से जुड़ा हुआ है जो बैंकों के कॉस्ट ऑफ फंड्स (कोषों की लागत) घटने से अपने-आप कम हो जाती है। 

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Rajanish Kant सोमवार, 2 जनवरी 2017