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सोने का अगला $1000 का उछाल ऊपर की ओर: Fed की सख्ती चरम पर, State Street का bullish पूर्वानुमान | Gold Price 2026 Analysis

State Street के Aakash Doshi के अनुसार सोने का अगला $1000 का मूव ऊपर रहेगा। Fed की हॉकिश नीति पीक पर पहुंच गई है। 2026 में सोना $4750 से $5500 प्रति औंस तक जा सकता है। विस्तृत विश्लेषण और निवेश सलाह पढ़ें।

सोने का अगला $1000 का उछाल ऊपर की ओर: Fed की सख्ती चरम पर पहुंच गई, State Street का बड़ा दावा

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें वर्तमान में $4000 प्रति औंस के आसपास समेकन (consolidation) कर रही हैं, लेकिन State Street Asset Management के हेड ऑफ गोल्ड स्ट्रैटजी Aakash Doshi का कहना है कि सोने का अगला बड़ा $1000 का मूव ऊपर की ओर ही होगा। Fed की मौद्रिक नीति में सख्ती (hawkishness) अब पीक पर पहुंच चुकी है, जिससे आगे राहत मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

सोना हाल ही में $4100 प्रति औंस के ऊपर टिक नहीं पा रहा है। लंबी अवधि के रियल यील्ड्स ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं (10-वर्षीय रियल यील्ड लगभग 2.4%)। इसके बावजूद, $4000 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।

Aakash Doshi ने Kitco News को दिए इंटरव्यू में कहा, "बाजार ने Fed का काफी काम पहले ही कर लिया है। Fed पूरे साल होल्ड पर रह सकता है क्योंकि रियल रेट्स पहले से काफी ऊंचे हो चुके हैं।"

State Street का Bullish Outlook

बेस केस पूर्वानुमान (6-9 महीने):** $4750 से $5500 प्रति औंस।

संभावित लक्ष्य:** 2027 की शुरुआत तक $5000 प्रति औंस तक पहुंचना संभव।

2026 के अंत तक:** यदि 2-वर्षीय यील्ड्स 4% से नीचे आते हैं, तो साल के अंत तक $4500-$4750 संभव।

Doshi का मानना है कि नवंबर-दिसंबर में सोना समेकन कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि में ट्रेंड बुलिश बना रहेगा।

क्या सपोर्ट कर रहा है सोने को?

सेंट्रल बैंक डिमांड: मजबूत और लचीली बनी हुई है।

चीन की डिमांड: जून में आयात दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।

भू-राजनीतिक तनाव: ईरान से संबंधित युद्ध और बढ़ते वैश्विक कर्ज ($353 ट्रिलियन) सोने को मौद्रिक हेज के रूप में मजबूत बना रहे हैं।

ETF डिमांड: वर्तमान स्तर पर भी बनी रहने से कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Doshi ने कहा कि भले ही Fed हॉकिश रुख बनाए रखे, लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल फैक्टर्स (वैश्विक कर्ज, फिस्कल खर्च और मुद्रा अवमूल्यन) सोने की मांग को बढ़ावा देंगे।

निवेशकों के लिए सलाह (www.beyourmoneymanager.com)

शॉर्ट टर्म:** $4000 के सपोर्ट पर खरीदारी के अवसर देखें। जुलाई के नॉन-फार्म पेरोल डेटा महत्वपूर्ण होगा। यदि रोजगार डेटा कमजोर आया तो रेट कट की उम्मीद बढ़ेगी और सोना उछल सकता है।

लॉन्ग टर्म:** सोना पोर्टफोलियो में 5-15% हिस्सा रखना विविधीकरण के लिए फायदेमंद रह सकता है, खासकर बढ़ते कर्ज और अनिश्चितता के माहौल में।

रिस्क:** उच्च रियल यील्ड्स और मजबूत डॉलर अल्पकालिक दबाव बना सकते हैं।

निष्कर्ष:  

State Street के विश्लेषण के अनुसार, Fed की सख्ती अब चरम पर है। इससे आगे सोने में नया उछाल आने की संभावना मजबूत है। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए।





Rajanish Kant बुधवार, 29 जुलाई 2026
PizzaExpress India ने लॉन्च किया नया Summer Special Menu, आम से बने डेजर्ट, नई पिज्जा और सी-फूड डिशेज़ का मिलेगा स्वाद

PizzaExpress India ने 'Freshly Crafted for the Season' नाम से नया लिमिटेड एडिशन समर मेन्यू लॉन्च किया है। इसमें मैंगो डेजर्ट, नई पिज्जा, सी-फूड स्पेशल और समर ड्रिंक्स शामिल हैं।

PizzaExpress India ने लॉन्च किया नया Summer Special Menu, आम से बने डेजर्ट, नई पिज्जा और सी-फूड डिशेज़ होंगे आकर्षण

देश की लोकप्रिय पिज्जा चेन PizzaExpress India ने गर्मियों के मौसम को खास बनाने के लिए अपना नया 'Freshly Crafted for the Season' लिमिटेड एडिशन मेन्यू लॉन्च किया है। इस विशेष मेन्यू में मौसमी फलों, खासकर आम (मैंगो), से तैयार डेजर्ट और पेय पदार्थों के साथ-साथ नई पिज्जा, ताज़े सी-फूड व्यंजन और कई आकर्षक समर स्पेशल डिशेज़ शामिल की गई हैं। यह मेन्यू देशभर के सभी PizzaExpress रेस्टोरेंट्स में सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा.

आम के स्वाद को दिया गया विशेष स्थान



PizzaExpress ने इस बार अपने समर मेन्यू का सबसे बड़ा आकर्षण भारत के पसंदीदा फल आम को बनाया है। ग्राहकों के लिए कई नई मैंगो-आधारित डिशेज़ तैयार की गई हैं, जिनमें शामिल हैं—

Tropical Gold Rush

Mango Frappe

Mango Gelato

Mango Cheesecake

कंपनी का कहना है कि इन डिशेज़ को इस तरह तैयार किया गया है कि हर उम्र के ग्राहक गर्मियों के मौसम का ताज़गीभरा स्वाद महसूस कर सकें।

नई पिज्जा और मुख्य व्यंजन भी होंगे उपलब्ध

सिर्फ डेजर्ट ही नहीं, PizzaExpress ने अपने मुख्य मेन्यू में भी कई नए विकल्प जोड़े हैं।

नई पिज्जा में शामिल हैं—

Creamy Alfredo Veggie Pizza

BBQ Chicken Pizza

Doppio Veggie Pizza

इसके अलावा मुख्य व्यंजनों में Baked Pesto Fish, Herb Grilled Fish, Harissa Chicken, Soho Rice Bowl और Baked Seasonal Vegetables जैसे विकल्प भी ग्राहकों को मिलेंगे।

गर्मियों के लिए विशेष ड्रिंक्स

परिवार और दोस्तों के साथ भोजन का आनंद लेने वालों के लिए PizzaExpress ने कई नए समर ड्रिंक्स भी पेश किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

Ginger Fresca

Sparkling Lemon Iced Tea

Sparkling Peach Iced Tea

ये ड्रिंक्स विशेष रूप से गर्म मौसम में ताज़गी देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

कंपनी ने क्या कहा?

Gourmet Investments Hospitality Group (GIHG) के CEO रोहन पिवेकर के अनुसार, PizzaExpress का उद्देश्य ग्राहकों को हर बार कुछ नया अनुभव कराना है। उनका कहना है कि नया 'Freshly Crafted for the Season' मेन्यू मौसमी सामग्री और नए फ्लेवर पर आधारित है, ताकि ग्राहक अपने पसंदीदा व्यंजनों के साथ कुछ नया भी आज़मा सकें।

भारत में तेजी से बढ़ रही मौजूदगी

PizzaExpress आज दुनिया के कई देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। भारत में कंपनी के 39 रेस्टोरेंट्स संचालित हो रहे हैं, जो मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद सहित कई प्रमुख शहरों में स्थित हैं।

निष्कर्ष

अगर आप इस गर्मी में परिवार या दोस्तों के साथ बाहर खाने का प्लान बना रहे हैं, तो PizzaExpress का नया Summer Special Menu आपके लिए एक नया स्वाद अनुभव हो सकता है। मैंगो-आधारित डेजर्ट, नई पिज्जा और ताज़गीभरे पेय इस मेन्यू को अन्य विकल्पों से अलग बनाते हैं। 

Rajanish Kant
P.F. Chang's India का नया Chang's Cravings Menu लॉन्च, Sweet, Spicy और Umami फ्लेवर का मिलेगा नया अनुभव


 P.F. Chang's ने भारत में Chang's Cravings नाम से नया फ्लेवर-आधारित मेन्यू लॉन्च किया है। इसमें Sweet, Spicy, Savory, Umami और Sweet & Savory प्रोफाइल के अनुसार ग्राहक आसानी से अपनी पसंदीदा डिश चुन सकते हैं।

भारत में प्रीमियम पैन-एशियन रेस्टोरेंट चेन P.F. Chang's ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया और अनोखा फूड एक्सपीरियंस पेश किया है। कंपनी ने Chang's Cravings नाम से नया सीज़नल मेन्यू लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को उनकी पसंद के स्वाद के अनुसार भोजन चुनने में आसानी देना है। यह विशेष मेन्यू भारत के सभी P.F. Chang's आउटलेट्स पर सितंबर तक उपलब्ध रहेगा।


क्या है Chang's Cravings?
आमतौर पर रेस्टोरेंट मेन्यू में डिशेज़ को स्टार्टर, मेन कोर्स या डेज़र्ट जैसी श्रेणियों में रखा जाता है। लेकिन Chang's Cravings इस पारंपरिक सोच से अलग है।
इस नए मेन्यू में डिशेज़ को पाँच अलग-अलग स्वाद (Flavor Profiles) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है—
Sweet (मीठा)
Spicy (तीखा)
Savory (लज़ीज़)
Umami (गहरा एवं समृद्ध स्वाद)
Sweet & Savory (मीठा और लज़ीज़ का मिश्रण)
इससे ग्राहक यह सोचने के बजाय कि क्या ऑर्डर करें, सीधे उस स्वाद के अनुसार डिश चुन सकते हैं जिसकी उन्हें इच्छा हो रही है।
ग्राहकों का अनुभव होगा और बेहतर


Gourmet Investments Hospitality Group (GIHG) के CEO रोहन पिवेकर के अनुसार, इस मेन्यू को ग्राहकों की पसंद और फ्लेवर पर किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने और नए दोनों तरह के ग्राहकों के लिए ऑर्डर चुनने की प्रक्रिया को आसान और अधिक व्यक्तिगत बनाना है।




किस फ्लेवर में कौन-सी डिश?
नए मेन्यू में कई लोकप्रिय डिशेज़ को अलग-अलग फ्लेवर प्रोफाइल में रखा गया है।
Spicy: Ring of Fire Shrimp, Burnt Chili Hakka Noodles
Savory: Handmade Dumplings, Pepper Steak
Umami: Dynamite Shrimp, Chang's Chicken Lettuce Wraps
Sweet: Orange Chicken
Sweet & Savory: Mongolian Tenderloin, Hot & Sour Soup, VIP Duck सहित कई लोकप्रिय व्यंजन
कंपनी का कहना है कि कई डिशेज़ ऐसे भी हैं जिनमें एक से अधिक स्वाद का अनुभव मिलता है।


मेन्यू चुनना होगा आसान
P.F. Chang's के Culinary Head जेरी थॉमस का कहना है कि यह नया सिस्टम ग्राहकों को उनकी मनःस्थिति और स्वाद की इच्छा के अनुसार डिश चुनने में मदद करेगा। इससे मेन्यू समझना आसान होगा और भोजन का अनुभव भी बेहतर बनेगा।



भारत में कितने आउटलेट हैं?
वर्तमान में P.F. Chang's भारत में 10 आउटलेट्स संचालित करता है। इनमें मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और मोहाली जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। नया Chang's Cravings मेन्यू जून से सितंबर 2026 तक सभी भारतीय आउटलेट्स पर उपलब्ध रहेगा।


निष्कर्ष
भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए P.F. Chang's ने फ्लेवर-आधारित मेन्यू की शुरुआत की है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य रेस्टोरेंट ब्रांड भी इसी तरह के ग्राहक-केंद्रित मेन्यू मॉडल को अपना सकते हैं।

Rajanish Kant
सोना की कीमतें FOMC से पहले स्थिर, रेट हाइक की संभावना बढ़कर 37.9% - क्या होगा निवेशकों का अगला कदम? | Be Your Money Manager

FOMC मीटिंग से पहले सोने की कीमतें $4,052 पर स्थिर। रेट हाइक की प्रोबेबिलिटी 37.9% हो गई है। जानिए गोल्ड इन्वेस्टमेंट की पूरी स्ट्रेटजी और टेक्निकल एनालिसिस।

सोना FOMC से पहले स्थिर, लेकिन रेट हाइक की आशंका बढ़ी - निवेशकों को क्या करना चाहिए?

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतें शुक्रवार को लगभग स्थिर बंद हुईं। निवेशक अगले हफ्ते होने वाली FOMC (Federal Open Market Committee) की बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें ब्याज दरों पर बड़ा फैसला हो सकता है।

CME के FedWatch टूल के अनुसार, 29 जुलाई को होने वाली FOMC बैठक में ब्याज दर बढ़ाने (Rate Hike) की संभावना 37.9% हो गई है। यह आंकड़ा एक हफ्ते पहले के 12.8% की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। बाजार पहले सितंबर में रेट कट की उम्मीद कर रहा था, लेकिन जुलाई में हाइक की संभावना अचानक बढ़ने से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

सोने की कीमतों में क्या हुआ?

स्पॉट गोल्ड शुक्रवार को $4,052 पर बंद हुआ, जो पिछले दिन से सिर्फ $4 (0.10%) की मामूली बढ़त दिखाता है।

पूरे हफ्ते में सोना 0.85% या $34.16 चढ़ा।

$4,000 का स्तर अभी मजबूत सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। हालांकि, जनवरी के ऑल-टाइम हाई के बाद सोना सात बार लगातार लोअर हाई बना चुका है।

सकारात्मक बात यह है कि पिछले एक महीने में सोने ने लोअर लो नहीं बनाया है, जो खरीदारों की मजबूत दिलचस्पी दर्शाता है।

FOMC का असर क्यों महत्वपूर्ण है?

अगर 29 जुलाई को अचानक रेट हाइक होता है तो यह बाजार के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। ज्यादातर ट्रेडर्स सितंबर की बैठक में रेट एक्शन की उम्मीद कर रहे थे। जुलाई में हाइक होने पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह पहले से प्राइस इन नहीं है।

विश्लेषकों के अनुसार, सोने की हालिया 24% गिरावट का मुख्य कारण सितंबर रेट हाइक की उम्मीद ही रहा है (ईरान संकट के बाद से)। अब अगर फेड दरें बढ़ाता है तो $4,000 का सपोर्ट ब्रेक होने का खतरा बढ़ जाएगा।

टेक्निकल आउटलुक

सोना फिलहाल नाजुक संतुलन (fragile equilibrium) में है। $4,000 पर मजबूत खरीदारी दिख रही है, लेकिन ऊपरी स्तर पर बिकवाली भी जारी है। FOMC का फैसला इस स्टैंडऑफ को तोड़ने वाला ट्रिगर साबित हो सकता है।

रेट होल्ड** होने पर सोने को सीमित राहत मिल सकती है।

सरप्राइज हाइक** होने पर $4,000 ब्रेकडाउन का खतरा।

लंबी अवधि में रिकवरी के लिए जरूरी है कि फेड रेट कट की दिशा में साफ संकेत दे।

भारतीय निवेशकों के लिए सलाह (Be Your Money Manager)

शॉर्ट टर्म: FOMC बैठक तक सतर्क रहें। नई पोजीशन लेने से पहले फैसला आने दें।

मीडियम टर्म: $4,000 (या भारतीय रुपए में समकक्ष) के मजबूत सपोर्ट पर DCA (Dollar Cost Averaging) रणनीति अपनाई जा सकती है।

लॉन्ग टर्म: भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोना अभी भी मजबूत एसेट क्लास बना हुआ है। SIP या गोल्ड ETF/Mutual Fund के जरिए निवेश जारी रखें।

डायवर्सिफिकेशन: पोर्टफोलियो में 10-15% गोल्ड जरूर रखें।

निष्कर्ष:  

FOMC बैठक सोने के शॉर्ट टर्म मूवमेंट का गेम चेंजर साबित हो सकती है। 37.9% रेट हाइक प्रोबेबिलिटी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्मार्ट निवेशक हमेशा की तरह इंतजार और देखने की रणनीति के साथ आगे बढ़ें।





Rajanish Kant मंगलवार, 28 जुलाई 2026
मुंबई के redevelopment प्रोजेक्ट वाले property owners के लिए राहत: Redevelopment Agreement के Registration से Property Taxable नहीं

ITAT का बड़ा फैसला: Redevelopment Agreement के Registration से Property Taxable नहीं | Section 56(2)(x) पर राहत | Mumbai Redevelopment 2026

मुंबई ITAT ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि redevelopment agreement का registration अकेले में immovable property receive नहीं माना जाएगा। Section 56(2)(x) के तहत टैक्स नहीं लगेगा। मुंबई के redevelopment प्रोजेक्ट वाले property owners के लिए जरूरी अपडेट।

ITAT का राहत भरा फैसला: Redevelopment Agreement के Mere Registration पर टैक्स नहीं लगेगा

मुंबई में redevelopment प्रोजेक्ट्स का बोलबाला है। ऐसे में Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) मुंबई बेंच ने property owners और tenants के लिए बहुत महत्वपूर्ण फैसला दिया है। Tribunal ने साफ कहा कि redevelopment agreement को सिर्फ execute और register करने भर से immovable property “receive” नहीं माना जाएगा, इसलिए Section 56(2)(x) के तहत tax नहीं लगाया जा सकता।

मामले की डिटेल्स

कर अधिकारी ने taxpayer Manoj Devshichhadva पर ₹1.38 करोड़ की राशि “Income from Other Sources” के रूप में जोड़ दी थी। आधार यह था कि redevelopment agreement register हो चुका था, इसलिए दो alternative premises का stamp duty value taxable है।

ITAT (Judicial Member Siddhartha Nautiyal और Accountant Member Vikram Singh Yadav) ने इस demand को रद्द कर दिया। Tribunal ने कहा कि:

Section 56(2)(x) केवल तभी लागू होता है जब assessee वास्तव में immovable property receive करता है।

Agreement register करने से केवल contractual right बनता है कि भविष्य में flat मिलेगा। जब तक construction पूरा नहीं हो जाता और possession नहीं दी जाती, property receive नहीं मानी जाती।

Alternative accommodation tenancy rights के surrender के बदले मिला था, इसलिए यह “without consideration” नहीं था।

CA Ashish Karundia का कमेंट

प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट अशिष करुंदिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “mere right to receive” और “actual receipt” में बहुत अंतर है। दोनों अलग-अलग capital assets हैं। संसद जब rights in immovable property को tax करना चाहती है तो स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है। Deeming provision को इस तरह stretch नहीं किया जा सकता।

इस फैसले का असर (व्यावहारिक महत्व)

मुंबई और अन्य शहरों में redevelopment projects में रह रहे हजारों flat owners और tenants को राहत मिलेगी।

Agreement registration के समय ही भारी tax demand का खतरा कम हो गया है।

हालांकि, capital gains tax के नियम अलग हैं। जब actual possession मिलेगी या property बेची जाएगी तो capital gains tax लग सकता है।

Taxpayers को अभी भी सावधानी बरतनी चाहिए और पूरा documentation मजबूत रखना चाहिए।

Money Management के नजरिए से सलाह

Redevelopment project में जा रहे हैं तो agreement के tax implications को समझें।

CA या tax consultant से early stage में चर्चा करें।

Possession letter और completion certificate आने तक tax liability को final न मानें।

Tenancy rights surrender के बदले मिलने वाली property के documentation को carefully रखें।

निष्कर्ष  

ITAT का यह फैसला redevelopment वाले property owners के लिए बड़ी राहत है। यह दर्शाता है कि tax authorities agreement registration को अकेले tax trigger के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते। नियमों का सही ज्ञान आपको अनावश्यक tax disputes से बचा सकता है।

अपनी property और tax planning से जुड़े किसी भी सवाल के लिए comment करें। 

यह आर्टिकल मूल है, news को simplify किया गया है और finance blog के readers के लिए practical advice जोड़ा गया है। आप इसमें अपनी branding, images या internal links जोड़ सकते हैं।



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Rajanish Kant बुधवार, 22 जुलाई 2026
LIC और EPFO में कितना अनक्लेम्ड पैसा पड़ा है? सरकार ने जारी किए ताजा आंकड़े 2026 | ₹16,000 करोड़ से ज्यादा अनक्लेम्ड फंड - BeYourMoneyManager

 
LIC में ₹7,318.50 करोड़ और EPFO के इनऑपरेटिव अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ अनक्लेम्ड/इनऑपरेटिव फंड। जानिए कैसे चेक करें और क्लेम करें अपना पैसा। पूरी डिटेल्स यहां।

LIC और EPFO में पड़ा है हजारों करोड़ का अनक्लेम्ड पैसा! सरकार ने संसद में दिए ताजा आंकड़े

अगर आपने या आपके परिवार ने LIC पॉलिसी ली थी या EPF अकाउंट खुलवाया था, तो हो सकता है कि आपका पैसा अनक्लेम्ड पड़ा हो। केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में LIC और EPFO से जुड़े अनक्लेम्ड फंड के最新 आंकड़े जारी किए हैं। कुल मिलाकर 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि इन संस्थानों में पड़ी हुई है।

LIC में अनक्लेम्ड मनी: ₹7,318.50 करोड़  

31 मार्च 2026 तक Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास कुल ₹7,318.50 करोड़ अनक्लेम्ड राशि जमा है। इसमें:  

पॉलिसीधारकों का मूल अनक्लेम्ड अमाउंट: ₹5,564.55 करोड़  

इस पर अर्जित आय (Income Accrued): ₹1,753.95 करोड़

EPFO में इनऑपरेटिव अकाउंट्स: ₹9,330.56 करोड़  

EPFO के मामले में सरकार ने स्पष्ट किया कि कोई "अनक्लेम्ड" अकाउंट नहीं है, लेकिन इनऑपरेटिव EPF अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ की राशि पड़ी हुई है (31 मार्च 2026 तक)।

अनक्लेम्ड फंड को वापस पाने के लिए सरकार और संस्थान क्या कर रहे हैं?

LIC के प्रयास:  

LIC पॉलिसीधारकों और उनके नॉमिनी/वारिसों तक पैसा पहुंचाने के लिए कई कदम उठा रही है:  

LIC वेबसाइट (licindia.in) पर नाम, DOB और PAN से अनक्लेम्ड अमाउंट सर्च करने की सुविधा।  

ब्रांचेस द्वारा पत्र, SMS रिमाइंडर।  

10 साल से ज्यादा पुराने मामलों में NEFT डिटेल्स मांगकर फॉलो-अप।  

एजेंट्स और बिमा सखी के जरिए लोकल लेवल पर ट्रेसिंग।  

क्रेडिट ब्यूरो एजेंसी की मदद से एड्रेस और मोबाइल नंबर ट्रेस करना।  

वित्त मंत्रालय के "Your Money-Your Right" कैंपेन में सक्रिय भागीदारी।

EPFO के 4-पॉइंट एक्शन प्लान:  

KYC डिटेल्स के आधार पर इनऑपरेटिव अकाउंट्स की पहचान और कैटेगरीकरण।  

₹1,000 या उससे कम बैलेंस वाले आधार-वेरिफाइड अकाउंट्स में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऑटो-सेटलमेंट।  

सीधे बैंक अकाउंट में क्रेडिट (बिना नया क्लेम फॉर्म भरे)।  

सोशल मीडिया और Nidhi Aapke Nikat (NAN) 2.0 कैंप के जरिए जागरूकता।

10 साल बाद क्या होता है अनक्लेम्ड LIC फंड?  

IRDAI के नियमों के अनुसार 10 साल से ज्यादा अनक्लेम्ड राशि Senior Citizens’ Welfare Fund (SCWF) में ट्रांसफर कर दी जाती है। LIC हर साल 1 मार्च तक योग्य राशि ट्रांसफर करती है।

अपना अनक्लेम्ड पैसा कैसे चेक और क्लेम करें? (टिप्स)

LIC के लिए: licindia.in पर जाएं → Unclaimed Policy Dues सर्च करें।  

EPFO के लिए: Unified Member Portal (umang.gov.in या epfindia.gov.in) पर लॉगिन करें, KYC अपडेट करें और क्लेम स्टेटस चेक करें।  

आधार, PAN और बैंक डिटेल्स अपडेट रखें।  

पुरानी पॉलिसी/PF अकाउंट की जानकारी परिवार के सदस्यों को दें।

निष्कर्ष:  

अनक्लेम्ड मनी आपकी मेहनत की कमाई है। छोटी-छोटी लापरवाही से लाखों-करोड़ों रुपये अनक्लेम्ड हो जाते हैं। नियमित रूप से अपने फाइनेंशियल अकाउंट्स की समीक्षा करें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपडेट रखें।

आर्टिकल स्रोत: लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का लिखित जवाब (20 जुलाई 2026)


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Rajanish Kant मंगलवार, 21 जुलाई 2026
सोना नरम, चांदी में रिबाउंड: फेड रेट हाइक की आशंका और जियो-पॉलिटिकल टेंशन से Precious Metals पर असर | Kitco AM Report 20 जुलाई 2026

 


20 जुलाई 2026 को सोने में हल्की गिरावट और चांदी में रिबाउंड देखा गया। फेड रेट हाइक की संभावना, US-Iran तनाव और ऊंचे तेल-यील्ड ने मेटल्स को सीमित किया। विस्तृत विश्लेषण, तकनीकी लेवल और निवेश सलाह पढ़ें।

सोना नरम पड़ा, चांदी में उछाल: फेड रेट रिस्क और हॉर्मुज तनाव ने Precious Metals को रोका

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में हल्की नरमी देखी गई, जबकि चांदी में रिबाउंड नजर आया। Kitco AM Report के अनुसार, US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद फेडरल रिजर्व की दर बढ़ाने की आशंका और मजबूत डॉलर ने प्रीशियस मेटल्स की तेजी को सीमित कर दिया।

वर्तमान कीमतें (20 जुलाई 2026):  

स्पॉट गोल्ड:** लगभग $4,012 प्रति औंस (0.13% की गिरावट)  

स्पॉट सिल्वर:** लगभग $56.73 प्रति औंस (1.62% की बढ़ोतरी)  


क्यों आई नरमी? मुख्य कारण

फेड रेट हाइक की आशंका: हालिया आर्थिक डेटा (रिटेल सेल्स, जॉबलेस क्लेम्स, फिलाडेल्फिया Fed मैन्युफैक्चरिंग) मजबूत आने के बाद बाजार अब जुलाई फेड मीटिंग में होल्ड और बाद में रेट हाइक की संभावना जता रहे हैं। इससे 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 4.57% के आसपास पहुंच गया और US Dollar Index (DXY) 100.87 पर मजबूत हुआ।

जियो-पॉलिटिकल टेंशन: US और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ी तनाव की वजह से क्रूड ऑयल $90 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इससे महंगाई का खतरा बढ़ा, जो नॉन-यील्डिंग एसेट गोल्ड के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

टेक्निकल पोजीशन: गोल्ड $4,023-$4,065 के महत्वपूर्ण रिट्रेसमेंट जोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। सिल्वर पिछले हफ्ते के लो से रिकवर हुआ है लेकिन $58.53-$59.44 जोन से अभी भी नीचे है।

तकनीकी विश्लेषण (Gold & Silver)

गोल्ड:  

निकट अवधि में बेयरिश बायस।  

सपोर्ट लेवल: $3,982 → $3,947 → $3,886  

रेजिस्टेंस लेवल: $4,023 → $4,065  

$3,982 से नीचे ब्रेकडाउन पर और गिरावट संभव।

सिल्वर:  

रिबाउंड के बावजूद बेयरिश स्ट्रक्चर।  

सपोर्ट: $55.60 → $54.49  

रेजिस्टेंस: $57.60 → $58.53  

$58.53 के ऊपर क्लोज पर तेजी मजबूत हो सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)  

वर्तमान में गोल्ड और सिल्वर दोनों शॉर्ट-टर्म प्रेशर में हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स (मुद्रा अवमूल्यन, सेंट्रल बैंक खरीदारी और जियो-पॉलिटिकल रिस्क) मजबूत बने हुए हैं।  

डिप-बायिंग स्ट्रैटजी**: $3,950-$3,980 के आसपास गोल्ड में SIP या लंपसम खरीदारी पर विचार करें।  

चांदी**: इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण चांदी गोल्ड से ज्यादा वोलेटाइल रहती है – रिबाउंड पर प्रॉफिट बुकिंग और नए लो पर एंट्री दोनों ऑप्शन।  

पोर्टफोलियो में 8-15% Precious Metals रखना विविधीकरण के लिए फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष  

फेड की नीति, तेल की कीमतें और हॉर्मुज की स्थिति अगले कुछ दिनों में मेटल्स की दिशा तय करेंगी। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए लेकिन लॉन्ग-टर्म गोल्ड और सिल्वर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। कीमतें बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।


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Rajanish Kant
भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग संकेत, कीमतें घटीं लेकिन ज्वेलरी और ETF डिमांड मजबूत | Gold Market Update 2026

भारत सोने का बाजार जुलाई 2026 अपडेट – जून में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट, ज्वेलरी डिमांड बढ़ी, ETF और डिजिटल गोल्ड में इनफ्लो मजबूत लेकिन आयात घटा। निवेशकों के लिए पूरी जानकारी BeYourMoneyManager.com

भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग के संकेत, निवेशकों के लिए क्या है मौका?


नई दिल्ली। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सोने के बाजार में मिश्रित संकेत दिख रहे हैं। जून महीने में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद जुलाई में स्थिरता आई है। भरपूर घरेलू सप्लाई के कारण लोकल मार्केट अभी भी लैंडेड प्राइस पर डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है।


सोने की कीमतों में गिरावट

जून में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत (LBMA) 11% से ज्यादा गिरकर US$4,000/oz के आसपास पहुंच गई, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे कम स्तर था। घरेलू MCX स्पॉट प्राइस भी करीब 10% घटकर INR 1,41,000/10g के आसपास पहुंचा। जुलाई में मामूली रिकवरी हुई है, लेकिन साल-दर-साल (YTD) अंतरराष्ट्रीय कीमतें 7% नीचे हैं, जबकि भारतीय कीमतें 6% ऊपर हैं।


मुख्य कारण: मजबूत US डॉलर, अमेरिका में रेट हाइक की उम्मीदें और इक्विटी मार्केट की तरफ शिफ्ट। हालांकि, कीमतों में गिरावट ने खरीदारों को मौका दिया, जिससे गिरावट सीमित रही।


घरेलू बाजार में डिस्काउंट

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद डिस्काउंट US$150/oz तक पहुंच गया था, जो अब जुलाई के पहले दो हफ्तों में औसतन US$20/oz रह गया है। मिड-जुलाई में यह US$40/oz के आसपास है। पुरानी ज्वेलरी को नई ज्वेलरी में एक्सचेंज करने से घरेलू सप्लाई बढ़ी है, जिससे आयात की जरूरत कम हुई।


ज्वेलरी डिमांड में सुधार

मई-जून के मध्य मौसमी सुस्ती और अधिक मास के बाद ज्वेलरी खरीदारी में तेजी आई है। कीमतों में गिरावट और रिटेलर्स की डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर जैसी प्रमोशन्स ने मदद की। शादी के अलावा फेस्टिव सीजन (अगस्त से) की तैयारी में मैन्युफैक्चरर्स को ऑर्डर मिल रहे हैं।


लिस्टेड ज्वेलर्स ने अप्रैल-जून क्वार्टर में 30-60% YoY रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज अब 43-70% तक सेल्स का हिस्सा बन गया है।


निवेश डिमांड: ETF और डिजिटल गोल्ड मजबूत

Gold ETF:** जून में INR 34.4 अरब (US$356 मिलियन) का इनफ्लो – फरवरी के बाद सबसे ज्यादा। जुलाई की शुरुआत में भी INR 12.1 अरब का इनफ्लो। होल्डिंग्स बढ़कर 119 टन हो गईं।

डिजिटल गोल्ड:** UPI के जरिए खरीदारी बढ़ी। जून में वैल्यू INR 25.5 अरब और वॉल्यूम 1.7 टन पहुंचा।


दूसरी ओर, बार और कॉइन की मांग ठंडी पड़ी।


सोने के आयात में कमी

जून में आयात US$1.97 बिलियन रहा, जो मई से 42% कम और पिछले साल के जून से वॉल्यूम में कम है। पुरानी गोल्ड सप्लाई बढ़ने से फ्रेश इंपोर्ट की जरूरत घटी। कुल मर्चेंडाइज इंपोर्ट में गोल्ड की हिस्सेदारी मात्र 3% रह गई।


निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)

ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए:** कीमत स्थिर होने पर अच्छा मौका, खासकर प्रमोशन्स का फायदा लें।

निवेशकों के लिए:** ETF और डिजिटल गोल्ड में डिप पर खरीदारी अच्छी रणनीति हो सकती है। लॉन्ग टर्म में सोना पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए बेहतर ऑप्शन बना हुआ है।

ध्यान दें:** कीमतें US डॉलर, ग्लोबल इकोनॉमी और घरेलू फैक्टर्स पर निर्भर करेंगी। हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से खरीदें और टैक्स/मेकिंग चार्जेस चेक करें।


निष्कर्ष: भारतीय सोने का बाजार अभी मिश्रित मांग दिखा रहा है। ज्वेलरी और पेपर गोल्ड (ETF/डिजिटल) में सकारात्मक संकेत हैं, जबकि फिजिकल बार-कॉइन और आयात में सुस्ती है। लंबी अवधि में सोना मजबूत एसेट साबित होता रहा है।

यह लेख World Gold Council की रिपोर्ट पर आधारित मूल विश्लेषण है। निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।



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Rajanish Kant सोमवार, 20 जुलाई 2026
2026 गोल्ड मिड-ईयर आउटलुक: सोने की कीमतें H2 में ₹3,40,000 तक रहेंगी? WGC रिपोर्ट में पूरी डिटेल्स

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट के अनुसार सोने की कीमतें दूसरे हाफ में $4,100 के आसपास रेंजबाउंड रह सकती हैं। जानिए H1 में क्या हुआ, H2 के स्केनैरियो, सेंट्रल बैंक डिमांड और निवेशकों के लिए सलाह।

2026 गोल्ड मिड-ईयर आउटलुक: सोने की कीमतें H2 2026 में क्या करेंगी? WGC रिपोर्ट का पूरा विश्लेषण

निवेशकों के लिए सोना हमेशा से सुरक्षित आश्रय (safe haven) रहा है। साल 2026 के पहले छह महीनों में सोने ने बेहद उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया। जनवरी में यह US$5,500 प्रति औंस के ऊपर नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, लेकिन जून के अंत तक US$4,000 के नीचे आ गया। साल-दर-साल (YTD) करीब 7% की गिरावट के बावजूद, पिछले 12 महीनों में सोना अब भी टॉप परफॉर्मिंग एसेट्स में शामिल है।

World Gold Council (WGC) की नई रिपोर्ट Gold Mid-Year Outlook 2026: Point Break में H2 2026 के लिए क्या अनुमान है? आइए विस्तार से समझते हैं।

H1 2026 में सोने का रोलरकोस्टर सफर

  • जनवरी में जियोपॉलिटिकल टेंशन और ऑप्शंस एक्टिविटी के कारण सोना $5,500+ पर पहुंचा।
  • जून में तेज गिरावट आई और कीमत $4,000 के नीचे चली गई।
  • वोलेटिलिटी 50% से ऊपर पहुंच गई, जो अब 30% के आसपास है (20-वर्षीय औसत 17%)।
  • एशियन ट्रेडिंग सेशंस ने कीमत को सपोर्ट दिया — एशिया में कई सेशंस पॉजिटिव रहे।

GRAM मॉडल के अनुसार रिस्क, अनिश्चितता, मोमेंटम और FX फैक्टर्स ने H1 परफॉर्मेंस को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

H2 2026 के लिए WGC का बेसकेस अनुमान

वर्तमान स्तरों पर सोने की कीमत मैक्रो इकोनॉमिक कंसेंसस (मध्यम विकास, कूलिंग लेकिन ऊंची मुद्रास्फीति, सीमित रेट हाइक्स) के अनुरूप है।

मुख्य बिंदु:

  • अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो सोना US$4,100 प्रति औंस ±5% के दायरे में रहेगा।
  • अपसाइड स्केनैरियो: खराब आर्थिक आंकड़े, नया जियोपॉलिटिकल शॉक, या रेट कट की उम्मीद बढ़ने पर कीमत $4,500 या उससे ऊपर जा सकती है। मजबूत सिग्नल पर $5,000+ भी संभव।
  • डाउनसाइड रिस्क: मजबूत ग्रोथ, बढ़ती यील्ड्स और शांत बाजार में 10-15% गिरावट आ सकती है, लेकिन $4,000 से नीचे गिरावट पर बारगेन हंटिंग (डिप खरीदारी) सपोर्ट देगी।

सेंट्रल बैंक डिमांड मजबूत रहेगी

सेंट्रल बैंक लगातार नेट बायर बने हुए हैं। WGC के अनुसार 2026 में खरीदारी लॉन्ग-टर्म औसत (लगभग 600 टन) से ऊपर रह सकती है। भारत और चीन जैसे देशों की पॉलिसी बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

भारत में सोना सांस्कृतिक और निवेश दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

  • आभूषण मांग आर्थिक विकास और त्योहारों पर निर्भर करेगी।
  • ETFs और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश बढ़ सकता है अगर डॉलर कमजोर होता है या अनिश्चितता बढ़ती है।
  • रुपये में कीमत: वर्तमान $4,100 के आसपास (USDINR ~83-84 मानकर) प्रति 10 ग्राम लगभग ₹2,80,000–₹2,90,000 के स्तर पर ट्रेड कर सकता है। अपसाइड में ₹3,40,000+ तक जा सकता है।

सलाह: पोर्टफोलियो में 5-10% सोना रखना डाइवर्सिफिकेशन के लिए अच्छा रहता है। SIP या गोल्ड ETF के जरिए व्यवस्थित निवेश करें।

निष्कर्ष

2026 का दूसरा हिस्सा सोने के लिए रेंजबाउंड लेकिन संभावनाओं से भरा दिख रहा है। जियोपॉलिटिक्स, US चुनाव, रेट पाथ और एशियन डिमांड मुख्य ट्रिगर्स होंगे। WGC रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर आकर्षक हैं, लेकिन ब्रेकआउट के लिए मजबूत कैटालिस्ट की जरूरत है।

निवेश से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल, फाइनेंशियल गोल्स और टैक्स इम्प्लिकेशन्स को ध्यान में रखें। हमेशा SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर से सलाह लें।

यह लेख World Gold Council की Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट पर आधारित है। कीमतें बाजार की स्थिति पर निर्भर करती हैं। निवेश बाजार जोखिम के अधीन है।


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Rajanish Kant शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
सोने की कीमत $4000 पर दबाव में, US रिटेल सेल्स में 0.2% बढ़ोतरी से Fed रेट हाइक की संभावना मजबूत | जुलाई 2026 Gold News

US रिटेल सेल्स जून में 0.2% बढ़ने से सोने की कीमत $4000 के स्तर पर संघर्ष कर रही है। Fed की ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से निवेशकों पर असर। भारत में गोल्ड प्राइस आउटलुक और निवेश सलाह पढ़ें।

सोने की कीमत $4000 पर दबाव में: अमेरिकी रिटेल सेल्स बढ़ने से Fed रेट हाइक की उम्मीदें मजबूत

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें मंगलवार को दबाव में रहीं। अमेरिकी रिटेल सेल्स जून महीने में 0.2% बढ़ने की खबर के बाद गोल्ड $4000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर पर संघर्ष कर रहा है।

US Commerce Department के आंकड़े  

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, जून 2026 में रिटेल सेल्स 0.2% बढ़ी, जो मई के संशोधित 1.0% बढ़ोतरी के बाद आई। पिछले 12 महीनों में रिटेल सेल्स कुल 6.7% ऊपर है। हालांकि कोर रिटेल सेल्स (वाहन बिक्री को छोड़कर) 0.2% घटी, जो अर्थव्यवस्था की मिश्रित तस्वीर पेश करती है।

गोल्ड प्राइस रिएक्शन  

Kitco News के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,001.40 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जो दिन के दौरान 1.43% की गिरावट दर्शाता है। निवेशक अब मजबूत उपभोक्ता खर्च को देखते हुए फेडरल रिजर्व के रुख पर नजर रखे हुए हैं।

क्यों दबाव में है गोल्ड?  

मजबूत रिटेल सेल्स डेटा बताता है कि अमेरिकी उपभोक्ता अभी भी महंगाई के बावजूद खर्च करने की स्थिति में हैं। इससे फेडरल रिजर्व को मुद्रास्फीति नियंत्रण पर फोकस करने का मौका मिलता है, जिससे साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनती है। ऊंची ब्याज दरें गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट के लिए नुकसानदायक होती हैं क्योंकि अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?  

MCX गोल्ड**: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। रुपये की मजबूती या कमजोरी भी प्रभावित करेगी।

भौतिक सोना**: शादी-फंक्शन सीजन और त्योहारों को देखते हुए लंबी अवधि में डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद।

डिजिटल गोल्ड/SGB/Gold ETF**: जो निवेशक कम उतार-चढ़ाव चाहते हैं, उनके लिए अच्छा विकल्प।

विश्लेषक क्या कहते हैं?  

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, हालांकि डेटा मिश्रित है, लेकिन उपभोक्ता मजबूती फेड को रेट हाइक के लिए जगह दे सकती है। इससे शॉर्ट टर्म में गोल्ड पर दबाव रह सकता है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगाई और सेंट्रल बैंक खरीदारी लंबी अवधि में सपोर्ट देगी।

निवेश सलाह (Beyourmoneymanager.com)  

डिप बायिंग: $3900-3950 के आसपास मजबूत सपोर्ट मिलने पर खरीदारी पर विचार करें।

Diversification: पोर्टफोलियो का 5-15% सोने में रखें (जोखिम प्रोफाइल के अनुसार)।

Sovereign Gold Bonds: टैक्स फ्री रिटर्न और ब्याज का फायदा लें।

हमेशा SIP/लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं, शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से बचें।

निष्कर्ष  

US रिटेल सेल्स में बढ़ोतरी ने सोने को तुरंत दबाव में डाला है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताएं गोल्ड को आकर्षक बनाए रखती हैं। निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर सतर्क रहना चाहिए और अपनी फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार जोखिम के अधीन हैं।


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Rajanish Kant गुरुवार, 16 जुलाई 2026