भारत में महिलाएँ आज तेजी से उद्यमिता, डिजिटल फाइनेंस और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व करने से लेकर छोटे-छोटे व्यवसाय चलाने और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का उपयोग करने तक, महिलाएँ अब आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।
PayNearby Women Financial Index 2026 के अनुसार, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की लगभग 38% महिलाएँ हर सप्ताह कम से कम एक बार UPI का उपयोग करती हैं। वे इसका इस्तेमाल मुख्यतः रोज़मर्रा के खर्चों जैसे किराना, बिजली बिल भुगतान और मोबाइल रिचार्ज के लिए करती हैं। यह आंकड़ा महिलाओं में बढ़ती डिजिटल वित्तीय जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।
इस बदलाव को सरकार की नीतियों और फिनटेक कंपनियों के नवाचारों से भी गति मिल रही है। Union Budget 2026-27 में जेंडर बजट का आवंटन बढ़ाकर ₹1.07 लाख करोड़ से अधिक किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं के उद्यम को बढ़ावा देने के लिए Self-Help Entrepreneur (SHE) Marts जैसी पहलें भी शुरू की गई हैं।
सरकारी योजनाएँ, डिजिटल वित्तीय उपकरण और जमीनी स्तर पर काम करने वाले उद्यम नेटवर्क मिलकर महिलाओं को क्रेडिट तक पहुंच, वित्तीय साक्षरता और व्यवसाय विस्तार में मदद कर रहे हैं।
International Women’s Day 2026 के अवसर पर आइए जानते हैं भारत में महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को तेज़ी से आगे बढ़ाने वाली 6 प्रमुख पहलें।
1. लखपति दीदी योजना (Lakhpati Didi Scheme)
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत शुरू की गई लखपति दीदी योजना का लक्ष्य वर्ष 2029 तक 2 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाना है।
इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रशिक्षण, ऋण और बाज़ार से जुड़ने की सुविधा दी जाती है।
महिलाओं को कई क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है जैसे:
डेयरी व्यवसाय
सिलाई और फैशन
कृषि आधारित व्यवसाय
डिजिटल सेवाएँ
इस पहल के तहत 1.5 करोड़ से अधिक महिलाएँ पहले ही सालाना ₹1 लाख से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं, जबकि लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं तक पहुँचने का है।
यह योजना न केवल आर्थिक स्थिरता देती है बल्कि महिलाओं को समाज में सम्मान और पहचान भी दिलाती है।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)
प्रधानमंत्री आवास योजना केवल घर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व और आर्थिक सशक्तिकरण का भी एक बड़ा माध्यम बन चुकी है।
इस योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि घर के स्वामित्व दस्तावेज़ में महिला का नाम सह-मालिक या प्राथमिक मालिक के रूप में शामिल हो।
25 अगस्त 2025 तक:
महिलाओं के नाम संपत्ति होने से उन्हें कई फायदे मिलते हैं:
विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में यह बदलाव बेहद प्रभावशाली साबित हो रहा है।
3. उड़ान क्रॉनिकल्स (Udaan Chronicles)
Udaan Chronicles एक मेंटरशिप और जागरूकता कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य छोटे व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं को व्यावसायिक कौशल और वित्तीय शिक्षा प्रदान करना है।
इस पहल के तहत महिलाओं को सिखाया जाता है:
इसके साथ ही Bharat Women Aspiration Index (BWAI) और Local Role Model Programme जैसे कार्यक्रम महिलाओं के लिए प्रेरणादायक नेटवर्क तैयार करते हैं।
इससे महिलाओं को न केवल ज्ञान मिलता है बल्कि उन्हें मार्गदर्शन और प्रेरणा भी मिलती है ताकि वे अपने व्यवसाय को बड़े स्तर तक ले जा सकें।
4. डिजिटल नारी पहल (Digital Naari Initiative)
Digital Naari Program एक ऐसा माइक्रो-उद्यमी मॉडल है जो महिलाओं को अपने समुदाय में डिजिटल और बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराने वाला “डिजिटल साथी” बनने का अवसर देता है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाएँ अपने क्षेत्र में लोगों को सेवाएँ देती हैं जैसे:
मुख्य आँकड़े:
1.5 लाख से अधिक महिलाएँ जुड़ चुकी हैं
10,000 से अधिक पिनकोड क्षेत्रों में सक्रिय
हर साल ₹10,000 करोड़ से अधिक के लेन-देन
इनमें से 60% महिलाएँ पहली बार उद्यमी बनी हैं, और वे हर महीने लगभग ₹3500 – ₹5000 तक की आय अर्जित कर रही हैं।
5. STEP (Support to Training and Employment Programme)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह योजना ग्रामीण और वंचित समुदाय की महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराती है।
STEP कार्यक्रम के तहत महिलाओं को 10 प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है, जैसे:
कृषि
हथकरघा और हस्तशिल्प
आतिथ्य उद्योग
आईटी और डिजिटल सेवाएँ
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को केवल रोजगार दिलाना नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाना है।
6. प्रोगशक्ति (ProgShakti Initiative)
ProgShakti महिलाओं द्वारा संचालित MSME व्यवसायों को वित्तीय सहायता देने के लिए शुरू की गई पहल है।
इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ:
₹10 लाख तक का बिना गिरवी (Collateral-Free) ऋण
ऋण लेने के लिए पुरुष सह-आवेदक की आवश्यकता नहीं
वित्तीय साक्षरता और व्यवसाय प्रबंधन प्रशिक्षण
यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिला उद्यमियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है ताकि वे अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें।
निष्कर्ष
आज भारत में महिलाएँ केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं रह गई हैं, बल्कि वे उद्यमी, निर्णयकर्ता और स्थानीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण शक्ति बनती जा रही हैं।
सरकारी योजनाएँ, डिजिटल तकनीक और सामुदायिक नेटवर्क मिलकर महिलाओं के लिए एक मजबूत आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार कर रहे हैं।
भारत जब 2027 तक $5 ट्रिलियन और 2047 तक $30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब महिलाओं की आर्थिक भागीदारी केवल सामाजिक सुधार नहीं बल्कि स्मार्ट इकॉनमिक रणनीति भी है।
महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता ही भारत के समावेशी और सशक्त भविष्य की नींव है। 💰👩💼