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अमेरिका के 63 Bank (बैंक) संकट में? FDIC की रिपोर्ट और $517 अरब के नुकसान का सच – आपके पैसे के लिए इसका मतलब क्या है?

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि अमेरिका के 63 बैंक पतन के कगार पर हैं और FDIC के अनुसार उनके नुकसान $517 अरब तक पहुंच गए हैं। पोस्ट में इसे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम पर निर्भर लोगों के लिए चेतावनी बताया जा रहा है।


यह दावा कितना सही है? आइए तथ्यों को समझते हैं।


FDIC का आधिकारिक डेटा क्या कहता है?

FDIC (Federal Deposit Insurance Corporation) नियमित रूप से अमेरिकी बैंकों की स्थिति पर रिपोर्ट जारी करता है। हालिया Quarterly Banking Profile के अनुसार:


“Problem Bank List” (जिन बैंकों की वित्तीय, ऑपरेशनल या मैनेजमेंट कमजोरी हो) पर बैंकों की संख्या हाल के क्वार्टर में 54 से 63 के आसपास रही है। ये बैंक CAMELS रेटिंग में 4 या 5 पर होते हैं।

कई बैंकों में सिक्योरिटीज पर unrealized losses (कागजी नुकसान) दर्ज किए गए हैं, जो ब्याज दरों में बदलाव और कमर्शियल प्रॉपर्टी लोन की वजह से हुए। कुछ रिपोर्ट्स में कुल unrealized losses सैकड़ों अरब डॉलर बताए गए हैं।

लेकिन 2026 में वास्तविक बैंक फेलियर बहुत कम और छोटे स्तर के रहे हैं। बड़े पैमाने पर 63 बैंकों के तुरंत पतन की कोई आधिकारिक पुष्टि FDIC ने नहीं की है।


$517 अरब का आंकड़ा और “verge of collapse” वाला दावा पुरानी चर्चाओं या व्याख्याओं पर आधारित लगता है। 2023 में Silicon Valley Bank और Signature Bank के पतन के बाद बैंकिंग सिस्टम में दबाव जरूर बढ़ा था, लेकिन सिस्टम अभी भी मजबूत पूंजी और लिक्विडिटी के साथ काम कर रहा है।


आपके पैसे के लिए इसका मतलब क्या है?

www.beyourmoneymanager.com के पाठकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण चेतावनी है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। पारंपरिक बैंकों पर पूरी निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। यहां कुछ व्यावहारिक कदम हैं:


FDIC (In India DICGC) इंश्योरेंस चेक करें  

अमेरिका में $250,000 तक की डिपॉजिट FDIC द्वारा सुरक्षित होती है। भारत में भी DICGC जैसी योजनाएं हैं। अपने अकाउंट की लिमिट समझें।


डायवर्सिफिकेशन जरूरी  

सारा पैसा एक बैंक या एक तरह के अकाउंट में न रखें। कुछ हिस्सा लिक्विड फंड, गोल्ड, या अन्य एसेट्स में लगाएं।


इमरजेंसी फंड मजबूत करें  

  6-12 महीने के खर्च के बराबर कैश या आसानी से निकालने योग्य फंड रखें।


बैंक की सेहत पर नजर रखें  

बड़े और स्थिर बैंक चुनें। छोटी या समस्याग्रस्त संस्थाओं से बचें।


वैकल्पिक विकल्प समझें  

 क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल एसेट्स या अन्य निवेश विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं, लेकिन जोखिम समझकर।

निष्कर्ष

बैंकिंग सिस्टम में दबाव और नुकसान की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं। 63 बैंकों और $517 अरब के नुकसान वाला दावा सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। आधिकारिक डेटा के अनुसार स्थिति गंभीर जरूर है, लेकिन तुरंत पतन का संकेत नहीं।

स्मार्ट मनी मैनेजमेंट का मतलब है कि आप हमेशा तैयार रहें। पैसे को सुरक्षित रखने के लिए नियमित रूप से अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, जोखिम कम करें और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लें।

अपने वित्तीय भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सही रणनीति अपनाएं। घबराहट में फैसला न लें, बल्कि तथ्यों पर आधारित कदम उठाएं।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और चर्चाओं पर आधारित मूल लेख है। यह वित्तीय सलाह नहीं है। निवेश और बैंकिंग संबंधी फैसले सोच-समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से लें।)

Rajanish Kant मंगलवार, 18 अगस्त 2026
Elon Usk (एलन मस्क) का बड़ा दावा: 2036 तक Money (पैसा) बेकार हो जाएगा? ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट का जवाब और आपके (Money) पैसे का भविष्य

 

एलन मस्क ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ ने कहा है कि 2036 तक पैसा (मनी) मायने नहीं रखेगा। उनका तर्क साफ है—अगर रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इतनी ज्यादा चीजें पैदा कर देंगे कि कोई भी इंसान उतना उपभोग नहीं कर पाएगा, तो पैसे की जरूरत ही क्या बचेगी?

मस्क ने द इकोनॉमिस्ट के इंटरव्यू में कहा, “आप पैसा खाने, रहने, ट्रांसपोर्ट और मनोरंजन के लिए चाहते हैं। अगर रोबोट और AI इतनी ज्यादा वस्तुएं और सेवाएं दे रहे हैं जितना कोई इंसान इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो फिर पैसे की जरूरत क्या?”

यह दावा सिर्फ मस्क का सपना नहीं है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। फॉक्स न्यूज पर सीन हैनिटी के शो में बेसेंट ने कहा कि मस्क आमतौर पर समय से पहले होते हैं। वे इतने आगे होते हैं कि चीजें दूसरों से पहले देख लेते हैं। बेसेंट ने जोड़ा कि हम ऐसी अद्भुत अर्थव्यवस्था बना रहे हैं जिसकी कल्पना भी आज नहीं कर सकते। उन्होंने उदाहरण दिया कि आज के 25% जॉब्स साल 2000 में मौजूद ही नहीं थे।

क्या वाकई पैसा बेकार हो जाएगा?

मस्क का विजन “पोस्ट-स्कारसिटी” यानी कमी-मुक्त दुनिया का है। AI और ह्यूमनॉइड रोबोट इतनी तेजी से उत्पादन बढ़ा देंगे कि खाना, घर, यात्रा और मनोरंजन लगभग मुफ्त जैसे हो जाएंगे। वे डिफ्लेशन (मूल्य गिरने) की बात भी करते हैं—अगर उत्पादन पैसे की सप्लाई से ज्यादा तेज बढ़े तो महंगाई की जगह कीमतें गिरेंगी।

लेकिन आलोचक कहते हैं कि पूरी तरह कमी खत्म नहीं होगी। ऊर्जा, जमीन, दुर्लभ मिनरल्स और ध्यान (attention) जैसी चीजें सीमित रहेंगी। पैसे का काम सिर्फ सामान बांटना नहीं, बल्कि पावर, स्टेटस और नियंत्रण भी तय करना है। इसलिए कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि पैसा पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन उसका रूप जरूर बदलेगा।

आपके पैसे और निवेश के लिए क्या मतलब?

www.beyourmoneymanager.com के पाठकों के लिए यह चर्चा बहुत महत्वपूर्ण है। अगर AI अर्थव्यवस्था वाकई इतनी तेजी से बदलेगी तो:

पारंपरिक रिटायरमेंट सेविंग्स का महत्व कम हो सकता है।

नई स्किल्स, AI-रिलेटेड जॉब्स और डिजिटल एसेट्स ज्यादा वैल्यूएबल बनेंगे।

बिटकॉइन, स्टॉक और रियल एसेट्स जैसे विकल्पों पर ध्यान बढ़ेगा क्योंकि फिएट मनी की भूमिका बदल सकती है।

यूनिवर्सल हाई इनकम या गवर्नमेंट ट्रांसफर जैसी योजनाओं की चर्चा तेज हो सकती है।

आज के युवा और मिडिल-क्लास निवेशकों को समझना होगा कि सिर्फ सेविंग्स अकाउंट में पैसे जमा करना काफी नहीं। AI, रोबोटिक्स, एनर्जी और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर्स में निवेश, स्किल डेवलपमेंट और डायवर्सिफिकेशन जरूरी हो जाएगा।

सावधानी और तैयारी

मस्क अक्सर बोल्ड प्रेडिक्शन देते हैं और कई बार सही साबित होते हैं, लेकिन टाइमलाइन पर बहस होती रहती है। बेसेंट का समर्थन इस बात को मजबूत करता है कि अमेरिकी प्रशासन भी AI-ड्रिवन अर्थव्यवस्था को गंभीरता से ले रहा है।

आपको अभी क्या करना चाहिए?

अपनी इनकम के कई स्रोत बनाएं।

AI और टेक्नोलॉजी समझना शुरू करें।

लंबी अवधि के निवेश प्लान को रिव्यु करें।

इमरजेंसी फंड और हेल्थ इंश्योरेंस मजबूत रखें।

भविष्य अनिश्चित है, लेकिन एक बात तय है—तकनीक की रफ्तार बहुत तेज है। जो लोग अभी से तैयार रहेंगे, वे इस बदलाव का फायदा उठा पाएंगे। पैसा पूरी तरह बेकार हो या नहीं, स्मार्ट मनी मैनेजमेंट हमेशा काम आएगा।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक चर्चाओं और उपलब्ध जानकारी पर आधारित मूल लेख है। यह वित्तीय सलाह नहीं है। निवेश के फैसले सोच-समझकर और अपने जोखिम के अनुसार लें।)

Rajanish Kant
जेडी वेंस का Dollar Reserve Currency पर बयान: क्या अमेरिका डॉलर की वैश्विक स्थिति खत्म करना चाहता है? बिटकॉइन और भारत के लिए क्या मायने

 
जेडी वेंस का पुराना बयान फिर से चर्चा में है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक क्लिप में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (जब वे सीनेटर थे) रिजर्व करेंसी के रूप में डॉलर की स्थिति पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। वे कहते हैं कि डॉलर की वैश्विक रिजर्व स्टेटस अमेरिकियों को सस्ता उपभोग करने की सुविधा देती है, लेकिन इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को नुकसान पहुंचता है।

यह बयान 2023 का है। वेंस ने तब फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोम पावेल से पूछा था कि क्या रिजर्व करेंसी स्टेटस अमेरिका के लिए सिर्फ फायदेमंद है या इसके नुकसान भी हैं। उन्होंने इसे “रिसोर्स कर्ज” की तरह बताया—जैसे कोयले वाले क्षेत्रों में होता है। सस्ता आयात उपभोक्ताओं के लिए अच्छा है, लेकिन घरेलू उद्योग कमजोर पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी और उत्पादकों के लिए टैक्स जैसा है।

कुछ लोग इस क्लिप को यह कहकर पेश कर रहे हैं कि अमेरिका डॉलर की रिजर्व स्टेटस खत्म करने जा रहा है। वास्तविकता यह है कि यह कोई नई नीति घोषणा नहीं है। यह पुराना आर्थिक विचार है जिसमें वेंस ने मजबूत डॉलर और रिजर्व स्टेटस के नकारात्मक पक्ष पर सवाल उठाए थे। बाद में उन्होंने स्टेबलकॉइन्स के बारे में भी बात की है और डॉलर की मजबूती को कुछ संदर्भों में सपोर्ट किया है।

वैश्विक स्तर पर क्या चल रहा है?

दुनिया भर में सेंट्रल बैंक सोना खरीद रहे हैं। चीन लंबे समय से बड़ा खरीदार रहा है। दक्षिण कोरिया जैसे देश भी सालों बाद सोना खरीदना शुरू कर रहे हैं। जापान की स्थिति भी चर्चा में है। बैंक ऑफ जापान और अमेरिकी ट्रेजरी के बीच कुछ कदमों की बातें चल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाता है कि जापान के ट्रेजरी होल्डिंग्स को लेकर दबाव है।

जेपी मॉर्गन के सीईओ ने पहले कहा था कि अगले 25 सालों में डॉलर की रिजर्व स्थिति कमजोर हो सकती है। कई विशेषज्ञ डॉलराइजेशन कम होने और मल्टी-करेंसी सिस्टम की ओर बढ़ने की बात करते हैं। फिएट मनी की सीमाएं, कर्ज का बढ़ता बोझ और जियो-पॉलिटिकल तनाव इन चर्चाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत और बिटकॉइन के लिए महत्व

भारत जैसे देश के लिए यह चर्चा महत्वपूर्ण है। अगर डॉलर की वैश्विक भूमिका कमजोर होती है तो व्यापार, रिमिटेंस, विदेशी निवेश और मुद्रा भंडार पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी डिजिटल करेंसी (e-Rupee) पर काम कर रहा है और क्रिप्टो रेगुलेशन भी विकसित हो रहा है।

बिटकॉइन को कई लोग “डिजिटल गोल्ड” मानते हैं। जब केंद्रीय बैंक सोना खरीदते हैं और फिएट करेंसी पर सवाल उठते हैं, तो बिटकॉइन जैसे विकेंद्रीकृत एसेट्स की मांग बढ़ सकती है। भारत में युवा निवेशक बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो में दिलचस्पी ले रहे हैं। रिजर्व करेंसी में किसी भी बड़े बदलाव से पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन की जरूरत और बढ़ेगी।

सावधानी जरूरी

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट अक्सर पुराने बयानों को नई घटनाओं से जोड़कर नाटकीय बना देते हैं। जेडी वेंस का 2023 का बयान आर्थिक बहस का हिस्सा है, न कि कोई आधिकारिक घोषणा कि डॉलर की रिजर्व स्टेटस खत्म हो रही है। वित्तीय संकट, गोल्ड खरीद और केंद्रीय बैंकों के कदमों को समझना जरूरी है, लेकिन अफवाहों से बचना भी उतना ही जरूरी है।

भारत में बिटकॉइन और क्रिप्टो निवेश करने वाले लोगों को ग्लोबल मैक्रो ट्रेंड्स पर नजर रखनी चाहिए। डॉलर की स्थिति, गोल्ड की मांग और डिजिटल एसेट्स का भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समझना फायदेमंद है कि विश्व अर्थव्यवस्था किस दिशा में जा रही है।

निष्कर्ष:  

जेडी वेंस के बयान ने फिर से डॉलर की वैश्विक भूमिका पर बहस छेड़ दी है। यह बहस सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत जैसे उभरते अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए यह संकेत है कि पारंपरिक फिएट सिस्टम के अलावा वैकल्पिक एसेट्स (जैसे बिटकॉइन) पर ध्यान देना समझदारी हो सकती है। हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लें और निवेश के फैसले सोच-समझकर करें।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और चर्चाओं पर आधारित मूल लेख है। वित्तीय सलाह नहीं है।)

Rajanish Kant
Retired Senior Citizens (रिटायर्ड सीनियर सिटीजन्स) के 7 Taxable Income (टैक्सेबल इनकम): अनकम्यूटेड पेंशन, FD ब्याज, किराया व अन्य नियम | BeYourMoneyManager

 
रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है, लेकिन कई तरह की आमदनी पर इनकम टैक्स लगना जारी रहता है। सीनियर सिटीजन्स (60 वर्ष या उससे अधिक आयु) को अपनी टैक्स प्लानिंग सही तरीके से करनी चाहिए। यहां हम उन 7 प्रमुख स्रोतों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं जो रिटायरमेंट के बाद भी टैक्सेबल रहते हैं। ये जानकारी Economic Times की रिपोर्ट और आयकर नियमों पर आधारित है।

1. अनकम्यूटेड पेंशन (मासिक पेंशन)

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली नियमित मासिक पेंशन (अनकम्यूटेड पेंशन) आम तौर पर सैलरी इनकम के रूप में टैक्सेबल होती है। चुने गए टैक्स रिजीम (पुराना या नया) के अनुसार स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिल सकता है। कम्यूटेड पेंशन (एकमुश्त राशि) पर कुछ छूट उपलब्ध होती है, लेकिन मासिक पेंशन पूरी तरह करयोग्य रहती है।

2. ब्याज से होने वाली आय (FD, सेविंग्स, SCSS आदि)

सेविंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट और सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम (SCSS) से मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है। पुराने टैक्स रिजीम में सेक्शन 80TTB के तहत सीनियर सिटीजन्स को क्वालीफाइंग ब्याज आय पर अधिकतम ₹50,000 तक की कटौती मिल सकती है। नए टैक्स रिजीम में यह कटौती उपलब्ध नहीं है।

3. किराये से होने वाली आय

किराये पर दी गई रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी से मिलने वाला रेंट रिटायरमेंट के बाद भी टैक्सेबल रहता है। 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन और होम लोन के ब्याज जैसी अन्य पात्र कटौतियों का लाभ लिया जा सकता है। कमर्शियल प्रॉपर्टी का किराया भी लगभग समान नियमों के अधीन होता है।

4. कैपिटल गेन्स

शेयर, म्यूचुअल फंड, अचल संपत्ति या अन्य कैपिटल एसेट्स बेचने पर होने वाला लाभ (कैपिटल गेन) टैक्सेबल होता है। यह एसेट के प्रकार, होल्डिंग पीरियड और लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है। म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन, स्कीम स्विच या प्रॉपर्टी बिक्री जैसी ट्रांजेक्शन को ITR में सही तरीके से रिपोर्ट करना जरूरी है। ये अक्सर AIS (Annual Information Statement) में दिखती हैं।

5. एन्युइटी, इंश्योरेंस पेंशन और डिविडेंड

बीमा कंपनियों से मिलने वाली पेंशन या एन्युइटी आम तौर पर प्राप्ति के वर्ष में टैक्सेबल होती है। शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड भी शेयरधारक के हाथ में करयोग्य रहता है। रिटायरमेंट के बाद भी इन निवेश-संबंधी आमदनियों पर नजर रखें।

6. अक्सर अनदेखी की जाने वाली अन्य आयें

निम्नलिखित स्रोतों पर भी ध्यान दें क्योंकि ये भी टैक्सेबल हो सकते हैं:

कम्युलेटिव FD पर अर्जित ब्याज

इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाला ब्याज

पति/पत्नी या कानूनी वारिस को मिलने वाली फैमिली पेंशन

कंसल्टेंसी या पार्ट-टाइम प्रोफेशनल काम से आय

कुछ निवेश उत्पादों से टैक्सेबल निकासी

म्यूचुअल फंड स्विच या रिडेम्पशन से गेन

एक से अधिक घरों को स्व-अधिकृत मानने पर नोटेशनल रेंटल इनकम (कानूनी सीमा से अधिक होने पर)

7. फॉर्म 15H जमा करने का मतलब आय टैक्स-फ्री नहीं होती

बैंक में फॉर्म 15H जमा करने से FD आदि पर TDS नहीं कटता (शर्तें पूरी होने पर), लेकिन इससे आय टैक्स से मुक्त नहीं हो जाती। फॉर्म 15H तभी जमा किया जा सकता है जब कुल आय पर टैक्स देनदारी शून्य हो। टैक्स देनदारी शून्य होने पर भी ITR फाइल करना पड़ सकता है, खासकर सेक्शन 87A रिबेट क्लेम करने के लिए।

निष्कर्ष और सुझाव  

रिटायरमेंट के बाद टैक्स प्लानिंग बेहद जरूरी है। पुराने और नए टैक्स रिजीम दोनों की तुलना करें, उपलब्ध डिडक्शन का पूरा लाभ लें और समय पर ITR फाइल करें। व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार टैक्स सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से व्यक्तिगत वित्त, टैक्स प्लानिंग और रिटायरमेंट से जुड़े अपडेट पढ़ें। सही ज्ञान से आप अपनी सेवानिवृत्ति को और सुरक्षित बना सकते हैं।

(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। टैक्स नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। आधिकारिक आयकर विभाग की वेबसाइट या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।)

Rajanish Kant सोमवार, 17 अगस्त 2026
सोना-चांदी मार्केट अपडेट: अगले सप्ताह सोने की दिशा तय करेंगे Fed मिनट्स, हाउसिंग और PMI डेटा |

 

अगले सप्ताह सोना और चांदी की कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर निर्भर रहेंगी। मैन्युफैक्चरिंग, हाउसिंग और केंद्रीय बैंक के संकेत कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।

इस सप्ताह सोने की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई। नरम अमेरिकी महंगाई और उपभोक्ता खर्च के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा एक और दर वृद्धि की उम्मीदें कम कर दीं। सोना 5 जून के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को चांदी 64 डॉलर प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रही थी। बाजार अब सितंबर में दर वृद्धि की संभावना को लगभग 31 प्रतिशत आंक रहे हैं, जो एक सप्ताह पहले के करीब 55 प्रतिशत से काफी कम है।

अगले सप्ताह के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े

सप्ताह की शुरुआत सोमवार को न्यूयॉर्क एम्पायर स्टेट मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स से होगी। निवेशक उच्च ब्याज लागत और कमजोर मांग के औद्योगिक अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर इन क्षेत्रीय सर्वेक्षणों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

मंगलवार को हाउसिंग स्टार्ट्स, बिल्डिंग परमिट्स और पेंडिंग होम सेल्स के आंकड़े आएंगे। आवास क्षेत्र ब्याज दरों के प्रति सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। इन रिपोर्टों से पता चलेगा कि सख्त मौद्रिक नीति घरेलू परिवारों और निर्माण क्षेत्र को कैसे प्रभावित कर रही है। लगातार कमजोरी से फेडरल रिजर्व के दरों को यथावत रखने की उम्मीदें मजबूत हो सकती हैं, जबकि सुधार के संकेत अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शा सकते हैं।

सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण घटना बुधवार दोपहर को जारी होने वाले FOMC मिनट्स होंगे। ये मिनट्स जुलाई 28-29 की मौद्रिक नीति बैठक से संबंधित हैं। इनमें महंगाई, आर्थिक वृद्धि और ब्याज दरों के रास्ते पर नीति निर्माताओं के विचारों का विस्तार से जिक्र होगा। नरम महंगाई और खुदरा बिक्री के आंकड़ों के बाद सितंबर में दर वृद्धि की उम्मीदें कम हो गई हैं। अगर मिनट्स में अधिकारियों के दरों को अपरिवर्तित रखने के आरामदायक रुख का संकेत मिलता है तो सोने को समर्थन मिलेगा। वहीं, अधिक सख्त चर्चा यील्ड और डॉलर को ऊपर धकेलकर सोने पर दबाव बना सकती है।

गुरुवार को साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स और फिलाडेल्फिया फेड मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स आएंगे। जॉबलेस क्लेम्स श्रम बाजार की स्थिति का सबसे ताजा मापदंड हैं, जबकि फिली फेड सर्वे मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि और कीमतों के दबाव पर नजर डालेगा।

सप्ताह का समापन शुक्रवार सुबह एसएंडपी ग्लोबल कंपोजिट पीएमआई फ्लैश के साथ होगा, जो अगस्त में निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधि का प्रारंभिक स्नैपशॉट देगा।

सोने के लिए क्या मायने रखता है?

कीमती धातुओं के लिए अगले सप्ताह के आंकड़े मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व की नीति पर उनके प्रभाव के नजरिए से देखे जाएंगे। नरम मैन्युफैक्चरिंग, हाउसिंग और व्यावसायिक गतिविधि के साथ डोविश FOMC मिनट्स दरों के अपरिवर्तित रहने की उम्मीदों को मजबूत कर सकते हैं और सोने को और समर्थन दे सकते हैं। मजबूत आंकड़े या महंगाई के दबाव के नए सबूत दर वृद्धि की उम्मीदों को फिर से जगा सकते हैं और अल्पकाल में सोने के लिए बाधाएं पैदा कर सकते हैं।

अगले सप्ताह ध्यान रखने योग्य आर्थिक कैलेंडर:

सोमवार:** न्यूयॉर्क एम्पायर स्टेट मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स  

मंगलवार:** हाउसिंग स्टार्ट्स और बिल्डिंग परमिट्स, पेंडिंग होम सेल्स  

बुधवार:** FOMC मिनट्स  

गुरुवार:** साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स, फिलाडेल्फिया फेड मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स  

शुक्रवार:** एसएंडपी ग्लोबल कंपोजिट पीएमआई फ्लैश  

निवेशकों को इन आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ये सोना और चांदी की अल्पकालिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बाजार की स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए सावधानी और अपडेटेड जानकारी के साथ फैसले लेना जरूरी है।

स्रोत: किटको न्यूज के आंकड़ों और विश्लेषण।  


Rajanish Kant शनिवार, 15 अगस्त 2026
UBS का Gold Price Outlook: 2027 की पहली छमाही में सोना $5000/औंस तक पहुंच सकता है – निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

यूबीएस का बड़ा अनुमान: 2027 की पहली छमाही में सोना $5,000 प्रति औंस की ओर क्या गिरती वास्तविक ब्याज दरें, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग सोने को नया ऊंचाई दिलाएंगी?

स्विस बैंकिंग दिग्गज यूबीएस (UBS) ने हाल ही में अपने क्लाइंट नोट में कहा है कि सोने की कीमतें 2027 की पहली छमाही में $5,000 प्रति औंस के स्तर को चुनौती दे सकती हैं। बैंक के अनुसार, गिरती वास्तविक ब्याज दरें (real rates), नरम अमेरिकी डॉलर और केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग इस तेजी के मुख्य कारण होंगे।

हालिया कीमत मूवमेंट

2026 के बड़े हिस्से में सोने को उच्च अवसर लागत (opportunity cost) का सामना करना पड़ा। ऊंची वास्तविक ब्याज दरों के कारण निवेशक ब्याज देने वाले एसेट्स की ओर आकर्षित रहे। हालांकि, हाल के हफ्तों में सोना अपने $100 के ट्रेडिंग चैनल से बाहर निकलकर $4,250 के रेसिस्टेंस स्तर को पार कर गया है। चीनी संस्थागत खरीदारी और गोल्ड ईटीएफ में इनफ्लो ने इस मूवमेंट को सहारा दिया है। अमेरिका और जापान के संयुक्त प्रयासों से येन को स्थिर करने की कोशिशों ने भी यूएस ट्रेजरी सेल-ऑफ के जोखिम को कम किया है।

यूबीएस के अनुसार मुख्य ड्राइवर्स

  1. गिरती वास्तविक ब्याज दरें: यूबीएस का मानना है कि मुद्रास्फीति धीरे-धीरे कम होगी। फेडरल रिजर्व इस साल दरों को स्थिर रखेगा और 2027 में आसान नीति (easing) शुरू करेगा। इससे वास्तविक यील्ड्स घटेगी, डॉलर कमजोर होगा और सोने में निवेश मांग बढ़ेगी।
  2. कमजोर अमेरिकी डॉलर: अमेरिकी राजकोषीय और बाहरी घाटे तथा डॉलर एसेट्स में ऊंचे आवंटन के कारण डॉलर में संरचनात्मक कमजोरी की गुंजाइश है। ऐतिहासिक रूप से कमजोर डॉलर सोने के लिए मजबूत टेलविंड साबित हुआ है। पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन की मांग भी सोने को फायदा पहुंचाएगी।
  3. केंद्रीय बैंकों की मांग: केंद्रीय बैंक सोने की कीमतों के लिए मजबूत फ्लोर प्रदान कर रहे हैं। 2026 की दूसरी तिमाही में उन्होंने 289 टन सोना खरीदा। यूबीएस का अनुमान है कि पूरे साल खरीद 750 से 1,000 टन के बीच रह सकती है। यह मांग निजी निवेश मांग कमजोर होने पर भी बाजार को स्थिर रखती है।

निकट-अवधि जोखिम

यूबीएस ने चेतावनी दी है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े मजबूत रहें, तेल की कीमतें मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ाएं या बाजार फेडरल रिजर्व की अधिक हॉकिश नीति की कीमत लगाए, तो सोने पर दबाव आ सकता है। $4,000 या उससे नीचे के स्तर को रणनीतिक खरीदारी का अवसर माना जा सकता है।

निवेशकों के लिए क्या सबक?

यूबीएस सलाह देता है कि निकट-अवधि ट्रेडिंग जोखिम को लंबे समय के निवेश केस से अलग करके देखें। रियल एसेट्स में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छी तरह से डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में सोने का मिड-सिंगल-डिजिट आवंटन उपयुक्त हो सकता है।

www.beyourmoneymanager.com पर हम हमेशा कहते हैं कि सोना सिर्फ कीमत की तेजी-मंदी का खेल नहीं है। यह पोर्टफोलियो हेज, मुद्रास्फीति सुरक्षा और दीर्घकालिक संपत्ति संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता, समय सीमा और वित्तीय लक्ष्य का आकलन करें। जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह निवेश सलाह नहीं है। बाजार जोखिम भरे होते हैं और कीमतें घट-बढ़ सकती हैं।

(लेख यूबीएस के हालिया विश्लेषण और सार्वजनिक रिपोर्ट्स पर आधारित मूल सामग्री है।)

Rajanish Kant शुक्रवार, 14 अगस्त 2026
RBI का नया Fixed और Floating Rate Loan Framework 2027: Home Loan, Personal Loan और MSME लोन में क्या बदलेगा? मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

 
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लोन पर ब्याज दर तय करने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इसका मकसद लोन प्राइसिंग में ज्यादा पारदर्शिता, एकरूपता और उधारकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह प्रस्तावित दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2027 से लागू होने की उम्मीद है।

किन संस्थानों पर लागू होगा?

ये नियम वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) सहित हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर लागू होंगे।

फिक्स्ड रेट लोन में बदलाव

फिक्स्ड रेट लोन पर ब्याज दर आंतरिक या बाहरी बेंचमार्क के साथ रिस्क-बेस्ड स्प्रेड जोड़कर तय की जाएगी। लेंडर किसी भी लोन को संबंधित बेंचमार्क से कम दर पर नहीं दे सकेंगे।

फ्लोटिंग रेट लोन में ज्यादा पारदर्शिता

फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर भी आंतरिक या बाहरी बेंचमार्क + रिस्क-बेस्ड स्प्रेड से तय होगी।

ज्यादातर फ्लोटिंग रेट लोन में बेंचमार्क रीसेट की अवधि अधिकतम 3 महीने होगी। एक बार चुनी गई रीसेट अवधि लोन की पूरी अवधि तक नहीं बदली जा सकेगी।

लोन एग्रीमेंट में बेंचमार्क, रीसेट फ्रीक्वेंसी और रीसेट डेट स्पष्ट रूप से बतानी होगी।

कृषि लोन में रीसेट फसल सीजन से जुड़ा हो सकता है, लेकिन अवधि 12 महीने से ज्यादा नहीं होगी।

पर्सनल लोन और MSME लोन के लिए बड़ा प्रावधान

वाणिज्यिक बैंकों को सभी फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन और MSME को दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन को बाहरी बेंचमार्क से लिंक करना अनिवार्य होगा। अन्य श्रेणियों के उधारकर्ताओं के लिए बैंक अपनी मर्जी से बाहरी बेंचमार्क वाले लोन ऑफर कर सकते हैं।

स्प्रेड बढ़ाने पर नियंत्रण

स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम (CRP), ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिजनेस स्ट्रैटेजी प्रीमियम शामिल हो सकते हैं। CRP सकारात्मक होना चाहिए। उधारकर्ता के क्रेडिट प्रोफाइल में बदलाव होने पर ही CRP बदला जा सकेगा।

मौजूदा लोन का क्या होगा?

सभी मौजूदा लोन (आंतरिक या बाहरी बेंचमार्क से जुड़े) को 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में माइग्रेट करना होगा। यह एक बार का मैपिंग एक्सरसाइज होगा।

बेंचमार्क बदलने के लिए उधारकर्ता की सहमति जरूरी होगी। नई ब्याज दर पुरानी दर से ज्यादा नहीं हो सकती और माइग्रेशन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अगर कोई बेंचमार्क बंद हो जाता है, तो लेंडर को उधारकर्ता को नुकसान न पहुंचाते हुए नया बेंचमार्क अपनाना होगा।

लोन ट्रांसफर की स्थिति

अगर लोन ट्रांसफर होने पर जिम्मेदार लेंडर नहीं बदलता, तो पुरानी ब्याज दर की शर्तें जारी रहेंगी। अगर नया लेंडर आ जाता है और नया एग्रीमेंट होता है, तो नई शर्तें लागू होंगी।

उधारकर्ताओं के लिए फायदे

यह फ्रेमवर्क होम लोन, पर्सनल लोन और MSME लोन लेने वालों के लिए ज्यादा पारदर्शिता लाएगा। बाहरी बेंचमार्क से नीतिगत दरों का असर जल्दी और साफ-साफ दिखाई देगा। रीसेट अवधि सीमित होने से अनिश्चितता कम होगी।

नोट: ये ड्राफ्ट दिशा-निर्देश हैं। अंतिम रूप में कुछ बदलाव हो सकते हैं। आधिकारिक अपडेट के लिए RBI की वेबसाइट चेक करते रहें।

अपने लोन को समझदारी से मैनेज करें और किसी भी बदलाव से पहले अपने बैंक या फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

यह आर्टिकल मूल रूप से लिखा गया है और स्रोत सामग्री पर आधारित है।

Rajanish Kant गुरुवार, 13 अगस्त 2026
गलत खाते में ₹45,000 ट्रांसफर करने पर बैंक ने पैसे वापस नहीं किए, कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक को ₹65,000 चुकाने का आदेश दिया

 

गलत खाते में ₹45,000 ट्रांसफर कर दिया? बैंक की लापरवाही पर मिला ₹65,000 का मुआवजा – जानिए पूरा मामला

अगर आपने कभी गलती से किसी गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए हों और बैंक ने रिकवर करने में देरी या लापरवाही की हो, तो यह फैसला आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग ने एक प्राइवेट बैंक को सर्विस में कमी का दोषी ठहराते हुए कुल ₹65,000 चुकाने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता रुड़की की सिविल लाइंस शाखा का ग्राहक था। 10 जनवरी 2019 को उसने मोबाइल नेट बैंकिंग के जरिए किसी परिचित के खाते में ₹45,000 ट्रांसफर करने की कोशिश की। गलती से पैसे किसी और व्यक्ति के खाते में चले गए।

उन्होंने तुरंत बैंक को सूचित किया। बैंक ने आश्वासन दिया कि 2 से 4 दिनों में राशि रिकवर कर ली जाएगी और जानकारी दी जाएगी। लेकिन बार-बार संपर्क करने के बावजूद पैसे वापस नहीं आए। बैंक सिर्फ आश्वासन देता रहा।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने 19 मार्च 2019 को कानूनी नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई। बैंक ने जवाब नहीं दिया, इसलिए मामला एकतरफा (ex-parte) चलता रहा।

उपभोक्ता आयोग का फैसला

हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच (अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य अमरेश रावत और रंजना गोयल) ने स्पष्ट कहा कि:

शिकायतकर्ता ने तुरंत और पर्याप्त जानकारी के साथ बैंक को सूचित किया था।

बैंक ने रिकवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन राशि कभी रिकवर नहीं की गई।

बार-बार सिर्फ आश्वासन देना और कोई ठोस कार्रवाई न करना सर्विस में कमी (deficiency in service) है।

आयोग ने बैंक को आदेश दिया:

₹45,000 मूल राशि वापस करें

₹10,000 मानसिक पीड़ा के लिए

₹10,000 मुकदमे की लागत के रूप में  

कुल ₹65,000 का भुगतान करना होगा।

इस फैसले से क्या सीख मिलती है?

यह केस साफ दिखाता है कि गलत ट्रांसफर की जानकारी तुरंत देने के बाद भी अगर बैंक उचित कदम नहीं उठाता, तो वह जवाबदेह हो सकता है। बार-बार दिए गए आश्वासन पर्याप्त नहीं होते। बैंक को सबूतों के साथ अपना पक्ष रखना होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें?

तुरंत बैंक को लिखित में (ईमेल + शाखा में आवेदन) सूचित करें।

ट्रांजेक्शन डिटेल्स, स्क्रीनशॉट और समय का रिकॉर्ड रखें।

अगर बैंक सहयोग न करे तो कानूनी नोटिस भेजें।

जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराएं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या अपने राज्य की हेल्पलाइन पर संपर्क करें (उत्तराखंड: 1800-180-4188)।

गलत अकाउंट ट्रांसफर एक आम समस्या है, लेकिन सही समय पर कार्रवाई और दस्तावेजी सबूत होने से आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं। बैंक की लापरवाही पर उपभोक्ता अदालतें अब सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं।

अपने पैसे की सुरक्षा के लिए हमेशा ट्रांजेक्शन दोबारा चेक करें और गलत ट्रांसफर होने पर तुरंत कार्रवाई करें।

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Rajanish Kant
लंच ब्रेक में वर्कप्लेस एक्सीडेंट पर बीमा कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट किया, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया 7.86 लाख मुआवजा + 12% ब्याज का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना भी रोजगार के दौरान मानी जाएगी। कर्मचारी यशपाल को 7.86 लाख रुपये मुआवजा और 12% ब्याज मिला। जानें पूरा मामला और आपके अधिकार

लंच ब्रेक में हुई दुर्घटना भी नौकरी से जुड़ी मानी जाएगी – दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कर्मचारी को मिले 7.86 लाख रुपये मुआवजा

क्या लंच ब्रेक के दौरान कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना को “रोजगार के दौरान” माना जा सकता है? दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब साफ देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए कर्मचारी को ₹7.86 लाख मुआवजा और 12% सालाना ब्याज देने का आदेश बरकरार रखा।

क्या था पूरा मामला?

श्री यशपाल दिल्ली के भलस्वा इलाके में एक निर्माण स्थल पर सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहे थे। 22 जून 2010 को उन्होंने अपना काम पूरा करने के बाद लंच कर रहे थे। तभी मोबाइल क्रेन से उठाया जा रहा लोहे का रॉड अचानक उन पर गिर पड़ा। गंभीर चोटों के कारण डॉक्टरों को उनकी बाईं टांग काटनी पड़ी।

यशपाल ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत मुआवजे का दावा किया। कर्मचारी मुआवजा आयुक्त, दिल्ली ने 28 अप्रैल 2016 को आदेश दिया कि बीमा कंपनी उन्हें ₹7,86,492 रुपये का मुआवजा 12% सालाना ब्याज के साथ 22 जुलाई 2010 से भुगतान करे।

बीमा कंपनी ने क्यों किया विरोध?

बीमा कंपनी (नेशनल इंश्योरेंस) ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी और कई तर्क दिए:

  • यशपाल का क्रेन मालिक के साथ कर्मचारी-नियोक्ता संबंध नहीं था।
  • दुर्घटना लंच ब्रेक के दौरान हुई, इसलिए यह रोजगार से जुड़ी नहीं मानी जा सकती।
  • वे सुपरवाइजर थे, इसलिए अधिनियम की धारा 2(dd) के तहत “कर्मचारी” की परिभाषा में नहीं आते।
  • 75% विकलांगता का दावा सही तरीके से साबित नहीं हुआ।
  • वेतन और ब्याज की गणना गलत है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने 23 जुलाई 2026 को दिए गए फैसले में बीमा कंपनी के सभी तर्क खारिज कर दिए। अदालत ने साफ कहा:

  • “भोजन के लिए अस्थायी ब्रेक अपने आप में रोजगार और दुर्घटना के बीच के संबंध को खत्म नहीं करता।”
  • दुर्घटना कार्यस्थल पर हुई और यशपाल वहां अपने रोजगार के सिलसिले में मौजूद थे। इसलिए यह दुर्घटना “रोजगार से उत्पन्न और उसके दौरान” मानी जाएगी।
  • सिर्फ “सुपरवाइजर” का पदनाम पर्याप्त नहीं है। असली काम की प्रकृति देखनी होगी। यशपाल निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे और प्रबंधकीय/प्रशासनिक कार्य करने का कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया।
  • मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी 75% स्थायी विकलांगता का प्रमाणपत्र सही है और आयुक्त ने सही तरीके से कमाई की क्षमता में नुकसान का आकलन किया।

अदालत ने आयुक्त के आदेश में कोई हस्तक्षेप न करते हुए बीमा कंपनी को पूरा मुआवजा और ब्याज चुकाने का निर्देश दिया।

इस फैसले से क्या सीख मिलती है?

यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए राहत भरा है जो कार्यस्थल पर लंच, टी ब्रेक या छोटी-मोटी रुकने के दौरान दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। अदालत ने दोहराया कि कार्यस्थल पर उपस्थिति और रोजगार से जुड़ाव मुख्य बात है।

नए श्रम संहिताओं में सुरक्षा उपायों पर ज्यादा जोर दिया गया है, लेकिन पुराने अधिनियम के तहत भी कर्मचारी के अधिकार मजबूत हैं।

आपको क्या करना चाहिए?

अगर कार्यस्थल पर कोई दुर्घटना होती है (चाहे लंच ब्रेक में ही क्यों न हो), तो:

  1. तुरंत मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस/कंपनी रिकॉर्ड रखें।
  2. कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के पास दावा दायर करें।
  3. बीमा कंपनी के इनकार पर हार न मानें – उच्च न्यायालय तक जा सकते हैं।

यह केस साबित करता है कि सही सबूत और कानूनी लड़ाई से कर्मचारी अपने अधिकार हासिल कर सकते हैं।

स्रोत: दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला (FAO 493/2016) और संबंधित रिपोर्ट्स।



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Rajanish Kant मंगलवार, 11 अगस्त 2026
Gen Z को वित्तीय रूप से लापरवाह समझते हैं? उनके निवेश की आदतें कुछ और ही कहती हैं | BeYourMoneyManager

 Gen Z को वित्तीय रूप से लापरवाह समझते हैं? उनके निवेश की आदतें कुछ और ही कहती हैं | BeYourMoneyManager

Gen Z को वित्तीय रूप से लापरवाह समझते हैं? उनके निवेश की आदतें कुछ और ही कहती हैं

जनरेशन Z अनुभवों और करियर की लचीलापन के साथ वित्तीय सुरक्षा को संतुलित करने पर जोर देती है। यह पीढ़ी अपने वित्तीय लक्ष्यों के बारे में अधिक जानकार हो रही है और अपनी जरूरतों को व्यक्त करने से नहीं डरती। जल्दी निवेश और विविध वित्तीय अवसरों पर फोकस के साथ, जन Z क्रेडिट उत्पादों के माध्यम से आधुनिक आर्थिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करती है, और नियोक्ताओं से शुरुआत से ही करियर मार्गदर्शन में स्पष्टता चाहती है।

जन Z अपने अनोखे कार्य नैतिकता, वित्तीय साहस और सोशल मीडिया कौशल के कारण चर्चाओं में छाई रहती है, लेकिन हाल ही में शिक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ प्रदर्शनों ने उनके जीवन दृष्टिकोण को सबसे अच्छी तरह सारांशित किया—हम जानते हैं कि हम क्या चाहते हैं, और इसे कहने से नहीं डरते। ये लक्षण उन्हें बड़े-से-बड़े छवि देते दिखते हैं, लेकिन इस जोशीली पीढ़ी को काम और वित्त के प्रति उदासीन रवैये के लिए रूढ़िबद्ध या उपहास का शिकार भी होना पड़ता है। क्या जन Z वास्तव में पारंपरिक वित्तीय मानदंडों से मुक्त होना चाहती है, या सिर्फ अपने अनोखे माहौल के अनुकूल ढल रही है?

“यह मान्यता कि जन Z आसान-स्वभाव वाली है और काम या वित्त को गंभीरता से नहीं लेती, कुछ लोगों के अनुभवों पर आधारित सामान्य कथन है और पूरी पीढ़ी के लिए सच नहीं है। हम जानते हैं कि हम क्या चाहते हैं, कैसे हासिल करना है, और इसके बारे में मुखर हैं,” 29 वर्षीय जूमर मंजीत कुमार कहते हैं, जो वर्तमान में जेपी मॉर्गन चेस में सीनियर एसोसिएट के रूप में काम कर रहे हैं।

अधिकांश विशेषज्ञ सहमत हैं कि यह पीढ़ी पिछली पीढ़ियों से अधिक मुखर, बेहतर सूचित और अलग है—चाहे वित्तीय प्राथमिकताएं और लक्ष्य हों, निवेश आदतें, कार्य संस्कृति या क्रेडिट के प्रति दृष्टिकोण। पारंपरिक मील के पत्थरों के बजाय, वे अनुभवों, करियर लचीलापन, व्यक्तिगत विकास और वित्तीय सुरक्षा को समान महत्व देना चाहते हैं। “जन Z का पैसों के प्रति दृष्टिकोण उस माहौल को दर्शाता है जिसमें वे बड़े हुए हैं। मिलेनियल्स और जन X की तुलना में, उन्हें बहुत कम उम्र से जानकारी, डिजिटल टूल्स, तकनीक और वित्तीय सामग्री तक पहुंच मिली है, जिससे व्यक्तिगत वित्त के बारे में उनकी जागरूकता बढ़ी है,” रामेश विश्वनाथन, सीईओ, फाइनेंशियल प्लानिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड इंडिया कहते हैं।

मंजीत कुमार, 29  

बैंकर, बेंगलुरु  

निवेश: स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड एसआईपी। वैकल्पिक निवेश, पी2पी लेंडिंग, इनवॉइस डिस्काउंटिंग, एग्री स्टार्टअप आजमाए लेकिन नुकसान के बाद बंद कर दिए।  

लोन और क्रेडिट कार्ड: होम लोन और क्रेडिट कार्ड है।  

FIRE: 50 से पहले रिटायर होने के लिए बचत।  

कार्य नैतिकता: काम की जिम्मेदारी लेते हैं; लीडर्स से अपेक्षाओं और खुद की जरूरतों के बारे में मुखर।  

नोट: “चूंकि जन Z वर्कर्स के पास अधिक टूल्स, संसाधन और जानकारी है, वे अपनी इच्छाओं के बारे में अधिक मुखर हैं और जानते हैं कि कैसे हासिल करना है।”

तनुष्का बिशनोई, 25  

चीफ पीपल ऑफिसर, रायसिंगनगर  

निवेश: स्टॉक्स, हर महीने 25,000 रुपये के एमएफ एसआईपी, ईटीएफ।  

FIRE: अपना बिजनेस शुरू करने के लिए वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करना चाहती हैं।  

क्रेडिट कार्ड: एफडी-लिंक्ड कार्ड, 5 लाख रुपये लिमिट।  

कार्य नैतिकता: रिमोट काम करती हैं; लचीला शेड्यूल पसंद; काम पर अपनी जरूरतों के बारे में मुखर।  

नोट: “मैं 20 साल की उम्र से कमा रही हूं, और फुल-टाइम जॉब के साथ शिक्षा पूरी की।”

हनोज भगत, 22  

छात्र, सूरत  

निवेश: 11 साल की उम्र में जेब खर्च से स्टॉक्स खरीदे; वर्तमान मूल्य 1.5 लाख रुपये। दो म्यूचुअल फंड एसआईपी शुरू किए, प्रत्येक 1,000 रुपये।  

लोन: शून्य। जीवनशैली के लिए कभी कर्ज नहीं लिया।  

FIRE: अभी कोई योजना नहीं, लेकिन हासिल करना चाहते हैं।  

कार्य नैतिकता: लचीला, उत्पादक शेड्यूल पसंद, 9-5 जॉब नहीं।  

नोट: “मेरी शिक्षा और करियर का पूरा उद्देश्य इतना कमाना है कि किसी भी चीज को हासिल न कर पाने का कारण फंड की कमी न हो।”

निवेश व्यवहार

वे शायद पहली पीढ़ी हैं जो इतनी जल्दी निवेश शुरू करती है। एनएसई मार्केट पल्स जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, नए निवेशकों की औसत आयु 2019-20 में 29 से घटकर अब 27 हो गई है। सूरत के 22 वर्षीय हनोज भगत के लिए निवेश यात्रा 11 साल की उम्र में शुरू हुई, ठीक उसी उम्र में जब वॉरेन बफेट ने निवेश शुरू किया था। “मैंने जेब खर्च से शेयर खरीदे क्योंकि मैं मां के साथ टीवी पर बिजनेस चैनल देखता था और सोचा कि फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न पाना बेहतर है,” भगत कहते हैं, जिन्होंने हाल ही में म्यूचुअल फंड, सोना और चांदी में भी निवेश शुरू किया है।

तकनीक जन Z को अपेक्षाकृत छोटी राशि से निवेश शुरू करने की अनुमति दे रही है, जिससे वे बहुत जल्दी कंपाउंडिंग का लाभ उठा सकते हैं। “बड़ा बदलाव जानकारी उपभोग करने के तरीके में है। एक सलाहकार या एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय, वे निर्णय लेने से पहले कई प्लेटफॉर्म्स पर दृष्टिकोणों की तुलना करते हैं,” सौरभ जैन, को-फाउंडर और सीईओ, स्टेबल मनी कहते हैं।

एक बड़ा वर्ग सोशल मीडिया से प्रभावित है, लेकिन कई अपनी गलतियों से जल्दी सीखते हैं। “निवेश निर्णयों में से 62.4% सीधे सोशल मीडिया (यूट्यूब, इंस्टाग्राम) और पीयर कम्युनिटीज से प्रभावित होते हैं। ऑनलाइन फोरम्स में पीयर वैलिडेशन एम्पलीफायर का काम करता है, जिससे उच्च जोखिम सहनशीलता और थीमैटिक स्टॉक चेसिंग बढ़ती है,” अशोक कुमार ई आर, चीफ क्लाइंट ऑफिसर, स्क्रिपबॉक्स कहते हैं।

वे निवेश के रास्ते आजमाने या जोखिम लेने से भी नहीं डरते। “म्यूचुअल फंड में कई इंडेक्स फंड, ईटीएफ, स्मॉल-कैप और थीमैटिक फंड से शुरू करते हैं, लेकिन कुछ क्रिप्टोकरेंसी, एफएंडओ ट्रेडिंग और अन्य उच्च-जोखिम वाले रास्तों का भी पता लगाते हैं। बड़ी वजह यह है कि शुरू करने की बाधाएं लगभग न के बराबर हैं,” संतोष जोसेफ, सीईओ, जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज कहते हैं।

हालांकि, सभी अत्यधिक जोखिम नहीं ले रहे। “मैंने वैकल्पिक निवेश, इनवॉइस डिस्काउंटिंग और स्टार्टअप्स आजमाए, लेकिन नुकसान झेलने के बाद स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड पर ही टिके रहने का फैसला किया,” मंजीत कहते हैं।

वित्तीय स्वतंत्रता

कई जूमर्स के लिए वित्तीय स्वतंत्रता जरूरी लक्ष्य है, लेकिन इसका मतलब हमेशा रिटायरमेंट नहीं होता। “मैं अपने 40 के दशक तक इतना कमाना चाहती हूं कि अपनी पसंद जैसे अपना रेस्तरां खोल सकूं,” 25 वर्षीय तनुष्का बिशनोई कहती हैं, जो फ्रांटिगर बिजनेस कंसल्टिंग में चीफ पीपल ऑफिसर हैं।

“वित्तीय स्वतंत्रता अब वित्तीय और जीवन दोनों संदर्भों में मापी जाती है। जीवन की गुणवत्ता, समुदाय और जीवनशैली जरूरतों को समान वजन दिया जाता है। यह इस पीढ़ी के निर्णय लेने में बड़ा बदलाव है। लचीलापन और सुविधा को अब नजरअंदाज नहीं किया जाता, बल्कि संपत्ति निर्माण के साथ उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है,” जोसेफ कहते हैं।

इसे कोस्ट या सॉफ्ट लाइफ FIRE (फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली) कहा जाता है। “जन Z ‘कोस्ट FIRE’ और वर्क-लाइफ इंटीग्रेशन अपना रही है। वे 20 और 30 के दशक में निवेश आधार जमा करने को प्राथमिकता देते हैं ताकि फ्रीलांस काम, पसंद के प्रोजेक्ट्स और सैबेटिकल्स ले सकें, न कि रिटायरमेंट तक मनोरंजन को टालें,” स्क्रिपबॉक्स के कुमार कहते हैं।

मंजीत के लिए यह लगभग आवश्यकता है। “रोजगार योग्य आयु 50 के दशक तक आ रही है। इसलिए मैं 45-50 तक वित्तीय रूप से स्वतंत्र होना चाहता हूं,” वे कहते हैं। भगत के लिए यह सिर्फ इतना कमाने की बात है कि जीवन के किसी भी पहलू में फंड की कमी का असर न पड़े। “पैसे कमाने के मामले में मेरे लिए आसमान ही सीमा है और यही मेरी शिक्षा और करियर का पूरा उद्देश्य है,” कहते हैं यह युवा जो सीएफए लेवल 2 कर रहे हैं।

कर्ज और लोन

जन Z निस्संदेह क्रेडिट-हैप्पी है, संपत्ति बनाने और आरामदायक जीवनशैली के लिए उधार लेती है, लेकिन इसे कर्ज की ओर लुभाना आसान रहा है। “इस पीढ़ी के पास क्रेडिट तक अभूतपूर्व पहुंच है। डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, बाय नाउ पे लेटर प्रोडक्ट्स और इंस्टेंट कंज्यूमर लोन्स ने उधार लेना मिलेनियल्स या जन X की समान उम्र की तुलना में तेज और आसान बना दिया है। नतीजतन, कई युवा वयस्क अपने वित्तीय जीवन में बहुत पहले क्रेडिट प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं,” विश्वनाथन कहते हैं।

हालिया ट्रांसयूनियन सिबिल रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में नए-टू-क्रेडिट-कार्ड उपभोक्ताओं में 50% 30 वर्ष से कम उम्र के थे, जबकि मार्च 2022 में 43% थे। 31% जन Z के पास पहले से दो या अधिक सक्रिय क्रेडिट प्रोडक्ट्स हैं, 23% के पास आउटस्टैंडिंग स्मॉल-टिकट पर्सनल लोन्स और 18% के पास पहली कार्ड जारी होने के समय कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन्स थे।

हालांकि, इस प्रवृत्ति को आज की आर्थिक वास्तविकताओं के संदर्भ में देखना चाहिए, विश्वनाथन कहते हैं। उच्च आवास लागत, मुद्रास्फीति दबाव और बढ़ते जीवनशैली खर्च का मतलब है कि युवा कमाई करने वाले अपने करियर में बहुत पहले वित्तीय मांगों का सामना करते हैं। “कुछ मामलों में, उधार लेना इन दबावों को प्रबंधित करने का उपकरण बन जाता है, न कि वित्तीय गैर-जिम्मेदारी का संकेत,” वे कहते हैं।

चिंता की बात यह है कि जन Z वर्तमान में सुरक्षित लेंडिंग प्रोडक्ट्स की तुलना में असुरक्षित क्रेडिट प्रोडक्ट्स में मजबूत उपस्थिति रखती है। “उनके कुल पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग (पीओएस) में जून 2026 को समाप्त छह महीनों में 9.2% की वृद्धि हुई है, जो औपचारिक क्रेडिट इकोसिस्टम में बढ़ती भागीदारी दर्शाता है,” सचिन सेठ, रीजनल मैनेजिंग डायरेक्टर, सीआरआईएफ इंडिया एंड साउथ एशिया कहते हैं।

हालांकि, डेटा सुरक्षित एसेट-बैक्ड श्रेणियों में भागीदारी भी उजागर करता है, खासकर शिक्षा (66.5%) और टू-व्हीलर फाइनेंसिंग (38.6%)। “सीआरआईएफ के विश्लेषण के आधार पर, जन Z ग्राहक अन्य पीढ़ियों की तुलना में अनुपातहीन रूप से उच्च स्तर का क्रेडिट नहीं ले रहे प्रतीत होते हैं। उपलब्ध डेलिंक्वेंसी ट्रेंड्स भी पिछले छह महीनों में चुकौती व्यवहार में कोई महत्वपूर्ण गिरावट नहीं दर्शाते,” सेठ कहते हैं।

कार्य नैतिकता

यह धारणा कि जन Z अपने करियर को गंभीरता से नहीं लेती, या वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहुत ज्यादा फिक्सेटेड है, पूरी तरह सही नहीं हो सकती। “वे अधिक बार जॉब बदलते हैं, औसत पहली जॉब सिर्फ एक साल से थोड़ी अधिक चलती है। इसका मतलब यह नहीं कि वे कम प्रतिबद्ध हैं। इसका मतलब है कि वे अधिक और तेजी से सीखने के लिए करियर मूव्स कर रहे हैं। असली चुनौती कंपनियों के लिए है कि वे इन बदलती अपेक्षाओं से मेल खाने वाले करियर पाथ बनाएं,” नीती शर्मा, सीईओ, टीमलीज डिजिटल कहती हैं।

“अगर मैं दिन का एक-तिहाई हिस्सा काम पर बिता रहा हूं और उसकी जिम्मेदारी ले रहा हूं, तो मुझे भी अपने लीडर्स से अपने करियर और जरूरतों का ख्याल रखने की अपेक्षा है,” मंजीत कहते हैं। शर्मा सहमत हैं: “वे नियोक्ता से क्या अपेक्षा रखते हैं—वेतन, लचीलापन, सीखने के अवसर या करियर ग्रोथ—इस बारे में अधिक स्पष्ट और खुले हैं। पिछली पीढ़ियां भी कई समान चीजें चाहती थीं, लेकिन वे खुलेआम कहने की संभावना कम रखती थीं।”

“मैं जो चाहता हूं उसके बारे में बहुत मुखर हूं, चाहे सैलरी नेगोशिएशन हो या करियर ग्रोथ, क्योंकि मुझे पता है कि मैं टेबल पर क्या लाता हूं और उसकी कीमत क्या है। इसलिए मैं उसके अनुरूप मुआवजा मांगूंगा,” बिशनोई कहती हैं, जो 20 साल की उम्र से काम कर रही हैं। ग्लासडोर और अन्य सैलरी वेबसाइट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ, मुआवजा पहले से कहीं अधिक पारदर्शी है। “वे जरूरी नहीं कि ऊंची सैलरी मांग रहे हों, लेकिन जानते हैं कि बाजार क्या ऑफर कर रहा है और उसके आधार पर नेगोशिएट करते हैं,” शर्मा कहती हैं।

वे लचीलापन को विशेष लाभ नहीं, बल्कि अच्छी जॉब का हिस्सा मानते हैं। शर्मा के अनुसार, लगभग आधी जन Z नियोक्ता चुनते समय लचीलापन को टॉप फैक्टर मानती है, जो सैलरी के बाद दूसरे स्थान पर है। पिछली पीढ़ियां भी वर्क-लाइफ बैलेंस को महत्व देती थीं, लेकिन वे इसे समय के साथ अर्जित करने की अपेक्षा रखती थीं। जन Z इसे पहले दिन से ही अपेक्षा करती है।

(स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स)



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Rajanish Kant सोमवार, 10 अगस्त 2026