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EPFO WhatsApp Channel लॉन्च: PF सदस्यों के लिए बड़ी राहत: PF अपडेट्स, बैलेंस और क्लेम स्टेटस कैसे पाएं? जॉइन करने का आसान तरीका l BeYourMoneyManager

EPFO ने लॉन्च किया आधिकारिक WhatsApp Channel – www.beyourmoneymanager.com

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों और पेंशनधारकों के लिए एक आधिकारिक WhatsApp Channel लॉन्च किया है। अब आप PF से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट्स, योजनाओं की जानकारी और उपयोगी शैक्षिक सामग्री सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त कर सकते हैं।

यह सुविधा उन लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद है जो नियमित रूप से EPFO की वेबसाइट या ऐप चेक नहीं कर पाते।

EPFO WhatsApp Channel से क्या-क्या जानकारी मिलेगी?

EPFO की आधिकारिक घोषणाएं और महत्वपूर्ण अपडेट्स  

EPF Advance निकासी से जुड़ी जानकारी  

नौकरी दोबारा जॉइन करने पर योगदान (contribution) संबंधी गाइडेंस  

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से जुड़े अपडेट्स  

अन्य उपयोगी वीडियो और शैक्षिक लिंक  

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भविष्य में या अतिरिक्त WhatsApp सेवा के जरिए सदस्य अपना PF बैलेंस, पिछले पांच ट्रांजेक्शन और क्लेम स्टेटस भी चेक कर सकेंगे।

EPFO आधिकारिक WhatsApp Channel कैसे जॉइन करें?

नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक पर क्लिक करें:  

  https://www.whatsapp.com/channel/0029Vb6kmH48Pgs8ftd6Kw3Y

WhatsApp ऐप खुलने पर Follow या जॉइन बटन पर टैप करें।  

वैकल्पिक रूप से EPFO के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए QR कोड को स्कैन करके भी चैनल जॉइन कर सकते हैं।

नोट: हमेशा केवल EPFO के आधिकारिक लिंक या QR कोड का ही इस्तेमाल करें। किसी अनजान नंबर या लिंक से नहीं जुड़ें।

क्यों जरूरी है इस Channel को फॉलो करना?

EPFO समय-समय पर नए नियम, स्कीम और सेवाओं की घोषणा करता रहता है। WhatsApp Channel के माध्यम से ये जानकारी समय पर और आसानी से मिल जाती है। साथ ही शैक्षिक वीडियो से आप अपनी PF अकाउंट से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर समझ सकते हैं।

अतिरिक्त टिप्स

अपना UAN और KYC हमेशा अपडेट रखें।  

PF बैलेंस और पासबुक नियमित रूप से UMANG ऐप या EPFO की आधिकारिक वेबसाइट (epfindia.gov.in) से भी चेक करते रहें।  

किसी भी व्यक्तिगत जानकारी या OTP किसी के साथ शेयर न करें।

EPFO का यह कदम डिजिटल सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। जल्दी से आधिकारिक WhatsApp Channel जॉइन करें और PF से जुड़े अपडेट्स का लाभ उठाएं।


अधिक व्यक्तिगत वित्त संबंधी टिप्स और अपडेट्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करते रहें।

Rajanish Kant मंगलवार, 15 सितंबर 2026
UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं लगेगा: वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित किया संशोधन l BeYourMoneyManager टीम का सुझाव

 

भारत में डिजिटल पेमेंट को और आसान और सस्ता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है। इसके अनुसार, बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर्स UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई भी सीधा या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते।

मुख्य बातें:

UPI ट्रांजेक्शन** पर ₹2,000 तक का कोई चार्ज नहीं लगेगा।

यह प्रावधान RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट पर भी लागू होगा।

बैंक या कोई भी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर न तो सीधे और न ही किसी अन्य तरीके से शुल्क वसूल सकेंगे।

यह फैसला आम लोगों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के डिजिटल लेन-देन करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए राहत भरा है। इससे UPI का इस्तेमाल और बढ़ेगा तथा डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूती मिलेगी।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

छोटे लेन-देन (जैसे किराना, ऑटो, कैब, रेस्टोरेंट बिल आदि) पूरी तरह फ्री रहेंगे।

व्यापारी भी बिना चिंता के UPI पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे।

डिजिटल भुगतान और अधिक सुरक्षित और किफायती बनेगा।

BeYourMoneyManager टीम का सुझाव:  

UPI का इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित रहें। अपना UPI पिन किसी के साथ शेयर न करें और संदिग्ध लिंक या कॉल से बचें। पैसे की बचत और सही मैनेजमेंट के लिए नियमित रूप से अपने खर्चों को ट्रैक करते रहें।

स्रोत: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना


Rajanish Kant
RBI ने संदिग्ध मनी म्यूल ट्रांजेक्शन पर 60 दिन का अस्थायी डेबिट होल्ड प्रस्तावित किया: KYC दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें जानेंl मनी Money Mule Account क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने नो योर कस्टमर (KYC) दिशा-निर्देशों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें संदिग्ध मनी म्यूल खातों और साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने का प्रावधान शामिल है। बैंक ऐसे संदिग्ध लेनदेन या खातों पर अधिकतम 60 दिनों तक अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकेंगे।

यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के आदेश के बाद आया है, जिसमें RBI से ऐसी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने को कहा गया था। प्रस्तावित नियम अप्रैल 1, 2027 से लागू होने की उम्मीद है, हालांकि बैंक इसे पहले भी अपना सकते हैं।

मनी म्यूल खाता क्या है?

RBI के मसौदे के अनुसार, मनी म्यूल खाता वह खाता है जिसका इस्तेमाल जानबूझकर या अनजाने में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने, लेयर करने या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

कब लगेगा अस्थायी डेबिट होल्ड?

बैंक के ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम (AI/ML टूल्स सहित) द्वारा ₹1,000 और उससे अधिक का संदिग्ध लेनदेन चिह्नित होने पर बैंक तुरंत अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकता है। यदि पूरा खाता संदिग्ध मनी म्यूल खाता पाया जाता है, तो पूरे खाते पर होल्ड लगाया जा सकता है। खाता स्तर का होल्ड केवल असाधारण परिस्थितियों में अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

बैंक खाताधारक को होल्ड की सूचना देगा, जिसमें कारण, हटाने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारी का संपर्क विवरण शामिल होगा। सूचना डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी, अगर मोबाइल नंबर या ईमेल उपलब्ध हो।

ग्राहक को कितना समय मिलेगा?

खाताधारक को होल्ड की तारीख से 20 दिन का समय मिलेगा अपना स्पष्टीकरण या औचित्य पेश करने के लिए।

स्पष्टीकरण मिलने के बाद बैंक 10 दिन में निर्णय लेगा।

कोई स्पष्टीकरण न मिलने पर बैंक होल्ड की तारीख से 30 दिन में निर्णय करेगा।

कानून प्रवर्तन एजेंसी (LEA) को रेफरेंस के बाद उनके जवाब के लिए 30 दिन का समय होगा।

LEA या सक्षम प्राधिकरण से कोई विपरीत निर्देश न मिलने पर अधिकतम होल्ड अवधि 60 दिन होगी।

यदि बैंक स्पष्टीकरण से संतुष्ट होता है, तो होल्ड तुरंत हटा दिया जाएगा और खाताधारक को सूचित किया जाएगा।

किन बैंकों पर लागू होगा?

यह SOP वाणिज्यिक बैंकों, पेमेंट बैंकों, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, लोकल एरिया बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों पर लागू होगा।

RBI का यह प्रस्ताव ग्राहकों को स्पष्ट समयसीमा देने और बैंकों को साइबर धोखाधड़ी से निपटने में एकसमान प्रक्रिया अपनाने के लिए लाया गया है। इससे असली ग्राहकों को अनावश्यक लंबे समय तक खाता फ्रीज होने से राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि धोखाधड़ी रोकने के प्रयास मजबूत होंगे।

सार्वजनिक टिप्पणियां 2 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। अधिक जानकारी के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

Rajanish Kant सोमवार, 14 सितंबर 2026
OneTag FASTag: अब बिना नया स्टिकर लगाए बैंक बदलें | पूरी प्रक्रिया और फायदे

FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत! अब आप अपना FASTag जारी करने वाला बैंक आसानी से बदल सकते हैं, बिना गाड़ी के विंडशील्ड से पुराना स्टिकर हटाए या नया टैग लगवाए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 11 सितंबर 2026 को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में ‘OneTag’ सुविधा लॉन्च की है।

OneTag क्या है?

OneTag एक FASTag पोर्टेबिलिटी सॉल्यूशन है। इसे भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL, NHAI द्वारा प्रमोटेड) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मिलकर विकसित किया है। इससे यूजर मौजूदा NETC FASTag को रखते हुए सिर्फ जारीकर्ता बैंक (Issuer Bank) बदल सकते हैं। Tag ID और वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) पहले जैसे ही रहेंगे।

पहले बैंक बदलने के लिए पुराना FASTag बंद करना, नया ऑनबोर्डिंग करना और नया फिजिकल टैग लगवाना पड़ता था। OneTag ने इस झंझट को खत्म कर दिया है।

OneTag के मुख्य फायदे

गाड़ी पर लगा स्टिकर वही रहेगा – नया खरीदने या चिपकाने की जरूरत नहीं।

समय और पैसा दोनों बचेंगे।

बेहतर सर्विस, कम शुल्क या अच्छी सुविधाओं वाले बैंक को चुनने की आजादी।

टोल प्लाजा पर कोई असर नहीं – सब कुछ बैकएंड में NPCI सिस्टम संभालेगा।

पुराने बैंक का वॉलेट/रिफंड/पेंडिंग ट्रांजेक्शन उसी बैंक की जिम्मेदारी रहेगी। नया बैंक सिर्फ आगे की सर्विस देगा।

कैसे इस्तेमाल करें OneTag? (चरणबद्ध प्रक्रिया)

OneTag सुविधा फिलहाल NHAI के Rajmargyatra मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध है।

Rajmargyatra ऐप डाउनलोड/अपडेट करें और लॉगिन करें।  

FASTag पोर्टेबिलिटी या OneTag सेक्शन में जाएं।  

एलिजिबिलिटी चेक और सिक्योर वेरिफिकेशन पूरा करें।  

अपनी सहमति दें और नया पसंदीदा बैंक चुनें।  

नया बैंक ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करेगा।  

पोर्टेबिलिटी सफल होने के बाद मौजूदा टैग उसी तरह काम करता रहेगा।

महत्वपूर्ण बातें याद रखें

पुराना वॉलेट बैलेंस अपने-आप नए बैंक में ट्रांसफर नहीं होता। रिफंड या क्लियरेंस पुराने बैंक से ही लें।  

सुनिश्चित करें कि आपका मौजूदा FASTag लो बैलेंस या हॉटलिस्टेड स्टेटस में न हो।  

कई प्रमुख बैंक इस सुविधा में शामिल हो रहे हैं।

यह कदम FASTag यूजर्स को ज्यादा विकल्प और आसानी देता है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह अब FASTag भी पोर्टेबल हो गया है।

BeYourMoneyManager.com पर हम हमेशा ऐसी स्मार्ट फाइनेंशियल सुविधाओं की जानकारी लाते रहते हैं जो आपके समय, पैसे और मेहनत की बचत करें। FASTag रिचार्ज, टोल खर्च मैनेजमेंट या वाहन से जुड़े खर्चों पर नियंत्रण रखने के और टिप्स के लिए हमारी साइट को नियमित रूप से चेक करते रहें।

(नोट: आधिकारिक अपडेट के लिए NHAI/Rajmargyatra ऐप या संबंधित बैंक की वेबसाइट चेक करें। प्रक्रिया में बदलाव संभव है।)




Rajanish Kant शनिवार, 12 सितंबर 2026
NSE IPO 2026: प्राइस बैंड ₹1,700-1,785, 17 सितंबर से सब्सक्रिप्शन शुरू – पूरी डिटेल | BeYourMoneyManager

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ अब आखिरकार लॉन्च होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय कर दिया है।  

यह ऑफर 17 सितंबर 2026 को सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए बिडिंग 16 सितंबर को होगी।  

आईपीओ साइज और वैल्यूएशन  

यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें मौजूदा शेयरधारक लगभग 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे। ऊपरी प्राइस बैंड पर इश्यू साइज करीब ₹22,561-22,569 करोड़ रहने का अनुमान है। इससे NSE की मार्केट कैप लगभग ₹4.42 लाख करोड़ हो जाएगी। यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक बनने जा रहा है।  

नोट: कंपनी को इस आईपीओ से कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी क्योंकि यह फ्रेश इश्यू नहीं है।  

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण जानकारी  

लॉट साइज**: 8 शेयर  

मिनिमम इन्वेस्टमेंट** (ऊपरी बैंड पर): ₹14,280  

रिटेल कैटेगरी के लिए 35% शेयर आरक्षित  

क्यूआईबी के लिए 50% और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए 15% आरक्षित  

पात्र कर्मचारियों को ₹170 प्रति शेयर का डिस्काउंट मिलेगा  

प्रमुख तारीखें  

| घटना                  | तारीख              |

|-----------------------|--------------------|

| एंकर बिडिंग           | 16 सितंबर 2026    |

| सब्सक्रिप्शन शुरू     | 17 सितंबर 2026    |

| सब्सक्रिप्शन बंद      | 21 सितंबर 2026    |

| अलॉटमेंट              | 22 सितंबर 2026 (अपेक्षित) |

| शेयर क्रेडिट/रिफंड    | 23 सितंबर 2026    |

| लिस्टिंग (BSE पर)     | 24 सितंबर 2026 (अपेक्षित) |

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?  

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और डेरिवेटिव्स मार्केट में इसकी मजबूत पकड़ है। रिटेल ट्रेडिंग में बढ़ोतरी से कंपनी को काफी फायदा हुआ है। हालांकि, आईपीओ साइज को पहले के अनुमान से कम किया गया है और प्राइस बैंड भी कुछ शुरुआती उम्मीदों से कम है।  

निवेश करने से पहले रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जरूर पढ़ें, अपनी रिस्क क्षमता का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।  

BeYourMoneyManager पर हम आपको NSE IPO सहित अन्य महत्वपूर्ण बाजार अपडेट्स और स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स देते रहेंगे। अपडेट्स के लिए साइट को बुकमार्क करें और हमारे साथ जुड़े रहें!  

(स्रोत: आधिकारिक घोषणाएं और विश्वसनीय वित्तीय मीडिया रिपोर्ट्स। जानकारी समय के साथ बदल सकती है।)

Rajanish Kant शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
SEBI Demat 2.0 लॉन्च: टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड्स का पायलट प्रोजेक्ट – FAQs और पूरी डिटेल्स

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने “Demat 2.0” नाम से एक महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। यह प्रोजेक्ट कॉरपोरेट बॉन्ड्स को डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) के जरिए टोकनाइज करने के लिए शुरू किया गया है।

यह पहल RBI गवर्नर संजय मालहोत्रा और SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में संयुक्त रूप से घोषित की। SEBI ने इसके साथ FAQs भी जारी किए हैं।

Demat 2.0 क्या है?

Demat 2.0 अगली पीढ़ी का फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसमें कॉरपोरेट बॉन्ड्स को डिजिटल टोकन के रूप में जारी, होल्ड, ट्रेड और सेटल किया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि बॉन्ड का कानूनी स्वरूप, अधिकार, दायित्व और रेगुलेटरी ट्रीटमेंट बिल्कुल नहीं बदलेगा। सिर्फ टेक्नोलॉजी बदलेगी। बॉन्ड का ISIN, कूपन, मैच्योरिटी और निवेशक अधिकार पहले जैसे ही रहेंगे।

निवेशकों को नया डीमैट अकाउंट चाहिए?

नहीं। Demat 2.0 अकाउंट मौजूदा डीमैट अकाउंट का ही विस्तार है। मौजूदा KYC का इस्तेमाल होगा। निवेशकों को सिर्फ मौजूदा डीमैट से लिंक्ड Demat 2.0 अकाउंट और बैंक का CBDC (e₹) वॉलेट चाहिए।

ट्रेडिंग कैसे होगी?

कोई नया अलग एक्सचेंज नहीं बनेगा। मौजूदा प्लेटफॉर्म पर ही काम चलेगा।

मुख्य फायदे

इश्यू के समय फंड्स उसी दिन मिल सकते हैं (पहले 2-3 दिन लगते थे)।

सेकेंडरी मार्केट में भी तुरंत सेटलमेंट।

ब्याज और रिडेम्प्शन पेमेंट स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए ऑटोमेटिक रूप से e₹ में CBDC वॉलेट में क्रेडिट होंगे।

अब तक कितना इश्यू हो चुका है?

पायलट के पहले फेज में तीन कंपनियों ने कुल ₹1,025 करोड़ के टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किए हैं:

REC: 7 सितंबर 2026 को ₹500 करोड़ (18 निवेशक)

L&T: 9 सितंबर को ₹500 करोड़ (4 निवेशक)

IIFL: 9 सितंबर को ₹25 करोड़ (1 निवेशक)

पायलट तीन चरणों में चलेगा:

संस्थानिक निवेशकों के साथ इश्यू

रिटेल निवेशकों के साथ सेकेंडरी ट्रेडिंग

अन्य इंस्ट्रूमेंट्स तक विस्तार

नोट: अभी रिटेल निवेशक इस पायलट में भाग नहीं ले सकते। बाद के फेज में उन्हें शामिल किया जाएगा।

यह भारत के बॉन्ड मार्केट को तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। निवेश से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर चेक करें।



Rajanish Kant
NSE IPO 2026: RoC में पेपर्स फाइल, प्राइस बैंड 11 सितंबर को, इश्यू 17 से खुलेगा – पूरी डिटेल्स
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, NSE ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास आईपीओ से संबंधित पेपर्स फाइल कर दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, NSE का प्राइस बैंड शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे घोषित होने की संभावना है। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए आईपीओ 16 सितंबर को खुलेगा, जबकि आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन विंडो 17 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगी। लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की उम्मीद है।

यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी NSE को इससे कोई नया फंड नहीं मिलेगा। मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इससे पहले कई शेयरधारकों (जैसे SBI, Morgan Stanley, GIC Re आदि) ने प्रस्तावित शेयरों की संख्या कम कर दी थी। SEBI ने हाल ही में इस इश्यू को मंजूरी दी थी।

NSE का यह आईपीओ भारत के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा चर्चा वाले पब्लिक ऑफरिंग्स में से एक माना जा रहा है। निवेशकों को प्राइस बैंड की घोषणा का इंतजार है। अंतिम डिटेल्स आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेंगी।

नोट: यह जानकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेज (RHP) जरूर पढ़ें और वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

 

Rajanish Kant
SBI ATM नियम बदलाव 2026: सैलरी अकाउंट पर फ्री ट्रांजैक्शन 10 से घटकर 5 | 1 अक्टूबर से लागू

SBI ATM नियम में बड़ा बदलाव: 1 अक्टूबर 2026 से सैलरी अकाउंट होल्डर्स के फ्री ट्रांजैक्शन आधे हो जाएंगे

अगर आपका स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में सैलरी पैकेज अकाउंट है और आप अक्सर दूसरे बैंकों के ATM से पैसे निकालते हैं या बैलेंस चेक करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। SBI ने सैलरी अकाउंट होल्डर्स के लिए दूसरे बैंकों के ATM और ADWM (Automated Deposit cum Withdrawal Machine) पर मुफ्त ट्रांजैक्शन की लिमिट घटा दी है।

नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। अब हर महीने सिर्फ 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन मिलेंगे, जबकि पहले 10 मिलते थे। यानी फ्री विड्रॉल और अन्य सेवाएं आधी हो गई हैं।

क्या बदल रहा है? मुख्य बातें

पहले:** सैलरी पैकेज अकाउंट पर दूसरे बैंक के ATM/ADWM पर महीने में 10 फ्री ट्रांजैक्शन (फाइनेंशियल + नॉन-फाइनेंशियल दोनों)।

अब (1 अक्टूबर 2026 से):* सिर्फ *5 फ्री ट्रांजैक्शन** प्रति माह, सभी सेंटर्स पर।

ये 5 ट्रांजैक्शन में कैश विड्रॉल, बैलेंस इन्क्वायरी, मिनी स्टेटमेंट जैसी सेवाएं शामिल हैं। यानी कोई भी ट्रांजैक्शन गिना जाएगा।

चार्ज में कोई बदलाव नहीं:** लिमिट खत्म होने के बाद पुराने चार्ज ही लगेंगे।

लिमिट खत्म होने के बाद कितना चार्ज लगेगा?

| ट्रांजैक्शन का प्रकार              | फ्री लिमिट के बाद चार्ज          |

|-----------------------------------|-------------------------------|

| कैश विड्रॉल (दूसरे बैंक ATM)     | ₹23 + GST                     |

| नॉन-फाइनेंशियल (बैलेंस चेक आदि) | ₹11 + GST                     |

महत्वपूर्ण: यह बदलाव सिर्फ SBI सैलरी पैकेज अकाउंट पर लागू है। सामान्य सेविंग्स अकाउंट या अन्य अकाउंट्स के लिए फ्री ट्रांजैक्शन और चार्ज पहले जैसे ही रहेंगे।

SBI के अपने ATM पर सैलरी अकाउंट होल्डर्स को अभी भी ज्यादा फ्री ट्रांजैक्शन (आमतौर पर 10) मिलते रहेंगे। कार्डलेस कैश विड्रॉल पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।

आपको क्या करना चाहिए? पैसे बचाने के आसान टिप्स

अपने ATM का ज्यादा इस्तेमाल करें – SBI ATM उपलब्ध होने पर वहीं से पैसे निकालें।

ट्रांजैक्शन गिनती रखें – महीने में 5 से ज्यादा दूसरे बैंक के ATM इस्तेमाल करने से बचें।

डिजिटल विकल्प अपनाएं – UPI, नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग से ज्यादा से ज्यादा लेनदेन करें। डिजिटल ट्रांजैक्शन पर आमतौर पर कोई लिमिट नहीं होती।

बैलेंस पहले से चेक करें – ऐप या SMS से बैलेंस देख लें ताकि ATM पर नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन न करना पड़े।

जरूरत पड़ने पर बड़ी राशि निकालें – छोटे-छोटे कई बार निकालने से लिमिट जल्दी खत्म हो जाती है।

क्यों हो रहा है यह बदलाव?

बैंक समय-समय पर सर्विस चार्ज और लिमिट की समीक्षा करते रहते हैं। SBI ने स्पष्ट किया है कि सैलरी अकाउंट के अलावा बाकी अकाउंट्स पर कोई बदलाव नहीं है। ग्राहकों को समय रहते सूचित कर दिया गया है ताकि वे अपनी आदतें एडजस्ट कर सकें।

निष्कर्ष

1 अक्टूबर 2026 से SBI सैलरी अकाउंट होल्डर्स को दूसरे बैंक के ATM पर सिर्फ 5 फ्री ट्रांजैक्शन मिलेंगे। चार्ज बढ़े नहीं हैं, लेकिन लिमिट जल्दी खत्म होने से अतिरिक्त खर्च हो सकता है। समझदारी से ATM इस्तेमाल करके और डिजिटल बैंकिंग अपनाकर आप आसानी से अतिरिक्त चार्ज से बच सकते हैं।

अपने अकाउंट की डिटेल्स SBI ऐप या ब्रांच से चेक करते रहें। पैसे की सही मैनेजमेंट ही असली स्मार्ट फाइनेंस है।

स्रोत: SBI की आधिकारिक सूचना और विश्वसनीय वित्तीय रिपोर्ट्स पर आधारित।  

वेबसाइट: www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से ऐसे अपडेट पढ़ें और अपने पैसे को बेहतर तरीके से मैनेज करें।

Rajanish Kant गुरुवार, 10 सितंबर 2026
11 सितंबर 2026 को देशव्यापी बैंक हड़ताल: Punjab & Sind Bank की महत्वपूर्ण सलाह | डिजिटल बैंकिंग से बचे परेशानी और आपके पैसे सुरक्षित रखने के उपाय

 

11 सितंबर 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी बैंक यूनियन हड़ताल: पंजाब एंड सिंध बैंक का ग्राहक सलाह और आपके पैसे सुरक्षित रखने के उपाय

पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण ग्राहक सलाह जारी की है। 11 सितंबर 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी बैंक यूनियन हड़ताल के कारण कुछ बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक ने ग्राहकों से अनुरोध किया है कि वे इस दिन नियमित बैंकिंग जरूरतों के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करें ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

हड़ताल का संभावित प्रभाव क्या हो सकता है?
बैंक शाखाओं में सेवाएं सीमित या बंद रह सकती हैं। कैश विड्रॉल, जमा, चेक क्लियरिंग जैसी नियमित गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए बैंक ने ग्राहकों को वैकल्पिक चैनल अपनाने की सलाह दी है।

पंजाब एंड सिंध बैंक के सुझाए गए डिजिटल विकल्प
PSB UNiC** ऐप 
एटीएम (ATM) 
इंटरनेट बैंकिंग 
BC पॉइंट्स (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट) 
अन्य डिजिटल बैंकिंग चैनल 

इन माध्यमों से आप आसानी से बैलेंस चेक, फंड ट्रांसफर, बिल पेमेंट और अन्य जरूरी काम घर बैठे कर सकते हैं।

पैसा मैनेज करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण टिप्स (Be Your Money Manager)
पहले से प्लानिंग करें – हड़ताल से एक दिन पहले जरूरी कैश निकाल लें या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पूरा कर लें। 
डिजिटल बैंकिंग को प्राथमिकता दें – मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग को एक्टिव रखें और पासवर्ड/पिन सुरक्षित रखें। 
जरूरी ट्रांजेक्शन पहले पूरा करें – वेतन जमा, EMI, बिल पेमेंट जैसी चीजें हड़ताल से पहले निपटा लें। 
बैलेंस और स्टेटमेंट चेक करते रहें – डिजिटल ऐप से नियमित रूप से अकाउंट पर नजर रखें। 
फिजिकल शाखा पर निर्भरता कम करें – लंबे समय में डिजिटल बैंकिंग अपनाने से समय और पैसे दोनों बचते हैं।

क्यों जरूरी है डिजिटल बैंकिंग?
आजकल डिजिटल बैंकिंग न सिर्फ सुविधाजनक है बल्कि सुरक्षित और तेज भी है। हड़ताल जैसे अप्रत्याशित हालात में भी आपका काम रुका नहीं रहता। पंजाब एंड सिंध बैंक ने भी #DigitalBanking और #BePSBSmart पर जोर देते हुए ग्राहकों को स्मार्ट बैंकिंग अपनाने की सलाह दी है।

बैंक ने किसी भी असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है और ग्राहकों के सहयोग के लिए धन्यवाद कहा है।

निष्कर्ष: 
11 सितंबर 2026 की संभावित बैंक हड़ताल से बचने का सबसे अच्छा तरीका है डिजिटल चैनलों का भरपूर इस्तेमाल। अपनी वित्तीय जरूरतों को समय से पूरा करें और पैसे का सही प्रबंधन करें। 

अधिक अपडेट और पर्सनल फाइनेंस टिप्स के लिए जुड़े रहें www.beyourmoneymanager.com पर। 


Rajanish Kant
Middle East War (मिडिल ईस्ट युद्ध) से Global Economy वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा! IMF की चेतावनी से भारतीय निवेशकों के लिए 5 जरूरी सबक

 


International Monetary Fund (IMF) ने चेताया कि मिडिल ईस्ट युद्ध से शिपिंग, हवाई यातायात, सप्लाई चेन और वैश्विक विकास पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। जानिए भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों पर इसका क्या प्रभाव होगा।

**International Monetary Fund (IMF)** ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध ने समुद्री और हवाई यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। IMF के मुताबिक, हालात सामान्य होने के बाद भी दुनिया के व्यापार और परिवहन तंत्र के पहले जैसी स्थिति में तुरंत लौटने की संभावना नहीं है।

इसका सीधा असर **कच्चे तेल, महंगाई, सप्लाई चेन, व्यापार, यात्रा और आम लोगों की जेब** पर पड़ सकता है। भारतीय निवेशकों के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

IMF ने क्या चेतावनी दी है?

IMF के अनुसार, मध्य-पूर्व का संघर्ष केवल उस क्षेत्र तक सीमित आर्थिक समस्या नहीं है। समुद्री मार्गों और हवाई यातायात में बाधा आने से पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित होती है।

IMF ने कहा है कि युद्ध खत्म होने और शांति स्थापित होने के बाद भी आर्थिक गतिविधियां तुरंत पहले जैसी नहीं हो सकतीं। परिवहन मार्गों की बहाली में समय लग सकता है और इसका असर आर्थिक विकास पर लंबे समय तक रह सकता है। 

लाल सागर और स्वेज नहर का संकट

इस संकट को समझने के लिए लाल सागर और **बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य** का उदाहरण महत्वपूर्ण है।

2023 में लाल सागर क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने स्वेज नहर के रास्ते के बजाय अफ्रीका के चारों ओर लंबा रास्ता अपनाना शुरू कर दिया।

IMF के अनुसार, दो साल से अधिक समय बाद भी बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर की लगभग आधी है। 

इसका मतलब है कि एक बार व्यापारिक मार्ग बाधित होने के बाद उन्हें पुराने स्तर पर वापस लाना आसान नहीं होता।

 Strait of Hormuz क्यों महत्वपूर्ण है?

**होर्मुज जलडमरूमध्य** दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने पर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहता। परिवहन महंगा होता है, उत्पादन लागत बढ़ती है और कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं।

इससे **महंगाई बढ़ने का जोखिम** पैदा होता है।

IMF ने भी बताया है कि समुद्री और हवाई परिवहन में व्यवधान व्यापार को धीमा करता है और सप्लाई चेन की लागत बढ़ाता है। (

भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर हो सकता है?

भारत के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ऊर्जा और कई महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात पर निर्भर है।

अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत के लिए आयात बिल बढ़ सकता है। इसके अलावा शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने से आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।

इसका असर इन क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है:

* पेट्रोल और डीजल

* एयरलाइन और एविएशन

* लॉजिस्टिक्स और शिपिंग

* केमिकल और पेट्रोकेमिकल कंपनियां

* प्लास्टिक और पैकेजिंग

* ऑटोमोबाइल

* सीमेंट और निर्माण

* खाद्य एवं रोजमर्रा की आयातित वस्तुएं

हालांकि वास्तविक असर युद्ध की अवधि, तेल की कीमत और सप्लाई चेन कितनी जल्दी सामान्य होती है, इस पर निर्भर करेगा।

महंगाई बढ़ी तो ब्याज दरों पर भी असर

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि **तेल और दूसरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी महंगाई को प्रभावित कर सकती है।**

अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना कठिन हो सकता है।

इसका असर:

**महंगाई ↑ → ब्याज दरों में कटौती की संभावना ↓ → बॉन्ड और शेयर बाजार पर दबाव**

हालांकि इसका प्रभाव हर देश और हर परिसंपत्ति वर्ग पर अलग-अलग होगा।

शेयर बाजार के निवेशकों को क्या करना चाहिए?

ऐसे वैश्विक संकट के समय निवेशकों को घबराकर अपने पूरे पोर्टफोलियो में बदलाव करने के बजाय **diversification** पर ध्यान देना चाहिए।

अगर आपका पूरा निवेश एक ही सेक्टर या एक ही प्रकार की संपत्ति में है तो जोखिम बढ़ सकता है।

निवेशक अपने पोर्टफोलियो में अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों और सेक्टरों का संतुलन बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं।

विशेष रूप से लंबी अवधि के निवेशकों को रोजाना की geopolitical headlines देखकर जल्दबाजी में खरीद-बिक्री करने से बचना चाहिए।

सोने पर क्या असर हो सकता है?

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के समय सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। इसलिए युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की मांग मजबूत हो सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमत हमेशा बढ़ती ही रहेगी। डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरें, वास्तविक बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई दूसरे कारक भी सोने की कीमत को प्रभावित करते हैं।

इसलिए केवल युद्ध की खबर देखकर पूरा निवेश सोने में करना उचित रणनीति नहीं मानी जानी चाहिए।

आम निवेशक के लिए IMF की चेतावनी का मतलब क्या है?

IMF की चेतावनी का सबसे बड़ा सबक यह है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से बहुत ज्यादा जुड़ी हुई है।

मध्य-पूर्व में एक संघर्ष:

**युद्ध → शिपिंग बाधित → तेल/फ्रेट लागत बढ़ी → सप्लाई चेन महंगी → महंगाई बढ़ी → ब्याज दरों पर दबाव → निवेश बाजार प्रभावित**

यानी किसी दूसरे देश में होने वाली घटना का असर भारत में भी पेट्रोल, सामान की कीमत, ब्याज दर और शेयर बाजार के जरिए दिखाई दे सकता है।

 निवेशकों के लिए 5 जरूरी सबक

1. Emergency Fund रखें**

कम से कम कुछ महीनों के जरूरी खर्च के बराबर तरल राशि रखना महत्वपूर्ण है।

2. Portfolio Diversification करें

सारा पैसा एक ही शेयर, सेक्टर या asset class में न लगाएं।

3. SIP जारी रखने पर विचार करें

लंबी अवधि के निवेशक बाजार की छोटी अवधि की volatility से घबराने के बजाय अपने financial goals पर ध्यान दें।

4. कर्ज का बोझ नियंत्रित रखें

महंगाई और ब्याज दरों में बदलाव की स्थिति में ज्यादा कर्ज वित्तीय दबाव बढ़ा सकता है।

5. Headlines नहीं, Fundamentals देखें

हर युद्ध या संकट बाजार में गिरावट का कारण बन सकता है, लेकिन निवेश का फैसला हमेशा आपके financial goals, risk profile और investment horizon के आधार पर होना चाहिए।

 निष्कर्ष

IMF की चेतावनी को केवल एक युद्ध संबंधी खबर के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की बदलती वास्तविकता की ओर संकेत करती है।

समुद्री मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और सप्लाई चेन में व्यवधान का असर युद्ध खत्म होने के बाद भी कुछ समय तक रह सकता है। IMF के अनुसार, परिवहन नेटवर्क को अधिक resilient बनाना अब आर्थिक विकास और लोगों की आजीविका की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। 

भारतीय निवेशकों के लिए संदेश साफ है—**भू-राजनीतिक जोखिम को नजरअंदाज न करें, लेकिन डर के कारण निवेश के फैसले भी न लें।

एक मजबूत emergency fund, diversified portfolio, नियंत्रित कर्ज और लंबी अवधि की निवेश रणनीति ऐसे अनिश्चित दौर में सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा कवच बन सकते हैं।

**डिस्क्लेमर:** यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य से है। इसे किसी शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना या अन्य निवेश को खरीदने अथवा बेचने की व्यक्तिगत सलाह न माना जाए।





Rajanish Kant सोमवार, 7 सितंबर 2026