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हॉरमुज जलडमरूमध्य खुला होने की खबर: क्या पेट्रोल-डीजल के दाम गिरेंगे? तेल बाजार और निवेशकों और आपके पैसे पर असर | 2026

हॉरमुज जलडमरूमध्य खुला होने की दावा वाली खबर: तेल कीमतों, पेट्रोल-डीजल और आपके पैसे पर क्या असर पड़ सकता है?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है जिसमें दावा किया गया है कि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज (Strait of Hormuz) पूरी तरह खुला हो गया है। पोस्ट में कहा गया है कि ईरान ने घोषणा की है कि जलडमरूमध्य पूर्ण रूप से खुला है और जहाजों के आवागमन के लिए तैयार है। साथ में यह भी दावा है कि इससे गैस और पेट्रोल के दाम तेजी से गिर सकते हैं।

यह खबर आर्थिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। जब यहां व्यवधान होता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें (Brent और WTI) बढ़ जाती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित कई देशों में पेट्रोल, डीजल और महंगाई पर पड़ता है।

वास्तविक स्थिति क्या है?

हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण हॉरमुज जलडमरूमध्य को लेकर विरोधी बयान आते रहे हैं। कुछ अमेरिकी बयानों में जलडमरूमध्य को खुला बताया गया, जबकि ईरानी अधिकारियों ने हाल ही में कहा है कि उनकी शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य बंद रहेगा। शर्तों में युद्ध समाप्त करना, नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और जमे हुए फंड जारी करना जैसी बातें शामिल बताई गई हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई खबरें पुरानी या अधूरी जानकारी पर आधारित होती हैं। इसलिए निवेशकों और आम लोगों को आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय समाचार एजेंसियों की पुष्टि का इंतजार करना चाहिए।

तेल कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव

अगर वास्तव में हॉरमुज जलडमरूमध्य सामान्य और सुरक्षित तरीके से खुल जाता है तो:

अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की संभावना बन सकती है।

महंगाई (Inflation) पर दबाव कम हो सकता है।

परिवहन, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र की लागत घट सकती है।

शेयर बाजार में ऑटो, एविएशन, पेंट और केमिकल जैसे सेक्टर को फायदा हो सकता है।

वहीं अगर तनाव बना रहता है या जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता बनी रहती है तो तेल कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। इससे:

पेट्रोल-डीजल महंगा रह सकता है।

चालू खाता घाटा बढ़ सकता है।

रुपया दबाव में आ सकता है।

महंगाई नियंत्रण में चुनौती बनी रह सकती है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

तुरंत घबराएं नहीं – सोशल मीडिया की ब्रेकिंग न्यूज पर तुरंत निवेश निर्णय न लें। पुष्टि का इंतजार करें।  

ऊर्जा और संबंधित सेक्टर्स पर नजर रखें – ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, रिफाइनरी, ऑटो और एविएशन शेयरों में उतार-चढ़ाव आ सकता है।  

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन बनाए रखें।  

लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं। अल्पकालिक अफवाहों से बचें। 

खर्चों पर नियंत्रण रखें – अगर ईंधन कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू बजट में ईंधन और परिवहन खर्च का हिसाब रखें।

निष्कर्ष

हॉरमुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के आम आदमी की जेब दोनों को प्रभावित करती है। वायरल पोस्ट में “ट्रंप की जीत” और “गैस कीमतें गिरने” जैसी बातें जोर-शोर से कही गई हैं, लेकिन वास्तविकता जटिल और बदलती हुई है।  

अपने पैसे का प्रबंधन समझदारी से करें। अफवाहों के बजाय तथ्यों पर आधारित निर्णय लें। तेल कीमतों, मुद्रास्फीति और बाजार के मूवमेंट पर नजर बनाए रखें।  

Be Your Money Manager के साथ समझदारी भरे वित्तीय निर्णय लें।  

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(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)

Rajanish Kant मंगलवार, 22 सितंबर 2026
बैंक ऑफ अमेरिका आउटेज 2026: हजारों ग्राहकों के अकाउंट में जीरो बैलेंस दिखना, पहुंच नहीं – कारण, स्थिति और पैसे बचाने के टिप्स | BeYourMoneyManager

 
बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) के हजारों ग्राहकों ने हाल ही में एक चौंकाने वाली समस्या का सामना किया। मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर लॉगिन करने पर कई लोगों के अकाउंट बैलेंस जीरो (₹0 या $0) दिख रहे थे, जबकि कुछ को अकाउंट तक पहुंच ही नहीं मिल रही थी। सोशल मीडिया पर इस घटना की चर्चा जोरों पर रही और कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर किए।

क्या हुआ था?

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मुख्य रूप से एक टेक्निकल ग्लिच या डिस्प्ले एरर था। ग्राहकों के असली पैसे गायब नहीं हुए थे। बैंक ऑफ अमेरिका ने स्पष्ट किया कि कुछ क्लाइंट्स को अकाउंट जानकारी और बैलेंस देखने में अस्थायी समस्या हो रही है। बैंक ने कहा – “Your funds are safe” (आपके फंड सुरक्षित हैं) और समस्या को जल्द हल करने का आश्वासन दिया। Downdetector जैसे प्लेटफॉर्म पर भी आउटेज की शिकायतें बढ़ीं, खासकर मोबाइल बैंकिंग मे

ऐसी घटनाएं पहले भी हुई हैं, जहां सिस्टम अपडेट या बैकएंड इश्यू के कारण बैलेंस गलत दिखता है, लेकिन असली ट्रांजैक्शन या फंड प्रभावित नहीं होते।

ग्राहकों पर क्या असर पड़ा?

अकाउंट बैलेंस जीरो या डैश (—) दिखना  

लॉगिन या ट्रांजैक्शन में दिक्कत  

एटीएम या ऑनलाइन पेमेंट में अस्थायी रुकावट  

सोशल मीडिया पर घबराहट और शिकायतें  

बैंक ने समस्या को काफी हद तक हल कर लिया और माफी मांगी। फिर भी, ऐसी घटनाएं याद दिलाती हैं कि डिजिटल बैंकिंग सुविधाजनक तो है, लेकिन पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

पैसे के मैनेजर के तौर पर आप क्या करें?

www.beyourmoneymanager.com पर हम हमेशा सलाह देते हैं कि फाइनेंशियल प्लानिंग में सुरक्षा और बैकअप जरूरी है। ऐसी आउटेज से बचने और तनाव कम करने के लिए ये टिप्स अपनाएं:

मल्टीपल अकाउंट रखें – सारा पैसा एक ही बैंक में न रखें। दूसरे बैंक या यूपीआई वॉलेट में इमरजेंसी फंड रखें।  

ऑफलाइन बैलेंस चेक करें – ऐप पर समस्या हो तो बैंक की कस्टमर केयर या ब्रांच से बात करें। कई बार फोन बैंकिंग सही बैलेंस बता देती है।  

नोटिफिकेशन और अलर्ट ऑन रखें – किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत जानकारी मिले।  

इमरजेंसी कैश रखें – घर पर थोड़ा नकदी हमेशा रखें, ताकि डिजिटल सिस्टम डाउन होने पर परेशानी न हो।  

नियमित बैकअप और रिकॉर्ड – महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन के स्क्रीनशॉट या स्टेटमेंट सेव करें।  

साइबर सुरक्षा अपनाएं – मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और फिशिंग से बचें। आउटेज के दौरान स्कैमर्स सक्रिय हो सकते हैं।

निष्कर्ष

बैंक ऑफ अमेरिका जैसी बड़ी संस्थाओं में भी तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है। यह घटना हमें सिखाती है कि डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ पारंपरिक सावधानी भी जरूरी है। अपने पैसे का सही प्रबंधन करें, जोखिम बांटें और हमेशा तैयार रहें।

अधिक फाइनेंशियल टिप्स, बचत के तरीके और मनी मैनेजमेंट गाइड के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करें। अपने पैसे का मालिक खुद बनें!

(नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। लेटेस्ट अपडेट के लिए आधिकारिक बैंक ऑफ अमेरिका वेबसाइट या ऐप चेक करें।)

Rajanish Kant
Bitcoin vs Gold! बिटकॉइन बना नया सेफ हेवन एसेट: US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद गोल्ड के मुकाबले 50% उछाल | भारत के निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?I beyourmoneymanager

बिटकॉइन (Bitcoin) अब सिर्फ डिजिटल करेंसी नहीं रह गया है। हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने इसे पारंपरिक सुरक्षित आश्रय (safe-haven) एसेट गोल्ड के मुकाबले एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।  

Ash Crypto के हालिया पोस्ट और BTC/GOLD चार्ट के अनुसार, US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन गोल्ड के मुकाबले लगभग 50% ऊपर चला गया है। चार्ट में साफ दिख रहा है कि युद्ध की शुरुआत के समय BTC/GOLD रेशियो निचले स्तर पर था, जो अब 18.5 के आसपास पहुंच गया है। यह आंकड़ा कई निवेशकों के लिए चौंकाने वाला है।  

युद्ध के दौरान बाजार का रुख  

2026 की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा और सैन्य कार्रवाई शुरू हुई, तो पारंपरिक सोच के अनुसार सोने की कीमतों में तेजी आनी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता अलग निकली। बिटकॉइन ने शुरुआती गिरावट के बाद मजबूती दिखाई, जबकि गोल्ड कई चरणों में दबाव में रहा। परिणामस्वरूप BTC/GOLD रेशियो में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।  

यह घटना बिटकॉइन को “नया सेफ हेवन” कहे जाने का आधार बन रही है। डिजिटल एसेट की सीमित सप्लाई, विकेंद्रीकृत प्रकृति और वैश्विक पहुंच इसे भू-राजनीतिक संकटों में आकर्षक बना रही है।  

भारत के निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?  

भारत में सोना हमेशा से पसंदीदा सुरक्षित निवेश रहा है। लेकिन बिटकॉइन का यह प्रदर्शन भारतीय निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर रहा है।  

विविधीकरण (Diversification):** पोर्टफोलियो में बिटकॉइन शामिल करने से पारंपरिक एसेट्स पर निर्भरता कम हो सकती है।  

लंबी अवधि का नजरिया:** युद्ध जैसे संकटों में बिटकॉइन की रिकवरी क्षमता ने कई बार साबित किया है कि यह सिर्फ स्पेकुलेटिव एसेट नहीं है।  

एक्सेस और लिक्विडिटी:** भारत में क्रिप्टो एक्सचेंज और वॉलेट के माध्यम से बिटकॉइन आसानी से उपलब्ध है, जबकि सोना फिजिकल रखने में लागत और सुरक्षा की चुनौतियां होती हैं।  

हालांकि, बिटकॉइन में उतार-चढ़ाव ज्यादा है। इसलिए कोई भी निवेश जोखिम सहन करने की क्षमता और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार ही करना चाहिए।  

निष्कर्ष  

US-ईरान युद्ध ने एक बार फिर साबित किया कि बाजार पारंपरिक नियमों को तोड़ सकता है। बिटकॉइन गोल्ड के मुकाबले 50% की बढ़त के साथ नए सेफ हेवन के रूप में उभर रहा है।  

भारत के बिटकॉइन प्रेमियों के लिए यह समय सही जानकारी जुटाने और सोच-समझकर फैसला लेने का है। हमेशा अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।  

(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपना रिसर्च जरूर करें। बाजार जोखिम भरा हो सकता है।)

Rajanish Kant सोमवार, 21 सितंबर 2026
भारत में Gold (सोने) की investment (निवेश) मांग ने Jewellery (आभूषणों) को पीछे छोड़ा – 2026 में नया ट्रेंड | निवेशकों के लिए क्या मतलब है?BeYourMoneyManager
   

भारत में पहली बार सोने की निवेश मांग आभूषण मांग से आगे निकल गई। जानें 2026 के नए ट्रेंड और निवेश के बेस्ट विकल्प।

भारत में सोने की खरीदारी का पैटर्न बदल गया: अब निवेश ज्यादा, आभूषण कम

भारत में सोना सिर्फ शादी-ब्याह या त्योहारों का प्रतीक नहीं रहा। World Gold Council के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों ने अब सोने को निवेश के रूप में ज्यादा खरीदना शुरू कर दिया है। पहली बार निवेश मांग (बार, सिक्के और ETF) ने आभूषण मांग को पीछे छोड़ दिया है।

चार्ट क्या बताता है?

Metals Focus और World Gold Council के डेटा (31 मार्च 2026 तक) के अनुसार:

आभूषणों की हिस्सेदारी कुल मांग में गिरकर लगभग 30% के आसपास आ गई है।

निवेश की हिस्सेदारी (बार, कॉइन और ETF) बढ़कर लगभग 70% तक पहुंच गई है।

यह बदलाव 2020 के बाद धीरे-धीरे शुरू हुआ था, लेकिन 2025-26 में यह पूरी तरह साफ दिखने लगा। पहले आभूषण मांग हमेशा 60-75% के बीच रहती थी, अब स्थिति उलट गई है।

क्यों बढ़ रही है निवेश मांग?

महंगाई और अनिश्चितता – महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता के चलते लोग सुरक्षित निवेश ढूंढ रहे हैं।

सोने की कीमतें – पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में अच्छी तेजी आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

ETF और डिजिटल विकल्प – गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और डिजिटल गोल्ड ने खरीदना आसान बना दिया है।

युवा पीढ़ी का रुझान – नई पीढ़ी आभूषणों के बजाय शुद्ध निवेश को प्राथमिकता दे रही है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

यह ट्रेंड दिखाता है कि भारतीय अब सोने को सिर्फ “गहनों” के रूप में नहीं, बल्कि संपत्ति सुरक्षा और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के रूप में देख रहे हैं।  

अगर आप भी सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ये विकल्प ध्यान में रखें:

फिजिकल गोल्ड (बार/सिक्के) – लंबे समय के लिए

गोल्ड ETF – आसान और लिक्विड

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड – ब्याज के साथ सुरक्षा

सावधानी जरूरी

पेपर गोल्ड (ETF आदि) में निवेश करते समय एक्सपेंस रेशन और ट्रैकिंग एरर जरूर चेक करें। फिजिकल गोल्ड खरीदते समय विश्वसनीय डीलर से ही खरीदें।

निष्कर्ष:  

भारत में सोने की मांग अब पारंपरिक से आधुनिक निवेश की ओर शिफ्ट हो रही है। यह बदलाव लंबे समय में सोने के बाजार और निवेशकों दोनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।

अपने पोर्टफोलियो में सोने का सही अनुपात कैसे रखें, इस बारे में और जानने के लिए www.beyourmoneymanager.com पर हमारे अन्य लेख पढ़ें।



Rajanish Kant रविवार, 20 सितंबर 2026
8 साल तक हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरने के बाद क्लेम रिजेक्ट? वायरल पोस्ट ने उठाए बड़े सवाल, जानें पॉलिसीधारक के अधिकार

8 साल से हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरने के बावजूद सर्जरी का क्लेम रिजेक्ट होने का दावा वायरल है। जानें क्लेम रिजेक्शन के कारण, जरूरी दस्तावेज और शिकायत का तरीका।

8 साल से प्रीमियम भरने के बाद भी हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट? वायरल पोस्ट ने खड़े किए गंभीर सवाल

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय सबसे बड़ी उम्मीद यही होती है कि बीमारी या सर्जरी के समय बीमा कंपनी आर्थिक मदद करेगी। लेकिन अगर कई वर्षों तक लगातार प्रीमियम भरने के बाद भी क्लेम रिजेक्ट हो जाए, तो पॉलिसीधारक के लिए स्थिति बेहद परेशान करने वाली हो सकती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर **Rahul Kumar (@MukAn_X)** की एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें **‘रचना गुप्ता’** नाम की एक पॉलिसीधारक के बारे में दावा किया गया है कि वह करीब **8 वर्षों से Niva Bupa का प्रीमियम भर रही थीं**, लेकिन सर्जरी के बाद उनका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम कथित तौर पर रिजेक्ट कर दिया गया।





> **महत्वपूर्ण:** नीचे दिया गया मामला सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे पर आधारित है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती। इसलिए इसे Niva Bupa की सामान्य क्लेम-प्रक्रिया या कंपनी के विरुद्ध स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या है वायरल पोस्ट में दावा?

पोस्ट के अनुसार, रचना गुप्ता ने बताया कि उनकी सर्जरी कथित तौर पर **दो बार टली**, लेकिन बाद में जब सर्जरी हुई तो इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट कर दिया और उन्हें सर्जरी का खर्च खुद उठाना पड़ा।

पोस्ट में दावा किया गया है कि:

* रचना करीब **8 साल से लगातार प्रीमियम** भर रही थीं।
* सर्जरी दो बार टलने की बात कही गई है।
* पहली बार क्लेम रिजेक्ट होने के बाद कथित तौर पर **री-इम्बर्समेंट** के लिए प्रक्रिया शुरू की गई।
* वीडियो वेरिफिकेशन, होम वेरिफिकेशन और मेडिकल टीम वेरिफिकेशन किए जाने का दावा है।
* पोस्ट के अनुसार, पहले जमा किए जा चुके कुछ दस्तावेज दोबारा मांगे गए।
* हर submission के बाद कथित तौर पर **10–15 दिन का समय** मांगा गया।
* बाद में कथित रूप से यह कहा गया कि **पेमेंट का प्रूफ जमा नहीं किया गया**, जबकि पोस्ट के मुताबिक वह पहले ही दिया जा चुका था।
* इसके बाद ईमेल के जरिए दस्तावेज दोबारा भेजने को कहा गया।
* पोस्ट के अनुसार, संबंधित ईमेल ID खुल नहीं रही थी, इसलिए उसी thread में दस्तावेज फिर भेजे गए।
* स्क्रीनशॉट में अंत में दावा किया गया है कि इसके बाद भी कोई acknowledgement या जवाब नहीं मिला।

यह पूरा घटनाक्रम पोस्ट करने वाले व्यक्ति का पक्ष है। **बीमा कंपनी का जवाब इस स्क्रीनशॉट में मौजूद नहीं है।**

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने पर क्या करें?

किसी भी क्लेम के रिजेक्ट होने का मतलब यह नहीं है कि मामला वहीं खत्म हो गया। सबसे पहले पॉलिसीधारक को **लिखित रूप में क्लेम रिजेक्शन का कारण** लेना चाहिए।

IRDAI के अनुसार, यदि कोई हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम deny या repudiate किया जाता है, तो insurer को denial के कारण स्पष्ट रूप से बताने और संबंधित **policy condition** का reference देने की व्यवस्था है। साथ ही grievance redressal की जानकारी भी दी जानी चाहिए।

इसलिए केवल फोन पर मिली जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय policyholder को लिखित communication सुरक्षित रखना चाहिए।

1. Claim rejection letter जरूर लें

कंपनी से पूछें:

क्लेम क्यों रिजेक्ट हुआ?

और विशेष रूप से:

* कौन-सी policy condition लागू हुई?
* कौन-सा document missing बताया जा रहा है?
* क्या कोई waiting period लागू है?
* क्या बीमारी/इलाज policy exclusion में आता है?
* क्या insurer को treatment या medical history से संबंधित कोई आपत्ति है?

2. सभी दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखें

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के समय केवल documents जमा करना पर्याप्त नहीं है। यह भी रिकॉर्ड रखना जरूरी है कि:

**कौन-सा document कब और किस माध्यम से जमा किया गया।**

उदाहरण के लिए:

* Claim number
* Email communication
* Uploaded documents
* Hospital bills
* Discharge summary
* Prescriptions
* Investigation reports
* Payment receipts
* Bank statements
* Claim forms
* Insurer/TPA के acknowledgement
* Call reference numbers

Niva Bupa की online claim-document facility में भी claim processing के लिए discharge summary, OPD prescription तथा hospital bill/payment details जैसे दस्तावेज मांगे जाते हैं। ([Niva Bupa Transactions][2])

3. एक ही दस्तावेज बार-बार मांगा जाए तो क्या करें?

IRDAI के FAQ के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में insurer को आवश्यक claim documents एक साथ मांगने चाहिए और documents को **piece-meal यानी बार-बार अलग-अलग तरीके से मांगने से बचना चाहिए**। हालांकि fraud suspicion जैसे मामलों में अलग परिस्थितियां हो सकती हैं।

इसलिए अगर कोई document पहले ही जमा किया जा चुका है और वही document दोबारा मांगा जा रहा है, तो policyholder को पुराने submission का:

**Date + Email + Attachment + Acknowledgement**

सुरक्षित रखना चाहिए और जवाब में उसका reference देना चाहिए।

4. Claim rejection के बाद शिकायत कहां करें?

सबसे पहले insurer के **Grievance Redressal Officer (GRO)** के पास लिखित शिकायत करें।

Niva Bupa की अपनी grievance-redressal प्रक्रिया में भी insurer से समाधान न मिलने पर **IRDAI के Bima Bharosa portal** के जरिए शिकायत आगे बढ़ाने का विकल्प बताया गया है। ([Niva Bupa Transactions][3])

IRDAI भी policyholders को पहले insurer के grievance mechanism का इस्तेमाल करने की सलाह देता है। यदि समस्या का समाधान नहीं होता है या जवाब नहीं मिलता है, तो शिकायत IRDAI के पास escalate की जा सकती है।

5. Bima Bharosa का इस्तेमाल कैसे करें?

IRDAI का **Bima Bharosa** policyholder grievances के लिए एक integrated platform है। इसके जरिए शिकायत दर्ज करने और उसका status track करने की सुविधा उपलब्ध है।

इसलिए यदि insurer के grievance channel से समाधान नहीं मिलता, तो policyholder इस regulatory grievance mechanism का इस्तेमाल कर सकता है।

6. Insurance Ombudsman भी एक विकल्प है

अगर insurer के साथ शिकायत का समाधान नहीं होता, तो पात्र मामलों में **Insurance Ombudsman** के पास भी शिकायत की जा सकती है।

IRDAI के अनुसार, Ombudsman के समक्ष claim की partial या total repudiation, claim settlement में देरी, premium dispute और policy servicing जैसे मामलों से संबंधित शिकायतें की जा सकती हैं। वर्तमान IRDAI जानकारी के अनुसार, individual policyholder के मामले में claim सहित संबंधित राशि की सीमा **₹30 लाख** तक है और पहले insurer से शिकायत करना आवश्यक है।

सिर्फ 8 साल प्रीमियम भरना क्लेम की गारंटी है?

यह समझना बहुत जरूरी है कि **लंबे समय तक premium भरना अपने आप में हर बीमारी या हर treatment के claim approval की गारंटी नहीं है।**

क्लेम का फैसला policy के:

* Terms & Conditions
* Coverage
* Exclusions
* Waiting Period
* Pre-existing disease provisions
* Medical documents
* Treatment details
* Claim circumstances

आदि के आधार पर किया जाता है।

इसलिए policyholder को केवल यह देखकर संतुष्ट नहीं होना चाहिए कि policy कई साल पुरानी है। उसे यह भी समझना चाहिए कि **उसकी मौजूदा बीमारी और treatment policy में किस तरह covered है।**

हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते समय इन 7 बातों को जरूर जांचें

1. Waiting Period

किस बीमारी या treatment पर कितने समय का waiting period है?

2. Pre-existing Disease

पहले से मौजूद बीमारी के लिए क्या नियम हैं?

3. Exclusions

कौन-कौन से treatment policy में शामिल नहीं हैं?

4. Room Rent Limit

Room-rent की सीमा claim amount को कैसे प्रभावित कर सकती है?

5. Co-payment

क्या hospitalization के खर्च का कुछ हिस्सा आपको खुद देना होगा?

6. Network Hospitals

आपके आसपास कौन-कौन से hospitals cashless network में हैं?

7. Claim Process

Cashless और reimbursement claim की प्रक्रिया क्या है?

Policyholder के लिए सबसे बड़ी सीख

रचना गुप्ता से जुड़ी यह सोशल मीडिया पोस्ट **एक व्यक्तिगत शिकायत/अनुभव का दावा** है। इसका इस्तेमाल किसी एक insurer के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

लेकिन यह मामला एक महत्वपूर्ण बात जरूर याद दिलाता है:

**Health insurance सिर्फ policy खरीदने का नाम नहीं है; policy की शर्तों और claim process को समझना भी उतना ही जरूरी है।**

अगर कभी claim dispute हो जाए तो भावनात्मक बहस के बजाय **documented communication, written rejection reason और formal grievance process** का इस्तेमाल करना ज्यादा उपयोगी होता है।

और सबसे महत्वपूर्ण—**हर email, document submission और acknowledgement को सुरक्षित रखें।**

निष्कर्ष

हेल्थ इंश्योरेंस का उद्देश्य बीमारी के समय परिवार पर पड़ने वाले बड़े आर्थिक बोझ को कम करना है। इसलिए policy खरीदने से पहले केवल premium और sum insured न देखें, बल्कि **coverage, exclusions, waiting periods और claim procedure** को भी समझें।

वायरल पोस्ट में किए गए दावों पर Niva Bupa का पक्ष उपलब्ध स्क्रीनशॉट में नहीं है। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित insurer की प्रतिक्रिया और वास्तविक claim documents को देखना आवश्यक होगा।

BeYourMoneyManager की सलाह:किसी भी health-insurance claim dispute में सभी documents संभालकर रखें, rejection का लिखित और policy-clause आधारित कारण मांगें और जरूरत पड़ने पर insurer → IRDAI Bima Bharosa → Insurance Ombudsman जैसे उपलब्ध grievance channels का इस्तेमाल करें।




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Rajanish Kant
SBI सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए इंश्योरेंस अनिवार्य है क्या? RBI के असली नियम और बैंक की मनमानी l SBI savings account insurance mandatory, RBI rules bank insurance, SBI account opening without insurance

SBI सेविंग्स अकाउंट खोलने गए एक युवक के साथ हुई घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। बैंक ब्रांच में कर्मचारी और मैनेजर ने अकाउंट खोलने के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस लेना अनिवार्य बता दिया। इंश्योरेंस न लेने पर अकाउंट नहीं खोला जाएगा, ऐसा साफ कह दिया गया। मैनेजर ने यहां तक कहा कि इंश्योरेंस के बिना यहां अकाउंट नहीं खुलेगा, कस्टमर सर्विस सेंटर जाओ।

सवाल उठता है – क्या SBI या किसी भी बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए इंश्योरेंस लेना RBI का नियम है? जवाब है नहीं।

RBI और SBI का आधिकारिक रुख

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार कोई भी बैंक ग्राहक को इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या कोई अन्य प्रोडक्ट खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए सिर्फ KYC दस्तावेज (आधार, पैन, फोटो आदि) और बैंक के नियमों का पालन पर्याप्त है।

SBI खुद कई बार आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर चुका है कि:

इंश्योरेंस और अन्य निवेश पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) हैं।

अकाउंट खोलने के लिए कोई भी इंश्योरेंस या निवेश अनिवार्य नहीं है।

ब्रांच सिर्फ जानकारी और जागरूकता के लिए ऑफर बता सकते हैं, जबरदस्ती नहीं कर सकते।

बैंक कर्मचारियों द्वारा “अकाउंट नहीं खुलेगा” कहना नियमों का उल्लंघन है। यह mis-selling और forced bundling की श्रेणी में आता है, जिसे RBI ने सख्ती से प्रतिबंधित किया है।

ऐसी स्थिति में ग्राहक क्या करें?

शांति से मना करें – इंश्योरेंस स्वैच्छिक है, यह साफ कहें।

लिखित में मांगें – अगर वे मना करते हैं तो लिखित में कारण मांगें कि इंश्योरेंस के बिना अकाउंट क्यों नहीं खुल रहा।

शिकायत दर्ज करें –  

   SBI की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर “Raise Complaint” सेक्शन में Account Opening Related >> Refusal To Open New Account चुनकर शिकायत करें।  

   @TheOfficialSBI या @OfficialSBICare पर डिटेल्स भेजें।  

  RBI CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर शिकायत दर्ज करें।

दूसरी ब्रांच या ऑनलाइन विकल्प – SBI YONO ऐप या दूसरी ब्रांच में कोशिश करें। Basic Savings Bank Deposit (BSBD) अकाउंट भी जीरो बैलेंस पर खुल सकता है।

ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत

कई बैंक ब्रांच में टारगेट पूरा करने के दबाव में कर्मचारी इंश्योरेंस, ULIP या अन्य प्रोडक्ट को अनिवार्य बता देते हैं। यह न सिर्फ गलत है बल्कि RBI के नए नियमों के खिलाफ भी है, जिनमें forced bundling पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।

आपका अधिकार है कि आप बिना किसी अतिरिक्त प्रोडक्ट के सिर्फ सेविंग्स अकाउंट खोल सकें। जानकारी होना ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप भी ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं तो शिकायत जरूर करें। बैंक की मनमानी तभी रुकेगी जब ग्राहक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे।

Be Your Money Manager के साथ वित्तीय ज्ञान बढ़ाएं और सही फैसले लें।  


Rajanish Kant शनिवार, 19 सितंबर 2026
AAII सर्वे 2026: निवेशक सेंटिमेंट 16 महीने के निचले स्तर पर गिरा, बेयरिश निवेशक 53.3% पहुंचे | क्या कहता है बाजार का डर? भारतीय निवेशकों के लिए क्या सबक?

हाल ही में जारी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (AAII) के साप्ताहिक सर्वेक्षण ने अमेरिकी खुदरा निवेशकों के मनोभाव में भारी गिरावट का खुलासा किया है। निवेशक सेंटिमेंट पिछले 16 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।  

सर्वे के अनुसार, 53.3% निवेशक बेयरिश (निराशावादी) हैं, जबकि बुलिश (आशावादी) निवेशकों का प्रतिशत घटकर सिर्फ 28.8% रह गया है। यह पिछले एक साल का सबसे कम बुलिश स्तर है। बुल-बेयर स्प्रेड -24.5% पर आ गया है, जो ऐतिहासिक औसत 6.5% से काफी नीचे है और लगातार नौवें सप्ताह से औसत से कम बना हुआ है।  

क्यों गिरा सेंटिमेंट?

मुख्य वजहें बताई जा रही हैं:  

ऊंचे तेल की कीमतें  

फेडरल रिजर्व द्वारा 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाने का फैसला  

बाजार में हालिया अस्थिरता  

सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा निवेशकों ने अपनी कैश होल्डिंग्स सामान्य से ज्यादा रखी हैं। करीब 19.1% ने कहा कि उनका कैश आवंटन “बहुत ज्यादा” है। यह साफ संकेत है कि निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।  

दिलचस्प बात यह है कि S&P 500 अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब (लगभग 2% नीचे) है। ऐसे में यह सेंटिमेंट कई विशेषज्ञों के लिए कॉन्ट्रैरियन इंडिकेटर भी बन सकता है—यानी जब डर चरम पर होता है, तो बाजार अक्सर पलटने की तैयारी करता है।  

भारतीय निवेशकों के लिए क्या सबक?

अमेरिकी बाजार का मूड ग्लोबल सेंटिमेंट को प्रभावित करता है। ऊंचे तेल दाम और अमेरिकी ब्याज दरें भारतीय बाजारों, रुपये और विदेशी निवेश प्रवाह पर भी असर डाल सकती हैं।  

ऐसे समय में BeYourMoneyManager सलाह देता है:  

भावनाओं के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और एसेट एलोकेशन पर फोकस रखें।  

बाजार में डर के समय भी लंबी अवधि के निवेश को बनाए रखें।  

जरूरत से ज्यादा कैश रखने के बजाय व्यवस्थित निवेश (SIP) जारी रखें।  

जोखिम सहन क्षमता के अनुसार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें।  

बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। असली सफलता उन निवेशकों को मिलती है जो शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट से प्रभावित हुए बिना अनुशासन बनाए रखते हैं।  

(स्रोत: AAII सर्वे और बाजार रिपोर्ट्स पर आधारित मूल लेख)  


Rajanish Kant
ICICI बैंक ने वेबसाइट और नेट बैंकिंग डोमेन बदला: क्या यूजर ID और पासवर्ड रीसेट करना होगा? | नई .bank.in एड्रेस l beyourmoneymanager

ICICI बैंक ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार अपनी आधिकारिक वेबसाइट और नेट बैंकिंग एड्रेस को नए .bank.in डोमेन पर शिफ्ट कर दिया है। यह बदलाव ऑनलाइन बैंकिंग को और सुरक्षित बनाने और फिशिंग धोखाधड़ी को रोकने के लिए किया गया है।

नई वेबसाइट और नेट बैंकिंग एड्रेस क्या है?

वेबसाइट:** पुराना एड्रेस www.icicibank.com अब www.icici.bank.in हो गया है।  

नेट बैंकिंग:** retailnetbanking.icicibank.com से बदलकर retailnetbanking.icici.bank.in हो गया है।

ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने ब्राउज़र में सेव किए गए बुकमार्क या शॉर्टकट को अपडेट कर लें, ताकि सीधे आधिकारिक साइट पर पहुंच सकें। पुराने एड्रेस पर जाने पर ऑटो-रिडायरेक्ट भी काम कर सकता है, लेकिन सुरक्षा के लिए नया एड्रेस बुकमार्क करना बेहतर है।

क्या यूजर ID और पासवर्ड बदलना पड़ेगा?

नहीं। डोमेन बदलाव से आपके मौजूदा कस्टमर ID, पासवर्ड या अकाउंट डिटेल्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आप पहले जैसे ही लॉगिन करके नेट बैंकिंग का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। नया रजिस्ट्रेशन या रीसेट करने की जरूरत नहीं है।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए नेट बैंकिंग लॉगिन में नया CAPTCHA फीचर भी जोड़ा गया है।

iMobile ऐप पर मेंटेनेंस

ICICI बैंक ने बताया है कि 19 सितंबर 2026 को कुछ घंटों के लिए iMobile ऐप सर्विस मेंटेनेंस के कारण उपलब्ध नहीं रहेगी। इस दौरान नेट बैंकिंग वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आरबीआई का नियम क्या कहता है?

आरबीआई ने अप्रैल 2025 के सर्कुलर में सभी बैंकों को निर्देश दिया था कि वे 31 अक्टूबर 2025 तक अपनी नेट बैंकिंग वेबसाइट को विशेष .bank.in डोमेन पर शिफ्ट करें। इससे फर्जी वेबसाइट्स से सुरक्षा बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास मजबूत होगा। कई अन्य बैंक जैसे SBI, HDFC, Axis आदि भी इसी डोमेन पर शिफ्ट हो चुके हैं।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

नया एड्रेस www.icici.bank.in बुकमार्क कर लें।  

लॉगिन से पहले हमेशा URL चेक करें।  

फिशिंग मैसेज या संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।  

नेट बैंकिंग में नया CAPTCHA ध्यान से भरें।

यह बदलाव सिर्फ डोमेन का है, आपकी बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह सुचारू रूप से चलती रहेंगी। ज्यादा जानकारी के लिए ICICI बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर से संपर्क करें।

www.beyourmoneymanager.com पर व्यक्तिगत वित्त से जुड़ी और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

Rajanish Kant शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
सोना $10,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है? जेफरीज के क्रिस वुड का बड़ा दावा – भारत के लिए क्या मायने रखता है?

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सोने की कीमत $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना पूरी तरह संभव है। यह टारगेट मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना है।

वर्तमान स्थिति  

17 सितंबर 2026 को सोना करीब $4,348 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इससे पहले जनवरी में यह अपने ऑल-टाइम हाई $5,589 तक पहुंच चुका था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद कीमतों में कुछ दबाव देखा गया।

क्रिस वुड का मुख्य तर्क  

वुड के अनुसार, अमेरिका की राजकोषीय स्थिति बहुत खराब है। भारी घाटे के कारण सरकार ऊंची बॉन्ड यील्ड्स को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण एंटाइटेलमेंट्स में कटौती भी आसान नहीं है।

ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों को बॉन्ड यील्ड्स को नियंत्रित या “फिक्स” करना पड़ सकता है। जब ऐसा होगा, तो डॉलर लंबी अवधि के कमजोर होने के ट्रेंड में प्रवेश कर सकता है। कमजोर डॉलर सोने और इमर्जिंग मार्केट एसेट्स के लिए बहुत सकारात्मक साबित होता है।

वुड ने कहा कि ऐसे माहौल में सोना $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना “feasible” (संभव) है।

भारत के लिए विशेष महत्व  

भारतीय परिवारों के पास सोने का बहुत बड़ा भंडार है। हाल के वर्षों में गोल्ड लेंडिंग मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। अगर सोना $10,000 के स्तर पर पहुंचता है, तो भारतीय घरों की बैलेंस शीट में भारी इजाफा हो सकता है। इससे घरेलू संपत्ति का मुद्रीकरण (monetisation) और मजबूत होगा।

अन्य संभावित कदम  

वुड ने एक और संभावना का जिक्र किया। अमेरिका अपने गोल्ड रिजर्व्स (जो वर्तमान में बहुत कम कीमत पर दर्ज हैं) का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है और उससे प्राप्त राशि से ट्रेजरी डेट वापस खरीद सकता है।

चेतावनी भी है  

वुड ने साफ कहा कि अगर फेडरल रिजर्व वाकई सख्त मौद्रिक नीति अपनाता है, बैलेंस शीट को काफी हद तक सिकोड़ता है और डॉलर मजबूत होता है, तो उनका यह अनुमान गलत साबित हो सकता है। ऐसे में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या सोचें?  

क्रिस वुड का यह व्यू लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पर आधारित है। सोना पारंपरिक रूप से मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और डॉलर कमजोरी के खिलाफ हेज माना जाता है। भारतीय निवेशक सोने को पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के नजरिए से देखते रहे हैं।

हालांकि, कोई भी टारगेट निश्चित नहीं होता। बाजार की स्थिति, अमेरिकी नीतियां और वैश्विक घटनाक्रम कीमतों को प्रभावित करते रहेंगे। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, समय-सीमा और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।

www.beyourmoneymanager.com पर हम नियमित रूप से ऐसे महत्वपूर्ण मार्केट व्यूज और उनके भारत पर प्रभाव को सरल भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।)

जेफरीज के क्रिस वुड का बड़ा दावा – भारत के लिए क्या मायने रखता है?  इस पर और ज्यादा बता रहे हैं SEBI Registered  मार्केट एनालिस्ट अनुज गुप्ता। SEBI Registration No. INH000025656 |  (Disclaimer: ये एक्सपर्ट की राय है, beYourMoneyManager की सलाह इसे मत मानें)



Rajanish Kant गुरुवार, 17 सितंबर 2026
After UPI, Now Gold; BIS Gold Hallmarking Fees ₹45 से ₹75 हुई: त्योहारों से पहले आम आदमी पर कितना असर पड़ेगा?BeYourMoneyManager

BIS गोल्ड हॉलमार्किंग फीस में भारी बढ़ोतरी: अब हर आर्टिकल पर ₹30 ज्यादा चुकाना होगा

त्योहारों का मौसम आने वाला है और सोना खरीदने वाले आम लोगों के लिए एक और खबर आ गई है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में करीब 67% की बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहां प्रति आर्टिकल ₹45 फीस लगती थी, अब वह बढ़कर ₹75 हो गई है। यह नया शुल्क 14 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है।

चांदी की हॉलमार्किंग फीस पहले जैसी ही ₹35 प्रति आर्टिकल बनी हुई है। सोने के लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस ₹200 और चांदी के लिए ₹150 तय की गई है।

क्या बदला है?

सोना**: पुरानी फीस ₹45 → नई फीस ₹75 (प्रति आर्टिकल ₹30 की बढ़ोतरी)

चांदी**: ₹35 प्रति आर्टिकल (कोई बदलाव नहीं)

न्यूनतम शुल्क सोने के लिए ₹200 प्रति खेप और चांदी के लिए ₹150 प्रति खेप

इसका मतलब साफ है कि ज्वैलर को हर एक सोने के गहने पर ₹30 अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। कई मामलों में यह खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंच सकता है, खासकर हल्के वजन वाले गहनों में जहां यह अतिरिक्त लागत ज्यादा महसूस होती है।

आम आदमी पर असर क्या होगा?

त्योहारों के मौसम में सोने की मांग बढ़ जाती है। हॉलमार्किंग अनिवार्य है और यह शुद्धता की गारंटी देती है। लेकिन जब हर आर्टिकल पर अतिरिक्त ₹30 लग जाएंगे, तो छोटे-मोटे गहनों की कीमत में भी थोड़ा इजाफा दिख सकता है।

ज्वैलरी इंडस्ट्री की संस्था ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि हॉलमार्किंग की मात्रा बहुत बढ़ गई है, इसलिए फीस बढ़ाने से पहले उद्योग से सलाह ली जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि फोकस नकली हॉलमार्क और अनधिकृत केंद्रों पर होना चाहिए।

पैसे बचाने के कुछ सुझाव

तुलना जरूर करें – अलग-अलग ज्वैलर्स से रेट पूछें। कुछ ज्वैलर बढ़ी हुई फीस खुद सहन कर सकते हैं।

वजन और डिजाइनिंग चार्ज समझें – हॉलमार्किंग फीस के अलावा मेकिंग चार्ज और GST भी देखें।

HUID चेक करें – BIS Care ऐप से हॉलमार्क की सत्यता जरूर जांचें।

बड़ी खरीदारी प्लान करें – एक साथ कई आर्टिकल खरीदने पर न्यूनतम शुल्क का असर कम पड़ता है।

बजट बनाकर चलें – त्योहारों में आवेग में खरीदने से बचें। पहले तय करें कि कितना खर्च कर सकते हैं।

हॉलमार्किंग ग्राहकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन जब फीस अचानक इतनी बढ़ जाए तो आम आदमी की जेब पर दबाव जरूर पड़ता है। UPI चार्ज की चर्चाओं के बीच अब सोने पर भी अतिरिक्त खर्च आ गया है।

आपकी राय क्या है? क्या आपको लगता है कि यह बढ़ोतरी जायज है या आम आदमी पर बोझ बढ़ा रही है? कमेंट में बताएं।

नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। हमेशा आधिकारिक अधिसूचना और अपने ज्वैलर से नवीनतम जानकारी जांच लें।

(Website: www.beyourmoneymanager.com)

Rajanish Kant