भारतीय रिज़र्व बैंक ने सीएसबी बैंक लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 6 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा सीएसबी बैंक लिमिटेड (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी 'कारोबार प्रतिनिधियों (बीसी) द्वारा की जाने वाली गतिविधियों का दायरा' और 'बैंकों में ग्राहक सेवा' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए ₹63.60 लाख (तिरसठ लाख साठ हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।
आरबीआई ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में उक्त बैंक का पर्यवेक्षी मूल्यांकन हेतु सांविधिक निरीक्षण (आईएसई 2025) किया था। आरबीआई के निदेशों में दिए गए प्रावधानों के अननुपालन संबंधी पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि आरबीआई के निदेशों में दिए गए उक्त प्रावधानों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए।
नोटिस पर बैंक के उत्तर और बैंक की अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:
बैंक द्वारा बीसी के साथ ऐसी गतिविधियां करने की व्यवस्था की गई जो बीसी द्वारा की जाने वाली गतिविधियों के दायरे में नहीं आती हैं; और
बैंक द्वारा कतिपय बचत बैंक खातों में प्रभार लगाए गए और ग्राहकों को ऐसे प्रभारों के बारे में पहले से जानकारी देना सुनिश्चित नहीं किया गया।
यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
(साभार- www.rbi.org.in)
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