बैंक ऑफ अमेरिका के अगस्त 2026 सर्वे में 16% फंड मैनेजर्स ने सोने को undervalued बताया। CFTC डेटा में तीसरे सप्ताह भी गोल्ड पर बुलिश पोजीशन बढ़ी। जानें गोल्ड इन्वेस्टमेंट के मौके और जोखिम।
बैंक ऑफ अमेरिका के नए सर्वे में सोना फिर चर्चा में आ गया है। अगस्त 2026 के ग्लोबल फंड मैनेजर सर्वे के अनुसार सोना मार्च 2023 के बाद सबसे ज्यादा undervalued नजर आ रहा है। सिर्फ 6% से बढ़कर अब 16% फंड मैनेजर्स मानते हैं कि गोल्ड अभी सस्ता है। इसी दौरान स्पेक्युलेटिव इन्वेस्टर्स ने लगातार तीसरे हफ्ते गोल्ड पर अपनी बुलिश बेट बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ रही है गोल्ड में दिलचस्पी?
अमेरिकी सरकार के कर्ज की स्थिरता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने “डिबेसमेंट ट्रेड” को फिर जिंदा कर दिया है। जब डॉलर की वैल्यू पर शक बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं।
CFTC की Commitments of Traders रिपोर्ट (सप्ताह समाप्त 18 अगस्त) के अनुसार मनी मैनेजर्स ने Comex गोल्ड फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन 5,961 कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाकर 154,595 कर दी। शॉर्ट पोजीशन भी थोड़ी बढ़ी, लेकिन नेट लॉन्ग पोजीशन 141,648 कॉन्ट्रैक्ट पर पहुंच गई। यह सितंबर के अंत के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले तीन हफ्तों में नेट लेंथ में 18% की बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि यह साल का सबसे ऊंचा बुलिश स्तर है, फिर भी एक साल पहले और साल की शुरुआत की तुलना में सेंटीमेंट अभी कमजोर है।
बैंक ऑफ अमेरिका का नजरिया
बैंक ऑफ अमेरिका की ग्लोबल रिसर्च हेड कैंडेस ब्राउनिंग प्लैट ने कहा कि मौजूदा इन्वेस्टर खरीद $4,000 प्रति औंस के आसपास के गोल्ड प्राइस से मेल खाती है। $5,000 के स्तर तक पहुंचने के लिए खरीद में और तेजी चाहिए। सेंट्रल बैंकों की खरीद पहले से ही मजबूत है (जून में 12 महीने के औसत से काफी ऊपर)। अगर जैक्सन होल मीटिंग में डॉविश संकेत मिले तो गोल्ड के लिए यह सकारात्मक साबित हो सकता है।
जोखिम भी हैं
सोना जुलाई के निचले स्तर से रिकवर कर चुका है, लेकिन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई की आशंका बढ़ा रही है। इससे फेडरल रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर हो सकता है। TD सिक्योरिटीज के बार्ट मेलेक का मानना है कि डॉलर डिबेसमेंट की आशंका गोल्ड को सपोर्ट देगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में रेट बढ़ने का जोखिम $5,350 के टारगेट तक पहुंचने में देरी कर सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
भारत में गोल्ड हमेशा से पसंदीदा एसेट रहा है। महंगाई, रुपये की कमजोरी और ग्लोबल अनिश्चितता के समय फिजिकल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ETF में निवेश पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सकता है। लेकिन याद रखें—कोई भी निवेश जोखिम मुक्त नहीं होता। प्राइस में उतार-चढ़ाव हो सकता है, इसलिए अपनी रिस्क क्षमता और लंबे समय के लक्ष्य के हिसाब से फैसला लें।
BeYourMoneyManager पर हम हमेशा कहते हैं—अपना पैसा समझदारी से मैनेज करें। गोल्ड को सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि डेटा और अपनी जरूरत के आधार पर देखें।
नोट: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।










