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भारतीय अब सोने के जेवरात को नहीं सोने में निवेश को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, WGC के हैरान करने वाले आंकड़े

 

मार्च 2026 तिमाही में भारत में ऐतिहासिक मोड़: गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात की डिमांड को पीछे छोड़ दिया। World Gold Council रिपोर्ट के मुताबिक इन्वेस्टमेंट 52% बढ़कर 82 टन पहुंच गया। जानिए कारण, आंकड़े और आपके निवेश के लिए क्या मतलब है।

भारत में ऐतिहासिक बदलाव: मार्च 2026 तिमाही में जेवरात को पीछे छोड़ गया गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड-

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जन.-मार्च) में भारत में गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात (Jewellery) डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। यह भारतीय स्वर्ण बाजार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

मार्च 2026 तिमाही के मुख्य आंकड़े:गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड: 82 मीट्रिक टन (पिछले साल से 52% की बढ़ोतरी)

जेवरात डिमांड: 66 मीट्रिक टन (पिछले साल से 19.5% की गिरावट)

कुल गोल्ड डिमांड: 151 मीट्रिक टन (पिछले साल से 10.2% की बढ़ोतरी)

इस तिमाही में कुल खपत का 54.3% हिस्सा इन्वेस्टमेंट डिमांड का रहा, जबकि सामान्य रूप से यह हिस्सा केवल 25% के आसपास रहता है।गोल्ड ETF में भी रिकॉर्ड उछाल देखा गया — इनफ्लो 186% बढ़कर 20 टन पहुंच गया।ऐसा क्यों हुआ?

मुख्य कारण 

शेयर बाजार की कमजोर परफॉर्मेंस रहा। इस अवधि में Nifty 50 ने सिर्फ 2.4% रिटर्न दिया, जबकि घरेलू गोल्ड की कीमतें 2025 की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो गईं।उच्च स्वर्ण मूल्यों ने जेवरात खरीददारों को रोका, जबकि निवेशक बार, कॉइन और गोल्ड ETF जैसी शुद्ध निवेश उत्पादों की ओर आकर्षित हुए।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के CEO सचिन जैन ने कहा:

“पहली बार इन्वेस्टमेंट डिमांड ने जेवरात डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। आने वाली तिमाहियों में इन्वेस्टमेंट डिमांड और अधिक प्रमुख भूमिका निभाएगी, क्योंकि वित्तीय और रिटेल निवेशक दोनों गोल्ड में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।”

आपके पोर्टफोलियो के लिए क्या मतलब है?यह बदलाव साफ संकेत देता है कि भारतीय निवेशक अब गोल्ड को केवल शादी-ब्याह या जेवर के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत एसेट क्लास के रूप में देख रहे हैं।Diversification की जरूरत बढ़ गई है।

इक्विटी बाजार में अनिश्चितता और महंगाई के माहौल में गोल्ड अच्छा हेज साबित हो रहा है।

Sovereign Gold Bonds (SGB), Gold ETF, Gold Funds और फिजिकल गोल्ड (बार/कॉइन) के बीच सही चयन अब और महत्वपूर्ण हो गया है।

निष्कर्ष:

मार्च 2026 तिमाही का यह डेटा दर्शाता है कि भारत में गोल्ड निवेश की दिशा तेजी से बदल रही है। आने वाले समय में इन्वेस्टमेंट डिमांड और मजबूत होने की संभावना है।


Rajanish Kant बुधवार, 29 अप्रैल 2026
Q1 2026 WGC Gold Demand Trends Report : निवेशकों के लिए इसका मतलब| रिकॉर्ड हाई प्राइस पर भी सोने की मांग मजबूत, बार-कॉइन निवेश 42% बढ़ा

 


Q1 2026 में सोने की मांग रिकॉर्ड वैल्यू पर पहुंची: 

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्टवर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) ने अपनी ताजा Gold Demand Trends Q1 2026 रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की औसत कीमत रिकॉर्ड स्तर $4,873 प्रति औंस पर पहुंचने के बावजूद वैश्विक सोने की कुल मांग में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

Q1 2026 में कुल सोने की मांग (OTC सहित) 1,231 टन रही, जो पिछले साल की समान तिमाही से 2% ज्यादा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊंची कीमतों के कारण मांग का कुल मूल्य (Value) रिकॉर्ड $193 बिलियन तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 74% की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है।

बार और कॉइन निवेश में जोरदार उछाल: बार और कॉइन (Bar & Coin) निवेश में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। यह 474 टन रहा, जो पिछले साल से 42% ज्यादा है। यह दूसरी सबसे ऊंची तिमाही स्तर है।

एशियाई निवेशकों ने इस बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई। वे भौतिक सोने (Physical Gold) की तरफ ज्यादा आकर्षित हुए।

ETF और सेंट्रल बैंक की खरीदारी: गोल्ड-बैक्ड ETF में 62 टन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि यह पिछले साल की तिमाही (230 टन) से काफी कम है, क्योंकि मार्च में अमेरिकी फंड्स से आउटफ्लो देखा गया।

सेंट्रल बैंक ने नेट 244 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल से 3% ज्यादा है। कुछ बिकवाली के बावजूद खरीदारी मजबूत बनी रही।

ज्वेलरी डिमांड पर असर: ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की मात्रा (Volume) में 23% की गिरावट आई। लेकिन कुल खर्च (Spending) 31% बढ़ गया, क्योंकि लोग महंगे सोने पर भी खरीदारी करते रहे।

अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े: टेक्नोलॉजी सेक्टर में सोने की मांग 82 टन रही, जो 1% बढ़ी। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल बढ़ा।

कुल सप्लाई भी 2% बढ़कर 1,231 टन हो गई, जिसमें माइन प्रोडक्शन और रिसाइक्लिंग दोनों में वृद्धि देखी गई।

Q1 में सोने की कीमत ने $5,405 प्रति औंस तक का उच्च स्तर छुआ।


निवेशकों के लिए क्या मतलब?

रिपोर्ट साफ दिखाती है कि रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद निवेशक सोने को सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) मानकर खरीद रहे हैं। खासकर एशिया में बार-कॉइन की डिमांड मजबूत रही, जबकि ETF फ्लो थोड़ा धीमा पड़ा। 

निष्कर्ष:

2026 में भी जियो-पॉलिटिकल तनाव, मुद्रास्फीति और अनिश्चितता सोने की मांग को सपोर्ट करती रहेगी। सेंट्रल बैंक की खरीदारी और भौतिक निवेश जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि ज्वेलरी की मात्रा पर दबाव बना रह सकता है।

निवेश सलाह: सोना पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन हमेशा अपनी रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल्स के अनुसार फैसला लें। ज्यादा जानकारी के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की आधिकारिक रिपोर्ट पढ़ें।


Rajanish Kant
चांदी के भाव 2026 में ₹ 2 लाख गिरे: जनवरी के पीक से 46% टूटे, अब खरीदने का सही समय है? | विशेषज्ञ सलाहISilver Rate I Silver Outlook I Expert Advice Ibeyourmoneymanager

चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: 2026 के सभी लाभ मिटे, अब क्या करें निवेशक?

चांदी (Silver) ने 2026 की शुरुआत में जबरदस्त रैली दिखाई थी, लेकिन अब यह पूरी तेजी गंवा चुकी है। जनवरी 2026 में MCX पर मई सिल्वर फ्यूचर्स Rs 4.39 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई स्तर को छूने के बाद अब कीमतें Rs 2.38 लाख से Rs 2.40 लाख प्रति किलो के आसपास आ गई हैं।

मात्र तीन महीनों में चांदी के भाव Rs 2,00,554 प्रति किलो (लगभग 46%) गिर चुके हैं। इससे 2026 के सभी लाभ पूरी तरह मिट गए हैं और कीमतें अब 2025 के क्लोजिंग लेवल से भी नीचे आ गई हैं।

क्यों आई इतनी तेज गिरावट?

इस भारी सुधार के तीन मुख्य कारण हैं:

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट और रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट: आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं। लेकिन इस बार क्रूड ऑयल की तेजी और युद्ध की आशंकाओं के बावजूद निवेशकों ने leveraged पोजीशन घटाई और कैश जुटाने के लिए प्रीशियस मेटल्स बेचे।

मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड की हॉकिश नीति: चांदी डॉलर में Trade होती है। डॉलर की मजबूती से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए यह महंगी हो गई, जिससे निवेश और भौतिक मांग दोनों घटी।

अत्यधिक रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग: लंबे समय तक चली तेजी के बाद ट्रेडर्स ने मुनाफा वसूली कर ली। बढ़ती volatility में सुरक्षित निवेश की बजाय बिकवाली का दबाव बना।

लंबी अवधि में चांदी की मजबूत बुनियाद बरकरार

इस गिरावट के बावजूद चांदी की संरचनात्मक मजबूती बनी हुई है:औद्योगिक मांग कुल खपत का 60% से ज्यादा है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सेक्टर्स में मांग लगातार बढ़ रही है।

चांदी पिछले पांच साल से सप्लाई डेफिसिट में है और अब छठे साल भी यह कमी बनी रहेगी।

शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर इन्वेंटरी दशक के निचले स्तर पर है और निर्यात प्रतिबंध भी सप्लाई पर दबाव डाल रहे हैं।

चीन से निवेश मांग भी स्थिर बनी हुई है।

इन कारणों से मीडियम टू लॉन्ग टर्म में चांदी पर सकारात्मक नजरिया बना हुआ है।

विशेषज्ञों की सलाह: क्या अब खरीदें चांदी?

टाटा म्यूचुअल फंड का कहना है — “डॉलर की रैली या तनाव में कमी पर आने वाली गिरावट चांदी जमा करने का अच्छा मौका है। तेज रैली के बाद सुधार स्वाभाविक है, लेकिन लंबी अवधि का बुलिश आउटलुक बरकरार है।”

Ponmudi R, CEO, Enrich Money सलाह देते हैं कि आक्रामक तरीके से न खरीदें। इसके बजाय स्टैगर्ड (चरणबद्ध) तरीके से मजबूत सपोर्ट लेवल के पास खरीदारी करें और मीडियम से लॉन्ग टर्म होराइजन रखें।

तकनीकी नजरिया: MCX सिल्वर वर्तमान में ₹ 2,45,200 क्षेत्र के आसपास ट्रेड कर रहा है। ₹ 2,46,000 के ऊपर टिके रहने पर ₹ 2,47,000–₹2,48,000 तक रिकवरी संभव है।

निष्कर्ष: सावधानी से खरीदने का समय

2026 में चांदी की भारी गिरावट ने कई निवेशकों को चौंका दिया है, लेकिन यह औद्योगिक मांग और सप्लाई शॉर्टेज वाली मजबूत बुनियाद पर खरीदारी का अवसर भी पैदा कर सकती है।

सुझाव:  एकमुश्त निवेश की बजाय SIP जैसी चरणबद्ध खरीदारी करें।  

लंबी अवधि (1-3 साल या अधिक) का नजरिया रखें।  

जोखिम प्रबंधन के साथ पोर्टफोलियो का केवल उचित हिस्सा ही चांदी/सिल्वर में रखें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचना और शिक्षा के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार जोखिमपूर्ण है और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणाम की गारंटी नहीं देते।




Rajanish Kant मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
नए Income Tax नियम 2026: PAN के बिना ये High Value Transaction नहीं कर पाएंगे | Form 97 भी काम नहीं आएगा

 

नए टैक्स नियम 2026 में PAN अनिवार्य ट्रांजेक्शन की पूरी लिस्ट। मोटर वाहन, डिमैट, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और गोल्ड खरीद पर Form 97 नहीं चलेगा। पूरी डिटेल पढ़ें।

PAN अब अनिवार्य: 

1 अप्रैल 2026 से कई हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में Form 97 भी स्वीकार नहीं होगानई इनकम टैक्स नियम (Income Tax Rules, 2026) के तहत 1 अप्रैल 2026 से कई महत्वपूर्ण वित्तीय ट्रांजेक्शन में PAN कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। पुरानी व्यवस्था में जिन लोगों के पास PAN नहीं होता था, वे Form 60 देकर काम चला लेते थे। अब Form 60 को Form 97 से बदल दिया गया है, लेकिन Form 97 का इस्तेमाल बहुत सीमित हो गया है।कई हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में अब Form 97 भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। मतलब – PAN के बिना खरीदारी या ट्रांजेक्शन संभव नहीं होगा।किन ट्रांजेक्शन में PAN अनिवार्य है (Form 97 नहीं चलेगा)?

चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार, निम्नलिखित ट्रांजेक्शन में अब PAN देना जरूरी है:

मोटर वाहन की खरीदारी – ₹5 लाख से ज्यादा कीमत वाली गाड़ी (कार, बाइक आदि)

क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन

डिमैट अकाउंट खोलना

म्यूचुअल फंड, डिबेंचर, बॉन्ड (RBI बॉन्ड सहित) में ₹50,000 से ज्यादा का निवेश

कैश डिपॉजिट या विड्रॉल – वित्तीय वर्ष में कुल ₹10 लाख से ज्यादा

सिक्योरिटीज (शेयर, बॉन्ड आदि) की खरीद-बिक्री – ₹1 लाख से ज्यादा प्रति ट्रांजेक्शन

अनलिस्टेड शेयर की खरीद-बिक्री – ₹1 लाख से ज्यादा

इन ट्रांजेक्शन में पुरानी व्यवस्था के मुताबिक Form 97 जमा करने का विकल्प अब नहीं रहेगा। आपको PAN बनवाना ही पड़ेगा।अन्य महत्वपूर्ण ट्रांजेक्शन जहां PAN की जरूरत पड़ सकती है

सोने की ज्वेलरी या अन्य सामान/सर्विस की खरीदारी – एक ट्रांजेक्शन में ₹2 लाख से ज्यादा

अचल संपत्ति (प्रॉपर्टी) – ₹20 लाख से ₹45 लाख के बीच कुछ मामलों में Form 97 का इस्तेमाल संभव, लेकिन ₹45 लाख से ऊपर PAN अनिवार्य

विदेशी मुद्रा खरीद, बैंक ड्राफ्ट/पे ऑर्डर आदि कुछ ट्रांजेक्शन में भी नियम सख्त हुए हैं

क्यों बदले नियम? 

(सरकार का मकसद)सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 और नए नियम 2026 के तहत Form 60 को Form 97 और Form 61 को Form 98 से बदल दिया है। नया फॉर्म सरल भाषा, प्री-फिल्ड फॉर्मेट और टेक-ड्रिवन प्रोसेस पर आधारित है। इस बदलाव से Form 97 की फाइलिंग में लगभग 80-85% की कमी आने की उम्मीद है (पहले सालाना करीब 12.5 करोड़ फॉर्म फाइल होते थे)। सरकार का लक्ष्य है अनावश्यक रिपोर्टिंग कम करना और PAN आधारित कंप्लायंस बढ़ाना।

आपके लिए सलाह (Money Management Tip)

PAN तुरंत बनवा लें — अगर आपके पास PAN नहीं है तो ASAP आवेदन करें। आधार से लिंक भी जरूर कर लें।

बड़ी खरीदारी प्लान कर रहे हैं — गाड़ी, प्रॉपर्टी, गोल्ड, म्यूचुअल फंड या डिमैट अकाउंट खोलने से पहले PAN तैयार रखें।

कैश ट्रांजेक्शन — वित्तीय वर्ष में कुल कैश डिपॉजिट/विड्रॉल ₹10 लाख के करीब पहुंच रहा है तो सतर्क रहें।

टैक्स प्लानिंग — ऐसे ट्रांजेक्शन करते समय अपनी इनकम सोर्स और टैक्स रिटर्न की तैयारी भी साथ रखें।

नोट: ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं (या लागू होने वाले हैं)। हमेशा最新 अधिसूचना और Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें क्योंकि थ्रेशोल्ड में मामूली बदलाव हो सकते हैं।PAN न होने पर ट्रांजेक्शन रुक सकता है और अनावश्यक परेशानी हो सकती है। इसलिए आज ही PAN बनवाएं और अपने वित्तीय ट्रांजेक्शन को सुचारू रखें।


Rajanish Kant
सोना 2026-27 में $5500 प्रति औंस तक जा सकता है: Amundi के Portelli

अमुंडी के विशेषज्ञ Portelli का अनुमान - अगले 12 महीनों में गोल्ड प्राइस $5500 तक पहुँच सकता है। जानिए सोने के तेजी के पीछे के प्रमुख कारण, सेंट्रल बैंक खरीदारी और निवेशकों के लिए सलाह।

सोना अभी भी अगले 12 महीनों में $5,500 प्रति औंस तक का रास्ता बना रहा है: Amundi के Portelli

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 – वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें अभी भी एक व्यापक साइडवेज चैनल में फंसी हुई हैं, लेकिन Amundi के सीनियर विशेषज्ञ Portelli का मानना है कि सोने को $5,500 प्रति औंस तक जाने का मजबूत रास्ता अभी भी खुला हुआ है।

Kitco News के साथ हालिया चर्चा में Portelli ने कहा कि अल्पावधि में मुद्रास्फीति की आशंकाएँ सोने पर कुछ दबाव डाल रही हैं, लेकिन लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल फैक्टर्स सोने को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाले हैं।

सोने की तेजी के मुख्य कारण क्या हैं?

Amundi के विश्लेषण के अनुसार, सोने की माँग को कई मजबूत कारक सपोर्ट कर रहे हैं:

सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी: कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह ट्रेंड पिछले कई वर्षों से जारी है और 2026 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ: विश्व स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में आकर्षक बना रहे हैं।

डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों का आउटलुक: अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें घटाता है, तो सोने की कीमतों को और बढ़ोतरी मिल सकती है।

निवेशकों का डाइवर्सिफिकेशन: संस्थागत और रिटेल निवेशक पोर्टफोलियो में सोने का वेटेज बढ़ा रहे हैं, क्योंकि अन्य एसेट क्लासेस में जोखिम बढ़ रहा है।

Portelli ने जोर दिया कि सोना अभी भी साइडवेज मूवमेंट में है, लेकिन जब सही ट्रिगर्स सक्रिय होंगे, तो यह तेजी से ऊपर की ओर ब्रेकआउट कर सकता है। उनका अनुमान है कि अगले 12 महीनों (अप्रैल 2027 तक) में $5,500 प्रति औंस का स्तर हासिल किया जा सकता है।

वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026)अभी सोने की स्पॉट कीमत लगभग $4,700 - $4,750 प्रति औंस के आसपास है। यानी अगर Portelli का अनुमान सही साबित होता है, तो आने वाले एक साल में लगभग 15-17% की बढ़ोतरी की संभावना है।अन्य प्रमुख बैंक भी काफी bullish हैं:JP Morgan ने 2026 के अंत तक लगभग $5,000 प्रति औंस का टारगेट दिया है।

Goldman Sachs ने $5,400 तक का अनुमान लगाया है।

कुछ विशेषज्ञ $6,000 तक की भी बात कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?beyourmoneymanager.com की सलाह:

लंबी अवधि का नजरिया रखें — सोना पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा होना चाहिए ताकि diversification मिले।

डिप पर खरीदारी — अगर कीमतें $4,500-$4,600 के सपोर्ट लेवल पर आती हैं, तो अच्छा एंट्री पॉइंट हो सकता है।

फिजिकल गोल्ड, ETF या Sovereign Gold Bonds — भारत में निवेशकों के लिए SGB और गोल्ड ETF टैक्स और स्टोरेज के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं।

रिस्क मैनेजमेंट — शॉर्ट टर्म वोलेटिलिटी रहने वाली है, इसलिए लंपसम इन्वेस्टमेंट की बजाय SIP स्टाइल में गोल्ड ETF में निवेश करें।

निष्कर्ष

Amundi के Portelli का आउटलुक सोने के स्ट्रक्चरल बुल केस को मजबूत करता है। मुद्रास्फीति, सेंट्रल बैंक डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क मिलकर सोने को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं। हालांकि, बाजार हमेशा अनिश्चित रहता है, इसलिए कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।


Rajanish Kant
28 अप्रैल से तेज होगी प्री-मानसून बारिश, उत्तर से दक्षिण तक बदलेगा मौसम
Ctsy: Skymate

देश के कई हिस्सों में तापमान 45–47°C तक पहुंचा, लू का प्रकोप जारी

शुष्क मौसम के कारण उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में गर्मी तेजी से बढ़ी

27–28 अप्रैल से प्री-मानसून बारिश, आंधी और धूल भरी हवाओं की शुरुआत

बारिश से तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में गर्मी बनी रह सकती है


देश के कई हिस्से इस समय भीषण लू की चपेट में हैं। अप्रैल के पहले दस दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में प्री-मानसून बारिश और आँधी-तूफान की अच्छी गतिविधियाँ देखने को मिली थीं। इसके बाद मौसम मुख्यतः शुष्क हो गया, केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हुई। इस सूखे दौर के कारण तापमान तेजी से बढ़ गया।

तेज गर्मी और सूखे मौसम से बढ़ा तापमान

पिछले 24 घंटों में कई शहरों में तापमान बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। अकोला सबसे गर्म रहा, जहां पारा 46.9°C दर्ज हुआ। इसके बाद अमरावती में 46.8°C और बांदा में 46.6°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। बाड़मेर और वर्धा में 46.4°C दर्ज हुआ, जबकि जैसलमेर और यवतमाल में 46°C दर्ज हुआ। प्रयागराज में 45.7°C, नागपुर में 45.4°C, आदिलाबाद में 45.3°C और चित्तौड़गढ़, कोटा व नंदुरबार में 45.2°C तापमान रहा। खजुराहो में पारा 45°C तक पहुंच गया।

27 अप्रैल से बदलेगा मौसम, पहले बढ़ेगी गर्मी

अब मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। 27 अप्रैल की शाम से राजस्थान के कुछ हिस्सों, दक्षिण उत्तर प्रदेश, उत्तर मध्य प्रदेश और हरियाणा में प्री-मानसून बारिश, धूल भरी आँधी और गरज-चमक की गतिविधियाँ शुरू हो सकती हैं। हालांकि, बारिश शुरू होने से पहले तापमान में और बढ़ोतरी संभव है। 28 अप्रैल से देश के कई हिस्सों में बारिश और आँधी-तूफान की गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में व्यापक बारिश हो सकती है। यह मौसम गतिविधियाँ तापमान में गिरावट लाकर लोगों को गर्मी से राहत देंगी।

29 अप्रैल से दक्षिण भारत में भी बारिश

29 अप्रैल तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ दक्षिण भारत तक फैलने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, आंतरिक तमिलनाडु और केरल में बारिश हो सकती है, जिससे इन क्षेत्रों को भी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, 30 अप्रैल से पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियाँ कम हो सकती हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 2 मई तक प्री-मानसून बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा और राजस्थान के दक्षिणी जिलों में मौसम शुष्क और गर्म बना रह सकता है।

 मई आमतौर पर साल का सबसे गर्म महीना होता है, इसलिए कई हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है। हालांकि, बार-बार आने वाले प्री-मानसून तूफान अस्थायी राहत देंगे और लंबे समय तक तापमान को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकेंगे।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।


Rajanish Kant सोमवार, 27 अप्रैल 2026
चीन में चांदी की मांग में विस्फोट: मार्च 2026 में 78% आयात बढ़ोतरी, निवेशकों के लिए क्या संकेत


चीन में चांदी की मांग में विस्फोट: मार्च 2026 में 78% आयात बढ़ोतरी, निवेशकों और इंडस्ट्री में मची होड़

मार्च 2026 में चीन के चांदी आयात में 78% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। जानें इसके पीछे निवेशकों की मांग, सोलर इंडस्ट्री और वैश्विक बाजार पर असर।

📊 चीन में चांदी की रिकॉर्ड मांग: निवेश और सोलर सेक्टर ने बढ़ाया आयात


मार्च 2026 में चीन ने चांदी के आयात में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश के सिल्वर इम्पोर्ट्स में 78% की मासिक बढ़ोतरी हुई और यह लगभग 836 टन तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों के औसत से करीब 173% अधिक है, जो दर्शाता है कि चीन में चांदी की मांग अचानक बेहद तेज़ हो गई है।

🔍 क्यों बढ़ी चीन में चांदी की मांग?
1. 💰 निवेशकों का रुझान
चीन के रिटेल निवेशक तेजी से चांदी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

सोना महंगा होने के कारण लोग चांदी को सस्ता विकल्प मान रहे हैं

छोटे सिल्वर बार्स की खरीद में भारी बढ़ोतरी देखी गई

यह ट्रेंड बताता है कि अनिश्चित आर्थिक माहौल में निवेशक सुरक्षित और सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं।

2. ☀️ सोलर इंडस्ट्री की भारी डिमांड
चांदी की मांग का सबसे बड़ा कारण सोलर इंडस्ट्री है।

सोलर पैनल बनाने में चांदी का महत्वपूर्ण उपयोग होता है

वैश्विक स्तर पर लगभग 20% चांदी का उपयोग सोलर सेक्टर में होता है

चीन के निर्माता 1 अप्रैल 2026 से पहले टैक्स रिबेट खत्म होने के कारण तेजी से उत्पादन बढ़ा रहे थे, जिससे चांदी की मांग अचानक बढ़ गई।

3. 📦 सप्लाई पर दबाव और स्टॉकिंग
कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों के लिए पहले से स्टॉक जमा किया

घरेलू बाजार में कीमतें वैश्विक कीमतों से ऊपर चली गईं

इससे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स ने चीन में चांदी भेजना शुरू किया

यह संकेत देता है कि चीन में सप्लाई की कमी और मांग का अंतर तेजी से बढ़ रहा है।

📈 क्या यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार:

यह उछाल आंशिक रूप से अस्थायी हो सकता है (टैक्स बदलाव के कारण)

लेकिन लंबी अवधि में मांग मजबूत रहने की संभावना है

2026 में सिल्वर मार्केट लगातार छठे साल भी घाटे (deficit) में रह सकता है

इसका मतलब है कि सप्लाई कम और मांग ज्यादा रहने से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

🌍 वैश्विक बाजार पर असर
चीन की इस मांग का सीधा असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है:

ग्लोबल सिल्वर सप्लाई पर दबाव

कीमतों में अस्थिरता (volatility)

अन्य देशों से चीन की ओर धातु का प्रवाह

चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है, इसलिए उसकी मांग वैश्विक कीमतों को प्रभावित करती है।

💡 निवेशकों के लिए क्या संकेत?
✔ चांदी अब सिर्फ औद्योगिक धातु नहीं, बल्कि निवेश का बड़ा विकल्प बन रही है
✔ कीमतों में तेजी के साथ जोखिम भी बढ़ा है
✔ “Buy on dips, sell on rallies” रणनीति कारगर हो सकती है

🧾 निष्कर्ष
चीन में चांदी की मांग का यह उछाल केवल एक अस्थायी घटना नहीं, बल्कि एक बड़े ट्रेंड का संकेत हो सकता है।
निवेशकों की बढ़ती रुचि, सोलर इंडस्ट्री का विस्तार और सप्लाई की कमी—ये तीनों मिलकर आने वाले समय में सिल्वर मार्केट को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकते हैं।

Rajanish Kant रविवार, 26 अप्रैल 2026
RBI ने Paytm Payments Bank Limited का लाइसेंस रद्द किया

आरबीआई ने 24 अप्रैल 2026 को Paytm Payments Bank Limited का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया। अब यह बैंकिंग बिजनेस नहीं कर सकेगा। डिपॉजिट की पूरी राशि वापस मिलने की पर्याप्त लिक्विडिटी है। पूरी डिटेल्स पढ़ें।

आरबीआई ने Paytm Payments Bank Limited का लाइसेंस रद्द किया – 24 अप्रैल 2026 का बड़ा अपडेट

नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2026 – रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आरबीआई ने Paytm Payments Bank Limited का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह लाइसेंस Banking Regulation Act, 1949 की धारा 22(4) के तहत जारी किया गया था।

कब से प्रभावी?

लाइसेंस रद्द होने की तारीख: 

24 अप्रैल 2026 को कारोबार बंद होने के साथ ही प्रभावी।क्या बदल गया है?अब Paytm Payments Bank Limited को बैंकिंग बिजनेस करने की अनुमति नहीं रहेगी।

Banking Regulation Act की धारा 5(b) में परिभाषित बैंकिंग गतिविधियाँ और धारा 6 के तहत अतिरिक्त बिजनेस दोनों बंद हो जाएंगे।

तुरंत प्रभाव से बैंक कोई नया बैंकिंग काम नहीं कर सकेगा।

RBI का अगला कदम

रिज़र्व बैंक अब इस बैंक के winding up (समापन) के लिए हाई कोर्ट में आवेदन करेगा।

डिपॉजिटर्स के लिए अच्छी खबर

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि Paytm Payments Bank Limited के पास अपनी पूरी डिपॉजिट दायित्व (deposit liability) चुकाने के लिए पर्याप्त लिक्विडिटी उपलब्ध है। यानी ग्राहकों के जमा पैसे वापस मिलने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

Paytm Payments Bank क्या था?

Paytm Payments Bank भारत का एक प्रमुख पेमेंट्स बैंक था, जो Paytm ऐप के माध्यम से डिजिटल पेमेंट्स, वॉलेट, बैंक अकाउंट और अन्य वित्तीय सेवाएँ प्रदान करता था। अब इसके बैंकिंग ऑपरेशन्स पूरी तरह बंद हो जाएंगे।

उपयोगकर्ताओं को सलाह (Money Manager टिप्स)

अगर आपके Paytm Payments Bank अकाउंट में पैसे जमा हैं, तो तुरंत स्थिति चेक करें।

जरूरत पड़ने पर Paytm सपोर्ट या RBI की आधिकारिक वेबसाइट से अपडेट लें।

भविष्य में किसी भी बैंक या पेमेंट्स बैंक चुनते समय उसके रेगुलेटरी स्टेटस और लाइसेंस की जानकारी जरूर जांचें।

हमेशा अपने पैसे को कई जगहों पर डाइवर्सिफाई करके रखें ताकि एक जगह समस्या आने पर जोखिम कम हो।

यह फैसला डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट्स सिस्टम में मजबूत रेगुलेटरी निगरानी की ओर एक और कदम है। RBI समय-समय पर ऐसे कदम उठाता है ताकि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और भरोसेमंद बना रहे।

स्रोत: आधिकारिक RBI प्रेस रिलीज (24 अप्रैल 2026)

https://m.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=62621


Rajanish Kant शनिवार, 25 अप्रैल 2026
भारत का डिजिटल करेंसी (e-Rupee CBDC) को बढ़ावा: भ्रष्ट वेलफेयर सिस्टम को कैसे ठीक करेगा? |

भारत का डिजिटल करेंसी अभियान भ्रष्ट कल्याणकारी योजनाओं को निशाना बनाता है | 

भारत में e-Rupee (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी या CBDC) को बढ़ावा देने की कोशिश अब सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पुरानी समस्या — भ्रष्टाचार और रिसाव — को हल करने की ओर बढ़ रही है। महाराष्ट्र के पश्चिमी गांव फुलेनगर में किसान समाधान सोनावणे ने अपनी छोटी प्याज की खेती पर ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाया। रोचक बात यह है कि फंड सीधे सेंट्रल बैंक द्वारा जारी डिजिटल करेंसी के जरिए आया। यह भारत के e-Rupee पायलट प्रोग्राम का हिस्सा है, जो $80 बिलियन के विशाल वेलफेयर पेमेंट सिस्टम को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने का प्रयास है। 

चीन से तुलना:

चीन में e-Yuan का इस्तेमाल 20 करोड़ से ज्यादा लोगों द्वारा हो रहा है, जबकि भारत के प्रयास अभी शुरुआती चरण में हैं। लेकिन अगर सफल हुआ तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा CBDC जारीकर्ता बन सकता है।

वेलफेयर सेक्टर में e-Rupee के पायलट

भारतीय अधिकारी फिलहाल कृषि और सब्सिडी वाले खाद्यान्न वितरण क्षेत्र में e-Rupee के यूज केस बना रहे हैं, जहां अक्सर पैसा सही लाभार्थी तक नहीं पहुंच पाता। 

महाराष्ट्र पायलट: विश्व बैंक, RBI, महाराष्ट्र सरकार और पंजाब नेशनल बैंक के सहयोग से चल रहा यह प्रोजेक्ट किसानों को ड्रिप सिंचाई सब्सिडी सीधे डिजिटल वॉलेट में e-Rupee के रूप में ट्रांसफर करता है। सब्सिडी कुल लागत का 80% कवर करती है।

फंड प्रोग्रामेबल हैं — यानी इन्हें केवल अप्रूव्ड वेंडर्स पर ही खर्च किया जा सकता है।

जिले में करीब 1,400 किसान इस स्कीम के लिए अप्लाई कर चुके हैं।

किसान समाधान सोनावणे को पहले उपकरण खरीदने के लिए पैसे जुटाने या महीनों इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ी। प्रोग्रामेबल CBDC सुनिश्चित करता है कि फंड का दुरुपयोग न हो।

वेंडर्स को भी फायदा: एक लोकल फार्म इक्विपमेंट स्टोर के मालिक वैभव व्हालगड़े ने बताया कि इस सीजन में CBDC के जरिए अब तक 50 एप्लीकेशन्स आ चुकी हैं, जबकि पहले पूरा सीजन में 200 सेल्स होती थीं।

गुजरात में खाद्यान्न सब्सिडी पायलट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में 15,000 लाभार्थियों को सरकारी राशन दुकानों पर सब्सिडी वाले खाद्यान्न वितरित करने के लिए e-Rupee का इस्तेमाल हो रहा है। लक्ष्य जून तक सभी 7.5 मिलियन पात्र परिवारों को कवर करना है।

राज्य अधिकारी मोना खंडहर के अनुसार, “यह विन-विन सिचुएशन है — बेहतर ट्रैकिंग और दक्षता मिल रही है।”

e-Rupee की विशेषताएं और चुनौतियां

RBI दो अलग-अलग CBDC वर्जन इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है:वेलफेयर पेमेंट्स — ज्यादा पारदर्शिता (ट्रांसपेरेंसी)

रिटेल यूज — ज्यादा प्राइवेसी

वैश्विक संदर्भ:

भारत और चीन ही स्केल पर प्रोग्रामेबल CBDC चला रहे हैं। भारत के पायलट में करीब 1 करोड़ यूजर्स हैं। ग्लोबली 49 देश CBDC पायलट चला रहे हैं, लेकिन पूर्ण लॉन्च बहुत कम हैं। e-Rupee की शुरुआत 2022 के अंत में हुई थी। अब तक कुल ट्रांजेक्शन्स $3.6 बिलियन के आसपास हैं, जबकि UPI पर हर महीने $300 बिलियन से ज्यादा प्रोसेस होते हैं। वेलफेयर पेमेंट्स को e-Rupee का “किलर यूज केस” बनाने की कोशिश की जा रही है।

विशेषज्ञों की राय

जॉन किफ (पूर्व IMF एवं Bank of Canada एक्सपर्ट): भारत CBDC के लिए ऐसे यूज केस ढूंढ रहा है जो इसे अलग पहचान दें।

विजय कोलेकर (महाराष्ट्र सरकार): प्रोग्रामेबल CBDC सब्सिडी डिलीवरी को अधिक समावेशी बनाता है, खासकर सामाजिक रूप से पिछड़े किसानों के लिए।

नेहा नरुला (MIT Media Lab): इतना ज्यादा कंट्रोल (कहां, कब और किस पर खर्च) लोगों को CBDC अपनाने से रोक सकता है। यह “खतरनाक रास्ता” हो सकता है।


निष्कर्ष (BitcoinInBharat का नजरिया):

e-Rupee वेलफेयर लीकेज को कम करने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन प्रोग्रामेबल मनी की ज्यादा नियंत्रण वाली प्रकृति कैश जैसी फ्रीडम को सीमित करती है। भारत में प्राइवेट क्रिप्टो (जैसे Bitcoin) को रिस्क मानते हुए CBDC को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्या CBDC वाकई वेलफेयर को सुधार पाएगा या यह सिर्फ सरकारी कंट्रोल बढ़ाने का नया तरीका है? आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं। Bitcoin, क्रिप्टो और CBDC पर और अपडेट्स के लिए BitcoinInBharat को फॉलो करें।

स्रोत: Economic Times (Reuters रिपोर्ट)

Bitcoin vs e-Rupee (CBDC): अंतर, फायदे-नुकसान और BitcoinInBharat का नजरिया | कौन बेहतर?


Bitcoin vs e-Rupee: पूरी तुलना (2026 अपडेट)BitcoinInBharat | 22 अप्रैल 2026भारत में e-Rupee (RBI का CBDC) तेजी से वेलफेयर और सब्सिडी डिलीवरी में इस्तेमाल हो रहा है, जबकि Bitcoin दुनिया का सबसे मजबूत डिसेंट्रलाइज्ड एसेट बना हुआ है। दोनों डिजिटल हैं, लेकिन फिलॉसफी, कंट्रोल और यूज पूरी तरह अलग हैं।





Bitcoin vs e-Rupee: हेड-टू-हेड तुलना  पैरामीटर

            Bitcoin (BTC)

                      e-Rupee (CBDC)

इश्यूअर

कोई नहीं (डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क)

Reserve Bank of India (RBI)


कंट्रोल

       पूरी तरह डिसेंट्रलाइज्ड, कोई सिंगल पार्टी कंट्रोल नहीं

सेंट्रलाइज्ड, RBI पूरा कंट्रोल रखता है


लीगल स्टेटस

भारत में एसेट (ट्रेडिंग वैध, लीगल टेंडर नहीं)

लीगल टेंडर (फिजिकल रुपये जैसा)


सप्लाई

   फिक्स्ड 21 मिलियन (डिफ्लेशनरी)

अनलिमिटेड (इन्फ्लेशनरी, RBI के हिसाब से)


वोलेटिलिटी

 बहुत हाई (स्टोर ऑफ वैल्यू)

जीरो (1 e₹ = 1 ₹)


प्रोग्रामेबिलिटी

सीमित (स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर)

हाई (सरकार सब्सिडी को स्पेसिफिक यूज पर लॉक कर सकती है)

प्राइवेसी

  हाई (pseudonymous)

 कम (ट्रांसपेरेंट, ट्रैकेबल)

ट्रांजेक्शन स्पीड

10-60 मिनट (Layer-2 पर तेज)

इंस्टेंट (UPI जैसा)

यूज केस

वैल्यू स्टोरेज,                        हेजिंग, ग्लोबल ट्रांसफर

डेली पेमेंट्स, वेलफेयर, सब्सिडी, ऑफलाइन

करंट यूजर्स/एडॉप्शन

ग्लोबल (मिलियंस होल्डर्स)

~7-8 मिलियन (पायलट, 2026)


रिस्कमा  maर्केट वोलेटिलिटी, रेगुलेटरी अनिश्चितता

     सरकारी कंट्रोल, प्राइवेसी लॉस, सेंट्रल फेलियर

e-Rupee के मजबूत पॉइंट्स (RBI का फोकस)

वेलफेयर लीकेज रोकना: प्रोग्रामेबल मनी — पैसा सिर्फ राशन या ड्रिप इरिगेशन पर खर्च हो सकता है।

ऑफलाइन फंक्शनलिटी: 2026 में बढ़ाया जा रहा है — इंटरनेट न होने पर भी काम करेगा।

UPI के साथ इंटीग्रेशन: पहले से मजबूत डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम।

स्टेबिलिटी: कोई प्राइस स्विंग नहीं।

Bitcoin के मजबूत पॉइंट्स

फाइनेंशियल फ्रीडम: कोई बैंक या सरकार ब्लॉक नहीं कर सकती।

स्टोर ऑफ वैल्यू: 2009 से 100 मिलियन x रिटर्न (इन्फ्लेशन हेज)।

ग्लोबल पोर्टेबिलिटी: दुनिया कहीं भी, बिना परमिशन भेजो।

डिसेंट्रलाइजेशन: सेंसरशिप रेसिस्टेंट।

विशेषज्ञों की राय:e-Rupee सरकारी योजनाओं को कुशल बनाएगा, लेकिन ज्यादा कंट्रोल “खतरनाक” हो सकता है।

Bitcoin फ्रीडम और वैल्यू क्रिएशन का टूल है, लेकिन शॉर्ट-टर्म वोलेटाइल।

BitcoinInBharat का नजरिया

e-Rupee भारत के लीक वाली वेलफेयर सिस्टम को सुधारने का अच्छा टूल हो सकता है, लेकिन यह सरकारी मनी है — आपकी पसंद पर शर्तें लगाई जा सकती हैं। Bitcoin असली डिजिटल गोल्ड है — scarce, neutral और sovereign। 

सुझाव: रोजमर्रा के पेमेंट्स और सब्सिडी → e-Rupee

लॉन्ग-टर्म वेल्थ और फ्रीडम → Bitcoin


निष्कर्ष: दोनों को एक-दूसरे का दुश्मन नहीं, बल्कि कॉम्प्लिमेंट मानें। भारत को दोनों की जरूरत है — एक स्टेबल पब्लिक मनी, दूसरा प्राइवेट फ्रीडम मनी।

आप क्या सोचते हैं? e-Rupee या Bitcoin — कमेंट में बताएं।स्रोत: RBI रिपोर्ट्स, Economic Times, विभिन्न CBDC ट्रैकर्स (2026 डेटा)




Rajanish Kant गुरुवार, 23 अप्रैल 2026
₹89,000 करोड़ अनक्लेम्ड शेयर: 1671 कंपनियों में आपका पैसा तो नहीं पड़ा है? अपना अनक्लेम्ड पैसा कैसे चेक करें जानें पूरा तरीका | BeYourMoneyManager.com


भारत में ₹2.2 लाख करोड़ अनक्लेम्ड वेल्थ, जिसमें ₹89,000 करोड़ सिर्फ शेयरों में फंसा है। जानिए IEPF, बैंक, EPF, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड में अपना पैसा कैसे चेक करें और क्लेम करें।₹89,000 करोड़ अनक्लेम्ड इक्विटी: 1671 कंपनियों के शेयरों में आपका पैसा तो नहीं पड़ा है?आपका पैसा कहीं खो तो नहीं गया है?

भारत में घरेलू निवेशकों की कुल अनक्लेम्ड संपत्ति दिसंबर 2025 तक ₹2.2 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुकी है। इसमें बैंक डिपॉजिट, शेयर, इंश्योरेंस, EPF और म्यूचुअल फंड शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात — शेयरों में ही करीब ₹89,000 करोड़ (लगभग 166 करोड़ शेयर) 1671 लिस्टेड कंपनियों में अनक्लेम्ड पड़े हैं।यह आंकड़े 1 Finance Magazine की स्टडी पर आधारित हैं।


अनक्लेम्ड वेल्थ का ब्रेकडाउन (दिसंबर 2025)क्रमांक

एसेट क्लास        अनक्लेम्ड अमाउंट (₹ करोड़)

1बैंक डिपॉजिट        97,545

2इक्विटी शेयर्स           89,004

3 इंश्योरेंस पॉलिसी        20,062

4  EPF अकाउंट            10,915

5     म्यूचुअल फंड             3,452

6  REITs, InvITs, NCDs      764

कुल  ₹2,20,742 करोड़

-

सबसे बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों का है।

अनक्लेम्ड पैसा क्यों बढ़ रहा है?

नामांकन (Nomination) न करना या पुराना रखना

परिवार को निवेश की जानकारी न देना

दस्तावेज खो जाना या अकाउंट इनएक्टिव हो जाना

डिजिटल निवेश बढ़ने के बावजूद क्लेम प्रोसेस जटिल रहना


नतीजा: आपका पैसा या तो 3% ब्याज पर पड़ा है (जो मुद्रास्फीति से कम है) या पूरी तरह inaccessible हो गया है।


अपना अनक्लेम्ड पैसा कैसे चेक करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

1. शेयर / इक्विटी (IEPF) चेक करें  IEPF वेबसाइट पर जाएं: www.iepf.gov.in  

“Investor Search” या “Unclaimed Shares” सेक्शन में नाम, PAN या Folio Number डालें।  

अगर शेयर मिलें तो ऑनलाइन क्लेम फॉर्म भरें।


2. बैंक डिपॉजिट  RBI Depositor Education and Awareness (DEA) Fund चेक करें।  

अपने बैंक ब्रांच से संपर्क करें या RBI वेबसाइट पर डिटेल्स देखें।


3. EPF (प्रोविडेंट फंड)  EPFO पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर UAN से लॉगिन करें।  

“View Passbook” या “Inactive Accounts” चेक करें।


4. इंश्योरेंस  IRDAI की वेबसाइट या संबंधित इंश्योरेंस कंपनी के पोर्टल पर “Unclaimed Amount” सर्च करें।


5. म्यूचुअल फंड  AMFI वेबसाइट या अपने AMC (Asset Management Company) के पोर्टल पर “Unclaimed Dividend/Redemption” चेक करें।


प्रो टिप: 

हर फाइनेंशियल एसेट में नॉमिनी अपडेट करें और परिवार को सभी डिटेल्स (डिमैट अकाउंट, फोलियो नंबर, पॉलिसी नंबर आदि) शेयर करें।


अब क्या करें? 

(एक्शनेबल सलाह)सभी निवेशों में नॉमिनी जोड़ें

नियमित रूप से पोर्टफोलियो रिव्यू करें

डिजिटल लॉकर या फैमिली फाइनेंशियल फाइल तैयार रखें

हर साल एक बार अनक्लेम्ड एसेट्स सर्च करें


अपना पैसा खोने न दें — यह आपकी मेहनत की कमाई है। आज ही चेक करें कि आपका पैसा कहाँ पड़ा है।

Disclaimer: यह लेख 1 Finance Magazine की स्टडी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आंकड़े अनुमानित हैं। कृपया आधिकारिक वेबसाइट पर स्वयं वेरिफाई करें और जरूरत पड़ने पर फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

अगर आपको अपना अनक्लेम्ड पैसा ढूंढने में मदद चाहिए या पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग पर सलाह चाहिए, तो www.beyourmoneymanager.com पर संपर्क करें।  

Tags: अनक्लेम्ड शेयर, IEPF क्लेम, EPF अनक्लेम्ड, बैंक डिपॉजिट, पर्सनल फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट टिप्स, 1 Finance Report




(
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Rajanish Kant बुधवार, 22 अप्रैल 2026