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Paytm को बड़ा फायदा: UPI MDR से मर्चेंट बिजनेस में अतिरिक्त रेवेन्यू, ग्राहकों के लिए UPI अभी भी फ्री | BeYourMoneyManager

पेटीएम ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में बताया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने से कंपनी के मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट होगा। कई ऐसे ट्रांजेक्शन जो पहले फ्री थे, अब उनसे कमाई हो सकेगी।

क्या है नया MDR नियम?

NPCI ने 15 सितंबर 2026 को सर्कुलर (NPCI/UPI/OC-No.237/2026-27) जारी किया है। इसके मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से UPI पर पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन में ₹2,000 से ज्यादा की राशि पर अधिकतम 0.4% तक MDR चार्ज लगेगा।  

₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन तय की गई है।  

छोटे मर्चेंट्स (कुछ श्रेणियों में) और ₹2,000 तक के ट्रांजेक्शन पर MDR जीरो रहेगा।  

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल जैसी कुछ सेक्टर्स में फ्लैट ₹5 MDR लागू हो सकता है।  

म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ भुगतान पर कम रेट (जैसे 0.02%) लगेगा।  

महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों (कस्टमर्स) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। UPI पेमेंट्स उनके लिए पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे। MDR सिर्फ मर्चेंट्स द्वारा भुगतान किया जाएगा और इसे ग्राहकों पर पास-ऑन नहीं किया जा सकता।

Paytm के लिए क्या मायने रखता है?

One97 Communications (Paytm की पेरेंट कंपनी) ने स्पष्ट कहा है कि यह बदलाव मर्चेंट बिजनेस से उन कई ट्रांजेक्शन पर अतिरिक्त रेवेन्यू देगा जो पहले फ्री प्रोसेस होते थे। कंपनी आगे प्रभाव का आकलन करने के बाद जरूरी डिस्क्लोजर करेगी।  

यह कदम फिनटेक कंपनियों, बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के लिए नया रेवेन्यू सोर्स खोलता है। विश्लेषकों के अनुसार इससे इंडस्ट्री में हजारों करोड़ रुपये का रेवेन्यू पूल बन सकता है, जिसमें Paytm जैसे प्लेयर्स को मर्चेंट एक्वायरिंग साइड से हिस्सा मिलने की उम्मीद है।

ग्राहकों और मर्चेंट्स के लिए असर

ग्राहक**: UPI स्कैन और पे, फोन नंबर या किसी भी तरीके से भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। P2P ट्रांसफर भी फ्री रहेंगे।  

मर्चेंट्स**: ₹2,000 से ऊपर के योग्य P2M ट्रांजेक्शन पर MDR देना होगा। छोटे व्यापारियों को कई मामलों में छूट मिलेगी। कुछ मर्चेंट्स कैश की ओर वापस जाने की बात कर सकते हैं, लेकिन डिजिटल पेमेंट्स की सुविधा और वॉल्यूम को देखते हुए ज्यादातर बड़े मर्चेंट्स इसे अपनाएंगे।  

क्यों जरूरी है ये जानना?

UPI भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। लंबे समय तक इसे सब्सिडी और जीरो MDR के सहारे चलाया गया। अब इकोसिस्टम को सस्टेनेबल बनाने के लिए सीमित MDR लगाया जा रहा है। इससे पेमेंट कंपनियों की कमाई बढ़ेगी, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत बनी रहेगी।

Paytm जैसी कंपनियों के शेयरों में इस खबर के बाद तेजी देखी गई है क्योंकि यह उनके बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाता है।  

अगर आप मर्चेंट हैं तो अपने पेमेंट गेटवे या QR कोड प्रोवाइडर से नए चार्जेस की डिटेल्स जरूर चेक करें। आम यूजर्स के लिए UPI पहले की तरह आसान और फ्री बना रहेगा।  

स्रोत: Paytm की SEBI फाइलिंग और NPCI सर्कुलर (15 सितंबर 2026)।  


Rajanish Kant बुधवार, 16 सितंबर 2026
UPI पर नए MDR नियम 2026: ₹2000 से ऊपर लेन-देन पर 0.4% चार्ज, उपभोक्ता फ्री रहेंगे,15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी| BeYourMoneyManager

UPI पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नियम: क्या बदल रहा है और आपको क्या जानना चाहिए?

15 सितंबर 2026 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के सिलेक्ट पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के बारे में आधिकारिक FAQs जारी किए हैं। ये नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।

मुख्य बातें संक्षेप में

उपभोक्ताओं पर कोई चार्ज नहीं**: आम यूजर्स को UPI पेमेंट करने पर कोई फीस नहीं लगेगी। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर भी पूरी तरह फ्री रहेंगे।

₹2000 तक के लेन-देन फ्री**: सभी मर्चेंट्स के लिए ₹2000 तक के P2M लेन-देन पर MDR शून्य रहेगा। ये लेन-देन कुल UPI P2M वॉल्यूम का 95% से ज्यादा हिस्सा हैं।

₹2000 से ऊपर पर 0.4% MDR**: सामान्य मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% चार्ज लगेगा। ₹75,000 और उससे ऊपर के लेन-देन पर अधिकतम ₹300 की कैप होगी।

छोटे मर्चेंट्स सुरक्षित**: P2PM कैटेगरी वाले छोटे विक्रेता (जो महीने में ₹1 लाख तक UPI QR से पेमेंट लेते हैं) पर MDR नहीं लगेगा।

विशेष कैटेगरी में फ्लैट ₹5**: रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल आदि जैसे सेक्टर्स में ₹2000 से ऊपर के लेन-देन पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा।

उदाहरण से समझें MDR

| लेन-देन राशि     | लागू MDR      | मर्चेंट द्वारा भुगतान |

|--------------------|-------------------|-----------------------|

| ₹2,000 तक         | 0%                | ₹0                    |

| ₹3,000            | 0.4%              | ₹12                   |

| ₹50,000           | 0.4%              | ₹200                  |

| ₹75,000+        | कैप ₹300         | ₹300                  |

क्यों लाया गया ये नियम?

NPCI के अनुसार UPI अब हर महीने अरबों लेन-देन हैंडल कर रहा है। सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना लंबे समय तक संभव नहीं। MDR से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने, फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम सुधारने और छोटे मर्चेंट्स को सपोर्ट करने वाले फंड में किया जाएगा। UPI का MDR अभी भी क्रेडिट कार्ड (1.5-2.5%) और डेबिट कार्ड की तुलना में काफी कम है।

उपभोक्ताओं के लिए राहत

UPI ऐप्स कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं ले सकेंगे।

QR कोड स्कैन करने पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा।

ऑटो-पे और रिकरिंग पेमेंट्स (बिल, सब्सक्रिप्शन आदि) पर भी निर्धारित MDR नहीं लगेगा।

कीमतें बढ़ने की संभावना कम है क्योंकि मर्चेंट्स को चार्ज ग्राहकों पर नहीं डालने की अनुमति है और MDR बहुत कम है।

छोटे व्यवसायों के लिए क्या है?

छोटे और माइक्रो मर्चेंट्स (P2PM) को पूरी सुरक्षा दी गई है। साथ ही एक डेडिकेटेड फंड बनाया जाएगा जो टियर-3 से टियर-6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों और सरकारी स्कीम्स से जुड़े मर्चेंट्स को डिजिटल पेमेंट अपनाने में मदद करेगा।

कब से लागू होगा?

नए MDR नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को सिस्टम अपडेट करने का पर्याप्त समय दिया गया है।

आधिकारिक जानकारी कहां से लें?

केवल NPCI, RBI या वित्त मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से बचें।

निष्कर्ष: UPI भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का आधार है। ये नए नियम सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए लाए गए हैं, जबकि आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को फ्री सर्विस का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। अगर आप मर्चेंट हैं तो अपने अकाउंटिंग सिस्टम को अपडेट रखें और अगर उपभोक्ता हैं तो बिना किसी चिंता के UPI का इस्तेमाल जारी रखें।

अधिक अपडेट्स और पर्सनल फाइनेंस टिप्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर जुड़े रहें।

(लेख मूल रूप से NPCI के आधिकारिक FAQs और संबंधित रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

Rajanish Kant मंगलवार, 15 सितंबर 2026
Notice Period (नोटिस पीरियड) पूरा किए बिना नौकरी छोड़ने पर क्या कंपनी ब्लैकलिस्ट या धमकी दे सकती है? जानें भारतीय कानून क्या कहता है | BeYourMoneyManager

क्या नियोक्ता नोटिस पीरियड से पहले छोड़ने वाले कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकता है या धमकी दे सकता है? भारतीय संविधान, कॉन्ट्रैक्ट एक्ट और लेबर लॉ के अनुसार जानें आपके अधिकार और कंपनी के कानूनी विकल्प।

नोटिस पीरियड पूरा किए बिना नौकरी छोड़ने पर क्या कंपनी ब्लैकलिस्ट या धमकी दे सकती है? जानें कानून क्या कहता है

कई कंपनियों में नोटिस पीरियड बहुत लंबा होता है। कर्मचारी नए जॉब जॉइन करने के लिए पूरा नोटिस पीरियड सर्वे नहीं करना चाहते। ऐसे में सवाल उठता है – क्या कंपनी कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकती है, धमकी दे सकती है या जबरदस्ती काम करवा सकती है?

भारतीय कानून इस मामले में काफी स्पष्ट है।

क्या कंपनी कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकती है?

भारतीय श्रम कानून में “ब्लैकलिस्टिंग” का कोई आधिकारिक प्रावधान नहीं है। कंपनी किसी कर्मचारी का नाम अन्य कंपनियों या इंडस्ट्री बॉडीज में सर्कुलेट करके उसकी भविष्य की नौकरी खराब नहीं कर सकती। ऐसा करना डिफामेशन (मानहानि) या livelihood में दखल का आधार बन सकता है।

हां, कंपनी अंदरूनी तौर पर “do-not-rehire” फ्लैग लगा सकती है। यह कानूनी रूप से मान्य है। बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में कंपनी सही जानकारी दे सकती है कि कर्मचारी ने एग्जिट फॉर्मेलिटीज पूरी नहीं कीं।

क्या कंपनी धमकी दे सकती है या जबरदस्ती काम करवा सकती है?

नहीं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत जबरन श्रम (forced labour) प्रतिबंधित है। Specific Relief Act, 1963 के अनुसार पर्सनल सर्विस कॉन्ट्रैक्ट को जबरन लागू नहीं किया जा सकता। यानी कोर्ट किसी कर्मचारी को वापस ऑफिस आकर काम करने का आदेश नहीं दे सकता।

कंपनी की कानूनी राहत मुख्य रूप से मौद्रिक होती है:

नोटिस पीरियड की बाकी सैलरी कटौती

डैमेज क्लेम (Indian Contract Act, 1872 के तहत)

रिलीविंग लेटर या एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट रोकना (अगर हैंडओवर पूरा नहीं हुआ)

क्या कंपनी कोर्ट से ऑर्डर लेकर प्रतिद्वंद्वी कंपनी में जॉइन करने से रोक सकती है?

बहुत मुश्किल है। कोर्ट आमतौर पर कर्मचारी को दूसरे जगह काम करने से नहीं रोकते, खासकर नोटिस पीरियड खत्म होने के बाद। सेक्शन 27 (Indian Contract Act) ट्रेड पर रोक को अवैध मानता है। केवल गोपनीयता या व्यापारिक रहस्यों के उल्लंघन के मजबूत सबूत होने पर ही सीमित इनजंक्शन संभव है।

कर्मचारी क्या सावधानी बरतें?

रोजगार अनुबंध ध्यान से पढ़ें।

औपचारिक रूप से रिजाइन करें और रिकॉर्ड रखें।

अगर संभव हो तो नोटिस बायआउट या वेवर पर बातचीत करें।

कंपनी प्रॉपर्टी और डेटा सही तरीके से हैंडओवर करें।

निष्कर्ष:  

नोटिस पीरियड पूरा न करने पर कंपनी आपको जबरदस्ती रोक नहीं सकती और औपचारिक ब्लैकलिस्ट भी नहीं कर सकती। उसकी मुख्य शक्ति वित्तीय दावे और रिलीविंग डॉक्यूमेंट रोकने तक सीमित है। धमकी या गलत तरीके से नाम खराब करना कानूनी रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

अपने अधिकारों को समझें और जरूरत पड़ने पर लेबर लॉ विशेषज्ञ या वकील से सलाह लें।  

BeYourMoneyManager.com पर व्यक्तिगत वित्त और करियर से जुड़े और भी उपयोगी आर्टिकल्स पढ़ें।

Source: ET Wealth 

Rajanish Kant
EPFO WhatsApp Channel लॉन्च: PF सदस्यों के लिए बड़ी राहत: PF अपडेट्स, बैलेंस और क्लेम स्टेटस कैसे पाएं? जॉइन करने का आसान तरीका l BeYourMoneyManager

EPFO ने लॉन्च किया आधिकारिक WhatsApp Channel – www.beyourmoneymanager.com

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों और पेंशनधारकों के लिए एक आधिकारिक WhatsApp Channel लॉन्च किया है। अब आप PF से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट्स, योजनाओं की जानकारी और उपयोगी शैक्षिक सामग्री सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त कर सकते हैं।

यह सुविधा उन लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद है जो नियमित रूप से EPFO की वेबसाइट या ऐप चेक नहीं कर पाते।

EPFO WhatsApp Channel से क्या-क्या जानकारी मिलेगी?

EPFO की आधिकारिक घोषणाएं और महत्वपूर्ण अपडेट्स  

EPF Advance निकासी से जुड़ी जानकारी  

नौकरी दोबारा जॉइन करने पर योगदान (contribution) संबंधी गाइडेंस  

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से जुड़े अपडेट्स  

अन्य उपयोगी वीडियो और शैक्षिक लिंक  

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भविष्य में या अतिरिक्त WhatsApp सेवा के जरिए सदस्य अपना PF बैलेंस, पिछले पांच ट्रांजेक्शन और क्लेम स्टेटस भी चेक कर सकेंगे।

EPFO आधिकारिक WhatsApp Channel कैसे जॉइन करें?

नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक पर क्लिक करें:  

  https://www.whatsapp.com/channel/0029Vb6kmH48Pgs8ftd6Kw3Y

WhatsApp ऐप खुलने पर Follow या जॉइन बटन पर टैप करें।  

वैकल्पिक रूप से EPFO के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए QR कोड को स्कैन करके भी चैनल जॉइन कर सकते हैं।

नोट: हमेशा केवल EPFO के आधिकारिक लिंक या QR कोड का ही इस्तेमाल करें। किसी अनजान नंबर या लिंक से नहीं जुड़ें।

क्यों जरूरी है इस Channel को फॉलो करना?

EPFO समय-समय पर नए नियम, स्कीम और सेवाओं की घोषणा करता रहता है। WhatsApp Channel के माध्यम से ये जानकारी समय पर और आसानी से मिल जाती है। साथ ही शैक्षिक वीडियो से आप अपनी PF अकाउंट से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर समझ सकते हैं।

अतिरिक्त टिप्स

अपना UAN और KYC हमेशा अपडेट रखें।  

PF बैलेंस और पासबुक नियमित रूप से UMANG ऐप या EPFO की आधिकारिक वेबसाइट (epfindia.gov.in) से भी चेक करते रहें।  

किसी भी व्यक्तिगत जानकारी या OTP किसी के साथ शेयर न करें।

EPFO का यह कदम डिजिटल सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। जल्दी से आधिकारिक WhatsApp Channel जॉइन करें और PF से जुड़े अपडेट्स का लाभ उठाएं।


अधिक व्यक्तिगत वित्त संबंधी टिप्स और अपडेट्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करते रहें।

Rajanish Kant
UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं लगेगा: वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित किया संशोधन l BeYourMoneyManager टीम का सुझाव

 

भारत में डिजिटल पेमेंट को और आसान और सस्ता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है। इसके अनुसार, बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर्स UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई भी सीधा या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते।

मुख्य बातें:

UPI ट्रांजेक्शन** पर ₹2,000 तक का कोई चार्ज नहीं लगेगा।

यह प्रावधान RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट पर भी लागू होगा।

बैंक या कोई भी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर न तो सीधे और न ही किसी अन्य तरीके से शुल्क वसूल सकेंगे।

यह फैसला आम लोगों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के डिजिटल लेन-देन करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए राहत भरा है। इससे UPI का इस्तेमाल और बढ़ेगा तथा डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूती मिलेगी।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

छोटे लेन-देन (जैसे किराना, ऑटो, कैब, रेस्टोरेंट बिल आदि) पूरी तरह फ्री रहेंगे।

व्यापारी भी बिना चिंता के UPI पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे।

डिजिटल भुगतान और अधिक सुरक्षित और किफायती बनेगा।

BeYourMoneyManager टीम का सुझाव:  

UPI का इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित रहें। अपना UPI पिन किसी के साथ शेयर न करें और संदिग्ध लिंक या कॉल से बचें। पैसे की बचत और सही मैनेजमेंट के लिए नियमित रूप से अपने खर्चों को ट्रैक करते रहें।

स्रोत: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना


Rajanish Kant
RBI ने संदिग्ध मनी म्यूल ट्रांजेक्शन पर 60 दिन का अस्थायी डेबिट होल्ड प्रस्तावित किया: KYC दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें जानेंl मनी Money Mule Account क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने नो योर कस्टमर (KYC) दिशा-निर्देशों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें संदिग्ध मनी म्यूल खातों और साइबर-सक्षम वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन पर अस्थायी डेबिट होल्ड लगाने का प्रावधान शामिल है। बैंक ऐसे संदिग्ध लेनदेन या खातों पर अधिकतम 60 दिनों तक अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकेंगे।

यह मसौदा सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के आदेश के बाद आया है, जिसमें RBI से ऐसी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने को कहा गया था। प्रस्तावित नियम अप्रैल 1, 2027 से लागू होने की उम्मीद है, हालांकि बैंक इसे पहले भी अपना सकते हैं।

मनी म्यूल खाता क्या है?

RBI के मसौदे के अनुसार, मनी म्यूल खाता वह खाता है जिसका इस्तेमाल जानबूझकर या अनजाने में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने, लेयर करने या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

कब लगेगा अस्थायी डेबिट होल्ड?

बैंक के ट्रांजेक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम (AI/ML टूल्स सहित) द्वारा ₹1,000 और उससे अधिक का संदिग्ध लेनदेन चिह्नित होने पर बैंक तुरंत अस्थायी डेबिट होल्ड लगा सकता है। यदि पूरा खाता संदिग्ध मनी म्यूल खाता पाया जाता है, तो पूरे खाते पर होल्ड लगाया जा सकता है। खाता स्तर का होल्ड केवल असाधारण परिस्थितियों में अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

बैंक खाताधारक को होल्ड की सूचना देगा, जिसमें कारण, हटाने की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारी का संपर्क विवरण शामिल होगा। सूचना डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी, अगर मोबाइल नंबर या ईमेल उपलब्ध हो।

ग्राहक को कितना समय मिलेगा?

खाताधारक को होल्ड की तारीख से 20 दिन का समय मिलेगा अपना स्पष्टीकरण या औचित्य पेश करने के लिए।

स्पष्टीकरण मिलने के बाद बैंक 10 दिन में निर्णय लेगा।

कोई स्पष्टीकरण न मिलने पर बैंक होल्ड की तारीख से 30 दिन में निर्णय करेगा।

कानून प्रवर्तन एजेंसी (LEA) को रेफरेंस के बाद उनके जवाब के लिए 30 दिन का समय होगा।

LEA या सक्षम प्राधिकरण से कोई विपरीत निर्देश न मिलने पर अधिकतम होल्ड अवधि 60 दिन होगी।

यदि बैंक स्पष्टीकरण से संतुष्ट होता है, तो होल्ड तुरंत हटा दिया जाएगा और खाताधारक को सूचित किया जाएगा।

किन बैंकों पर लागू होगा?

यह SOP वाणिज्यिक बैंकों, पेमेंट बैंकों, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, लोकल एरिया बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों पर लागू होगा।

RBI का यह प्रस्ताव ग्राहकों को स्पष्ट समयसीमा देने और बैंकों को साइबर धोखाधड़ी से निपटने में एकसमान प्रक्रिया अपनाने के लिए लाया गया है। इससे असली ग्राहकों को अनावश्यक लंबे समय तक खाता फ्रीज होने से राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि धोखाधड़ी रोकने के प्रयास मजबूत होंगे।

सार्वजनिक टिप्पणियां 2 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं। अधिक जानकारी के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

Rajanish Kant सोमवार, 14 सितंबर 2026
OneTag FASTag: अब बिना नया स्टिकर लगाए बैंक बदलें | पूरी प्रक्रिया और फायदे

FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत! अब आप अपना FASTag जारी करने वाला बैंक आसानी से बदल सकते हैं, बिना गाड़ी के विंडशील्ड से पुराना स्टिकर हटाए या नया टैग लगवाए। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 11 सितंबर 2026 को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में ‘OneTag’ सुविधा लॉन्च की है।

OneTag क्या है?

OneTag एक FASTag पोर्टेबिलिटी सॉल्यूशन है। इसे भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (IHMCL, NHAI द्वारा प्रमोटेड) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मिलकर विकसित किया है। इससे यूजर मौजूदा NETC FASTag को रखते हुए सिर्फ जारीकर्ता बैंक (Issuer Bank) बदल सकते हैं। Tag ID और वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) पहले जैसे ही रहेंगे।

पहले बैंक बदलने के लिए पुराना FASTag बंद करना, नया ऑनबोर्डिंग करना और नया फिजिकल टैग लगवाना पड़ता था। OneTag ने इस झंझट को खत्म कर दिया है।

OneTag के मुख्य फायदे

गाड़ी पर लगा स्टिकर वही रहेगा – नया खरीदने या चिपकाने की जरूरत नहीं।

समय और पैसा दोनों बचेंगे।

बेहतर सर्विस, कम शुल्क या अच्छी सुविधाओं वाले बैंक को चुनने की आजादी।

टोल प्लाजा पर कोई असर नहीं – सब कुछ बैकएंड में NPCI सिस्टम संभालेगा।

पुराने बैंक का वॉलेट/रिफंड/पेंडिंग ट्रांजेक्शन उसी बैंक की जिम्मेदारी रहेगी। नया बैंक सिर्फ आगे की सर्विस देगा।

कैसे इस्तेमाल करें OneTag? (चरणबद्ध प्रक्रिया)

OneTag सुविधा फिलहाल NHAI के Rajmargyatra मोबाइल ऐप के जरिए उपलब्ध है।

Rajmargyatra ऐप डाउनलोड/अपडेट करें और लॉगिन करें।  

FASTag पोर्टेबिलिटी या OneTag सेक्शन में जाएं।  

एलिजिबिलिटी चेक और सिक्योर वेरिफिकेशन पूरा करें।  

अपनी सहमति दें और नया पसंदीदा बैंक चुनें।  

नया बैंक ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी करेगा।  

पोर्टेबिलिटी सफल होने के बाद मौजूदा टैग उसी तरह काम करता रहेगा।

महत्वपूर्ण बातें याद रखें

पुराना वॉलेट बैलेंस अपने-आप नए बैंक में ट्रांसफर नहीं होता। रिफंड या क्लियरेंस पुराने बैंक से ही लें।  

सुनिश्चित करें कि आपका मौजूदा FASTag लो बैलेंस या हॉटलिस्टेड स्टेटस में न हो।  

कई प्रमुख बैंक इस सुविधा में शामिल हो रहे हैं।

यह कदम FASTag यूजर्स को ज्यादा विकल्प और आसानी देता है। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह अब FASTag भी पोर्टेबल हो गया है।

BeYourMoneyManager.com पर हम हमेशा ऐसी स्मार्ट फाइनेंशियल सुविधाओं की जानकारी लाते रहते हैं जो आपके समय, पैसे और मेहनत की बचत करें। FASTag रिचार्ज, टोल खर्च मैनेजमेंट या वाहन से जुड़े खर्चों पर नियंत्रण रखने के और टिप्स के लिए हमारी साइट को नियमित रूप से चेक करते रहें।

(नोट: आधिकारिक अपडेट के लिए NHAI/Rajmargyatra ऐप या संबंधित बैंक की वेबसाइट चेक करें। प्रक्रिया में बदलाव संभव है।)




Rajanish Kant शनिवार, 12 सितंबर 2026
NSE IPO 2026: प्राइस बैंड ₹1,700-1,785, 17 सितंबर से सब्सक्रिप्शन शुरू – पूरी डिटेल | BeYourMoneyManager

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ अब आखिरकार लॉन्च होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय कर दिया है।  

यह ऑफर 17 सितंबर 2026 को सार्वजनिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए बिडिंग 16 सितंबर को होगी।  

आईपीओ साइज और वैल्यूएशन  

यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें मौजूदा शेयरधारक लगभग 12.64 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे। ऊपरी प्राइस बैंड पर इश्यू साइज करीब ₹22,561-22,569 करोड़ रहने का अनुमान है। इससे NSE की मार्केट कैप लगभग ₹4.42 लाख करोड़ हो जाएगी। यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक बनने जा रहा है।  

नोट: कंपनी को इस आईपीओ से कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी क्योंकि यह फ्रेश इश्यू नहीं है।  

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए महत्वपूर्ण जानकारी  

लॉट साइज**: 8 शेयर  

मिनिमम इन्वेस्टमेंट** (ऊपरी बैंड पर): ₹14,280  

रिटेल कैटेगरी के लिए 35% शेयर आरक्षित  

क्यूआईबी के लिए 50% और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए 15% आरक्षित  

पात्र कर्मचारियों को ₹170 प्रति शेयर का डिस्काउंट मिलेगा  

प्रमुख तारीखें  

| घटना                  | तारीख              |

|-----------------------|--------------------|

| एंकर बिडिंग           | 16 सितंबर 2026    |

| सब्सक्रिप्शन शुरू     | 17 सितंबर 2026    |

| सब्सक्रिप्शन बंद      | 21 सितंबर 2026    |

| अलॉटमेंट              | 22 सितंबर 2026 (अपेक्षित) |

| शेयर क्रेडिट/रिफंड    | 23 सितंबर 2026    |

| लिस्टिंग (BSE पर)     | 24 सितंबर 2026 (अपेक्षित) |

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?  

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और डेरिवेटिव्स मार्केट में इसकी मजबूत पकड़ है। रिटेल ट्रेडिंग में बढ़ोतरी से कंपनी को काफी फायदा हुआ है। हालांकि, आईपीओ साइज को पहले के अनुमान से कम किया गया है और प्राइस बैंड भी कुछ शुरुआती उम्मीदों से कम है।  

निवेश करने से पहले रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) जरूर पढ़ें, अपनी रिस्क क्षमता का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।  

BeYourMoneyManager पर हम आपको NSE IPO सहित अन्य महत्वपूर्ण बाजार अपडेट्स और स्मार्ट इन्वेस्टमेंट टिप्स देते रहेंगे। अपडेट्स के लिए साइट को बुकमार्क करें और हमारे साथ जुड़े रहें!  

(स्रोत: आधिकारिक घोषणाएं और विश्वसनीय वित्तीय मीडिया रिपोर्ट्स। जानकारी समय के साथ बदल सकती है।)

Rajanish Kant शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
SEBI Demat 2.0 लॉन्च: टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड्स का पायलट प्रोजेक्ट – FAQs और पूरी डिटेल्स

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने “Demat 2.0” नाम से एक महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। यह प्रोजेक्ट कॉरपोरेट बॉन्ड्स को डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) के जरिए टोकनाइज करने के लिए शुरू किया गया है।

यह पहल RBI गवर्नर संजय मालहोत्रा और SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में संयुक्त रूप से घोषित की। SEBI ने इसके साथ FAQs भी जारी किए हैं।

Demat 2.0 क्या है?

Demat 2.0 अगली पीढ़ी का फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसमें कॉरपोरेट बॉन्ड्स को डिजिटल टोकन के रूप में जारी, होल्ड, ट्रेड और सेटल किया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि बॉन्ड का कानूनी स्वरूप, अधिकार, दायित्व और रेगुलेटरी ट्रीटमेंट बिल्कुल नहीं बदलेगा। सिर्फ टेक्नोलॉजी बदलेगी। बॉन्ड का ISIN, कूपन, मैच्योरिटी और निवेशक अधिकार पहले जैसे ही रहेंगे।

निवेशकों को नया डीमैट अकाउंट चाहिए?

नहीं। Demat 2.0 अकाउंट मौजूदा डीमैट अकाउंट का ही विस्तार है। मौजूदा KYC का इस्तेमाल होगा। निवेशकों को सिर्फ मौजूदा डीमैट से लिंक्ड Demat 2.0 अकाउंट और बैंक का CBDC (e₹) वॉलेट चाहिए।

ट्रेडिंग कैसे होगी?

कोई नया अलग एक्सचेंज नहीं बनेगा। मौजूदा प्लेटफॉर्म पर ही काम चलेगा।

मुख्य फायदे

इश्यू के समय फंड्स उसी दिन मिल सकते हैं (पहले 2-3 दिन लगते थे)।

सेकेंडरी मार्केट में भी तुरंत सेटलमेंट।

ब्याज और रिडेम्प्शन पेमेंट स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए ऑटोमेटिक रूप से e₹ में CBDC वॉलेट में क्रेडिट होंगे।

अब तक कितना इश्यू हो चुका है?

पायलट के पहले फेज में तीन कंपनियों ने कुल ₹1,025 करोड़ के टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किए हैं:

REC: 7 सितंबर 2026 को ₹500 करोड़ (18 निवेशक)

L&T: 9 सितंबर को ₹500 करोड़ (4 निवेशक)

IIFL: 9 सितंबर को ₹25 करोड़ (1 निवेशक)

पायलट तीन चरणों में चलेगा:

संस्थानिक निवेशकों के साथ इश्यू

रिटेल निवेशकों के साथ सेकेंडरी ट्रेडिंग

अन्य इंस्ट्रूमेंट्स तक विस्तार

नोट: अभी रिटेल निवेशक इस पायलट में भाग नहीं ले सकते। बाद के फेज में उन्हें शामिल किया जाएगा।

यह भारत के बॉन्ड मार्केट को तेज, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। निवेश से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर चेक करें।



Rajanish Kant
NSE IPO 2026: RoC में पेपर्स फाइल, प्राइस बैंड 11 सितंबर को, इश्यू 17 से खुलेगा – पूरी डिटेल्स
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने लंबे समय से प्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, NSE ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास आईपीओ से संबंधित पेपर्स फाइल कर दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, NSE का प्राइस बैंड शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे घोषित होने की संभावना है। एंकर इन्वेस्टर्स के लिए आईपीओ 16 सितंबर को खुलेगा, जबकि आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन विंडो 17 सितंबर से 21 सितंबर तक रहेगी। लिस्टिंग 24 सितंबर को होने की उम्मीद है।

यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, यानी NSE को इससे कोई नया फंड नहीं मिलेगा। मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इससे पहले कई शेयरधारकों (जैसे SBI, Morgan Stanley, GIC Re आदि) ने प्रस्तावित शेयरों की संख्या कम कर दी थी। SEBI ने हाल ही में इस इश्यू को मंजूरी दी थी।

NSE का यह आईपीओ भारत के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा चर्चा वाले पब्लिक ऑफरिंग्स में से एक माना जा रहा है। निवेशकों को प्राइस बैंड की घोषणा का इंतजार है। अंतिम डिटेल्स आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेंगी।

नोट: यह जानकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेज (RHP) जरूर पढ़ें और वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

 

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