रूस के सेंट्रल बैंक ने 2026 में अब तक 22 टन सोना बेच दिया है। बढ़ते बजट घाटे, कमजोर रूबल और तेल-गैस राजस्व में कमी के कारण सोने के भंडार घट रहे हैं। विस्तृत विश्लेषण पढ़ें।
वैश्विक सोने के बाजार पर नजर रखने वाले Kitco News के अनुसार, रूस के सेंट्रल बैंक (Bank of Russia) ने साल 2026 की शुरुआत से अब तक लगभग 22 टन सोना बेच दिया है। यह बिक्री मुख्य रूप से देश के बढ़ते बजट घाटे को financer करने के लिए की जा रही है।
मुख्य बातें:
मार्च 2026 के अंत तक रूस का बजट घाटा 4.6 ट्रिलियन रूबल (लगभग 61.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर) पहुंच गया।
कम तेल और गैस राजस्व, बढ़ते सरकारी खर्च (खासकर यूक्रेन युद्ध संबंधी) और कमजोर रूबल ने इस स्थिति को और बदतर बनाया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 तक रूस के सोने के भंडार 74.1 मिलियन ट्रॉय औंस रह गए हैं, जो साल की शुरुआत में 74.8 मिलियन ट्रॉय औंस थे। यानी 0.7 मिलियन औंस (लगभग 22 टन) की कमी आई है।
मॉस्को एक्सचेंज पर सोने की ट्रेडिंग बढ़ी
मार्च 2026 में मॉस्को एक्सचेंज पर सोने की ट्रेडिंग वॉल्यूम पिछले साल के मुकाबले 3.5 गुना बढ़कर 42.6 टन पहुंच गया। रुपये में यह वॉल्यूम 5 गुना बढ़कर 534.4 बिलियन रूबल हो गया। इसमें स्पॉट और स्वैप दोनों ट्रांजेक्शन शामिल हैं।
विशेषज्ञों का क्या कहना है?
Natalia Milchakova (Freedom Finance Global) के अनुसार, बजट घाटे को कवर करने के लिए सोना बेचना विकासशील देशों के सेंट्रल बैंकों की आम रणनीति है। वे सोने को उच्च कीमत पर बेचकर लिक्विडिटी हासिल करते हैं।
Nikolay Dudchenko (Finam) का कहना है कि रूस ने 2002-2025 के बीच 1900 टन से ज्यादा सोना खरीदा था, लेकिन अब जरूरत पड़ने पर उसे बेच रहा है। कई सेंट्रल बैंक इसी रणनीति का इस्तेमाल करते हैं – कम कीमत पर खरीदें, ऊंची कीमत पर बेचें।
सोने की कीमत पर क्या असर?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमत $5,000 प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। रूस के सोने की बिक्री से शॉर्ट टर्म में बाजार पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है।
भारत के निवेशकों के लिए महत्व
सोने का सुरक्षित निवेश: रूस जैसे देशों द्वारा सोने की बिक्री से वैश्विक सप्लाई बढ़ सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति और डॉलर की कमजोरी सोने को आकर्षक बनाए रखती है।
Diversification: भारतीय निवेशक सोने को पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाकर जोखिम कम कर सकते हैं। ETF, Sovereign Gold Bonds (SGB) या फिजिकल गोल्ड में निवेश के विकल्प उपलब्ध हैं।
रूबल की कमजोरी: रूस की स्थिति दिखाती है कि स्थानीय मुद्रा कमजोर होने पर सेंट्रल बैंक को सोने जैसे एसेट बेचने पड़ सकते हैं।
निष्कर्ष: रूस की सोने की बिक्री उसके आर्थिक दबाव को दर्शाती है। वैश्विक स्तर पर सोना अभी भी मजबूत हेज बना हुआ है। निवेश से पहले हमेशा अपनी जोखिम क्षमता और मार्केट रिसर्च जरूर करें।
स्रोत: Kitco News, The Moscow Times, UNITED24 Media।
अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश सलाह नहीं है।
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