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LIC और EPFO में कितना अनक्लेम्ड पैसा पड़ा है? सरकार ने जारी किए ताजा आंकड़े 2026 | ₹16,000 करोड़ से ज्यादा अनक्लेम्ड फंड - BeYourMoneyManager

 
LIC में ₹7,318.50 करोड़ और EPFO के इनऑपरेटिव अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ अनक्लेम्ड/इनऑपरेटिव फंड। जानिए कैसे चेक करें और क्लेम करें अपना पैसा। पूरी डिटेल्स यहां।

LIC और EPFO में पड़ा है हजारों करोड़ का अनक्लेम्ड पैसा! सरकार ने संसद में दिए ताजा आंकड़े

अगर आपने या आपके परिवार ने LIC पॉलिसी ली थी या EPF अकाउंट खुलवाया था, तो हो सकता है कि आपका पैसा अनक्लेम्ड पड़ा हो। केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में LIC और EPFO से जुड़े अनक्लेम्ड फंड के最新 आंकड़े जारी किए हैं। कुल मिलाकर 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि इन संस्थानों में पड़ी हुई है।

LIC में अनक्लेम्ड मनी: ₹7,318.50 करोड़  

31 मार्च 2026 तक Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास कुल ₹7,318.50 करोड़ अनक्लेम्ड राशि जमा है। इसमें:  

पॉलिसीधारकों का मूल अनक्लेम्ड अमाउंट: ₹5,564.55 करोड़  

इस पर अर्जित आय (Income Accrued): ₹1,753.95 करोड़

EPFO में इनऑपरेटिव अकाउंट्स: ₹9,330.56 करोड़  

EPFO के मामले में सरकार ने स्पष्ट किया कि कोई "अनक्लेम्ड" अकाउंट नहीं है, लेकिन इनऑपरेटिव EPF अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ की राशि पड़ी हुई है (31 मार्च 2026 तक)।

अनक्लेम्ड फंड को वापस पाने के लिए सरकार और संस्थान क्या कर रहे हैं?

LIC के प्रयास:  

LIC पॉलिसीधारकों और उनके नॉमिनी/वारिसों तक पैसा पहुंचाने के लिए कई कदम उठा रही है:  

LIC वेबसाइट (licindia.in) पर नाम, DOB और PAN से अनक्लेम्ड अमाउंट सर्च करने की सुविधा।  

ब्रांचेस द्वारा पत्र, SMS रिमाइंडर।  

10 साल से ज्यादा पुराने मामलों में NEFT डिटेल्स मांगकर फॉलो-अप।  

एजेंट्स और बिमा सखी के जरिए लोकल लेवल पर ट्रेसिंग।  

क्रेडिट ब्यूरो एजेंसी की मदद से एड्रेस और मोबाइल नंबर ट्रेस करना।  

वित्त मंत्रालय के "Your Money-Your Right" कैंपेन में सक्रिय भागीदारी।

EPFO के 4-पॉइंट एक्शन प्लान:  

KYC डिटेल्स के आधार पर इनऑपरेटिव अकाउंट्स की पहचान और कैटेगरीकरण।  

₹1,000 या उससे कम बैलेंस वाले आधार-वेरिफाइड अकाउंट्स में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऑटो-सेटलमेंट।  

सीधे बैंक अकाउंट में क्रेडिट (बिना नया क्लेम फॉर्म भरे)।  

सोशल मीडिया और Nidhi Aapke Nikat (NAN) 2.0 कैंप के जरिए जागरूकता।

10 साल बाद क्या होता है अनक्लेम्ड LIC फंड?  

IRDAI के नियमों के अनुसार 10 साल से ज्यादा अनक्लेम्ड राशि Senior Citizens’ Welfare Fund (SCWF) में ट्रांसफर कर दी जाती है। LIC हर साल 1 मार्च तक योग्य राशि ट्रांसफर करती है।

अपना अनक्लेम्ड पैसा कैसे चेक और क्लेम करें? (टिप्स)

LIC के लिए: licindia.in पर जाएं → Unclaimed Policy Dues सर्च करें।  

EPFO के लिए: Unified Member Portal (umang.gov.in या epfindia.gov.in) पर लॉगिन करें, KYC अपडेट करें और क्लेम स्टेटस चेक करें।  

आधार, PAN और बैंक डिटेल्स अपडेट रखें।  

पुरानी पॉलिसी/PF अकाउंट की जानकारी परिवार के सदस्यों को दें।

निष्कर्ष:  

अनक्लेम्ड मनी आपकी मेहनत की कमाई है। छोटी-छोटी लापरवाही से लाखों-करोड़ों रुपये अनक्लेम्ड हो जाते हैं। नियमित रूप से अपने फाइनेंशियल अकाउंट्स की समीक्षा करें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपडेट रखें।

आर्टिकल स्रोत: लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का लिखित जवाब (20 जुलाई 2026)


Rajanish Kant मंगलवार, 21 जुलाई 2026
सोना नरम, चांदी में रिबाउंड: फेड रेट हाइक की आशंका और जियो-पॉलिटिकल टेंशन से Precious Metals पर असर | Kitco AM Report 20 जुलाई 2026

 


20 जुलाई 2026 को सोने में हल्की गिरावट और चांदी में रिबाउंड देखा गया। फेड रेट हाइक की संभावना, US-Iran तनाव और ऊंचे तेल-यील्ड ने मेटल्स को सीमित किया। विस्तृत विश्लेषण, तकनीकी लेवल और निवेश सलाह पढ़ें।

सोना नरम पड़ा, चांदी में उछाल: फेड रेट रिस्क और हॉर्मुज तनाव ने Precious Metals को रोका

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में हल्की नरमी देखी गई, जबकि चांदी में रिबाउंड नजर आया। Kitco AM Report के अनुसार, US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद फेडरल रिजर्व की दर बढ़ाने की आशंका और मजबूत डॉलर ने प्रीशियस मेटल्स की तेजी को सीमित कर दिया।

वर्तमान कीमतें (20 जुलाई 2026):  

स्पॉट गोल्ड:** लगभग $4,012 प्रति औंस (0.13% की गिरावट)  

स्पॉट सिल्वर:** लगभग $56.73 प्रति औंस (1.62% की बढ़ोतरी)  


क्यों आई नरमी? मुख्य कारण

फेड रेट हाइक की आशंका: हालिया आर्थिक डेटा (रिटेल सेल्स, जॉबलेस क्लेम्स, फिलाडेल्फिया Fed मैन्युफैक्चरिंग) मजबूत आने के बाद बाजार अब जुलाई फेड मीटिंग में होल्ड और बाद में रेट हाइक की संभावना जता रहे हैं। इससे 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 4.57% के आसपास पहुंच गया और US Dollar Index (DXY) 100.87 पर मजबूत हुआ।

जियो-पॉलिटिकल टेंशन: US और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ी तनाव की वजह से क्रूड ऑयल $90 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इससे महंगाई का खतरा बढ़ा, जो नॉन-यील्डिंग एसेट गोल्ड के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

टेक्निकल पोजीशन: गोल्ड $4,023-$4,065 के महत्वपूर्ण रिट्रेसमेंट जोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। सिल्वर पिछले हफ्ते के लो से रिकवर हुआ है लेकिन $58.53-$59.44 जोन से अभी भी नीचे है।

तकनीकी विश्लेषण (Gold & Silver)

गोल्ड:  

निकट अवधि में बेयरिश बायस।  

सपोर्ट लेवल: $3,982 → $3,947 → $3,886  

रेजिस्टेंस लेवल: $4,023 → $4,065  

$3,982 से नीचे ब्रेकडाउन पर और गिरावट संभव।

सिल्वर:  

रिबाउंड के बावजूद बेयरिश स्ट्रक्चर।  

सपोर्ट: $55.60 → $54.49  

रेजिस्टेंस: $57.60 → $58.53  

$58.53 के ऊपर क्लोज पर तेजी मजबूत हो सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)  

वर्तमान में गोल्ड और सिल्वर दोनों शॉर्ट-टर्म प्रेशर में हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स (मुद्रा अवमूल्यन, सेंट्रल बैंक खरीदारी और जियो-पॉलिटिकल रिस्क) मजबूत बने हुए हैं।  

डिप-बायिंग स्ट्रैटजी**: $3,950-$3,980 के आसपास गोल्ड में SIP या लंपसम खरीदारी पर विचार करें।  

चांदी**: इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण चांदी गोल्ड से ज्यादा वोलेटाइल रहती है – रिबाउंड पर प्रॉफिट बुकिंग और नए लो पर एंट्री दोनों ऑप्शन।  

पोर्टफोलियो में 8-15% Precious Metals रखना विविधीकरण के लिए फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष  

फेड की नीति, तेल की कीमतें और हॉर्मुज की स्थिति अगले कुछ दिनों में मेटल्स की दिशा तय करेंगी। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए लेकिन लॉन्ग-टर्म गोल्ड और सिल्वर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। कीमतें बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।


Rajanish Kant
भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग संकेत, कीमतें घटीं लेकिन ज्वेलरी और ETF डिमांड मजबूत | Gold Market Update 2026

भारत सोने का बाजार जुलाई 2026 अपडेट – जून में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट, ज्वेलरी डिमांड बढ़ी, ETF और डिजिटल गोल्ड में इनफ्लो मजबूत लेकिन आयात घटा। निवेशकों के लिए पूरी जानकारी BeYourMoneyManager.com

भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग के संकेत, निवेशकों के लिए क्या है मौका?


नई दिल्ली। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सोने के बाजार में मिश्रित संकेत दिख रहे हैं। जून महीने में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद जुलाई में स्थिरता आई है। भरपूर घरेलू सप्लाई के कारण लोकल मार्केट अभी भी लैंडेड प्राइस पर डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है।


सोने की कीमतों में गिरावट

जून में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत (LBMA) 11% से ज्यादा गिरकर US$4,000/oz के आसपास पहुंच गई, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे कम स्तर था। घरेलू MCX स्पॉट प्राइस भी करीब 10% घटकर INR 1,41,000/10g के आसपास पहुंचा। जुलाई में मामूली रिकवरी हुई है, लेकिन साल-दर-साल (YTD) अंतरराष्ट्रीय कीमतें 7% नीचे हैं, जबकि भारतीय कीमतें 6% ऊपर हैं।


मुख्य कारण: मजबूत US डॉलर, अमेरिका में रेट हाइक की उम्मीदें और इक्विटी मार्केट की तरफ शिफ्ट। हालांकि, कीमतों में गिरावट ने खरीदारों को मौका दिया, जिससे गिरावट सीमित रही।


घरेलू बाजार में डिस्काउंट

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद डिस्काउंट US$150/oz तक पहुंच गया था, जो अब जुलाई के पहले दो हफ्तों में औसतन US$20/oz रह गया है। मिड-जुलाई में यह US$40/oz के आसपास है। पुरानी ज्वेलरी को नई ज्वेलरी में एक्सचेंज करने से घरेलू सप्लाई बढ़ी है, जिससे आयात की जरूरत कम हुई।


ज्वेलरी डिमांड में सुधार

मई-जून के मध्य मौसमी सुस्ती और अधिक मास के बाद ज्वेलरी खरीदारी में तेजी आई है। कीमतों में गिरावट और रिटेलर्स की डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर जैसी प्रमोशन्स ने मदद की। शादी के अलावा फेस्टिव सीजन (अगस्त से) की तैयारी में मैन्युफैक्चरर्स को ऑर्डर मिल रहे हैं।


लिस्टेड ज्वेलर्स ने अप्रैल-जून क्वार्टर में 30-60% YoY रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज अब 43-70% तक सेल्स का हिस्सा बन गया है।


निवेश डिमांड: ETF और डिजिटल गोल्ड मजबूत

Gold ETF:** जून में INR 34.4 अरब (US$356 मिलियन) का इनफ्लो – फरवरी के बाद सबसे ज्यादा। जुलाई की शुरुआत में भी INR 12.1 अरब का इनफ्लो। होल्डिंग्स बढ़कर 119 टन हो गईं।

डिजिटल गोल्ड:** UPI के जरिए खरीदारी बढ़ी। जून में वैल्यू INR 25.5 अरब और वॉल्यूम 1.7 टन पहुंचा।


दूसरी ओर, बार और कॉइन की मांग ठंडी पड़ी।


सोने के आयात में कमी

जून में आयात US$1.97 बिलियन रहा, जो मई से 42% कम और पिछले साल के जून से वॉल्यूम में कम है। पुरानी गोल्ड सप्लाई बढ़ने से फ्रेश इंपोर्ट की जरूरत घटी। कुल मर्चेंडाइज इंपोर्ट में गोल्ड की हिस्सेदारी मात्र 3% रह गई।


निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)

ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए:** कीमत स्थिर होने पर अच्छा मौका, खासकर प्रमोशन्स का फायदा लें।

निवेशकों के लिए:** ETF और डिजिटल गोल्ड में डिप पर खरीदारी अच्छी रणनीति हो सकती है। लॉन्ग टर्म में सोना पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए बेहतर ऑप्शन बना हुआ है।

ध्यान दें:** कीमतें US डॉलर, ग्लोबल इकोनॉमी और घरेलू फैक्टर्स पर निर्भर करेंगी। हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से खरीदें और टैक्स/मेकिंग चार्जेस चेक करें।


निष्कर्ष: भारतीय सोने का बाजार अभी मिश्रित मांग दिखा रहा है। ज्वेलरी और पेपर गोल्ड (ETF/डिजिटल) में सकारात्मक संकेत हैं, जबकि फिजिकल बार-कॉइन और आयात में सुस्ती है। लंबी अवधि में सोना मजबूत एसेट साबित होता रहा है।


यह लेख World Gold Council की रिपोर्ट पर आधारित मूल विश्लेषण है। निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।



Rajanish Kant सोमवार, 20 जुलाई 2026
2026 गोल्ड मिड-ईयर आउटलुक: सोने की कीमतें H2 में ₹3,40,000 तक रहेंगी? WGC रिपोर्ट में पूरी डिटेल्स

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट के अनुसार सोने की कीमतें दूसरे हाफ में $4,100 के आसपास रेंजबाउंड रह सकती हैं। जानिए H1 में क्या हुआ, H2 के स्केनैरियो, सेंट्रल बैंक डिमांड और निवेशकों के लिए सलाह।

2026 गोल्ड मिड-ईयर आउटलुक: सोने की कीमतें H2 2026 में क्या करेंगी? WGC रिपोर्ट का पूरा विश्लेषण

निवेशकों के लिए सोना हमेशा से सुरक्षित आश्रय (safe haven) रहा है। साल 2026 के पहले छह महीनों में सोने ने बेहद उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया। जनवरी में यह US$5,500 प्रति औंस के ऊपर नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, लेकिन जून के अंत तक US$4,000 के नीचे आ गया। साल-दर-साल (YTD) करीब 7% की गिरावट के बावजूद, पिछले 12 महीनों में सोना अब भी टॉप परफॉर्मिंग एसेट्स में शामिल है।

World Gold Council (WGC) की नई रिपोर्ट Gold Mid-Year Outlook 2026: Point Break में H2 2026 के लिए क्या अनुमान है? आइए विस्तार से समझते हैं।

H1 2026 में सोने का रोलरकोस्टर सफर

  • जनवरी में जियोपॉलिटिकल टेंशन और ऑप्शंस एक्टिविटी के कारण सोना $5,500+ पर पहुंचा।
  • जून में तेज गिरावट आई और कीमत $4,000 के नीचे चली गई।
  • वोलेटिलिटी 50% से ऊपर पहुंच गई, जो अब 30% के आसपास है (20-वर्षीय औसत 17%)।
  • एशियन ट्रेडिंग सेशंस ने कीमत को सपोर्ट दिया — एशिया में कई सेशंस पॉजिटिव रहे।

GRAM मॉडल के अनुसार रिस्क, अनिश्चितता, मोमेंटम और FX फैक्टर्स ने H1 परफॉर्मेंस को सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

H2 2026 के लिए WGC का बेसकेस अनुमान

वर्तमान स्तरों पर सोने की कीमत मैक्रो इकोनॉमिक कंसेंसस (मध्यम विकास, कूलिंग लेकिन ऊंची मुद्रास्फीति, सीमित रेट हाइक्स) के अनुरूप है।

मुख्य बिंदु:

  • अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो सोना US$4,100 प्रति औंस ±5% के दायरे में रहेगा।
  • अपसाइड स्केनैरियो: खराब आर्थिक आंकड़े, नया जियोपॉलिटिकल शॉक, या रेट कट की उम्मीद बढ़ने पर कीमत $4,500 या उससे ऊपर जा सकती है। मजबूत सिग्नल पर $5,000+ भी संभव।
  • डाउनसाइड रिस्क: मजबूत ग्रोथ, बढ़ती यील्ड्स और शांत बाजार में 10-15% गिरावट आ सकती है, लेकिन $4,000 से नीचे गिरावट पर बारगेन हंटिंग (डिप खरीदारी) सपोर्ट देगी।

सेंट्रल बैंक डिमांड मजबूत रहेगी

सेंट्रल बैंक लगातार नेट बायर बने हुए हैं। WGC के अनुसार 2026 में खरीदारी लॉन्ग-टर्म औसत (लगभग 600 टन) से ऊपर रह सकती है। भारत और चीन जैसे देशों की पॉलिसी बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

भारत में सोना सांस्कृतिक और निवेश दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

  • आभूषण मांग आर्थिक विकास और त्योहारों पर निर्भर करेगी।
  • ETFs और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश बढ़ सकता है अगर डॉलर कमजोर होता है या अनिश्चितता बढ़ती है।
  • रुपये में कीमत: वर्तमान $4,100 के आसपास (USDINR ~83-84 मानकर) प्रति 10 ग्राम लगभग ₹2,80,000–₹2,90,000 के स्तर पर ट्रेड कर सकता है। अपसाइड में ₹3,40,000+ तक जा सकता है।

सलाह: पोर्टफोलियो में 5-10% सोना रखना डाइवर्सिफिकेशन के लिए अच्छा रहता है। SIP या गोल्ड ETF के जरिए व्यवस्थित निवेश करें।

निष्कर्ष

2026 का दूसरा हिस्सा सोने के लिए रेंजबाउंड लेकिन संभावनाओं से भरा दिख रहा है। जियोपॉलिटिक्स, US चुनाव, रेट पाथ और एशियन डिमांड मुख्य ट्रिगर्स होंगे। WGC रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर आकर्षक हैं, लेकिन ब्रेकआउट के लिए मजबूत कैटालिस्ट की जरूरत है।

निवेश से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल, फाइनेंशियल गोल्स और टैक्स इम्प्लिकेशन्स को ध्यान में रखें। हमेशा SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर से सलाह लें।

यह लेख World Gold Council की Gold Mid-Year Outlook 2026 रिपोर्ट पर आधारित है। कीमतें बाजार की स्थिति पर निर्भर करती हैं। निवेश बाजार जोखिम के अधीन है।


Rajanish Kant शुक्रवार, 17 जुलाई 2026
सोने की कीमत $4000 पर दबाव में, US रिटेल सेल्स में 0.2% बढ़ोतरी से Fed रेट हाइक की संभावना मजबूत | जुलाई 2026 Gold News

US रिटेल सेल्स जून में 0.2% बढ़ने से सोने की कीमत $4000 के स्तर पर संघर्ष कर रही है। Fed की ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से निवेशकों पर असर। भारत में गोल्ड प्राइस आउटलुक और निवेश सलाह पढ़ें।

सोने की कीमत $4000 पर दबाव में: अमेरिकी रिटेल सेल्स बढ़ने से Fed रेट हाइक की उम्मीदें मजबूत

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें मंगलवार को दबाव में रहीं। अमेरिकी रिटेल सेल्स जून महीने में 0.2% बढ़ने की खबर के बाद गोल्ड $4000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर पर संघर्ष कर रहा है।

US Commerce Department के आंकड़े  

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, जून 2026 में रिटेल सेल्स 0.2% बढ़ी, जो मई के संशोधित 1.0% बढ़ोतरी के बाद आई। पिछले 12 महीनों में रिटेल सेल्स कुल 6.7% ऊपर है। हालांकि कोर रिटेल सेल्स (वाहन बिक्री को छोड़कर) 0.2% घटी, जो अर्थव्यवस्था की मिश्रित तस्वीर पेश करती है।

गोल्ड प्राइस रिएक्शन  

Kitco News के अनुसार, स्पॉट गोल्ड $4,001.40 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जो दिन के दौरान 1.43% की गिरावट दर्शाता है। निवेशक अब मजबूत उपभोक्ता खर्च को देखते हुए फेडरल रिजर्व के रुख पर नजर रखे हुए हैं।

क्यों दबाव में है गोल्ड?  

मजबूत रिटेल सेल्स डेटा बताता है कि अमेरिकी उपभोक्ता अभी भी महंगाई के बावजूद खर्च करने की स्थिति में हैं। इससे फेडरल रिजर्व को मुद्रास्फीति नियंत्रण पर फोकस करने का मौका मिलता है, जिससे साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बनती है। ऊंची ब्याज दरें गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट के लिए नुकसानदायक होती हैं क्योंकि अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब?  

MCX गोल्ड**: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। रुपये की मजबूती या कमजोरी भी प्रभावित करेगी।

भौतिक सोना**: शादी-फंक्शन सीजन और त्योहारों को देखते हुए लंबी अवधि में डिमांड मजबूत रहने की उम्मीद।

डिजिटल गोल्ड/SGB/Gold ETF**: जो निवेशक कम उतार-चढ़ाव चाहते हैं, उनके लिए अच्छा विकल्प।

विश्लेषक क्या कहते हैं?  

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, हालांकि डेटा मिश्रित है, लेकिन उपभोक्ता मजबूती फेड को रेट हाइक के लिए जगह दे सकती है। इससे शॉर्ट टर्म में गोल्ड पर दबाव रह सकता है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगाई और सेंट्रल बैंक खरीदारी लंबी अवधि में सपोर्ट देगी।

निवेश सलाह (Beyourmoneymanager.com)  

डिप बायिंग: $3900-3950 के आसपास मजबूत सपोर्ट मिलने पर खरीदारी पर विचार करें।

Diversification: पोर्टफोलियो का 5-15% सोने में रखें (जोखिम प्रोफाइल के अनुसार)।

Sovereign Gold Bonds: टैक्स फ्री रिटर्न और ब्याज का फायदा लें।

हमेशा SIP/लंबी अवधि की रणनीति अपनाएं, शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से बचें।

निष्कर्ष  

US रिटेल सेल्स में बढ़ोतरी ने सोने को तुरंत दबाव में डाला है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताएं गोल्ड को आकर्षक बनाए रखती हैं। निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर सतर्क रहना चाहिए और अपनी फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार जोखिम के अधीन हैं।


Rajanish Kant गुरुवार, 16 जुलाई 2026
Income Tax Department (आयकर विभाग) ने FY 2026-27 में अब तक 7.73 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर जमा किए, 16.11% की मजबूत वृद्धि | Corporate Tax भी बढ़ा

FY 2026-27 में आयकर विभाग ने 7,73,000 करोड़ रुपये से अधिक प्रत्यक्ष कर वसूला है। 16.11% की बढ़ोतरी के साथ कॉर्पोरेट टैक्स 3.35 लाख करोड़ और नॉन-कॉर्पोरेट 4.11 लाख करोड़ पहुंचा। रिफंड 1.22 लाख करोड़ दिए गए। विस्तार से जानें।

आयकर विभाग ने FY 2026-27 में अब तक रचा रिकॉर्ड: 7.73 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर संग्रह, 16.11% की जबरदस्त वृद्धि

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक शानदार प्रदर्शन किया है। विभाग ने 7,73,000 करोड़ रुपये से अधिक प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) जमा किया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि की तुलना में 16.11 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कर अनुपालन में सुधार को दर्शाता है।

कर संग्रह का ब्योरा

कॉर्पोरेट टैक्स**: 3,35,000 करोड़ रुपये से अधिक  

नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स** (मुख्यतः व्यक्तिगत आयकर): 4,11,000 करोड़ रुपये  

कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह: **7,73,000 करोड़ रुपये

कॉर्पोरेट क्षेत्र से अच्छी वसूली के साथ-साथ सैलरीड क्लास और अन्य व्यक्तिगत करदाताओं के योगदान ने भी कुल आंकड़े को मजबूत बनाया है।

रिफंड का आंकड़ा

करदाताओं को राहत देते हुए आयकर विभाग ने अब तक 1,22,000 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए हैं। समय पर रिफंड जारी करना विभाग की पारदर्शिता और करदाता-अनुकूल नीति का प्रमाण है।

इस बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक संकेत: मजबूत कर संग्रह से सरकार के पास विकास योजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

बेहतर टैक्स कंप्लायंस: डिजिटल ट्रैकिंग, फेसलेस असेसमेंट और बेहतर रिटर्न फाइलिंग सिस्टम के कारण कर चोरी कम हुई है और स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ा है।

व्यक्तिगत करदाताओं के लिए: अगर आप सैलरीड क्लास हैं तो TDS और ऑनलाइन फाइलिंग की आसानी से फायदा उठा रहे हैं। नई टैक्स रिजीम चुनने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

आपके लिए टिप्स (Tax Planning 2026-27)

ITR फाइलिंग की अंतिम तिथि से पहले सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखें।

Section 80C, 80D, 80G जैसी छूट का पूरा लाभ उठाएं।

निवेश को टैक्स-एफिशिएंट बनाएं – ELSS, PPF, NPS आदि विकल्पों पर ध्यान दें।

बड़े रिफंड की उम्मीद है तो Form 16 और फॉर्म 26AS नियमित चेक करें।

निष्कर्ष  

आयकर विभाग का यह रिकॉर्ड प्रदर्शन भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और डिजिटल टैक्सेशन सिस्टम की सफलता को दिखाता है। सरकार के लक्ष्य को हासिल करने में यह आंकड़ा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। करदाताओं के रूप में हमें भी ईमानदार टैक्स फाइलिंग के साथ इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए।




Rajanish Kant बुधवार, 15 जुलाई 2026
सोने की कीमतें $4100 के रेजिस्टेंस को टेस्ट कर रही हैं! US डेटा के बाद तेज उछाल, निवेशकों के लिए बड़ा अवसर | BeYourMoneyManager.com

सोने की कीमतें $4000 के स्तर के आसपास volatile ट्रेडिंग के बाद $4100 के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस को टेस्ट कर रही हैं। US CPI रिपोर्ट और फेड की टिप्पणियों के बीच तेज रिकवरी जानें। निवेश सलाह, विश्लेषण और लेटेस्ट अपडेट के लिए पढ़ें।

सोने की कीमतें $4100 के रेजिस्टेंस को टेस्ट कर रही हैं, US ड्रॉप के बाद तेज उछाल! निवेशकों को क्या करना चाहिए?

नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी आर्थिक डेटा के बीच सोने की कीमतें एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में हुई तेज गिरावट के बाद गोल्ड अब $4100 प्रति औंस के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल को टेस्ट कर रहा है। निवेशक और ट्रेडर्स दोनों ही बाजार की इस volatility पर नजरें जमाए हुए हैं।

हालिया मार्केट मूवमेंट:

पिछले कुछ दिनों में सोने ने $4093-$4116 के सपोर्ट जोन को ब्रेक करते हुए तेज गिरावट दर्ज की। अगस्त कॉन्ट्रैक्ट $3999.80 तक पहुंच गया था, जो 2.77% की गिरावट दर्शाता है। हालांकि, US ट्रेजरी यील्ड्स में तेजी और फेडरल रिजर्व की हॉकिश उम्मीदों के बावजूद कीमतें तेजी से रिकवर होकर $4020-$4040 के स्तर पर पहुंच गई हैं।

ट्रेडर्स के बीच बहस जारी है। कुछ $3940 को मजबूत सपोर्ट मान रहे हैं, जबकि अन्य $4080 से $4250 तक के रेजिस्टेंस टारगेट कर रहे हैं। इस volatility का मुख्य कारण आगामी US CPI रिपोर्ट और फेड चेयर केविन वार्श की टेस्टिमोनी माना जा रहा है, जो बाजार को दिशा दे सकती है।

सोने को क्यों मिल रहा है सपोर्ट?

सेफ-हेवन डिमांड**: भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रास्फीति की आशंकाएं और अमेरिकी डॉलर की अनिश्चितता ने गोल्ड को आकर्षक बनाया है।

सेंट्रल बैंक खरीदारी**: कई देशों के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जो कीमतों को नीचे गिरने नहीं दे रहा।

टेक्निकल फैक्टर्स**: $4000 का मनोवैज्ञानिक स्तर ब्रेक होने के बाद अब $4100 अगला बड़ा टारगेट बन गया है।

भारतीय निवेशकों के लिए महत्व

भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के साथ MCX पर भी गोल्ड की कीमतें प्रभावित हो रही हैं। रुपये में कमजोरी होने से भारतीय निवेशकों को और फायदा हो सकता है।

विशेषज्ञ सलाह:

लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए SIP या गोल्ड ETF/Bonds में निवेश अच्छा विकल्प हो सकता है।

शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को US CPI डेटा जारी होने के बाद की volatility का इंतजार करना चाहिए।

हमेशा diversification बनाए रखें और केवल जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार निवेश करें।


निष्कर्ष  

सोने की कीमतें $4100 के रेजिस्टेंस को टेस्ट करने के साथ बाजार में नई संभावनाएं खुल रही हैं। चाहे आप हेजिंग कर रहे हों या रिटर्न की तलाश में हों, गोल्ड अभी भी पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। लेटेस्ट अपडेट्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर बने रहें।




Rajanish Kant मंगलवार, 14 जुलाई 2026
हॉर्मुज तेल संकट से सोना-चांदी में भारी गिरावट, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव | Kitco Report 2026

13 जुलाई 2026: हॉर्मुज जलडमरूमध्य तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर सोना $4,055 और चांदी $58.36 पर फिसला। Fed दरों पर सख्ती और अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से निवेशकों की धारणा प्रभावित। विस्तृत विश्लेषण पढ़ें।

हॉर्मुज तेल संकट से सोना-चांदी में तेज गिरावट, महंगाई का डर बढ़ा - Kitco AM Report 2026

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2026: वैश्विक बाजारों में आज सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका-ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz) को लेकर बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई के जोखिम बढ़ गए हैं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स मजबूत हुए हैं।

कीमतों का अपडेट:  

स्पॉट गोल्ड: $4,055.40 प्रति औंस के आसपास, 1.55% की गिरावट  

स्पॉट सिल्वर: $58.36 प्रति औंस के आसपास, 2.35% की गिरावट

क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने और अमेरिकी हमलों की खबरों के बाद टैंकर ट्रैफिक काफी कम हो गया है। इससे WTI क्रूड ऑयल $72.90 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड $79.60 के आसपास पहुंच गया।

उच्च तेल कीमतें ऊर्जा-आधारित महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आशंका मजबूत हो गई है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.58% के पास पहुंच गया है, जबकि सितंबर में रेट हाइक की संभावना करीब 68% बताई जा रही है। मजबूत डॉलर इंडेक्स ने भी गोल्ड को दबाव में रखा है।

Kitco रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह के जून एम्प्लॉयमेंट डेटा (57,000 नई नौकरियां) और फेड मिनट्स के बाद बाजार पहले से ही सतर्क था। अब तेल का शॉक महंगाई चिंता को और बढ़ा रहा है, जिससे गोल्ड के लिए जियो-पॉलिटिकल सपोर्ट के बावजूद मैक्रो प्रेशर हावी हो रहा है।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Outlook)

सोना**: कीमत $4,091-$4,107 के रेजिस्टेंस जोन के नीचे है। अगला सपोर्ट $4,000 और $3,959 स्तर पर देखा जा रहा है। $4,091 के ऊपर सस्टेनड ब्रेकआउट पर ही बुलिश मोमेंटम वापस आ सकता है।

चांदी**: $59.36 के ऊपर क्लोज पर रिकवरी संभव, अन्यथा $58 और $57 के सपोर्ट टेस्ट हो सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

शॉर्ट टर्म: तेल की अस्थिरता और Fed की सख्ती के कारण प्रेशर रह सकता है।

मीडियम टर्म: अगर CPI डेटा नरम आया या हॉर्मुज तनाव कम हुआ तो गोल्ड $4,100+ स्तरों की ओर रिकवर कर सकता है।

लंबी अवधि: भू-राजनीतिक अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने को मजबूत बुनियादी सपोर्ट दे रही है।

निवेश सलाह:  

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार जोखिमपूर्ण हैं और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणाम की गारंटी नहीं देते।

Source Reference: Kitco News AM Report (13 जुलाई 2026)  



Rajanish Kant सोमवार, 13 जुलाई 2026
2026 में सोना ₹3,30,000 प्रति 10 ग्राम तक? StoneX की भविष्यवाणी | Gold Silver Price Outlook 2026
2026 में सोने की कीमत $4000 प्रति औंस के करीब रहने की उम्मीद, चांदी $55-60 प्रति औंस। StoneX रिपोर्ट के अनुसार सोना, चांदी निवेश की पूरी जानकारी हिंदी में। पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और कीमत प्रभावित करने वाले फैक्टर्स जानें।

2026 में सोना $4000 प्रति औंस के आसपास, चांदी $55-60 के बीच रहने की उम्मीद – StoneX Q3 आउटलुक

निवेशकों के लिए सोना हमेशा से सुरक्षित आश्रय (Safe Haven) रहा है। हाल ही में Kitco News के मुताबिक, StoneX ने अपने Q3 Commodities Outlook में 2026 के अंत तक सोने की कीमत $4000 प्रति औंस के करीब रहने का अनुमान लगाया है, जबकि चांदी $55 से $60 प्रति औंस के बीच ट्रेड कर सकती है।

यह भविष्यवाणी उन निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो gold investment, silver investment या precious metals में पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन करना चाहते हैं।

StoneX की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

StoneX की हेड ऑफ मार्केट एनालिसिस Rhona O'Connell के अनुसार, पहले के आउटलुक में साल के अंत तक सोना $4000 से नीचे रहने की उम्मीद थी। लेकिन जून के अंत में यह स्तर जल्दी आ गया। फिलहाल बाजार नए निवेश से थोड़ा दूर रहा है।

मुख्य पॉइंट्स:

सोने की कीमत का भविष्य ईरान संघर्ष के समाधान पर निर्भर करता है।

अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सोना ऊपर जा सकता है।

चांदी मुख्य रूप से सोने की कीमत से प्रभावित होती है और $55-60 के रेंज में रहने की संभावना है।

भारत में सोने-चांदी की कीमत का अनुमान (2026)

वर्तमान में 1 औंस सोना लगभग 31.10 ग्राम होता है। अगर $4000 प्रति औंस है तो:

10 ग्राम सोने की कीमत लगभग ₹2,60,000 से ₹3,30,000 तक हो सकती है (डॉलर-रुपए एक्सचेंज रेट और लोकल प्रीमियम के आधार पर)।

नोट: यह अनुमान बाजार की अस्थिरता, डॉलर इंडेक्स, ब्याज दरों, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक घटनाओं पर निर्भर करेगा।

सोना क्यों रहेगा आकर्षक निवेश? (2026 में)

Inflation Hedge – महंगाई के खिलाफ सुरक्षा।

Central Bank Buying – कई देश सोना खरीद रहे हैं।

Geopolitical Uncertainty – ईरान, मध्य पूर्व आदि तनाव।

Portfolio Diversification – शेयर बाजार के साथ बैलेंस।

चांदी का इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि में बढ़ती मांग।

निवेश सलाह – BeYourMoneyManager.com

लॉन्ग टर्म** सोना अच्छा विकल्प हो सकता है लेकिन पूरा पैसा एक जगह न लगाएं।

Sovereign Gold Bonds (SGB), **Gold ETF, Gold Mutual Funds या भौतिक सोना – अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार चुनें।

चांदी भी अच्छा विकल्प है लेकिन ज्यादा volatile होती है।

हमेशा SIP या lump sum से पहले अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करें।

Disclaimer: यह लेख StoneX रिपोर्ट पर आधारित सूचना मात्र है। निवेश से पहले SEBI Registered Advisor या फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लें। बाजार जोखिमपूर्ण है।



Rajanish Kant रविवार, 12 जुलाई 2026
गोल्ड ETF में जून 2026 में 570% उछाल, सिल्वर ETF ने भी लगाई रफ्तार - निवेशकों का भरोसा बढ़ा

गोल्ड ETF में जून में 570% उछाल, सिल्वर ETF में 300% बढ़त! निवेशकों ने Rs 7,729 करोड़ डाले, जानें पूरा विश्लेषण | BeYourMoneyManager



जून 2026 में गोल्ड ETF में 570% और सिल्वर ETF में 300% इनफ्लो बढ़ोतरी दर्ज की गई। AMFI डेटा के अनुसार कुल Rs 7,729 करोड़ का निवेश आया। निवेश की रणनीति, प्रदर्शन और एक्सपर्ट राय पढ़ें।

नई दिल्ली। प्रीशियस मेटल्स में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए जून 2026 अच्छा महीना साबित हुआ। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ETF में पिछले महीने की तुलना में 570% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि सिल्वर ETF में भी 300% का उछाल आया।

जून में कितना आया इनफ्लो?

गोल्ड ETF**: ₹3,443 करोड़ का इनफ्लो (मई में ₹725 करोड़ का आउटफ्लो था)  

सिल्वर ETF**: ₹4,286 करोड़ का इनफ्लो (पिछले 4 महीनों में कुल ₹3,770 करोड़ का आउटफ्लो हुआ था)

दोनों कैटेगरी में कुल ₹7,729 करोड़ का निवेश आया, जो पिछले महीनों के आउटफ्लो के बाद एक मजबूत रिवर्सल दिखाता है।

कीमतें घटीं फिर भी इनफ्लो बढ़ा - क्यों?

जून में गोल्ड ETF ने औसतन 8.92% की गिरावट दर्ज की, जबकि सिल्वर ETF में 14.36% की गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद निवेशकों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की। एक्सपर्ट्स के अनुसार, निवेशक हालिया प्राइस करेक्शन को टैक्टिकल एंट्री पॉइंट मानकर बढ़-चढ़कर खरीद रहे हैं।

Nitin Agrawal, CEO - Mutual Funds, InCred Money ने कहा,  

"गोल्ड ETF में पिछले महीनों के आउटफ्लो के बाद यह मजबूत रिवर्सल दिखाता है कि गोल्ड को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के रूप में लंबे समय तक रखने का स्ट्रक्चरल केस अभी भी मजबूत है।"

Umesh Sharma, CIO - Debt, The Wealth Company Mutual Fund ने बताया कि निवेशकों ने हालिया गिरावट का फायदा उठाते हुए घरेलू गोल्ड ETF में आक्रामक तरीके से एंट्री की।

टॉप परफॉर्मर्स और AUM

गोल्ड ETF* का कुल AUM: *₹1.70 लाख करोड़**  

सिल्वर ETF* का कुल AUM: *₹78,943 करोड़**

Nippon India ETF Gold BeES सबसे बड़ा गोल्ड ETF बना हुआ है, जबकि Zerodha Gold ETF और Silver ETF में जून में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

Suranjana Borthakhur, Head of Distribution & Strategic Alliances, Mirae Asset Investment Managers (India) ने कहा कि ETF और खासकर गोल्ड ETF में मजबूत वापसी निवेशकों की पसंद को दर्शाती है। वे अब गोल्ड को टैक्टिकल ट्रेड की बजाय स्ट्रैटेजिक पोर्टफोलियो अलोकेशन के रूप में देख रहे हैं।

निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager):

डाइवर्सिफिकेशन: पोर्टफोलियो का 5-15% हिस्सा गोल्ड/सिल्वर ETF में रखना अच्छा माना जाता है।  

लॉन्ग टर्म: शॉर्ट टर्म प्राइस वोलेटिलिटी को नजरअंदाज करें, गोल्ड लंबे समय में इन्फ्लेशन और अनिश्चितता के खिलाफ हेज के रूप में काम करता है।  

SIP रूट: ETF में SIP के जरिए नियमित निवेश करें तो औसत लागत का फायदा मिल सकता है।  

रिस्क: सिल्वर गोल्ड की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल है, इसलिए अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार अलोकेट करें।

निष्कर्ष: जून 2026 के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारतीय निवेशक प्रीशियस मेटल्स को पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। बाजार की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने पर गोल्ड-सिल्वर ETF की मांग और बढ़ने की संभावना है।

नोट: यह लेख मूल रूप से तैयार किया गया है और Economic Times के आंकड़ों पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


(Source: The Economic Times) 


Rajanish Kant शुक्रवार, 10 जुलाई 2026