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केंद्रीय बैंकों ने Q3 2026 में सोने के भंडार में रिकॉर्ड खरीद की – वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्ट | BeYourMoneyManager

केंद्रीय बैंकों ने तीसरी तिमाही 2026 में सोने की सबसे तेज खरीद की

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में अपने सोने के भंडार में नेट 321 मीट्रिक टन की वृद्धि की। यह 2024 के अंत के बाद सबसे तेज तिमाही खरीद दर है।

साल 2026 की शुरुआत में खरीद धीमी रही थी, लेकिन तीसरी तिमाही की मजबूत मांग के कारण जनवरी से सितंबर तक कुल खरीद लगभग 675 टन हो गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 6% अधिक है।

क्यों बढ़ रही है केंद्रीय बैंकों की सोने में दिलचस्पी?

मुख्य कारण पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और जोखिम प्रबंधन हैं। भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय अनुशासन को लेकर चिंताएं और मुद्रा जोखिम कम करने की जरूरत केंद्रीय बैंकों को सोने की ओर खींच रहे हैं। सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित संपत्ति माना जाता है, जो संकट के समय स्थिरता प्रदान करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, खुलासा करने वाले देशों में चीन सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 63 टन जोड़े। पोलैंड ने 41 टन खरीदे। रूस ने इस तिमाही में नेट 19 टन सोना बेचा।

अन्य मांग के रुझान

  • फिजिकली बैक्ड गोल्ड ETFs में तीसरी तिमाही में 211 टन का इनफ्लो आया, जिससे होल्डिंग्स रिकॉर्ड 4,256 टन पर पहुंच गईं।
  • कुल सोने की मांग साल-दर-साल 1% कम होकर 1,369 टन रही, लेकिन मूल्य के हिसाब से 22% बढ़कर 188 अरब डॉलर हो गई। औसत सोने की कीमत इस दौरान लगभग 4,262 डॉलर प्रति औंस रही।
  • ज्वेलरी मांग ऊंची कीमतों के कारण कमजोर रही।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद सोने की लंबी अवधि की मांग का मजबूत आधार बनाती है। भले ही अल्पकाल में ब्याज दरें, तेल की कीमतें या अन्य कारक सोने की कीमतों पर दबाव डालें, संस्थागत खरीदारी सपोर्ट का काम करती है।

BeYourMoneyManager पर हम हमेशा सलाह देते हैं कि सोने को पोर्टफोलियो में विविधीकरण (diversification) के लिए रखें। यह मुद्रास्फीति, मुद्रा अवमूल्यन और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव का अच्छा औजार हो सकता है। हालांकि, सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए इसे कुल निवेश का उचित हिस्सा (आमतौर पर 5-15%) ही बनाएं और लंबे समय के नजरिए से देखें।

सोना खरीदने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम सहनशीलता और लक्ष्यों का आकलन जरूर करें। भौतिक सोना, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों में से अपने लिए सही तरीका चुनें।

स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की Q3 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट और संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स।

(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश निर्णय लेने से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।)

Rajanish Kant मंगलवार, 3 नवंबर 2026
भारत में अवैध सोने के आयात में 16 गुना उछाल! Q3 2026 में 50 टन सोना तस्करी से आया, आयात शुल्क बढ़ोतरी का बड़ा असर, निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है? | BeYourMoneyManager


भारत में अवैध सोने के आयात ने तीन साल का नया उच्च स्तर छू लिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) और मेटल्स फोकस के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 (Q3) तिमाही में अनौपचारिक/अवैध रास्तों से लगभग 50 मीट्रिक टन सोना भारत में आया। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा सिर्फ 3 टन था। यानी एक साल में करीब 16 गुना (1,500% से ज्यादा) की भारी बढ़ोतरी हुई है।

यह 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। आधिकारिक सोने के आयात में तेज गिरावट आई है, जबकि अवैध चैनलों से सप्लाई बढ़ गई है।

क्यों बढ़ रही है अवैध सोने की आवक?

मई 2026 में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसका मकसद आयात कम करना और व्यापार घाटा नियंत्रित करना था। लेकिन ऊंचे ड्यूटी के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बीच अंतर बढ़ गया। इससे तस्करी और अनौपचारिक रास्तों (स्मगलिंग या व्यक्तिगत सामान में छोटी मात्रा लाना) से सोना लाने का प्रोत्साहन बढ़ गया।

इतिहास में भी देखा गया है कि जब आयात शुल्क बढ़ाया जाता है, तो अनौपचारिक आवक बढ़ जाती है। जब शुल्क घटाया जाता है, तो यह कम हो जाती है। Q3 2026 में उपभोक्ता मांग में भी लगभग 29% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आधिकारिक आयात और भी ज्यादा गिरे।

निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

  • कीमत का अंतर: अवैध सोना सस्ता हो सकता है, लेकिन इसमें जोखिम ज्यादा होता है। गुणवत्ता, शुद्धता और कानूनी समस्याएं हो सकती हैं।
  • टैक्स चोरी और काला धन: बिना बिल वाले लेन-देन बढ़ने से सरकार का राजस्व प्रभावित होता है।
  • सोने की मांग: त्योहारों (जैसे दिवाली) के मौसम में मांग बनी रहती है, लेकिन ऊंची कीमतों और शुल्क के कारण आधिकारिक बाजार प्रभावित हो रहा है।
  • पोर्टफोलियो पर असर: सोना अभी भी महंगाई और अनिश्चितता के खिलाफ अच्छा बचाव माना जाता है। लेकिन अवैध बाजार के बढ़ने से वैध निवेश विकल्पों (जैसे डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड) की तरफ रुझान बढ़ना चाहिए।

BeYourMoneyManager की सलाह

  1. केवल वैध चैनल अपनाएं: बैंक, ज्वेलर (बिल और हॉलमार्क के साथ) या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से ही सोना खरीदें।
  2. ड्यूटी और GST समझें: मौजूदा 15% आयात शुल्क और अन्य करों का असर कीमतों पर पड़ता है। लंबे समय के निवेश के लिए SGB या ETF बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
  3. पोर्टफोलियो बैलेंस रखें: कुल निवेश का 5-15% सोने में रखें। सिर्फ कीमत बढ़ने की उम्मीद पर ज्यादा न लगाएं।
  4. निगरानी रखें: सरकार भविष्य में शुल्क में बदलाव कर सकती है। इससे बाजार प्रभावित होगा।
  5. जोखिम से बचें: सस्ते सोने के लालच में अवैध स्रोत से खरीदना कानूनी और आर्थिक दोनों तरह से नुकसानदेह साबित हो सकता है।

सोना भारतीय संस्कृति और निवेश दोनों में महत्वपूर्ण है। लेकिन ऊंचे शुल्क के दौर में समझदारी से निवेश करना जरूरी है। अपनी वित्तीय योजना को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से बेयोरमनीमैनेजर पर अपडेट्स पढ़ते रहें और पर्सनल फाइनेंस को प्राथमिकता दें।

(स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्ट, मेटल्स फोकस डेटा, ब्लूमबर्ग और अन्य समाचार रिपोर्ट्स – नवंबर 2026)

Rajanish Kant
EPFO WhatsApp पर EPF बैलेंस चेक करें और पासबुक डाउनलोड करें – आसान तरीका 2026


EPFO ने WhatsApp सेवा लॉन्च की है। जानें कैसे +91 8796441800 पर ‘Hi’ भेजकर EPF बैलेंस चेक करें, लास्ट 5 ट्रांजेक्शन देखें और पासबुक डाउनलोड करें। पूरा स्टेप-बाय-स्टेप गाइड।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू की है। अब आप वेबसाइट या ऐप में लॉगिन किए बिना WhatsApp के जरिए अपना EPF बैलेंस चेक कर सकते हैं, आखिरी 5 लेन-देन देख सकते हैं और पासबुक डाउनलोड कर सकते हैं।

यह सेवा EPFO के आधिकारिक WhatsApp नंबर पर उपलब्ध है और बहुत आसान है।

EPFO WhatsApp सेवा क्या है?

EPFO ने नवंबर 2026 में अपनी WhatsApp आधारित सेवा लॉन्च की है। इसके जरिए सदस्य अपने भविष्य निधि खाते से जुड़ी बुनियादी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। पहले यह सुविधा SMS या पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध थी, अब WhatsApp पर भी मिल गई है।

इस सेवा से आप कर सकते हैं:

  • अपना EPF अकाउंट बैलेंस चेक
  • आखिरी 5 ट्रांजेक्शन देखना
  • EPF पासबुक डाउनलोड करना

EPFO WhatsApp नंबर क्या है?

आधिकारिक नंबर है: +91 8796441800

यह वेरिफाइड नंबर है। सिर्फ इसी नंबर पर मैसेज भेजें।

WhatsApp पर EPF बैलेंस और पासबुक कैसे चेक करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

  1. अपने फोन के कॉन्टैक्ट में EPFO का नंबर +91 8796441800 सेव कर लें।
  2. WhatsApp खोलें और इस नंबर पर चैट शुरू करें।
  3. बस “Hi” या “Hello” लिखकर भेज दें।
  4. वेलकम मैसेज आने के बाद अपनी पसंदीदा भाषा चुनें (हिंदी या अंग्रेजी)।
  5. विकल्पों में से चुनें:
    • EPF बैलेंस चेक करें
    • लास्ट 5 ट्रांजेक्शन देखें
    • पासबुक डाउनलोड करें
  6. UAN से लिंक मोबाइल नंबर से OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।
  7. जानकारी तुरंत मिल जाएगी।

वैकल्पिक तरीका: EPFO के आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर दिए गए QR कोड को स्कैन करके भी सीधे चैट शुरू कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बातें ध्यान रखें

  • जिस मोबाइल नंबर से आप WhatsApp इस्तेमाल कर रहे हैं, वह आपके UAN से रजिस्टर्ड होना चाहिए।
  • EPFO कभी भी आपका UAN पासवर्ड, Aadhaar डिटेल्स, बैंक OTP या संवेदनशील जानकारी नहीं मांगता। ऐसे किसी भी अनुरोध पर ध्यान न दें।
  • सेवा 24x7 उपलब्ध है।

पासबुक में क्या दिखता है?

डाउनलोड की गई पासबुक में आपके EPF अकाउंट का पूरा विवरण, योगदान और ट्रांजेक्शन इतिहास शामिल होता है। इसे PDF के रूप में सेव करके रख सकते हैं।

क्यों उपयोगी है यह सेवा?

बहुत से लोग रोजाना EPFO पोर्टल या UMANG ऐप खोलने में समय नहीं लगा पाते। WhatsApp तो लगभग हर कोई इस्तेमाल करता है। एक सरल ‘Hi’ मैसेज से बैलेंस और पासबुक मिल जाना सुविधाजनक और समय बचाने वाला है।

निष्कर्ष

EPFO की यह नई WhatsApp सेवा सदस्यों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है। अगर आप भी अपना EPF बैलेंस नियमित रूप से चेक करते हैं या पासबुक रखना चाहते हैं, तो आज ही +91 8796441800 पर ‘Hi’ भेजकर आजमाएं।

नियमित रूप से अपने PF बैलेंस पर नजर रखने से रिटायरमेंट प्लानिंग आसान होती है। पैसे का सही प्रबंधन ही वित्तीय सुरक्षा की कुंजी है।

(वेबसाइट के लिए नोट): यह आर्टिकल beyourmoneymanager के पाठकों के लिए तैयार किया गया है। नवीनतम जानकारी के लिए हमेशा EPFO की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक चैनल चेक करें।

Rajanish Kant
RBI ने दी चेतावनी: ₹10, ₹20 और ₹50 नोटों की कमी का फर्जी सर्कुलर वायरल – न फंसें इस धोखे में | BeYourMoneyManager


भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। त्योहारी सीजन के दौरान कुछ लोगों द्वारा RBI के नाम और लोगो का दुरुपयोग कर फर्जी सर्कुलर फैलाया जा रहा है। इस फर्जी सर्कुलर में दावा किया गया है कि दिवाली जैसे त्योहारों में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की कमी हो सकती है।

RBI का स्पष्टीकरण
RBI ने साफ कहा है कि यह सर्कुलर पूरी तरह नकली और भ्रामक है। RBI के वॉल्ट्स और करेंसी चेस्ट में सभी डेनॉमिनेशन के नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। छोटे मूल्य के नोटों की कोई कमी नहीं है। जनता से अपील की गई है कि वे केवल RBI की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।

फर्जी सर्कुलर में क्या लिखा था?
नकली सर्कुलर में यह बताया जा रहा था कि कम-कैश अर्थव्यवस्था की दिशा में छोटे नोटों की छपाई कम की जा रही है और इसलिए त्योहारों में इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। साथ ही डिजिटल भुगतान अपनाने की सलाह दी गई थी। RBI ने इस पूरे दस्तावेज़ को फर्जी करार दिया है।



जनता क्या करे?

  • किसी भी संदिग्ध मैसेज, व्हाट्सऐप फॉरवर्ड या सोशल मीडिया पोस्ट पर विश्वास न करें।
  • RBI की आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) या @RBI हैंडल से ही जानकारी लें।
  • अगर किसी को ऐसा फर्जी सर्कुलर मिले तो उसे आगे न बढ़ाएं और संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

त्योहारी सीजन में नकदी की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन अफवाहों के चक्कर में पड़कर घबराएं नहीं। RBI ने आश्वासन दिया है कि नोटों की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित की गई है। डिजिटल भुगतान (UPI, कार्ड आदि) का इस्तेमाल बढ़ाना अच्छा है, लेकिन कैश की उपलब्धता को लेकर गलत सूचनाओं से बचें।

BeYourMoneyManager की सलाह
अपने पैसे का प्रबंधन समझदारी से करें। अफवाहों से दूर रहें और हमेशा आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा रखें। सही जानकारी ही आपके वित्तीय फैसलों को मजबूत बनाती है।

(स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक का आधिकारिक ट्वीट)

Rajanish Kant
दिवाली पर 50-30-20 बजट रूल से खर्च कंट्रोल करें – बिना कर्ज के खुशियाँ मनाएँ | BeYourMoneyManager


दिवाली पर 50-30-20 बजट रूल से खर्च कंट्रोल करें – बिना कर्ज के खुशियाँ मनाएँ | BeYourMoneyManager

दिवाली आते ही घर-घर में नई कपड़ों, गिफ्ट्स, मिठाइयों, सजावट और सोने की खरीदारी का सिलसिला शुरू हो जाता है। उत्साह तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन महीने खत्म होते-होते क्रेडिट कार्ड का बिल या उधार का बोझ सिरदर्द बन जाता है। क्या दिवाली मनाई जाए और बचत भी बची रहे? हाँ, संभव है – अगर आप 50-30-20 बजट रूल अपनाएँ।

50-30-20 बजट रूल क्या है?

यह एक सरल और प्रभावी तरीका है अपनी मासिक इन-हैंड सैलरी को तीन हिस्सों में बाँटने का:

  • 50% जरूरतें (Needs): किराया, किराना, बिजली-पानी, EMI, बीमा प्रीमियम और अन्य जरूरी खर्च।
  • 30% इच्छाएँ (Wants): शॉपिंग, बाहर खाना, मनोरंजन, गिफ्ट्स और अन्य गैर-जरूरी खर्च।
  • 20% बचत और कर्ज चुकाना (Savings & Debt): इमरजेंसी फंड, SIP, निवेश और अतिरिक्त कर्ज भुगतान।

दिवाली के समय इस रूल को लागू करने से आप तय कर सकते हैं कि उत्सव पर कितना खर्च कर सकते हैं, बिना बचत को छुए या ज्यादा कर्ज लिए।

उदाहरण: ₹50,000 मासिक सैलरी वाले के लिए

मान लीजिए आपकी इन-हैंड सैलरी ₹50,000 है। तो:

  • जरूरतें: ₹25,000
  • इच्छाएँ: ₹15,000
  • बचत: ₹10,000

ध्यान दें – ₹15,000 का “इच्छाएँ” वाला हिस्सा सिर्फ दिवाली शॉपिंग के लिए नहीं है। इसमें महीने के सामान्य खर्च (बाहर खाना, मनोरंजन आदि) भी शामिल हैं। अगर आप सामान्य रूप से ₹8,000 खर्च करते हैं, तो दिवाली के लिए केवल ₹7,000 बचेगा।

₹7,000 के दिवाली बजट को कैसे बाँटें?

हर रुपये को मकसद दें। उदाहरण के लिए:

  • कपड़े: ₹2,000
  • गिफ्ट्स: ₹2,000
  • मिठाई और खाना: ₹1,000
  • सजावट: ₹1,000
  • अन्य/अनपेक्षित: ₹1,000

ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण हैं। अपनी पारिवारिक परंपराओं और प्राथमिकताओं के अनुसार बदल लें। सोना या बड़ा सामान खरीदना हो तो उसे अलग से प्लान करें, छोटे बजट में फिट करने की कोशिश न करें।

क्या महत्वपूर्ण है, उसी पर खर्च करें

  • कपड़े: पहले लिमिट तय करें। जो बार-बार पहनने वाले हों, वही खरीदें।
  • गिफ्ट्स: सोच-समझकर और बजट में रखें। दूसरों के खर्च से तुलना न करें।
  • सोना: पहले तय करें कितना खरीद सकते हैं। मेकिंग चार्ज और टैक्स भी जोड़ लें।
  • सजावट और मिठाई: पुरानी सजावट दोबारा इस्तेमाल करें। जरूरत से ज्यादा न खरीदें।

इंपल्स खरीद से बचें। जो वाकई मायने रखता है, उसी पर खर्च करें।

SIP या बचत रोककर दिवाली मनाएँ?

नहीं। लंबे समय के लक्ष्यों के लिए बचत और SIP जारी रखें। बजट टाइट हो तो पहले वैकल्पिक खर्च कम करें। इमरजेंसी फंड या क्रेडिट कार्ड/पर्सनल लोन का सहारा आखिरी विकल्प ही रखें। दिवाली के बाद का महीना तनाव-मुक्त रहे, यही असली लक्ष्य होना चाहिए।

कब 50-30-20 रूल काम नहीं करता?

अगर आप बड़े शहर में रहते हैं जहाँ किराया बहुत ज्यादा है, परिवार का खर्च उठाते हैं या EMI भारी है, तो जरूरतें 50% से ज्यादा हो सकती हैं। अनियमित आय वाले लोगों को भी बड़ा कैश बफर रखना पड़ता है। ऐसे में प्रतिशत पर जोर न दें। पहले जरूरतें पूरा करें, जितनी बचत संभव हो उतनी करें और दिवाली का खर्च अपनी असली नकदी के हिसाब से तय करें।

सबसे अच्छा दिवाली बजट वही है जो त्योहार के बाद भी खुशी दे

शॉपिंग शुरू करने से पहले:

  1. अपनी इन-हैंड आय निकालें।
  2. जरूरी खर्च और सामान्य इच्छा-खर्च का हिसाब लगाएँ।
  3. बचत और निवेश को सुरक्षित रखें।
  4. फिर कपड़े, गिफ्ट, खाना और जश्न के लिए बजट तय करें।

एक सरल नियम याद रखें: बजट पहले बनाएँ, शॉपिंग बाद में करें – बिल देखने के बाद नहीं।

जहाँ जरूरी हो वहाँ दिल खोलकर मनाएँ, अपनी क्षमता के अंदर रहें और दिवाली के बाद बिना अनावश्यक कर्ज के नया महीना शुरू करें। यही स्मार्ट मनी मैनेजमेंट है।

BeYourMoneyManager के साथ अपनी वित्तीय यात्रा को और मजबूत बनाएँ। सही प्लानिंग से दिवाली सिर्फ खुशियों का त्योहार बने, बोझ का नहीं!

Rajanish Kant
पति-पत्नी को एक-दूसरे की फाइनेंस के बारे में कितना पता होना चाहिए? लोन की पारदर्शिता और नॉमिनी क्यों जरूरी है | BeYourMoneyManager

पति-पत्नी को एक-दूसरे की फाइनेंस के बारे में कितना पता होना चाहिए?

शादी सिर्फ भावनाओं का बंधन नहीं है, यह आर्थिक साझेदारी भी है। कई जोड़े अपनी कमाई, बचत और निवेश तो साझा करते हैं, लेकिन कर्ज (लोन) की बात अक्सर छिपा लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्तियों की पारदर्शिता से पहले लोन की पारदर्शिता ज्यादा जरूरी है।

क्यों जरूरी है लोन की पूरी जानकारी?

अगर पति या पत्नी के नाम पर कोई पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड डेट, होम लोन या बिजनेस लोन है, तो दूसरे साथी को इसका पूरा ब्यौरा पता होना चाहिए। इसमें शामिल है:

  • कुल बकाया राशि
  • ब्याज दर
  • किस बैंक या व्यक्ति से लिया गया है
  • EMI की राशि और अवधि

बिना जानकारी के अचानक आर्थिक बोझ आने पर परिवार की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, यह विश्वास को भी मजबूत बनाता है।

संपत्तियों में नॉमिनी क्यों जरूरी है?

ET Wealth Expo में फाइनेंस विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि ज्यादातर एसेट्स (बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फंड, शेयर, इंश्योरेंस, प्रॉपर्टी आदि) में पति/पत्नी को नॉमिनी बनाना चाहिए। इससे:

  • असमय मृत्यु होने पर संपत्ति का ट्रांसफर आसान हो जाता है
  • कानूनी विवाद कम होते हैं
  • परिवार को तुरंत आर्थिक सहारा मिलता है

सही तरीका क्या है?

  1. खुली बातचीत करें – साल में कम से कम एक बार दोनों मिलकर पूरे फाइनेंस की समीक्षा करें।
  2. जॉइंट अकाउंट और नॉमिनी अपडेट करें – जहां जरूरी हो, जॉइंट होल्डिंग रखें और नॉमिनी अपडेट करते रहें।
  3. आपसी सहमति से फैसला लें – बड़े निवेश या लोन लेने से पहले चर्चा जरूर करें।
  4. एमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस – दोनों के नाम पर पर्याप्त कवरेज रखें।

पारदर्शिता का मतलब सिर्फ आंकड़े बताना नहीं है। यह विश्वास, सुरक्षा और भविष्य की तैयारी है। आज ही अपने जीवनसाथी के साथ फाइनेंस की खुली बात करें। इससे न सिर्फ रिश्ता मजबूत होगा, बल्कि आर्थिक रूप से भी आप दोनों सुरक्षित रहेंगे।

BeYourMoneyManager पर नियमित रूप से ऐसे उपयोगी फाइनेंस टिप्स पढ़ते रहें और अपनी आर्थिक यात्रा को आसान बनाएं।

Rajanish Kant शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
AU Small Finance Bank डेटा ब्रीच अलर्ट 2026: ScarlettGroup का दावा, KYC-Aadhaar-PAN लीक का खतरा | ग्राहक क्या करें?

AU Small Finance Bank पर साइबर अटैक का दावा: ScarlettGroup ने संवेदनशील डेटा लीक की धमकी दी

29 अक्टूबर 2026 को साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस स्रोतों और डार्क वेब मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म्स पर एक गंभीर साइबर अलर्ट सामने आया। हैकिंग ग्रुप ScarlettGroup ने दावा किया है कि उसने भारत के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंक AU Small Finance Bank (au.bank.in) के सिस्टम में सेंध लगा ली है।

ग्रुप के अनुसार, उनके पास बैंक के ग्राहकों और आंतरिक कॉर्पोरेट डेटा का बड़ा हिस्सा है। दावा किए गए डेटा में शामिल हैं:

  • KYC रिकॉर्ड्स
  • पैन (PAN) और आधार (Aadhaar) विवरण
  • व्यक्तिगत पहचान दस्तावेज
  • क्रेडिट रिपोर्ट्स और बैंक स्टेटमेंट्स
  • लोन एप्लिकेशन और साइन किए गए एग्रीमेंट्स
  • इंश्योरेंस रिकॉर्ड्स
  • CRM डेटा
  • कर्मचारी जानकारी, लॉगिन हिस्ट्री और ऑडिट लॉग्स

ScarlettGroup ने अपनी लीक साइट पर बैंक का नाम लिस्ट किया है और डेटा पब्लिश करने का काउंटडाउन टाइमर भी दिखाया है (लगभग 6-7 दिन)। यह एक नया डेटा-एक्सटॉर्शन ग्रुप है, जो हाल के हफ्तों में कई संगठनों पर दावा कर चुका है।

महत्वपूर्ण: यह घटना अभी पेंडिंग वेरिफिकेशन स्टेटस में है। AU Small Finance Bank ने अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि, प्रेस रिलीज या एक्सचेंज फाइलिंग जारी नहीं की है। कई साइबर थ्रेट ट्रैकर्स इसे अनवेरिफाइड क्लेम मान रहे हैं। हैकिंग ग्रुप्स कभी-कभी रैंसम के लिए दावे बढ़ा-चढ़ाकर करते हैं।

ग्राहकों के लिए संभावित जोखिम

अगर दावा सही निकला तो प्रभावित ग्राहकों को पहचान की चोरी, फर्जी लोन, फिशिंग कॉल, सिम स्वैप और धोखाधड़ी वाले लेन-देन का खतरा हो सकता है। आधार, पैन, फोटो और सिग्नेचर के साथ धोखेबाज आसानी से लोन ऐप्स पर फर्जी एप्लिकेशन भर सकते हैं।

AU Small Finance Bank ग्राहकों को अभी क्या करना चाहिए?

  1. पैनिक न करें, लेकिन सतर्क रहें।
  2. बैंक कभी भी OTP, PIN, पासवर्ड या CVV नहीं मांगता। किसी भी कॉल, SMS या WhatsApp मैसेज पर संदेह करें, भले ही उसमें आपके लोन या अकाउंट की डिटेल्स हों।
  3. mAadhaar ऐप या UIDAI वेबसाइट से अपने आधार बायोमेट्रिक्स लॉक कर लें। जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं।
  4. CIBIL या अन्य क्रेडिट ब्यूरो से अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें। कोई अनजान लोन दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें।
  5. जहां भी दस्तावेज दें, मास्क्ड आधार का इस्तेमाल करें।
  6. संदेह होने पर राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

व्यापक सबक

भारत में बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में डेटा सुरक्षा लगातार चुनौती बनी हुई है। हर बैंक, NBFC, लोन ऐप और इंश्योरर अलग-अलग KYC डेटा रखता है। DPDP एक्ट (2023) के नियम अभी पूरी तरह लागू हो रहे हैं। कंपनियों को कम डेटा इकट्ठा करना चाहिए, कम समय तक रखना चाहिए और ब्रीच की सूचना जल्दी देनी चाहिए।

BeYourMoneyManager सलाह देता है कि डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय हमेशा सतर्कता बरतें। नियमित रूप से पासवर्ड बदलें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें और संदिग्ध एक्टिविटी पर तुरंत बैंक से संपर्क करें।

यह आर्टिकल उपलब्ध पब्लिक साइबर थ्रेट रिपोर्ट्स (Hackmanac, ransomware.live और अन्य ट्रैकर्स) पर आधारित है। घटना की आधिकारिक पुष्टि होने पर हम अपडेट देंगे। अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए हमेशा आधिकारिक बैंक चैनल्स पर भरोसा करें।

Rajanish Kant
एक्सिस बैंक सेविंग अकाउंट चार्जेस में बड़ा बदलाव: 1 दिसंबर 2026 से फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट घटेगी, EDGE रिवॉर्ड्स बंद, शुल्क बढ़ेंगे | BeYourMoneyManager


एक्सिस बैंक सेविंग अकाउंट धारकों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट! 1 दिसंबर 2026 से बैंक अपने घरेलू और NRI सेविंग अकाउंट्स पर नए शुल्क ढांचे को लागू करने जा रहा है। फ्री कैश ट्रांजैक्शन की सीमा घटेगी, कुछ अकाउंट्स पर EDGE रिवॉर्ड्स प्रोग्राम बंद होगा और कई चार्जेस बढ़ेंगे। अगर आपका अकाउंट एक्सिस बैंक में है तो ये बदलाव जानना जरूरी है ताकि अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सके।

मुख्य बदलाव क्या हैं?

1. फ्री कैश ट्रांजैक्शन लिमिट घटेगी
अभी घरेलू और NRI EASY ACCESS तथा समकक्ष अकाउंट्स, KRISHI और SAHAJ सेविंग अकाउंट्स में पहले 4 कैश ट्रांजैक्शन या ₹1 लाख तक (जो पहले हो) फ्री होते हैं।
1 दिसंबर 2026 से यह सीमा घटकर पहले 3 ट्रांजैक्शन या ₹1 लाख हो जाएगी। इससे ज्यादा ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगेगा।

2. मिनिमम बैलेंस न रखने पर अधिकतम पेनल्टी बढ़ेगी
Average Monthly Balance (AMB) न रखने पर अभी 6% शॉर्टफॉल के हिसाब से सर्विस फीस लगती है।

  • घरेलू EASY ACCESS जैसे अकाउंट्स में मेट्रो/अर्बन पर अधिकतम ₹600, सेमी-अर्बन ₹300 और रूरल ₹150 था।
  • अब सेमी-अर्बन और रूरल में भी अधिकतम शुल्क ₹600 हो जाएगा।
  • NRI अकाउंट्स में भी सेमी-अर्बन/रूरल की अधिकतम सीमा ₹300 से बढ़कर सभी लोकेशन पर ₹600 हो जाएगी।
    (ये शुल्क सैलरी अकाउंट धारकों पर लागू नहीं होते।)

3. EDGE रिवॉर्ड्स प्रोग्राम बंद
Burgundy, PRIORITY, PRESTIGE, PRIME NRI और EASY NRI अकाउंट्स पर EDGE REWARDS पॉइंट्स प्रोग्राम 1 दिसंबर से बंद कर दिया जाएगा। इन अकाउंट्स वाले ग्राहक अब पॉइंट्स नहीं कमा पाएंगे।

4. Total Relationship Value (TRV) की जरूरत बढ़ेगी
PRIME, PRESTIGE, PRIORITY, SAMPANN, ADVANTAGE, ARISE Women’s और Burgundy जैसे प्रीमियम अकाउंट्स में TRV की जरूरत 75% से बढ़कर 100% हो जाएगी।


5. आउटवर्ड चेक रिटर्न चार्ज बढ़ेगा
अधिकांश घरेलू और NRI अकाउंट्स (EASY ACCESS, ADVANTAGE, ARISE, SAMPANN, KRISHI, SAHAJ, PRIME, PRESTIGE, PRIORITY, Burgundy आदि) पर:

  • पहले: पहला रिटर्न ₹50, बाद वाले ₹100
  • अब: हर रिटर्न पर ₹200

6. NRI अकाउंट्स पर डिलिवरेबल रिटर्न चार्ज में भारी बढ़ोतरी
NRI Burgundy, PRIORITY, PRESTIGE और PRIME अकाउंट्स में डिलिवरेबल रिटर्न चार्ज ₹50 से बढ़कर ₹500 हो जाएगा।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

  • अपने अकाउंट के प्रकार और ब्रांच लोकेशन (मेट्रो/अर्बन/सेमी-अर्बन/रूरल) के अनुसार नए शुल्क चेक करें।
  • कैश ट्रांजैक्शन कम रखें या डिजिटल विकल्प (UPI, नेट बैंकिंग, कार्ड) ज्यादा इस्तेमाल करें।
  • मिनिमम बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करें।
  • प्रीमियम अकाउंट होल्डर्स TRV की नई जरूरत को पूरा करें।
  • चेक का इस्तेमाल सावधानी से करें।

ये बदलाव 1 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। पूरी डिटेल के लिए एक्सिस बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ब्रांच से संपर्क करें। व्यक्तिगत वित्त संबंधी और अपडेट्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर जुड़े रहें।

नोट: यह जानकारी सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। अंतिम और सटीक जानकारी के लिए हमेशा बैंक की आधिकारिक अधिसूचना देखें।

Rajanish Kant
पुराना सोना बेचने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें | ऊंचे भाव में सही कीमत कैसे पाएं (2026 गाइड)



पुराने गोल्ड ज्वेलरी बेचने जा रहे हैं? ऊंचे गोल्ड रेट का फायदा उठाने से पहले शुद्धता, वजन, कटौती और मेकिंग चार्ज के बारे में ये 5 जरूरी बातें जान लें। सही कीमत पाएं।पुराना सोने का जेवर बेचने से पहले जान लें ये 5 महत्वपूर्ण बातें

आजकल सोने के भाव ऊंचे स्तर पर हैं। कई लोग पुराने पारिवारिक जेवर, माँ-दादी के गहने या इस्तेमाल न होने वाले आभूषण बेचकर पैसे निकालना चाहते हैं। लेकिन सिर्फ बाजार भाव देखने से काम नहीं चलता। असल में आपको जितना मिलता है, वह कई बातों पर निर्भर करता है।

www.beyourmoneymanager.com पर हम आपको बताते हैं कि पुराना सोना बेचने से पहले किन 5 बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि आप नुकसान में न रहें।

1. जो गोल्ड रेट आप देखते हैं, वही आपको नहीं मिलता

अखबार या टीवी पर जो 22 कैरेट या 24 कैरेट का रेट दिखता है, वह आमतौर पर नया जेवर खरीदने का रेट होता है। पुराना सोना खरीदने वाला ज्वेलर शुद्धता जांचने के बाद अपना खरीद रेट लगाता है। इसमें टेस्टिंग, रिफाइनिंग या अन्य कटौती भी हो सकती है।

टिप: बेचने से पहले उसी दिन के खरीद रेट (buying rate) की पुष्टि करें और कैलकुलेशन लिखित में मांगें।

2. क्या आपका जेवर वाकई 22 कैरेट का है?

भारतीय पारंपरिक जेवर अक्सर 22 कैरेट (916 फाइननेस) के होते हैं, लेकिन पुराने गहने कम शुद्धता वाले, रिपेयर किए हुए या सोल्डर वाले हो सकते हैं। 22 कैरेट में लगभग 91.6% शुद्ध सोना होता है, जबकि 18 कैरेट में सिर्फ 75%।

शुद्धता टेस्ट जरूर करवाएं और रिजल्ट समझकर ही डील करें। हॉलमार्क (HUID) हो तो BIS Care ऐप से चेक कर सकते हैं, लेकिन हॉलमार्क भी सही रीसेल प्राइस की गारंटी नहीं देता।

3. पत्थर और अतिरिक्त वजन आपकी रकम घटा सकते हैं

जेवर का कुल वजन जितना दिखता है, उतना शुद्ध सोना नहीं होता। रत्न, नकली पत्थर, मीना, लाख, बीड्स आदि को ज्वेलर वजन से काट देता है। उदाहरण के लिए 20 ग्राम का हार अगर 2 ग्राम गैर-सोना हो तो सिर्फ 18 ग्राम का भुगतान मिलेगा।

जरूरी: ग्रॉस वेट, कटौती और नेट गोल्ड वेट अलग-अलग लिखवाएं।

4. मेकिंग चार्ज वापस नहीं मिलता

जब आपने नया जेवर खरीदा था तो मेकिंग चार्ज + टैक्स लगे थे। बेचते समय सिर्फ सोने का मूल्य मिलता है। इसलिए ऊंचे भाव के बावजूद भी आपको खरीद मूल्य से कम मिल सकता है। रिफाइनिंग या प्रोसेसिंग कटौती भी पूछ लें।

5. सही अनुमान कैसे लगाएं और डील कैसे करें

उदाहरण: मान लीजिए आपके पास 18 ग्राम पात्र 22 कैरेट सोना है और ज्वेलर का खरीद रेट ₹12,000 प्रति ग्राम है। तो प्रारंभिक मूल्य ≈ ₹2,16,000। फिर अगर ₹2,000 कटौती हो तो लगभग ₹2,14,000 मिल सकते हैं। (यह सिर्फ उदाहरण है, वास्तविक रेट रोज बदलते हैं।)

बेचने से पहले ये 5 चेक जरूर करें:

  • दिन का सही खरीद रेट कन्फर्म करें।
  • वजन सामने करवाएं (ग्रॉस और नेट अलग)।
  • शुद्धता टेस्ट समझें और पूछें कि जेवर खराब तो नहीं होगा।
  • कम से कम 2-3 विश्वसनीय ज्वेलरों से लिखित वैल्यूएशन लें।
  • रसीद जरूर लें जिसमें वजन, शुद्धता, रेट, कटौती और अंतिम राशि लिखी हो।

बेचें, एक्सचेंज करें या रखें?

ऊंचे भाव आकर्षक लगते हैं, लेकिन भावनात्मक मूल्य वाले पारिवारिक जेवर को पिघलवाने से पहले सोचें। अगर पैसे की जरूरत है तो आउटराइट सेल बनाम एक्सचेंज ऑफर की तुलना करें। नया जेवर खरीदने की पूरी लागत अलग से चेक करें। जरूरत न हो तो रखना भी अच्छा विकल्प हो सकता है।

पुराना सोना बेचना आसान लगता है, लेकिन थोड़ी सावधानी से आप सही कीमत पा सकते हैं। हमेशा लिखित कैलकुलेशन और कई ऑफर्स की तुलना करें।

अधिक पर्सनल फाइनेंस टिप्स और गाइड के लिए www.beyourmoneymanager.com विजिट करें।

Rajanish Kant बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
सिल्वर रेट में 50% गिरावट: जनवरी के रिकॉर्ड हाई से आधा हुआ दाम, क्या अभी खरीदें या और इंतजार करें? | BeYourMoneyManager


सिल्वर रेट में जनवरी 2026 के रिकॉर्ड हाई से करीब 50% की भारी गिरावट देखने को मिली है। MCX पर चांदी का भाव 29 जनवरी 2026 को ₹3,84,632 प्रति किलोग्राम के शिखर पर था, जो 27 अक्टूबर 2026 तक लगभग ₹1,90,847 प्रति किलोग्राम तक आ गया। यानी नौ महीने से भी कम समय में कीमत आधी हो गई।

जो निवेशक शिखर पर ₹5 लाख लगा चुके थे, उनकी निवेशित राशि अब ₹2.5 लाख से भी कम रह गई है। ऐसे में सवाल उठता है – क्या अब चांदी खरीदने का सही समय है या और गिरावट का इंतजार करना चाहिए?

सिल्वर की कीमत क्यों गिरी?

विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य कारण ये हैं:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और ऊंची बॉन्ड यील्ड। इससे ब्याज न देने वाली चांदी कम आकर्षक हो गई।
  • औद्योगिक मांग में संभावित कमी (चांदी की कुल मांग का करीब 58% हिस्सा उद्योग से आता है)।
  • भारत में आयात प्रतिबंध और 15% ड्यूटी का दबाव।
  • मजबूत डॉलर, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और भू-राजनीतिक तनाव।

जनवरी का शिखर ज्यादातर सट्टा खरीद पर आधारित था, न कि मजबूत सप्लाई-डिमांड पर।

क्या कीमतें वापस शिखर पर पहुंचेंगी?

भारत बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्विराज कोठारी का मानना है कि अगले 12-18 महीनों में कीमतें जनवरी के स्तर पर वापस नहीं पहुंचेंगी। हालांकि सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार 2026 में भी सप्लाई शॉर्टफॉल रहने की उम्मीद है (लगातार छठा साल)। सोलर, इलेक्ट्रिक वाहन और AI डेटा सेंटर्स से मांग बढ़ने की संभावना है।

एक विशेषज्ञ का रियलिस्टिक टारगेट अगले 12 महीनों के लिए लगभग ₹2,48,800 प्रति किलोग्राम है। इसके लिए फेडरल रिजर्व के रेट हाइक साइकल का खत्म होना और सट्टा बिकवाली का थमना जरूरी होगा।

क्या अभी खरीदें?

  • नए निवेशकों के लिए: एकमुश्त निवेश के बजाय स्टैगर्ड (चरणबद्ध) खरीद या SIP अपनाएं। 6-9 महीनों में नियमित रूप से खरीदें ताकि औसत लागत कम हो। अगर कीमत ₹1,80,000 प्रति किलोग्राम के आसपास आती है तो और खरीद सकते हैं।
  • मौजूदा निवेशकों के लिए: घबराकर बेचने से बचें। लंबी अवधि (3-5 साल) का नजरिया रखें। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में और जोड़कर औसत लागत घटा सकते हैं, लेकिन एग्रेसिव एवरेजिंग से बचें।

चांदी सोने की तुलना में लगभग दोगुनी अस्थिर होती है। गोल्ड-सिल्वर रेशियो अब करीब 74 है (जनवरी में 46 था), यानी चांदी सोने के मुकाबले सस्ती दिख रही है।

किस रूप में निवेश करें?

विशेषज्ञ सिल्वर ETF को बेहतर विकल्प मानते हैं। ये 99.9% शुद्ध चांदी से बैक्ड होते हैं, स्टोरेज और प्योरिटी की झंझट नहीं होती, GST नहीं लगता और खर्च भी कम (सालाना 1% से कम) रहता है। 12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5% लागू होता है।

फिजिकल सिल्वर (सिक्के, बार या ज्वेलरी) सांस्कृतिक या गिफ्टिंग के लिए अच्छा है, लेकिन प्रीमियम, GST और रीसेल पर कटौती रिटर्न कम कर सकती है। सिल्वर फंड ऑफ फंड्स SIP के लिए सुविधाजनक हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए 24 महीने होल्ड करना जरूरी है।

BeYourMoneyManager की सलाह

चांदी एक वोलेटाइल एसेट है। इसे सिर्फ तभी खरीदें जब आप बड़े उतार-चढ़ाव सह सकें और कम से कम 3-5 साल होल्ड करने का इरादा हो। पोर्टफोलियो में 5-10% से ज्यादा आवंटन न करें। डाइवर्सिफिकेशन बनाए रखें और अपनी रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से फैसला लें।

मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर हो सकती है, बशर्ते आप धैर्य रखें और स्टैगर्ड तरीके से निवेश करें। बाजार की स्थितियां बदल सकती हैं, इसलिए नियमित रूप से अपडेट्स देखते रहें।

नोट: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।

(स्रोत: हालिया बाजार रिपोर्ट्स और विशेषज्ञ राय पर आधारित मूल लेख – www.beyourmoneymanager.com)

Rajanish Kant