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SBI सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए इंश्योरेंस अनिवार्य है क्या? RBI के असली नियम और बैंक की मनमानी l SBI savings account insurance mandatory, RBI rules bank insurance, SBI account opening without insurance

SBI सेविंग्स अकाउंट खोलने गए एक युवक के साथ हुई घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। बैंक ब्रांच में कर्मचारी और मैनेजर ने अकाउंट खोलने के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस लेना अनिवार्य बता दिया। इंश्योरेंस न लेने पर अकाउंट नहीं खोला जाएगा, ऐसा साफ कह दिया गया। मैनेजर ने यहां तक कहा कि इंश्योरेंस के बिना यहां अकाउंट नहीं खुलेगा, कस्टमर सर्विस सेंटर जाओ।

सवाल उठता है – क्या SBI या किसी भी बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए इंश्योरेंस लेना RBI का नियम है? जवाब है नहीं।

RBI और SBI का आधिकारिक रुख

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार कोई भी बैंक ग्राहक को इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड या कोई अन्य प्रोडक्ट खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। सेविंग्स अकाउंट खोलने के लिए सिर्फ KYC दस्तावेज (आधार, पैन, फोटो आदि) और बैंक के नियमों का पालन पर्याप्त है।

SBI खुद कई बार आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर चुका है कि:

इंश्योरेंस और अन्य निवेश पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) हैं।

अकाउंट खोलने के लिए कोई भी इंश्योरेंस या निवेश अनिवार्य नहीं है।

ब्रांच सिर्फ जानकारी और जागरूकता के लिए ऑफर बता सकते हैं, जबरदस्ती नहीं कर सकते।

बैंक कर्मचारियों द्वारा “अकाउंट नहीं खुलेगा” कहना नियमों का उल्लंघन है। यह mis-selling और forced bundling की श्रेणी में आता है, जिसे RBI ने सख्ती से प्रतिबंधित किया है।

ऐसी स्थिति में ग्राहक क्या करें?

शांति से मना करें – इंश्योरेंस स्वैच्छिक है, यह साफ कहें।

लिखित में मांगें – अगर वे मना करते हैं तो लिखित में कारण मांगें कि इंश्योरेंस के बिना अकाउंट क्यों नहीं खुल रहा।

शिकायत दर्ज करें –  

   SBI की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर “Raise Complaint” सेक्शन में Account Opening Related >> Refusal To Open New Account चुनकर शिकायत करें।  

   @TheOfficialSBI या @OfficialSBICare पर डिटेल्स भेजें।  

  RBI CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर शिकायत दर्ज करें।

दूसरी ब्रांच या ऑनलाइन विकल्प – SBI YONO ऐप या दूसरी ब्रांच में कोशिश करें। Basic Savings Bank Deposit (BSBD) अकाउंट भी जीरो बैलेंस पर खुल सकता है।

ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत

कई बैंक ब्रांच में टारगेट पूरा करने के दबाव में कर्मचारी इंश्योरेंस, ULIP या अन्य प्रोडक्ट को अनिवार्य बता देते हैं। यह न सिर्फ गलत है बल्कि RBI के नए नियमों के खिलाफ भी है, जिनमें forced bundling पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।

आपका अधिकार है कि आप बिना किसी अतिरिक्त प्रोडक्ट के सिर्फ सेविंग्स अकाउंट खोल सकें। जानकारी होना ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप भी ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं तो शिकायत जरूर करें। बैंक की मनमानी तभी रुकेगी जब ग्राहक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे।

Be Your Money Manager के साथ वित्तीय ज्ञान बढ़ाएं और सही फैसले लें।  


Rajanish Kant शनिवार, 19 सितंबर 2026
AAII सर्वे 2026: निवेशक सेंटिमेंट 16 महीने के निचले स्तर पर गिरा, बेयरिश निवेशक 53.3% पहुंचे | क्या कहता है बाजार का डर? भारतीय निवेशकों के लिए क्या सबक?

हाल ही में जारी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (AAII) के साप्ताहिक सर्वेक्षण ने अमेरिकी खुदरा निवेशकों के मनोभाव में भारी गिरावट का खुलासा किया है। निवेशक सेंटिमेंट पिछले 16 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।  

सर्वे के अनुसार, 53.3% निवेशक बेयरिश (निराशावादी) हैं, जबकि बुलिश (आशावादी) निवेशकों का प्रतिशत घटकर सिर्फ 28.8% रह गया है। यह पिछले एक साल का सबसे कम बुलिश स्तर है। बुल-बेयर स्प्रेड -24.5% पर आ गया है, जो ऐतिहासिक औसत 6.5% से काफी नीचे है और लगातार नौवें सप्ताह से औसत से कम बना हुआ है।  

क्यों गिरा सेंटिमेंट?

मुख्य वजहें बताई जा रही हैं:  

ऊंचे तेल की कीमतें  

फेडरल रिजर्व द्वारा 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाने का फैसला  

बाजार में हालिया अस्थिरता  

सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा निवेशकों ने अपनी कैश होल्डिंग्स सामान्य से ज्यादा रखी हैं। करीब 19.1% ने कहा कि उनका कैश आवंटन “बहुत ज्यादा” है। यह साफ संकेत है कि निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।  

दिलचस्प बात यह है कि S&P 500 अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब (लगभग 2% नीचे) है। ऐसे में यह सेंटिमेंट कई विशेषज्ञों के लिए कॉन्ट्रैरियन इंडिकेटर भी बन सकता है—यानी जब डर चरम पर होता है, तो बाजार अक्सर पलटने की तैयारी करता है।  

भारतीय निवेशकों के लिए क्या सबक?

अमेरिकी बाजार का मूड ग्लोबल सेंटिमेंट को प्रभावित करता है। ऊंचे तेल दाम और अमेरिकी ब्याज दरें भारतीय बाजारों, रुपये और विदेशी निवेश प्रवाह पर भी असर डाल सकती हैं।  

ऐसे समय में BeYourMoneyManager सलाह देता है:  

भावनाओं के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और एसेट एलोकेशन पर फोकस रखें।  

बाजार में डर के समय भी लंबी अवधि के निवेश को बनाए रखें।  

जरूरत से ज्यादा कैश रखने के बजाय व्यवस्थित निवेश (SIP) जारी रखें।  

जोखिम सहन क्षमता के अनुसार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें।  

बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। असली सफलता उन निवेशकों को मिलती है जो शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट से प्रभावित हुए बिना अनुशासन बनाए रखते हैं।  

(स्रोत: AAII सर्वे और बाजार रिपोर्ट्स पर आधारित मूल लेख)  


Rajanish Kant
ICICI बैंक ने वेबसाइट और नेट बैंकिंग डोमेन बदला: क्या यूजर ID और पासवर्ड रीसेट करना होगा? | नई .bank.in एड्रेस l beyourmoneymanager

ICICI बैंक ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार अपनी आधिकारिक वेबसाइट और नेट बैंकिंग एड्रेस को नए .bank.in डोमेन पर शिफ्ट कर दिया है। यह बदलाव ऑनलाइन बैंकिंग को और सुरक्षित बनाने और फिशिंग धोखाधड़ी को रोकने के लिए किया गया है।

नई वेबसाइट और नेट बैंकिंग एड्रेस क्या है?

वेबसाइट:** पुराना एड्रेस www.icicibank.com अब www.icici.bank.in हो गया है।  

नेट बैंकिंग:** retailnetbanking.icicibank.com से बदलकर retailnetbanking.icici.bank.in हो गया है।

ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने ब्राउज़र में सेव किए गए बुकमार्क या शॉर्टकट को अपडेट कर लें, ताकि सीधे आधिकारिक साइट पर पहुंच सकें। पुराने एड्रेस पर जाने पर ऑटो-रिडायरेक्ट भी काम कर सकता है, लेकिन सुरक्षा के लिए नया एड्रेस बुकमार्क करना बेहतर है।

क्या यूजर ID और पासवर्ड बदलना पड़ेगा?

नहीं। डोमेन बदलाव से आपके मौजूदा कस्टमर ID, पासवर्ड या अकाउंट डिटेल्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आप पहले जैसे ही लॉगिन करके नेट बैंकिंग का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। नया रजिस्ट्रेशन या रीसेट करने की जरूरत नहीं है।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए नेट बैंकिंग लॉगिन में नया CAPTCHA फीचर भी जोड़ा गया है।

iMobile ऐप पर मेंटेनेंस

ICICI बैंक ने बताया है कि 19 सितंबर 2026 को कुछ घंटों के लिए iMobile ऐप सर्विस मेंटेनेंस के कारण उपलब्ध नहीं रहेगी। इस दौरान नेट बैंकिंग वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आरबीआई का नियम क्या कहता है?

आरबीआई ने अप्रैल 2025 के सर्कुलर में सभी बैंकों को निर्देश दिया था कि वे 31 अक्टूबर 2025 तक अपनी नेट बैंकिंग वेबसाइट को विशेष .bank.in डोमेन पर शिफ्ट करें। इससे फर्जी वेबसाइट्स से सुरक्षा बढ़ेगी और ग्राहकों का विश्वास मजबूत होगा। कई अन्य बैंक जैसे SBI, HDFC, Axis आदि भी इसी डोमेन पर शिफ्ट हो चुके हैं।

ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

नया एड्रेस www.icici.bank.in बुकमार्क कर लें।  

लॉगिन से पहले हमेशा URL चेक करें।  

फिशिंग मैसेज या संदिग्ध लिंक से सावधान रहें।  

नेट बैंकिंग में नया CAPTCHA ध्यान से भरें।

यह बदलाव सिर्फ डोमेन का है, आपकी बैंकिंग सेवाएं पहले की तरह सुचारू रूप से चलती रहेंगी। ज्यादा जानकारी के लिए ICICI बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर से संपर्क करें।

www.beyourmoneymanager.com पर व्यक्तिगत वित्त से जुड़ी और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

Rajanish Kant शुक्रवार, 18 सितंबर 2026
सोना $10,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है? जेफरीज के क्रिस वुड का बड़ा दावा – भारत के लिए क्या मायने रखता है?

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सोने की कीमत $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना पूरी तरह संभव है। यह टारगेट मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना है।

वर्तमान स्थिति  

17 सितंबर 2026 को सोना करीब $4,348 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इससे पहले जनवरी में यह अपने ऑल-टाइम हाई $5,589 तक पहुंच चुका था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद कीमतों में कुछ दबाव देखा गया।

क्रिस वुड का मुख्य तर्क  

वुड के अनुसार, अमेरिका की राजकोषीय स्थिति बहुत खराब है। भारी घाटे के कारण सरकार ऊंची बॉन्ड यील्ड्स को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण एंटाइटेलमेंट्स में कटौती भी आसान नहीं है।

ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों को बॉन्ड यील्ड्स को नियंत्रित या “फिक्स” करना पड़ सकता है। जब ऐसा होगा, तो डॉलर लंबी अवधि के कमजोर होने के ट्रेंड में प्रवेश कर सकता है। कमजोर डॉलर सोने और इमर्जिंग मार्केट एसेट्स के लिए बहुत सकारात्मक साबित होता है।

वुड ने कहा कि ऐसे माहौल में सोना $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना “feasible” (संभव) है।

भारत के लिए विशेष महत्व  

भारतीय परिवारों के पास सोने का बहुत बड़ा भंडार है। हाल के वर्षों में गोल्ड लेंडिंग मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। अगर सोना $10,000 के स्तर पर पहुंचता है, तो भारतीय घरों की बैलेंस शीट में भारी इजाफा हो सकता है। इससे घरेलू संपत्ति का मुद्रीकरण (monetisation) और मजबूत होगा।

अन्य संभावित कदम  

वुड ने एक और संभावना का जिक्र किया। अमेरिका अपने गोल्ड रिजर्व्स (जो वर्तमान में बहुत कम कीमत पर दर्ज हैं) का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है और उससे प्राप्त राशि से ट्रेजरी डेट वापस खरीद सकता है।

चेतावनी भी है  

वुड ने साफ कहा कि अगर फेडरल रिजर्व वाकई सख्त मौद्रिक नीति अपनाता है, बैलेंस शीट को काफी हद तक सिकोड़ता है और डॉलर मजबूत होता है, तो उनका यह अनुमान गलत साबित हो सकता है। ऐसे में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या सोचें?  

क्रिस वुड का यह व्यू लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पर आधारित है। सोना पारंपरिक रूप से मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और डॉलर कमजोरी के खिलाफ हेज माना जाता है। भारतीय निवेशक सोने को पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के नजरिए से देखते रहे हैं।

हालांकि, कोई भी टारगेट निश्चित नहीं होता। बाजार की स्थिति, अमेरिकी नीतियां और वैश्विक घटनाक्रम कीमतों को प्रभावित करते रहेंगे। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, समय-सीमा और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।

www.beyourmoneymanager.com पर हम नियमित रूप से ऐसे महत्वपूर्ण मार्केट व्यूज और उनके भारत पर प्रभाव को सरल भाषा में समझाने का प्रयास करते हैं।

(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।)

Rajanish Kant गुरुवार, 17 सितंबर 2026
After UPI, Now Gold; BIS Gold Hallmarking Fees ₹45 से ₹75 हुई: त्योहारों से पहले आम आदमी पर कितना असर पड़ेगा?BeYourMoneyManager

BIS गोल्ड हॉलमार्किंग फीस में भारी बढ़ोतरी: अब हर आर्टिकल पर ₹30 ज्यादा चुकाना होगा

त्योहारों का मौसम आने वाला है और सोना खरीदने वाले आम लोगों के लिए एक और खबर आ गई है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में करीब 67% की बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहां प्रति आर्टिकल ₹45 फीस लगती थी, अब वह बढ़कर ₹75 हो गई है। यह नया शुल्क 14 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है।

चांदी की हॉलमार्किंग फीस पहले जैसी ही ₹35 प्रति आर्टिकल बनी हुई है। सोने के लिए न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस ₹200 और चांदी के लिए ₹150 तय की गई है।

क्या बदला है?

सोना**: पुरानी फीस ₹45 → नई फीस ₹75 (प्रति आर्टिकल ₹30 की बढ़ोतरी)

चांदी**: ₹35 प्रति आर्टिकल (कोई बदलाव नहीं)

न्यूनतम शुल्क सोने के लिए ₹200 प्रति खेप और चांदी के लिए ₹150 प्रति खेप

इसका मतलब साफ है कि ज्वैलर को हर एक सोने के गहने पर ₹30 अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। कई मामलों में यह खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंच सकता है, खासकर हल्के वजन वाले गहनों में जहां यह अतिरिक्त लागत ज्यादा महसूस होती है।

आम आदमी पर असर क्या होगा?

त्योहारों के मौसम में सोने की मांग बढ़ जाती है। हॉलमार्किंग अनिवार्य है और यह शुद्धता की गारंटी देती है। लेकिन जब हर आर्टिकल पर अतिरिक्त ₹30 लग जाएंगे, तो छोटे-मोटे गहनों की कीमत में भी थोड़ा इजाफा दिख सकता है।

ज्वैलरी इंडस्ट्री की संस्था ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने इस बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि हॉलमार्किंग की मात्रा बहुत बढ़ गई है, इसलिए फीस बढ़ाने से पहले उद्योग से सलाह ली जानी चाहिए थी। उनका मानना है कि फोकस नकली हॉलमार्क और अनधिकृत केंद्रों पर होना चाहिए।

पैसे बचाने के कुछ सुझाव

तुलना जरूर करें – अलग-अलग ज्वैलर्स से रेट पूछें। कुछ ज्वैलर बढ़ी हुई फीस खुद सहन कर सकते हैं।

वजन और डिजाइनिंग चार्ज समझें – हॉलमार्किंग फीस के अलावा मेकिंग चार्ज और GST भी देखें।

HUID चेक करें – BIS Care ऐप से हॉलमार्क की सत्यता जरूर जांचें।

बड़ी खरीदारी प्लान करें – एक साथ कई आर्टिकल खरीदने पर न्यूनतम शुल्क का असर कम पड़ता है।

बजट बनाकर चलें – त्योहारों में आवेग में खरीदने से बचें। पहले तय करें कि कितना खर्च कर सकते हैं।

हॉलमार्किंग ग्राहकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन जब फीस अचानक इतनी बढ़ जाए तो आम आदमी की जेब पर दबाव जरूर पड़ता है। UPI चार्ज की चर्चाओं के बीच अब सोने पर भी अतिरिक्त खर्च आ गया है।

आपकी राय क्या है? क्या आपको लगता है कि यह बढ़ोतरी जायज है या आम आदमी पर बोझ बढ़ा रही है? कमेंट में बताएं।

नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। हमेशा आधिकारिक अधिसूचना और अपने ज्वैलर से नवीनतम जानकारी जांच लें।

(Website: www.beyourmoneymanager.com)

Rajanish Kant
Paytm को बड़ा फायदा: UPI MDR से मर्चेंट बिजनेस में अतिरिक्त रेवेन्यू, ग्राहकों के लिए UPI अभी भी फ्री | BeYourMoneyManager

पेटीएम ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में बताया है कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने से कंपनी के मर्चेंट बिजनेस से अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट होगा। कई ऐसे ट्रांजेक्शन जो पहले फ्री थे, अब उनसे कमाई हो सकेगी।

क्या है नया MDR नियम?

NPCI ने 15 सितंबर 2026 को सर्कुलर (NPCI/UPI/OC-No.237/2026-27) जारी किया है। इसके मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से UPI पर पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजेक्शन में ₹2,000 से ज्यादा की राशि पर अधिकतम 0.4% तक MDR चार्ज लगेगा।  

₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन तय की गई है।  

छोटे मर्चेंट्स (कुछ श्रेणियों में) और ₹2,000 तक के ट्रांजेक्शन पर MDR जीरो रहेगा।  

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल जैसी कुछ सेक्टर्स में फ्लैट ₹5 MDR लागू हो सकता है।  

म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ भुगतान पर कम रेट (जैसे 0.02%) लगेगा।  

महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राहकों (कस्टमर्स) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। UPI पेमेंट्स उनके लिए पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे। MDR सिर्फ मर्चेंट्स द्वारा भुगतान किया जाएगा और इसे ग्राहकों पर पास-ऑन नहीं किया जा सकता।

Paytm के लिए क्या मायने रखता है?

One97 Communications (Paytm की पेरेंट कंपनी) ने स्पष्ट कहा है कि यह बदलाव मर्चेंट बिजनेस से उन कई ट्रांजेक्शन पर अतिरिक्त रेवेन्यू देगा जो पहले फ्री प्रोसेस होते थे। कंपनी आगे प्रभाव का आकलन करने के बाद जरूरी डिस्क्लोजर करेगी।  

यह कदम फिनटेक कंपनियों, बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के लिए नया रेवेन्यू सोर्स खोलता है। विश्लेषकों के अनुसार इससे इंडस्ट्री में हजारों करोड़ रुपये का रेवेन्यू पूल बन सकता है, जिसमें Paytm जैसे प्लेयर्स को मर्चेंट एक्वायरिंग साइड से हिस्सा मिलने की उम्मीद है।

ग्राहकों और मर्चेंट्स के लिए असर

ग्राहक**: UPI स्कैन और पे, फोन नंबर या किसी भी तरीके से भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं। P2P ट्रांसफर भी फ्री रहेंगे।  

मर्चेंट्स**: ₹2,000 से ऊपर के योग्य P2M ट्रांजेक्शन पर MDR देना होगा। छोटे व्यापारियों को कई मामलों में छूट मिलेगी। कुछ मर्चेंट्स कैश की ओर वापस जाने की बात कर सकते हैं, लेकिन डिजिटल पेमेंट्स की सुविधा और वॉल्यूम को देखते हुए ज्यादातर बड़े मर्चेंट्स इसे अपनाएंगे।  

क्यों जरूरी है ये जानना?

UPI भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। लंबे समय तक इसे सब्सिडी और जीरो MDR के सहारे चलाया गया। अब इकोसिस्टम को सस्टेनेबल बनाने के लिए सीमित MDR लगाया जा रहा है। इससे पेमेंट कंपनियों की कमाई बढ़ेगी, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत बनी रहेगी।

Paytm जैसी कंपनियों के शेयरों में इस खबर के बाद तेजी देखी गई है क्योंकि यह उनके बिजनेस मॉडल को मजबूत बनाता है।  

अगर आप मर्चेंट हैं तो अपने पेमेंट गेटवे या QR कोड प्रोवाइडर से नए चार्जेस की डिटेल्स जरूर चेक करें। आम यूजर्स के लिए UPI पहले की तरह आसान और फ्री बना रहेगा।  

स्रोत: Paytm की SEBI फाइलिंग और NPCI सर्कुलर (15 सितंबर 2026)।  


Rajanish Kant बुधवार, 16 सितंबर 2026
UPI पर नए MDR नियम 2026: ₹2000 से ऊपर लेन-देन पर 0.4% चार्ज, उपभोक्ता फ्री रहेंगे,15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी| BeYourMoneyManager

UPI पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नियम: क्या बदल रहा है और आपको क्या जानना चाहिए?

15 सितंबर 2026 को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के सिलेक्ट पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के बारे में आधिकारिक FAQs जारी किए हैं। ये नए नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।

मुख्य बातें संक्षेप में

उपभोक्ताओं पर कोई चार्ज नहीं**: आम यूजर्स को UPI पेमेंट करने पर कोई फीस नहीं लगेगी। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर भी पूरी तरह फ्री रहेंगे।

₹2000 तक के लेन-देन फ्री**: सभी मर्चेंट्स के लिए ₹2000 तक के P2M लेन-देन पर MDR शून्य रहेगा। ये लेन-देन कुल UPI P2M वॉल्यूम का 95% से ज्यादा हिस्सा हैं।

₹2000 से ऊपर पर 0.4% MDR**: सामान्य मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% चार्ज लगेगा। ₹75,000 और उससे ऊपर के लेन-देन पर अधिकतम ₹300 की कैप होगी।

छोटे मर्चेंट्स सुरक्षित**: P2PM कैटेगरी वाले छोटे विक्रेता (जो महीने में ₹1 लाख तक UPI QR से पेमेंट लेते हैं) पर MDR नहीं लगेगा।

विशेष कैटेगरी में फ्लैट ₹5**: रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल आदि जैसे सेक्टर्स में ₹2000 से ऊपर के लेन-देन पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा।

उदाहरण से समझें MDR

| लेन-देन राशि     | लागू MDR      | मर्चेंट द्वारा भुगतान |

|--------------------|-------------------|-----------------------|

| ₹2,000 तक         | 0%                | ₹0                    |

| ₹3,000            | 0.4%              | ₹12                   |

| ₹50,000           | 0.4%              | ₹200                  |

| ₹75,000+        | कैप ₹300         | ₹300                  |

क्यों लाया गया ये नियम?

NPCI के अनुसार UPI अब हर महीने अरबों लेन-देन हैंडल कर रहा है। सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना लंबे समय तक संभव नहीं। MDR से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने, फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम सुधारने और छोटे मर्चेंट्स को सपोर्ट करने वाले फंड में किया जाएगा। UPI का MDR अभी भी क्रेडिट कार्ड (1.5-2.5%) और डेबिट कार्ड की तुलना में काफी कम है।

उपभोक्ताओं के लिए राहत

UPI ऐप्स कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं ले सकेंगे।

QR कोड स्कैन करने पर कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा।

ऑटो-पे और रिकरिंग पेमेंट्स (बिल, सब्सक्रिप्शन आदि) पर भी निर्धारित MDR नहीं लगेगा।

कीमतें बढ़ने की संभावना कम है क्योंकि मर्चेंट्स को चार्ज ग्राहकों पर नहीं डालने की अनुमति है और MDR बहुत कम है।

छोटे व्यवसायों के लिए क्या है?

छोटे और माइक्रो मर्चेंट्स (P2PM) को पूरी सुरक्षा दी गई है। साथ ही एक डेडिकेटेड फंड बनाया जाएगा जो टियर-3 से टियर-6 शहरों, पूर्वोत्तर राज्यों और सरकारी स्कीम्स से जुड़े मर्चेंट्स को डिजिटल पेमेंट अपनाने में मदद करेगा।

कब से लागू होगा?

नए MDR नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक कंपनियों को सिस्टम अपडेट करने का पर्याप्त समय दिया गया है।

आधिकारिक जानकारी कहां से लें?

केवल NPCI, RBI या वित्त मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों से बचें।

निष्कर्ष: UPI भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का आधार है। ये नए नियम सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए लाए गए हैं, जबकि आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों को फ्री सर्विस का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा। अगर आप मर्चेंट हैं तो अपने अकाउंटिंग सिस्टम को अपडेट रखें और अगर उपभोक्ता हैं तो बिना किसी चिंता के UPI का इस्तेमाल जारी रखें।

अधिक अपडेट्स और पर्सनल फाइनेंस टिप्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर जुड़े रहें।

(लेख मूल रूप से NPCI के आधिकारिक FAQs और संबंधित रिपोर्ट्स पर आधारित है।)

Rajanish Kant मंगलवार, 15 सितंबर 2026
Notice Period (नोटिस पीरियड) पूरा किए बिना नौकरी छोड़ने पर क्या कंपनी ब्लैकलिस्ट या धमकी दे सकती है? जानें भारतीय कानून क्या कहता है | BeYourMoneyManager

क्या नियोक्ता नोटिस पीरियड से पहले छोड़ने वाले कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकता है या धमकी दे सकता है? भारतीय संविधान, कॉन्ट्रैक्ट एक्ट और लेबर लॉ के अनुसार जानें आपके अधिकार और कंपनी के कानूनी विकल्प।

नोटिस पीरियड पूरा किए बिना नौकरी छोड़ने पर क्या कंपनी ब्लैकलिस्ट या धमकी दे सकती है? जानें कानून क्या कहता है

कई कंपनियों में नोटिस पीरियड बहुत लंबा होता है। कर्मचारी नए जॉब जॉइन करने के लिए पूरा नोटिस पीरियड सर्वे नहीं करना चाहते। ऐसे में सवाल उठता है – क्या कंपनी कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकती है, धमकी दे सकती है या जबरदस्ती काम करवा सकती है?

भारतीय कानून इस मामले में काफी स्पष्ट है।

क्या कंपनी कर्मचारी को ब्लैकलिस्ट कर सकती है?

भारतीय श्रम कानून में “ब्लैकलिस्टिंग” का कोई आधिकारिक प्रावधान नहीं है। कंपनी किसी कर्मचारी का नाम अन्य कंपनियों या इंडस्ट्री बॉडीज में सर्कुलेट करके उसकी भविष्य की नौकरी खराब नहीं कर सकती। ऐसा करना डिफामेशन (मानहानि) या livelihood में दखल का आधार बन सकता है।

हां, कंपनी अंदरूनी तौर पर “do-not-rehire” फ्लैग लगा सकती है। यह कानूनी रूप से मान्य है। बैकग्राउंड वेरिफिकेशन में कंपनी सही जानकारी दे सकती है कि कर्मचारी ने एग्जिट फॉर्मेलिटीज पूरी नहीं कीं।

क्या कंपनी धमकी दे सकती है या जबरदस्ती काम करवा सकती है?

नहीं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत जबरन श्रम (forced labour) प्रतिबंधित है। Specific Relief Act, 1963 के अनुसार पर्सनल सर्विस कॉन्ट्रैक्ट को जबरन लागू नहीं किया जा सकता। यानी कोर्ट किसी कर्मचारी को वापस ऑफिस आकर काम करने का आदेश नहीं दे सकता।

कंपनी की कानूनी राहत मुख्य रूप से मौद्रिक होती है:

नोटिस पीरियड की बाकी सैलरी कटौती

डैमेज क्लेम (Indian Contract Act, 1872 के तहत)

रिलीविंग लेटर या एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट रोकना (अगर हैंडओवर पूरा नहीं हुआ)

क्या कंपनी कोर्ट से ऑर्डर लेकर प्रतिद्वंद्वी कंपनी में जॉइन करने से रोक सकती है?

बहुत मुश्किल है। कोर्ट आमतौर पर कर्मचारी को दूसरे जगह काम करने से नहीं रोकते, खासकर नोटिस पीरियड खत्म होने के बाद। सेक्शन 27 (Indian Contract Act) ट्रेड पर रोक को अवैध मानता है। केवल गोपनीयता या व्यापारिक रहस्यों के उल्लंघन के मजबूत सबूत होने पर ही सीमित इनजंक्शन संभव है।

कर्मचारी क्या सावधानी बरतें?

रोजगार अनुबंध ध्यान से पढ़ें।

औपचारिक रूप से रिजाइन करें और रिकॉर्ड रखें।

अगर संभव हो तो नोटिस बायआउट या वेवर पर बातचीत करें।

कंपनी प्रॉपर्टी और डेटा सही तरीके से हैंडओवर करें।

निष्कर्ष:  

नोटिस पीरियड पूरा न करने पर कंपनी आपको जबरदस्ती रोक नहीं सकती और औपचारिक ब्लैकलिस्ट भी नहीं कर सकती। उसकी मुख्य शक्ति वित्तीय दावे और रिलीविंग डॉक्यूमेंट रोकने तक सीमित है। धमकी या गलत तरीके से नाम खराब करना कानूनी रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

अपने अधिकारों को समझें और जरूरत पड़ने पर लेबर लॉ विशेषज्ञ या वकील से सलाह लें।  

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Source: ET Wealth 

Rajanish Kant
EPFO WhatsApp Channel लॉन्च: PF सदस्यों के लिए बड़ी राहत: PF अपडेट्स, बैलेंस और क्लेम स्टेटस कैसे पाएं? जॉइन करने का आसान तरीका l BeYourMoneyManager

EPFO ने लॉन्च किया आधिकारिक WhatsApp Channel – www.beyourmoneymanager.com

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों और पेंशनधारकों के लिए एक आधिकारिक WhatsApp Channel लॉन्च किया है। अब आप PF से जुड़े महत्वपूर्ण अपडेट्स, योजनाओं की जानकारी और उपयोगी शैक्षिक सामग्री सीधे अपने WhatsApp पर प्राप्त कर सकते हैं।

यह सुविधा उन लाखों वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए बहुत फायदेमंद है जो नियमित रूप से EPFO की वेबसाइट या ऐप चेक नहीं कर पाते।

EPFO WhatsApp Channel से क्या-क्या जानकारी मिलेगी?

EPFO की आधिकारिक घोषणाएं और महत्वपूर्ण अपडेट्स  

EPF Advance निकासी से जुड़ी जानकारी  

नौकरी दोबारा जॉइन करने पर योगदान (contribution) संबंधी गाइडेंस  

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से जुड़े अपडेट्स  

अन्य उपयोगी वीडियो और शैक्षिक लिंक  

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि भविष्य में या अतिरिक्त WhatsApp सेवा के जरिए सदस्य अपना PF बैलेंस, पिछले पांच ट्रांजेक्शन और क्लेम स्टेटस भी चेक कर सकेंगे।

EPFO आधिकारिक WhatsApp Channel कैसे जॉइन करें?

नीचे दिए गए आधिकारिक लिंक पर क्लिक करें:  

  https://www.whatsapp.com/channel/0029Vb6kmH48Pgs8ftd6Kw3Y

WhatsApp ऐप खुलने पर Follow या जॉइन बटन पर टैप करें।  

वैकल्पिक रूप से EPFO के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किए गए QR कोड को स्कैन करके भी चैनल जॉइन कर सकते हैं।

नोट: हमेशा केवल EPFO के आधिकारिक लिंक या QR कोड का ही इस्तेमाल करें। किसी अनजान नंबर या लिंक से नहीं जुड़ें।

क्यों जरूरी है इस Channel को फॉलो करना?

EPFO समय-समय पर नए नियम, स्कीम और सेवाओं की घोषणा करता रहता है। WhatsApp Channel के माध्यम से ये जानकारी समय पर और आसानी से मिल जाती है। साथ ही शैक्षिक वीडियो से आप अपनी PF अकाउंट से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर समझ सकते हैं।

अतिरिक्त टिप्स

अपना UAN और KYC हमेशा अपडेट रखें।  

PF बैलेंस और पासबुक नियमित रूप से UMANG ऐप या EPFO की आधिकारिक वेबसाइट (epfindia.gov.in) से भी चेक करते रहें।  

किसी भी व्यक्तिगत जानकारी या OTP किसी के साथ शेयर न करें।

EPFO का यह कदम डिजिटल सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है। जल्दी से आधिकारिक WhatsApp Channel जॉइन करें और PF से जुड़े अपडेट्स का लाभ उठाएं।


अधिक व्यक्तिगत वित्त संबंधी टिप्स और अपडेट्स के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करते रहें।

Rajanish Kant
UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं लगेगा: वित्त मंत्रालय ने अधिसूचित किया संशोधन l BeYourMoneyManager टीम का सुझाव

 

भारत में डिजिटल पेमेंट को और आसान और सस्ता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन को अधिसूचित कर दिया है। इसके अनुसार, बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर्स UPI ट्रांजेक्शन पर ₹2,000 तक कोई भी सीधा या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते।

मुख्य बातें:

UPI ट्रांजेक्शन** पर ₹2,000 तक का कोई चार्ज नहीं लगेगा।

यह प्रावधान RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट पर भी लागू होगा।

बैंक या कोई भी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर न तो सीधे और न ही किसी अन्य तरीके से शुल्क वसूल सकेंगे।

यह फैसला आम लोगों, छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा के डिजिटल लेन-देन करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए राहत भरा है। इससे UPI का इस्तेमाल और बढ़ेगा तथा डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूती मिलेगी।

आप पर क्या असर पड़ेगा?

छोटे लेन-देन (जैसे किराना, ऑटो, कैब, रेस्टोरेंट बिल आदि) पूरी तरह फ्री रहेंगे।

व्यापारी भी बिना चिंता के UPI पेमेंट स्वीकार कर सकेंगे।

डिजिटल भुगतान और अधिक सुरक्षित और किफायती बनेगा।

BeYourMoneyManager टीम का सुझाव:  

UPI का इस्तेमाल करते समय हमेशा सुरक्षित रहें। अपना UPI पिन किसी के साथ शेयर न करें और संदिग्ध लिंक या कॉल से बचें। पैसे की बचत और सही मैनेजमेंट के लिए नियमित रूप से अपने खर्चों को ट्रैक करते रहें।

स्रोत: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना


Rajanish Kant