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RBI Floating Rate Savings Bonds 2026: 8.05% ब्याज दर नहीं बदली, अभी भी सबसे अच्छा Fixed Income Investment क्यों? | पूरी डिटेल्स

RBI फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड 2026 की ब्याज दर 8.05% बनी हुई है। NSC से 0.35% ज्यादा, 7 साल का टेन्योर, सरकारी गारंटी। जानें निवेश कैसे करें, टैक्सेशन, फायदे और FD से तुलना।

RBI Floating Rate Savings Bonds 2026: 8.05% ब्याज दर नहीं बदली, अभी भी सबसे अच्छा Fixed Income Investment क्यों?

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जुलाई 2026 में फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड (FRSB 2020) की ब्याज दर को 8.05% पर ही बरकरार रखा है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) की दर 7.7% पर स्थिर रखी, जिसके चलते RBI बॉन्ड की दर भी 7.7% + 0.35% = 8.05% बनी रही।यह दर 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी।

अगर आप सुरक्षित और अच्छा रिटर्न चाहते हैं तो यह अभी भी फिक्स्ड इनकम निवेश का बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है।

RBI Floating Rate Savings Bond क्या है?

RBI Floating Rate Savings Bonds 2020 (Taxable) भारत सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं। इनकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:ब्याज दर: वर्तमान में 8.05% प्रति वर्ष (NSC +0.35%)टेन्योर: 7 साल

ब्याज भुगतान: हर 6 महीने में (1 जनवरी और 1 जुलाई को)

न्यूनतम निवेश: ₹1,000

अधिकतम निवेश सीमा: कोई ऊपरी सीमा नहीं

सुरक्षा: 100% सरकारी गारंटी (Sovereign Guarantee)

ब्याज दर क्यों नहीं बदली? (Latest Update July 2026)फाइनेंस मिनिस्ट्री ने Q2 FY 2026-27 (जुलाई-सितंबर) के लिए सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें अपरिवर्तित रखीं। RBI ने भी 1 जुलाई 2026 को घोषणा की कि FRSB 2026 की कूपन रेट 8.05% ही रहेगी। यह दर हर छह महीने में रीसेट होती है।

RBI Floating Rate Bond vs अन्य निवेश विकल्प (तुलना)

निवेश विकल्प   ब्याज दर (लगभग)       सुरक्षा  


निष्कर्ष: RBI बॉन्ड बैंक FD से बेहतर रिटर्न और बेहतर सुरक्षा दे रहा है।

महत्वपूर्ण बातें जो आपको जाननी चाहिए

Floating Rate का मतलब

दर पूरी 7 साल के लिए फिक्स नहीं है। हर 6 महीने में NSC दर के आधार पर बदल सकती है। अगर NSC बढ़ी तो आपका रिटर्न भी बढ़ेगा।

टैक्सेशन  ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल (आपकी इनकम स्लैब के अनुसार)

TDS लागू होता है

निवेश पर Section 80C की छूट नहीं मिलती



कौन निवेश कर सकता है?

भारतीय नागरिक, HUF आदि। NRI नहीं।



निवेश कैसे करें?

अधिकृत बैंक शाखाओं या ऑनलाइन (कुछ बैंक ऐप/पोर्टल के जरिए) आवेदन कर सकते हैं।


क्या यह आपके पोर्टफोलियो में फिट बैठेगा?

रेगुलर इनकम चाहने वाले...

सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले

FD से बेहतर रिटर्न चाहने वाले

डाइवर्सिफिकेशन के लिए


विशेषज्ञ सलाह: यह कोर पोर्टफोलियो का हिस्सा नहीं बल्कि टैक्टिकल अलोकेशन के रूप में अच्छा है। बाजार की स्थिति और अपनी जरूरत के अनुसार निवेश करें।


Disclaimer: यह लेख सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। ब्याज दरें सरकार द्वारा समय-समय पर बदल सकती हैं।



Rajanish Kant गुरुवार, 2 जुलाई 2026
संसद की वित्त समिति 2 जुलाई को VDA पर RBI और ICAI से चर्चा करेगी। भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन और टैक्सेशन का भविष्य जानें।

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संसद की स्थायी वित्त समिति (Standing Committee on Finance) 2 जुलाई 2026 को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (Virtual Digital Assets - VDA) यानी क्रिप्टोकरेंसी और संबंधित डिजिटल संपत्तियों के भविष्य पर अहम बैठक करने जा रही है। इस बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के प्रतिनिधि शामिल होंगे।यह बैठक भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक व्यापक नियामक ढांचा (Regulatory Framework) बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।बैठक का एजेंडा क्या है?लोकसभा सचिवालय की सूचना के अनुसार, बैठक का विषय है - "वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) पर अध्ययन और आगे का रास्ता"। बैठक को तीन सत्रों में बांटा गया है:सुबह 11:00 से 12:30 बजे तक - RBI अधिकारियों के साथ चर्चा

RBI वित्तीय स्थिरता (Financial Stability), मौद्रिक नीति पर प्रभाव, मनी लॉन्ड्रिंग के जोखिम, निवेशक सुरक्षा और क्रिप्टो पर समग्र नियामक जरूरतों पर अपनी राय रखेगा। RBI पहले भी निजी क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ अपनी चिंता जता चुका है और CBDC (डिजिटल रुपया) को बढ़ावा दे रहा है।

दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक - ICAI के साथ चर्चा

चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संस्था VDA के टैक्सेशन, अकाउंटिंग स्टैंडर्ड, ऑडिट चुनौतियों और कंपनियों-व्यक्तियों के लिए डिस्क्लोजर नियमों पर अपनी विशेषज्ञ राय देगी। याद रहे कि वर्ष 2022 में VDAs पर 30% टैक्स और 1% TDS लागू किया गया था।

दोपहर 2:00 बजे के बाद - आंतरिक चर्चा

समिति सदस्य RBI और ICAI की जमा जानकारी के आधार पर सिफारिशें तैयार करेंगे।

भारत में VDA की वर्तमान स्थितिभारत में फिलहाल वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर कोई व्यापक कानून नहीं है। केवल टैक्सेशन व्यवस्था लागू है:लाभ पर 30% टैक्स

ट्रांसफर पर 1% TDS

कोई स्पष्ट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, एक्सचेंज लाइसेंसिंग या निवेशक सुरक्षा नियम नहीं

वित्त समिति की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब क्रिप्टो बाजार तेजी से बढ़ रहा है और सरकार भी इसके रिस्क एवं अवसर दोनों को समझने की कोशिश कर रही है।निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?क्रिप्टो निवेशकों को स्पष्ट नियम मिलने की उम्मीद

टैक्स कंप्लायंस और रिपोर्टिंग में आसानी

मनी लॉन्ड्रिंग और फ्रॉड पर बेहतर नियंत्रण

भविष्य में लाइसेंस्ड एक्सचेंज और सुरक्षित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की संभावना

beyourmoneymanager.com की सलाह: क्रिप्टो या VDA में निवेश करने वाले निवेशकों को अभी भी उच्च जोखिम मानकर केवल उस राशि का निवेश करना चाहिए जो वे खोने के लिए तैयार हों। किसी भी नई रेगुलेटरी खबर का असर बाजार पर पड़ सकता है, इसलिए अपडेट रहें।


Rajanish Kant
सोने-चांदी में निवेश करते हैं या करना चाहते हैं तो आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारी; Q3 2026 में सोना-चांदी का रीसेट से सेटअप: सुधार के बाद निवेश का बड़ा मौका, निवेशक क्या करें? BeYourMoneyManager

Q3 2026 में सोना और चांदी ने तेज सुधार देखा है। लंबी अवधि के सपोर्ट पर पहुंचकर अब बुलिश सेटअप बन रहा है। मौसमी लाभ, औद्योगिक मांग और फेड नीति पर पूरी हिंदी विश्लेषण पढ़ें।

Q3 2026 में सोना-चांदी का रीसेट से सेटअप: निवेशकों के लिए सुनहरा अवसर?

नमस्ते दोस्तों,  अगर आप सोने-चांदी में निवेश करते हैं या भविष्य में करना चाहते हैं तो यह आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। जून 2026 के अंत में कीमती धातुओं (Precious Metals) में दशकों का सबसे तेज सुधार देखने को मिला। गोल्ड में 14% से ज्यादा की गिरावट आई जबकि सिल्वर ने जून में ही 21% से अधिक का गोता लगाया। यह सुधार दोनों धातुओं को 2025 के अंत के स्तरों पर वापस ले आया है। लेकिन कई विशेषज्ञ अब इसे रीसेट मान रहे हैं, जो Q3 2026 में मजबूत सेटअप बना सकता है।

पिछला रैली और हालिया सुधार की वजहेंपिछले कुछ महीनों में सोना-चांदी नई ऊंचाइयों पर पहुंचे थे। फेड की दरों में कटौती, कमजोर डॉलर, राजकोषीय चिंताएं और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी ने इस रैली को बढ़ावा दिया। लेकिन अचानक मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से मुद्रास्फीति प्रभावित हुई। फेड में बदलाव (हॉकिश रुख) और मजबूत आर्थिक आंकड़ों ने रियल यील्ड्स को बढ़ाया, जिससे निवेशक बॉन्ड जैसी संपत्तियों की ओर मुड़े।इसके बावजूद, बाजार अब लंबी अवधि के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर पहुंच चुका है। कई विश्लेषकों का मानना है कि पाथ ऑफ लीस्ट रेसिस्टेंस अब ऊपर की ओर है। 

Q3 2026 में क्यों बुलिश आउटलुक?

मुद्रास्फीति में सुधार की उम्मीद — संघर्ष का सबसे बुरा दौर शायद पीछे छूट गया है। फेड नई नीतियों पर विचार कर रहा है।

ग्रोथ पीक आउट — आर्थिक वृद्धि चरम पर पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं, जो फेड को नरम रुख अपनाने का मौका दे सकता है।

मौसमी लाभ (Seasonal Tailwind) — जुलाई की शुरुआत से अगस्त की शुरुआत तक सोना अक्सर मजबूत रहता है। यह ट्रेंड ऐतिहासिक रूप से ज्यादा बार पॉजिटिव रहा है।

पोजिशनिंग में बदलाव — ऑप्शंस मार्केट में पुट-कॉल स्क्यू लंबे समय बाद पॉजिटिव हो गया है।

चांदी पर खास फोकस: सिल्वर ने सबसे ज्यादा गिरावट झेली है, लेकिन यह हाई बीटा एसेट है। सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और AI डेटा सेंटर्स से औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है। मल्टी-ईयर सप्लाई डेफिसिट के चलते चांदी में रिकवरी की गुंजाइश ज्यादा लगती है। 

निवेशक क्या करें?

लंबी अवधि के निवेशक: वर्तमान स्तरों को अच्छा एंट्री पॉइंट मान सकते हैं, लेकिन हमेशा रिस्क मैनेजमेंट के साथ।

ट्रेडर्स: सपोर्ट लेवल्स पर नजर रखें। ब्रेकडाउन होने पर रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

डाइवर्सिफिकेशन: पोर्टफोलियो में सोना-चांदी का हिस्सा रखना मुद्रास्फीति और अनिश्चितता के खिलाफ हेज के रूप में काम कर सकता है।

नोट: बाजार में कोई गारंटी नहीं होती। यह विश्लेषण केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

BeYourMoneyManager की सलाह:

Q3 2026 की शुरुआत कीमती धातुओं के लिए रोचक हो सकती है। लेकिन संयम और सही जानकारी के साथ निवेश करें। नियमित अपडेट्स के लिए हमारी वेबसाइट पर बने रहें।






Rajanish Kant
Small Savings Schemes Interest Rates Unchanged July to September 2026 | पोस्ट ऑफिस स्कीम्स ब्याज दरें स्थिर

Small Savings Schemes Interest Rates Unchanged for July-September 2026: अपनी बचत की योजना अब और आसान

नई दिल्ली। अगर आप पोस्ट ऑफिस की विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश करते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। 1 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक Small Savings Schemes की ब्याज दरें पूरी तरह अपरिवर्तित रहेंगी। सरकार की इस घोषणा से लाखों निवेशकों को स्थिर और अनुमानित रिटर्न मिलता रहेगा।

ब्याज दरें क्यों महत्वपूर्ण हैं?

Small Savings Schemes भारत सरकार द्वारा संचालित सुरक्षित निवेश विकल्प हैं। इनमें PPF, NSC, Kisan Vikas Patra, Senior Citizen Savings Scheme, Sukanya Samriddhi Yojana, Monthly Income Scheme आदि शामिल हैं। इनकी ब्याज दरें हर तिमाही (अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च) की समीक्षा के बाद तय की जाती हैं।इस तिमाही ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से आपकी बचत की योजना बिना किसी अनिश्चितता के आगे बढ़ सकती है।

जुलाई-सितंबर 2026 के लिए मुख्य Small Savings Schemes की ब्याज दरें (अपरिवर्तित):

Public Provident Fund (PPF): 7.1% प्रति वर्ष

National Savings Certificate (NSC): 7.7% प्रति वर्ष

Kisan Vikas Patra (KVP): 7.5% (115 महीने में दोगुना)

Sukanya Samriddhi Yojana: 8.2% प्रति वर्ष

Senior Citizen Savings Scheme: 8.2% प्रति वर्ष

Monthly Income Account Scheme: 7.4% प्रति वर्ष

Post Office Savings Account: 4.0% प्रति वर्ष

5-Year Recurring Deposit: 6.7% प्रति वर्ष

(नोट: दरें सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार हैं। निवेश से पहले अपने निकटतम पोस्ट ऑफिस से पुष्टि अवश्य करें।)

इन योजनाओं के प्रमुख फायदे

पूर्ण सुरक्षा – भारत सरकार की गारंटी  

आकर्षक टैक्स लाभ – PPF और Sukanya Samriddhi में धारा 80C के तहत छूट  

उच्च ब्याज दरें – बैंक FD से बेहतर रिटर्न कई स्कीम्स में  

लचीले निवेश विकल्प – छोटी राशि से शुरू करके लाखों तक निवेश संभव

अब क्या करें?

अगर आप नई बचत शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा निवेश को जारी रखना चाहते हैं तो अपने नजदीकी Post Office जाएं। वहां आपको सभी स्कीम्स की पूरी जानकारी, फॉर्म और निवेश की सुविधा मिलेगी।

beyourmoneymanager.com की सलाह:

बचत की तिमाही समीक्षा जरूर करें। अपनी उम्र, जोखिम क्षमता और लक्ष्यों (बच्चों की शिक्षा, शादी, रिटायरमेंट) के अनुसार सही स्कीम चुनें। दरें स्थिर रहने का फायदा उठाकर SIP जैसी नियमित बचत बढ़ाएं।

अस्वीकरण: ब्याज दरों में भविष्य में बदलाव हो सकता है। निवेश से पहले आधिकारिक स्रोत या पोस्ट ऑफिस से सत्यापित जानकारी ले लें।





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Rajanish Kant बुधवार, 1 जुलाई 2026
मई महीने के लिए किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा बैंक लोन लिया-Sectoral Deployment of Bank Credit – May 2026



बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – मई 2026

वर्ष 2026 के मई माह के लिए 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से जुटाए गए बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन संबंधी आंकड़े, जो सभी एससीबी1 के कुल खाद्येतर ऋण का लगभग 95 प्रतिशत होता है, विवरण I और II में दिए गए हैं।

वर्ष-दर-वर्ष (व-द-व) आधार पर देखें तो, खाद्येतर बैंक ऋण2 31 मई 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार 17.4 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि यह पिछले वर्ष (अर्थात् 30 मई 2025) के इसी पखवाड़े में 8.8 प्रतिशत था।

31 मई 2026 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • कृषि और संबद्ध कार्यकलापों हेतु प्रदत्त ऋण में 14.9 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष संवृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 7.5 प्रतिशत थी।

  • उद्योग क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 17.5 प्रतिशत की मजबूत संवृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 5.3 प्रतिशत थी)। जहां ‘सूक्ष्म और लघु’ तथा ‘मध्यम’ उद्योगों को प्रदत्त ऋण में ज़बरदस्त बढ़ोतरी जारी रही, वहीं ‘बड़े’ उद्योगों को प्रदत्त ऋण में तेजी से वृद्धि हुई। प्रमुख उद्योगों में, ‘आधारभूत संरचना’, ‘सभी अभियांत्रिकी’, ‘कपड़ा’, ‘निर्माण’, ‘पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद और परमाणु ईंधन’ तथा ‘रसायन और रासायनिक उत्‍पाद’ को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। तथापि, ‘रबड़, प्लास्टिक एवं उनके उत्पाद’ और ‘लकड़ी एवं लकड़ी से बने उत्पाद’ वाले क्षेत्रों में बढ़ोतरी थोड़ी कम रही।

  • सेवा क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 20.4 प्रतिशत की दर से संवृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 8.4 प्रतिशत थी) जिसे ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (एनबीएफसी), ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’, और ‘व्यापार’ जैसे क्षेत्रों में तेजी से हुई वृद्धि से मदद मिली।

  • वैयक्तिक ऋण क्षेत्र हेतु प्रदत्त ऋण में 15.4 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह एक वर्ष पहले 11.1 प्रतिशत थी। जहां ‘वाहन ऋण’ और ‘आवास’ जैसे क्षेत्रों में लगातार संवृद्धि दर्ज की गई, वहीं ‘क्रेडिट कार्ड बकाया’ क्षेत्र में संवृद्धि धीमी हुई।

अजीत प्रसाद    
उप महाप्रबंधक (संचार)

प्रेस प्रकाशनी: 2026-2027/575


1 आंकड़े महीने के अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े से संबंधित हैं, जो क्षेत्रवार और उद्योग-वार बैंक ऋण (एसआईबीसी) रिटर्न पर आधारित हैं। 31 दिसंबर 2025 से, बैंकिंग विधि (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा को बदलकर महीने का अंतिम दिन कर दिया गया है। तदनुसार, दिसंबर 2025 से वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दरें चालू वर्ष के लिए महीने के अंत के आंकड़ों और पिछले वर्ष के इसी महीने के लिए अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े (पुरानी परिभाषा के अनुसार) के आंकड़ों पर आधारित हैं।

2 खाद्येतर ऋण संबंधी आंकड़े धारा-42 विवरणी पर आधारित हैं, जिसमें सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (एससीबी) शामिल हैं।

 




(स्रोत- www.rbi.org.in)


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6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Rajanish Kant
भारत पर विदेशी ऋण GDP का 19.8% से बढ़कर 20.8% पर पहुंचा I India’s External Debt as at the end of March 2026



मार्च 2026 के अंत में भारत का बाह्य ऋण

मार्च 2026 के अंत में बाह्य ऋण संबंधी स्थिति तथा पहले की तिमाहियों के संशोधित आंकड़े विवरण I (आईएमएफ प्रारूप1) और II (पुराना प्रारूप) में दिए गए हैं। मार्च 2026 के अंत में भारत के बाह्य ऋण से संबंधित प्रमुख गतिविधियां नीचे प्रस्तुत हैं।

मुख्य बातें

  • मार्च 2026 के अंत में, भारत का बाह्य ऋण 762.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें मार्च 2025 के अंत में इसके स्तर से 26.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई (सारणी 1)।

  • सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में बाह्य ऋण का अनुपात मार्च 2025 के अंत में 19.8 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 के अंत में 20.8 प्रतिशत हो गया।

  • भारतीय रुपया और अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मूल्यवृद्धि के कारण मूल्यन प्रभाव 24.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। मूल्यन प्रभाव को छोड़कर, मार्च 2025 के अंत की तुलना में बाह्य ऋण मार्च 2026 में 26.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बजाय 51.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई है।

  • मार्च 2026 के अंत में, दीर्घावधि ऋण (एक वर्ष से अधिक की मूल परिपक्वता वाली) 613.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसमें मार्च 2025 के अंत में इसके स्तर से 11.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई थी।

  • कुल बाह्य ऋण में अल्पावधि ऋण (एक वर्ष तक की मूल परिपक्वता वाली) की हिस्सेदारी मार्च 2025 के अंत में 18.3 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2026 के अंत में 19.6 प्रतिशत हो गई। इसी प्रकार, विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि की तुलना में अल्पावधि ऋण (मूल परिपक्वता) का अनुपात मार्च 2026 के अंत में बढ़कर 21.6 प्रतिशत (मार्च 2025 के अंत में 20.1 प्रतिशत) हो गया।

  • अवशिष्ट परिपक्वता के आधार पर अल्पावधि ऋण (अर्थात्, ऋण दायित्व, जिसमें मूल परिपक्वता तक दीर्घकालिक ऋण, जो अगले बारह महीनों में देय है, और मूल परिपक्वता तक अल्पावधि ऋण को शामिल किया जाता है) मार्च 2026 के अंत में कुल बाह्य ऋण का 42.9 प्रतिशत (मार्च 2025 के अंत में 41.2 प्रतिशत) और विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि का 47.3 प्रतिशत (मार्च 2025 के अंत में 45.4 प्रतिशत) रहा (तालिका 2)।

  • अमेरिकी डॉलर मूल्यवर्गित ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा घटक रहा, जिसकी मार्च 2026 के अंत में 55.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी, इसके बाद भारतीय रुपया (29.4 प्रतिशत), येन (6.4 प्रतिशत), एसडीआर2 (4.3 प्रतिशत) और यूरो (3.7 प्रतिशत) में ऋण मूल्यवर्ग की हिस्सेदारी रही।

  • एक वर्ष पहले के स्तर की तुलना में मार्च 2026 के अंत में सरकारी क्षेत्र के बकाया ऋण में कमी आई जबकि गैर-सरकारी क्षेत्र के बकाया ऋण में वृद्धि हुई (तालिका 3)।

  • कुल बाह्य ऋण में गैर-वित्तीय निगमों के बकाया ऋण का हिस्सा सबसे अधिक 36.4 प्रतिशत था, इसके बाद जमा स्वीकार करने वाले निगम (केंद्रीय बैंक को छोड़कर) (26.5 प्रतिशत), सामान्य सरकार (22.0 प्रतिशत) और अन्य वित्तीय निगम (10.2 प्रतिशत) का हिस्सा रहा।

  • 34.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ ऋण, बाह्य ऋण का सबसे बड़ा घटक रहा, इसके बाद मुद्रा और जमाराशियां (22.3 प्रतिशत), व्यापार ऋण और अग्रिम (19.0 प्रतिशत) तथा ऋण प्रतिभूतियों (16.1 प्रतिशत) की हिस्सेदारी रही (तालिका 4)।

  • ऋण चुकौती (अर्थात्, मूल चुकौती और ब्याज भुगतान) में गिरावट आई, जो मार्च 2025 के अंत में चालू प्राप्तियों के 6.6 प्रतिशत की तुलना में घटकर मार्च 2026 के अंत में 5.8 प्रतिशत हो गई (तालिका 5)।




Table 1: External Debt – Outstanding and Variation
(US$ billion, unless indicated otherwise)
SectorOutstanding as at end-MarchAbsolute VariationPercentage Variation
2024 R2025 PR2026 PMarch 2025 over March 2024March 2026 over March 2025March 2025 over March 2024March 2026 over March 2025
12345678
I. General Government148.7168.4167.519.7-0.913.3-0.6
II. Central Bank0.20.050.1-0.20.1-78.5162.0
III. Deposit-taking Corporations, except the Central Bank186.8202.2202.115.4-0.18.2-0.1
IV. Other Sectors301.3330.8355.929.525.19.87.6
  IV.1. Other financial corporations48.569.678.021.18.443.512.1
  IV.2. Non-financial corporations252.7261.1277.98.416.83.36.4
  IV.3. Households and nonprofit institutions serving households (NPISHs)0.010.010.010.00.0-7.1-14.0
V. Direct Investment: Intercompany Lending31.935.037.23.12.29.66.2
Total Debt (I to V)668.9736.4762.867.526.310.13.6
Memo Items:       
A. Long-term Debt (original maturity)@541.3601.9613.560.611.611.21.9
B. Short-term Debt (original maturity)#127.6134.5149.26.914.75.411.0
R: Revised. PR: Partially Revised. P: Provisional.       
@: Debt with original maturity of above one year.
#: Debt with original maturity of up to one year.
Note: Figures may not add up to total due to rounding off.

Table 2: Residual Maturity of Outstanding External Debt as at end-March 2026
(US$ billion, unless indicated otherwise)
SectorShort-term up to one year1 to 2 years2 to 3 yearsMore than 3 yearsTotal (2 to 5)
123456
I. General Government10.411.913.5131.6167.5
  I.A. Short-term Debt0.20.2
  I.B. Long-term Debt10.211.913.5131.6167.2
II. Central Bank0.10.00.00.00.1
  II.A. Short-term Debt0.10.1
  II.B. Long-term Debt0.00.00.00.00.0
III. Deposit-taking Corporations, except the Central Bank127.733.99.131.4202.1
  III.A. Short-term Debt4.64.6
  III.B. Long-term Debt123.133.99.131.4197.5
IV. Other Sectors180.539.542.393.7355.9
  IV.A. Short-term Debt144.3144.3
  IV.B. Long-term Debt36.239.542.393.7211.6
      IV.1. Other financial corporations11.520.719.426.478.0
       IV.1.A. Short-term Debt0.30.3
       IV.1.B. Long-term Debt11.220.719.426.477.7
      IV.2. Non-financial corporations168.918.822.967.4277.9
       IV.2.A. Short-term Debt144.0144.0
       IV.2.B. Long-term Debt25.018.822.967.4133.9
      IV.3. Households and nonprofit institutions serving households (NPISHs)0.010.00.00.00.01
       IV.3.A. Short-term Debt0.00.0
       IV.3.B. Long-term Debt0.010.00.00.00.01
V. Direct Investment: Intercompany Lending8.15.65.318.237.2
A. Total Short-term Debt149.2149.2
B. Total Long-term Debt177.690.870.1275.0613.5
C. Total Debt (A+B)326.990.870.1275.0762.8
Memo Items:     
Short-term Debt (residual maturity) as per cent of Total External Debt42.9
Short-term Debt (residual maturity) as per cent of Foreign Exchange Reserves47.3
Note: Figures may not add up to total due to rounding off. 

Table 3: Government and Non-government External Debt
(US$ billion, unless indicated otherwise)
ComponentEnd-March
20232024 R2025 PR2026 P
12345
A. Government Debt (I+II)133.3148.7168.4167.5
    (As percentage of GDP)(4.2)(4.3)(4.5)(4.6)
    I. External Debt on Government Account under External Assistance91.195.4101.9105.2
    II. Other Government External Debt@42.353.266.562.3
B. Non-government Debt490.6520.2568.0595.3
    (As percentage of GDP)(15.4)(15.0)(15.3)(16.3)
  B.1. Central Bank0.10.20.050.1
  B.2. Deposit-taking Corporations, except the Central Bank163.4186.8202.2202.1
  B.3. Other Financial Corporations55.048.569.678.0
  B.4. Non-financial Corporations242.5252.7261.1277.9
  B.5. Households and nonprofit institutions serving households (NPISHs)0.010.010.010.01
  B.6. Direct Investment: Intercompany Lending29.631.935.037.2
C. Total Debt (A+B)623.9668.9736.4762.8
    (As percentage of GDP)(19.6)(19.2)(19.8)(20.8)
R: Revised. PR: Partially Revised. P: Provisional.
@: Other government external debt includes defence debt, investment in treasury bills/government securities by foreign portfolio investors, foreign central banks and international institutions, and SDR allocations by the IMF.
Note: Figures may not add up to total due to rounding off.

Table 4: Outstanding External Debt by Instruments
(US$ billion)
InstrumentEnd-March
20232024 R2025 PR2026 P
12345
1. Special Drawing Rights (allocations)22.321.922.022.4
2. Currency and Deposits141.1154.8167.6170.4
3. Debt Securities104.9115.2130.1123.0
4. Loans201.8221.4250.6264.9
5. Trade Credit and Advances124.3123.7131.2144.9
6. Other Debt Liabilities0.00.00.00.0
7. Direct Investment: Intercompany Lending29.631.935.037.2
Total Debt623.9668.9736.4762.8
R: Revised. PR: Partially Revised. P: Provisional.
Note: Figures may not add up to total due to rounding off.

Table 5: India’s Key External Debt Indicators
(Per cent, unless indicated otherwise)
End-MarchExternal Debt
(US$ billion)
Ratio of External Debt to GDPDebt Service RatioRatio of Foreign Exchange Reserves to Total DebtRatio of Concessional Debt to Total DebtRatio of Short-term Debt (original maturity) to Foreign Exchange ReservesRatio of Short-term Debt (original maturity) to Total Debt
12345678
199183.828.335.37.045.9146.510.2
199693.726.626.223.144.723.25.4
2001101.322.116.641.735.48.63.6
2006139.117.110.1#109.028.412.914.0
2007172.417.74.7115.623.014.116.3
2008224.418.34.8138.019.714.820.4
2009224.520.74.4112.218.717.219.3
2010260.918.55.8106.916.818.820.1
2011317.918.64.495.914.921.320.4
2012360.821.16.081.613.326.621.7
2013409.422.45.971.311.133.123.6
2014446.223.95.968.210.430.120.5
2015474.723.87.672.08.825.018.0
2016484.823.48.874.39.023.217.2
2017471.019.88.378.59.423.818.7
2018529.320.17.580.29.124.119.3
2019543.119.96.476.08.726.320.0
2020558.320.96.585.68.822.419.1
2021573.421.18.2100.69.017.517.6
2022618.819.95.298.18.320.019.7
2023623.919.65.392.78.222.220.6
2024 R668.919.26.796.67.419.719.1
2025 PR736.419.86.690.86.920.118.3
2026 P762.820.85.890.66.721.619.6
R: Revised. PR: Partially Revised. P: Provisional.
# works out to 6.3 per cent with the exclusion of India Millennium Deposits (IMDs) repayments of US$ 7.1 billion and pre-payment of external debt of US$ 23.5 million.

1 आईएमएफ की 2013 के बाह्य ऋण सांख्यिकी (ईडीएस) गाइड में निर्धारित अवधारणाएं, राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (एसएनए) 2008 और आईएमएफ के भुगतान संतुलन और अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति मैनुअल (बीपीएम 6) के छठे संस्करण, जो 2009 में प्रकाशित हुई थी, के अनुरूप हैं।

2 एसडीआर: विशेष आहरण अधिकार।

 

(स्रोत- www.rbi.org.in)


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Rajanish Kant