दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने SBI को सीनियर सिटीजन शकुंतला मेहतानी के खाते से अनधिकृत रूप से निकाले गए ₹42.92 लाख 7% ब्याज और ₹1 लाख मुआवजे के साथ वापस करने का आदेश बरकरार रखा। पूरी डिटेल और सबक जानें।
सीनियर सिटीजन के खाते से गायब हुए ₹42.92 लाख: दिल्ली कंज्यूमर कमीशन ने SBI को 7% ब्याज सहित पूरा पैसा लौटाने का आदेश दिया
दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को एक सीनियर सिटीजन महिला के खाते से अनधिकृत रूप से निकाले गए ₹42.92 लाख रुपये 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने और ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा गया है।
यह फैसला 8 अक्टूबर 2026 को आया, जिसमें कमीशन ने जिला कंज्यूमर फोरम के 11 अगस्त 2025 के आदेश को सही ठहराया।
क्या हुआ था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता शकुंतला मेहतानी (सीनियर सिटीजन) ने आरोप लगाया कि जुलाई 2021 में उनके सेविंग्स अकाउंट से लगभग ₹3.33 लाख और ओवरड्राफ्ट अकाउंट से ₹39.59 लाख (कुल ₹42.92 लाख) उनकी जानकारी और सहमति के बिना निकाल लिए गए।
उनका आरोप था कि उनके पूर्व अकाउंटेंट अजय कुमार मंचंदा ने बैंक कर्मचारियों की मदद से उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल को अपने नाम पर बदलवा लिया। इससे उन्हें ट्रांजेक्शन अलर्ट और OTP मिलने लगे, भले ही महिला का इंटरनेट बैंकिंग सिर्फ “View Only” मोड में था।
इस मामले में 27 दिसंबर 2021 को FIR भी दर्ज हुई थी।
बैंक का बचाव और कमीशन का जवाब
SBI ने तर्क दिया कि ट्रांजेक्शन इंटरनेट बैंकिंग से हुए थे और अलर्ट रजिस्टर्ड नंबर पर गए थे। बैंक का कहना था कि कोई आधिकारिक मिलीभगत नहीं मिली।
लेकिन दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन (जस्टिस संगीता धिंगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी) ने स्पष्ट कहा:
“सिर्फ इसलिए कि ट्रांजेक्शन इंटरनेट बैंकिंग से हुए या अलर्ट रजिस्टर्ड नंबर पर गए, यह साबित नहीं होता कि ग्राहक ने अनुमति दी थी।”
कमीशन ने नोट किया कि बैंक ने मोबाइल नंबर बदलने या इंटरनेट बैंकिंग को “View Only” से ट्रांजेक्शन योग्य बनाने के लिए महिला की लिखित सहमति का कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट में भी बैंक अधिकारी की मदद से नंबर बदलने का जिक्र था।
अंतिम आदेश क्या है?
बैंक को ₹42.92 लाख पूरे वापस करने होंगे।
इन पर संबंधित निकासी की तारीख से 7% सालाना ब्याज लगेगा।
₹1 लाख मुआवजा भी देना होगा।
अगर 3 महीने के अंदर पालन नहीं किया तो ब्याज दर 9% हो जाएगी।
कुल मिलाकर महिला को लगभग ₹44 लाख या उससे अधिक मिल सकते हैं (ब्याज की गणना पर निर्भर)।
इस मामले से क्या सबक मिलता है?
बैंक आपके खाते का संरक्षक है। मोबाइल नंबर या नेट बैंकिंग सुविधा बदलने के लिए लिखित सहमति जरूरी है।
अनधिकृत ट्रांजेक्शन का तुरंत बैंक और साइबर क्राइम में शिकायत करें।
नियमित रूप से अकाउंट स्टेटमेंट चेक करें, खासकर सीनियर सिटीजन।
अगर बैंक लापरवाही करे तो कंज्यूमर फोरम/कमीशन में जा सकते हैं। राष्ट्रीय कंज्यूमर हेल्पलाइन: 1915 या 1800-11-4000।
यह फैसला ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला है और बैंकों को ज्यादा सावधानी बरतने का संदेश देता है।
स्रोत: Financial Express और Indian Express की रिपोर्ट्स पर आधारित।









