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सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स मिथक: बैंक TDS काटने पर भी ITR फाइल करना जरूरी है? | Senior Citizen Tax Rules l beyourmoneymanager

कई सीनियर सिटीजन मानते हैं कि बैंक ने उनके ब्याज आय पर TDS काट लिया है तो अब उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की जरूरत नहीं है। यह एक आम मिथक है। असल में टैक्स चुकाने और ITR फाइल करने का दायित्व अलग-अलग है।

ITR फाइल करना कब जरूरी है?

व्यक्ति को आमतौर पर तब ITR फाइल करना पड़ता है जब उसकी कुल आय (कुछ कटौतियों से पहले) बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट से ज्यादा हो।

पुरानी टैक्स व्यवस्था** में:

  60 साल से कम उम्र: ₹2.5 लाख

  सीनियर सिटीजन (60-80 साल): ₹3 लाख

  सुपर सीनियर सिटीजन (80 साल से ऊपर): ₹5 लाख

नई टैक्स व्यवस्था** में सभी उम्र के लिए बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट ₹4 लाख है।

बैंक द्वारा ब्याज पर TDS काटना इस दायित्व को खत्म नहीं करता।

75 साल या उससे ऊपर के सीनियर सिटीजन के लिए खास छूट

इनकम टैक्स कानून में 75 साल या उससे अधिक उम्र के रेसिडेंट सीनियर सिटीजन के लिए विशेष प्रावधान है (पहले सेक्शन 194P, अब नए कानून में संबंधित प्रावधान)।

इस छूट का फायदा तभी मिलता है जब ये सारी शर्तें पूरी हों:

व्यक्ति भारत का रेसिडेंट हो और उम्र 75 साल या ज्यादा हो।

आय सिर्फ पेंशन और उसी बैंक के खाते से मिलने वाले ब्याज तक सीमित हो।

पेंशन और ब्याज दोनों एक ही स्पेसिफाइड बैंक से मिल रहे हों।

निर्धारित घोषणा (Form No. 125) बैंक को जमा की गई हो।


इन शर्तों के पूरा होने पर बैंक खुद टैक्स की गणना करता है, कटौतियां और रिबेट लगाता है, और जरूरी टैक्स काट लेता है। इसके बाद अलग से ITR फाइल करने की जरूरत नहीं पड़ती।

अगर ब्याज दूसरे बैंक से आता है तो?

अगर पेंशन एक बैंक से है और फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग्स अकाउंट का ब्याज दूसरे बैंक से है, तो यह छूट नहीं मिलेगी। इसी तरह अगर कोई अन्य आय (किराया, कैपिटल गेन, डिविडेंड आदि) है तो भी सामान्य नियमों के अनुसार ITR फाइल करना जरूरी होगा।

महत्वपूर्ण बातें याद रखें

उम्र अकेली ITR फाइलिंग से छूट नहीं देती।

सिर्फ TDS कट जाने से रिटर्न फाइल करने की जरूरत खत्म नहीं होती।

अगर कोई शर्त पूरी नहीं होती तो बेसिक एग्जेम्पशन लिमिट के आधार पर ही तय करें कि ITR जरूरी है या नहीं।

अतिरिक्त TDS कटने पर रिफंड पाने के लिए भी ITR फाइल करना पड़ता है।

निष्कर्ष:  

सीनियर सिटीजन को अपनी कुल आय, आय के स्रोत और लागू प्रावधानों को ध्यान से जांचना चाहिए। बैंक TDS काटने को ही पर्याप्त न समझें। सही जानकारी रखकर आप अनावश्यक नोटिस या जुर्माने से बच सकते हैं।

BeYourMoneyManager.com पर व्यक्तिगत वित्त और टैक्स से जुड़े सरल और व्यावहारिक लेख नियमित रूप से पढ़ें। कोई सवाल हो तो कमेंट में पूछें।


Rajanish Kant मंगलवार, 29 सितंबर 2026
Gold (सोना) और Silver (चांदी) की कीमतें अभी दबाव में, लेकिन लंबे समय का बेस ऊंचा बन रहा है – BMO कैपिटल मार्केट्स रिपोर्ट | भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब है? lbeyourmoneymanager

सोना और चांदी की कीमतें इस समय दबाव में हैं, लेकिन लंबी अवधि का नजरिया पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया है। कनाडा की प्रमुख निवेश बैंक BMO कैपिटल मार्केट्स ने अपने नवीनतम पूर्वानुमान में यह साफ संकेत दिया है।

Kitco News के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं। इससे महंगाई की नई आशंकाएं पैदा हो रही हैं और ब्याज दरों को लेकर आक्रामक उम्मीदें बढ़ रही हैं। नतीजतन सोना और चांदी दोनों ही अल्पकालिक दबाव महसूस कर रहे हैं।

BMO का अपडेटेड पूर्वानुमान क्या कहता है?

BMO कैपिटल मार्केट्स ने चौथी तिमाही (Q4 2026) के लिए सोने का औसत अनुमान घटाकर लगभग 4,650 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। पहले यह 4,750 डॉलर था। बैंक का मानना है कि सोना 5,000 डॉलर का स्तर अगले साल की दूसरी तिमाही तक ही दोबारा छू पाएगा।

लेकिन सबसे बड़ी बात लंबी अवधि के पूर्वानुमान में हुई है। BMO ने सोने का दीर्घकालिक औसत अनुमान 3,100 डॉलर से बढ़ाकर लगभग 4,000 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। यह 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

चांदी के मामले में भी बैंक ने दीर्घकालिक औसत अनुमान 36 डॉलर से बढ़ाकर लगभग 47 डॉलर प्रति औंस कर दिया है (लगभग 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी)।

क्यों ऊंचा हो रहा है लंबा बेस?

BMO के विश्लेषकों के अनुसार, पारंपरिक कारकों (जैसे रियल यील्ड) से ज्यादा अब दो नए विषय काम कर रहे हैं:

मौद्रिक अवमूल्यन (Monetary Debasement) – दुनिया भर में मुद्रा की क्रय शक्ति घटने का डर।

चीन की मजबूत मांग – पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) की खरीदारी काउंटर-साइक्लिकल है। यानी बाजार दबाव में होने पर भी चीन सोना खरीदता रहता है, जिससे कीमतों को नीचे गिरने से रोकने में मदद मिलती है।

चांदी के लिए सोलर पावर सेक्टर की औद्योगिक मांग लंबे समय तक सपोर्ट बनी रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

भारत में सोना और चांदी न सिर्फ निवेश बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। अल्पकाल में कीमतों में उतार-चढ़ाव सामान्य है, खासकर जब ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव हावी हों। लेकिन BMO जैसी संस्था का दीर्घकालिक अनुमान यह बताता है कि सोने-चांदी का आधार स्तर पहले से ऊंचा स्थापित हो रहा है।

BeYourMoneyManager की सलाह:  

अल्पकालिक गिरावट को घबराहट में बेचने का मौका न बनाएं।  

लंबी अवधि के पोर्टफोलियो में सोना और चांदी को डाइवर्सिफिकेशन के रूप में रखें।  

SIP या स्टैगर्ड तरीके से खरीदारी पर विचार करें।  

हमेशा अपनी जोखिम सहनशीलता और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार फैसला लें।

सोना और चांदी की कीमतें फिलहाल संघर्ष कर रही हैं, लेकिन बड़े बैंकों का नजरिया साफ है – लंबी दौड़ में आधार स्तर ऊंचा बन रहा है। सही रणनीति और धैर्य के साथ ये कीमती धातुएं आपके पोर्टफोलियो को मजबूती दे सकती हैं।

नोट: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बाजार जोखिम भरा है।

Rajanish Kant
ITR फाइलिंग डेडलाइन बढ़ाई गई: ऑडिट वाले करदाताओं के लिए 21 नवंबर 2026 तक समय बढ़ा – AY 2026-27

आयकर रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा बढ़ाई गई: ऑडिट वाले करदाताओं को राहत

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने आकलन वर्ष (Assessment Year) 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग की समयसीमा बढ़ा दी है। जिन करदाताओं के खातों का ऑडिट आवश्यक है, उनके लिए ITR जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है।

साथ ही, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। पहले यह 30 सितंबर 2026 थी, जिसे अब 21 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है।

किन करदाताओं पर लागू है यह विस्तार?

यह विस्तार आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(1) के तहत निर्दिष्ट श्रेणी (Serial Number 2) के करदाताओं पर लागू होता है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

कंपनियां

वे व्यक्ति/फर्म जिनके खातों का ऑडिट आयकर अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत आवश्यक है

ऐसी फर्मों के पार्टनर (और कुछ मामलों में उनके पति/पत्नी)

सामान्य करदाताओं (जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं) के लिए समयसीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्यों बढ़ाई गई समयसीमा?

चार्टर्ड अकाउंटेंट संगठनों और कर विशेषज्ञों ने ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने और वित्तीय आंकड़ों का मिलान करने में लगने वाले समय को देखते हुए विस्तार की मांग की थी। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 21 दिन का अतिरिक्त समय दिया है।

नई महत्वपूर्ण तिथियां (AY 2026-27)

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट:** 21 अक्टूबर 2026

ITR फाइलिंग (ऑडिट वाले मामले):** 21 नवंबर 2026

CBDT ने कहा है कि औपचारिक आदेश/नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा।

करदाताओं के लिए सुझाव

समयसीमा बढ़ने के बावजूद अंतिम क्षण तक इंतजार न करें। दस्तावेज पहले से तैयार रखें, चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क करें और e-filing पोर्टल पर समय रहते रिटर्न फाइल करें। देरी से फाइल करने पर जुर्माना और ब्याज लग सकता है।

पैसे के बेहतर प्रबंधन और कर संबंधी अपडेट के लिए www.beyourmoneymanager.com पर नियमित विजिट करें। सही योजना और समय पर अनुपालन से आप टैक्स बोझ को कम कर सकते हैं और अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बना सकते हैं।

(नोट: यह जानकारी समाचार स्रोतों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। नवीनतम अपडेट के लिए आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नोटिफिकेशन चेक करें।)

Rajanish Kant सोमवार, 28 सितंबर 2026
मुंबई पुलिस ने डिजिटल निवेश धोखाधड़ी में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया | 5-8% मासिक रिटर्न का झांसा | सावधान रहें

मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक बड़ी डिजिटल निवेश धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस स्कीम में लोगों को हर महीने 5 से 8 प्रतिशत तक का अवास्तविक रिटर्न और रेफरल बोनस का लालच देकर पैसा इकट्ठा किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि यह प्लेटफॉर्म या कंपनी न तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और न ही सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के पास पंजीकृत थी। इसके बावजूद यह संस्था नागरिकों से अवैध रूप से बड़ी मात्रा में निवेश स्वीकार कर रही थी।

क्या है पूरी बात?

मुंबई पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों को ऊंचे रिटर्न का झांसा दिया। रेफरल बोनस का प्रलोभन देकर और ज्यादा लोगों को फंसाने की कोशिश की गई। EOW मुंबई ने कार्रवाई करते हुए 4 आरोपियों को हिरासत में लिया है।

अगर आप भी प्रभावित हैं तो क्या करें?

यदि आपने भी किसी ऐसी अनधिकृत योजना में पैसा लगाया है और धोखा खाया है, तो तुरंत मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से संपर्क करें और अपने सभी सबूत जमा करें।  

आपातकालीन स्थिति में 100 या 112 पर कॉल करें।

निवेश करते समय ये बातें याद रखें

हमेशा केवल RBI या SEBI में पंजीकृत संस्थाओं और प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ही निवेश करें।  

अगर कोई योजना हर महीने 5-8% या उससे ज्यादा रिटर्न का वादा करे तो तुरंत सतर्क हो जाएं। इतना ऊंचा और गारंटीड रिटर्न आमतौर पर धोखाधड़ी का संकेत होता है।  

रेफरल बोनस या “जल्दी अमीर बनो” जैसी बातों से बचें।  

निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता, लाइसेंस और शिकायतों की जांच जरूर करें।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!  

फर्जी डिजिटल निवेश योजनाओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है – केवल अधिकृत और पंजीकृत संस्थाओं में ही अपना पैसा लगाना।

यह खबर मुंबई पुलिस के आधिकारिक ट्वीट पर आधारित है। निवेश से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए विश्वसनीय स्रोतों और वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।

(वेबसाइट: www.beyourmoneymanager.com – सही वित्तीय फैसलों के लिए आपका साथी)

Rajanish Kant
Cashless Health Insurance (कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस) क्लेम में अस्पताल और इंश्योरर के विवाद: पॉलिसीहोल्डर क्या करें? बिल, अप्रूवल और कटौती की पूरी गाइड l BeYourMoneyManager

कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में अस्पताल और इंश्योरर के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। इन्फ्लेटेड बिल, देर से अप्रूवल, मनमानी कटौती और ट्रीटमेंट की जरूरत पर सवाल – इन सबके बीच पॉलिसीहोल्डर सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। कई बार मरीज को अपनी जेब से पैसे निकालने पड़ते हैं, डिस्चार्ज में देरी होती है या क्लेम आंशिक रूप से ही मिलता है।

यह समस्या हाल के दिनों में और चर्चा में आई जब महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों में consumables (जैसे IV सेट, सिरिंज) पर भारी मार्कअप (कभी-कभी 2500% से ज्यादा) की बात उठाई। इंश्योरर्स इसे बिल बढ़ाने का सबूत मानते हैं, जबकि अस्पताल कहते हैं कि प्राइसिंग जटिल है और ट्रीटमेंट डॉक्टर तय करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उंगली उठाते हैं, लेकिन नुकसान पॉलिसीहोल्डर को ही होता है।

आम समस्याएं क्या हैं?

देर से कैशलेस अप्रूवल:** IRDAI के नियम के अनुसार प्री-ऑथराइजेशन 1 घंटे और डिस्चार्ज बिल पर फाइनल अप्रूवल 3 घंटे में होना चाहिए। फिर भी कई मामलों में घंटों या दिनों की देरी होती है।

मनमानी कटौती:** रूम रेंट लिमिट से ज्यादा चार्ज, consumables (ग्लव्स, मास्क, सिरिंज) का नॉन-पेएबल होना, या ट्रीटमेंट की जरूरत पर सवाल।

अस्पताल का अतिरिक्त डिमांड:** कैशलेस अप्रूव होने के बाद भी अस्पताल अतिरिक्त पैसे मांगता है या डिपॉजिट रखता है।

पूर्व-मौजूद बीमारी या मेडिकल जरूरत पर विवाद:** कई बार इंश्योरर अस्पताल में भर्ती को अनावश्यक बताकर क्लेम रिजेक्ट कर देता है।

पॉलिसीहोल्डर क्या करें? व्यावहारिक कदम

लिखित में सब कुछ लें  

   कैशलेस रिजेक्शन या कटौती होने पर अस्पताल और TPA/इंश्योरर से लिखित कारण (policy clause के साथ) मांगें। मौखिक बातचीत पर्याप्त नहीं है।

तुरंत संपर्क करें  

   TPA या इंश्योरर के हेल्पलाइन पर कॉल करें। अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज (डॉक्टर का नोट, रिपोर्ट्स) देने से रिजेक्शन पलट जाता है। कैशलेस रिजेक्शन अंतिम फैसला नहीं होता।

जरूरत पड़ने पर खुद भुगतान करें और बाद में reimbursement दाखिल करें  

   इलाज न रुकने दें। डिस्चार्ज समरी, आइटमवाइज बिल, लैब रिपोर्ट्स, प्रिस्क्रिप्शन और रिजेक्शन लेटर इकट्ठा रखें। पॉलिसी में दिए समयसीमा (आमतौर पर 30 दिन) के अंदर reimbursement क्लेम फाइल करें। कई कैशलेस रिजेक्टेड क्लेम reimbursement स्टेज पर पास हो जाते हैं।

कटौती को समझें और चुनौती दें  

   अपनी पॉलिसी की रूम रेंट लिमिट, consumables कवर और को-पेमेंट चेक करें।  

   आइटमवाइज बिल और अप्रूवल लेटर की तुलना करें। जो चार्ज अस्पताल-इंश्योरर के एग्रीड टैरिफ से ज्यादा है, वह अस्पताल की जिम्मेदारी है।  

   अनुचित कटौती पर इंश्योरर के Grievance Redressal Officer को लिखित शिकायत करें।

एस्केलेशन का रास्ता  

   इंश्योरर के GRO को शिकायत  

   IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल (bimabharosa.irdai.gov.in) पर रजिस्टर करें  

   इंश्योरेंस ओम्बड्समैन  

   जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता अदालत  

आगे क्या सुधार हो सकते हैं?

इंश्योरर्स पारदर्शी प्राइसिंग और तेज प्रोसेस की मांग करते हैं, जबकि अस्पताल बेहतर और समयबद्ध अप्रूवल चाहते हैं। उद्योग स्तर पर roundtable, medical advisory panel और National Health Claims Exchange जैसे प्रयास चल रहे हैं। लेकिन तब तक पॉलिसीहोल्डर को खुद सक्रिय रहना होगा।

सलाह:  

पॉलिसी खरीदते समय network hospitals, room rent limit, consumables cover और cashless everywhere सुविधा चेक करें।  

इमरजेंसी में भी पहले इंश्योरर/TPA से संपर्क करें।  

सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और समयसीमा का पालन करें।

कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस का असली फायदा तभी मिलता है जब आप अपने अधिकार जानते हों और सही कदम उठाते हों। अस्पताल और इंश्योरर के विवाद में फंसने के बजाय तैयार रहें – यही स्मार्ट मनी मैनेजमेंट है।

Website: www.beyourmoneymanager.com  

(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने इंश्योरर या वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।)

Rajanish Kant
SBI बैंक स्ट्राइक स्थगित: 28 से 30 सितंबर 2026 तक कोई हड़ताल नहीं, सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी lग्राहकों के लिए क्या मतलब है?l beyourmoneymanager

SBI ग्राहक सलाह: प्रस्तावित बैंक स्ट्राइक स्थगित, बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से जारी

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आधिकारिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारी दी है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा 28 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रस्तावित बैंक स्ट्राइक को स्थगित कर दिया गया है।

SBI की आधिकारिक ग्राहक सलाह के अनुसार:

प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल अब नहीं होगी।

सभी SBI शाखाएं और बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से कार्य करती रहेंगी।

ग्राहकों को किसी भी तरह की रुकावट की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

बैंक ने ग्राहकों के धैर्य और निरंतर विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया है।

ग्राहकों के लिए क्या मतलब है?

इस घोषणा के बाद:

नकद जमा-निकासी

फंड ट्रांसफर

लोन और एडवांस संबंधी कार्य

अन्य शाखा आधारित सेवाएं

सभी सामान्य तरीके से उपलब्ध रहेंगी। डिजिटल बैंकिंग सेवाएं (YONO, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, UPI आदि) भी पहले की तरह सुचारू रूप से चलती रहेंगी।

क्या करें?

आवश्यक बैंकिंग कार्य बिना किसी चिंता के अपनी निकटतम SBI शाखा या डिजिटल चैनलों के माध्यम से पूरा कर सकते हैं। किसी भी अपडेट के लिए SBI की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप चेक करते रहें।

SBI का यह कदम ग्राहकों की सुविधा और विश्वास को प्राथमिकता देता है। बैंकिंग सेवाओं में किसी भी तरह की बाधा न होने से रोजमर्रा के लेन-देन और जरूरी वित्तीय कार्यों में आसानी बनी रहेगी।

स्रोत: भारतीय स्टेट बैंक का आधिकारिक ग्राहक सलाह संदेश।

www.beyourmoneymanager.com पर पैसे और बैंकिंग से जुड़ी और अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।

Rajanish Kant
Health Insurance (हेल्थ इंश्योरेंस) खरीदते समय Claim (क्लेम) सेटलमेंट रेशियो और शिकायतों का रिकॉर्ड जरूर चेक करें | Best Health Insurance (बेस्ट हेल्थ इंश्योरेंस) चुनने के टिप्सl beyourmoneymanager

 
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदना आजकल हर परिवार के लिए जरूरी हो गया है। मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और एक अच्छी पॉलिसी आपको वित्तीय सुरक्षा देती है। लेकिन सिर्फ प्रीमियम कम होने या कवरेज ज्यादा दिखने से पॉलिसी न चुनें। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि कंपनी क्लेम कितनी आसानी से और कितनी तेजी से सेटल करती है।

क्लेम सेटलमेंट रेशियो क्यों जरूरी है?

क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR) बताता है कि कंपनी कुल दावों में से कितने प्रतिशत दावे सफलतापूर्वक चुकाती है। ऊंचा CSR का मतलब है कि कंपनी के पास क्लेम चुकाने का अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि तीन साल के औसत क्लेम सेटलमेंट रेशियो को जरूर देखें। नई कंपनियों में शुरुआती ऊंचा रेशियो कभी-कभी कम क्लेम वॉल्यूम की वजह से भी हो सकता है, इसलिए लंबे समय का डेटा ज्यादा भरोसेमंद होता है।

शिकायतों का आंकड़ा भी चेक करें

सिर्फ क्लेम सेटल होना काफी नहीं है। क्लेम प्रोसेस कितना स्मूथ है, यह भी जानना जरूरी है। इसके लिए प्रति 10,000 क्लेम्स पर शिकायतों की संख्या देखें। कम शिकायतें बेहतर कस्टमर सर्विस और क्लेम हैंडलिंग का संकेत देती हैं। अगर शिकायतें ज्यादा हैं तो क्लेम के समय परेशानी हो सकती है।

हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय और क्या देखें?

कंपनी का स्केल और ट्रैक रिकॉर्ड:** बड़ी और अनुभवी कंपनियां आमतौर पर ज्यादा विश्वसनीय होती हैं।

हॉस्पिटल नेटवर्क:** कैशलेस ट्रीटमेंट के लिए अच्छा नेटवर्क होना चाहिए, खासकर आपके शहर में।

प्रोडक्ट पोर्टफोलियो:** पॉलिसी में क्या-क्या कवर है, वेटिंग पीरियड, रिन्यूअल शर्तें और ऐड-ऑन विकल्प जांचें।

ग्रूप और रिटेल दोनों सेगमेंट का डेटा:** कुछ कंपनियां हेल्थ के साथ ट्रैवल या पर्सनल एक्सीडेंट भी शामिल करती हैं, इसलिए डेटा को समझकर देखें।

व्यावहारिक सलाह

पॉलिसी खरीदने से पहले IRDAI की वेबसाइट, कंपनी की पब्लिक डिस्क्लोजर और विश्वसनीय इंश्योरेंस एडवाइजरी प्लेटफॉर्म से क्लेम सेटलमेंट और शिकायत संबंधी आंकड़े चेक करें। सिर्फ मार्केटिंग क्लेम पर भरोसा न करें। अपनी जरूरत, फैमिली साइज और बजट के हिसाब से तुलना करें।

याद रखें, सही हेल्थ इंश्योरेंस वह है जो जरूरत पड़ने पर बिना झंझट के क्लेम चुकाए। क्लेम सेटलमेंट रेशियो और शिकायतों का ट्रैक रिकॉर्ड चेक करके आप बेहतर फैसला ले सकते हैं और भविष्य में वित्तीय तनाव से बच सकते हैं।

अधिक पर्सनल फाइनेंस टिप्स और सही निवेश-इंश्योरेंस गाइड के लिए www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से विजिट करें।


Rajanish Kant रविवार, 27 सितंबर 2026
2026 में पैसा बढ़ाने के 10 आसान और स्मार्ट तरीके: लार्ज कैप फोकस, ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन, NPS अपग्रेड और AI से वेल्थ प्रोटेक्ट करें | BeYourMoneyManager

2026 में पैसा बढ़ाने के 10 आसान और स्मार्ट तरीके। लार्ज कैप, ग्लोबल निवेश, GIFT City, NPS, EPF, गोल्ड-सिल्वर और AI अपनाने के टिप्स। www.beyourmoneymanager.com पर पढ़ें पूरा गाइड।

2026 के लिए 10 स्मार्ट मनी मूव्स: अपने धन को सुरक्षित रखें और अमीर बनें

पैसे का प्रबंधन अक्सर बोरिंग लगता है, लेकिन बोरिंग होना ही अच्छा है। बाजार हमेशा बदलते रहते हैं। छोटे-छोटे स्मार्ट बदलाव आपके मनी बॉक्स में बड़ा फर्क ला सकते हैं।  

ET Wealth की कवर स्टोरी के आधार पर, 2026 की शुरुआत में अपनाएं ये 10 सरल मनी मूव्स। ये आपको वेल्थ प्रोटेक्ट करने और बढ़ाने में मदद करेंगे।  

1. लार्ज कैप्स और चुनिंदा मिड-कैप्स पर फोकस करें  

लार्ज कैप्स अब मिड और स्मॉल कैप्स की तुलना में बेहतर वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। Nifty Midcap 150 और SmallCap 250 प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। FY27 में ब्रॉड-बेस्ड अर्निंग्स रिकवरी की उम्मीद है।  

आपका मूव: बैंक, NBFC और डिफेंस सेक्टर के लार्ज कैप्स व हाई-क्वालिटी मिड-कैप्स में निवेश बढ़ाएं।  

2. ग्लोबल एक्सपोजर बढ़ाएं, लेकिन धीरे-धीरे  

2025 में ग्लोबल फंड्स ने अच्छा रिटर्न दिया। 2026 में सिर्फ एक देश पर दांव लगाने से बेहतर है विविधता।  

आपका मूव: ग्लोबल इक्विटी फंड्स, ETFs, फीडर फंड्स या GIFT City विकल्पों के जरिए SIP या ट्रांचेस में निवेश करें। एक भूगोल पर ज्यादा एक्सपोजर से बचें।  

3. फिक्स्ड इनकम में बारबेल स्ट्रैटेजी अपनाएं  

RBI के रेट कट की गुंजाइश अब सीमित है। शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म बॉन्ड्स का मिश्रण बेहतर रहेगा।  

आपका मूव: शॉर्ट-टर्म बॉन्ड्स (नियमित आय के लिए) + लॉन्ग-ड्यूरेशन गवर्नमेंट बॉन्ड्स (अवसर के लिए) का बैलेंस बनाएं।  

4. GIFT City के जरिए ओवरसीज निवेश बढ़ाएं  

सामान्य म्यूचुअल फंड रूट सीमित है। GIFT City IFSC अब रिटेल निवेशकों के लिए आसान हो गया है (कम से कम राशि से शुरुआत संभव)।  

आपका मूव: GIFT City फंड्स में निवेश करें। टैक्स आसान है और फाइलिंग की झंझट कम। LRS लिमिट का ध्यान रखें।  

5. सोना और चांदी पर ज्यादा न लुढ़कें  

2025 में गोल्ड और सिल्वर टॉप पर रहे, लेकिन आगे वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।  

आपका मूव: एसेट एलोकेशन के अंदर ही रखें। बीमा की तरह इस्तेमाल करें, ग्रोथ इंजन की तरह नहीं।  

6. कॉरपोरेट NPS चुनें – बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस + टैक्स बेनिफिट  

NPS में बड़े बदलाव हुए हैं: 100% इक्विटी अनुमति, एन्युइटी कम, गोल्ड-सिल्वर में निवेश संभव।  

आपका मूव: कॉरपोरेट NPS जॉइन करें। एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन टैक्स-फ्री है। लंबी अवधि के लिए रहें।  

7. EPF कंट्रीब्यूशन सीमित करने पर विचार करें  

EPFO में दावों की समस्याएं रही हैं। नए लेबर कोड्स भी असर डाल सकते हैं।  

आपका मूव: एम्प्लॉयर से बात करके स्टैट्यूटरी मिनिमम तक कैप करें। बची रकम खुद बेहतर जगह निवेश करें।  

8. सिर्फ असली डिडक्शन क्लेम करें और प्रूफ रखें  

इनकम टैक्स विभाग डेटा-ड्रिवन स्क्रूटनी बढ़ा रहा है। गलत क्लेम पर नोटिस आ रहे हैं।  

आपका मूव: रेंट रिसीट्स, एग्रीमेंट्स और 80G जैसी सभी प्रूफ सुरक्षित रखें। सिर्फ वैध क्लेम करें।  

9. घरेलू यात्रा के लिए भी इंश्योरेंस लें  

अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल इंश्योरेंस आम है, लेकिन घरेलू में लोग भूल जाते हैं। फ्लाइट डिले या कैंसिलेशन में नुकसान हो सकता है।  

आपका मूव: घरेलू ट्रैवल इंश्योरेंस जरूर लें। प्रीमियम कम और कवर अच्छा मिलता है।  

10. करियर ग्रोथ के लिए AI अपनाएं  

AI अब विकल्प नहीं, जरूरत बन चुका है। जो इस्तेमाल करेंगे, वे आगे बढ़ेंगे।  

आपका मूव: ChatGPT, Claude, Gemini या Copilot जैसे 1-2 टूल्स रोज के काम में शामिल करें। क्वालिटी चेक जरूर करें।  

निष्कर्ष  

2026 में ट्रेड डील, रुपये की चाल और नए नियमों के बीच स्मार्ट फैसले जरूरी हैं। ये 10 मूव्स छोटे हैं, लेकिन असर बड़ा हो सकता है।  

अपने लक्ष्यों के हिसाब से प्लान बनाएं, जोखिम समझें और नियमित रिव्यू करें। पैसे का प्रबंधन बोरिंग जरूर है, लेकिन यही लंबे समय में आपको अमीर बनाता है।  

अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: www.beyourmoneymanager.com  

(यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।)  

यह आर्टिकल पूरी तरह मूल है, ET Wealth की कवर स्टोरी के मुख्य पॉइंट्स पर आधारित है। 


Rajanish Kant शनिवार, 26 सितंबर 2026
भारत में घरेलू नेट फाइनेंशियल सेविंग्स FY2024 में 5.3% GDP पर पहुंची, 47 साल का निचला स्तर: क्या करें पर्सनल फाइनेंस प्लान? आपके लिए क्या मतलब है? (पर्सनल फाइनेंस टिप्स) beyourmoneymanager

 
भारत के घरेलू नेट फाइनेंशियल सेविंग्स FY2024 में GDP के 5.3 प्रतिशत पर आ गए हैं। यह आंकड़ा पिछले 47 वर्षों (FY1977 के बाद) का सबसे निचला स्तर है। यह डेटा हाल ही में चर्चा में आया है और आम परिवारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है।

नेट फाइनेंशियल सेविंग्स का मतलब है घरेलू वित्तीय संपत्तियों (जैसे बैंक डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस, शेयर आदि) में वृद्धि घटाकर वित्तीय देनदारियां (लोन, क्रेडिट कार्ड, होम लोन आदि)। जब लोग घर, गाड़ी या अन्य भौतिक संपत्ति खरीदने के लिए लोन लेते हैं तो नेट फाइनेंशियल सेविंग्स का आंकड़ा कम दिखता है, भले ही कुल संपत्ति बढ़ रही हो।

क्यों गिरे ये सेविंग्स?

पोस्ट-पांडेमिक अवधि में कई परिवारों ने रियल एस्टेट और अन्य फिजिकल एसेट्स में निवेश बढ़ाया। होम लोन और अन्य उधारी में वृद्धि हुई। साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ग्रॉस फाइनेंशियल सेविंग्स में सुधार हुआ लेकिन देनदारियों की बढ़ोतरी ने नेट आंकड़े को दबा दिया। म्यूचुअल फंड AUM, डीमैट अकाउंट और SIP में मजबूत वृद्धि भी हुई है, जो दिखाता है कि लोग स्मार्ट निवेश की तरफ बढ़ रहे हैं।

यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है क्योंकि घरेलू बचत अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए महत्वपूर्ण स्रोत होती है। लेकिन पूरा चित्र देखें तो कई परिवार एसेट क्रिएशन (घर आदि) और पूंजी बाजार में भागीदारी बढ़ा रहे हैं।

आपके लिए क्या मतलब है? (पर्सनल फाइनेंस टिप्स)

www.beyourmoneymanager.com पर हम हमेशा कहते हैं कि अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को समझकर अपनी पर्सनल फाइनेंस स्ट्रेटजी मजबूत करें। यहां कुछ व्यावहारिक सुझाव:

नेट वर्थ पर फोकस करें  

सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि कुल संपत्ति (फिजिकल + फाइनेंशियल) घटाकर देनदारियां देखें। होम लोन लेना बुरा नहीं अगर वह प्रोडक्टिव एसेट बना रहा हो और EMI अफोर्डेबल हो।

इमरजेंसी फंड और लिक्विड सेविंग्स बनाएं  

 कम से कम 6-12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखें। हाई-इंटरेस्ट डेट (पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड) को प्राथमिकता से चुकाएं।

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट जारी रखें  

 SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में नियमित निवेश करें। लंबी अवधि में यह मुद्रास्फीति से बेहतर रिटर्न दे सकता है। डायवर्सिफिकेशन जरूरी है – इक्विटी, डेट और कुछ गोल्ड।

डेट मैनेजमेंट  

 होम लोन या एजुकेशन लोन जैसे प्रोडक्टिव डेट और कंजम्पशन लोन में फर्क समझें। EMI-टू-इनकम रेशियो 40-50% से ज्यादा न होने दें।

बजट और ट्रैकिंग  

 मासिक बजट बनाएं। खर्चों को ट्रैक करें। अनावश्यक लोन और क्रेडिट कार्ड खर्च से बचें। आय बढ़ाने के तरीके भी सोचें (स्किल अपग्रेड, साइड इनकम)।

लंबी अवधि का नजरिया  

   रियल एस्टेट खरीदने से पहले लोकेशन, रेंटल यील्ड और अपनी कैश फ्लो चेक करें। फाइनेंशियल एसेट्स (MF, स्टॉक्स, PPF, NPS) को भी बैलेंस में रखें।

निष्कर्ष

यह आंकड़ा चेतावनी है कि परिवारों को अपनी बैलेंस शीट पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन यह अवसर भी है – अनुशासित बचत, स्मार्ट निवेश और नियंत्रित कर्ज से आप अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकते हैं। अर्थव्यवस्था के बड़े ट्रेंड्स को समझकर व्यक्तिगत स्तर पर सही कदम उठाएं।

अपनी पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग के लिए नियमित रूप से बजट रिव्यू करें, लक्ष्य तय करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। बचत और निवेश की आदत ही असली संपत्ति बनाती है।

(नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश निर्णय लेने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति का आकलन करें। डेटा स्रोत: उपलब्ध रिपोर्ट्स और चर्चा में आए आंकड़े।)

Rajanish Kant शुक्रवार, 25 सितंबर 2026
SBI बैंक रविवार 27 सितंबर 2026 को खुले रहेंगे | 28-30 सितंबर बैंक हड़ताल से पहले जरूरी जानकारीl ग्राहकों के लिए सुझाव l BeYourMoneyManager

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। 27 सितंबर 2026 (रविवार) को देशभर की सभी SBI शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।  

यह फैसला यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा बुलाई गई 28 से 30 सितंबर 2026 तक की तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल को देखते हुए लिया गया है।  

क्यों खुलेंगे बैंक रविवार को?  

26 सितंबर चौथा शनिवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी है और 27 सितंबर रविवार है। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है। इससे ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक शाखा सेवाओं की कमी झेलनी पड़ सकती थी।  

इससे बचाव के लिए वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) को 27 सितंबर को सामान्य रूप से काम करने की अनुमति दी है। SBI ने भी अपने ग्राहकों को आधिकारिक रूप से सूचित किया है कि वे किसी भी शाखा में जाकर बैंकिंग सेवाएं ले सकते हैं।  

ग्राहकों के लिए सुझाव  

अगर आपको चेक जमा करना है, निकासी, लोन संबंधित काम, या कोई अन्य शाखा आधारित सेवा लेनी है, तो 27 सितंबर का लाभ उठाएं।  

हड़ताल के दौरान (28-30 सितंबर) ऑनलाइन बैंकिंग, YONO ऐप, UPI, ATM और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है।  

जरूरी लेन-देन पहले ही पूरा कर लें, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो।  

SBI ने स्पष्ट कहा है कि वह अपने सभी ग्राहकों को निर्बाध और सुविधाजनक बैंकिंग सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है।  

BeYourMoneyManager पर हम हमेशा सलाह देते हैं कि बैंक हड़ताल या छुट्टियों से पहले अपने जरूरी काम पूरे कर लें। पैसे का सही प्रबंधन तभी संभव है जब आप समय पर सही जानकारी रखें।  

अधिक जानकारी के लिए SBI की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप चेक करते रहें। सुरक्षित और स्मार्ट बैंकिंग करें!

Rajanish Kant