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ITR Filing Deadline 31 July 2026 Miss Ho Gaya? Belated, Revised और Updated Return File करने के पूरे विकल्प

31 जुलाई 2026 ITR फाइलिंग डेडलाइन मिस कर दी? चिंता न करें। Belated ITR, Revised Return और Updated Return (ITR-U) की पूरी डिटेल, समय सीमा, लेट फीस और नुकसान जानें। FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए जरूरी जानकारी।

नई दिल्ली। अगर आपने 31 जुलाई 2026 तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत आपको अभी भी कई विकल्प उपलब्ध हैं। FY 2025-26 (Assessment Year 2026-27) के लिए belated return, revised return और updated return दाखिल करके आप जुर्माने के साथ अपना रिटर्न पूरा कर सकते हैं।

हालांकि देरी से फाइलिंग करने पर लेट फीस, ब्याज और कुछ टैक्स लाभ खोने का खतरा रहता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके फाइल कर लें।

1. Belated Return (Section 139(4)) कब तक फाइल कर सकते हैं?

समय सीमा: संबंधित वित्तीय वर्ष (FY 2025-26) के अंत से **9 महीने के अंदर या असेसमेंट पूरा होने से पहले, जो भी पहले हो।

FY 2025-26 की समाप्ति 31 मार्च 2026 को हुई, इसलिए belated return 31 दिसंबर 2026 तक फाइल किया जा सकता है (लगभग)।

Late Fee**: ₹1,000 या ₹5,000 (आय के अनुसार)।

जरूरी बात**: Belated return फाइल करने पर कुछ deductions और loss carry forward का लाभ नहीं मिल सकता।

2. Revised Return (Section 139(5)) कब फाइल करें?

अगर आपने (belated या original) रिटर्न पहले ही फाइल कर दिया है और उसमें कोई गलती पाई है तो revised return दाखिल कर सकते हैं।

समय सीमा: FY 2025-26 के अंत से **12 महीने के अंदर यानी 31 मार्च 2027 तक।

Revised return में मूल रिटर्न की गलतियों को सुधार सकते हैं।

3. Updated Return (ITR-U) क्या है?

मूल, belated या revised रिटर्न फाइल करने के बाद भी अगर अतिरिक्त इनकम टैक्स देना हो तो Updated Return फाइल किया जा सकता है।

समय सीमा: FY 2025-26 के बाद वाले वित्तीय वर्ष के अंत से **24 महीने (कुल 48 महीने तक)।

Updated return पर अतिरिक्त टैक्स + ब्याज + penalty लगता है, लेकिन यह आखिरी विकल्प होता है।

टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह  

टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, डेडलाइन मिस होने के बाद भी जल्द से जल्द belated return फाइल करना सबसे अच्छा है। देरी से refund में देरी होती है, loss carry forward का लाभ नहीं मिलता और पोर्टल पर भी लोड बढ़ जाता है।

ITR Filing Deadline Miss करने के नुकसान

Late filing fee (₹1,000 से ₹5,000)

ब्याज (Interest u/s 234A)

कुछ deductions (80C, 80D आदि) का लाभ नहीं

Loss carry forward का अधिकार खोना

Refund में देरी

भविष्य में loan/visa में समस्या

सलाह: अब क्या करें?

Income Tax e-filing पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें।

सही ITR फॉर्म चुनें (ITR-1, ITR-2, ITR-3 आदि)।

AIS, Form 16, बैंक स्टेटमेंट और फॉर्म 26AS चेक करें।

Belated return फाइल करें और लेट फीस भरें।

E-verify जरूर करें (Aadhaar OTP, net banking या DSC से)।

निष्कर्ष  

31 जुलाई 2026 की ITR डेडलाइन मिस हो गई हो तो भी आपके पास पर्याप्त समय है। Belated Return देकर आप जुर्माने के साथ अपना काम पूरा कर सकते हैं। लेकिन याद रखें – जितनी जल्दी फाइल करेंगे, उतना कम नुकसान होगा।

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है। व्यक्तिगत मामलों के लिए Chartered Accountant या Tax Consultant से सलाह लें।



Rajanish Kant शुक्रवार, 31 जुलाई 2026
सोने की मांग मजबूत, Q2 बिकवाली के बावजूद सेंट्रल बैंक और एशियाई खरीदारी ने दी सहारा | WGC रिपोर्ट 2026 Q2

 

2026 की दूसरी तिमाही में सोने की कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद कुल मांग स्थिर रही। विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार सेंट्रल बैंक खरीदारी वापस लौटी और एशिया में मजबूत मांग बनी रही। निवेशकों के लिए सोना अभी भी आकर्षक विकल्प।

सोने की मांग साबित हुई resilient: Q2 में बिकवाली के बावजूद सेंट्रल बैंक और एशियाई खरीदारों ने संभाला बाजार – WGC रिपोर्ट

नई दिल्ली। सोने के बाजार ने दूसरी तिमाही (Q2 2026) में दस साल की सबसे बड़ी गिरावट का सामना किया, लेकिन मांग पूरी तरह टूटने से बच गई। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council - WGC) की ताजा Gold Demand Trends रिपोर्ट में साफ हुआ है कि मजबूत सेंट्रल बैंक खरीदारी, एशिया में निरंतर मांग और स्थिर निवेश मांग ने बाजार को सहारा दिया।

Q2 2026 में सोने की कुल मांग  

WGC के अनुसार, ओवर-द-काउंटर (OTC) ट्रांजेक्शंस सहित कुल सोने की मांग साल-दर-साल स्थिर रही और 1,269 टन पर रही। जबकि पूरे पहले छह महीने (H1 2026) की मांग 2,522 टन रही, जो पिछले साल से 2% ज्यादा है। सबसे महत्वपूर्ण बात – इस मांग का मूल्य रेकॉर्ड $380 बिलियन पहुंच गया, जो सोने की कीमतों में मजबूती और निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

WGC रिपोर्ट (Gold Demand Trends Q2 2026) के मुख्य निष्कर्ष

विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की Q2 2026 Gold Demand Trends रिपोर्ट 30 जुलाई 2026 को जारी हुई। यहां इसके प्रमुख हाइलाइट्स और निष्कर्ष दिए गए हैं:

1. कुल मांग स्थिर रही

Q2 2026 में कुल सोने की मांग 1,269 टन रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के बराबर (flat year-on-year) है।

पहले छह महीने (H1 2026) की मांग 2,522 टन रही, जो 2% ज्यादा है।

H1 मांग का कुल मूल्य रिकॉर्ड $380 बिलियन (लगभग ₹32.5 लाख करोड़) पहुंच गया।

2. सेंट्रल बैंक खरीदारी मजबूत

सेंट्रल बैंक फिर से सक्रिय हुए और उनकी खरीदारी में तेज रिकवरी देखी गई।

वे 2026 में भी मजबूत खरीदार बने रहने की उम्मीद है, हालांकि पूरे साल की खरीदारी 2025 से थोड़ी कम रह सकती है।

3. निवेश मांग में बदलाव

गोल्ड ETF में 45 टन का आउटफ्लो हुआ, जिससे कुल निवेश मांग घटी।

बार और कॉइन निवेश अपेक्षाकृत स्थिर रहा।

OTC (ओवर-द-काउंटर) और एशियाई निवेश मांग आगे बढ़ने की उम्मीद है।

4. ज्वेलरी डिमांड पर दबाव

वैश्विक ज्वेलरी मांग 278 टन रही, जो कई सालों में दूसरी तिमाही की सबसे कम है (-17% YoY)।

भारत में ज्वेलरी मांग 75 टन रही (-15% YoY), लेकिन भारत ने Q2 में वैश्विक ज्वेलरी डिमांड का सबसे बड़ा हिस्सा रखा।

ऊंची कीमतों ने खपत को प्रभावित किया।

5. भारत-specific निष्कर्ष

भारत में कुल सोने की मांग 131 टन रही (-6% YoY)।

लेकिन खर्च (spending) रिकॉर्ड स्तर पर रहा — INR 1,979 अरब (लगभग $21 बिलियन), जो 50% ज्यादा है।

6. Outlook (आगे की उम्मीद)

बाकी 2026 में निवेश मांग मुख्य ड्राइवर बनेगी, खासकर OTC और एशियाई खरीदारी से।

सेंट्रल बैंक खरीदारी जारी रहेगी।

त्योहारों (दिवाली, दशहरा) और शादी के सीजन में भारत में मांग बढ़ने की संभावना।

समग्र संदेश:  

सोने का बाजार Q2 की तेज गिरावट के बावजूद resilient रहा। ऊंची कीमतों के बावजूद मांग का मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जो सोने की मजबूत फंडामेंटल्स को दर्शाता है।

अगर आपको इस रिपोर्ट का पूरा सारांश, भारत-फोकस्ड डिटेल्स, या अपनी वेबसाइट के लिए पूरा आर्टिकल चाहिए तो बताएं!

किन फैक्टर्स ने संभाला बाजार?

सेंट्रल बैंक खरीदारी में तेज वापसी**: दूसरी तिमाही में सरकारी खरीदारी ने जोर पकड़ा। कई देश अभी भी अपने रिजर्व को सोने से मजबूत करने की रणनीति पर अडिग हैं।

एशियाई मांग बनी रही मजबूत**: भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों, शादी के मौसम और निवेश की मांग ने बाजार को सपोर्ट किया। हालांकि ज्वेलरी खपत में कुछ नरमी देखी गई।

निवेश मांग स्थिर**: ETF outflows के बावजूद OTC और अन्य निवेश चैनलों से मांग ने बैलेंस बनाए रखा।

क्या कहती है Kitco News?  

Kitco News ने रिपोर्ट करते हुए कहा कि सोने का बाजार भले ही Q2 में “battered and bruised” दिखाई दिया, लेकिन यह “broken” नहीं है। कीमतों में गिरावट के बावजूद लॉन्ग-टर्म डिमांड फैक्टर्स मजबूत बने हुए हैं।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?  

Diversification**: पोर्टफोलियो में सोना अभी भी हेजिंग टूल के रूप में काम करता है, खासकर अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के माहौल में।

लंबी अवधि का नजरिया**: Q2 की गिरावट अल्पकालिक हो सकती है। सेंट्रल बैंक खरीदारी और भू-राजनीतिक जोखिम सोने को सपोर्ट करते रहेंगे।

भारतीय निवेशक**: भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता है। SIP जैसे तरीके से गोल्ड ETF, Sovereign Gold Bonds (SGB) या डिजिटल गोल्ड में निवेश करके आप कम लागत पर लाभ उठा सकते हैं।

निष्कर्ष  

विश्व स्वर्ण परिषद की रिपोर्ट एक बार फिर साबित करती है कि सोना सिर्फ चमकदार धातु नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का सबसे भरोसेमंद सहारा है। चाहे कीमतें ऊपर जाएं या नीचे, लंबी अवधि में सोने की मांग मजबूत रहने की संभावना है।

नोट: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


Rajanish Kant
सोने का अगला $1000 का उछाल ऊपर की ओर: Fed की सख्ती चरम पर, State Street का bullish पूर्वानुमान | Gold Price 2026 Analysis

State Street के Aakash Doshi के अनुसार सोने का अगला $1000 का मूव ऊपर रहेगा। Fed की हॉकिश नीति पीक पर पहुंच गई है। 2026 में सोना $4750 से $5500 प्रति औंस तक जा सकता है। विस्तृत विश्लेषण और निवेश सलाह पढ़ें।

सोने का अगला $1000 का उछाल ऊपर की ओर: Fed की सख्ती चरम पर पहुंच गई, State Street का बड़ा दावा

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें वर्तमान में $4000 प्रति औंस के आसपास समेकन (consolidation) कर रही हैं, लेकिन State Street Asset Management के हेड ऑफ गोल्ड स्ट्रैटजी Aakash Doshi का कहना है कि सोने का अगला बड़ा $1000 का मूव ऊपर की ओर ही होगा। Fed की मौद्रिक नीति में सख्ती (hawkishness) अब पीक पर पहुंच चुकी है, जिससे आगे राहत मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

सोना हाल ही में $4100 प्रति औंस के ऊपर टिक नहीं पा रहा है। लंबी अवधि के रियल यील्ड्स ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं (10-वर्षीय रियल यील्ड लगभग 2.4%)। इसके बावजूद, $4000 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।

Aakash Doshi ने Kitco News को दिए इंटरव्यू में कहा, "बाजार ने Fed का काफी काम पहले ही कर लिया है। Fed पूरे साल होल्ड पर रह सकता है क्योंकि रियल रेट्स पहले से काफी ऊंचे हो चुके हैं।"

State Street का Bullish Outlook

बेस केस पूर्वानुमान (6-9 महीने):** $4750 से $5500 प्रति औंस।

संभावित लक्ष्य:** 2027 की शुरुआत तक $5000 प्रति औंस तक पहुंचना संभव।

2026 के अंत तक:** यदि 2-वर्षीय यील्ड्स 4% से नीचे आते हैं, तो साल के अंत तक $4500-$4750 संभव।

Doshi का मानना है कि नवंबर-दिसंबर में सोना समेकन कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि में ट्रेंड बुलिश बना रहेगा।

क्या सपोर्ट कर रहा है सोने को?

सेंट्रल बैंक डिमांड: मजबूत और लचीली बनी हुई है।

चीन की डिमांड: जून में आयात दो साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।

भू-राजनीतिक तनाव: ईरान से संबंधित युद्ध और बढ़ते वैश्विक कर्ज ($353 ट्रिलियन) सोने को मौद्रिक हेज के रूप में मजबूत बना रहे हैं।

ETF डिमांड: वर्तमान स्तर पर भी बनी रहने से कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Doshi ने कहा कि भले ही Fed हॉकिश रुख बनाए रखे, लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल फैक्टर्स (वैश्विक कर्ज, फिस्कल खर्च और मुद्रा अवमूल्यन) सोने की मांग को बढ़ावा देंगे।

निवेशकों के लिए सलाह (www.beyourmoneymanager.com)

शॉर्ट टर्म:** $4000 के सपोर्ट पर खरीदारी के अवसर देखें। जुलाई के नॉन-फार्म पेरोल डेटा महत्वपूर्ण होगा। यदि रोजगार डेटा कमजोर आया तो रेट कट की उम्मीद बढ़ेगी और सोना उछल सकता है।

लॉन्ग टर्म:** सोना पोर्टफोलियो में 5-15% हिस्सा रखना विविधीकरण के लिए फायदेमंद रह सकता है, खासकर बढ़ते कर्ज और अनिश्चितता के माहौल में।

रिस्क:** उच्च रियल यील्ड्स और मजबूत डॉलर अल्पकालिक दबाव बना सकते हैं।

निष्कर्ष:  

State Street के विश्लेषण के अनुसार, Fed की सख्ती अब चरम पर है। इससे आगे सोने में नया उछाल आने की संभावना मजबूत है। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए।





Rajanish Kant बुधवार, 29 जुलाई 2026
PizzaExpress India ने लॉन्च किया नया Summer Special Menu, आम से बने डेजर्ट, नई पिज्जा और सी-फूड डिशेज़ का मिलेगा स्वाद

PizzaExpress India ने 'Freshly Crafted for the Season' नाम से नया लिमिटेड एडिशन समर मेन्यू लॉन्च किया है। इसमें मैंगो डेजर्ट, नई पिज्जा, सी-फूड स्पेशल और समर ड्रिंक्स शामिल हैं।

PizzaExpress India ने लॉन्च किया नया Summer Special Menu, आम से बने डेजर्ट, नई पिज्जा और सी-फूड डिशेज़ होंगे आकर्षण

देश की लोकप्रिय पिज्जा चेन PizzaExpress India ने गर्मियों के मौसम को खास बनाने के लिए अपना नया 'Freshly Crafted for the Season' लिमिटेड एडिशन मेन्यू लॉन्च किया है। इस विशेष मेन्यू में मौसमी फलों, खासकर आम (मैंगो), से तैयार डेजर्ट और पेय पदार्थों के साथ-साथ नई पिज्जा, ताज़े सी-फूड व्यंजन और कई आकर्षक समर स्पेशल डिशेज़ शामिल की गई हैं। यह मेन्यू देशभर के सभी PizzaExpress रेस्टोरेंट्स में सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा.

आम के स्वाद को दिया गया विशेष स्थान



PizzaExpress ने इस बार अपने समर मेन्यू का सबसे बड़ा आकर्षण भारत के पसंदीदा फल आम को बनाया है। ग्राहकों के लिए कई नई मैंगो-आधारित डिशेज़ तैयार की गई हैं, जिनमें शामिल हैं—

Tropical Gold Rush

Mango Frappe

Mango Gelato

Mango Cheesecake

कंपनी का कहना है कि इन डिशेज़ को इस तरह तैयार किया गया है कि हर उम्र के ग्राहक गर्मियों के मौसम का ताज़गीभरा स्वाद महसूस कर सकें।

नई पिज्जा और मुख्य व्यंजन भी होंगे उपलब्ध

सिर्फ डेजर्ट ही नहीं, PizzaExpress ने अपने मुख्य मेन्यू में भी कई नए विकल्प जोड़े हैं।

नई पिज्जा में शामिल हैं—

Creamy Alfredo Veggie Pizza

BBQ Chicken Pizza

Doppio Veggie Pizza

इसके अलावा मुख्य व्यंजनों में Baked Pesto Fish, Herb Grilled Fish, Harissa Chicken, Soho Rice Bowl और Baked Seasonal Vegetables जैसे विकल्प भी ग्राहकों को मिलेंगे।

गर्मियों के लिए विशेष ड्रिंक्स

परिवार और दोस्तों के साथ भोजन का आनंद लेने वालों के लिए PizzaExpress ने कई नए समर ड्रिंक्स भी पेश किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

Ginger Fresca

Sparkling Lemon Iced Tea

Sparkling Peach Iced Tea

ये ड्रिंक्स विशेष रूप से गर्म मौसम में ताज़गी देने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

कंपनी ने क्या कहा?

Gourmet Investments Hospitality Group (GIHG) के CEO रोहन पिवेकर के अनुसार, PizzaExpress का उद्देश्य ग्राहकों को हर बार कुछ नया अनुभव कराना है। उनका कहना है कि नया 'Freshly Crafted for the Season' मेन्यू मौसमी सामग्री और नए फ्लेवर पर आधारित है, ताकि ग्राहक अपने पसंदीदा व्यंजनों के साथ कुछ नया भी आज़मा सकें।

भारत में तेजी से बढ़ रही मौजूदगी

PizzaExpress आज दुनिया के कई देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। भारत में कंपनी के 39 रेस्टोरेंट्स संचालित हो रहे हैं, जो मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद सहित कई प्रमुख शहरों में स्थित हैं।

निष्कर्ष

अगर आप इस गर्मी में परिवार या दोस्तों के साथ बाहर खाने का प्लान बना रहे हैं, तो PizzaExpress का नया Summer Special Menu आपके लिए एक नया स्वाद अनुभव हो सकता है। मैंगो-आधारित डेजर्ट, नई पिज्जा और ताज़गीभरे पेय इस मेन्यू को अन्य विकल्पों से अलग बनाते हैं। 

Rajanish Kant
P.F. Chang's India का नया Chang's Cravings Menu लॉन्च, Sweet, Spicy और Umami फ्लेवर का मिलेगा नया अनुभव


 P.F. Chang's ने भारत में Chang's Cravings नाम से नया फ्लेवर-आधारित मेन्यू लॉन्च किया है। इसमें Sweet, Spicy, Savory, Umami और Sweet & Savory प्रोफाइल के अनुसार ग्राहक आसानी से अपनी पसंदीदा डिश चुन सकते हैं।

भारत में प्रीमियम पैन-एशियन रेस्टोरेंट चेन P.F. Chang's ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया और अनोखा फूड एक्सपीरियंस पेश किया है। कंपनी ने Chang's Cravings नाम से नया सीज़नल मेन्यू लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को उनकी पसंद के स्वाद के अनुसार भोजन चुनने में आसानी देना है। यह विशेष मेन्यू भारत के सभी P.F. Chang's आउटलेट्स पर सितंबर तक उपलब्ध रहेगा।


क्या है Chang's Cravings?
आमतौर पर रेस्टोरेंट मेन्यू में डिशेज़ को स्टार्टर, मेन कोर्स या डेज़र्ट जैसी श्रेणियों में रखा जाता है। लेकिन Chang's Cravings इस पारंपरिक सोच से अलग है।
इस नए मेन्यू में डिशेज़ को पाँच अलग-अलग स्वाद (Flavor Profiles) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है—
Sweet (मीठा)
Spicy (तीखा)
Savory (लज़ीज़)
Umami (गहरा एवं समृद्ध स्वाद)
Sweet & Savory (मीठा और लज़ीज़ का मिश्रण)
इससे ग्राहक यह सोचने के बजाय कि क्या ऑर्डर करें, सीधे उस स्वाद के अनुसार डिश चुन सकते हैं जिसकी उन्हें इच्छा हो रही है।
ग्राहकों का अनुभव होगा और बेहतर


Gourmet Investments Hospitality Group (GIHG) के CEO रोहन पिवेकर के अनुसार, इस मेन्यू को ग्राहकों की पसंद और फ्लेवर पर किए गए विस्तृत अध्ययन के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने और नए दोनों तरह के ग्राहकों के लिए ऑर्डर चुनने की प्रक्रिया को आसान और अधिक व्यक्तिगत बनाना है।




किस फ्लेवर में कौन-सी डिश?
नए मेन्यू में कई लोकप्रिय डिशेज़ को अलग-अलग फ्लेवर प्रोफाइल में रखा गया है।
Spicy: Ring of Fire Shrimp, Burnt Chili Hakka Noodles
Savory: Handmade Dumplings, Pepper Steak
Umami: Dynamite Shrimp, Chang's Chicken Lettuce Wraps
Sweet: Orange Chicken
Sweet & Savory: Mongolian Tenderloin, Hot & Sour Soup, VIP Duck सहित कई लोकप्रिय व्यंजन
कंपनी का कहना है कि कई डिशेज़ ऐसे भी हैं जिनमें एक से अधिक स्वाद का अनुभव मिलता है।


मेन्यू चुनना होगा आसान
P.F. Chang's के Culinary Head जेरी थॉमस का कहना है कि यह नया सिस्टम ग्राहकों को उनकी मनःस्थिति और स्वाद की इच्छा के अनुसार डिश चुनने में मदद करेगा। इससे मेन्यू समझना आसान होगा और भोजन का अनुभव भी बेहतर बनेगा।



भारत में कितने आउटलेट हैं?
वर्तमान में P.F. Chang's भारत में 10 आउटलेट्स संचालित करता है। इनमें मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और मोहाली जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। नया Chang's Cravings मेन्यू जून से सितंबर 2026 तक सभी भारतीय आउटलेट्स पर उपलब्ध रहेगा।


निष्कर्ष
भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए P.F. Chang's ने फ्लेवर-आधारित मेन्यू की शुरुआत की है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य रेस्टोरेंट ब्रांड भी इसी तरह के ग्राहक-केंद्रित मेन्यू मॉडल को अपना सकते हैं।

Rajanish Kant
सोना की कीमतें FOMC से पहले स्थिर, रेट हाइक की संभावना बढ़कर 37.9% - क्या होगा निवेशकों का अगला कदम? | Be Your Money Manager

FOMC मीटिंग से पहले सोने की कीमतें $4,052 पर स्थिर। रेट हाइक की प्रोबेबिलिटी 37.9% हो गई है। जानिए गोल्ड इन्वेस्टमेंट की पूरी स्ट्रेटजी और टेक्निकल एनालिसिस।

सोना FOMC से पहले स्थिर, लेकिन रेट हाइक की आशंका बढ़ी - निवेशकों को क्या करना चाहिए?

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतें शुक्रवार को लगभग स्थिर बंद हुईं। निवेशक अगले हफ्ते होने वाली FOMC (Federal Open Market Committee) की बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें ब्याज दरों पर बड़ा फैसला हो सकता है।

CME के FedWatch टूल के अनुसार, 29 जुलाई को होने वाली FOMC बैठक में ब्याज दर बढ़ाने (Rate Hike) की संभावना 37.9% हो गई है। यह आंकड़ा एक हफ्ते पहले के 12.8% की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। बाजार पहले सितंबर में रेट कट की उम्मीद कर रहा था, लेकिन जुलाई में हाइक की संभावना अचानक बढ़ने से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

सोने की कीमतों में क्या हुआ?

स्पॉट गोल्ड शुक्रवार को $4,052 पर बंद हुआ, जो पिछले दिन से सिर्फ $4 (0.10%) की मामूली बढ़त दिखाता है।

पूरे हफ्ते में सोना 0.85% या $34.16 चढ़ा।

$4,000 का स्तर अभी मजबूत सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। हालांकि, जनवरी के ऑल-टाइम हाई के बाद सोना सात बार लगातार लोअर हाई बना चुका है।

सकारात्मक बात यह है कि पिछले एक महीने में सोने ने लोअर लो नहीं बनाया है, जो खरीदारों की मजबूत दिलचस्पी दर्शाता है।

FOMC का असर क्यों महत्वपूर्ण है?

अगर 29 जुलाई को अचानक रेट हाइक होता है तो यह बाजार के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। ज्यादातर ट्रेडर्स सितंबर की बैठक में रेट एक्शन की उम्मीद कर रहे थे। जुलाई में हाइक होने पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह पहले से प्राइस इन नहीं है।

विश्लेषकों के अनुसार, सोने की हालिया 24% गिरावट का मुख्य कारण सितंबर रेट हाइक की उम्मीद ही रहा है (ईरान संकट के बाद से)। अब अगर फेड दरें बढ़ाता है तो $4,000 का सपोर्ट ब्रेक होने का खतरा बढ़ जाएगा।

टेक्निकल आउटलुक

सोना फिलहाल नाजुक संतुलन (fragile equilibrium) में है। $4,000 पर मजबूत खरीदारी दिख रही है, लेकिन ऊपरी स्तर पर बिकवाली भी जारी है। FOMC का फैसला इस स्टैंडऑफ को तोड़ने वाला ट्रिगर साबित हो सकता है।

रेट होल्ड** होने पर सोने को सीमित राहत मिल सकती है।

सरप्राइज हाइक** होने पर $4,000 ब्रेकडाउन का खतरा।

लंबी अवधि में रिकवरी के लिए जरूरी है कि फेड रेट कट की दिशा में साफ संकेत दे।

भारतीय निवेशकों के लिए सलाह (Be Your Money Manager)

शॉर्ट टर्म: FOMC बैठक तक सतर्क रहें। नई पोजीशन लेने से पहले फैसला आने दें।

मीडियम टर्म: $4,000 (या भारतीय रुपए में समकक्ष) के मजबूत सपोर्ट पर DCA (Dollar Cost Averaging) रणनीति अपनाई जा सकती है।

लॉन्ग टर्म: भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोना अभी भी मजबूत एसेट क्लास बना हुआ है। SIP या गोल्ड ETF/Mutual Fund के जरिए निवेश जारी रखें।

डायवर्सिफिकेशन: पोर्टफोलियो में 10-15% गोल्ड जरूर रखें।

निष्कर्ष:  

FOMC बैठक सोने के शॉर्ट टर्म मूवमेंट का गेम चेंजर साबित हो सकती है। 37.9% रेट हाइक प्रोबेबिलिटी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्मार्ट निवेशक हमेशा की तरह इंतजार और देखने की रणनीति के साथ आगे बढ़ें।





Rajanish Kant मंगलवार, 28 जुलाई 2026
मुंबई के redevelopment प्रोजेक्ट वाले property owners के लिए राहत: Redevelopment Agreement के Registration से Property Taxable नहीं

ITAT का बड़ा फैसला: Redevelopment Agreement के Registration से Property Taxable नहीं | Section 56(2)(x) पर राहत | Mumbai Redevelopment 2026

मुंबई ITAT ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि redevelopment agreement का registration अकेले में immovable property receive नहीं माना जाएगा। Section 56(2)(x) के तहत टैक्स नहीं लगेगा। मुंबई के redevelopment प्रोजेक्ट वाले property owners के लिए जरूरी अपडेट।

ITAT का राहत भरा फैसला: Redevelopment Agreement के Mere Registration पर टैक्स नहीं लगेगा

मुंबई में redevelopment प्रोजेक्ट्स का बोलबाला है। ऐसे में Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) मुंबई बेंच ने property owners और tenants के लिए बहुत महत्वपूर्ण फैसला दिया है। Tribunal ने साफ कहा कि redevelopment agreement को सिर्फ execute और register करने भर से immovable property “receive” नहीं माना जाएगा, इसलिए Section 56(2)(x) के तहत tax नहीं लगाया जा सकता।

मामले की डिटेल्स

कर अधिकारी ने taxpayer Manoj Devshichhadva पर ₹1.38 करोड़ की राशि “Income from Other Sources” के रूप में जोड़ दी थी। आधार यह था कि redevelopment agreement register हो चुका था, इसलिए दो alternative premises का stamp duty value taxable है।

ITAT (Judicial Member Siddhartha Nautiyal और Accountant Member Vikram Singh Yadav) ने इस demand को रद्द कर दिया। Tribunal ने कहा कि:

Section 56(2)(x) केवल तभी लागू होता है जब assessee वास्तव में immovable property receive करता है।

Agreement register करने से केवल contractual right बनता है कि भविष्य में flat मिलेगा। जब तक construction पूरा नहीं हो जाता और possession नहीं दी जाती, property receive नहीं मानी जाती।

Alternative accommodation tenancy rights के surrender के बदले मिला था, इसलिए यह “without consideration” नहीं था।

CA Ashish Karundia का कमेंट

प्रमुख चार्टर्ड अकाउंटेंट अशिष करुंदिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “mere right to receive” और “actual receipt” में बहुत अंतर है। दोनों अलग-अलग capital assets हैं। संसद जब rights in immovable property को tax करना चाहती है तो स्पष्ट रूप से प्रावधान करती है। Deeming provision को इस तरह stretch नहीं किया जा सकता।

इस फैसले का असर (व्यावहारिक महत्व)

मुंबई और अन्य शहरों में redevelopment projects में रह रहे हजारों flat owners और tenants को राहत मिलेगी।

Agreement registration के समय ही भारी tax demand का खतरा कम हो गया है।

हालांकि, capital gains tax के नियम अलग हैं। जब actual possession मिलेगी या property बेची जाएगी तो capital gains tax लग सकता है।

Taxpayers को अभी भी सावधानी बरतनी चाहिए और पूरा documentation मजबूत रखना चाहिए।

Money Management के नजरिए से सलाह

Redevelopment project में जा रहे हैं तो agreement के tax implications को समझें।

CA या tax consultant से early stage में चर्चा करें।

Possession letter और completion certificate आने तक tax liability को final न मानें।

Tenancy rights surrender के बदले मिलने वाली property के documentation को carefully रखें।

निष्कर्ष  

ITAT का यह फैसला redevelopment वाले property owners के लिए बड़ी राहत है। यह दर्शाता है कि tax authorities agreement registration को अकेले tax trigger के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते। नियमों का सही ज्ञान आपको अनावश्यक tax disputes से बचा सकता है।

अपनी property और tax planning से जुड़े किसी भी सवाल के लिए comment करें। 

यह आर्टिकल मूल है, news को simplify किया गया है और finance blog के readers के लिए practical advice जोड़ा गया है। आप इसमें अपनी branding, images या internal links जोड़ सकते हैं।



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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा'
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें'
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -
9- भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक समृद्धि का जीवंत परिचय  के लिए पढ़ें - रंगारंग इंडिया:  मेरा भारत, मेरी यात्राएं

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Rajanish Kant बुधवार, 22 जुलाई 2026
LIC और EPFO में कितना अनक्लेम्ड पैसा पड़ा है? सरकार ने जारी किए ताजा आंकड़े 2026 | ₹16,000 करोड़ से ज्यादा अनक्लेम्ड फंड - BeYourMoneyManager

 
LIC में ₹7,318.50 करोड़ और EPFO के इनऑपरेटिव अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ अनक्लेम्ड/इनऑपरेटिव फंड। जानिए कैसे चेक करें और क्लेम करें अपना पैसा। पूरी डिटेल्स यहां।

LIC और EPFO में पड़ा है हजारों करोड़ का अनक्लेम्ड पैसा! सरकार ने संसद में दिए ताजा आंकड़े

अगर आपने या आपके परिवार ने LIC पॉलिसी ली थी या EPF अकाउंट खुलवाया था, तो हो सकता है कि आपका पैसा अनक्लेम्ड पड़ा हो। केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में LIC और EPFO से जुड़े अनक्लेम्ड फंड के最新 आंकड़े जारी किए हैं। कुल मिलाकर 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि इन संस्थानों में पड़ी हुई है।

LIC में अनक्लेम्ड मनी: ₹7,318.50 करोड़  

31 मार्च 2026 तक Life Insurance Corporation of India (LIC) के पास कुल ₹7,318.50 करोड़ अनक्लेम्ड राशि जमा है। इसमें:  

पॉलिसीधारकों का मूल अनक्लेम्ड अमाउंट: ₹5,564.55 करोड़  

इस पर अर्जित आय (Income Accrued): ₹1,753.95 करोड़

EPFO में इनऑपरेटिव अकाउंट्स: ₹9,330.56 करोड़  

EPFO के मामले में सरकार ने स्पष्ट किया कि कोई "अनक्लेम्ड" अकाउंट नहीं है, लेकिन इनऑपरेटिव EPF अकाउंट्स में ₹9,330.56 करोड़ की राशि पड़ी हुई है (31 मार्च 2026 तक)।

अनक्लेम्ड फंड को वापस पाने के लिए सरकार और संस्थान क्या कर रहे हैं?

LIC के प्रयास:  

LIC पॉलिसीधारकों और उनके नॉमिनी/वारिसों तक पैसा पहुंचाने के लिए कई कदम उठा रही है:  

LIC वेबसाइट (licindia.in) पर नाम, DOB और PAN से अनक्लेम्ड अमाउंट सर्च करने की सुविधा।  

ब्रांचेस द्वारा पत्र, SMS रिमाइंडर।  

10 साल से ज्यादा पुराने मामलों में NEFT डिटेल्स मांगकर फॉलो-अप।  

एजेंट्स और बिमा सखी के जरिए लोकल लेवल पर ट्रेसिंग।  

क्रेडिट ब्यूरो एजेंसी की मदद से एड्रेस और मोबाइल नंबर ट्रेस करना।  

वित्त मंत्रालय के "Your Money-Your Right" कैंपेन में सक्रिय भागीदारी।

EPFO के 4-पॉइंट एक्शन प्लान:  

KYC डिटेल्स के आधार पर इनऑपरेटिव अकाउंट्स की पहचान और कैटेगरीकरण।  

₹1,000 या उससे कम बैलेंस वाले आधार-वेरिफाइड अकाउंट्स में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऑटो-सेटलमेंट।  

सीधे बैंक अकाउंट में क्रेडिट (बिना नया क्लेम फॉर्म भरे)।  

सोशल मीडिया और Nidhi Aapke Nikat (NAN) 2.0 कैंप के जरिए जागरूकता।

10 साल बाद क्या होता है अनक्लेम्ड LIC फंड?  

IRDAI के नियमों के अनुसार 10 साल से ज्यादा अनक्लेम्ड राशि Senior Citizens’ Welfare Fund (SCWF) में ट्रांसफर कर दी जाती है। LIC हर साल 1 मार्च तक योग्य राशि ट्रांसफर करती है।

अपना अनक्लेम्ड पैसा कैसे चेक और क्लेम करें? (टिप्स)

LIC के लिए: licindia.in पर जाएं → Unclaimed Policy Dues सर्च करें।  

EPFO के लिए: Unified Member Portal (umang.gov.in या epfindia.gov.in) पर लॉगिन करें, KYC अपडेट करें और क्लेम स्टेटस चेक करें।  

आधार, PAN और बैंक डिटेल्स अपडेट रखें।  

पुरानी पॉलिसी/PF अकाउंट की जानकारी परिवार के सदस्यों को दें।

निष्कर्ष:  

अनक्लेम्ड मनी आपकी मेहनत की कमाई है। छोटी-छोटी लापरवाही से लाखों-करोड़ों रुपये अनक्लेम्ड हो जाते हैं। नियमित रूप से अपने फाइनेंशियल अकाउंट्स की समीक्षा करें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपडेट रखें।

आर्टिकल स्रोत: लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का लिखित जवाब (20 जुलाई 2026)


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Rajanish Kant मंगलवार, 21 जुलाई 2026
सोना नरम, चांदी में रिबाउंड: फेड रेट हाइक की आशंका और जियो-पॉलिटिकल टेंशन से Precious Metals पर असर | Kitco AM Report 20 जुलाई 2026

 


20 जुलाई 2026 को सोने में हल्की गिरावट और चांदी में रिबाउंड देखा गया। फेड रेट हाइक की संभावना, US-Iran तनाव और ऊंचे तेल-यील्ड ने मेटल्स को सीमित किया। विस्तृत विश्लेषण, तकनीकी लेवल और निवेश सलाह पढ़ें।

सोना नरम पड़ा, चांदी में उछाल: फेड रेट रिस्क और हॉर्मुज तनाव ने Precious Metals को रोका

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में हल्की नरमी देखी गई, जबकि चांदी में रिबाउंड नजर आया। Kitco AM Report के अनुसार, US-Iran के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद फेडरल रिजर्व की दर बढ़ाने की आशंका और मजबूत डॉलर ने प्रीशियस मेटल्स की तेजी को सीमित कर दिया।

वर्तमान कीमतें (20 जुलाई 2026):  

स्पॉट गोल्ड:** लगभग $4,012 प्रति औंस (0.13% की गिरावट)  

स्पॉट सिल्वर:** लगभग $56.73 प्रति औंस (1.62% की बढ़ोतरी)  


क्यों आई नरमी? मुख्य कारण

फेड रेट हाइक की आशंका: हालिया आर्थिक डेटा (रिटेल सेल्स, जॉबलेस क्लेम्स, फिलाडेल्फिया Fed मैन्युफैक्चरिंग) मजबूत आने के बाद बाजार अब जुलाई फेड मीटिंग में होल्ड और बाद में रेट हाइक की संभावना जता रहे हैं। इससे 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 4.57% के आसपास पहुंच गया और US Dollar Index (DXY) 100.87 पर मजबूत हुआ।

जियो-पॉलिटिकल टेंशन: US और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ी तनाव की वजह से क्रूड ऑयल $90 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। इससे महंगाई का खतरा बढ़ा, जो नॉन-यील्डिंग एसेट गोल्ड के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।

टेक्निकल पोजीशन: गोल्ड $4,023-$4,065 के महत्वपूर्ण रिट्रेसमेंट जोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। सिल्वर पिछले हफ्ते के लो से रिकवर हुआ है लेकिन $58.53-$59.44 जोन से अभी भी नीचे है।

तकनीकी विश्लेषण (Gold & Silver)

गोल्ड:  

निकट अवधि में बेयरिश बायस।  

सपोर्ट लेवल: $3,982 → $3,947 → $3,886  

रेजिस्टेंस लेवल: $4,023 → $4,065  

$3,982 से नीचे ब्रेकडाउन पर और गिरावट संभव।

सिल्वर:  

रिबाउंड के बावजूद बेयरिश स्ट्रक्चर।  

सपोर्ट: $55.60 → $54.49  

रेजिस्टेंस: $57.60 → $58.53  

$58.53 के ऊपर क्लोज पर तेजी मजबूत हो सकती है।

निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)  

वर्तमान में गोल्ड और सिल्वर दोनों शॉर्ट-टर्म प्रेशर में हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स (मुद्रा अवमूल्यन, सेंट्रल बैंक खरीदारी और जियो-पॉलिटिकल रिस्क) मजबूत बने हुए हैं।  

डिप-बायिंग स्ट्रैटजी**: $3,950-$3,980 के आसपास गोल्ड में SIP या लंपसम खरीदारी पर विचार करें।  

चांदी**: इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण चांदी गोल्ड से ज्यादा वोलेटाइल रहती है – रिबाउंड पर प्रॉफिट बुकिंग और नए लो पर एंट्री दोनों ऑप्शन।  

पोर्टफोलियो में 8-15% Precious Metals रखना विविधीकरण के लिए फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष  

फेड की नीति, तेल की कीमतें और हॉर्मुज की स्थिति अगले कुछ दिनों में मेटल्स की दिशा तय करेंगी। निवेशकों को शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए लेकिन लॉन्ग-टर्म गोल्ड और सिल्वर का आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें या वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। कीमतें बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।


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Rajanish Kant
भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग संकेत, कीमतें घटीं लेकिन ज्वेलरी और ETF डिमांड मजबूत | Gold Market Update 2026

भारत सोने का बाजार जुलाई 2026 अपडेट – जून में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट, ज्वेलरी डिमांड बढ़ी, ETF और डिजिटल गोल्ड में इनफ्लो मजबूत लेकिन आयात घटा। निवेशकों के लिए पूरी जानकारी BeYourMoneyManager.com

भारत में सोने का बाजार जुलाई 2026: मिश्रित मांग के संकेत, निवेशकों के लिए क्या है मौका?


नई दिल्ली। विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) की जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सोने के बाजार में मिश्रित संकेत दिख रहे हैं। जून महीने में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद जुलाई में स्थिरता आई है। भरपूर घरेलू सप्लाई के कारण लोकल मार्केट अभी भी लैंडेड प्राइस पर डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है।


सोने की कीमतों में गिरावट

जून में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत (LBMA) 11% से ज्यादा गिरकर US$4,000/oz के आसपास पहुंच गई, जो अक्टूबर 2025 के बाद सबसे कम स्तर था। घरेलू MCX स्पॉट प्राइस भी करीब 10% घटकर INR 1,41,000/10g के आसपास पहुंचा। जुलाई में मामूली रिकवरी हुई है, लेकिन साल-दर-साल (YTD) अंतरराष्ट्रीय कीमतें 7% नीचे हैं, जबकि भारतीय कीमतें 6% ऊपर हैं।


मुख्य कारण: मजबूत US डॉलर, अमेरिका में रेट हाइक की उम्मीदें और इक्विटी मार्केट की तरफ शिफ्ट। हालांकि, कीमतों में गिरावट ने खरीदारों को मौका दिया, जिससे गिरावट सीमित रही।


घरेलू बाजार में डिस्काउंट

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद डिस्काउंट US$150/oz तक पहुंच गया था, जो अब जुलाई के पहले दो हफ्तों में औसतन US$20/oz रह गया है। मिड-जुलाई में यह US$40/oz के आसपास है। पुरानी ज्वेलरी को नई ज्वेलरी में एक्सचेंज करने से घरेलू सप्लाई बढ़ी है, जिससे आयात की जरूरत कम हुई।


ज्वेलरी डिमांड में सुधार

मई-जून के मध्य मौसमी सुस्ती और अधिक मास के बाद ज्वेलरी खरीदारी में तेजी आई है। कीमतों में गिरावट और रिटेलर्स की डिस्काउंट, एक्सचेंज ऑफर जैसी प्रमोशन्स ने मदद की। शादी के अलावा फेस्टिव सीजन (अगस्त से) की तैयारी में मैन्युफैक्चरर्स को ऑर्डर मिल रहे हैं।


लिस्टेड ज्वेलर्स ने अप्रैल-जून क्वार्टर में 30-60% YoY रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की। पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज अब 43-70% तक सेल्स का हिस्सा बन गया है।


निवेश डिमांड: ETF और डिजिटल गोल्ड मजबूत

Gold ETF:** जून में INR 34.4 अरब (US$356 मिलियन) का इनफ्लो – फरवरी के बाद सबसे ज्यादा। जुलाई की शुरुआत में भी INR 12.1 अरब का इनफ्लो। होल्डिंग्स बढ़कर 119 टन हो गईं।

डिजिटल गोल्ड:** UPI के जरिए खरीदारी बढ़ी। जून में वैल्यू INR 25.5 अरब और वॉल्यूम 1.7 टन पहुंचा।


दूसरी ओर, बार और कॉइन की मांग ठंडी पड़ी।


सोने के आयात में कमी

जून में आयात US$1.97 बिलियन रहा, जो मई से 42% कम और पिछले साल के जून से वॉल्यूम में कम है। पुरानी गोल्ड सप्लाई बढ़ने से फ्रेश इंपोर्ट की जरूरत घटी। कुल मर्चेंडाइज इंपोर्ट में गोल्ड की हिस्सेदारी मात्र 3% रह गई।


निवेशकों के लिए सलाह (BeYourMoneyManager.com)

ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए:** कीमत स्थिर होने पर अच्छा मौका, खासकर प्रमोशन्स का फायदा लें।

निवेशकों के लिए:** ETF और डिजिटल गोल्ड में डिप पर खरीदारी अच्छी रणनीति हो सकती है। लॉन्ग टर्म में सोना पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए बेहतर ऑप्शन बना हुआ है।

ध्यान दें:** कीमतें US डॉलर, ग्लोबल इकोनॉमी और घरेलू फैक्टर्स पर निर्भर करेंगी। हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से खरीदें और टैक्स/मेकिंग चार्जेस चेक करें।


निष्कर्ष: भारतीय सोने का बाजार अभी मिश्रित मांग दिखा रहा है। ज्वेलरी और पेपर गोल्ड (ETF/डिजिटल) में सकारात्मक संकेत हैं, जबकि फिजिकल बार-कॉइन और आयात में सुस्ती है। लंबी अवधि में सोना मजबूत एसेट साबित होता रहा है।

यह लेख World Gold Council की रिपोर्ट पर आधारित मूल विश्लेषण है। निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।



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