SBI Closed Loan पर गलत Rs 590 चार्ज: Consumer Court ने बैंक को थोप दिया Rs 1 लाख का Compensation आजकल बैंक लोन बंद करने के बाद भी कई बार गलतियां करते रहते हैं, जिससे ग्राहकों को परेशानी और आर्थिक नुकसान होता है। एक ताजा केस में State Bank of India (SBI) को पंजाब के एक व्यक्ति पर लोन क्लोज होने के बाद भी EMI डिडक्ट करने की कोशिश करने की भारी कीमत चुकानी पड़ी।District Consumer Disputes Redressal Commission ने SBI को Rs 1 लाख मुआवजा, Rs 590 चार्ज रिफंड और CIBIL स्कोर सुधारने का आदेश दिया है। साथ ही लिटिगेशन खर्च के रूप में Rs 10,000 भी देने को कहा गया।
क्या था पूरा मामला?
पंजाब के 57 वर्षीय संजीव कुमार नय्यर ने जनवरी 2021 में SBI से Rs 2 लाख का कार लोन (Maruti Suzuki Celerio खरीदने के लिए) लिया था। EMI लगभग Rs 4,100 थी।नवंबर 2025 में उन्होंने पूरा बकाया चुकाकर लोन क्लोज कर दिया।
बैंक ने No Objection Certificate (NOC) भी जारी कर दिया।
इसके बावजूद दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में बैंक ने दोबारा EMI डिडक्ट करने की कोशिश की (जो बाद में रिवर्स हो गई)।
20 जनवरी 2026 को NACH मैनडेट फिर पेश किया गया। इस बार अकाउंट में पर्याप्त फंड नहीं होने से ट्रांजेक्शन बाउंस हो गया और बैंक ने Rs 590 बाउंस चार्ज लगा दिए।
शिकायतकर्ता ने कई बार बैंक से संपर्क किया, लीगल नोटिस भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अंत में उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट का रुख किया।
कोर्ट का फैसला और कारण
कोर्ट ने SBI की कार्रवाई को negligence, deficiency in service और unfair trade practice माना। कोर्ट के अनुसार:लोन क्लोज होने के बाद भी बार-बार NACH प्रेजेंट करना बैंक की लापरवाही साबित करता है।
इससे ग्राहक को मानसिक परेशानी, समय की बर्बादी और CIBIL स्कोर खराब होने का डर बना रहा।
बैंक को ग्राहक के हितों की रक्षा करनी चाहिए थी, लेकिन उसने अपनी ड्यूटी पूरी नहीं की।
आदेश (3 जून 2026): Rs 590 बाउंस चार्ज वापस करें।
Rs 1 लाख compensation + Rs 10,000 litigation cost दें (45 दिनों के अंदर)।
यदि CIBIL स्कोर प्रभावित हुआ हो तो उसे ठीक करें।
इस केस से क्या सीखें? (Money Management Tips)
Loan Closure के बाद NOC जरूर लें – लिखित और ईमेल दोनों में।
NACH Mandate Stop करवाएं – लोन क्लोज होते ही बैंक को लिखित में सूचित करें।
अकाउंट स्टेटमेंट Regularly चेक करें – बंद लोन पर भी अनचाहे डिडक्शन हो सकते हैं।
CIBIL स्कोर मॉनिटर करें – गलत लेट पेमेंट रिपोर्टिंग से क्रेडिट स्कोर खराब हो सकता है।
Complaint नजरअंदाज हो तो Consumer Court जाएं – छोटी राशि पर भी मुआवजा मिल सकता है।
निष्कर्ष
यह केस साबित करता है कि बैंक भी गलती कर सकते हैं और Consumer Protection Act ग्राहकों को मजबूत सुरक्षा देता है। लोन लेते या क्लोज करते समय दस्तावेज और फॉलो-अप बहुत जरूरी हैं।
आपके लिए सुझाव (www.beyourmoneymanager.com): Loan Closure Checklist PDF डाउनलोड करें
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