सोने के गहने जेवर खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, केन्द्र सरकार ने Duty Free Gold Import पर कसा शिकंजा, अब एक License पर सिर्फ 100 किलो सोना आयात संभव

सरकार ने ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट नियमों को सख्त करते हुए प्रति लाइसेंस 100 किलो की सीमा तय की है। जानिए इसका ज्वेलरी उद्योग, सोने की कीमतों और आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।

सरकार ने ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट पर लगाई सीमा, अब एक लाइसेंस पर केवल 100 किलो सोना आयात

भारत सरकार ने सोने के आयात को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट नियमों को और सख्त कर दिया है। अब जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को एक लाइसेंस के तहत अधिकतम 100 किलो सोना ही आयात करने की अनुमति होगी। यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) द्वारा जारी नए नियमों के तहत लागू किया गया है।

सरकार का उद्देश्य गोल्ड इम्पोर्ट पर बेहतर निगरानी रखना, नियमों के दुरुपयोग को रोकना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना है।

क्या हैं नए नियम?

नए नियमों के अनुसार:

प्रत्येक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलो सोने के आयात की अनुमति होगी

नए आवेदकों की फैक्ट्री और सुविधा का निरीक्षण अनिवार्य किया गया है

पुराने निर्यातकों को पिछली निर्यात प्रतिबद्धताओं का कम से कम 50% पूरा करना होगा

आयात और निर्यात का पखवाड़ा रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया गया है

सरकार ने Standard Input Output Norms (SIONs) के तहत कई नए अनुपालन नियम भी जोड़े हैं ताकि गोल्ड इम्पोर्ट सिस्टम अधिक पारदर्शी बन सके।





भारत सरकार ने ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट पर कसा शिकंजा, अब एक लाइसेंस पर सिर्फ 100 किलो सोना आयात संभव

सरकार ने ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट नियमों को सख्त करते हुए प्रति लाइसेंस 100 किलो की सीमा तय की है। जानिए इसका ज्वेलरी उद्योग, सोने की कीमतों और आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।

सरकार ने ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट पर लगाई सीमा, अब एक लाइसेंस पर केवल 100 किलो सोना आयात

भारत सरकार ने सोने के आयात को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट नियमों को और सख्त कर दिया है। अब जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को एक लाइसेंस के तहत अधिकतम 100 किलो सोना ही आयात करने की अनुमति होगी। यह फैसला डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) द्वारा जारी नए नियमों के तहत लागू किया गया है। 

सरकार का उद्देश्य गोल्ड इम्पोर्ट पर बेहतर निगरानी रखना, नियमों के दुरुपयोग को रोकना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना है।


क्या हैं नए नियम?

नए नियमों के अनुसार:

प्रत्येक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलो सोने के आयात की अनुमति होगी

नए आवेदकों की फैक्ट्री और सुविधा का निरीक्षण अनिवार्य किया गया है

पुराने निर्यातकों को पिछली निर्यात प्रतिबद्धताओं का कम से कम 50% पूरा करना होगा


आयात और निर्यात का पखवाड़ा रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया गया है

सरकार ने Standard Input Output Norms (SIONs) के तहत कई नए अनुपालन नियम भी जोड़े हैं ताकि गोल्ड इम्पोर्ट सिस्टम अधिक पारदर्शी बन सके। 

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। हाल के महीनों में बढ़ते गोल्ड इम्पोर्ट और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार लगातार नियंत्रणात्मक कदम उठा रही है। इससे पहले भी सरकार सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा चुकी है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ कंपनियां ड्यूटी-फ्री स्कीम का गलत इस्तेमाल कर रही थीं। इसी वजह से सरकार ने लाइसेंस आधारित सीमा तय कर निगरानी मजबूत करने का फैसला लिया।

ज्वेलरी इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले का सबसे बड़ा असर जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर पर देखने को मिल सकता है।

संभावित प्रभाव:

छोटे एक्सपोर्टर्स के लिए सोने की उपलब्धता सीमित हो सकती है

आयात प्रक्रिया अधिक जटिल और अनुपालन आधारित बनेगी

ज्वेलरी निर्माण लागत बढ़ सकती है

घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है

हालांकि सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड ट्रेड में पारदर्शिता आएगी और गैरकानूनी आयात पर रोक लगेगी।

आम ग्राहकों पर क्या असर होगा?

यदि सोने का आयात सीमित होता है और ड्यूटी बढ़ी रहती है, तो आने वाले समय में सोने के आभूषण महंगे हो सकते हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। 

इसके चलते लोग:

पुराने गहनों का एक्सचेंज बढ़ा सकते हैं

हल्के वजन की ज्वेलरी खरीद सकते हैं

डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF की ओर रुख कर सकते हैं

क्या यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा?

आर्थिक दृष्टि से देखा जाए तो सरकार का यह कदम विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। भारत हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है। ऐसे में गोल्ड इम्पोर्ट कंट्रोल सरकार की आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 

निष्कर्ष

ड्यूटी-फ्री गोल्ड इम्पोर्ट पर 100 किलो की सीमा तय करना सरकार का एक बड़ा नियामक कदम है। इससे गोल्ड ट्रेड में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन ज्वेलरी उद्योग और ग्राहकों पर इसका सीधा प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह नीति सोने के बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर कितना असर डालती है।


Rajanish Kant गुरुवार, 14 मई 2026
पुराना सोना नया बनाएं: Gold Recycling Schemes 2026 - पुराने जेवर का मूल्यांकन कैसे होता है और कितना दाम मिलेगा? | BeourMoneyManager

सोने की कीमतें बढ़ने और इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद गोल्ड रिसाइक्लिंग स्कीम्स तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। जानिए Kalyan Jewellers, Malabar, Tanishq, Muthoot Exim जैसी कंपनियों की स्कीम्स, XRF मशीन से शुद्धता जांच, सर्विस चार्ज और पुराने जेवर से ज्यादा वैल्यू कैसे पाएं।

पुराना सोना नया बनाएं: Gold Recycling Schemes 2026 में क्यों हो रही हैं पॉपुलर? पुराने जेवर का मूल्यांकन और मिलने वाला दाम

सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए सोना खरीदने में देरी करने की अपील के बाद ज्वेलरी ब्रांड्स गोल्ड रिसाइक्लिंग स्कीम्स को जोर-शोर से प्रमोट कर रहे हैं। अगर आपके पास पुराना, टूटा-फूटा, पुराने डिजाइन का जेवर, गोल्ड कॉइन या बेकार पड़ा सोना है तो अब इसे एक्सचेंज करके नया जेवर बनवाना स्मार्ट विकल्प बन गया है।BeYourMoneyManager पर इस लेख में जानिए गोल्ड रिसाइक्लिंग क्या है, प्रमुख स्कीम्स, मूल्यांकन की प्रक्रिया, मिलने वाला प्राइस और टिप्स।

गोल्ड रिसाइक्लिंग क्या है?गोल्ड रिसाइक्लिंग का मतलब है पुराने सोने को खरीदकर उसे रिफाइन करना और फिर नए जेवर या बुलियन के रूप में मार्केट में वापस सप्लाई करना। Muthoot Exim के CEO Keyur Shah के अनुसार, अगर भारत के घरों में रखे सोने का सिर्फ 1% भी रिसाइकल हो जाए तो सालाना 300 टन सोने का इंपोर्ट कम हो सकता है — जो भारत के कुल गोल्ड इंपोर्ट का करीब 40% है।यह प्रक्रिया देश के गोल्ड इंपोर्ट बिल को कम करती है, कस्टम ड्यूटी बचाती है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है।2026 में कौन-कौन सी प्रमुख गोल्ड रिसाइक्लिंग स्कीम्स चल रही हैं?Kalyan Jewellers – Old Gold Exchange Promotion
‘Nation First – Gold4India Initiative’ के तहत पुराना, अनयूज्ड, ब्रोकन या पुराने डिजाइन का जेवर एक्सचेंज करें। रिफाइन करके नए जेवर में इस्तेमाल होता है।
Malabar Gold & Diamonds – Gold Monetisation Scheme
न्यूनतम 1 ग्राम से डिपॉजिट की सुविधा। कैश या गोल्ड वेट में रिडेम्पशन।
Muthoot Exim – Muthoot Gold Point
पूरे भारत में 100+ सेंटर्स। अब तक 5 टन से ज्यादा पुराना सोना खरीदा जा चुका है। FY25-26 में अकेले 1 टन (1000 किलो) खरीदा।
Tanishq – #OldGoldNewIndia Campaign
9K से 22K तक का सोना स्वीकार करते हैं। किसी भी ज्वेलर का जेवर, छोटा या टूटा हुआ भी चलेगा।
MMTC-PAMP
प्रीमियम रिसाइक्लिंग सर्विस, जर्मन XRF टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल।

पुराने जेवर का मूल्यांकन कैसे होता है? (Transparency बढ़ी है)आधुनिक ज्वेलर्स अब पुराने टचस्टोन मेथड की बजाय एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करते हैं:XRF Machine (X-Ray Fluorescence): 30 सेकंड में सोने की शुद्धता (प्योरिटी) और अन्य मेटल्स (सिल्वर, कॉपर, जिंक आदि) का प्रतिशत बता देती है। बिना जेवर को नुकसान पहुंचाए।
वेटिंग: मशीन से 3 दशमलव तक सटीक वजन।
MMTC-PAMP जैसी कंपनियां प्रिसीजन स्केल्स और जर्मन XRF टेक्नोलॉजी यूज करती हैं।

मिलने वाला प्राइस कैसे तय होता है?IBJA (India Bullion and Jewellers Association) के डेली स्पॉट गोल्ड प्राइस के आधार पर।
आपकी जेवर की शुद्धता (22K, 18K आदि)।
सर्विस चार्ज कटौती के बाद फाइनल अमाउंट।

उदाहरण: अगर 10 ग्राम 22K जेवर है तो मार्केट रेट के हिसाब से वैल्यू कैलकुलेट होगी, शुद्धता चेक होगी और चार्ज कटकर पेमेंट/एक्सचेंज वैल्यू मिलेगी।गोल्ड एक्सचेंज पर चार्जेस क्या हैं?Muthoot Exim: 3% सर्विस चार्ज (गोल्ड खरीद पर GST नहीं)।
MMTC-PAMP: सर्विस चार्ज + GST (बायबैक पर)।
अलग-अलग ब्रांड्स में मेकिंग चार्जेस पर डिस्काउंट या एक्स्ट्रा बेनिफिट्स भी मिल सकते हैं।

सलाह: 
कई जगहों से कोटेशन लेकर तुलना करें।पुराना जेवर रिसाइकल करवाते समय ध्यान रखें ये 7 टिप्स 

हमेशा XRF मशीन वाली जगह चुनें — पारदर्शी मूल्यांकन।
वजन और प्योरिटी रिपोर्ट मांगें।
IBJA रेट चेक करें और कैलकुलेशन समझें।
सर्विस चार्ज और अन्य डिडक्शन पहले पूछ लें।
छोटे-मोटे जेवर भी स्वीकार करने वाली स्कीम चुनें।
टैक्स इम्प्लिकेशन्स (अगर कोई हो) समझें।
ट्रस्टेड ब्रांड ही चुनें।

निष्कर्ष: 

रिसाइक्लिंग = स्मार्ट मनी मैनेजमेंट 

उच्च सोने की कीमतों के समय पुराना सोना नया बनाना न सिर्फ पैसे बचाता है बल्कि देश की इकोनॉमी को भी सपोर्ट करता है। 

BeYourMoneyManager की सलाह है कि बेकार पड़ा सोना अब लॉकर में न रखें — उसे productive बनाएं।आपके पास पुराना जेवर है? कमेंट में बताएं कितना ग्राम है और किस शहर में हैं — हम आपको बेहतर ऑप्शन्स सुझा सकते हैं।अस्वीकरण: यह लेख सूचना उद्देश्य के लिए है। अंतिम मूल्यांकन और डील ब्रांड की पॉलिसी पर निर्भर करेगी। निवेश/ट्रांजेक्शन से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

 

Rajanish Kant
HDFC Mutual Fund ने Gold-Silver Passive FoF NFO वापस लिया: आपके लिए इसके मायने | क्या अब Gold ETF में Invest करें? | BeYourMoneyManager

HDFC Mutual Fund ने Gold-Silver Passive Fund of Fund का NFO स्थगित कर दिया है। Gold-Silver पर Import Duty 6% से बढ़कर 15% होने और Rupee Pressure के कारण यह फैसला लिया गया। निवेशकों के लिए पूरी डिटेल और विकल्प।

HDFC Mutual Fund ने Gold-Silver Passive FoF NFO स्थगित किया: Import Duty Hike का बड़ा असर

HDFC Mutual Fund ने अपने आगामी HDFC Gold-Silver Passive Fund of Fund के New Fund Offer (NFO) को स्थगित करने का फैसला लिया है। यह कदम सरकार द्वारा Gold और Silver पर Import Duty बढ़ाए जाने के बाद उठाया गया है, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार और Current Account Deficit को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया।

NFO क्यों स्थगित किया गया?

HDFC AMC के MD & CEO Navneet Munot ने कहा, 

“हमने Gold-Silver Passive FoF का NFO स्थगित करने का फैसला लिया है। यह Precious Metals के Import और देश के External Account पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए किया गया है। हम निवेशकों को Equity और Debt Mutual Funds की ओर प्रोत्साहित करते हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में Productive Capacity निर्माण में मदद करते हैं।”

यह NFO 15 से 29 मई 2026 के बीच खुलने वाला था, जिसमें मुख्य रूप से HDFC Gold ETF और HDFC Silver ETF में निवेश करने की योजना थी।


सरकार ने क्यों बढ़ाई Import Duty?


13 मई 2026 से Gold और Silver पर Effective Import Duty 6% से बढ़कर 15% हो गई है (10% Basic Customs Duty + 5% AIDC)।

यह कदम Rising Import Bill, ऊंचे Crude Oil Prices, Rupee की कमजोरी और West Asia संकट के बीच लिया गया।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Gold Consumer है, लेकिन ज्यादातर Gold Import करता है। FY26 में Gold Imports रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से Gold खरीदारी टालने, Fuel Consumption कम करने और अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने की अपील की है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

Physical Gold की Demand पर असर पड़ेगा – कीमतें बढ़ सकती हैं।

Gold ETFs और Sovereign Gold Bonds (SGB) की Relevance बढ़ सकती है, क्योंकि ये Physical Gold की तुलना में कम खर्चे वाले विकल्प हैं (कोई Making Charge, Storage Cost नहीं)।

Diversification की जरूरत अभी भी बनी हुई है। Gold पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा लंबे समय में अच्छा हेज साबित होता है।

Equity और Debt Funds पर फोकस बढ़ सकता है, जैसा HDFC AMC ने सुझाया है।

BeYourMoneyManager की सलाह:

Short-term में Gold ETFs में Volatility रह सकती है, लेकिन लंबी अवधि में Inflation Hedge के रूप में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

Sovereign Gold Bonds अभी भी Tax-Free Return (2.5% अतिरिक्त) और Capital Gains Exemption के कारण बेहतर विकल्प हैं।

नया NFO आने पर या बाजार की स्थिति बदलने पर हम अपडेट देंगे।

हमेशा अपने Risk Profile, Goals और समय-सीमा के अनुसार Asset Allocation तय करें।

Disclaimer: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। यह Investment Advice नहीं है। किसी भी निवेश से पहले प्रमाणित Financial Advisor से सलाह अवश्य लें।




Rajanish Kant
Nation First – Gold4India Initiative.. पुराने सोने को लेकर क्या है दिग्गज जूलरी कंपनियों Titan, Kalyan या Malabar का ये अभियान, आपके लिए इसका क्या मतलब है |BeYourMoneyManager

टॉप ज्वेलर्स पुराने सोने की एक्सचेंज और गोल्ड मोनेटाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। जानिए कैसे आप अपने घर में पड़े सोने से नया आभूषण बना सकते हैं और देश के आयात पर बोझ कम कर सकते हैं। पूरी डिटेल्स।

पुराने सोने का एक्सचेंज स्कीम: टाइटन, कल्याण और मालाबार ज्वेलर्स का बड़ा प्लान – घरेलू सोना अनलॉक करने का मौका

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का बाजार है, लेकिन लगभग सारा सोना आयात करना पड़ता है। 2025-26 में सोने के आयात ने रिकॉर्ड $71.98 बिलियन का स्तर छू लिया, जो पिछले साल से 24% ज्यादा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने 12 मई 2026 को सोने पर ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी।

इसी बीच देश के टॉप ज्वेलर्स अब घरों में पड़े पुराने सोने (Idle Gold) को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बड़े कदम उठा रहे हैं।टाइटन, कल्याण और मालाबार का अभियान

Titan Company: पिछले 25 साल से पुराने सोने का एक्सचेंज प्रोग्राम चला रही है। कंपनी के CFO अशोक सोनथालिया के अनुसार, आज टाइटन की 50% सोने की जरूरत पुराने सोने के एक्सचेंज से पूरी होती है।

Kalyan Jewellers: “Nation First – Gold4India Initiative” लॉन्च की। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक सोने के आयात को 5 टन कम करना है। चार सूत्री रणनीति में शामिल हैं:

पुराने सोने का एक्सचेंज

18 कैरेट हल्के आभूषणों को बढ़ावा

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम

रिसर्कुलेशन ड्राइव


Malabar Gold & Diamonds: प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में सुधार की सिफारिश की।


भारत में कितना सोना पड़ा है?


भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े ऊपर-जमीन (above-ground) सोने के भंडार हैं – घरों, मंदिरों और लॉकरों में। ज्यादातर लोग इसे “रामभरोसे” या भावी जरूरत के लिए रखते हैं। लेकिन ये सोना अर्थव्यवस्था में घूम नहीं रहा है।ज्वेलर्स का कहना है कि अगर इस निष्क्रिय सोने का सिर्फ एक छोटा हिस्सा भी रिसाइकल हो जाए, तो:सोने के आयात में भारी कमी आएगी

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा

उपभोक्ता को नया आभूषण मिलेगा बिना ज्यादा खर्च के


पुराना सोना एक्सचेंज कैसे काम करता है? (लाभ)


ट्रांसपेरेंट वैल्यूएशन – ज्वेलर्स प्रोफेशनल तरीके से पुराने सोने का वजन और शुद्धता चेक करते हैं।

नए आभूषण – एक्सचेंज वैल्यू पर नया 18K या 22K जेवर बनवा सकते हैं।

कैश आउट – कुछ ज्वेलर्स कैश भी देते हैं (Kalyan के 342 स्टोर्स पर प्लान)।

मेकिंग चार्ज में बचत – पुराने सोने पर अक्सर कम या जीरो मेकिंग चार्ज ऑफर होते हैं।


18 कैरेट जेवलरी – नया ट्रेंड क्यों?


22 कैरेट की जगह 18 कैरेट जेवलरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे:कम सोना लगता है

डिजाइन ज्यादा हल्के और आधुनिक बनते हैं

आयात 20-30% तक कम हो सकता है (GJEPC का अनुमान)


टाइटन ने पहले ही 18K ब्राइडल कलेक्शन लॉन्च कर दिए हैं।


आपके लिए क्या मतलब है? (Money Management Tips)


घर का पुराना सोना चेक करें – लॉकर, अलमारी या बैंक लॉकर में पड़े पुराने जेवर निकालें।

कीमत चेक करें – आजकल सोने की कीमत ऊंची है, एक्सचेंज पर अच्छा रेट मिल सकता है।

18K vs 22K – समझें अंतर और अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें।

टैक्स और स्कीम – गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के फायदे जानें (ब्याज + सुरक्षा)।

BeYourMoneyManager सलाह: 


भावनात्मक लगाव के साथ-साथ सोने को productive asset बनाएं। Diversification के तौर पर सोना अच्छा है, लेकिन idle रखना महंगा सौदा हो सकता है।

निष्कर्ष

टॉप ज्वेलर्स का यह अभियान सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में एक कदम है। अगर आप भी अपने पुराने सोने को नई शुरुआत देना चाहते हैं, तो नजदीकी Titan, Kalyan या Malabar स्टोर पर जाएं और एक्सचेंज ऑफर चेक करें।

आपका अनुभव? 

कमेंट में बताएं – आपके पास कितना पुराना सोना है और आप एक्सचेंज करने की सोच रहे हैं या नहीं?अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश या खरीद-बिक्री से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।


Rajanish Kant
भारत ने Gold -Silver पर Import Duty 6% से बढ़ाकर 15% की, Gold- Silver की कीमतों पर असर, क्यों लिया गया ये बड़ा फैसला

 
भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया है। जानिए इससे ज्वेलरी मार्केट, व्यापार घाटा, रुपया और सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा। पूरी डिटेल्स पढ़ें।

भारत ने सोने और चांदी के आयात पर टैरिफ बढ़ाकर 15% किया, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने का प्रयासनई दिल्ली, 13 मई 2026: भारत सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह फैसला विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने, व्यापार घाटा नियंत्रित करने और रुपए को मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार के आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है। 

सरकार ने 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है, जिससे कुल प्रभावी आयात शुल्क 15% हो गया है।क्यों लिया गया यह फैसला?भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता देश है।

लगभग पूरा सोना आयात के जरिए आता है।

हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेजी और इक्विटी मार्केट से नकारात्मक रिटर्न के कारण निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अपील की थी कि एक साल तक सोना न खरीदें ताकि विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।

ज्वेलरी इंडस्ट्री और व्यापारियों की प्रतिक्रियाभारत बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा, “सरकार का यह कदम करंट अकाउंट डेफिसिट कंट्रोल करने के लिए उम्मीद के मुताबिक था, लेकिन इससे मांग प्रभावित हो सकती है क्योंकि सोने की कीमतें पहले से ही ऊंची हैं।”

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे आयात शुल्क से स्मगलिंग (तस्करी) फिर बढ़ सकती है। 2024 के मध्य में ड्यूटी घटाने के बाद तस्करी कम हुई थी, लेकिन अब फिर से ग्रे मार्केट सक्रिय हो सकता है।पिछले कुछ महीनों का संदर्भअप्रैल में 3% IGST लगने के बाद बैंक आयात रोकने को मजबूर हुए थे।

अप्रैल के आयात 30 साल के निचले स्तर पर पहुंच गए।

बाद में IGST चुकाने के बाद आयात फिर शुरू हुए, लेकिन अब नई ड्यूटी से आयात और कम होने की उम्मीद है।

संभावित प्रभावसकारात्मक: व्यापार घाटा कम होना, रुपए पर दबाव घटना, विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा।

नकारात्मक: ज्वेलरी उद्योग पर असर, घरेलू मांग में कमी, तस्करी का खतरा।

गोल्ड ETF में मार्च तिमाही में 186% की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी (वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल)।

यह फैसला शादी के सीजन और त्योहारों से पहले आया है, जब सोने-चांदी की मांग आमतौर पर बढ़ती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन लंबे समय में तस्करी और घरेलू कीमतों का गैप बढ़ सकता है।





Rajanish Kant बुधवार, 13 मई 2026
Canara Bank ने बढ़ाई Loan Interest R

 

Canara Bank द्वारा MCLR में 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के बाद होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पर क्या असर पड़ेगा? Bank of Baroda ने दरें स्थिर रखीं। पढ़ें पूरा विश्लेषण।

Canara Bank ने बढ़ाई ब्याज दरें, अब महंगी हो सकती है आपकी EMI

देश के लाखों लोन ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। Economic Times

 की रिपोर्ट के अनुसार, Canara Bank ने Marginal Cost of Funds Based Lending Rate (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट (bps) की बढ़ोतरी की है। नई दरें 12 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं। वहीं Bank of Baroda ने अपनी MCLR दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।




Canara Bank ने बढ़ाई ब्याज दरें, अब महंगी हो सकती है आपकी EMI

देश के लाखों लोन ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, Canara Bank ने Marginal Cost of Funds Based Lending Rate (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट (bps) की बढ़ोतरी की है। नई दरें 12 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं। वहीं Bank of Baroda ने अपनी MCLR दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। 


इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR आधारित ब्याज दरों से जुड़े हुए हैं।


क्या है MCLR और क्यों बढ़ती है EMI?

MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate वह न्यूनतम ब्याज दर होती है जिस पर बैंक ग्राहकों को लोन देते हैं। जब बैंक MCLR बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले लोन महंगे हो जाते हैं।


सरल शब्दों में समझें:


MCLR बढ़ी = ब्याज दर बढ़ी


ब्याज दर बढ़ी = EMI या Loan Tenure बढ़ सकता है


यदि आपका लोन Canara Bank के MCLR से जुड़ा है, तो आने वाले Reset Date पर आपकी EMI बढ़ सकती है।


Canara Bank की नई MCLR दरें


रिपोर्ट के अनुसार Canara Bank ने विभिन्न Tenure पर 5 bps तक की बढ़ोतरी की है। खासतौर पर 1 साल की MCLR, जो अधिकतर होम लोन और ऑटो लोन के लिए महत्वपूर्ण होती है, अब लगभग 9% के करीब पहुंच गई है।


हालांकि यह बढ़ोतरी छोटी दिखाई देती है, लेकिन लंबे समय वाले होम लोन में इसका असर हजारों रुपये तक हो सकता है।


कितनी बढ़ सकती है आपकी EMI?


मान लीजिए आपने ₹50 लाख का होम लोन लिया है:


अवधि: 20 साल

ब्याज दर पहले: 8.50%

नई दर: 8.55%


ऐसी स्थिति में आपकी EMI में हर महीने कुछ सौ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। कुल मिलाकर पूरे लोन पीरियड में लाखों रुपये अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।


Bank of Baroda ग्राहकों को राहत


जहां Canara Bank ने ब्याज दरें बढ़ाईं, वहीं Bank of Baroda ने अपनी MCLR दरों को स्थिर रखा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल Bank of Baroda के मौजूदा MCLR आधारित लोन ग्राहकों की EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।


किन ग्राहकों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?


इन लोगों को सबसे ज्यादा असर महसूस हो सकता है:

Floating Rate Home Loan वाले ग्राहक

Auto Loan Borrowers

Personal Loan लेने वाले ग्राहक

हाल ही में Loan लेने वाले Borrowers

Fixed Rate Loan वाले ग्राहकों पर इसका तत्काल असर नहीं पड़ेगा।






Rajanish Kant मंगलवार, 12 मई 2026
PM मोदी के गोल्ड न खरीदने के अपील के बीच Gold Monetisation Scheme पर नजर: घरेलू Idle Gold को कैसे करें Monetise? | BeYourMoneyManager

 
PM मोदी की गोल्ड खरीदने पर एक साल रोक की अपील के बीच Gold Monetisation Scheme की चर्चा तेज हो गई है। जानिए इस स्कीम से घर में पड़ी सोने की जेवरात, सिक्के या बार को कैसे पैसे में बदलें, ब्याज कमाएं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।

PM मोदी के 'गोल्ड न खरीदें' अपील के बीच Gold Monetisation Scheme वापस चर्चा में: Idle Gold से कमाएं ब्याज और बचाएं विदेशी मुद्रानई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें। इस अपील के साथ ही Gold Monetisation Scheme (GMS) पर फिर से सुर्खियां बटोर रही है। जेवर और गहने उद्योग के संगठन सरकार से इस स्कीम को मजबूत करने और फिर से प्रभावी बनाने की मांग कर रहे हैं।

BeYourMoneyManager पर जानिए इस स्कीम के बारे में विस्तार से – कैसे आप अपने घर में पड़े Idle Gold (बेकार पड़े सोने) को productive बना सकते हैं।


PM मोदी की अपील क्यों?

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में एक कार्यक्रम में कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोने की खरीदारी को एक साल के लिए टाल दें। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में से एक है। हर साल अरबों डॉलर सोने के आयात पर खर्च होते हैं, जो Current Account Deficit (CAD) पर दबाव डालता है।इसी संदर्भ में जेवर उद्योग के संगठनों ने कहा है कि खरीदारी रोकने के बजाय घरेलू सोने को mobilise करना बेहतर विकल्प है। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचती है, बल्कि 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होती।

Gold Monetisation Scheme क्या है?

Gold Monetisation Scheme की शुरुआत 15 सितंबर 2015 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था:देश को सोने के आयात पर निर्भरता कम करना,

घरों और संस्थानों में पड़े सोने को productive उपयोग में लाना,

Depositors को ब्याज देना


स्कीम के तीन मुख्य हिस्से थे:

Short Term Bank Deposit (1-3 साल)

Medium Term Government Deposit (5-7 साल)

Long Term Government Deposit (12-15 साल)


नवंबर 2024 तक कुल 31,164 किलोग्राम सोना इस स्कीम के तहत mobilise किया गया था। हालांकि 2025 में बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण सरकार ने इसे discontinue कर दिया।उद्योग की नई मांग और प्रस्तावAll India Gem and Jewellery Domestic Council (GJC) पहले से ही RBI और वित्त मंत्रालय से स्कीम के overhaul की बात कर रहा था। अब PM मोदी की अपील के बाद यह मुद्दा और प्रासंगिक हो गया है।


प्रस्तावित बदलाव:Digital Gold Ecosystem की तरफ शिफ्ट

Physical gold को dematerialised form (डिजिटल बैलेंस) में बदलना

जेवर, सिक्के या बार को बेचे बिना monetise करने का विकल्प

ब्याज कमाने का मौका

बेहतर पारदर्शिता, सुरक्षा और regulatory compliance

GJC चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि नया मॉडल जेवरों को regulated digital ecosystem से जोड़ेगा, जिससे transparency और trust बढ़ेगा। इससे domestic supply मजबूत होगी और import पर निर्भरता घटेगी।आपके लिए फायदे (व्यक्तिगत निवेशक के नजरिए से)Idle Gold को Income Source बनाएं – घर में पड़ी पुरानी जेवरात बेचने की जरूरत नहीं, उन्हें deposit करके ब्याज कमाएं।

देश की मदद – सोने के आयात कम होंगे तो रुपया मजबूत रहेगा और विदेशी मुद्रा बचेंगी।

Formal Economy में शामिल हों – unregulated gold holdings को banking system में लाना।

टैक्स और सुरक्षा – regulated framework में बेहतर सुरक्षा और संभावित tax benefits।

निष्कर्ष: स्मार्ट मनी मैनेजमेंट का समय:

PM मोदी की अपील सिर्फ त्याग की नहीं, बल्कि स्मार्ट विकल्प चुनने की भी है। Gold Monetisation Scheme का revamp अगर लागू होता है तो यह भारतीयों के लिए golden opportunity साबित हो सकता है – जहां आप अपना सोना रखते हुए भी returns कमा सकें और देश की आर्थिक मजबूती में योगदान दें।

BeYourMoneyManager की सलाह: 

अगर आपके पास सोना है तो बैंक या authorised centre से Gold Monetisation Scheme के नए अपडेट्स की जानकारी लें। निवेश से पहले हमेशा अपनी financial situation, जोखिम सहनशक्ति और latest rules चेक करें।




Rajanish Kant
PPF Maturity के बाद क्या करें? 5 साल एक्सटेंशन या Phased Withdrawal – कौन सा ऑप्शन बेहतर है? | BeYourMoneyManager

PPF अकाउंट मैच्योर होने पर पूरा पैसा निकालें या 5 साल एक्सटेंशन करें? जानिए टैक्स-फ्री ब्याज, निकासी के नियम, 60% vs 50% लिमिट और अपनी जरूरत के हिसाब से सही फैसला कैसे लें।

PPF Maturity के बाद क्या करें? 5 साल एक्सटेंशन या Phased Withdrawal – पूरी गाइड

Public Provident Fund (PPF) भारत के सबसे लोकप्रिय टैक्स-फ्री इन्वेस्टमेंट ऑप्शन्स में से एक है। 15 साल की लॉक-इन पीरियड पूरी होने के बाद कई निवेशक कन्फ्यूज हो जाते हैं कि पूरा पैसा निकाल लें या अकाउंट को जारी रखें। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि PPF मैच्योरिटी पर आपके पास क्या-क्या विकल्प हैं, 5 साल का एक्सटेंशन कब फायदेमंद है और कब Phased Withdrawal बेहतर रहेगा।

PPF मैच्योरिटी के बाद उपलब्ध मुख्य विकल्प

अकाउंट बंद करके पूरा मैच्योरिटी अमाउंट निकालना  

5 साल के ब्लॉक में एक्सटेंशन (With Fresh Contributions) – नई जमा जारी रखना  

5 साल का एक्सटेंशन बिना नई जमा के (Without Contributions) – सिर्फ ब्याज कमाते रहना और जरूरत अनुसार निकासी

नोट: आप जितनी बार चाहें 5-5 साल के ब्लॉक में अकाउंट एक्सटेंड कर सकते हैं। कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

1. PPF Extension With Contributions (नई जमा के साथ)Form-4 (या Form-H) भरकर मैच्योरिटी के 1 साल के अंदर अप्लाई करें।

सालाना ₹1.5 लाख तक जमा कर सकते हैं और Section 80C के तहत टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं (पुरानी टैक्स रिजीम में)।

ब्याज दर वर्तमान में 7.1% प्रति वर्ष (FY 2026-27) टैक्स-फ्री।

निकासी का नियम: हर 5 साल के ब्लॉक की शुरुआत में जितना बैलेंस है, उसका 60% तक 5 साल में निकाल सकते हैं (हर फाइनेंशियल ईयर में 1 बार)।

कब चुनें?  

अगर आप अभी भी लॉन्ग-टर्म सेविंग करना चाहते हैं (रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई आदि)  

टैक्स बचाना चाहते हैं  

पैसों की तुरंत जरूरत नहीं है

2. PPF Extension Without Contributions (बिना नई जमा के)ऑटोमैटिक भी हो जाता है अगर आप Form-4 नहीं भरते।

नई जमा नहीं कर सकते, इसलिए 80C बेनिफिट नहीं मिलेगा।

लेकिन पूरा बैलेंस टैक्स-फ्री 7.1% ब्याज कमाता रहेगा।

निकासी का नियम: हर फाइनेंशियल ईयर में 1 बार निकासी कर सकते हैं। अमाउंट की कोई ऊपरी सीमा नहीं (पूरी राशि भी निकाल सकते हैं)।

कब चुनें?  

जब आपको नियमित आय (steady income) की जरूरत हो लेकिन पूरा पैसा एक साथ नहीं निकालना चाहते  

टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग जारी रखना चाहते हैं

3. Phased Withdrawal (चरणबद्ध निकासी)Phased Withdrawal का मतलब है अकाउंट एक्सटेंड करके जरूरत अनुसार हिस्से-हिस्से में पैसा निकालना। With Contribution वाले एक्सटेंशन में 60% लिमिट लागू होती है।

Without Contribution में ज्यादा लचीलापन मिलता है।

यह ऑप्शन उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें रिटायरमेंट के बाद सप्लीमेंटरी इनकम चाहिए लेकिन पूरा पैसा बैंक में FD में डालकर टैक्स देना नहीं चाहते।

Extension vs Phased Withdrawal – तुलना


एक्सपर्ट्स की सलाह: 

बैलेंस्ड अप्रोच अपनाएं

कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी तरह बाहर निकलना अक्सर अच्छा नहीं होता। PPF में टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग का फायदा इतना बड़ा है कि इसे लंबे समय तक चलाने में समझदारी है।सुझाव:  अगर पैसों की जरूरत नहीं है तो एक्सटेंड करें।  

जरूरत पड़ने पर only as much as required निकालें।  

बाकी राशि को टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग का फायदा लेने दें।

उदाहरण: अगर आपका PPF मैच्योरिटी अमाउंट ₹50 लाख है, तो बिना नई जमा वाले एक्सटेंशन में आप हर साल जरूरत के हिसाब से निकाल सकते हैं और बाकी पर 7.1% ब्याज मिलता रहेगा।

निष्कर्ष: आपका फैसला आपकी जरूरत पर निर्भर करता है

Young या Mid-age और अच्छी इनकम वाले: एक्सटेंशन with contribution चुनें।  

रिटायरमेंट के करीब या नियमित आय चाहिए: Without contribution + Phased Withdrawal।  

तुरंत बड़ी रकम चाहिए (घर, बिजनेस आदि): पूरा निकाल लें।

जरूरी डिस्क्लेमर:

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। PPF नियम समय-समय पर बदल सकते हैं नियमों की पुष्टि अपने बैंक/पोस्ट ऑफिस से करें या प्रमाणित फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।BeYourMoneyManager पर ऐसे ही इन्वेस्टमेंट, टैक्स और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े उपयोगी लेख पढ़ें।आपका क्या प्लान है? कमेंट में बताएं – आप PPF मैच्योरिटी पर एक्सटेंशन करेंगे या निकासी?






Rajanish Kant
पोस्ट ऑफिस TD vs PSU बैंक 5 साल FD: ₹2 लाख निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा Maturity Amount? (2026 अपडेट)

पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (7.5%) और PSU बैंकों की 5 साल FD की तुलना। ₹2 लाख निवेश पर पोस्ट ऑफिस TD से कितना ज्यादा रिटर्न? ब्याज दर, मैच्योरिटी अमाउंट, टैक्स बेनिफिट, प्रीमैच्योर क्लोजर और निवेश का सही चुनाव कैसे करें – विस्तार से पढ़ें।

पोस्ट ऑफिस TD vs PSU बैंक 5 साल FD: ₹2 लाख निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? (2026 तुलना)

निवेशकों के लिए सुरक्षित और निश्चित आय वाले विकल्पों में पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (TD) और PSU बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा लोकप्रिय रहते हैं। अगर आप 5 साल के लिए ₹2 लाख निवेश करने की सोच रहे हैं, तो दोनों विकल्पों के ब्याज दर और मैच्योरिटी अमाउंट में काफी अंतर है।वर्तमान में पोस्ट ऑफिस 5 वर्ष TD सबसे आकर्षक विकल्प साबित हो रहा है।

ब्याज दर और मैच्योरिटी अमाउंट की तुलना (₹2 लाख निवेश पर)






निष्कर्ष: पोस्ट ऑफिस TD से लगभग ₹16,000 से ₹33,000 तक ज्यादा मैच्योरिटी अमाउंट मिल सकता है।पोस्ट ऑफिस TD के मुख्य फायदेसरकारी गारंटी: पूर्ण रूप से भारत सरकार द्वारा गारंटीड (सॉवरेन बैकिंग)।

टैक्स बेनिफिट: 5 वर्ष TD पुरानी टैक्स व्यवस्था में Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक डिडक्शन का लाभ।

क्वार्टरली ब्याज रिव्यू: हर तीन महीने में सरकार द्वारा ब्याज दर की समीक्षा।

उच्च ब्याज दर: वर्तमान में ज्यादातर PSU बैंकों से 1.2% से 2.5% ज्यादा।

PSU बैंक FD के फायदेऑनलाइन सुविधा: मोबाइल ऐप और नेट बैंकिंग से आसानी से FD खोलना और मैनेज करना।

DICGC इंश्योरेंस: ₹5 लाख तक (मूलधन + ब्याज) का बीमा।

प्रीमैच्योर विड्रॉल: जरूरत पड़ने पर आसानी से निकासी (पेनाल्टी के साथ)।

अतिरिक्त सुविधाएं: लोन के रूप में FD के खिलाफ ओवरड्राफ्ट।

महत्वपूर्ण बातें जो ध्यान रखें1. प्रीमैच्योर क्लोजर नियम

पोस्ट ऑफिस 5 वर्ष TD को 4 वर्ष पूरे होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता। 4 वर्ष बाद बंद करने पर पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट का ब्याज मिलता है। जबकि बैंक FD में 7 दिन बाद भी निकासी संभव है (पेनाल्टी लागू)।2. TDS नियम  अगर सालाना ब्याज ₹50,000 से ज्यादा हो तो 10% TDS कटता है।  

PAN न होने पर 20% TDS।  

Form 15G/15H जमा करके TDS बचाया जा सकता है।

3. लिक्विडिटी और सुविधा  बैंक FD: हाई लिक्विडिटी और डिजिटल सुविधा।  

पोस्ट ऑफिस TD: थोड़ी कम लिक्विडिटी, लेकिन ज्यादा सुरक्षा और रिटर्न।

आपको कौन सा विकल्प चुनना चाहिए?अधिक रिटर्न और सुरक्षा चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस TD बेहतर है।

डिजिटल सुविधा, लोन और लिक्विडिटी चाहिए तो PSU बैंक FD चुनें।

दोनों में डाइवर्सिफिकेशन भी कर सकते हैं – कुछ पोस्ट ऑफिस में और कुछ बैंक में।

नोट: ब्याज दरें समय-समय पर बदल सकती हैं। निवेश से पहले आधिकारिक वेबसाइट (indiapost.gov.in) या संबंधित बैंक की वेबसाइट पर ब्याज दरें जरूर चेक करें।

अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।










Rajanish Kant
सोने की कीमतों में उछाल, ईरान-US शांति वार्ता की उम्मीद से मजबूती; भारत के आयात नियम चुनौती, सिल्वर प्रोड्यूसर्स की 2026 में मजबूत उत्पादन की उम्मीद | Heraeus रिपोर्ट

 

सोने के दाम ईरान-US शांति वार्ता की उम्मीद से बढ़े, भारत में आयात कर नियमों से चुनौती बनी हुई। Heraeus के अनुसार 2026 में सिल्वर उत्पादन मजबूत रहेगा। गोल्ड और सिल्वर मार्केट लेटेस्ट अपडेट पढ़ें।

सोने की कीमतों में बढ़ोतरी: ईरान ऑप्टिमिज्म और भारत की आयात चुनौतियां

Kitco News के अनुसार, Heraeus Precious Metals की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतें मध्य पूर्व में ईरान संबंधी सकारात्मक संकेतों के कारण बढ़ रही हैं। अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता और डी-एस्केलेशन की उम्मीद से निवेशकों में सेफ-हेवन डिमांड मजबूत हुई है, जिससे गोल्ड प्राइस को सपोर्ट मिल रहा है।

हालांकि, भारत जैसे बड़े बाजार में आयात संबंधी नई टैक्स नीतियां और नियम सोने-चांदी की सप्लाई चेन पर असर डाल रहे हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, लेकिन आयात पर लगाए गए कर और नियमों ने आयात को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर डॉलर सोने को बल दे रहे हैं। 

सिल्वर मार्केट आउटलुक 2026: 

मजबूत उत्पादन की उम्मीद: Heraeus की रिपोर्ट में सिल्वर प्रोड्यूसर्स के लिए अच्छी खबर है। 2026 में सिल्वर का उत्पादन मजबूत रहने की उम्मीद है। सिल्वर की इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV आदि) में वृद्धि और माइनिंग कंपनियों के बढ़ते उत्पादन के कारण यह सकारात्मक आउटलुक बना हुआ है।सिल्वर की कीमतें भी हाल के दिनों में अच्छी रिकवरी दिखा रही हैं, हालांकि यह गोल्ड की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल रहता है। उच्च कीमतों के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में डिमांड पर दबाव है, खासकर भारत में ज्वेलरी और सिल्वरवेयर सेगमेंट में।


मुख्य पॉइंट्स (Heraeus रिपोर्ट से):ईरान ऑप्टिमिज्म: US-Iran शांति प्रगति की खबरों से गोल्ड को सपोर्ट, लेकिन जोखिम अभी भी बाकी।

भारत प्रभाव: आयात नियमों और टैक्स से सप्लाई प्रभावित, जिससे कीमतों पर मिश्रित असर।

2026 सिल्वर आउटलुक: प्रोड्यूसर्स मजबूत उत्पादन की तैयारी में, इंडस्ट्रियल यूज बढ़ने की संभावना।

समग्र ट्रेंड: प्रीशियस मेटल्स में 2026 की पहली छमाही में कंसोलिडेशन, उसके बाद संभावित नई तेजी।

निवेशकों के लिए सलाह:

वर्तमान में गोल्ड और सिल्वर दोनों ही जियो-पॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंक खरीदारी और इन्फ्लेशन से सपोर्टेड हैं। लेकिन भारत में निवेश करने वाले खरीदारों को लोकल टैक्स नियमों और MCX/स्थानीय कीमतों पर नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि में दोनों धातुएं आकर्षक बनी हुई हैं, खासकर डाइवर्सिफिकेशन के लिए।







Rajanish Kant