टॉप ज्वेलर्स पुराने सोने की एक्सचेंज और गोल्ड मोनेटाइजेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। जानिए कैसे आप अपने घर में पड़े सोने से नया आभूषण बना सकते हैं और देश के आयात पर बोझ कम कर सकते हैं। पूरी डिटेल्स।
पुराने सोने का एक्सचेंज स्कीम: टाइटन, कल्याण और मालाबार ज्वेलर्स का बड़ा प्लान – घरेलू सोना अनलॉक करने का मौका
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का बाजार है, लेकिन लगभग सारा सोना आयात करना पड़ता है। 2025-26 में सोने के आयात ने रिकॉर्ड $71.98 बिलियन का स्तर छू लिया, जो पिछले साल से 24% ज्यादा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने 12 मई 2026 को सोने पर ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी।
इसी बीच देश के टॉप ज्वेलर्स अब घरों में पड़े पुराने सोने (Idle Gold) को अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बड़े कदम उठा रहे हैं।टाइटन, कल्याण और मालाबार का अभियान
Titan Company: पिछले 25 साल से पुराने सोने का एक्सचेंज प्रोग्राम चला रही है। कंपनी के CFO अशोक सोनथालिया के अनुसार, आज टाइटन की 50% सोने की जरूरत पुराने सोने के एक्सचेंज से पूरी होती है।
Kalyan Jewellers: “Nation First – Gold4India Initiative” लॉन्च की। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक सोने के आयात को 5 टन कम करना है। चार सूत्री रणनीति में शामिल हैं:
पुराने सोने का एक्सचेंज
18 कैरेट हल्के आभूषणों को बढ़ावा
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
रिसर्कुलेशन ड्राइव
Malabar Gold & Diamonds: प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में सुधार की सिफारिश की।
भारत में कितना सोना पड़ा है?
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े ऊपर-जमीन (above-ground) सोने के भंडार हैं – घरों, मंदिरों और लॉकरों में। ज्यादातर लोग इसे “रामभरोसे” या भावी जरूरत के लिए रखते हैं। लेकिन ये सोना अर्थव्यवस्था में घूम नहीं रहा है।ज्वेलर्स का कहना है कि अगर इस निष्क्रिय सोने का सिर्फ एक छोटा हिस्सा भी रिसाइकल हो जाए, तो:सोने के आयात में भारी कमी आएगी
विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा
उपभोक्ता को नया आभूषण मिलेगा बिना ज्यादा खर्च के
पुराना सोना एक्सचेंज कैसे काम करता है? (लाभ)
ट्रांसपेरेंट वैल्यूएशन – ज्वेलर्स प्रोफेशनल तरीके से पुराने सोने का वजन और शुद्धता चेक करते हैं।
नए आभूषण – एक्सचेंज वैल्यू पर नया 18K या 22K जेवर बनवा सकते हैं।
कैश आउट – कुछ ज्वेलर्स कैश भी देते हैं (Kalyan के 342 स्टोर्स पर प्लान)।
मेकिंग चार्ज में बचत – पुराने सोने पर अक्सर कम या जीरो मेकिंग चार्ज ऑफर होते हैं।
18 कैरेट जेवलरी – नया ट्रेंड क्यों?
22 कैरेट की जगह 18 कैरेट जेवलरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे:कम सोना लगता है
डिजाइन ज्यादा हल्के और आधुनिक बनते हैं
आयात 20-30% तक कम हो सकता है (GJEPC का अनुमान)
टाइटन ने पहले ही 18K ब्राइडल कलेक्शन लॉन्च कर दिए हैं।
आपके लिए क्या मतलब है? (Money Management Tips)
घर का पुराना सोना चेक करें – लॉकर, अलमारी या बैंक लॉकर में पड़े पुराने जेवर निकालें।
कीमत चेक करें – आजकल सोने की कीमत ऊंची है, एक्सचेंज पर अच्छा रेट मिल सकता है।
18K vs 22K – समझें अंतर और अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें।
टैक्स और स्कीम – गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के फायदे जानें (ब्याज + सुरक्षा)।
BeYourMoneyManager सलाह:
भावनात्मक लगाव के साथ-साथ सोने को productive asset बनाएं। Diversification के तौर पर सोना अच्छा है, लेकिन idle रखना महंगा सौदा हो सकता है।
निष्कर्ष
टॉप ज्वेलर्स का यह अभियान सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में एक कदम है। अगर आप भी अपने पुराने सोने को नई शुरुआत देना चाहते हैं, तो नजदीकी Titan, Kalyan या Malabar स्टोर पर जाएं और एक्सचेंज ऑफर चेक करें।
आपका अनुभव?
कमेंट में बताएं – आपके पास कितना पुराना सोना है और आप एक्सचेंज करने की सोच रहे हैं या नहीं?अस्वीकरण: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश या खरीद-बिक्री से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।
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