
PM मोदी की गोल्ड खरीदने पर एक साल रोक की अपील के बीच Gold Monetisation Scheme की चर्चा तेज हो गई है। जानिए इस स्कीम से घर में पड़ी सोने की जेवरात, सिक्के या बार को कैसे पैसे में बदलें, ब्याज कमाएं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें।
PM मोदी के 'गोल्ड न खरीदें' अपील के बीच Gold Monetisation Scheme वापस चर्चा में: Idle Gold से कमाएं ब्याज और बचाएं विदेशी मुद्रानई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें। इस अपील के साथ ही Gold Monetisation Scheme (GMS) पर फिर से सुर्खियां बटोर रही है। जेवर और गहने उद्योग के संगठन सरकार से इस स्कीम को मजबूत करने और फिर से प्रभावी बनाने की मांग कर रहे हैं।
BeYourMoneyManager पर जानिए इस स्कीम के बारे में विस्तार से – कैसे आप अपने घर में पड़े Idle Gold (बेकार पड़े सोने) को productive बना सकते हैं।
PM मोदी की अपील क्यों?
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में एक कार्यक्रम में कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोने की खरीदारी को एक साल के लिए टाल दें। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातकों में से एक है। हर साल अरबों डॉलर सोने के आयात पर खर्च होते हैं, जो Current Account Deficit (CAD) पर दबाव डालता है।इसी संदर्भ में जेवर उद्योग के संगठनों ने कहा है कि खरीदारी रोकने के बजाय घरेलू सोने को mobilise करना बेहतर विकल्प है। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचती है, बल्कि 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होती।
Gold Monetisation Scheme क्या है?
Gold Monetisation Scheme की शुरुआत 15 सितंबर 2015 को की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य था:देश को सोने के आयात पर निर्भरता कम करना,
घरों और संस्थानों में पड़े सोने को productive उपयोग में लाना,
Depositors को ब्याज देना
स्कीम के तीन मुख्य हिस्से थे:
Short Term Bank Deposit (1-3 साल)
Medium Term Government Deposit (5-7 साल)
Long Term Government Deposit (12-15 साल)
नवंबर 2024 तक कुल 31,164 किलोग्राम सोना इस स्कीम के तहत mobilise किया गया था। हालांकि 2025 में बाजार की बदलती परिस्थितियों के कारण सरकार ने इसे discontinue कर दिया।उद्योग की नई मांग और प्रस्तावAll India Gem and Jewellery Domestic Council (GJC) पहले से ही RBI और वित्त मंत्रालय से स्कीम के overhaul की बात कर रहा था। अब PM मोदी की अपील के बाद यह मुद्दा और प्रासंगिक हो गया है।
प्रस्तावित बदलाव:Digital Gold Ecosystem की तरफ शिफ्ट
Physical gold को dematerialised form (डिजिटल बैलेंस) में बदलना
जेवर, सिक्के या बार को बेचे बिना monetise करने का विकल्प
ब्याज कमाने का मौका
बेहतर पारदर्शिता, सुरक्षा और regulatory compliance
GJC चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि नया मॉडल जेवरों को regulated digital ecosystem से जोड़ेगा, जिससे transparency और trust बढ़ेगा। इससे domestic supply मजबूत होगी और import पर निर्भरता घटेगी।आपके लिए फायदे (व्यक्तिगत निवेशक के नजरिए से)Idle Gold को Income Source बनाएं – घर में पड़ी पुरानी जेवरात बेचने की जरूरत नहीं, उन्हें deposit करके ब्याज कमाएं।
देश की मदद – सोने के आयात कम होंगे तो रुपया मजबूत रहेगा और विदेशी मुद्रा बचेंगी।
Formal Economy में शामिल हों – unregulated gold holdings को banking system में लाना।
टैक्स और सुरक्षा – regulated framework में बेहतर सुरक्षा और संभावित tax benefits।
निष्कर्ष: स्मार्ट मनी मैनेजमेंट का समय:
PM मोदी की अपील सिर्फ त्याग की नहीं, बल्कि स्मार्ट विकल्प चुनने की भी है। Gold Monetisation Scheme का revamp अगर लागू होता है तो यह भारतीयों के लिए golden opportunity साबित हो सकता है – जहां आप अपना सोना रखते हुए भी returns कमा सकें और देश की आर्थिक मजबूती में योगदान दें।
BeYourMoneyManager की सलाह:
अगर आपके पास सोना है तो बैंक या authorised centre से Gold Monetisation Scheme के नए अपडेट्स की जानकारी लें। निवेश से पहले हमेशा अपनी financial situation, जोखिम सहनशक्ति और latest rules चेक करें।
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