('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) जल्द ही एक नया डिजिटल पोर्टल शुरू करने जा रहा है जिसका नाम E-PRAAPTI है — EPF Aadhaar-Based Access Portal for Tracking Inoperative Accounts। इसका उद्देश्य उन सदस्यों को सहायता देना है जिनके पुराने या निष्क्रिय PF (Provident Fund) खाते हैं और जो उनके Universal Account Number (UAN) से लिंक नहीं हैं।
इस E-PRAAPTI पोर्टल के माध्यम से सदस्य अपने पुराने EPF खातों को आधार-आधारित प्रमाणीकरण के जरिए सुरक्षित रूप से एक्सेस कर सकेंगे, अपनी सदस्य प्रोफ़ाइल अपडेट कर सकेंगे और सहज रूप से अपने खातों को UAN से लिंक तथा सक्रिय कर सकेंगे। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके पुराने खाते सक्रिय नहीं हैं या UAN से नहीं जुड़े हैं।
सरकार का कहना है कि नया पोर्टल मैनुअल प्रक्रियाओं को कम करेगा, आवश्यक कागजी कार्रवाई घटाएगा और ईपीएफ खातों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा कार्यक्षमता में सुधार करेगा।
प्रारंभिक चरण में, E-PRAAPTI सदस्य आईडी आधारित प्रणाली पर कार्य करेगा, जिससे उन सदस्यों को तुरंत लाभ मिलेगा जिनके पास उनके पुराने सदस्य आईडी उपलब्ध हैं। भविष्य में इस पोर्टल का दायरा बढ़ाकर उन सदस्यों के लिए भी शामिल किया जाएगा जो अपने पुराने सदस्य ID को याद नहीं रख पाते या एक्सेस नहीं कर पाते।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में EPFO ने रिकॉर्ड 8.31 करोड़ PF दावों (claims) का निपटान किया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 6.01 करोड़ थी। इसका एक बड़ा हिस्सा ऐडवांस या आंशिक निकासी के दावों का है, जो दर्शाता है कि PF सदस्यों को अपनी बचत तक पहुंच और उपयोग में आसानी मिल रही है।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
मार्च 2026 तिमाही में भारत में ऐतिहासिक मोड़: गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात की डिमांड को पीछे छोड़ दिया। World Gold Council रिपोर्ट के मुताबिक इन्वेस्टमेंट 52% बढ़कर 82 टन पहुंच गया। जानिए कारण, आंकड़े और आपके निवेश के लिए क्या मतलब है।
भारत में ऐतिहासिक बदलाव: मार्च 2026 तिमाही में जेवरात को पीछे छोड़ गया गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड-
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जन.-मार्च) में भारत में गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात (Jewellery) डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। यह भारतीय स्वर्ण बाजार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
मार्च 2026 तिमाही के मुख्य आंकड़े:गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड: 82 मीट्रिक टन (पिछले साल से 52% की बढ़ोतरी)
जेवरात डिमांड: 66 मीट्रिक टन (पिछले साल से 19.5% की गिरावट)
कुल गोल्ड डिमांड: 151 मीट्रिक टन (पिछले साल से 10.2% की बढ़ोतरी)
इस तिमाही में कुल खपत का 54.3% हिस्सा इन्वेस्टमेंट डिमांड का रहा, जबकि सामान्य रूप से यह हिस्सा केवल 25% के आसपास रहता है।गोल्ड ETF में भी रिकॉर्ड उछाल देखा गया — इनफ्लो 186% बढ़कर 20 टन पहुंच गया।ऐसा क्यों हुआ?
मुख्य कारण
शेयर बाजार की कमजोर परफॉर्मेंस रहा। इस अवधि में Nifty 50 ने सिर्फ 2.4% रिटर्न दिया, जबकि घरेलू गोल्ड की कीमतें 2025 की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो गईं।उच्च स्वर्ण मूल्यों ने जेवरात खरीददारों को रोका, जबकि निवेशक बार, कॉइन और गोल्ड ETF जैसी शुद्ध निवेश उत्पादों की ओर आकर्षित हुए।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के CEO सचिन जैन ने कहा:
“पहली बार इन्वेस्टमेंट डिमांड ने जेवरात डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। आने वाली तिमाहियों में इन्वेस्टमेंट डिमांड और अधिक प्रमुख भूमिका निभाएगी, क्योंकि वित्तीय और रिटेल निवेशक दोनों गोल्ड में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।”
आपके पोर्टफोलियो के लिए क्या मतलब है?यह बदलाव साफ संकेत देता है कि भारतीय निवेशक अब गोल्ड को केवल शादी-ब्याह या जेवर के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत एसेट क्लास के रूप में देख रहे हैं।Diversification की जरूरत बढ़ गई है।
इक्विटी बाजार में अनिश्चितता और महंगाई के माहौल में गोल्ड अच्छा हेज साबित हो रहा है।
Sovereign Gold Bonds (SGB), Gold ETF, Gold Funds और फिजिकल गोल्ड (बार/कॉइन) के बीच सही चयन अब और महत्वपूर्ण हो गया है।
निष्कर्ष:
मार्च 2026 तिमाही का यह डेटा दर्शाता है कि भारत में गोल्ड निवेश की दिशा तेजी से बदल रही है। आने वाले समय में इन्वेस्टमेंट डिमांड और मजबूत होने की संभावना है।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल रिपोर्टवर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) ने अपनी ताजा Gold Demand Trends Q1 2026 रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की औसत कीमत रिकॉर्ड स्तर $4,873 प्रति औंस पर पहुंचने के बावजूद वैश्विक सोने की कुल मांग में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
Q1 2026 में कुल सोने की मांग (OTC सहित) 1,231 टन रही, जो पिछले साल की समान तिमाही से 2% ज्यादा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊंची कीमतों के कारण मांग का कुल मूल्य (Value) रिकॉर्ड $193 बिलियन तक पहुंच गया, जो साल-दर-साल 74% की भारी बढ़ोतरी दर्शाता है।
बार और कॉइन निवेश में जोरदार उछाल: बार और कॉइन (Bar & Coin) निवेश में सबसे बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। यह 474 टन रहा, जो पिछले साल से 42% ज्यादा है। यह दूसरी सबसे ऊंची तिमाही स्तर है।
एशियाई निवेशकों ने इस बढ़ोतरी में अहम भूमिका निभाई। वे भौतिक सोने (Physical Gold) की तरफ ज्यादा आकर्षित हुए।
ETF और सेंट्रल बैंक की खरीदारी: गोल्ड-बैक्ड ETF में 62 टन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि यह पिछले साल की तिमाही (230 टन) से काफी कम है, क्योंकि मार्च में अमेरिकी फंड्स से आउटफ्लो देखा गया।
सेंट्रल बैंक ने नेट 244 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल से 3% ज्यादा है। कुछ बिकवाली के बावजूद खरीदारी मजबूत बनी रही।
ज्वेलरी डिमांड पर असर: ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की मात्रा (Volume) में 23% की गिरावट आई। लेकिन कुल खर्च (Spending) 31% बढ़ गया, क्योंकि लोग महंगे सोने पर भी खरीदारी करते रहे।
अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े: टेक्नोलॉजी सेक्टर में सोने की मांग 82 टन रही, जो 1% बढ़ी। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल बढ़ा।
कुल सप्लाई भी 2% बढ़कर 1,231 टन हो गई, जिसमें माइन प्रोडक्शन और रिसाइक्लिंग दोनों में वृद्धि देखी गई।
Q1 में सोने की कीमत ने $5,405 प्रति औंस तक का उच्च स्तर छुआ।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
रिपोर्ट साफ दिखाती है कि रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद निवेशक सोने को सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) मानकर खरीद रहे हैं। खासकर एशिया में बार-कॉइन की डिमांड मजबूत रही, जबकि ETF फ्लो थोड़ा धीमा पड़ा।
निष्कर्ष:
2026 में भी जियो-पॉलिटिकल तनाव, मुद्रास्फीति और अनिश्चितता सोने की मांग को सपोर्ट करती रहेगी। सेंट्रल बैंक की खरीदारी और भौतिक निवेश जारी रहने की उम्मीद है, हालांकि ज्वेलरी की मात्रा पर दबाव बना रह सकता है।
निवेश सलाह: सोना पोर्टफोलियो का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन हमेशा अपनी रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल्स के अनुसार फैसला लें। ज्यादा जानकारी के लिए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की आधिकारिक रिपोर्ट पढ़ें।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
चांदी की कीमतों में भारी गिरावट: 2026 के सभी लाभ मिटे, अब क्या करें निवेशक?
चांदी (Silver) ने 2026 की शुरुआत में जबरदस्त रैली दिखाई थी, लेकिन अब यह पूरी तेजी गंवा चुकी है। जनवरी 2026 में MCX पर मई सिल्वर फ्यूचर्स Rs 4.39 लाख प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई स्तर को छूने के बाद अब कीमतें Rs 2.38 लाख से Rs 2.40 लाख प्रति किलो के आसपास आ गई हैं।
मात्र तीन महीनों में चांदी के भाव Rs 2,00,554 प्रति किलो (लगभग 46%) गिर चुके हैं। इससे 2026 के सभी लाभ पूरी तरह मिट गए हैं और कीमतें अब 2025 के क्लोजिंग लेवल से भी नीचे आ गई हैं।
क्यों आई इतनी तेज गिरावट?
इस भारी सुधार के तीन मुख्य कारण हैं:
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) संकट और रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट: आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव में सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं। लेकिन इस बार क्रूड ऑयल की तेजी और युद्ध की आशंकाओं के बावजूद निवेशकों ने leveraged पोजीशन घटाई और कैश जुटाने के लिए प्रीशियस मेटल्स बेचे।
मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेड की हॉकिश नीति: चांदी डॉलर में Trade होती है। डॉलर की मजबूती से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए यह महंगी हो गई, जिससे निवेश और भौतिक मांग दोनों घटी।
अत्यधिक रैली के बाद प्रॉफिट बुकिंग: लंबे समय तक चली तेजी के बाद ट्रेडर्स ने मुनाफा वसूली कर ली। बढ़ती volatility में सुरक्षित निवेश की बजाय बिकवाली का दबाव बना।
लंबी अवधि में चांदी की मजबूत बुनियाद बरकरार
इस गिरावट के बावजूद चांदी की संरचनात्मक मजबूती बनी हुई है:औद्योगिक मांग कुल खपत का 60% से ज्यादा है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सेक्टर्स में मांग लगातार बढ़ रही है।
चांदी पिछले पांच साल से सप्लाई डेफिसिट में है और अब छठे साल भी यह कमी बनी रहेगी।
शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर इन्वेंटरी दशक के निचले स्तर पर है और निर्यात प्रतिबंध भी सप्लाई पर दबाव डाल रहे हैं।
चीन से निवेश मांग भी स्थिर बनी हुई है।
इन कारणों से मीडियम टू लॉन्ग टर्म में चांदी पर सकारात्मक नजरिया बना हुआ है।
विशेषज्ञों की सलाह: क्या अब खरीदें चांदी?
टाटा म्यूचुअल फंड का कहना है — “डॉलर की रैली या तनाव में कमी पर आने वाली गिरावट चांदी जमा करने का अच्छा मौका है। तेज रैली के बाद सुधार स्वाभाविक है, लेकिन लंबी अवधि का बुलिश आउटलुक बरकरार है।”
Ponmudi R, CEO, Enrich Money सलाह देते हैं कि आक्रामक तरीके से न खरीदें। इसके बजाय स्टैगर्ड (चरणबद्ध) तरीके से मजबूत सपोर्ट लेवल के पास खरीदारी करें और मीडियम से लॉन्ग टर्म होराइजन रखें।
तकनीकी नजरिया: MCX सिल्वर वर्तमान में ₹ 2,45,200 क्षेत्र के आसपास ट्रेड कर रहा है। ₹ 2,46,000 के ऊपर टिके रहने पर ₹ 2,47,000–₹2,48,000 तक रिकवरी संभव है।
निष्कर्ष: सावधानी से खरीदने का समय
2026 में चांदी की भारी गिरावट ने कई निवेशकों को चौंका दिया है, लेकिन यह औद्योगिक मांग और सप्लाई शॉर्टेज वाली मजबूत बुनियाद पर खरीदारी का अवसर भी पैदा कर सकती है।
सुझाव: एकमुश्त निवेश की बजाय SIP जैसी चरणबद्ध खरीदारी करें।
लंबी अवधि (1-3 साल या अधिक) का नजरिया रखें।
जोखिम प्रबंधन के साथ पोर्टफोलियो का केवल उचित हिस्सा ही चांदी/सिल्वर में रखें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचना और शिक्षा के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। बाजार जोखिमपूर्ण है और पिछले प्रदर्शन भविष्य के परिणाम की गारंटी नहीं देते।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
नए टैक्स नियम 2026 में PAN अनिवार्य ट्रांजेक्शन की पूरी लिस्ट। मोटर वाहन, डिमैट, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और गोल्ड खरीद पर Form 97 नहीं चलेगा। पूरी डिटेल पढ़ें।
PAN अब अनिवार्य:
1 अप्रैल 2026 से कई हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में Form 97 भी स्वीकार नहीं होगानई इनकम टैक्स नियम (Income Tax Rules, 2026) के तहत 1 अप्रैल 2026 से कई महत्वपूर्ण वित्तीय ट्रांजेक्शन में PAN कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। पुरानी व्यवस्था में जिन लोगों के पास PAN नहीं होता था, वे Form 60 देकर काम चला लेते थे। अब Form 60 को Form 97 से बदल दिया गया है, लेकिन Form 97 का इस्तेमाल बहुत सीमित हो गया है।कई हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन में अब Form 97 भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। मतलब – PAN के बिना खरीदारी या ट्रांजेक्शन संभव नहीं होगा।किन ट्रांजेक्शन में PAN अनिवार्य है (Form 97 नहीं चलेगा)?
चार्टर्ड अकाउंटेंट के अनुसार, निम्नलिखित ट्रांजेक्शन में अब PAN देना जरूरी है:
मोटर वाहन की खरीदारी – ₹5 लाख से ज्यादा कीमत वाली गाड़ी (कार, बाइक आदि)
क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन
डिमैट अकाउंट खोलना
म्यूचुअल फंड, डिबेंचर, बॉन्ड (RBI बॉन्ड सहित) में ₹50,000 से ज्यादा का निवेश
कैश डिपॉजिट या विड्रॉल – वित्तीय वर्ष में कुल ₹10 लाख से ज्यादा
सिक्योरिटीज (शेयर, बॉन्ड आदि) की खरीद-बिक्री – ₹1 लाख से ज्यादा प्रति ट्रांजेक्शन
अनलिस्टेड शेयर की खरीद-बिक्री – ₹1 लाख से ज्यादा
इन ट्रांजेक्शन में पुरानी व्यवस्था के मुताबिक Form 97 जमा करने का विकल्प अब नहीं रहेगा। आपको PAN बनवाना ही पड़ेगा।अन्य महत्वपूर्ण ट्रांजेक्शन जहां PAN की जरूरत पड़ सकती है
सोने की ज्वेलरी या अन्य सामान/सर्विस की खरीदारी – एक ट्रांजेक्शन में ₹2 लाख से ज्यादा
अचल संपत्ति (प्रॉपर्टी) – ₹20 लाख से ₹45 लाख के बीच कुछ मामलों में Form 97 का इस्तेमाल संभव, लेकिन ₹45 लाख से ऊपर PAN अनिवार्य
विदेशी मुद्रा खरीद, बैंक ड्राफ्ट/पे ऑर्डर आदि कुछ ट्रांजेक्शन में भी नियम सख्त हुए हैं
क्यों बदले नियम?
(सरकार का मकसद)सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 और नए नियम 2026 के तहत Form 60 को Form 97 और Form 61 को Form 98 से बदल दिया है। नया फॉर्म सरल भाषा, प्री-फिल्ड फॉर्मेट और टेक-ड्रिवन प्रोसेस पर आधारित है। इस बदलाव से Form 97 की फाइलिंग में लगभग 80-85% की कमी आने की उम्मीद है (पहले सालाना करीब 12.5 करोड़ फॉर्म फाइल होते थे)। सरकार का लक्ष्य है अनावश्यक रिपोर्टिंग कम करना और PAN आधारित कंप्लायंस बढ़ाना।
आपके लिए सलाह (Money Management Tip)
PAN तुरंत बनवा लें — अगर आपके पास PAN नहीं है तो ASAP आवेदन करें। आधार से लिंक भी जरूर कर लें।
बड़ी खरीदारी प्लान कर रहे हैं — गाड़ी, प्रॉपर्टी, गोल्ड, म्यूचुअल फंड या डिमैट अकाउंट खोलने से पहले PAN तैयार रखें।
कैश ट्रांजेक्शन — वित्तीय वर्ष में कुल कैश डिपॉजिट/विड्रॉल ₹10 लाख के करीब पहुंच रहा है तो सतर्क रहें।
टैक्स प्लानिंग — ऐसे ट्रांजेक्शन करते समय अपनी इनकम सोर्स और टैक्स रिटर्न की तैयारी भी साथ रखें।
नोट: ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं (या लागू होने वाले हैं)। हमेशा最新 अधिसूचना और Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट चेक करें क्योंकि थ्रेशोल्ड में मामूली बदलाव हो सकते हैं।PAN न होने पर ट्रांजेक्शन रुक सकता है और अनावश्यक परेशानी हो सकती है। इसलिए आज ही PAN बनवाएं और अपने वित्तीय ट्रांजेक्शन को सुचारू रखें।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
सोना अभी भी अगले 12 महीनों में $5,500 प्रति औंस तक का रास्ता बना रहा है: Amundi के Portelli
नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 – वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें अभी भी एक व्यापक साइडवेज चैनल में फंसी हुई हैं, लेकिन Amundi के सीनियर विशेषज्ञ Portelli का मानना है कि सोने को $5,500 प्रति औंस तक जाने का मजबूत रास्ता अभी भी खुला हुआ है।
Kitco News के साथ हालिया चर्चा में Portelli ने कहा कि अल्पावधि में मुद्रास्फीति की आशंकाएँ सोने पर कुछ दबाव डाल रही हैं, लेकिन लंबी अवधि के स्ट्रक्चरल फैक्टर्स सोने को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाले हैं।
सोने की तेजी के मुख्य कारण क्या हैं?
Amundi के विश्लेषण के अनुसार, सोने की माँग को कई मजबूत कारक सपोर्ट कर रहे हैं:
सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी: कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। यह ट्रेंड पिछले कई वर्षों से जारी है और 2026 में भी जारी रहने की उम्मीद है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ: विश्व स्तर पर बढ़ते तनाव, युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता सोने को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में आकर्षक बना रहे हैं।
डॉलर की कमजोरी और ब्याज दरों का आउटलुक: अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें घटाता है, तो सोने की कीमतों को और बढ़ोतरी मिल सकती है।
निवेशकों का डाइवर्सिफिकेशन: संस्थागत और रिटेल निवेशक पोर्टफोलियो में सोने का वेटेज बढ़ा रहे हैं, क्योंकि अन्य एसेट क्लासेस में जोखिम बढ़ रहा है।
Portelli ने जोर दिया कि सोना अभी भी साइडवेज मूवमेंट में है, लेकिन जब सही ट्रिगर्स सक्रिय होंगे, तो यह तेजी से ऊपर की ओर ब्रेकआउट कर सकता है। उनका अनुमान है कि अगले 12 महीनों (अप्रैल 2027 तक) में $5,500 प्रति औंस का स्तर हासिल किया जा सकता है।
वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026)अभी सोने की स्पॉट कीमत लगभग $4,700 - $4,750 प्रति औंस के आसपास है। यानी अगर Portelli का अनुमान सही साबित होता है, तो आने वाले एक साल में लगभग 15-17% की बढ़ोतरी की संभावना है।अन्य प्रमुख बैंक भी काफी bullish हैं:JP Morgan ने 2026 के अंत तक लगभग $5,000 प्रति औंस का टारगेट दिया है।
Goldman Sachs ने $5,400 तक का अनुमान लगाया है।
कुछ विशेषज्ञ $6,000 तक की भी बात कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या मतलब है?beyourmoneymanager.com की सलाह:
लंबी अवधि का नजरिया रखें — सोना पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा होना चाहिए ताकि diversification मिले।
डिप पर खरीदारी — अगर कीमतें $4,500-$4,600 के सपोर्ट लेवल पर आती हैं, तो अच्छा एंट्री पॉइंट हो सकता है।
फिजिकल गोल्ड, ETF या Sovereign Gold Bonds — भारत में निवेशकों के लिए SGB और गोल्ड ETF टैक्स और स्टोरेज के लिहाज से बेहतर विकल्प हैं।
रिस्क मैनेजमेंट — शॉर्ट टर्म वोलेटिलिटी रहने वाली है, इसलिए लंपसम इन्वेस्टमेंट की बजाय SIP स्टाइल में गोल्ड ETF में निवेश करें।
निष्कर्ष
Amundi के Portelli का आउटलुक सोने के स्ट्रक्चरल बुल केस को मजबूत करता है। मुद्रास्फीति, सेंट्रल बैंक डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क मिलकर सोने को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं। हालांकि, बाजार हमेशा अनिश्चित रहता है, इसलिए कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
![]() |
| Ctsy: Skymate |
देश के कई हिस्सों में तापमान 45–47°C तक पहुंचा, लू का प्रकोप जारी
शुष्क मौसम के कारण उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में गर्मी तेजी से बढ़ी
27–28 अप्रैल से प्री-मानसून बारिश, आंधी और धूल भरी हवाओं की शुरुआत
बारिश से तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में गर्मी बनी रह सकती है
देश के कई हिस्से इस समय भीषण लू की चपेट में हैं। अप्रैल के पहले दस दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में प्री-मानसून बारिश और आँधी-तूफान की अच्छी गतिविधियाँ देखने को मिली थीं। इसके बाद मौसम मुख्यतः शुष्क हो गया, केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज-चमक हुई। इस सूखे दौर के कारण तापमान तेजी से बढ़ गया।
तेज गर्मी और सूखे मौसम से बढ़ा तापमान
पिछले 24 घंटों में कई शहरों में तापमान बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। अकोला सबसे गर्म रहा, जहां पारा 46.9°C दर्ज हुआ। इसके बाद अमरावती में 46.8°C और बांदा में 46.6°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। बाड़मेर और वर्धा में 46.4°C दर्ज हुआ, जबकि जैसलमेर और यवतमाल में 46°C दर्ज हुआ। प्रयागराज में 45.7°C, नागपुर में 45.4°C, आदिलाबाद में 45.3°C और चित्तौड़गढ़, कोटा व नंदुरबार में 45.2°C तापमान रहा। खजुराहो में पारा 45°C तक पहुंच गया।
27 अप्रैल से बदलेगा मौसम, पहले बढ़ेगी गर्मी
अब मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। 27 अप्रैल की शाम से राजस्थान के कुछ हिस्सों, दक्षिण उत्तर प्रदेश, उत्तर मध्य प्रदेश और हरियाणा में प्री-मानसून बारिश, धूल भरी आँधी और गरज-चमक की गतिविधियाँ शुरू हो सकती हैं। हालांकि, बारिश शुरू होने से पहले तापमान में और बढ़ोतरी संभव है। 28 अप्रैल से देश के कई हिस्सों में बारिश और आँधी-तूफान की गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में व्यापक बारिश हो सकती है। यह मौसम गतिविधियाँ तापमान में गिरावट लाकर लोगों को गर्मी से राहत देंगी।
29 अप्रैल से दक्षिण भारत में भी बारिश
29 अप्रैल तक बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ दक्षिण भारत तक फैलने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, आंतरिक तमिलनाडु और केरल में बारिश हो सकती है, जिससे इन क्षेत्रों को भी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, 30 अप्रैल से पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियाँ कम हो सकती हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में 2 मई तक प्री-मानसून बारिश जारी रहने की संभावना है। वहीं गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा और राजस्थान के दक्षिणी जिलों में मौसम शुष्क और गर्म बना रह सकता है।
मई आमतौर पर साल का सबसे गर्म महीना होता है, इसलिए कई हिस्सों में लू का असर जारी रह सकता है। हालांकि, बार-बार आने वाले प्री-मानसून तूफान अस्थायी राहत देंगे और लंबे समय तक तापमान को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकेंगे।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!
मार्च 2026 में चीन के चांदी आयात में 78% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। जानें इसके पीछे निवेशकों की मांग, सोलर इंडस्ट्री और वैश्विक बाजार पर असर।
📊 चीन में चांदी की रिकॉर्ड मांग: निवेश और सोलर सेक्टर ने बढ़ाया आयात
यह आंकड़ा पिछले 10 वर्षों के औसत से करीब 173% अधिक है, जो दर्शाता है कि चीन में चांदी की मांग अचानक बेहद तेज़ हो गई है।
सोना महंगा होने के कारण लोग चांदी को सस्ता विकल्प मान रहे हैं
छोटे सिल्वर बार्स की खरीद में भारी बढ़ोतरी देखी गई
यह ट्रेंड बताता है कि अनिश्चित आर्थिक माहौल में निवेशक सुरक्षित और सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं।
सोलर पैनल बनाने में चांदी का महत्वपूर्ण उपयोग होता है
वैश्विक स्तर पर लगभग 20% चांदी का उपयोग सोलर सेक्टर में होता है
चीन के निर्माता 1 अप्रैल 2026 से पहले टैक्स रिबेट खत्म होने के कारण तेजी से उत्पादन बढ़ा रहे थे, जिससे चांदी की मांग अचानक बढ़ गई।
घरेलू बाजार में कीमतें वैश्विक कीमतों से ऊपर चली गईं
इससे अंतरराष्ट्रीय ट्रेडर्स ने चीन में चांदी भेजना शुरू किया
यह संकेत देता है कि चीन में सप्लाई की कमी और मांग का अंतर तेजी से बढ़ रहा है।
यह उछाल आंशिक रूप से अस्थायी हो सकता है (टैक्स बदलाव के कारण)
लेकिन लंबी अवधि में मांग मजबूत रहने की संभावना है
2026 में सिल्वर मार्केट लगातार छठे साल भी घाटे (deficit) में रह सकता है
इसका मतलब है कि सप्लाई कम और मांग ज्यादा रहने से कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
ग्लोबल सिल्वर सप्लाई पर दबाव
कीमतों में अस्थिरता (volatility)
अन्य देशों से चीन की ओर धातु का प्रवाह
चीन पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है, इसलिए उसकी मांग वैश्विक कीमतों को प्रभावित करती है।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!