भारतीय अब सोने के जेवरात को नहीं सोने में निवेश को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, WGC के हैरान करने वाले आंकड़े

 

मार्च 2026 तिमाही में भारत में ऐतिहासिक मोड़: गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात की डिमांड को पीछे छोड़ दिया। World Gold Council रिपोर्ट के मुताबिक इन्वेस्टमेंट 52% बढ़कर 82 टन पहुंच गया। जानिए कारण, आंकड़े और आपके निवेश के लिए क्या मतलब है।

भारत में ऐतिहासिक बदलाव: मार्च 2026 तिमाही में जेवरात को पीछे छोड़ गया गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड-

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जन.-मार्च) में भारत में गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड ने पहली बार जेवरात (Jewellery) डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। यह भारतीय स्वर्ण बाजार में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

मार्च 2026 तिमाही के मुख्य आंकड़े:गोल्ड इन्वेस्टमेंट डिमांड: 82 मीट्रिक टन (पिछले साल से 52% की बढ़ोतरी)

जेवरात डिमांड: 66 मीट्रिक टन (पिछले साल से 19.5% की गिरावट)

कुल गोल्ड डिमांड: 151 मीट्रिक टन (पिछले साल से 10.2% की बढ़ोतरी)

इस तिमाही में कुल खपत का 54.3% हिस्सा इन्वेस्टमेंट डिमांड का रहा, जबकि सामान्य रूप से यह हिस्सा केवल 25% के आसपास रहता है।गोल्ड ETF में भी रिकॉर्ड उछाल देखा गया — इनफ्लो 186% बढ़कर 20 टन पहुंच गया।ऐसा क्यों हुआ?

मुख्य कारण 

शेयर बाजार की कमजोर परफॉर्मेंस रहा। इस अवधि में Nifty 50 ने सिर्फ 2.4% रिटर्न दिया, जबकि घरेलू गोल्ड की कीमतें 2025 की शुरुआत से लगभग दोगुनी हो गईं।उच्च स्वर्ण मूल्यों ने जेवरात खरीददारों को रोका, जबकि निवेशक बार, कॉइन और गोल्ड ETF जैसी शुद्ध निवेश उत्पादों की ओर आकर्षित हुए।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल इंडिया के CEO सचिन जैन ने कहा:

“पहली बार इन्वेस्टमेंट डिमांड ने जेवरात डिमांड को पीछे छोड़ दिया है। आने वाली तिमाहियों में इन्वेस्टमेंट डिमांड और अधिक प्रमुख भूमिका निभाएगी, क्योंकि वित्तीय और रिटेल निवेशक दोनों गोल्ड में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।”

आपके पोर्टफोलियो के लिए क्या मतलब है?यह बदलाव साफ संकेत देता है कि भारतीय निवेशक अब गोल्ड को केवल शादी-ब्याह या जेवर के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत एसेट क्लास के रूप में देख रहे हैं।Diversification की जरूरत बढ़ गई है।

इक्विटी बाजार में अनिश्चितता और महंगाई के माहौल में गोल्ड अच्छा हेज साबित हो रहा है।

Sovereign Gold Bonds (SGB), Gold ETF, Gold Funds और फिजिकल गोल्ड (बार/कॉइन) के बीच सही चयन अब और महत्वपूर्ण हो गया है।

निष्कर्ष:

मार्च 2026 तिमाही का यह डेटा दर्शाता है कि भारत में गोल्ड निवेश की दिशा तेजी से बदल रही है। आने वाले समय में इन्वेस्टमेंट डिमांड और मजबूत होने की संभावना है।


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