देश पर विदेशी कर्ज इस साल सितंबर तिमाही में जून तिमाही के मुकाबले घटा है जबकि मार्च तिमाही के
मुकाबले बढ़ा है। मार्च तिमाही के मुकाबले इसमें 1.7% ($8 अरब) की बढ़ोतरी हुई है।
वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सितंबर तिमाही में देश पर 483.2 अरब अमेरिकी डॉलर विदेशी कर्ज था जो कि जून तिमाही के मुकाबले 291 लाख अमेरिकी डॉलर कम है। सितंबर तिमाही 2015 के अंत में भारत के विदेशी कर्ज में मुख्य रूप से अनिवासी भारतीयों की जमाराशियों और वाणिज्यिक उधारों में बढ़ोतरी के कारण बढ़त देखी गई।
सितंबर तिमाही 2015 के अंत में भारत के बाह्य ऋण से संबंधित खास बातें:
-भारत का बाह्य ऋण सितंबर तिमाही 2015 के अंत में 483.2 अरब अमरीकी डॉलर था।
-कुल बाहरी कर्ज में लंबी अवधि के कर्ज की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 82.2% थी, जबकि बाकी बाहरी
कर्ज दीर्घावधि ऋण था।
-भारत का फॉरेक्स रिजर्व सितंबर तिमाही के कुल कर्ज के 72.5% को पूरा करने के लिए काफी है,
मार्च तिमाही में 71.9% पूरा करने के लिए काफी था।
-अमरीकी डॉलर मूल्यवर्गांकित ऋण भारत के विदेशी ऋण का सबसे बड़ा घटक रहा जिसकी सितंबर
तिमाही 2015 में 57.7% हिस्सेदारी रही। इसके बाद भारतीय रुपया (28.3%), एसडीआर (5.8 %),
जापानी येन (4.0%) और यूरो (2.4 %) की हिस्सेदारी रही।
विस्तार से जानने के लिए इस लिंक पर जाएं
((http://www.finmin.nic.in/press_room/2015/India-extdebt-sept15.pdf
((देश पर विदेशी कर्ज जून तिमाही में 6.6% (YoY) बढ़ा
GDP में विदेशी कर्ज का हिस्सा बढ़कर 24% हुआ
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2015/10/66-yoy.html
((भारत पर बाहरी कर्ज इस साल मार्च अंत तक 6.6% बढ़ा
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2015/08/66.html
मुकाबले बढ़ा है। मार्च तिमाही के मुकाबले इसमें 1.7% ($8 अरब) की बढ़ोतरी हुई है।
वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सितंबर तिमाही में देश पर 483.2 अरब अमेरिकी डॉलर विदेशी कर्ज था जो कि जून तिमाही के मुकाबले 291 लाख अमेरिकी डॉलर कम है। सितंबर तिमाही 2015 के अंत में भारत के विदेशी कर्ज में मुख्य रूप से अनिवासी भारतीयों की जमाराशियों और वाणिज्यिक उधारों में बढ़ोतरी के कारण बढ़त देखी गई।
सितंबर तिमाही 2015 के अंत में भारत के बाह्य ऋण से संबंधित खास बातें:
-भारत का बाह्य ऋण सितंबर तिमाही 2015 के अंत में 483.2 अरब अमरीकी डॉलर था।
-कुल बाहरी कर्ज में लंबी अवधि के कर्ज की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 82.2% थी, जबकि बाकी बाहरी
कर्ज दीर्घावधि ऋण था।
-भारत का फॉरेक्स रिजर्व सितंबर तिमाही के कुल कर्ज के 72.5% को पूरा करने के लिए काफी है,
मार्च तिमाही में 71.9% पूरा करने के लिए काफी था।
-अमरीकी डॉलर मूल्यवर्गांकित ऋण भारत के विदेशी ऋण का सबसे बड़ा घटक रहा जिसकी सितंबर
तिमाही 2015 में 57.7% हिस्सेदारी रही। इसके बाद भारतीय रुपया (28.3%), एसडीआर (5.8 %),
जापानी येन (4.0%) और यूरो (2.4 %) की हिस्सेदारी रही।
विस्तार से जानने के लिए इस लिंक पर जाएं
((http://www.finmin.nic.in/press_room/2015/India-extdebt-sept15.pdf
((देश पर विदेशी कर्ज जून तिमाही में 6.6% (YoY) बढ़ा
GDP में विदेशी कर्ज का हिस्सा बढ़कर 24% हुआ
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2015/10/66-yoy.html
((भारत पर बाहरी कर्ज इस साल मार्च अंत तक 6.6% बढ़ा
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2015/08/66.html

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