भारत नयी पीढ़ी की 5जी वायरलेस तकनीक की प्रतिस्पर्धा में शामिल
भारत 5जी इकोसिस्टम प्रतिस्पर्धा में शामिल, 5जी इंडिया 2020 के लिये उच्चस्तरीय फोरम का गठन
भारत नयी पीढ़ी की 5जी वायरलेस तकनीक के संधि स्थल पर है। 5जी तकनीक को एक नेटवर्क आधारित समाज की संभावनाओं के विस्तार की आधारशिला के तौर पर विकसित किया गया है। लगभग प्रत्येक उद्योग में कनेक्टिविटी की शक्ति पर आधारित एक डिजिटल रूपान्तरण हो रहा है। बड़े पैमाने पर स्मार्ट वस्तुओं के आपस में जुड़ने के लिये भू-परिदृश्य का विस्तार हो रहा है। इसलिये जिस तरह से भविष्य के नेटवर्क उस समय के व्यापारिक परिदृश्य और बदलती हुई मांगों से निपटेंगे वह आज के तौर-तरीकों से पूरी तरह से अलग होगा।
5जी तकनीक के आर्थिक लाभ भी काफी ज्यादा हैं। ओईसीडी की डिजिटल आर्थिक मामलों की समिति के अनुसार 5जी तकनीक सेवाओं का आरंभ निम्न क्षेत्रों में सहायक साबित होगा -
  1. a) अर्थव्यवस्था की वृद्धि
  2. b) रोजगार सृजन
  3. c) अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण
भारत के लिये 5जी तकनीक उद्योग जगत को बड़े बाजार की किफायत के जरिये विश्व मार्केट और उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिये एक अवसर उपलब्ध कराती है।  विश्व के अन्य देशों ने भी ऐसे फोरम शुरू कर दिये हैं इसलिये भारत भी 5जी की प्रतिस्पर्धा में शामिल हो गया है। हम उनसे सहयोग के लिये तैयार हैं।
सरकार ने 5जी इंडिया 2020 फोरम के लिये तीन मंत्रालयों/विभागों - दूरसंचार विभाग, एमईआईटीवाई एवं डीएसटी के सचिवों को मिलाकर उच्च स्तरीय फोरम का गठन किया है जिसमें अन्य प्रख्यात विशेषज्ञ जैसे यूएसए के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमरेटस डॉ. ऐ. पौलराज, यूएसए के सैण्डस्टोन स्थित साइकामोर नेटवर्क्स के चेयरमैन श्री गुरुराज देशपाण्डे, भारत के आईसीटी उद्योग के सीईओज, टीएसडीएसआई, आईआईटी मद्रास, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसरों के साथ आईटी उद्योग और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
इस उच्च स्तरीय फोरम का कार्यक्षेत्र निम्नवत रहेगा -
  1. a) 5जी इंडिया 2020 के लिये ध्येय और उद्देश्यों का निर्धारण, एवं
  2. b) 5जी इंडिया 2020 के लिये रोडमैप और कार्ययोजना का मूल्यांकन और अनुमति प्रदान करना।
इस फोरम के मुख्य लक्ष्य इस प्रकार से हैं -
  • भारत में 5जी का त्वरित विकास
  • अगले 5-7 वर्षों में भारत का 50% और विश्व का 10% बाजार हासिल करने के लिये विश्वस्तरीय उत्पादों के विकास एवं निर्माण के लिये पर्यावरण तंत्र तैयार करना।
यह फोरम निम्न क्षेत्रों पर ध्यान देकर इको-सिस्टम को सहयोग प्रदान करेगी -
  • रिसर्च इको-सिस्टम - शोध एवं पीपीपी परियोजनाओं के जरिये आईपीआर एवं मानकों का विकास एवं पायलट रोल-आउट।
  • नियामक ढांचा - स्पेक्ट्रम के आवंटन और स्टार्ट-अप के लिये मैत्रीपूर्ण नियामक वातावरण तैयार करना ताकि अत्याधुनिक तकनीकों का तेजी से विकास हो सके।
  • समावेशी व्यापारिक वातावरण - स्टार्ट-अप्स के नवाचार को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को विशेष राहत प्रदान करना।
फोरम में अलग-अलग क्षेत्रों के लिये स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया जायेगा।
5जी के चारों ओर एक गतिशील शोध इकोसिस्टम का विकास जिसमें उद्योग, सरकार और अकादमिक जगत तीनों शामिल हों जिससे मेक (एण्ड डिजायन) इन इंडिया को और बढ़ावा मिले ताकि -
  • भारत में 5जी तकनीक एवं उत्पादों का विकास हो;
  • 5जी स्टार्ट अप्स जो डिजायन और निर्माण उद्योग की क्षमता का विकास करें;
  • उपरिलिखित डिजायन का समर्थन करने वाले आईपीआर का सृजन;
  • भारत स्थित कंपनियों के पास 5जी मानकों पर आधारित कुछ आवश्यक आईपीआर का सृजन;
  • 5जी पर आधारित चिपसेट का निर्माण, इसके लिये बड़े पैमाने पर निवेश आवश्यक है;
  • भारत के तकनीकी इकोसिस्टम की मदद के लिये देश में उपयुक्त परीक्षणशालाओं का विकास ताकि भारत 5जी तकनीक में अग्रता हासिल कर सके;
  • भारत के सभी शहरी क्षेत्रों में 10 जीबीपीएस ( 10 Gbps) की गति वाले और ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जीबीपीएस ( 1 Gbps) की गति वाले अति-उच्च क्षमता के ब्रॉडबैण्ड की 100 प्रतिशत कवरेज को त्वरित गति से हासिल करना।(Source: pib.nic.in)



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Rajanish Kant बुधवार, 27 सितंबर 2017
जीएसटी राजस्व के आंकड़े - 25 सितंबर, 2017 तक
जीएसटी राजस्व के आंकड़े - 25 सितंबर, 2017 तक
वस्‍तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 1 जुलाई, 2017  को लागू किया गया था।  29 अगस्त, 2017 की प्रेस विज्ञप्ति में यह बताया गया था कि जुलाई, 2017 (29 अगस्त तक) के लिए विभिन्न मदों के तहत कुल मिलाकर 92,283 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व अदा किया गया था। 92,283 करोड़ रुपये के कुल जीएसटी संग्रह में कुल सीजीएसटी राजस्व 14,894 करोड़ रुपये, एसजीएसटी राजस्व 22,722 करोड़ रुपये और आईजीएसटी राजस्व 47,469 करोड़ रुपये का था (जिसमें आयात से प्राप्‍त आईजीएसटी 20,964 करोड़ रुपये का था), जबकि मुआवजा उपकर 7,198 करोड़ रुपये का था (जिसमें आयात से प्राप्‍त मुआवजा उपकर 599 करोड़ रुपये का है)। कई करदाताओं ने जुलाई 2017 के लिए रिटर्न देर से दाखिल किए हैं और 31 अगस्त, 2017 की तिथि तक जुलाई के लिए कुल मिलाकर 94,063 करोड़ रुपये का जीएसटी अदा किया गया।
  1. अगस्त 2017 के लिए जीएसटी के भुगतान के साथ-साथ जीएसटीआर 3बी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 सितंबर, 2017 थी। वैसे करदाताओं की कुल संख्या 68.20 लाख है, जिनके लिए अगस्त, 2017 हेतु मासिक रिटर्न दाखिल करना आवश्यक था। इनमें से 37.63 लाख जीएसटीआर 3बी रिटर्न 25 सितंबर, 2017 तक दाखिल किए गए हैं।
  2. विभिन्न मदों (25 सितंबर, 2017 तक) के तहत कुल मिलाकर 90,669 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व अदा किया गया। कुल सीजीएसटी राजस्व 14,402 करोड़ रुपये है, एसजीएसटी राजस्व 21,067 करोड़ रुपये है, आईजीएसटी राजस्व 47,377 करोड़ रुपये है (जिसके अंतर्गत अगस्त 2017 में आयात से प्राप्‍त आईजीएसटी 23,180 करोड़ रुपये है) और मुआवजा उपकर 7,823 करोड़ रुपये है (जिसके अंतर्गत अगस्त 2017 में आयात से प्राप्‍त मुआवजा उपकर 547 करोड़ रुपये है)।
  3. उपर्युक्‍त आंकड़ों में स्पष्ट रूप से उन 10.24 लाख करदाताओं द्वारा अदा किए जाने वाला जीएसटी राजस्‍व शामिल नहीं है जिन्‍होंने कंपोजीशन योजना का विकल्प चुना है। इसके अतिरिक्त, अब भी ऐसे कई करदाता हैं, जिन्होंने न तो जुलाई और न ही अगस्त 2017 के लिए अपने रिटर्न दाखिल किए हैं। उपर्युक्‍त वर्णित आंकड़ों में वृद्धि के बारे में उचित समय पर सूचित किया जाएगा।(Source: pib.nic.in)

Rajanish Kant
भारतीय शेयर बाजार आज मिले-जुले रहे, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट बंद, जापान के शेयर बाजार गिरे

क्या सस्ता कर्ज ही इकोनॉमी को बढ़ाने का एकमात्र मर्ज है? सरकार सिर्फ RBI के भरोसे क्यों ? 3-4 अक्टूबर को क्या ब्याज घटेगा?
((अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को गिरकर बंद, डाओ जोंस 54 अंक तो नैस्डेक 56 अंक कमजोर


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Rajanish Kant मंगलवार, 26 सितंबर 2017
US डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत (26 सितंबर)($1=₹ 65.3371)
अमेरिकी डॉलर के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की संदर्भ दर
भारतीय रिज़र्व बैंक की दिनांक 26 सितंबर 2017 को अमेरिकी डॉलर के लिए संदर्भ दर  65.3371 है।
पिछले दिन (25 सितंबर 2017) के लिए समतुल्‍य दर  64.8357 थी।
अमेरिकी डॉलर के लिए संदर्भ दर और पारस्‍परिक मुद्रा-दरों की मध्‍य दरों के आधार पर रुपये के लिए यूरो, ग्रेट ब्रिटेन पाउंड और जापानी येन की विनिमय दरें इस प्रकार हैं :
मुद्रातारीख
25 सितंबर 201726 सितंबर 2017
1 यूरो77.303677.4310
1 ग्रेट ब्रिटेन पाउंड87.936788.0744
100 जापानी येन57.7558.58
टिप्‍पणी : एसडीआर- रुपया दर संदर्भ दर पर आधारित होगी।

Source: rbi.org.in
क्या सस्ता कर्ज ही इकोनॉमी को बढ़ाने का एकमात्र मर्ज है? सरकार सिर्फ RBI के भरोसे क्यों ? 3-4 अक्टूबर को क्या ब्याज घटेगा?

('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
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Rajanish Kant
क्या सस्ता कर्ज ही इकोनॉमी को बढ़ाने का एकमात्र मर्ज है? सरकार सिर्फ RBI के भरोसे क्यों ? 3-4 अक्टूबर को क्या ब्याज घटेगा?
देश में इकोनॉमी की रफ्तार मोदी जी के 2014 में सत्ता संभालने के बाद सबसे कम दर्ज की गई है, महंगाई दर पांच महीने की उंचाई पर पहुंच गई है, कर्ज की प्रमुख दरें सात साल में सबसे कम है, इन सब तथ्यों के बीच 3 और 4 अक्टूबर को  RBI मौद्रिक नीति समिति की बैठक होने वाली है। 

सरकार ने रिजर्व बैंक से प्रमुख दरों में कटौती की मांग की है। सरकार का कहना है कि अभी भी प्रमुख दरों में कटौती की गुंजाइश है। लेकिन, सवाल है कि क्या एकमात्र कर्ज की दरों में कटौती से ही इकोनॉमी में जान फूंकी जा सकती है या फिर सरकार को भी इसके लिए कुछ करना होगा। 

इकोनॉमी और सस्ते कर्ज को लेकर एक बात और अगर सस्ते कर्ज से इकोनॉमी को सरपट दौड़ाई जा सकती थी तो आज जापान के अलावा कई यूरोपीय देशों में नकारात्मक ब्याज दर की व्यवस्था है, लेकिन वो देश इकोनॉमी में सुस्ती के दर्द से गुजर रहे हैं। 

तो, सरकार को इस बात भी गौर करना चाहिए कि इकोनॉमी के लिए सरकार की कोशिशें भी काफी मायने रखती है। 

> अब बात करते हैं कि 3.4 अक्टूबर की बैठक में क्या ब्याज घटेगा...आइये देखते हैं इस मामले में देश की इकोनॉमी से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े क्या संकेत देते हैं...। 

इससे पहले कि हम अपने देश के आंकड़ों की बात करें, आपको बता दूं कि आरबीआई मौद्रिक पॉलिसी की समीक्षा करते समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों की संभावित कदमों पर भी  विचार करेगा। अभी हाल ही में फेडरल रिजर्व ने बैठक की थी, जिसमें ब्याज दर तो स्थिर रखने पर सहमति बनी, लेकिन इस साल ब्याज दर में एक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। तो, अमेरिका में ब्याज बढ़ना और अपने यहां ब्याज घटने का मतलब होगा कि विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिका में लगाएंगे। जो कि आरबीआई कभी नहीं चाहेगा। चलिए, अब बात करते हैं अपने यहां के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की....

इस वित्त वर्ष में अगस्त की बैठक में आरबीआई ने प्रमुख दरों में चौथाई परसेंट की कटौती की थी। इस कटौती के बाद देश में प्रमुख दर सात साल में सबसे कम हो गई है। 

अगस्त में खुदरा मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर 3.36 परसेंट पर पहुंच गई,जो कि पांच महीने में सबसे अधिक है। जुलाई में यह 2.36 परसेंट थी। खाने के सामान खासकर सब्जियों के महंगे होने से महंगाई को हवा मिली।  

देश की ताजा जीडीपी ग्रोथ की बात करें, तो यह उम्मीद से काफी खराब रही है। इस वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 5.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.9 प्रतिशत थी। नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद अप्रैल-जून तिमाही की जीडीपी ग्रोथ सबसे कम है। इस मामले में हम लगातार दो तिमाहियों से चीन से पिछड़ गए हैं। 

जानकार इसके लिए नोटबंदी और इसी साल एक जुलाई से लागू जीएसटी यानी वस्तु और सेवा कर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हालांकि, सरकार इकोनॉमी में जान फूंकने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी इकोनॉमी में तेजी लाने, एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने, निवेश में गति लाने और नौकरियों के सृजन के लिए लगातार बैठकें कर रहे हैं। 


देखते हैं, सरकार की कोशिशें इकोनॉमी में तेजी लाने के लिए क्या रंग लाती है...? 

Rajanish Kant