जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस वुड ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सोने की कीमत $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना पूरी तरह संभव है। यह टारगेट मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना है।
वर्तमान स्थिति
17 सितंबर 2026 को सोना करीब $4,348 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था। इससे पहले जनवरी में यह अपने ऑल-टाइम हाई $5,589 तक पहुंच चुका था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद कीमतों में कुछ दबाव देखा गया।
क्रिस वुड का मुख्य तर्क
वुड के अनुसार, अमेरिका की राजकोषीय स्थिति बहुत खराब है। भारी घाटे के कारण सरकार ऊंची बॉन्ड यील्ड्स को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाएगी। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण एंटाइटेलमेंट्स में कटौती भी आसान नहीं है।
ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों को बॉन्ड यील्ड्स को नियंत्रित या “फिक्स” करना पड़ सकता है। जब ऐसा होगा, तो डॉलर लंबी अवधि के कमजोर होने के ट्रेंड में प्रवेश कर सकता है। कमजोर डॉलर सोने और इमर्जिंग मार्केट एसेट्स के लिए बहुत सकारात्मक साबित होता है।
वुड ने कहा कि ऐसे माहौल में सोना $10,000 प्रति औंस तक पहुंचना “feasible” (संभव) है।
भारत के लिए विशेष महत्व
भारतीय परिवारों के पास सोने का बहुत बड़ा भंडार है। हाल के वर्षों में गोल्ड लेंडिंग मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। अगर सोना $10,000 के स्तर पर पहुंचता है, तो भारतीय घरों की बैलेंस शीट में भारी इजाफा हो सकता है। इससे घरेलू संपत्ति का मुद्रीकरण (monetisation) और मजबूत होगा।
अन्य संभावित कदम
वुड ने एक और संभावना का जिक्र किया। अमेरिका अपने गोल्ड रिजर्व्स (जो वर्तमान में बहुत कम कीमत पर दर्ज हैं) का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है और उससे प्राप्त राशि से ट्रेजरी डेट वापस खरीद सकता है।
चेतावनी भी है
वुड ने साफ कहा कि अगर फेडरल रिजर्व वाकई सख्त मौद्रिक नीति अपनाता है, बैलेंस शीट को काफी हद तक सिकोड़ता है और डॉलर मजबूत होता है, तो उनका यह अनुमान गलत साबित हो सकता है। ऐसे में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या सोचें?
क्रिस वुड का यह व्यू लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पर आधारित है। सोना पारंपरिक रूप से मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक जोखिम और डॉलर कमजोरी के खिलाफ हेज माना जाता है। भारतीय निवेशक सोने को पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के नजरिए से देखते रहे हैं।
हालांकि, कोई भी टारगेट निश्चित नहीं होता। बाजार की स्थिति, अमेरिकी नीतियां और वैश्विक घटनाक्रम कीमतों को प्रभावित करते रहेंगे। निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता, समय-सीमा और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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(नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।)
जेफरीज के क्रिस वुड का बड़ा दावा – भारत के लिए क्या मायने रखता है? इस पर और ज्यादा बता रहे हैं SEBI Registered मार्केट एनालिस्ट अनुज गुप्ता। SEBI Registration No. INH000025656 | (Disclaimer: ये एक्सपर्ट की राय है, beYourMoneyManager की सलाह इसे मत मानें)









