मृतक व्यक्ति के नाम पर इनकम टैक्स नोटिस आने पर कानूनी वारिस क्या करें? ITR फाइलिंग, बकाया टैक्स और जिम्मेदारी की पूरी जानकारी – www.beyourmoneymanager.com पर पढ़ें।
किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद भी उनके इनकम टैक्स संबंधी मामले स्वतः बंद नहीं हो जाते। अगर मृतक की आय बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट से ज्यादा थी और उन्होंने ITR फाइल नहीं किया, या बकाया टैक्स, पेंडिंग प्रोसीडिंग्स हैं, तो कानूनी उत्तराधिकारियों (लीगल हेयर) को इन मामलों को संभालना पड़ सकता है। कई बार परिवारिक विवाद या अन्य कारणों से कानूनी वारिस तय करना भी मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में ज्यूरिसडिक्शनल असेसिंग ऑफिसर को सूचित करना जरूरी है। अगर कोई कानूनी वारिस न हो, तो जो व्यक्ति मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनता है, वही टैक्स मामलों की जिम्मेदारी लेता है।
क्या इनकम टैक्स विभाग मृतक के नाम पर नोटिस जारी कर सकता है?
जब विभाग को पता चल जाए या उसे यथोचित रूप से पता होना चाहिए कि करदाता की मृत्यु हो चुकी है, तो वह मृतक के नाम पर नया नोटिस वैध रूप से जारी नहीं कर सकता।
हालांकि, मृत्यु के समय चल रही प्रोसीडिंग्स को मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के खिलाफ जारी रखा जा सकता है। कानूनी वारिस पर मृत्यु की जानकारी देने का कोई वैधानिक दायित्व नहीं है, लेकिन उन्हें इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्टर कर लेना चाहिए।
अगर विभाग मृत्यु की जानकारी होने के बावजूद मृतक के नाम पर नया नोटिस जारी करता है, तो उसकी वैधता को चुनौती दी जा सकती है।
अगर करदाता ITR फाइल करने से पहले मर जाए तो क्या?
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार मृत्यु के साथ टैक्स देनदारी खत्म नहीं होती। यह “लीगल रिप्रेजेंटेटिव” (आमतौर पर एग्जिक्यूटर या एडमिनिस्ट्रेटर, या संपत्ति का उत्तराधिकारी) पर चली जाती है।
कानूनी प्रतिनिधि को वित्तीय वर्ष की शुरुआत से मृत्यु की तारीख तक का रिटर्न (डेट-ऑफ-डेथ रिटर्न) फाइल करना होता है। अगर पिछले वर्ष का रिटर्न भी बाकी है, तो वह भी फाइल करना पड़ता है।
कानूनी वारिस को ये कदम उठाने चाहिए:
ई-फाइलिंग पोर्टल पर “लीगल हेयर” के रूप में रजिस्टर करें (Authorised Representative → Register as Representative)। मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक और वारिस का PAN, तथा लीगल हेयर प्रूफ (सक्सेशन सर्टिफिकेट, विल या पोर्टल का अफिडेविट फॉर्मेट) अपलोड करें।
ज्यूरिसडिक्शनल AO/CPC की मंजूरी के बाद ही ई-वेरिफाई या फाइल कर सकते हैं।
सामान्य ड्यू डेट या एक्सटेंडेड ड्यू डेट के अंदर फाइल करें। अगर मृत्यु ड्यू डेट के करीब हो तो सेक्शन 119(2)(b) के तहत कंडोनेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
फॉर्म 26AS, AIS, TIS, बैंक स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स डेटा का मिलान करें। मृत्यु के बाद की आय (जैसे ब्याज) मृतक के रिटर्न में शामिल नहीं की जाती।
बकाया टैक्स की जिम्मेदारी किसकी?
कानूनी प्रतिनिधि मृतक की बकाया टैक्स देनदारी चुकाता है, लेकिन सिर्फ मृतक की संपत्ति (एस्टेट) से और उतनी ही सीमा तक जितनी संपत्ति उपलब्ध हो।
अगर कानूनी प्रतिनिधि टैक्स देनदारी बाकी रहते हुए संपत्ति बेचता, ट्रांसफर करता या उस पर चार्ज बनाता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी हो सकता है – लेकिन सिर्फ उतनी संपत्ति के मूल्य तक जितनी उसने ट्रांसफर की। इसलिए बकाया टैक्स चेक किए बिना संपत्ति का बंटवारा या ट्रांसफर न करें।
मृतक के नाम पर टैक्स नोटिस आने पर क्या करें?
सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्टर करें।
नोटिस की प्रकृति समझें (स्क्रूटिनी, रिएसेसमेंट, डिमांड या इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट) और जवाब देने की समय सीमा नोट करें।
नोटिस कब और किसके नाम पर जारी हुआ, यह जांचें। अगर मृत्यु के बाद पहली बार और मृतक के नाम पर जारी हुआ है, तो वैधता को चुनौती दी जा सकती है।
अगर नोटिस मृत्यु से पहले वैध रूप से जारी हुआ था या कानूनी प्रतिनिधि के नाम पर नया नोटिस आया है, तो समय पर जवाब दें, जरूरी दस्तावेज जमा करें और प्रोसीडिंग्स में भाग लें।
याद रखें – कानूनी प्रतिनिधि की जिम्मेदारी मृतक की संपत्ति के मूल्य तक सीमित होती है। व्यक्तिगत जेब से भुगतान की बाध्यता नहीं है, अगर एस्टेट पर्याप्त न हो।
निष्कर्ष
मृत्यु के बाद टैक्स मामले अपने आप बंद नहीं होते। कानूनी वारिसों को पेंडिंग रिटर्न फाइल करने, वैध प्रोसीडिंग्स का जवाब देने और एस्टेट से टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है। नोटिस आने पर तुरंत रजिस्ट्रेशन करें, समय सीमा का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट या CA से सलाह लें।
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