मृतक के नाम पर टैक्स नोटिस आया है? नज़रअंदाज़ न करें – कानूनी उत्तराधिकारियों को क्या करना चाहिए

मृतक व्यक्ति के नाम पर इनकम टैक्स नोटिस आने पर कानूनी वारिस क्या करें? ITR फाइलिंग, बकाया टैक्स और जिम्मेदारी की पूरी जानकारी – www.beyourmoneymanager.com पर पढ़ें।

किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद भी उनके इनकम टैक्स संबंधी मामले स्वतः बंद नहीं हो जाते। अगर मृतक की आय बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट से ज्यादा थी और उन्होंने ITR फाइल नहीं किया, या बकाया टैक्स, पेंडिंग प्रोसीडिंग्स हैं, तो कानूनी उत्तराधिकारियों (लीगल हेयर) को इन मामलों को संभालना पड़ सकता है। कई बार परिवारिक विवाद या अन्य कारणों से कानूनी वारिस तय करना भी मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में ज्यूरिसडिक्शनल असेसिंग ऑफिसर को सूचित करना जरूरी है। अगर कोई कानूनी वारिस न हो, तो जो व्यक्ति मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनता है, वही टैक्स मामलों की जिम्मेदारी लेता है।

क्या इनकम टैक्स विभाग मृतक के नाम पर नोटिस जारी कर सकता है?

जब विभाग को पता चल जाए या उसे यथोचित रूप से पता होना चाहिए कि करदाता की मृत्यु हो चुकी है, तो वह मृतक के नाम पर नया नोटिस वैध रूप से जारी नहीं कर सकता।

हालांकि, मृत्यु के समय चल रही प्रोसीडिंग्स को मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के खिलाफ जारी रखा जा सकता है। कानूनी वारिस पर मृत्यु की जानकारी देने का कोई वैधानिक दायित्व नहीं है, लेकिन उन्हें इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्टर कर लेना चाहिए।

अगर विभाग मृत्यु की जानकारी होने के बावजूद मृतक के नाम पर नया नोटिस जारी करता है, तो उसकी वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

अगर करदाता ITR फाइल करने से पहले मर जाए तो क्या?

इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार मृत्यु के साथ टैक्स देनदारी खत्म नहीं होती। यह “लीगल रिप्रेजेंटेटिव” (आमतौर पर एग्जिक्यूटर या एडमिनिस्ट्रेटर, या संपत्ति का उत्तराधिकारी) पर चली जाती है।

कानूनी प्रतिनिधि को वित्तीय वर्ष की शुरुआत से मृत्यु की तारीख तक का रिटर्न (डेट-ऑफ-डेथ रिटर्न) फाइल करना होता है। अगर पिछले वर्ष का रिटर्न भी बाकी है, तो वह भी फाइल करना पड़ता है।

कानूनी वारिस को ये कदम उठाने चाहिए:

ई-फाइलिंग पोर्टल पर “लीगल हेयर” के रूप में रजिस्टर करें (Authorised Representative → Register as Representative)। मृत्यु प्रमाण पत्र, मृतक और वारिस का PAN, तथा लीगल हेयर प्रूफ (सक्सेशन सर्टिफिकेट, विल या पोर्टल का अफिडेविट फॉर्मेट) अपलोड करें।

ज्यूरिसडिक्शनल AO/CPC की मंजूरी के बाद ही ई-वेरिफाई या फाइल कर सकते हैं।

सामान्य ड्यू डेट या एक्सटेंडेड ड्यू डेट के अंदर फाइल करें। अगर मृत्यु ड्यू डेट के करीब हो तो सेक्शन 119(2)(b) के तहत कंडोनेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

फॉर्म 26AS, AIS, TIS, बैंक स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स डेटा का मिलान करें। मृत्यु के बाद की आय (जैसे ब्याज) मृतक के रिटर्न में शामिल नहीं की जाती।

बकाया टैक्स की जिम्मेदारी किसकी?

कानूनी प्रतिनिधि मृतक की बकाया टैक्स देनदारी चुकाता है, लेकिन सिर्फ मृतक की संपत्ति (एस्टेट) से और उतनी ही सीमा तक जितनी संपत्ति उपलब्ध हो।

अगर कानूनी प्रतिनिधि टैक्स देनदारी बाकी रहते हुए संपत्ति बेचता, ट्रांसफर करता या उस पर चार्ज बनाता है, तो वह व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी हो सकता है – लेकिन सिर्फ उतनी संपत्ति के मूल्य तक जितनी उसने ट्रांसफर की। इसलिए बकाया टैक्स चेक किए बिना संपत्ति का बंटवारा या ट्रांसफर न करें।

मृतक के नाम पर टैक्स नोटिस आने पर क्या करें?

सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर मृतक के कानूनी प्रतिनिधि के रूप में रजिस्टर करें।

नोटिस की प्रकृति समझें (स्क्रूटिनी, रिएसेसमेंट, डिमांड या इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट) और जवाब देने की समय सीमा नोट करें।

नोटिस कब और किसके नाम पर जारी हुआ, यह जांचें। अगर मृत्यु के बाद पहली बार और मृतक के नाम पर जारी हुआ है, तो वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

अगर नोटिस मृत्यु से पहले वैध रूप से जारी हुआ था या कानूनी प्रतिनिधि के नाम पर नया नोटिस आया है, तो समय पर जवाब दें, जरूरी दस्तावेज जमा करें और प्रोसीडिंग्स में भाग लें।

याद रखें – कानूनी प्रतिनिधि की जिम्मेदारी मृतक की संपत्ति के मूल्य तक सीमित होती है। व्यक्तिगत जेब से भुगतान की बाध्यता नहीं है, अगर एस्टेट पर्याप्त न हो।

निष्कर्ष

मृत्यु के बाद टैक्स मामले अपने आप बंद नहीं होते। कानूनी वारिसों को पेंडिंग रिटर्न फाइल करने, वैध प्रोसीडिंग्स का जवाब देने और एस्टेट से टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है। नोटिस आने पर तुरंत रजिस्ट्रेशन करें, समय सीमा का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट या CA से सलाह लें।

अधिक जानकारी और व्यक्तिगत फाइनेंशियल गाइडेंस के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करें। सही कदम उठाकर परिवार को अतिरिक्त बोझ से बचाएं।


Rajanish Kant बुधवार, 26 अगस्त 2026
Health Insurance Cover कितना चाहिए? उम्र, शहर और परिवार के अनुसार जानें – ₹5-10 लाख अब पर्याप्त नहीं

मेडिकल इन्फ्लेशन 12-14% के साथ ₹5-10 लाख का हेल्थ कवर अब कम पड़ रहा है। उम्र, शहर और परिवार के आकार के आधार पर सही सम इंश्योर्ड कैसे चुनें – बेयोरमनीमैनेजर पर पूरा गाइड।

आजकल कई लोग सोचते हैं कि ₹5 लाख या ₹10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस काफी है। लेकिन मेडिकल कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। उद्योग के अनुमान के अनुसार मेडिकल इन्फ्लेशन सालाना 12-14% के आसपास है। मेट्रो शहर के अस्पताल में एक कार्डियक प्रक्रिया या कैंसर ट्रीटमेंट आसानी से ₹15-25 लाख या उससे ज्यादा खर्च करा सकता है। इसलिए सही सम इंश्योर्ड चुनना अब उम्र, रहने की जगह, परिवार के आकार और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।

उम्र सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है

हेल्थ कवर सिर्फ इनकम के आधार पर नहीं तय करना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ मेडिकल खर्च भी बढ़ते हैं। एक उदाहरण के अनुसार, अगर आज 30 साल की उम्र में ₹5 लाख पर्याप्त लगता है, तो 6-8% इन्फ्लेशन लगाने पर 50 साल की उम्र तक लगभग ₹15 लाख की जरूरत पड़ सकती है। दो वयस्कों के फ्लोटर पॉलिसी के लिए यह आंकड़ा करीब ₹30 लाख तक पहुंच सकता है। जल्दी खरीदने से प्रीमियम कम रहता है और बाद में बीमारी होने पर कवर बढ़ाने में दिक्कत नहीं होती।

परिवार का आकार और स्वास्थ्य इतिहास

फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में एक सम इंश्योर्ड कई सदस्यों में साझा होता है। इसलिए व्यक्तिगत कवर से ज्यादा राशि लेनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फैमिली फ्लोटर के लिए व्यक्तिगत जरूरत का कम से कम तीन गुना कवर रखें। परिवार में पहले से बीमारी या मेडिकल हिस्ट्री हो तो और ध्यान दें।

शहर के अनुसार कवर

जहां आप रहते हैं, वहां के हेल्थकेयर कॉस्ट बहुत फर्क डालते हैं।  

मेट्रो शहरों में विशेषज्ञ कम से कम ₹15-20 लाख, कुछ तो ₹25 लाख तक का कवर सुझाते हैं।  

टियर-2 और टियर-3 शहरों में न्यूनतम ₹10 लाख पर्याप्त हो सकता है।  

लेकिन याद रखें, स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट के लिए मेट्रो जाना पड़ सकता है। इसलिए ऊंचे खर्चों को भी ध्यान में रखें।

सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए अलग पॉलिसी

बुजुर्ग माता-पिता को फैमिली फ्लोटर में शामिल न करें। उनके इलाज का खर्च शेयर किए गए सम इंश्योर्ड को जल्दी खत्म कर सकता है। 60 साल के बाद इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। आंकड़ों के अनुसार 60+ उम्र के लोगों का औसत क्लेम करीब ₹1.77 लाख है, जबकि 25 साल से कम उम्र वालों का सिर्फ ₹65,000 के आसपास।

बड़ा कवर कैसे लें – एक पॉलिसी या बेस + सुपर टॉप-अप?

₹1 करोड़ जैसा बड़ा कवर एक ही पॉलिसी में लिया जा सकता है या छोटे बेस कवर के साथ सुपर टॉप-अप जोड़कर। उदाहरण के लिए ₹10 लाख बेस और ₹20 लाख टॉप-अप हो तो ₹15 लाख के बिल में पहले बेस काम आएगा और बाकी टॉप-अप से कवर होगा। कौन सा विकल्प सस्ता और आसान है, यह आपकी जरूरत, पॉलिसी टर्म्स और बजट पर निर्भर करता है।

सुपर टॉप-अप शुरुआत में कम प्रीमियम वाला विकल्प है, लेकिन क्लेम बढ़ने पर महंगा पड़ सकता है और कुछ पाबंदियां हो सकती हैं। एक बड़ी सिंगल पॉलिसी में कैशलेस क्लेम प्रोसेसिंग आसान रहती है। अगर बेस और टॉप-अप अलग-अलग कंपनियों के हों तो कभी-कभी रीइम्बर्समेंट की जरूरत पड़ सकती है।

नियमित रिव्यू जरूरी

एक बार सही कवर लेना काफी नहीं। हर दो साल में या शादी, बच्चे होने, रिटायरमेंट जैसे बड़े बदलाव पर सम इंश्योर्ड की समीक्षा करें। जल्दी शुरू करने से फायदा है क्योंकि बाद में बीमारी होने पर कवर बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। कंपनी का ग्रुप कवर रिटायरमेंट के बाद खत्म हो सकता है, इसलिए खुद का कवर तैयार रखें।

मेडिकल इमरजेंसी फंड भी बनाएं

हेल्थ इंश्योरेंस हर खर्च को कवर नहीं करता। वेटिंग पीरियड वाले खर्च, डेंटल, डायग्नोस्टिक्स, एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट या क्लेम रिजेक्ट होने की स्थिति के लिए अलग से मेडिकल कॉर्पस बनाएं। यह फंड इंश्योरेंस से अलग रखें क्योंकि इस्तेमाल करने पर यह खत्म हो जाता है।

निष्कर्ष

₹5-10 लाख का पुराना सोच अब काम नहीं आता। अपनी उम्र, शहर, परिवार और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से कवर चुनें। बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप का कॉम्बिनेशन किफायती तरीका हो सकता है। नियमित रिव्यू और मेडिकल इमरजेंसी फंड से आप और परिवार सुरक्षित रहेंगे।

अधिक जानकारी और व्यक्तिगत प्लानिंग के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विजिट करें। सही फाइनेंशियल प्लानिंग से भविष्य सुरक्षित बनाएं।


Rajanish Kant
NPS Retirement Income: 5 तरह के एन्युटी प्लान – अकेला, पति-पत्नी या परिवार के लिए कौन सा चुनें?

 
NPS खाता मैच्योर होने पर पूरा पैसा एक साथ नहीं निकाल सकते। नियमों के मुताबिक कम से कम 40% कॉर्पस से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जो आपकी बाकी जिंदगी की नियमित आय बनती है। सही एन्युटी चुनना बहुत जरूरी है क्योंकि यह फैसला दशकों तक आपकी मासिक इनकम, पति/पत्नी की सुरक्षा और परिवार को मिलने वाले पैसे को तय करता है।

यहाँ NPS में उपलब्ध मुख्य 5 प्रकार के एन्युटी प्लान बताए गए हैं, ताकि आप अपनी स्थिति के हिसाब से सही विकल्प चुन सकें।

1. सिंगल लाइफ एन्युटी (Life Only Annuity)

अगर आप अकेले हैं और कोई आर्थिक रूप से आप पर निर्भर नहीं है, तो यह सबसे ज्यादा मासिक पेंशन देता है।  

फायदा: सबसे ऊँचा पेआउट।  

नुकसान: आपकी मृत्यु के बाद पेंशन पूरी तरह बंद हो जाती है, परिवार को कुछ नहीं मिलता।  

उपयुक्त: जिनके पास अन्य पेंशन या बचत है और कोई आश्रित नहीं।

2. जॉइंट लाइफ एन्युटी

पति-पत्नी दोनों के लिए सुरक्षा। आपकी मृत्यु के बाद भी पति/पत्नी को तय प्रतिशत (आमतौर पर 50%, 75% या 100%) पेंशन मिलती रहती है।  

फायदा: जीवनसाथी की सुरक्षा।  

नुकसान: सिंगल लाइफ की तुलना में मासिक राशि कम होती है क्योंकि भुगतान दो जिंदगियों तक चल सकता है।  

उपयुक्त: विवाहित जोड़े जहाँ एक साथी आर्थिक रूप से निर्भर है।

3. लाइफ एन्युटी विद रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस

आपको आजीवन पेंशन मिलती है। मृत्यु के बाद मूल निवेश राशि नॉमिनी को वापस मिल जाती है।  

फायदा: परिवार को पूंजी वापस मिलती है।  

नुकसान: नियमित पेंशन थोड़ी कम होती है।

4. पीरियड सर्टेन एन्युटी

निश्चित अवधि (जैसे 10 या 20 साल) तक भुगतान की गारंटी। अगर उस अवधि से पहले मृत्यु हो जाए तो बाकी भुगतान नॉमिनी को मिलता है।  

फायदा: उत्तराधिकारियों के लिए सुरक्षा।  

नुकसान: शुद्ध लाइफ ओनली प्लान से कम पेआउट।

5. इंक्रीजिंग एन्युटी (Increasing Annuity)

पेंशन हर साल एक निश्चित दर (जैसे 3% या 5%) से बढ़ती रहती है।  

फायदा: महंगाई से बचाव। अस्पताल के खर्च और अन्य लागतें बढ़ने पर मददगार।  

नुकसान: शुरुआत में मासिक राशि कम होती है।  

उपयुक्त: लंबी रिटायरमेंट अवधि की उम्मीद रखने वालों के लिए।

एन्युटी चुनने से पहले ये 5 बातें जरूर चेक करें

सिर्फ सबसे ऊँचे पेआउट वाले प्लान पर न जाएं। फ्लेक्सिबिलिटी और महंगाई सुरक्षा भी देखें।

सभी PFRDA-एम्पैनल्ड एन्युटी सर्विस प्रोवाइडर्स की दरों की तुलना करें। छोटी-छोटी अंतर दशकों में बड़ा फर्क डालते हैं।

पेआउट फ्रीक्वेंसी (मासिक, तिमाही या वार्षिक) अपनी खर्च की आदत के अनुसार चुनें।

याद रखें कि एन्युटी से मिलने वाली पेंशन आपकी इनकम स्लैब के अनुसार पूरी तरह टैक्सेबल होती है (लंप सम निकासी पर टैक्स नहीं लगता)।

जीवनसाथी की आर्थिक निर्भरता को ध्यान में रखकर ही सिंगल लाइफ चुनें क्योंकि फैसला आमतौर पर स्थायी होता है।

निष्कर्ष

कोई एक “सबसे अच्छा” एन्युटी नहीं है। सही विकल्प आपकी स्थिति पर निर्भर करता है:  

अकेले हैं → सिंगल लाइफ  

पति-पत्नी की सुरक्षा चाहिए → जॉइंट लाइफ  

परिवार को कुछ छोड़ना है → रिटर्न ऑफ परचेज प्राइस या पीरियड सर्टेन  

महंगाई की चिंता है → इंक्रीजिंग एन्युटी  

अपने आश्रितों, स्वास्थ्य, अन्य आय स्रोतों और अपेक्षित खर्चों का आकलन करके ही फैसला लें। एक बार खरीदने के बाद यह निर्णय ज्यादातर मामलों में बदलना मुश्किल होता है।

बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए www.beyourmoneymanager.com पर और उपयोगी गाइ

Rajanish Kant
Bank of America Survey: सोना सबसे ज्यादा undervalued, US डेट चिंताओं से गोल्ड में बुलिश बेट बढ़ी|भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?l BeYourMoneyManager

बैंक ऑफ अमेरिका के अगस्त 2026 सर्वे में 16% फंड मैनेजर्स ने सोने को undervalued बताया। CFTC डेटा में तीसरे सप्ताह भी गोल्ड पर बुलिश पोजीशन बढ़ी। जानें गोल्ड इन्वेस्टमेंट के मौके और जोखिम।

बैंक ऑफ अमेरिका के नए सर्वे में सोना फिर चर्चा में आ गया है। अगस्त 2026 के ग्लोबल फंड मैनेजर सर्वे के अनुसार सोना मार्च 2023 के बाद सबसे ज्यादा undervalued नजर आ रहा है। सिर्फ 6% से बढ़कर अब 16% फंड मैनेजर्स मानते हैं कि गोल्ड अभी सस्ता है। इसी दौरान स्पेक्युलेटिव इन्वेस्टर्स ने लगातार तीसरे हफ्ते गोल्ड पर अपनी बुलिश बेट बढ़ा दी है।

क्यों बढ़ रही है गोल्ड में दिलचस्पी?

अमेरिकी सरकार के कर्ज की स्थिरता को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने “डिबेसमेंट ट्रेड” को फिर जिंदा कर दिया है। जब डॉलर की वैल्यू पर शक बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सोने की ओर रुख करते हैं।

CFTC की Commitments of Traders रिपोर्ट (सप्ताह समाप्त 18 अगस्त) के अनुसार मनी मैनेजर्स ने Comex गोल्ड फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन 5,961 कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाकर 154,595 कर दी। शॉर्ट पोजीशन भी थोड़ी बढ़ी, लेकिन नेट लॉन्ग पोजीशन 141,648 कॉन्ट्रैक्ट पर पहुंच गई। यह सितंबर के अंत के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले तीन हफ्तों में नेट लेंथ में 18% की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि यह साल का सबसे ऊंचा बुलिश स्तर है, फिर भी एक साल पहले और साल की शुरुआत की तुलना में सेंटीमेंट अभी कमजोर है।

बैंक ऑफ अमेरिका का नजरिया

बैंक ऑफ अमेरिका की ग्लोबल रिसर्च हेड कैंडेस ब्राउनिंग प्लैट ने कहा कि मौजूदा इन्वेस्टर खरीद $4,000 प्रति औंस के आसपास के गोल्ड प्राइस से मेल खाती है। $5,000 के स्तर तक पहुंचने के लिए खरीद में और तेजी चाहिए। सेंट्रल बैंकों की खरीद पहले से ही मजबूत है (जून में 12 महीने के औसत से काफी ऊपर)। अगर जैक्सन होल मीटिंग में डॉविश संकेत मिले तो गोल्ड के लिए यह सकारात्मक साबित हो सकता है।

जोखिम भी हैं

सोना जुलाई के निचले स्तर से रिकवर कर चुका है, लेकिन तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई की आशंका बढ़ा रही है। इससे फेडरल रिजर्व साल के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर हो सकता है। TD सिक्योरिटीज के बार्ट मेलेक का मानना है कि डॉलर डिबेसमेंट की आशंका गोल्ड को सपोर्ट देगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में रेट बढ़ने का जोखिम $5,350 के टारगेट तक पहुंचने में देरी कर सकता है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

भारत में गोल्ड हमेशा से पसंदीदा एसेट रहा है। महंगाई, रुपये की कमजोरी और ग्लोबल अनिश्चितता के समय फिजिकल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या गोल्ड ETF में निवेश पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सकता है। लेकिन याद रखें—कोई भी निवेश जोखिम मुक्त नहीं होता। प्राइस में उतार-चढ़ाव हो सकता है, इसलिए अपनी रिस्क क्षमता और लंबे समय के लक्ष्य के हिसाब से फैसला लें।

BeYourMoneyManager पर हम हमेशा कहते हैं—अपना पैसा समझदारी से मैनेज करें। गोल्ड को सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि डेटा और अपनी जरूरत के आधार पर देखें।

नोट: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

Rajanish Kant
विरासत में मिली प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन्स टैक्स कौन भरेगा? उत्तराधिकारी कैसे पाएं टैक्स राहत | BeYourMoneyManager
 

विरासत में मिली प्रॉपर्टी बेचने पर इनकम टैक्स का बोझ कई परिवारों में विवाद का कारण बन जाता है। कानूनी उत्तराधिकार, सेल डीड, बैंक ट्रांजेक्शन और इनकम टैक्स रिटर्न में असंगति होने पर समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। इसलिए प्रॉपर्टी बेचने से पहले हर उत्तराधिकारी का हिस्सा साफ-साफ तय और डॉक्यूमेंट करना जरूरी है।

उत्तराधिकारियों में टैक्स देनदारी कैसे बंटती है?

वसीयत या लागू उत्तराधिकार कानून के तहत प्रॉपर्टी जब कानूनी उत्तराधिकारियों को मिलती है, तो हर उत्तराधिकारी को उसका निर्धारित हिस्सा मिलता है। जब उत्तराधिकारी मिलकर प्रॉपर्टी बेचते हैं, तो कैपिटल गेन्स टैक्स आमतौर पर उनके स्वामित्व हिस्से के अनुपात में ही लगता है। पूरा सेल अमाउंट एक उत्तराधिकारी के खाते में जमा होने से यह नियम नहीं बदलता।

हालांकि, अगर रिकॉर्ड्स मेल नहीं खाते तो टैक्स रिपोर्टिंग में गड़बड़ी हो सकती है। इसलिए उत्तराधिकार/पार्टिशन दस्तावेज, सेल डीड, पैसे की प्राप्ति और हर PAN पर TDS कटौती एक जैसे होने चाहिए।

कैपिटल गेन्स की गणना कैसे होती है?

विरासत में मिली प्रॉपर्टी के लिए उत्तराधिकारी आमतौर पर पिछले मालिक की मूल लागत (और पात्र सुधार लागत) अपनाता है। हर उत्तराधिकारी अपनी हिस्सेदारी के अनुसार सेल प्राइस, अधिग्रहण/सुधार लागत और ट्रांसफर खर्चों के आधार पर कैपिटल गेन्स निकालता है।

पिछले मालिक की होल्डिंग अवधि भी गिनी जाती है। अगर प्रॉपर्टी 1 अप्रैल 2001 से पहले अधिग्रहित हुई हो, तो उस तारीख का फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) लागत के रूप में लिया जा सकता है। जमीन या इमारत के मामले में यह FMV 1 अप्रैल 2001 के स्टांप ड्यूटी वैल्यू से ज्यादा नहीं हो सकता।

अगर सेल प्राइस स्टांप ड्यूटी वैल्यू से कम है, तो कुछ शर्तों के साथ स्टांप ड्यूटी वैल्यू को सेल कंसीडरेशन माना जा सकता है।

कैपिटल गेन्स टैक्स राहत कैसे मिलती है?

टैक्स छूट हर उत्तराधिकारी के अपने कैपिटल गेन्स हिस्से और उसके रीइन्वेस्टमेंट पर अलग-अलग निर्भर करती है। रेसिडेंशियल हाउस, निर्दिष्ट बॉन्ड्स या कृषि भूमि में निवेश पर Income Tax Act 2025 के संबंधित प्रावधानों (पुराने Section 54 सीरीज के अनुरूप) के तहत छूट मांगी जा सकती है।

एक उत्तराधिकारी का निवेश दूसरे को छूट नहीं दिलाता। हर किसी को अपनी सीमाएं, समयसीमा और शर्तें खुद पूरी करनी होती हैं।

Section 54 (नए कानून में Section 82) के तहत छूट का तरीका

रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री से हुए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स को भारत में दूसरी रेसिडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी खरीदने/बनाने पर छूट मिल सकती है।

नई प्रॉपर्टी खरीद: ट्रांसफर से 1 साल पहले या 2 साल बाद तक  

निर्माण: ट्रांसफर से 3 साल के अंदर  

अगर कैपिटल गेन्स नई प्रॉपर्टी की लागत से ज्यादा है तो सिर्फ लागत जितनी राशि छूटती है। गेन्स ₹10 करोड़ से ज्यादा होने पर अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगता है। गेन्स ₹2 करोड़ तक होने पर एक बार जीवन में दो रेसिडेंशियल हाउस में निवेश का विकल्प भी उपलब्ध है।

अगर रिटर्न फाइलिंग की ड्यू डेट तक पूरा उपयोग नहीं हुआ तो बची राशि Capital Gains Account Scheme (CGAS) में जमा करनी पड़ती है। 3 साल बाद बची अनुपयोगी राशि टैक्सेबल हो जाती है। नई प्रॉपर्टी 3 साल के अंदर बेचने पर छूट वापस ले ली जाती है।

ITR और डॉक्यूमेंटेशन

हर उत्तराधिकारी को अपनी हिस्सेदारी का कैपिटल गेन्स ITR में सही-सही दिखाना चाहिए (आमतौर पर ITR-2, बिजनेस इनकम होने पर ITR-3/4)। सेल कंसीडरेशन, स्टांप ड्यूटी वैल्यू, ऐतिहासिक लागत, सुधार खर्च, ट्रांसफर खर्च और क्लेम की गई छूट का सही खुलासा जरूरी है। TDS भी हर सेलर के PAN पर उसके हिस्से के अनुसार रिपोर्ट होना चाहिए। नॉन-रेजिडेंट उत्तराधिकारी होने पर अलग TDS नियम लागू हो सकते हैं।

निष्कर्ष: विरासत की प्रॉपर्टी बेचते समय स्वामित्व हिस्सा, लागत गणना और छूट का दावा व्यक्तिगत रूप से साफ रखें। सही डॉक्यूमेंटेशन और समय पर प्लानिंग से टैक्स विवाद और अतिरिक्त बोझ से बचा जा सकता है। विस्तृत सलाह के लिए योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से जरूर संपर्क करें।


Rajanish Kant सोमवार, 24 अगस्त 2026
₹5-10 लाख Health Insurance अब काफी नहीं! जानें कितना कवर चाहिए – ये 3 फैक्टर्स चेक करें

₹5-10 लाख स्वास्थ्य बीमा अब काफी नहीं! जानें कितना कवर चाहिए – 3 जरूरी फैक्टर्स | 2026 गाइड

मेडिकल महंगाई 12-14% होने से ₹5-10 लाख का हेल्थ कवर अपर्याप्त हो गया है। आयु, शहर और फैमिली हिस्ट्री के आधार पर सही सम इंश्योर्ड चुनें। बेस + सुपर टॉप-अप स्ट्रैटेजी और नियमित रिव्यू के टिप्स। BeYourMoneyManager.com पर पूरा गाइड।

आजकल स्वास्थ्य सेवाएं तेजी से महंगी हो रही हैं। मेडिकल इन्फ्लेशन भारत में सालाना 12-14% चल रही है। ऐसे में जो ₹5-10 लाख का हेल्थ कवर पहले पर्याप्त माना जाता था, अब वो बड़े इलाज के सामने कम पड़ जाता है।

एक कार्डियक प्रोसीजर या कैंसर ट्रीटमेंट मेट्रो अस्पताल में आसानी से ₹15-25 लाख पार कर सकता है। कई लोग अब ₹1 करोड़ या उससे ज्यादा का कवर ले रहे हैं। लेकिन सही राशि तय करने के लिए आय नहीं, बल्कि आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियां मायने रखती हैं।

1. आयु, परिवार का आकार और हेल्थ हिस्ट्री

स्वास्थ्य बीमा का लक्ष्य अप्रत्याशित मेडिकल खर्चों से सुरक्षा है। आय के 10-15 गुना का फॉर्मूला यहां काम नहीं करता।

  • आयु सबसे महत्वपूर्ण: 30 साल की उम्र में ₹5 लाख आज काफी लग सकता है, लेकिन 20-30 साल बाद मेडिकल इन्फ्लेशन के कारण आपको ₹15 लाख या ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है। युवावस्था में ही बड़ा कवर लें, क्योंकि बाद में बीमारी होने पर सम इंश्योर्ड बढ़ाना मुश्किल हो जाता है।
  • फैमिली फ्लोटर: अगर दो वयस्कों का फ्लोटर ले रहे हैं तो व्यक्तिगत जरूरत का कम से कम 2-3 गुना कवर रखें।
  • बुजुर्ग माता-पिता: उन्हें फैमिली फ्लोटर में शामिल न करें। उनके बार-बार के इलाज से पूरा सम इंश्योर्ड खत्म हो सकता है। उनके लिए अलग और जितना संभव हो उतना बड़ा कवर लें। 60 साल के बाद इलाज का खर्च लगभग 2.7 गुना बढ़ जाता है।
  • फैमिली मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा बीमारी: प्री-एग्जिस्टिंग कंडीशन या पारिवारिक इतिहास होने पर लंबी अवधि की बीमारियों के लिए ज्यादा कवर जरूरी है।

2. शहर, अस्पताल और रूम कैटेगरी

जहां आप रहते हैं और किस तरह के अस्पताल पसंद करते हैं, उससे कवर की जरूरत बदल जाती है।

  • मेट्रो शहर (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि): न्यूनतम ₹15-25 लाख का कवर रखें। यहां इलाज महंगा होता है।
  • टियर-2/3 शहर: ₹10 लाख से शुरू कर सकते हैं, लेकिन एडवांस्ड ट्रीटमेंट के लिए मेट्रो जाना पड़ सकता है, इसलिए थोड़ा ज्यादा रखें।
  • प्रीमियम अस्पताल और प्राइवेट रूम: अगर बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल और बेहतर रूम पसंद हैं तो कवर और बढ़ाएं। विदेश में इलाज की योजना हो तो हाई-वैल्यू कवर जरूरी।

3. बेस पॉलिसी + सुपर टॉप-अप या एक बड़ा सिंगल कवर?

₹50 लाख या ₹1 करोड़ का कवर लेने का फैसला करते समय दो विकल्प होते हैं:

  • बेस + सुपर टॉप-अप: ₹10 लाख की बेस पॉलिसी + ₹20-50 लाख का सुपर टॉप-अप। ये ज्यादा किफायती पड़ता है। बेस खत्म होने के बाद टॉप-अप काम करता है। लंबे समय में बेस प्रीमियम बहुत बढ़ जाए तो उसे छोड़कर सिर्फ टॉप-अप रख सकते हैं।
  • एक बड़ा सिंगल कवर: कैशलेस क्लेम आसान रहता है क्योंकि एक ही इंश्योरर से डील होती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ठोस बेस कवर + सुपर टॉप-अप + क्रिटिकल इलनेस बेनिफिट का कॉम्बिनेशन अच्छा रहता है। अनलिमिटेड कवर भी कुछ कंपनियां ऑफर कर रही हैं, लेकिन पोर्टेबिलिटी और भविष्य के प्रीमियम को लेकर सावधानी बरतें।

नियमित रिव्यू जरूरी

एक बार कवर चुनकर छोड़ न दें। हर 2 साल में या जीवन के बड़े बदलाव (शादी, बच्चे, रिटायरमेंट) पर पॉलिसी की समीक्षा करें। एम्प्लॉयर कवर खत्म होने पर व्यक्तिगत पॉलिसी तुरंत बढ़ाएं।

निष्कर्ष:
₹5-10 लाख का कवर आज ज्यादातर लोगों के लिए अपर्याप्त है। मेट्रो में रहने वाले व्यक्ति के लिए न्यूनतम ₹15-20 लाख और परिवार के लिए ₹25 लाख+ की सोचें। युवावस्था में ही पर्याप्त कवर लें, बेस + टॉप-अप का स्मार्ट इस्तेमाल करें और नियमित अपडेट करते रहें।

अपनी उम्र, शहर और फैमिली जरूरतों के हिसाब से सही प्लान चुनने के लिए www.beyourmoneymanager.com पर विस्तृत गाइड्स देखें या वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

Disclaimer: यह सामान्य जानकारी है। पॉलिसी खरीदने से पहले विभिन्न इंश्योरर्स की शर्तें, वेटिंग पीरियड, रूम रेंट कैप और क्लेम सेटलमेंट रेशियो ध्यान से तुलना करें।

Rajanish Kant
Reverse Mortgage Loan: घर बेचे बिना आपका घर आपको पैसे वापस दे सकता है..जानें रिवर्स मॉर्टगेज लोन क्या है? वरिष्ठ नागरिकों के लिए फायदे, नुकसान और शर्तें | 2026 गाइड

रिवर्स मॉर्टगेज से घर बेचे बिना मासिक इनकम पाएं। जानें भारत में पात्रता, NHB नियम, टैक्स फ्री फायदे, ब्याज का जाल और फैमिली इनहेरिटेंस पर असर BeYourMoneyManager.com पर पूरा गाइड।

रिवर्स मॉर्टगेज: आपका घर आपको पैसे वापस दे सकता है, लेकिन ये कैच कोई नहीं बताता

ज्यादातर लोग दशकों तक होम लोन चुकाते हैं। रिवर्स मॉर्टगेज इस आइडिया को उल्टा कर देता है।

अगर आप 60 साल या उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिक हैं और आपके पास कर्ज-मुक्त अपना घर है, तो आप उस संपत्ति को बेचे बिना, घर छोड़े बिना और मासिक EMI चुकाए बिना नियमित आय का स्रोत बना सकते हैं।

लगता है बहुत अच्छा है? आइए समझें कि ये कैसे काम करता है, किसके लिए फायदेमंद है और कहाँ गलती हो सकती है।

रिवर्स मॉर्टगेज वास्तव में कैसे काम करता है?

आप अपना घर बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी को मॉर्टगेज करते हैं। बदले में बैंक आपको मासिक, तिमाही, वार्षिक, एकमुश्त या लाइन ऑफ क्रेडिट के रूप में पैसे देता है।

आप घर में रहते हैं, टाइटल आपके पास रहता है। लेंडर को पैसा बाद में मिलता है — जब आपका निधन हो जाए, घर बेचें या स्थायी रूप से घर छोड़ दें।

असली कैच: जितना पैसा आपको मिलता है, उस पर ब्याज चुपचाप जमा होता रहता है। आप EMI नहीं चुकाते, इसलिए कर्ज समय के साथ बढ़ता जाता है।

कौन पात्र है और कितने समय के लिए?

आयु: मुख्य उधारकर्ता 60 वर्ष या उससे अधिक। पति-पत्नी संयुक्त रूप से आवेदन कर सकते हैं (एक 60+, दूसरा कम से कम 55+)।

संपत्ति: भारत में स्थित, खुद का अधिग्रहित या स्पष्ट टाइटल वाला सेल्फ-ऑक्यूपाइड रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी (हाउस/फ्लैट)। कोई बकाया लोन या कानूनी विवाद नहीं होना चाहिए।

लोन राशि: आपकी आयु, घर का मार्केट वैल्यू और ब्याज दर पर निर्भर करती है। NHB गाइडलाइंस के अनुसार आयु के हिसाब से LTV लगभग 40% (60-65 वर्ष) से 60% (75+) तक हो सकता है।

अधिकतम टेन्योर: आमतौर पर 15-20 वर्ष। हर 5 साल में प्रॉपर्टी का रीवैल्यूएशन होता है, जिससे पेमेंट बदल सकता है।

पैसे का उपयोग घर की मरम्मत, मेडिकल खर्च, पेंशन सप्लीमेंट या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। स्पेक्युलेशन, ट्रेडिंग या बिजनेस के लिए इस्तेमाल मना है।

असली आकर्षण: मानसिक शांति और स्वतंत्रता

रिवर्स मॉर्टगेज सिर्फ पैसे नहीं देता। यह वरिष्ठ नागरिकों को बच्चों पर निर्भर हुए बिना गरिमा के साथ जीने का मौका देता है। घर में रहते हुए नियमित आय मिलती है, किराए या मार्केट के उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं। जीवनकाल में मासिक EMI नहीं चुकानी पड़ती।

सेक्शन 10(43) के तहत मिलने वाले पेमेंट टैक्स-फ्री होते हैं।

सबसे बड़ा नुकसान: कर्ज बढ़ता है, इक्विटी घटती है

चूंकि आप पेमेंट नहीं करते, ब्याज और फीस कंपाउंड होती रहती है। 15-20 साल में कर्ज काफी बढ़ सकता है जबकि आपके घर में आपकी इक्विटी घटती जाती है। यह रिवर्स मॉर्टगेज का सबसे बड़ा नुकसान माना जाता है।

अग्रिम फीस (origination costs) भी लोन बैलेंस में जुड़ जाती है और तुरंत ब्याज लगना शुरू हो जाता है।

फैमिली को कम या कुछ नहीं मिल सकता

आपके निधन या स्थायी रूप से घर छोड़ने पर पूरा लोन चुकाना पड़ता है, आमतौर पर घर बेचकर। वारिसों को उम्मीद से कम राशि मिल सकती है या घर बेचना पड़ सकता है।

अगर आप नर्सिंग होम में चले जाएं या 1 साल से ज्यादा समय तक घर में न रहें, तो पूरा लोन तुरंत देय हो सकता है।

प्रॉपर्टी टैक्स, इंश्योरेंस या मेंटेनेंस न भरने पर फोरक्लोजर का खतरा रहता है।

अच्छी बात: “No Negative Equity” गारंटी होती है। आप या आपके वारिस घर की वास्तविक वैल्यू से ज्यादा नहीं चुकाएंगे (शर्तें पूरी होने पर)। आप कभी भी बिना पेनल्टी लोन प्रीपे करके मॉर्टगेज रिलीज करवा सकते हैं।

क्या रिवर्स मॉर्टगेज आपके लिए सही है?

यह जल्दी लेने वाला फैसला नहीं है। मासिक पेमेंट की आजादी बनाम परिवार की विरासत घटने के बीच संतुलन बनाएं। वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें। बैंकों की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं (SBI, PNB, Indian Bank आदि जैसे कुछ संस्थान इसे ऑफर करते हैं), इसलिए ब्रांच में मौजूदा रेट, LTV और नियम चेक करें।

रिवर्स मॉर्टगेज उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास पर्याप्त पेंशन/सेविंग्स नहीं हैं लेकिन अपना घर है। लेकिन लंबे समय में ब्याज का बोझ और इनहेरिटेंस पर असर समझकर ही फैसला लें।

अधिक व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा करें।

Disclaimer: यह सामान्य जानकारी है। लोन की शर्तें बैंक/HFC और NHB गाइडलाइंस पर निर्भर करती हैं। आवेदन से पहले आधिकारिक दस्तावेज और सलाहकार से पुष्टि करें।


Rajanish Kant
SEBI रिपोर्ट: FY26 में 87.7% F&O ट्रेडर्स को हुआ नुकसान, कुल ₹91,685 करोड़ का घाटा – रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए क्या मतलब है? BeYourMoneyManager सलाह

सेबी (SEBI) ने हाल ही में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में व्यक्तिगत ट्रेडर्स की लाभप्रदता पर एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की है। FY26 के आंकड़े रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए चेतावनी भरे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 87.7% व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, जबकि कुल नुकसान ₹91,685 करोड़ रहा, जो FY25 की तुलना में 18% कम है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

व्यक्तिगत ट्रेडर्स का कुल नुकसान FY26 में ₹91,685 करोड़ रहा (FY25 में लगभग ₹1.12 लाख करोड़ से 18% कम)।  

औसतन प्रति ट्रेडर नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया, भले ही ट्रेडर्स की संख्या कम हुई हो।  

ऑप्शंस ट्रेडिंग से 92% नुकसान हुआ।  

नुकसान करने वाले ट्रेडर्स औसतन 21% ज्यादा नुकसान उठाते हैं, जितना मुनाफा कमाने वाले कमाते हैं।  

व्यक्तिगत ट्रेडर बेस 18% घटकर 87.5 लाख रह गया।  

नए एंट्रेंट्स में 40% की गिरावट आई और वे 20.8 लाख रह गए।  

93% व्यक्तिगत ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेड किया।  

युवा ट्रेडर्स का दबदबा: 43% ट्रेडर्स 30 साल से कम उम्र के थे, और उनमें से 89% को नुकसान हुआ।  

व्यक्तिगत ट्रेडर्स ने सालाना लगभग ₹25,000 करोड़ ट्रांजेक्शन कॉस्ट चुकाई।  

STT भुगतान 35% बढ़कर ₹6,645 करोड़ हो गया।  

ये आंकड़े दिखाते हैं कि भले ही कुल नुकसान और ट्रेडर्स की संख्या घटी हो, लेकिन जो लोग सक्रिय रहे, उनके लिए औसत नुकसान बढ़ा है। ऑप्शंस, खासकर इंडेक्स ऑप्शंस और शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग, रिटेल नुकसान का मुख्य कारण बनी हुई है।

रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए क्या मतलब है?

F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) सेगमेंट में ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स नुकसान में रहते हैं। सेबी की पिछली रिपोर्ट्स भी यही बताती रही हैं कि 9 में से लगभग 9 ट्रेडर्स घाटे में रहते हैं। FY26 में थोड़ी सुधार दिखी (नुकसान करने वालों का प्रतिशत 90.9% से घटकर 87.7% हुआ), लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है।

प्रॉपराइटरी ट्रेडर्स और बड़े संस्थान (FPIs आदि) इस सेगमेंट में मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स का पैसा इनके पास जा रहा है। ट्रांजेक्शन कॉस्ट और STT भी नुकसान को बढ़ाते हैं।

पैसे के स्मार्ट मैनेजमेंट के टिप्स (BeYourMoneyManager सलाह)

शिक्षा पहले: F&O में कूदने से पहले जोखिम, मार्जिन, गreeks और रणनीतियां समझें। सिर्फ YouTube या सोशल मीडिया पर भरोसा न करें।  

पूंजी प्रबंधन: केवल वह पैसा लगाएं जिसे आप पूरी तरह खो सकते हैं। कभी भी इमरजेंसी फंड या लोन का पैसा न लगाएं।  

ऑप्शंस से सावधान: ज्यादातर रिटेल ट्रेडर्स ऑप्शंस बायर्स होते हैं और नुकसान उठाते हैं। हेजिंग के अलावा सट्टा ट्रेडिंग से बचें।  

लंबी अवधि का नजरिया: शेयर बाजार में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी (लंबी अवधि) और म्यूचुअल फंड्स बेहतर विकल्प हैं।  

जोखिम नियंत्रण: स्टॉप-लॉस लगाएं, पोजीशन साइजिंग का ध्यान रखें और ओवर-ट्रेडिंग से बचें।  

नियमित रिव्यू: सेबी की रिस्क डिस्क्लोजर को गंभीरता से लें – “9 में से 10 व्यक्तिगत ट्रेडर्स F&O में नुकसान में रहते हैं।”

सेबी के नियमों (कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना, प्रीमियम अपफ्रंट कलेक्शन आदि) का असर दिखाई दे रहा है – नई एंट्री और कुल भागीदारी घटी है। लेकिन जो लोग सक्रिय हैं, उनके लिए नुकसान अभी भी भारी है।

www.beyourmoneymanager.com पर हमारा फोकस आपके पैसे को सुरक्षित और स्मार्ट तरीके से बढ़ाने पर है। F&O जैसी हाई-रिस्क एक्टिविटी से पहले अपनी फाइनेंशियल हेल्थ चेक करें। अगर आप रिटेल इन्वेस्टर हैं तो लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग, SIP और डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान दें।

निष्कर्ष:  

SEBI की यह रिपोर्ट एक बार फिर याद दिलाती है कि डेरिवेटिव्स मार्केट रिटेल के लिए आसान मुनाफे का रास्ता नहीं है। ज्ञान, अनुशासन और जोखिम प्रबंधन के बिना इसमें पैसा लगाना जुए जैसा है। अपने पैसे का असली मैनेजर बनें – समझदारी से निवेश करें।

(स्रोत: SEBI Study on Profitability of Individual Traders in Equity Derivatives Segment FY25-FY26 रिपोर्ट। आंकड़े आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित हैं।)

Rajanish Kant
UFBU (बैंक यूनियनों) की अखिल भारतीय हड़ताल 2026: 11, 28-30 सितंबर और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल – 5 दिन बैंकिंग और PLI स्कीम वापस लेने की मांगl BeYourMoneyManager की सलाह

UFBU ने 5 दिन बैंकिंग लागू करने और भेदभावपूर्ण PLI स्कीम वापस लेने की मांग को लेकर सितंबर और अक्टूबर 2026 में देशव्यापी बैंक हड़ताल की घोषणा की है। पूरी डिटेल जानें।

बैंक कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल की घोषणा: सितंबर-अक्टूबर 2026 में कई दिन बंद रह सकते हैं बैंक

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबित मांगों को लेकर अखिल भारतीय हड़ताल का आह्वान किया है। 23 अगस्त 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार यूनियनों ने सितंबर और अक्टूबर में कई चरणों में स्ट्राइक की घोषणा की है।

हड़ताल की तारीखें

11 सितंबर 2026** – एक दिन की अखिल भारतीय हड़ताल  

28, 29 और 30 सितंबर 2026** – तीन दिन की अखिल भारतीय हड़ताल  

26 अक्टूबर 2026 से** – अनिश्चितकालीन (Indefinite) हड़ताल  

ये हड़तालें तब तक जारी रह सकती हैं जब तक यूनियनों की प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं।

मुख्य मांगें क्या हैं?

UFBU की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

5 दिन बैंकिंग लागू करना  

   भारतीय बैंक संघ (IBA) ने 8 मार्च 2024 को 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें जॉइंट नोट में 5 दिन बैंकिंग (सोमवार से शुक्रवार) लागू करने पर सहमति जताई थी। इसके लिए रोजाना काम के घंटे 40 मिनट बढ़ाने का प्रस्ताव भी था। लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार की मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। यूनियनें इसे जल्द लागू करने की मांग कर रही हैं।

भेदभावपूर्ण PLI स्कीम वापस लेना  

   सरकार की नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को यूनियनें एकतरफा और भेदभावपूर्ण बता रही हैं। मौजूदा व्यवस्था में ज्यादातर कर्मचारी (स्केल III तक) अधिकतम 15 दिन के बेसिक पे + DA के बराबर PLI पा सकते हैं, जबकि स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिन तक का PLI मिल सकता है। यूनियनें कहती हैं कि इससे कर्मचारियों में विभाजन पैदा होगा। वे मांग कर रही हैं कि स्कीम को फिलहाल रोका जाए और यूनियनों के साथ द्विपक्षीय चर्चा के बाद इसे संशोधित किया जाए।

अन्य लंबित मुद्दों का समाधान।

यह मामला फिलहाल चीफ लेबर कमिश्नर के पास conciliation में है और दिल्ली हाई कोर्ट में भी विचाराधीन है।

ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

हड़ताल के दिनों में सरकारी और कई प्राइवेट बैंकों की शाखाएं बंद रह सकती हैं। ऑनलाइन बैंकिंग, एटीएम और डिजिटल लेन-देन सामान्य रूप से चलते रह सकते हैं, लेकिन कैश विड्रॉल, चेक क्लियरिंग, लोन प्रोसेसिंग और ब्रांच संबंधी काम प्रभावित हो सकते हैं।

सुझाव:  

जरूरी काम (वेतन जमा, बिल भुगतान, लोन EMI आदि) पहले से निपटा लें।  

डिजिटल बैंकिंग ऐप्स और UPI का इस्तेमाल बढ़ाएं।  

हड़ताल से पहले और बाद में बैंक शाखाओं में भीड़ हो सकती है, इसलिए ऑनलाइन विकल्प प्राथमिकता दें।

BeYourMoneyManager की सलाह

पैसे का सही प्रबंधन करने वाले लोगों के लिए ऐसी घटनाएं याद दिलाती हैं कि बैंकिंग सेवाओं पर निर्भरता कम करने के लिए:

इमरजेंसी फंड तैयार रखें।  

ऑटो-पे और ऑटो-डेबिट सेट करें।  

विभिन्न बैंकों में खाते रखकर जोखिम बांटें।  

डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दें।

UFBU के इस आह्वान के बाद सरकार और IBA की प्रतिक्रिया का इंतजार है। अगर मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल बैंकिंग व्यवस्था को काफी प्रभावित कर सकती है।

अपडेट के लिए www.beyourmoneymanager.com पर नजर बनाए रखें। पैसे का सही प्रबंधन ही असली सुरक्षा है!


Rajanish Kant
सोना 4600 डॉलर पार: PCE मुद्रास्फीति और जैक्सन होल स्पीच से अगले हफ्ते गोल्ड-सिल्वर की दिशा तय होगी | BeYourMoneyManager

सोना और चांदी अगले हफ्ते महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। निवेशक मुख्य रूप से जुलाई की PCE मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल भाषण पर नजरें गड़ाए हुए हैं। ये दोनों घटनाएं प्रेशस मेटल्स मार्केट में उतार-चढ़ाव ला सकती हैं।

इस हफ्ते बुलियन कीमतों में तेज उछाल देखा गया। कमजोर अमेरिकी डॉलर, सितंबर में संभावित फेडरल रिजर्व रेट हाइक की उम्मीदों में कमी और अमेरिकी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताओं ने सोने और चांदी को सहारा दिया। बुधवार को ट्रेजरी बायबैक घोषणा के बाद सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर निकल गया और शुक्रवार दोपहर तक 4600 डॉलर से ऊपर ट्रेड कर रहा था। चांदी भी 69 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी रही और 70 डॉलर के स्तर को छू गई।

अगले हफ्ते का आर्थिक कैलेंडर उपभोक्ता विश्वास, हाउसिंग, मुद्रास्फीति और आर्थिक वृद्धि के नए आंकड़े लेकर आएगा। शुक्रवार को जैक्सन होल सिंपोजियम में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श का भाषण सबसे महत्वपूर्ण घटना होगी। यह भाषण बताएगा कि नए चेयरमैन लगातार मुद्रास्फीति और श्रम बाजार में कमजोरी के संकेतों को कैसे तौल रहे हैं।

अगले हफ्ते के मुख्य आंकड़े

मंगलवार:** कॉन्फ्रेंस बोर्ड कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स और न्यू होम सेल्स  

 ऊंची ब्याज दरों और लगातार महंगाई का परिवारों पर असर इन आंकड़ों से पता चलेगा। कमजोरी सितंबर में रेट्स होल्ड रहने की उम्मीद बढ़ा सकती है।

बुधवार:** कोर PCE प्राइस इंडेक्स, दूसरी तिमाही GDP का दूसरा अनुमान और ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर्स  

  कोर PCE फेडरल रिजर्व की पसंदीदा मुद्रास्फीति माप है। नरम आंकड़े नीति निर्माताओं को धैर्य रखने का मौका दे सकते हैं। GDP में संशोधन और बिजनेस इनवेस्टमेंट के संकेत भी महत्वपूर्ण होंगे।

गुरुवार:** साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स   

श्रम बाजार की हालत का ताजा संकेत मिलेगा।

शुक्रवार:** फेडरल रिजर्व चेयरमैन वॉर्श का जैक्सन होल भाषण, नॉनफार्म पेरोल का प्रीलिमिनरी वार्षिक रिवीजन और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का फाइनल कंज्यूमर सेंटीमेंट  

  भाषण सितंबर FOMC मीटिंग से पहले सबसे साफ संकेत दे सकता है। पेरोल रिवीजन रोजगार आंकड़ों की सही तस्वीर दिखाएगा।

प्रेशस मेटल्स पर असर

अगले हफ्ते के आंकड़े मुख्य रूप से फेडरल रिजर्व नीति के नजरिए से देखे जाएंगे। नरम मुद्रास्फीति, कमजोर उपभोक्ता आंकड़े या पेरोल में गिरावट रेट्स अपरिवर्तित रहने की उम्मीद मजबूत कर सकती है और सोने को और सहारा दे सकती है। मजबूत ग्रोथ डेटा, लगातार महंगाई या वॉर्श का हॉकिश संदेश रेट हाइक की उम्मीदें फिर जगा सकता है और अल्पकाल में सोना-चांदी पर दबाव डाल सकता है।

वर्तमान में सोना ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब ट्रेड कर रहा है। कमजोर डॉलर और फिस्कल चिंताओं ने इसे मजबूत किया है। निवेशकों को सलाह है कि वे इन महत्वपूर्ण आंकड़ों और भाषण पर नजर रखें। बाजार में अस्थिरता की संभावना है, इसलिए अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही निवेश निर्णय लें।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें। बाजार जोखिम भरा होता है और पिछले प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होते।

स्रोत आधारित: Kitco News रिपोर्ट (21 अगस्त 2026)  

वेबसाइट: www.beyourmoneymanager.com 

Rajanish Kant शनिवार, 22 अगस्त 2026