मेडिकल इन्फ्लेशन 12-14% के साथ ₹5-10 लाख का हेल्थ कवर अब कम पड़ रहा है। उम्र, शहर और परिवार के आकार के आधार पर सही सम इंश्योर्ड कैसे चुनें – बेयोरमनीमैनेजर पर पूरा गाइड।
आजकल कई लोग सोचते हैं कि ₹5 लाख या ₹10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस काफी है। लेकिन मेडिकल कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। उद्योग के अनुमान के अनुसार मेडिकल इन्फ्लेशन सालाना 12-14% के आसपास है। मेट्रो शहर के अस्पताल में एक कार्डियक प्रक्रिया या कैंसर ट्रीटमेंट आसानी से ₹15-25 लाख या उससे ज्यादा खर्च करा सकता है। इसलिए सही सम इंश्योर्ड चुनना अब उम्र, रहने की जगह, परिवार के आकार और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।
उम्र सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर है
हेल्थ कवर सिर्फ इनकम के आधार पर नहीं तय करना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ मेडिकल खर्च भी बढ़ते हैं। एक उदाहरण के अनुसार, अगर आज 30 साल की उम्र में ₹5 लाख पर्याप्त लगता है, तो 6-8% इन्फ्लेशन लगाने पर 50 साल की उम्र तक लगभग ₹15 लाख की जरूरत पड़ सकती है। दो वयस्कों के फ्लोटर पॉलिसी के लिए यह आंकड़ा करीब ₹30 लाख तक पहुंच सकता है। जल्दी खरीदने से प्रीमियम कम रहता है और बाद में बीमारी होने पर कवर बढ़ाने में दिक्कत नहीं होती।
परिवार का आकार और स्वास्थ्य इतिहास
फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में एक सम इंश्योर्ड कई सदस्यों में साझा होता है। इसलिए व्यक्तिगत कवर से ज्यादा राशि लेनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फैमिली फ्लोटर के लिए व्यक्तिगत जरूरत का कम से कम तीन गुना कवर रखें। परिवार में पहले से बीमारी या मेडिकल हिस्ट्री हो तो और ध्यान दें।
शहर के अनुसार कवर
जहां आप रहते हैं, वहां के हेल्थकेयर कॉस्ट बहुत फर्क डालते हैं।
मेट्रो शहरों में विशेषज्ञ कम से कम ₹15-20 लाख, कुछ तो ₹25 लाख तक का कवर सुझाते हैं।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में न्यूनतम ₹10 लाख पर्याप्त हो सकता है।
लेकिन याद रखें, स्पेशलाइज्ड ट्रीटमेंट के लिए मेट्रो जाना पड़ सकता है। इसलिए ऊंचे खर्चों को भी ध्यान में रखें।
सीनियर सिटीजन माता-पिता के लिए अलग पॉलिसी
बुजुर्ग माता-पिता को फैमिली फ्लोटर में शामिल न करें। उनके इलाज का खर्च शेयर किए गए सम इंश्योर्ड को जल्दी खत्म कर सकता है। 60 साल के बाद इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। आंकड़ों के अनुसार 60+ उम्र के लोगों का औसत क्लेम करीब ₹1.77 लाख है, जबकि 25 साल से कम उम्र वालों का सिर्फ ₹65,000 के आसपास।
बड़ा कवर कैसे लें – एक पॉलिसी या बेस + सुपर टॉप-अप?
₹1 करोड़ जैसा बड़ा कवर एक ही पॉलिसी में लिया जा सकता है या छोटे बेस कवर के साथ सुपर टॉप-अप जोड़कर। उदाहरण के लिए ₹10 लाख बेस और ₹20 लाख टॉप-अप हो तो ₹15 लाख के बिल में पहले बेस काम आएगा और बाकी टॉप-अप से कवर होगा। कौन सा विकल्प सस्ता और आसान है, यह आपकी जरूरत, पॉलिसी टर्म्स और बजट पर निर्भर करता है।
सुपर टॉप-अप शुरुआत में कम प्रीमियम वाला विकल्प है, लेकिन क्लेम बढ़ने पर महंगा पड़ सकता है और कुछ पाबंदियां हो सकती हैं। एक बड़ी सिंगल पॉलिसी में कैशलेस क्लेम प्रोसेसिंग आसान रहती है। अगर बेस और टॉप-अप अलग-अलग कंपनियों के हों तो कभी-कभी रीइम्बर्समेंट की जरूरत पड़ सकती है।
नियमित रिव्यू जरूरी
एक बार सही कवर लेना काफी नहीं। हर दो साल में या शादी, बच्चे होने, रिटायरमेंट जैसे बड़े बदलाव पर सम इंश्योर्ड की समीक्षा करें। जल्दी शुरू करने से फायदा है क्योंकि बाद में बीमारी होने पर कवर बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। कंपनी का ग्रुप कवर रिटायरमेंट के बाद खत्म हो सकता है, इसलिए खुद का कवर तैयार रखें।
मेडिकल इमरजेंसी फंड भी बनाएं
हेल्थ इंश्योरेंस हर खर्च को कवर नहीं करता। वेटिंग पीरियड वाले खर्च, डेंटल, डायग्नोस्टिक्स, एक्सपेरिमेंटल ट्रीटमेंट या क्लेम रिजेक्ट होने की स्थिति के लिए अलग से मेडिकल कॉर्पस बनाएं। यह फंड इंश्योरेंस से अलग रखें क्योंकि इस्तेमाल करने पर यह खत्म हो जाता है।
निष्कर्ष
₹5-10 लाख का पुराना सोच अब काम नहीं आता। अपनी उम्र, शहर, परिवार और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से कवर चुनें। बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप का कॉम्बिनेशन किफायती तरीका हो सकता है। नियमित रिव्यू और मेडिकल इमरजेंसी फंड से आप और परिवार सुरक्षित रहेंगे।
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