RBI ने The Nabapally Co-Opretive Bank Ltd. | Barasat, पश्चिम बंगाल पर मौद्रिक जुर्माना लगाया, जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि नाबपल्ली को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पश्चिम बंगाल पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 22 जून 2026 के आदेश द्वारा, दि नाबपल्ली को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पश्चिम बंगाल (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी 'अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी)' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 3 लाख (तीन लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए (1) (सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर, इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

बैंक, ग्राहकों के केवाईसी संबंधी जानकारी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री (सीकेवाईसीआर) में अपलोड करने में विफल रहा।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(स्रोत- www.rbi.org.in)


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Rajanish Kant मंगलवार, 30 जून 2026
RBI ने The Citizens Urban Co-operative Bank, जालंधर, पंजाब पर मौद्रिक जुर्मना लगाया,जानें क्यों और कितना

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दि सिटीज़न्स अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जालंधर, पंजाब पर मौद्रिक दंड लगाया


भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 25 जून 2026 के आदेश द्वारा दि सिटीज़न्स अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जालंधर, पंजाब (बैंक) पर आरबीआई द्वारा जारी ‘एक्सपोज़र मानदंड और सांविधिक/अन्य प्रतिबंध’ तथा ‘प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों का व्यापक साइबर सुरक्षा ढांचा- एक श्रेणीकृत दृष्टिकोण’ संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 5 लाख (पाँच लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46(4)(i) और 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

31 मार्च 2025 को बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में आरबीआई द्वारा बैंक का सांविधिक निरीक्षण किया गया। आरबीआई निदेशों के अननुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और तत्संबंधी पत्राचार के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे यह पूछा गया कि उक्त निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के उत्तर और इसके द्वारा की गई अतिरिक्त प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि बैंक के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं, जिनके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

बैंक ने:

  1. कतिपय नाममात्र सदस्यों को निर्धारित विनियामकीय सीमा से अधिक ऋण स्वीकृत किए; और

  2. कोर बैंकिंग समाधान के एक्सेस हेतु द्विस्तरीय प्रमाणीकरण की व्यवस्था नहीं की।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(स्रोत- www.rbi.org.in)


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2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
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Rajanish Kant
बच्चों को पैसे का प्रबंधन सिखाने के 7 आसान तरीके | पेरेंट्स के लिए जरूरी गाइड | BeYourMoneyManagerMetaI Financial Literacy I Money Management Tips I Kids Financial Education I

 

बच्चों और युवा वयस्कों को बजट, खर्च और फाइनेंशियल रिस्पॉन्सिबिलिटी सिखाएं। जानिए 7 प्रैक्टिकल स्टेप्स जो पेरेंट्स ले सकते हैं ताकि बच्चे पैसे को सही तरीके से हैंडल करना सीखें। फाइनेंशियल लिटरेसी से भरा लेख।

बच्चों को पैसे का प्रबंधन सिखाने के 7 आसान और प्रभावी तरीके

पेरेंट्स के लिए पूरा गाइड – स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी सिखाएं  आज के समय में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई-लिखाई नहीं, बल्कि पैसे का सही प्रबंधन (Money Management) सिखाना भी बहुत जरूरी हो गया है। जब बच्चे हाई स्कूल पास करके कॉलेज जाते हैं, पार्टी प्लान करते हैं या फैमिली ट्रिप पर निकलते हैं, तो यही सबसे अच्छा मौका होता है उन्हें फाइनेंशियल लिटरेसी सिखाने का। 

BeYourMoneyManager की इस गाइड में हम 7 प्रैक्टिकल स्टेप्स बता रहे हैं जो पेरेंट्स ले सकते हैं। इनसे बच्चे बजट बनाना, खर्च करना और जिम्मेदारी से पैसे हैंडल करना सीखेंगे।

1. बजट, प्लानिंग और अलोकेशन की अवधारणा शुरू करें

अधिकतर घरों में बजट बनाना अब पुरानी बात हो गई है। इससे बच्चे सोचते हैं कि पैसा अनलिमिटेड है।

समाधान: बच्चों के लिए पार्टी, छुट्टियां या मंथली खर्च का जेनरस लेकिन तय बजट रखें। उन्हें समझाएं कि पैसा सीमित संसाधन है और इसे प्लान करके इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे उन्हें नियंत्रण का एहसास होता है।

2. बजट तय करने में बच्चों को शामिल करें

केवल “मैं इतना ही दे सकता हूं” कहकर बजट थोपने से सीखने का मौका खो जाता है।

बेहतर तरीका: बच्चे के साथ बैठकर खर्च के सभी हेड्स (टिकट, रहना, खाना, मनोरंजन आदि) पर चर्चा करें। उनकी पसंद सुनें, नेगोशिएट करें और एक बफर भी रखें। इससे वे खुद को भागीदार महसूस करते हैं और बजट के प्रति जिम्मेदार बनते हैं।

3. सारे खर्चों की पूरी पारदर्शिता रखें

बड़े खर्चे (जैसे हॉस्टल फीस, एयर टिकट) आप ही पे करते हों तो भी इन्हें बजट का हिस्सा बताएं। बच्चे को कुल लागत का अंदाजा होना चाहिए।

यह हीरो या विक्टिम बनने की बजाय फैक्ट्स शेयर करने का मामला है। इससे बच्चे वास्तविक लागत समझ पाते हैं।

4. बजट के अंदर फैसले लेने का मौका दें

बच्चे अगर सस्ती फ्लाइट चुनना चाहें, बैकपैकिंग करना चाहें या होस्टल में रहना चाहें तो उन्हें यह आजादी दें।

उदाहरण: एक बच्चे ने अपने दोस्तों के साथ ₹500 के बजट में 3 दिन की ट्रेन ट्रिप की। शुरू में मुश्किलें आईं लेकिन बाद में यह उनके लिए यादगार और सीख भरी अनुभव बन गई। गलतियां करने दो – छोटी उम्र में ये महंगी नहीं पड़तीं।

5. सलाह दें लेकिन अनसोलिसिटेड एडवाइस न दें

बच्चे जब पूछें तभी काउंसलिंग दें। शुरू में ही नियम और बॉउंड्री तय कर लें (जैसे नाबालिग को शराब नहीं)। उसके बाद उन्हें अपना गेम खेलने दें।

अनचाही सलाह और “मैं बेहतर जानता हूं” वाला रवैया उनके सीखने की प्रक्रिया में बाधा डालता है।

6. प्राइवेसी और एजेंसी दें, लेकिन हर रुपए का हिसाब न मांगें

बजट के अंदर फैसले लेने की स्वतंत्रता दें। हर छोटे खर्च पर जवाब-तलब न करें। उन्हें मटेरियलिटी (महत्वपूर्ण vs मामूली) का कॉन्सेप्ट समझाएं।

बड़े फैसलों पर जवाबदेही जरूर रखें, लेकिन माइक्रो-मैनेजमेंट न करें। इससे वे बिना डर के सीख पाते हैं।

7. इसे औपचारिक लेसन न बनाएं – मजेदार और लिबरेटिंग बनाएं

बहुत ज्यादा इंस्ट्रक्शन, फॉलो-अप और पोस्ट-मॉर्टम से मजा खत्म हो जाता है।

बजट मैनेजमेंट को “बड़े होने का जरूरी और मजेदार रिचुअल” बनाएं। बच्चे खुद अनुभव शेयर करें, स्टोरीज सुनाएं और सीख लें। आप सिर्फ सपोर्टिव रोल में रहें।

निष्कर्ष:

बच्चों को खाली चेक या क्रेडिट कार्ड देकर हर मांग पूरी करना एनेबलिंग है, जो लंबे समय में नुकसानदायक है। इसके बजाय तय सीमाओं के साथ आजादी दें। इससे वे जब कमाना शुरू करेंगे तो बेहतर फैसले ले पाएंगे।

पेरेंट्स को बस थोड़ी सोच, मेहनत और भरपूर धैर्य की जरूरत है। फाइनेंशियल लिटरेसी घर से ही शुरू होती है।अपने अनुभव शेयर करें – आपने अपने बच्चों को पैसे का प्रबंधन कैसे सिखाया?

कमेंट में बताएं। 


 

Rajanish Kant
कमजोर मॉनसून 2026: क्या भारत की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ेगी? निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट | BeYourMoneyManager

2026 में कमजोर मॉनसून और एल नीनो के प्रभाव से खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा। अर्थव्यवस्था, किसान, शेयर बाजार और निवेश पर असर जानें। निवेशकों के लिए पूरी गाइड।

कमजोर मॉनसून 2026: क्या भारत की अर्थव्यवस्था को लगेगा झटका? निवेशकों को क्या जानना चाहिए

 जून 2026 में भारत का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर शुरूआत के साथ आगे बढ़ रहा है। 22 जून तक देश में औसत से 43% कम बारिश दर्ज की गई। एल नीनो की वापसी के कारण इस साल मॉनसून सामान्य से कम (90% LPA) रहने का अनुमान है। ऐसे में सवाल उठता है – क्या कमजोर मॉनसून भारत की अर्थव्यवस्था को धीमा कर देगा? निवेशक, किसान और आम उपभोक्ता दोनों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है।

मॉनसून की कमजोरी से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मॉनसून देश की कुल वार्षिक वर्षा का करीब 70% प्रदान करता है, जो $300 बिलियन के फार्म इकोनॉमिक को सीधे प्रभावित करता है।

मुख्य प्रभाव:खाद्य मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी: QuantEco Research के अनुसार, 10% बारिश की कमी से हेडलाइन CPI मुद्रास्फीति में 1 प्रतिशत पॉइंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर दलहन, तिलहन और सब्जियों की कीमतें प्रभावित होंगी।

ग्रामीण मांग पर दबाव: देरी से मॉनसून आने पर खाद्यान्न खरीदारी, ट्रैक्टर बुकिंग और दोपहिया वाहनों की बिक्री प्रभावित होती है। त्योहारी सीजन (सितंबर-अक्टूबर) में खपत घट सकती है।

कुल GDP ग्रोथ पर असर: गंभीर स्थिति में कृषि उत्पादन घटने से GDP ग्रोथ में 0.5-1% तक की कमी आ सकती है, हालांकि सरकारी बफर स्टॉक और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से आंशिक राहत मिल सकती है।

RBI और सरकार की तैयारियां

RBI गवर्नर और MPC सदस्यों ने मॉनसून पर नजर रखने की बात कही है। फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है, लेकिन अगर खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.5% के आसपास पहुंच गई तो रेट हाइक की संभावना जताई जा रही है।सरकार ने 315 जिलों को कम बारिश वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है, जिसमें 111 हाई-प्रायोरिटी जिले शामिल हैं। contingency plans के तहत फसल चयन, पानी का प्रबंधन और आपात उपाय किए जा रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है? (Investment Implications)

सेक्टर-विशेष प्रभाव:नकारात्मक प्रभाव: ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट कंपनियां, दोपहिया वाहन निर्माता (Hero, Bajaj), ग्रामीण फाइनेंशियल कंपनियां (ग्रामीण लोन बुक वाली NBFC)।

सकारात्मक/न्यूट्रल: शहरी फोकस्ड कंपनियां, IT, एक्सपोर्ट सेक्टर और FMCG की प्रीमियम रेंज।

मुद्रास्फीति और बॉन्ड मार्केट: बढ़ती खाद्य मुद्रास्फीति से बॉन्ड यील्ड बढ़ सकते हैं, जिससे इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ सकता है।

लंबी अवधि की रणनीति: विविधीकरण बनाए रखें।

FMCG और Agri-input कंपनियों (उर्वरक, बीज) में सतर्कता बरतें।

अच्छी फंडामेंटल वाली कंपनियों में SIP जारी रखें, लेकिन शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी के लिए तैयार रहें।

2023 का सबक और मौजूदा स्थिति2023 में भी कमजोर मॉनसून के कारण चावल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस साल अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन pulses और oilseeds पर नजर रखनी होगी क्योंकि बफर स्टॉक इनमें सीमित है।

निष्कर्ष:

कमजोर मॉनसून निश्चित रूप से चुनौतियां पैदा करेगा, लेकिन भारत की बढ़ती सिंचाई क्षमता, सरकारी स्टॉक और आर्थिक विविधीकरण से पूरा प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है। निवेशकों को भावनाओं में बहने की बजाय डेटा और सेक्टर-विशेष रिसर्च पर फोकस करना चाहिए।

BeYourMoneyManager की सलाह: मॉनसून अपडेट नियमित रूप से फॉलो करें और अपने पोर्टफोलियो को तदनुसार रिव्यू करें। लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद पर भरोसा रखें।






Rajanish Kant सोमवार, 29 जून 2026
IMD ने जून 2026 को बताया 16 साल का सबसे सूखा महीना: 43% कम बारिश, खरीफ फसलों पर असर | Monsoon Update 2026

जून 2026 में 43% बारिश की कमी के साथ IMD ने इसे 16 साल का सबसे सूखा जून घोषित किया। खरीफ बुवाई प्रभावित, El Nino का खतरा और अर्थव्यवस्था पर असर। विस्तृत विश्लेषण और अपडेट पढ़ें।


IMD ने जून 2026 को 16 साल का सबसे सूखा महीना बताया, 43% बारिश की भारी कमी - खरीफ फसलों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर?नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 देश के लिए 16 सालों का सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। पूरे देश में 1 से 28 जून तक औसतन सिर्फ 85.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 149.8 मिलीमीटर है। यानी 43% की भारी कमीयह जून 2009 के बाद सबसे कम बारिश वाला महीना है और 1901 के बाद तीसरा सबसे सूखा जून माना जा रहा है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार पूरा जून करीब 95 मिमी बारिश के साथ खत्म हो सकता है।क्षेत्रीय स्थिति कैसी रही?
  • मध्य भारत: -56% (सबसे ज्यादा प्रभावित)
  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: -43%
  • दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: -31%
  • उत्तर-पश्चिम भारत: -29%
कई राज्यों में स्थिति और भी गंभीर रही। गुजरात में 80% कमी, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 67% कमी, महाराष्ट्र (-58%), उत्तर प्रदेश (-56%), ओडिशा (-54%) जैसे प्रमुख कृषि राज्य बुरी तरह प्रभावित हुए। केवल राजस्थान, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में ही बारिश सामान्य स्तर के आसपास रही।खरीफ फसलों पर असरकृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 724 जिलों में से 315 जिलों में इस सीजन में कम बारिश हो सकती है। 111 जिले सबसे संवेदनशील हैं जहां सिंचाई कवरेज 25% से भी कम है।बुवाई का काम जून के तीसरे सप्ताह में ही शुरू हुआ है। धान, कपास, दालें, प्याज, टमाटर जैसी फसलों की रोपाई और बुवाई में देरी हो रही है। अभी तक कुल खरीफ क्षेत्र का सिर्फ करीब 10% ही कवर हुआ है, हालांकि कुल रकबा पिछले साल से थोड़ा बेहतर दिख रहा है। जुलाई-अगस्त में बारिश की अच्छी मात्रा बेहद जरूरी है क्योंकि इन दो महीनों में पूरे मानसून का करीब 60% बारिश होती है।आगे क्या है अनुमान?IMD के अनुसार अगले 2-3 दिनों में गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों (जैसे University of Reading के Akshay Deoras) का कहना है कि जुलाई के मध्य में मानसून फिर कमजोर पड़ सकता है।El Niño की स्थिति पहले से मौजूद है और यह और मजबूत होने की आशंका है। IMD ने पूरे मानसून सीजन (जून-सितंबर) के लिए 90% LPA का नीचे सामान्य अनुमान जारी किया है, जो 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून हो सकता है।Money Manager Perspective: अर्थव्यवस्था और निवेश पर प्रभाव
  • कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: बारिश की कमी से खरीफ उत्पादन प्रभावित होने पर खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। FMCG, ट्रैक्टर, बीज और उर्वरक कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ सकता है।
  • जल संकट: जलाशयों और भूजल स्तर पर असर, जिससे बिजली उत्पादन (हाइड्रो) और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
  • सरकारी कदम: केंद्र और राज्य सरकारें संभावित contingency plans पर काम कर रही हैं। निवेशकों को FMCG, agrochemicals और irrigation-related कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष:
2026 का मानसून शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। किसानों, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। हम लगातार IMD अपडेट, फसल बुवाई डेटा और बाजार प्रभाव पर नजर रख रहे हैं।
अपडेटेड: 28 जून 2026
स्रोत: IMD आंकड़े और Financial Express

Rajanish Kant रविवार, 28 जून 2026
Taxpayers के लिए महत्वपूर्ण राहत, ITAT का बड़ा फैसला: property में कथित कैश पेमेंट पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स नहीं लगा सकता | सिर्फ थर्ड पार्टी डॉक्यूमेंट्स से नहीं होगा ऐडिशन

मुंबई ITAT ने स्पष्ट किया कि प्रॉपर्टी खरीद में कथित ऑन-मनी (कैश) पेमेंट पर सिर्फ बिल्डर के पास से बरामद डॉक्यूमेंट्स के आधार पर टैक्स ऐडिशन नहीं किया जा सकता। स्वतंत्र सबूत जरूरी। टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण राहत।

ITAT का महत्वपूर्ण फैसला: प्रॉपर्टी में कथित कैश पेमेंट पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अकेले थर्ड पार्टी पेपर से टैक्स नहीं लगा सकतानई दिल्ली। प्रॉपर्टी खरीदते समय अगर बिल्डर के पास से कथित "ऑन-मनी" या कैश पेमेंट के दस्तावेज मिलते हैं, तो क्या इनकम टैक्स विभाग केवल उसी आधार पर टैक्सपेयर पर अनडिस्क्लोज्ड इनकम जोड़ सकता है? 

मुंबई ITAT ने इस सवाल का साफ जवाब देते हुए कहा है कि नहीं।ITAT ने एक महत्वपूर्ण आदेश में ₹90 लाख के टैक्स ऐडिशन को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि थर्ड पार्टी (बिल्डर) के पास से बरामद लूज पेपर्स या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स अकेले पर्याप्त सबूत नहीं माने जा सकते। टैक्स विभाग को स्वतंत्र और पुष्टि करने वाले सबूत (corroborative evidence) पेश करने होंगे जो खरीदार को उस कैश पेमेंट से जोड़ते हों। 

केस क्या था?

केस संजीत कुमार केदारनाथ गुप्ता का था। उन्होंने अपने भाई के साथ GNP Galaxy Phase I में एक कमर्शियल यूनिट जॉइंटली खरीदी थी। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी की कीमत ₹50 लाख बताई गई।2021 में GNP ग्रुप पर इनकम टैक्स विभाग की सर्च हुई। सर्च में बिल्डर के पास से लूज पेपर्स और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स मिले, जिनमें कुछ खरीदारों से कैश पेमेंट का जिक्र था।0 विभाग ने इन्हीं के आधार पर गुप्ता पर ₹90 लाख कैश "ऑन-मनी" पेमेंट का आरोप लगाया और उनके AY 2019-20 के असेसमेंट को दोबारा खोला।गुप्ता ने इनकार किया और कहा कि पूरा पैसा बैंकिंग चैनल से ही पे किया गया था। उन्होंने ये भी तर्क दिया कि दस्तावेज बिल्डर के थे, इसलिए उन्हें उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

ITAT ने क्यों रद्द किया ऐडिशन?

मुंबई ITAT बेंच ने पाया कि टैक्स विभाग गुप्ता के पास से कोई कैश नहीं बरामद कर सका, कोई रसीद नहीं मिली, ना ही बैंक विड्रॉल का कोई सबूत था जो अनअकाउंटेड मनी के फ्लो को दिखाता हो।दस्तावेज थर्ड पार्टी (बिल्डर) के पास से मिले थे।

खरीदार न तो उनके लेखक थे और न ही कस्टोडियन।

विभाग ने बिल्डर से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए, लेकिन गुप्ता को क्रॉस-एग्जामिनेशन का मौका नहीं दिया।


इन सब कारणों से ITAT ने ₹90 लाख का ऐडिशन रद्द कर दिया।बोझ टैक्स विभाग पर है – सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवालाITAT ने सुप्रीम कोर्ट के KP Varghese vs ITO फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनडिस्क्लोज्ड इनकम साबित करने का बोझ टैक्स विभाग पर है। टैक्सपेयर को नेगेटिव साबित करने (कि मैंने कैश नहीं दिया) के लिए नहीं कहा जा सकता।इसके अलावा:सेक्शन 69A (अनएक्सप्लेन्ड मनी) लागू नहीं होता क्योंकि टैक्सपेयर के पास कोई अनएक्सप्लेन्ड मनी नहीं मिली।

लूज पेपर्स या प्राइवेट रिकॉर्ड्स अकेले सबूत नहीं माने जा सकते (सुप्रीम कोर्ट के Common Cause और CBI vs V.C. Shukla केस का हवाला)।

बॉम्बे हाईकोर्ट के Ashok Commercial Enterprises vs ACIT फैसले का भी जिक्र किया गया।

टैक्सपेयर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह आदेश उन हजारों टैक्सपेयर्स के लिए राहत भरा है जिन पर रियल एस्टेट सर्च के दौरान बिल्डर के दस्तावेजों के आधार पर "ऑन-मनी" का केस बनाया जा रहा है।मुख्य takeaways:सर्च में मिले दस्तावेज जांच का आधार बन सकते हैं, लेकिन अकेले टैक्स ऐडिशन के लिए पर्याप्त नहीं।

विभाग को खरीदार से लिंक करने वाले ठोस, स्वतंत्र सबूत पेश करने होंगे।

बिना क्रॉस-एग्जामिनेशन के थर्ड पार्टी बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

सलाह: प्रॉपर्टी खरीदते समय सभी पेमेंट्स बैंकिंग चैनल से करें और पूरी डॉक्यूमेंटेशन रखें। अगर आपको नोटिस मिले तो तुरंत टैक्स एक्सपर्ट या CA से सलाह लें।स्रोत: मुंबई ITAT आदेश (लाइवमिंट रिपोर्ट के आधार पर)




Rajanish Kant
ITR Filing Not Mandatory for Everyone: AY 2026-27 में कौन स्किप कर सकता है Income Tax Return? पूरी डिटेल्स

ITR फाइलिंग कब जरूरी नहीं है? FY 2025-26 / AY 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न कौन नहीं भर सकता? इनकम थ्रेशोल्ड, NRI, सीनियर सिटीजन और अन्य एक्सेम्प्शन की पूरी जानकारी।ITR Filing Not Mandatory for Everyone: AY 2026-27 में कौन स्किप कर सकता है Income Tax Return?


इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग का सीजन चल रहा है। कई लोग कन्फ्यूज हैं कि क्या हर किसी को ITR भरना ही पड़ता है? जवाब है – नहीं। आयकर विभाग ने कुछ कैटेगरी के टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करने से छूट दी है, बशर्ते वे कुछ शर्तें पूरी करें।www.beyourmoneymanager.com पर इस लेख में हम आसान भाषा में बताएंगे कि कौन ITR फाइल नहीं कर सकता, किन शर्तों का ध्यान रखना है और गलती करने पर क्या नुकसान हो सकता है।

ITR फाइलिंग कब जरूरी नहीं है?

(Income Threshold)FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए:

नई टैक्स रिजीम में कुल इनकम ₹4 लाख से कम होने पर ITR फाइल करना जरूरी नहीं।

पुरानी टैक्स रिजीम में कुल इनकम ₹2.5 लाख से कम होने पर ITR फाइल करना जरूरी नहीं।

नोट: कुल इनकम का मतलब सभी स्रोतों (सैलरी, ब्याज, किराया, कैपिटल गेन आदि) से हुई आय का योग है (Chapter VIA डिडक्शन्स के बाद)।

किन लोगों को ITR फाइल करने से छूट है?

पूरी तरह एग्जेम्प्ट इनकम वाले व्यक्ति

जिनकी सारी आय इनकम टैक्स एक्ट के तहत पूरी तरह免 (exempt) है, उन्हें ITR फाइल करने की जरूरत नहीं।

नाबालिग बच्चों का इनकम

अगर बच्चे की इनकम पैरेंट्स के साथ क्लब की जाती है (Section 64), तो बच्चे को अलग से ITR फाइल करने की जरूरत नहीं।

Non-Resident Indians (NRIs) को विशेष छूट  Section 115G के तहत: अगर NRI की इनकम सिर्फ विदेशी मुद्रा एसेट से इन्वेस्टमेंट इनकम या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन है और TDS कट चुका है, तो ITR फाइल करने की जरूरत नहीं।

स्पोर्ट्स पर्सन, एंटरटेनर और स्पोर्ट्स एसोसिएशन (Section 115BBA)

भारत में खेल/मनोरंजन से कमाई पर TDS कटने के बाद ITR की जरूरत नहीं, कुछ शर्तों के साथ।

Section 115A के तहत कुछ नॉन-रेजिडेंट्स

विशिष्ट बॉन्ड्स, GDRs, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड यूनिट्स या रॉयल्टी/टेक्निकल सर्विसेज इनकम पर TDS होने पर छूट।

महत्वपूर्ण: छूट होने के बावजूद ITR भरना फायदेमंद हो सकता है।

ITR फाइलिंग कब अनिवार्य हो जाती है? (मुख्य शर्तें)भले ही इनकम थ्रेशोल्ड के अंदर हों, ये स्थितियां ITR फाइलिंग को अनिवार्य बना सकती हैं:बिजनेस/प्रोफेशन में लॉस हुआ हो और उसे कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हों

कैपिटल गेन लॉस कैरी फॉरवर्ड करना हो

विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च

बिजली बिल ₹1 लाख से ज्यादा

बिजनेस टर्नओवर ₹60 लाख या प्रोफेशन ₹10 लाख से ज्यादा

बैंक में ₹1 करोड़ से ज्यादा करंट अकाउंट डिपॉजिट

सेविंग्स अकाउंट में ₹50 लाख से ज्यादा डिपॉजिट

TDS/TCS ₹25,000 से ज्यादा (सीनियर सिटीजन के लिए ₹50,000)

विदेशी एसेट्स रखने वाले रेजिडेंट

ITR न भरने के फायदे और नुकसानफायदे (जब छूट हो):समय और मेहनत की बचत

नुकसान (अगर गलती से न भरें):लेट फाइलिंग पर ब्याज

रिफंड क्लेम नहीं कर पाएंगे

लोन, वीजा, क्रेडिट कार्ड में दिक्कत

लॉस कैरी फॉरवर्ड का फायदा गंवा देंगे

नोटिस और पेनाल्टी का खतरा

सलाह: ITR भरना हमेशा सुरक्षित और फायदेमंद होता है। यह आपका इनकम प्रूफ दस्तावेज बन जाता है।

सीनियर सिटीजन क्या रखें तैयार?

बैंक स्टेटमेंट

Form 26AS और AIS

ब्रोकरेज स्टेटमेंट

रेंटल इनकम के दस्तावेज

निष्कर्ष

ITR फाइलिंग हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन स्मार्ट टैक्सपेयर voluntary filing को प्राथमिकता देते हैं। सही जानकारी के साथ सही डिसीजन लें।

Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। टैक्स नियम बदल सकते हैं। कृपया Chartered Accountant या Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट से सलाह लें।



 





Rajanish Kant शनिवार, 27 जून 2026