IMD ने जून 2026 को बताया 16 साल का सबसे सूखा महीना: 43% कम बारिश, खरीफ फसलों पर असर | Monsoon Update 2026

जून 2026 में 43% बारिश की कमी के साथ IMD ने इसे 16 साल का सबसे सूखा जून घोषित किया। खरीफ बुवाई प्रभावित, El Nino का खतरा और अर्थव्यवस्था पर असर। विस्तृत विश्लेषण और अपडेट पढ़ें।


IMD ने जून 2026 को 16 साल का सबसे सूखा महीना बताया, 43% बारिश की भारी कमी - खरीफ फसलों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर?नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 देश के लिए 16 सालों का सबसे सूखा जून साबित हो रहा है। पूरे देश में 1 से 28 जून तक औसतन सिर्फ 85.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 149.8 मिलीमीटर है। यानी 43% की भारी कमीयह जून 2009 के बाद सबसे कम बारिश वाला महीना है और 1901 के बाद तीसरा सबसे सूखा जून माना जा रहा है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार पूरा जून करीब 95 मिमी बारिश के साथ खत्म हो सकता है।क्षेत्रीय स्थिति कैसी रही?
  • मध्य भारत: -56% (सबसे ज्यादा प्रभावित)
  • पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत: -43%
  • दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: -31%
  • उत्तर-पश्चिम भारत: -29%
कई राज्यों में स्थिति और भी गंभीर रही। गुजरात में 80% कमी, छत्तीसगढ़ और झारखंड में 67% कमी, महाराष्ट्र (-58%), उत्तर प्रदेश (-56%), ओडिशा (-54%) जैसे प्रमुख कृषि राज्य बुरी तरह प्रभावित हुए। केवल राजस्थान, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में ही बारिश सामान्य स्तर के आसपास रही।खरीफ फसलों पर असरकृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 724 जिलों में से 315 जिलों में इस सीजन में कम बारिश हो सकती है। 111 जिले सबसे संवेदनशील हैं जहां सिंचाई कवरेज 25% से भी कम है।बुवाई का काम जून के तीसरे सप्ताह में ही शुरू हुआ है। धान, कपास, दालें, प्याज, टमाटर जैसी फसलों की रोपाई और बुवाई में देरी हो रही है। अभी तक कुल खरीफ क्षेत्र का सिर्फ करीब 10% ही कवर हुआ है, हालांकि कुल रकबा पिछले साल से थोड़ा बेहतर दिख रहा है। जुलाई-अगस्त में बारिश की अच्छी मात्रा बेहद जरूरी है क्योंकि इन दो महीनों में पूरे मानसून का करीब 60% बारिश होती है।आगे क्या है अनुमान?IMD के अनुसार अगले 2-3 दिनों में गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों (जैसे University of Reading के Akshay Deoras) का कहना है कि जुलाई के मध्य में मानसून फिर कमजोर पड़ सकता है।El Niño की स्थिति पहले से मौजूद है और यह और मजबूत होने की आशंका है। IMD ने पूरे मानसून सीजन (जून-सितंबर) के लिए 90% LPA का नीचे सामान्य अनुमान जारी किया है, जो 2015 के बाद सबसे कमजोर मानसून हो सकता है।Money Manager Perspective: अर्थव्यवस्था और निवेश पर प्रभाव
  • कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: बारिश की कमी से खरीफ उत्पादन प्रभावित होने पर खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। FMCG, ट्रैक्टर, बीज और उर्वरक कंपनियों के शेयरों पर दबाव पड़ सकता है।
  • जल संकट: जलाशयों और भूजल स्तर पर असर, जिससे बिजली उत्पादन (हाइड्रो) और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
  • सरकारी कदम: केंद्र और राज्य सरकारें संभावित contingency plans पर काम कर रही हैं। निवेशकों को FMCG, agrochemicals और irrigation-related कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष:
2026 का मानसून शुरुआत से ही चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। किसानों, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। हम लगातार IMD अपडेट, फसल बुवाई डेटा और बाजार प्रभाव पर नजर रख रहे हैं।
अपडेटेड: 28 जून 2026
स्रोत: IMD आंकड़े और Financial Express

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