Taxpayers के लिए महत्वपूर्ण राहत, ITAT का बड़ा फैसला: property में कथित कैश पेमेंट पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स नहीं लगा सकता | सिर्फ थर्ड पार्टी डॉक्यूमेंट्स से नहीं होगा ऐडिशन

मुंबई ITAT ने स्पष्ट किया कि प्रॉपर्टी खरीद में कथित ऑन-मनी (कैश) पेमेंट पर सिर्फ बिल्डर के पास से बरामद डॉक्यूमेंट्स के आधार पर टैक्स ऐडिशन नहीं किया जा सकता। स्वतंत्र सबूत जरूरी। टैक्सपेयर्स के लिए महत्वपूर्ण राहत।

ITAT का महत्वपूर्ण फैसला: प्रॉपर्टी में कथित कैश पेमेंट पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अकेले थर्ड पार्टी पेपर से टैक्स नहीं लगा सकतानई दिल्ली। प्रॉपर्टी खरीदते समय अगर बिल्डर के पास से कथित "ऑन-मनी" या कैश पेमेंट के दस्तावेज मिलते हैं, तो क्या इनकम टैक्स विभाग केवल उसी आधार पर टैक्सपेयर पर अनडिस्क्लोज्ड इनकम जोड़ सकता है? 

मुंबई ITAT ने इस सवाल का साफ जवाब देते हुए कहा है कि नहीं।ITAT ने एक महत्वपूर्ण आदेश में ₹90 लाख के टैक्स ऐडिशन को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि थर्ड पार्टी (बिल्डर) के पास से बरामद लूज पेपर्स या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स अकेले पर्याप्त सबूत नहीं माने जा सकते। टैक्स विभाग को स्वतंत्र और पुष्टि करने वाले सबूत (corroborative evidence) पेश करने होंगे जो खरीदार को उस कैश पेमेंट से जोड़ते हों। 

केस क्या था?

केस संजीत कुमार केदारनाथ गुप्ता का था। उन्होंने अपने भाई के साथ GNP Galaxy Phase I में एक कमर्शियल यूनिट जॉइंटली खरीदी थी। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के अनुसार प्रॉपर्टी की कीमत ₹50 लाख बताई गई।2021 में GNP ग्रुप पर इनकम टैक्स विभाग की सर्च हुई। सर्च में बिल्डर के पास से लूज पेपर्स और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स मिले, जिनमें कुछ खरीदारों से कैश पेमेंट का जिक्र था।0 विभाग ने इन्हीं के आधार पर गुप्ता पर ₹90 लाख कैश "ऑन-मनी" पेमेंट का आरोप लगाया और उनके AY 2019-20 के असेसमेंट को दोबारा खोला।गुप्ता ने इनकार किया और कहा कि पूरा पैसा बैंकिंग चैनल से ही पे किया गया था। उन्होंने ये भी तर्क दिया कि दस्तावेज बिल्डर के थे, इसलिए उन्हें उनके खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

ITAT ने क्यों रद्द किया ऐडिशन?

मुंबई ITAT बेंच ने पाया कि टैक्स विभाग गुप्ता के पास से कोई कैश नहीं बरामद कर सका, कोई रसीद नहीं मिली, ना ही बैंक विड्रॉल का कोई सबूत था जो अनअकाउंटेड मनी के फ्लो को दिखाता हो।दस्तावेज थर्ड पार्टी (बिल्डर) के पास से मिले थे।

खरीदार न तो उनके लेखक थे और न ही कस्टोडियन।

विभाग ने बिल्डर से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए, लेकिन गुप्ता को क्रॉस-एग्जामिनेशन का मौका नहीं दिया।


इन सब कारणों से ITAT ने ₹90 लाख का ऐडिशन रद्द कर दिया।बोझ टैक्स विभाग पर है – सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवालाITAT ने सुप्रीम कोर्ट के KP Varghese vs ITO फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अनडिस्क्लोज्ड इनकम साबित करने का बोझ टैक्स विभाग पर है। टैक्सपेयर को नेगेटिव साबित करने (कि मैंने कैश नहीं दिया) के लिए नहीं कहा जा सकता।इसके अलावा:सेक्शन 69A (अनएक्सप्लेन्ड मनी) लागू नहीं होता क्योंकि टैक्सपेयर के पास कोई अनएक्सप्लेन्ड मनी नहीं मिली।

लूज पेपर्स या प्राइवेट रिकॉर्ड्स अकेले सबूत नहीं माने जा सकते (सुप्रीम कोर्ट के Common Cause और CBI vs V.C. Shukla केस का हवाला)।

बॉम्बे हाईकोर्ट के Ashok Commercial Enterprises vs ACIT फैसले का भी जिक्र किया गया।

टैक्सपेयर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह आदेश उन हजारों टैक्सपेयर्स के लिए राहत भरा है जिन पर रियल एस्टेट सर्च के दौरान बिल्डर के दस्तावेजों के आधार पर "ऑन-मनी" का केस बनाया जा रहा है।मुख्य takeaways:सर्च में मिले दस्तावेज जांच का आधार बन सकते हैं, लेकिन अकेले टैक्स ऐडिशन के लिए पर्याप्त नहीं।

विभाग को खरीदार से लिंक करने वाले ठोस, स्वतंत्र सबूत पेश करने होंगे।

बिना क्रॉस-एग्जामिनेशन के थर्ड पार्टी बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

सलाह: प्रॉपर्टी खरीदते समय सभी पेमेंट्स बैंकिंग चैनल से करें और पूरी डॉक्यूमेंटेशन रखें। अगर आपको नोटिस मिले तो तुरंत टैक्स एक्सपर्ट या CA से सलाह लें।स्रोत: मुंबई ITAT आदेश (लाइवमिंट रिपोर्ट के आधार पर)




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