Diwali Muhurat Trading 2026 Timing: NSE और BSE 8 नवंबर को 2:20 से 3:30 बजे तक खास ट्रेडिंग सेशन करेंगे| निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें l Diwali Muhurat Trading Timing l beyourmoneymanager

मुहूर्त ट्रेडिंग 2026: दिवाली पर NSE और BSE का खास सेशन – जानें समय और महत्व

दिवाली के शुभ अवसर पर शेयर बाजार भी परंपरा को निभाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 8 नवंबर 2026 को मुहूर्त ट्रेडिंग सेशन आयोजित करेंगे। यह सेशन शाम 2:20 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

मुहूर्त ट्रेडिंग क्या है?

मुहूर्त ट्रेडिंग दिवाली के दिन आयोजित होने वाला एक प्रतीकात्मक और शुभ ट्रेडिंग सेशन है। इसमें निवेशक कम समय के लिए शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य सिक्योरिटीज में ट्रेड करते हैं। यह सेशन बाजार की सामान्य ट्रेडिंग से अलग होता है और इसे धन-लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में देखा जाता है। कई निवेशक इस दिन नए खाते खोलते हैं या प्रतीकात्मक खरीदारी करते हैं।

2026 में मुहूर्त ट्रेडिंग का समय

  • तारीख: 8 नवंबर 2026
  • समय: दोपहर 2:20 बजे से 3:30 बजे तक
  • एक्सचेंज: NSE और BSE दोनों

यह समय आमतौर पर दिवाली के दिन निर्धारित मुहूर्त के अनुसार तय किया जाता है। ट्रेडिंग से पहले और बाद में सामान्य बाजार बंद रहता है।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें

  1. प्रतीकात्मक निवेश करें – मुहूर्त ट्रेडिंग में बड़े जोखिम वाले फैसले लेने से बचें। ज्यादातर लोग छोटी मात्रा में शेयर खरीदते हैं।
  2. बाजार की स्थिति समझें – मौजूदा बाजार के मूड को ध्यान में रखकर ही हिस्सा लें।
  3. SIP और लंबी अवधि के निवेश पर फोकस – मुहूर्त ट्रेडिंग सिर्फ एक दिन का आयोजन है। असली संपत्ति लंबे समय के अनुशासित निवेश से बनती है।
  4. अपनी रिसर्च खुद करें – किसी भी ट्रेडिंग से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स और अपने वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखें।

BeYourMoneyManager की सलाह

दिवाली का यह मौका आपके पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का भी अच्छा समय है। मुहूर्त ट्रेडिंग में भाग लेने से पहले अपने रिस्क प्रोफाइल, लक्ष्य और मौजूदा निवेश की जांच जरूर कर लें। याद रखें – बाजार में सफलता शॉर्टकट से नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और सही योजना से मिलती है।

www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से अपडेट्स, मार्केट एनालिसिस और पर्सनल फाइनेंस टिप्स पाएं। अपने पैसे का सही मैनेजमेंट करके वित्तीय स्वतंत्रता की ओर बढ़ें।

नोट: यह जानकारी सामान्य ज्ञान और सार्वजनिक घोषणाओं पर आधारित है। निवेश के फैसले अपनी समझ और रिसर्च के आधार पर ही लें।

Rajanish Kant सोमवार, 19 अक्टूबर 2026
ED ने WhatsApp Pump एंड Dump शेयर Scam में ₹200 करोड़ फ्रीज किए – RM Drip और R&B Denims घोटाले से 1 लाख निवेशक प्रभावित |निवेशकों के लिए सबक – ऐसे स्कैम से कैसे बचें? I BeYourMoneyManager

प्रवर्तन निदेशालय (ED) मुंबई जोनल ऑफिस ने 16 अक्टूबर 2026 को मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर के 29 परिसरों पर Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत छापेमारी की। यह कार्रवाई WhatsApp आधारित “पंप एंड डंप” शेयर मैनिपुलेशन स्कैम से जुड़ी है, जिसमें दो लिस्टेड कंपनियों – R M Drip and Sprinklers Systems Ltd. और R&B Denims Ltd. – के शेयरों में हेरफेर का आरोप है।

ED की प्रेस रिलीज के अनुसार, इस स्कैम में करीब ₹200 करोड़ के ट्रेडिंग अकाउंट्स फ्रीज कर दिए गए हैं। साथ ही आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइसेस, शेयर ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स और प्रॉपर्टी दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। आगे की जांच जारी है।

स्कैम कैसे काम करता था?

अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच इन दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट्स प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट के जरिए कम कीमत पर जारी किए। इन शेयरों की खरीदारी ज्यादातर एक छोटे से जुड़े सर्कल (कनेक्टेड पर्सन्स, फर्म्स और लेंडर्स) से आई। इसके बाद कई महीनों तक शेयर कीमतें लगातार बढ़ाई गईं, जबकि शेयर ज्यादातर उन्हीं हाथों में रहे।

दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 तक “Multibagger Stocks” जैसे नाम वाले WhatsApp ग्रुप्स रोजाना इन शेयरों को खरीदने की सलाह देते रहे। ये ग्रुप हरियाणा और मुंबई के नाम पर लिए गए SIM कार्ड्स से चलते थे, लेकिन संचालन भावनगर (गुजरात) से होता था। इन टिप्स के कारण दोनों शेयरों में खरीदारों की संख्या करीब 3,400 से बढ़कर 1 लाख से ज्यादा हो गई और कीमतें और ऊपर चढ़ गईं।

25 फरवरी 2026 को अचानक ये WhatsApp ग्रुप्स डिलीट कर दिए गए। उसके बाद दोनों शेयर लोअर सर्किट पर चले गए और कुछ ही दिनों में करीब 70% मूल्य गंवा बैठे। इससे एक लाख से ज्यादा रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान हुआ और उनके शेयर बिक नहीं पाए।

छापेमारी में परिवार से जुड़े लाभार्थियों के क्लस्टर्स भी सामने आए, जिनमें Affluence Gems, Kawa HUF, Komalay Consultancy आदि शामिल हैं। ये लाभार्थी कम कीमत पर प्रिफरेंशियल वारंट्स के जरिए शेयर हासिल कर फिर WhatsApp, Twitter (X), SMS आदि चैनलों से प्राइस पंप करवाकर बड़ा हिस्सा बेच देते थे।

निवेशकों के लिए सबक – ऐसे स्कैम से कैसे बचें?

BeYourMoneyManager.com पर हम हमेशा कहते हैं कि शेयर बाजार में कमाई के अवसर हैं, लेकिन जल्दबाजी और अफवाहों से नुकसान भी बहुत बड़ा हो सकता है। इस मामले से सीखें:

  • WhatsApp, Telegram या किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप से आने वाली “मल्टीबैगर स्टॉक टिप्स” पर कभी आंख मूंदकर भरोसा न करें।
  • किसी भी स्टॉक में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, बैलेंस शीट, प्रमोटर्स होल्डिंग और ट्रेडिंग वॉल्यूम खुद चेक करें।
  • अगर कोई शेयर अचानक बहुत तेजी से चढ़ रहा हो और उसमें खरीदारों की संख्या अचानक बहुत बढ़ जाए, तो सावधान हो जाएं।
  • प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट या वारंट्स की खबरों पर नजर रखें – ये अक्सर अंदरूनी लोगों के फायदे के लिए इस्तेमाल होते हैं।
  • हमेशा डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखें और सिर्फ अफवाहों के आधार पर पूरा पैसा एक शेयर में न लगाएं।
  • संदेह होने पर SEBI या संबंधित अथॉरिटीज की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराएं।

यह मामला साफ दिखाता है कि “पंप एंड डंप” स्कीम कितनी व्यवस्थित तरीके से रिटेल निवेशकों को फंसा सकती है। ED की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन निवेशकों को खुद भी सतर्क रहना होगा।

अपने पैसे का सही प्रबंधन करें, रिसर्च करें और तर्कसंगत फैसले लें। अधिक वित्तीय जागरूकता के लिए www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से विजिट करते रहें।

नोट: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ED प्रेस रिलीज और समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित मूल लेख है। आगे की जांच जारी है और आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं।

Rajanish Kant
होम लोन महंगा हो रहा है? बेहतर क्रेडिट स्कोर से ब्याज दरें बढ़ने पर भी लाखों रुपये बचाएं | BeYourMoneyManager
होम लोन की किस्तें महंगी होती जा रही हैं। आरबीआई ने हाल ही में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है और आगे भी दरें बढ़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में कई उधारकर्ताओं को लगता है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है या उसमें सुधार हुआ है, तो आप बैंक से बात करके ब्याज दर कम करवा सकते हैं और लाखों रुपये बचा सकते हैं।

क्रेडिट स्कोर क्यों मायने रखता है?

बैंक होम लोन की ब्याज दर तय करते समय सिर्फ रेपो रेट नहीं देखते। वे ऑपरेटिंग कॉस्ट और क्रेडिट रिस्क प्रीमियम भी जोड़ते हैं। क्रेडिट रिस्क प्रीमियम आपकी साख पर निर्भर करता है। जितना बेहतर आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL, Experian आदि), उतना कम प्रीमियम बैंक लगाते हैं।

कई बैंक अपनी वेबसाइट पर स्कोर के हिसाब से अलग-अलग रेट दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ बैंक 840 से ऊपर स्कोर वाले को सबसे कम दर देते हैं, जबकि 760-799 वाले को थोड़ी ज्यादा।

असली उदाहरण: कैसे लाखों बचे

  • गुरुग्राम के एक पेशेवर का स्कोर 780 से बढ़कर 803 हो गया। उन्होंने बैंक से बात की और 8.45% से 7.5% पर रेट कम करवा लिया। बचे लगभग 6 लाख रुपये।
  • बेंगलुरु के एक व्यक्ति का स्कोर 730 से 810 पहुंचा। उन्होंने ईमेल लिखकर रेट रिवीजन मांगा और करीब 14 लाख रुपये की बचत की।

ये लोग खुद पहल करके बैंक के पास गए। बैंक स्वतः रेट कम नहीं करता।

कैसे करें बातचीत?

  1. अपना लेटेस्ट क्रेडिट रिपोर्ट निकालें।
  2. लोन एग्रीमेंट में स्प्रेड और रिसेट क्लॉज चेक करें।
  3. बैंक को ईमेल या रिलेशनशिप मैनेजर से बात करें। बताएं कि स्कोर सुधरा है, रेपेमेंट टाइम पर हो रहा है, इनकम बेहतर है।
  4. अन्य बैंकों की दरों से तुलना करें।
  5. बैंक एक बार की फीस (3,500-6,000 रुपये) ले सकता है, लेकिन बचत उससे कहीं ज्यादा होती है।

क्रेडिट स्कोर कैसे सुधारें?

  • हर EMI और क्रेडिट कार्ड बिल समय पर चुकाएं।
  • क्रेडिट यूटिलाइजेशन 30% से कम रखें।
  • अनावश्यक लोन या कई क्रेडिट कार्ड एक साथ न लें।
  • साल में कम से कम एक बार फ्री क्रेडिट रिपोर्ट चेक करें और गलतियां सुधारवाएं।
  • किसी और के लोन के गारंटर बनने से पहले सोचें।

निष्कर्ष

ब्याज दरें बढ़ रही हैं, लेकिन अच्छा क्रेडिट स्कोर आपके हाथ में एक मजबूत हथियार है। बैंक को खुद लिखकर या बात करके रेट रिवीजन का अनुरोध करें। छोटी-सी कटौती भी 20-25 साल के लोन पर कई लाख रुपये बचा सकती है।

अपने होम लोन की मौजूदा दर और क्रेडिट स्कोर चेक करें। आज ही पहल करें और पैसे बचाएं।


यह आर्टिकल मूल है, मौजूदा खबरों पर आधारित है।

Rajanish Kant
ब्लैक मंडे 19 अक्टूबर 2026: चीन-जापान अमेरिकी ट्रेजरी बेच रहे, यील्ड्स बढ़ीं – मार्केट क्रैश का खतरा? | BeYourMoneyManager

ब्लैक मंडे चेतावनी: क्या 19 अक्टूबर 2026 इतिहास का सबसे खराब मार्केट दिन बन सकता है?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वायरल चेतावनी फैल रही है जिसमें कहा जा रहा है कि 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) इतिहास का सबसे बुरा ब्लैक मंडे साबित हो सकता है। दावा किया जा रहा है कि 98% लोग सब कुछ खो सकते हैं क्योंकि मार्केट्स पैनिक मोड में हैं।

मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

  • चीन और जापान अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स बेच रहे हैं (दावा $5.5 ट्रिलियन का, हालांकि वास्तविक होल्डिंग्स इससे काफी कम हैं)।
  • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स तेजी से बढ़ रही हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से बाधित है, जिससे एनर्जी सप्लाई प्रभावित हो रही है।
  • एशियाई स्टॉक मार्केट्स में हाल के दिनों में तेज गिरावट (15-20% तक के दावे, खासकर कोरिया और जापान में AI और महंगाई संबंधी चिंताओं से)।

ये सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब बड़े विदेशी होल्डर्स ट्रेजरी बेचते हैं तो सप्लाई बढ़ती है, यील्ड्स ऊपर जाती हैं। ऊंची यील्ड्स से अमेरिकी सरकारी कर्ज की लागत बढ़ती है, स्टॉक्स, रियल एस्टेट, क्रिप्टो और अन्य एसेट्स पर दबाव पड़ता है। साथ ही एनर्जी प्राइस में उतार-चढ़ाव महंगाई बढ़ा सकता है, जो फिर यील्ड्स को और ऊपर धकेलता है।

वास्तविक स्थिति क्या है?
अमेरिकी ट्रेजरी डेटा के अनुसार चीन ने अगस्त 2026 में अपनी होल्डिंग्स घटाकर 18 साल के निचले स्तर ($590.7 बिलियन) पर ला दीं। जापान ने भी होल्डिंग्स घटाईं। कुल विदेशी होल्डिंग्स में कुछ बढ़ोतरी अन्य देशों से हुई। होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय से प्रतिबंधित/प्रभावी रूप से बंद है (फरवरी 2026 से चल रहे संकट के कारण), जिससे तेल बाजार प्रभावित है। एशियाई मार्केट्स में हालिया गिरावट मुख्य रूप से AI डेट चिंताओं, अमेरिकी महंगाई डेटा और टेक सेल्स से जुड़ी रही।

यह सामान्य सुधार से अलग लग सकता है क्योंकि जियोपॉलिटिकल तनाव, बॉन्ड मार्केट और इक्विटीज एक साथ दबाव में हैं।

चेतावनी: सोमवार एकदम खून-खराबा होगा!!सभी बाज़ार बुलबुले में एक जैसे लाल झंडे थे:
→ बढ़ती मुद्रास्फीति
→ तेल की कीमतों में उछाल
→ बॉन्ड बाज़ारों में बढ़ता तनाव
और अगले हफ्ते इतिहास फिर दोहराया जाएगा।निफ्टी फिफ्टी पतन (1972) → −50%
जापान क्रैश (1989) → −56%
डॉट-कॉम बुलबुला (1999) → −22%
एआई बुलबुला (2026) → −??%

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से रिस्क-फ्री रेट ऊपर जाता है, जिससे स्टॉक्स और क्रिप्टो जैसे रिस्की एसेट्स कम आकर्षक लग सकते हैं। रियल एस्टेट की फाइनेंसिंग महंगी हो सकती है। पैनिक सेल्स अक्सर ओवररिएक्शन पैदा करते हैं।

स्मार्ट मनी मैनेजमेंट टिप्स (BeYourMoneyManager सलाह):

  1. पैनिक न करें – सोशल मीडिया की अतिरंजित चेतावनियों पर तुरंत रिएक्ट न करें। लंबे समय का नजरिया रखें।
  2. डायवर्सिफिकेशन – स्टॉक्स, बॉन्ड्स, गोल्ड, कैश और अन्य एसेट्स में संतुलित पोर्टफोलियो बनाएं।
  3. रिस्क मैनेजमेंट – स्टॉप-लॉस, इमरजेंसी फंड और केवल उतना रिस्क लें जितना सहन कर सकें।
  4. जानकारी रखें – आधिकारिक ट्रेजरी डेटा, फेडरल रिजर्व अपडेट्स और विश्वसनीय आर्थिक रिपोर्ट्स फॉलो करें।
  5. लंबी अवधि सोचें – मार्केट साइकल आते-जाते रहते हैं। 2026-2027 साइकल में अवसर भी हो सकते हैं अगर सही तैयारी हो।

महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। यह वित्तीय सलाह नहीं है। निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। मार्केट्स में जोखिम होते हैं और पिछले प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होते।

www.beyourmoneymanager.com पर और अधिक मनी मैनेजमेंट टिप्स, पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजीज और मार्केट अपडेट्स पाएं। समझदारी से निवेश करें, भावनाओं से नहीं।


Rajanish Kant रविवार, 18 अक्टूबर 2026
Crude तेल की कीमतें $200 होने पर अमेरिका कैसे फायदे में रहेगा? ट्रंप की संभावित रणनीति और भारत-चीन पर असर | BeYourMoneyManager

वैश्विक तेल बाजार में अगर कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएं तो दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? यह सवाल आजकल चर्चा में है। खासकर यह अनुमान कि अमेरिका, जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी आर्थिक और भू-राजनीतिक ताकत बढ़ा सकता है।

उच्च तेल कीमतों का असर तेल आयातक देशों पर

भारत, चीन और कई विकासशील देश बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं। तेल की कीमतें अगर 200 डॉलर के आसपास पहुंच जाएं तो इन देशों का ऊर्जा बिल तेजी से बढ़ जाएगा। इससे महंगाई बढ़ेगी, मुद्रा कमजोर हो सकती है और कुछ अर्थव्यवस्थाओं को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ना रुपये पर दबाव डाल सकता है। चीन भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल पर काफी निर्भर है, हालांकि वह स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में महंगा तेल इन देशों की विकास दर और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका को कैसे होगा फायदा?

अमेरिका वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और लगभग 13.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन करता है। ऊंची तेल कीमतें अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को अतिरिक्त अरबों डॉलर का राजस्व दिला सकती हैं। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंच सकता है।

इसके अलावा, तेल की कमी झेल रहे देश अमेरिकी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार समझौतों पर और अधिक निर्भर हो सकते हैं। इससे अमेरिका की सौदेबाजी की क्षमता बढ़ेगी।

वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश करते हैं। ऐसे में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ सकती है। मजबूत डॉलर अमेरिका को और अधिक वित्तीय प्रभाव देता है, खासकर उन देशों पर जो पहले से ऊर्जा संकट से जूझ रहे हों।

लंबी अवधि का संभावित परिदृश्य

अगर बाद में तेल की कीमतें गिरती हैं तो महंगाई नियंत्रित होने लगती है। तब अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें कम करने का मौका मिल सकता है। सस्ती तरलता अमेरिकी शेयर बाजार को और ऊपर धकेल सकती है।

इस पूरे चक्र को देखें तो शुरू में संकट से अमेरिका को ऊर्जा और डॉलर दोनों मोर्चों पर फायदा, और बाद में बाजारों में उछाल—यह एक संभावित आर्थिक रणनीति का रूप ले सकता है।

क्या यह रणनीति है या सिर्फ प्रतिक्रिया?

कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन सिर्फ तेल संकट पर प्रतिक्रिया दे रहा है या इसे अमेरिका के लिए बड़े आर्थिक लाभ में बदलने की कोशिश कर रहा है। ऊंचे तेल कीमतों से अमेरिकी उत्पादकों को फायदा तो होता है, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों पर भी दबाव पड़ता है। बाजार और भू-राजनीतिक घटनाएं कीमतों को नियंत्रित करती हैं, किसी एक नेता के पूर्ण नियंत्रण में नहीं होतीं।

फिर भी, अमेरिका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और डॉलर की वैश्विक स्थिति इसे अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में रखती है।

भारतीय निवेशकों और अर्थव्यवस्था के लिए सबक

भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह परिदृश्य महत्वपूर्ण है। ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक स्रोतों पर जोर, मुद्रा हेजिंग और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन जैसे कदम जरूरी हो जाते हैं। महंगे तेल के दौर में सोना, डॉलर-आधारित संपत्तियां या ऊर्जा से जुड़े सेक्टरों पर नजर रखना समझदारी हो सकती है।

BeYourMoneyManager.com पर हम नियमित रूप से वैश्विक मैक्रो इवेंट्स, तेल बाजार, मुद्रा और निवेश रणनीतियों पर विश्लेषण देते हैं। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव आपके पोर्टफोलियो को कैसे प्रभावित कर सकता है, इसकी समझ रखना आज के समय में बहुत जरूरी है।

तेल की कीमतें 200 डॉलर तक पहुंचें या न पहुंचें, अमेरिका की ऊर्जा ताकत और डॉलर की भूमिका दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती रहेगी। सवाल यह है कि संकट को अवसर में बदलने की क्षमता किसके पास ज्यादा है।

(नोट: यह लेख सामान्य विश्लेषण है और किसी भी निवेश सलाह का विकल्प नहीं है। बाजार जोखिम भरे होते हैं।)

Rajanish Kant
गोल्ड ETF, FoF में आज से नया निवेश बंद! SEBI के निर्देश पर म्यूचुअल फंड्स का बड़ा फैसला | निवेशकों के लिए क्या मायने
16 अक्टूबर 2026 से कई म्यूचुअल फंड हाउस ने गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स में नया लंपसम, SIP और टॉप-अप बंद कर दिया है। मौजूदा SIP और रिडेम्प्शन जारी रहेंगे। जानें वजह और विकल्प।

गोल्ड ETF FoF में आज से नया निवेश बंद: म्यूचुअल फंड्स ने अस्थायी रोक लगाई, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

16 अक्टूबर 2026 से भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कई प्रमुख म्यूचुअल फंड हाउस ने अपने गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में ताजा निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह कदम त्योहारी सीजन (दशहरा-दिवाली) से ठीक पहले लिया गया है, जब सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है।

किन फंड हाउस ने रोक लगाई?
ICICI Prudential Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, Aditya Birla Sun Life Mutual Fund, Invesco India Mutual Fund, DSP Mutual Fund, Tata Mutual Fund, Shriram Mutual Fund, Kotak Mahindra Mutual Fund, UTI Mutual Fund समेत करीब 17 फंड हाउस ने निवेशकों को नोटिस जारी कर यह जानकारी दी है। कुछ फंड हाउस ने 15 अक्टूबर की शाम को ही नोटिस जारी कर दिए थे।

गोल्ड और सिल्वर एफओएफ: नई सब्सक्रिप्शन रोकी गईं

एएमसीस्कीम(s)क्या रोका गया हैप्रभावी तिथि से
ICICI प्रूडेंशियल एमएफICICI प्रूडेंशियल गोल्ड ETF FOFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, IDCW ट्रांसफर-इन, SIP/STP टॉप-अप्स16-अक्टूबर-26
HDFC एमएफHDFC गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड, HDFC गोल्ड सिल्वर पैसिव FOFफ्रेश सब्सक्रिप्शन, स्विच-इन्स, फ्रेश SIP/STP रजिस्ट्रेशन15 अक्टूबर 2026 के 3:00 PM कट-ऑफ के बाद
आदित्य बिड़ला सन लाइफ एमएफआदित्य बिड़ला सन लाइफ गोल्ड फंडफ्रेश सब्सक्रिप्शन और स्विच-इन्स16-अक्टूबर-26
टाटा एमएफटाटा गोल्ड ETF FOFफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, टॉप-अप्स16-अक्टूबर-26
DSP एमएफDSP गोल्ड ETF FOFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP, SIP टॉप-अप, नया STP-इन, IDCW ट्रांसफर प्लान16-अक्टूबर-26
इनवेस्को इंडिया एमएफइनवेस्को इंडिया गोल्ड ETF FOFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, IDCW ट्रांसफर प्लान, SIP टॉप-अप्स15 अक्टूबर 2026 के कारोबार बंद होने पर
ज़ेरोधा फंड हाउसज़ेरोधा गोल्ड ETF FoFफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, SIP स्टेप-अप्स16-अक्टूबर-26
निप्पॉन इंडिया एमएफनिप्पॉन इंडिया गोल्ड सेविंग्स फंडफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, SIP स्टेप-अप्स16-अक्टूबर-26
एसबीआई एमएफएसबीआई गोल्ड फंडफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, IDCW ट्रांसफर-इन, SIP टॉप-अप्स16-अक्टूबर-26
कोटक एमएफकोटक गोल्ड फंड, कोटक गोल्ड सिल्वर पैसिव FOFफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, SIP स्टेप-अप्स16-अक्टूबर-26
एक्सिस एमएफएक्सिस गोल्ड फंडलंपसम, स्विच-इन, नया SIP/STP रजिस्ट्रेशन16 अक्टूबर 2026 के कारोबार शुरू होने पर
मिराए एसेट एमएफमिराए एसेट गोल्ड ETF FoF, मिराए एसेट गोल्ड सिल्वर पैसिव FoFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP/STP रजिस्ट्रेशन (सभी प्लान और विकल्प)15 अक्टूबर 2026 के 3:00 PM कट-ऑफ के बाद
एलआईसी एमएफएलआईसी एमएफ गोल्ड ETF FoFफ्रेश परचेज, स्विच-इन, नया SIP (स्टेप-अप, माइक्रो, पॉकेट SIP सहित), नया STP-इन, IDCW ट्रांसफर16-अक्टूबर-26
ग्रोव एमएफग्रोव गोल्ड ETF FoFलंपसम, स्विच-इन, नए SIPs16-अक्टूबर-26
यूटीआई एमएफयूटीआई गोल्ड ETF FoFफ्रेश और अतिरिक्त लंपसम, स्विच-इन, नया SIP, SIP स्टेप-अप्स15 अक्टूबर 2026 के 3:00 PM कट-ऑफ के बाद
एचएसबीसी एमएफएचएसबीसी गोल्ड FoFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP, नया STP, IDCW ट्रांसफर प्लान15 अक्टूबर 2026 के कारोबार बंद होने पर
क्वांटम एमएफक्वांटम गोल्ड ETF FoFलंपसम, स्विच-इन, नया SIP/STP रजिस्ट्रेशन15 अक्टूबर 2026 के कारोबार बंद होने पर

क्या बंद हुआ है?

  • नया लंपसम (एकमुश्त) निवेश
  • नई SIP रजिस्ट्रेशन
  • मौजूदा SIP में टॉप-अप या स्टेप-अप
  • स्विच-इन ट्रांजेक्शन
  • नई STP (सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान) रजिस्ट्रेशन

DSP Mutual Fund ने साफ कहा कि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के कट-ऑफ के बाद आए आवेदन खारिज हो सकते हैं और राशि वापस कर दी जाएगी।

क्या जारी रहेगा?

  • पहले से रजिस्टर्ड SIP और STP किस्तें सामान्य रूप से प्रोसेस होती रहेंगी।
  • रिडेम्प्शन (निकासी) और स्विच-आउट पर कोई रोक नहीं है।
  • मौजूदा निवेशकों की यूनिट्स सुरक्षित हैं।

ये पाबंदियां अस्थायी हैं और आगे के नोटिस तक लागू रहेंगी। कोई फंड हाउस अभी यह नहीं बता रहा कि कब दोबारा निवेश शुरू होंगे।

रोक क्यों लगाई गई?
कई फंड हाउस ने कारण नहीं बताया, लेकिन Shriram Mutual Fund और DSP Mutual Fund ने साफ कहा कि यह SEBI के निर्देश पर AMFI के माध्यम से लागू किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गोल्ड ETF में भारी इनफ्लो और त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से भारत के सोने के आयात और रुपये पर दबाव पड़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया।

भारत सोने का बड़ा आयातक देश है। सितंबर 2026 में सोने का आयात 1.8 बिलियन डॉलर रहा, जो अगस्त के 2.3 बिलियन डॉलर से कम था। फिर भी गोल्ड और सिल्वर ETF में इनफ्लो बढ़ रहे थे।

महत्वपूर्ण बात:
यह रोक सिर्फ गोल्ड ETF FoFs पर है। सीधे गोल्ड ETF (एक्सचेंज पर खरीदे जाने वाले) या फिजिकल गोल्ड खरीदने पर कोई पाबंदी नहीं है। डिमैट अकाउंट वाले निवेशक गोल्ड ETF में निवेश जारी रख सकते हैं।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

  1. अपनी स्कीम का लेटेस्ट नोटिस जरूर चेक करें।
  2. अगर नई SIP शुरू करने का प्लान था तो विकल्प तलाशें – जैसे डायरेक्ट गोल्ड ETF या अन्य एसेट क्लास।
  3. मौजूदा SIP जारी रखने वाले निवेशकों को चिंता करने की जरूरत नहीं।
  4. निवेश संबंधी कोई भी फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।

निष्कर्ष:
यह अस्थायी उपाय सोने के बाजार में संतुलन बनाए रखने और आयात दबाव को कम करने की दिशा में लगता है। निवेशकों को घबराने की बजाय अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने पर फोकस करना चाहिए। गोल्ड लंबी अवधि में अच्छा हेज माना जाता है, लेकिन सही रूट चुनना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है। इसे निवेश सलाह न समझें। निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।


Rajanish Kant शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026
वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21% बढ़ा, ग्रॉस कलेक्शन 16 लाख करोड़ पार | लेटेस्ट अपडेट

आयकर विभाग ने 14 अक्टूबर 2026 तक FY 2026-27 के ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स, रिफंड और नेट कलेक्शन के आंकड़े जारी किए। जानें डिटेल और आम टैक्सपेयर पर प्रभाव।

वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में मजबूती: ग्रॉस कलेक्शन 16 लाख करोड़ के पार, नेट में 13.21% की वृद्धि

आयकर विभाग (Income Tax Department) ने 14 अक्टूबर 2026 तक के वित्त वर्ष 2026-27 के प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह के आंकड़े जारी किए हैं। आधिकारिक डेटा के अनुसार ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, रिफंड और नेट कलेक्शन में पिछले साल की तुलना में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्य आंकड़े (14.10.2026 तक)

विवरणFY 2025-26 (14.10.2025 तक)FY 2026-27 (14.10.2026 तक)वृद्धि प्रतिशत
ग्रॉस कलेक्शन₹13,95,278.39 करोड़₹16,03,066.12 करोड़14.89%
रिफंड₹2,13,491.41 करोड़₹2,65,199.14 करोड़24.22%
नेट कलेक्शन₹11,81,786.98 करोड़₹13,37,866.98 करोड़13.21%

स्रोत: Income Tax Department (TINMIS)

डिटेल ब्रेकअप

ग्रॉस कलेक्शन (Gross Collection)

  • कॉरपोरेट टैक्स (CT): ₹7,52,961.56 करोड़
  • नॉन-कॉरपोरेट टैक्स (NCT – व्यक्तियों, HUF, फर्म आदि से): ₹8,03,245.26 करोड़
  • सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT): ₹46,840.43 करोड़
  • अन्य टैक्स: ₹18.87 करोड़

रिफंड रिफंड की राशि में 24.22% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कॉरपोरेट रिफंड ₹1,53,899.08 करोड़ और नॉन-कॉरपोरेट रिफंड ₹1,11,279.55 करोड़ रहे।

नेट कलेक्शन रिफंड निकालने के बाद नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹13,37,866.98 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि से 13.21% अधिक है।

आम टैक्सपेयर और निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

  1. आर्थिक गतिविधि में सुधार – कॉरपोरेट और व्यक्तिगत दोनों सेक्टर से टैक्स कलेक्शन बढ़ना अर्थव्यवस्था में बेहतर गतिविधि और अनुपालन (compliance) का संकेत देता है।
  2. रिफंड में तेज़ी – रिफंड राशि में बड़ी वृद्धि से कई टैक्सपेयर्स को अपना पैसा जल्दी वापस मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
  3. सरकारी राजस्व मजबूत – नेट कलेक्शन में 13% से ज्यादा वृद्धि सरकार के राजकोषीय लक्ष्यों के लिए सकारात्मक है।

महत्वपूर्ण नोट

  • आंकड़े 14 अक्टूबर 2026 तक के हैं। पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े आगे और बदल सकते हैं।
  • नॉन-कॉरपोरेट टैक्स में व्यक्तियों, HUF, फर्म, AoP, BoI आदि द्वारा भुगतान किए गए टैक्स शामिल हैं।
  • पूरा डेटा Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

BeYourMoneyManager की सलाह: टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे हैं तो नियमित रूप से e-filing पोर्टल चेक करते रहें। ITR प्रोसेसिंग और रिफंड स्टेटस पर नजर रखें। बेहतर टैक्स प्लानिंग और निवेश रणनीति के लिए हमारे ब्लॉग पर और लेख पढ़ें।

यह लेख आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित मूल सामग्री है। 

Rajanish Kant
सोने-चांदी आभूषण निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक दरें घटीं: निर्यातकों को झटका, जानें पूरी डिटेल

केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषण निर्यातकों को बड़ा झटका दिया है। वित्त मंत्रालय ने ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती कर दी है। इससे निर्यातकों को मिलने वाला रिफंड कम हो जाएगा।

क्या है ड्यूटी ड्रॉबैक?

ड्यूटी ड्रॉबैक वह योजना है जिसके तहत निर्यातकों को आयातित कच्चे माल पर चुकाए गए सीमा शुल्क और अन्य ड्यूटी का रिफंड मिलता है। सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाले निर्यातक इस सुविधा का फायदा उठाते हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

नई दरें क्या हैं?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार तीन टैरिफ आइटम्स की दरें घटाई गई हैं:

  • सोने के आभूषण (टैरिफ आइटम 711301): ₹1,851.99 प्रति ग्राम से घटाकर ₹1,794.11 प्रति ग्राम (करीब 3.1% की कटौती)। अब निर्यातकों को हर ग्राम पर लगभग ₹57.88 कम रिफंड मिलेगा।
  • चांदी के आभूषण (टैरिफ आइटम 711302): ₹29,501.09 प्रति किलोग्राम से घटाकर ₹26,859.02 प्रति किलोग्राम (करीब 9% की कटौती)।
  • चांदी की अन्य वस्तुएं (टैरिफ आइटम 711401): वही दर, यानी ₹29,501.09 से ₹26,859.02 प्रति किलोग्राम।

यह संशोधन गुरुवार को जारी किया गया।

क्यों की गई कटौती?

जुलाई 2026 में सरकार ने इन दरों को लगभग दोगुना कर दिया था। सोने के आभूषणों पर दर ₹773.17 से बढ़ाकर ₹1,851.99 और चांदी पर ₹14,990.66 से ₹29,501.09 कर दी गई थी। इसका मकसद निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाना था।

अब सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आने से वास्तविक आयात शुल्क कम हो गया है। इसलिए सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक दरों को वर्तमान स्थिति के अनुरूप समायोजित किया है।

निर्यातकों पर क्या असर पड़ेगा?

निर्यातकों को मिलने वाला रिफंड कम होने से उनकी लागत थोड़ी बढ़ सकती है। इससे निर्यात मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम निर्यातकों पर। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सोने-चांदी की घरेलू कीमतों पर इसका सीधा बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह मुख्य रूप से निर्यात से जुड़ा है।

भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए निर्यात महत्वपूर्ण है। इस बदलाव से निर्यातकों को अपनी रणनीति दोबारा तय करनी पड़ सकती है।

आम निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या मतलब?

आम जनता के लिए सोने-चांदी के घरेलू भाव पर तात्कालिक बड़ा बदलाव नहीं दिखने की उम्मीद है। कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की मजबूती और मांग-आपूर्ति पर निर्भर करती हैं। फिर भी निर्यात सेक्टर में होने वाले बदलाव लंबे समय में बाजार की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष:
सरकार का यह कदम सोने-चांदी की मौजूदा कीमतों और वास्तविक ड्यूटी को ध्यान में रखकर लिया गया है। निर्यातकों को कम रिफंड मिलेगा, लेकिन यह प्रणाली को और सटीक बनाने की दिशा में है। निवेशकों और कारोबारियों को अपडेट रहना चाहिए।

www.beyourmoneymanager.com पर नियमित रूप से ऐसे वित्तीय अपडेट पढ़ें और समझदारी से निवेश करें।

Rajanish Kant
Silver Price Prediction 2026: सिल्वर कीमत $50 तक गिर सकती है? ब्लूमबर्ग के माइक मैकग्लोन का बड़ा विश्लेषण| beyourmoneymanager

सिल्वर (चांदी) की कीमतें फिर से दबाव में आ सकती हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के वरिष्ठ कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन (Mike McGlone) ने हालिया नोट में चेतावनी दी है कि सिल्वर की कीमतें निकट भविष्य में $50 प्रति औंस तक गिर सकती हैं।

मैकग्लोन के अनुसार, सिल्वर ने हाल के वर्षों में ऐतिहासिक रैली देखी है, लेकिन अब तकनीकी दृष्टिकोण से स्थिति मुश्किल लग रही है। उन्होंने कहा कि सिल्वर की कीमतें लंबे समय तक $50 से $84 प्रति औंस के बीच फंसी रह सकती हैं।

क्यों गिर सकती है सिल्वर की कीमत?

  • ऐतिहासिक रैली के बाद सुधार (correction) आम बात है।
  • तकनीकी चार्ट्स कमजोर नजर आ रहे हैं।
  • सिल्वर को अभी मजबूत समर्थन स्तर खोजने में समय लग सकता है।

हालांकि, कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कीमतें $50 के आसपास पहुंचती हैं, तो मजबूत फिजिकल डिमांड (औद्योगिक और निवेश दोनों) से खरीदारी का दबाव बढ़ सकता है। सिल्वर की औद्योगिक खपत (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि) लगातार बढ़ रही है, जिससे लंबे समय में सप्लाई डेफिसिट बना रह सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?

सिल्वर एक अस्थिर धातु है। सोने की तुलना में इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है। इसलिए:

  • लंबी अवधि के निवेशकों को औसत लागत (SIP या DCA) का तरीका अपनाना चाहिए।
  • शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को रिस्क मैनेजमेंट का ख्याल रखना जरूरी है।
  • हमेशा अपने पोर्टफोलियो में सिल्वर का अनुपात सीमित रखें।

निष्कर्ष:
ब्लूमबर्ग के मैकग्लोन का अनुमान सिल्वर बाजार में सावधानी का संकेत देता है। कीमतें $50 तक गिर सकती हैं, लेकिन लंबे समय में औद्योगिक मांग सिल्वर को सपोर्ट दे सकती है। निवेश करने से पहले अपनी रिस्क क्षमता और बाजार की स्थिति जरूर जांचें।

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(नोट: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं दी गई है।)

Rajanish Kant बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
UPI MDR चार्ज दिवाली के बाद लागू होगा | NPCI का नया फैसला 2026 – जानें क्या बदलेगा l beyourmoneymanager

NPCI ने दिया दिवाली का तोहफा: UPI MDR चार्ज अब दिवाली के बाद लागू होगा

मुंबई, 13 अक्टूबर 2026 – नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए UPI पर चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन (P2M) पर Merchant Discount Rate (MDR) की शुरुआत को दिवाली के बाद कर दिया गया है।

NPCI के UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने आज फैसला किया कि सेलेक्ट पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजेक्शन पर MDR को दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जाएगा। नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इससे पहले यह चार्ज 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला था।

MDR क्या है और किस पर लगेगा?

MDR वह फीस है जो मर्चेंट डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर बैंकों और पेमेंट कंपनियों को देते हैं।  

नई व्यवस्था के अनुसार:  

₹2,000 से ऊपर के चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% MDR लगेगा।  

अधिकतम चार्ज ₹300 (₹75,000 और उससे ऊपर के ट्रांजेक्शन पर) होगा।  

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल जैसी जरूरी सेवाओं पर ₹2,000 से ऊपर फ्लैट ₹5 MDR लगेगा।  

₹2,000 तक के ट्रांजेक्शन पूरी तरह फ्री रहेंगे।  

छोटे मर्चेंट जिनका मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, वे भी छूट में रहेंगे।  

पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।  

NPCI के अनुसार 95% से ज्यादा UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन वॉल्यूम पर कोई MDR नहीं लगेगा।

ग्राहकों पर क्या असर?

ग्राहकों के लिए अच्छी खबर यह है कि UPI सेवाएं उनके लिए फ्री ही रहेंगी। मर्चेंट इस चार्ज को ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यानी दिवाली या धनतेरस की खरीदारी में आपको अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ेगा।

क्यों टाली गई तारीख?

त्योहारी सीजन में डिजिटल पेमेंट्स का इस्तेमाल बहुत बढ़ जाता है। NPCI ने व्यापारियों और पेमेंट कंपनियों को तैयारी का समय देने तथा त्योहारी खरीदारी को सुचारू रखने के लिए यह फैसला लिया है।

आपके लिए क्या मायने रखता है?

सामान्य रोजमर्रा के छोटे ट्रांजेक्शन फ्री रहेंगे।  

बड़े ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट को थोड़ा अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।  

UPI की लोकप्रियता और इस्तेमाल पर ज्यादा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है।

www.beyourmoneymanager.com पर हम आपको डिजिटल पेमेंट्स, बैंकिंग और पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी ताजा और सही जानकारी देते रहते हैं। UPI MDR की नई तारीख घोषित होते ही हम आपको अपडेट देंगे।

नोट: यह आर्टिकल NPCI की आधिकारिक प्रेस रिलीज और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। अंतिम निर्णय और तारीख के लिए NPCI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

Rajanish Kant मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026