सोने-चांदी आभूषण निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक दरें घटीं: निर्यातकों को झटका, जानें पूरी डिटेल

केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषण निर्यातकों को बड़ा झटका दिया है। वित्त मंत्रालय ने ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती कर दी है। इससे निर्यातकों को मिलने वाला रिफंड कम हो जाएगा।

क्या है ड्यूटी ड्रॉबैक?

ड्यूटी ड्रॉबैक वह योजना है जिसके तहत निर्यातकों को आयातित कच्चे माल पर चुकाए गए सीमा शुल्क और अन्य ड्यूटी का रिफंड मिलता है। सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाले निर्यातक इस सुविधा का फायदा उठाते हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

नई दरें क्या हैं?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार तीन टैरिफ आइटम्स की दरें घटाई गई हैं:

  • सोने के आभूषण (टैरिफ आइटम 711301): ₹1,851.99 प्रति ग्राम से घटाकर ₹1,794.11 प्रति ग्राम (करीब 3.1% की कटौती)। अब निर्यातकों को हर ग्राम पर लगभग ₹57.88 कम रिफंड मिलेगा।
  • चांदी के आभूषण (टैरिफ आइटम 711302): ₹29,501.09 प्रति किलोग्राम से घटाकर ₹26,859.02 प्रति किलोग्राम (करीब 9% की कटौती)।
  • चांदी की अन्य वस्तुएं (टैरिफ आइटम 711401): वही दर, यानी ₹29,501.09 से ₹26,859.02 प्रति किलोग्राम।

यह संशोधन गुरुवार को जारी किया गया।

क्यों की गई कटौती?

जुलाई 2026 में सरकार ने इन दरों को लगभग दोगुना कर दिया था। सोने के आभूषणों पर दर ₹773.17 से बढ़ाकर ₹1,851.99 और चांदी पर ₹14,990.66 से ₹29,501.09 कर दी गई थी। इसका मकसद निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाना था।

अब सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आने से वास्तविक आयात शुल्क कम हो गया है। इसलिए सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक दरों को वर्तमान स्थिति के अनुरूप समायोजित किया है।

निर्यातकों पर क्या असर पड़ेगा?

निर्यातकों को मिलने वाला रिफंड कम होने से उनकी लागत थोड़ी बढ़ सकती है। इससे निर्यात मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम निर्यातकों पर। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सोने-चांदी की घरेलू कीमतों पर इसका सीधा बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह मुख्य रूप से निर्यात से जुड़ा है।

भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए निर्यात महत्वपूर्ण है। इस बदलाव से निर्यातकों को अपनी रणनीति दोबारा तय करनी पड़ सकती है।

आम निवेशकों और खरीदारों के लिए क्या मतलब?

आम जनता के लिए सोने-चांदी के घरेलू भाव पर तात्कालिक बड़ा बदलाव नहीं दिखने की उम्मीद है। कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की मजबूती और मांग-आपूर्ति पर निर्भर करती हैं। फिर भी निर्यात सेक्टर में होने वाले बदलाव लंबे समय में बाजार की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

निष्कर्ष:
सरकार का यह कदम सोने-चांदी की मौजूदा कीमतों और वास्तविक ड्यूटी को ध्यान में रखकर लिया गया है। निर्यातकों को कम रिफंड मिलेगा, लेकिन यह प्रणाली को और सटीक बनाने की दिशा में है। निवेशकों और कारोबारियों को अपडेट रहना चाहिए।

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