हाल ही में जारी अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (AAII) के साप्ताहिक सर्वेक्षण ने अमेरिकी खुदरा निवेशकों के मनोभाव में भारी गिरावट का खुलासा किया है। निवेशक सेंटिमेंट पिछले 16 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
सर्वे के अनुसार, 53.3% निवेशक बेयरिश (निराशावादी) हैं, जबकि बुलिश (आशावादी) निवेशकों का प्रतिशत घटकर सिर्फ 28.8% रह गया है। यह पिछले एक साल का सबसे कम बुलिश स्तर है। बुल-बेयर स्प्रेड -24.5% पर आ गया है, जो ऐतिहासिक औसत 6.5% से काफी नीचे है और लगातार नौवें सप्ताह से औसत से कम बना हुआ है।
क्यों गिरा सेंटिमेंट?
मुख्य वजहें बताई जा रही हैं:
ऊंचे तेल की कीमतें
फेडरल रिजर्व द्वारा 2023 के बाद पहली बार ब्याज दर बढ़ाने का फैसला
बाजार में हालिया अस्थिरता
सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा निवेशकों ने अपनी कैश होल्डिंग्स सामान्य से ज्यादा रखी हैं। करीब 19.1% ने कहा कि उनका कैश आवंटन “बहुत ज्यादा” है। यह साफ संकेत है कि निवेशक फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि S&P 500 अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई के करीब (लगभग 2% नीचे) है। ऐसे में यह सेंटिमेंट कई विशेषज्ञों के लिए कॉन्ट्रैरियन इंडिकेटर भी बन सकता है—यानी जब डर चरम पर होता है, तो बाजार अक्सर पलटने की तैयारी करता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या सबक?
अमेरिकी बाजार का मूड ग्लोबल सेंटिमेंट को प्रभावित करता है। ऊंचे तेल दाम और अमेरिकी ब्याज दरें भारतीय बाजारों, रुपये और विदेशी निवेश प्रवाह पर भी असर डाल सकती हैं।
ऐसे समय में BeYourMoneyManager सलाह देता है:
भावनाओं के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और एसेट एलोकेशन पर फोकस रखें।
बाजार में डर के समय भी लंबी अवधि के निवेश को बनाए रखें।
जरूरत से ज्यादा कैश रखने के बजाय व्यवस्थित निवेश (SIP) जारी रखें।
जोखिम सहन क्षमता के अनुसार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करें।
बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। असली सफलता उन निवेशकों को मिलती है जो शॉर्ट-टर्म सेंटिमेंट से प्रभावित हुए बिना अनुशासन बनाए रखते हैं।
(स्रोत: AAII सर्वे और बाजार रिपोर्ट्स पर आधारित मूल लेख)

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