चीन और पोलैंड की अगुवाई में जुलाई में केंद्रीय बैंकों ने 23 टन सोना खरीदा – WGC रिपोर्ट
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने नेट 23 टन सोना अपने रिजर्व में जोड़ा। इसमें चीन और पोलैंड सबसे आगे रहे। चीन ने अकेले 20 टन सोना खरीदा, जबकि पोलैंड ने 8 टन का योगदान दिया।
इस खरीद से चीन के आधिकारिक सोने के भंडार 2026 में कुल 60 टन बढ़कर अब लगभग 2,366 टन हो गए हैं। यह दुनिया में छठा सबसे बड़ा रिपोर्टेड गोल्ड होल्डिंग वाला देश है और कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा सोने में है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने लगातार 21वें महीने सोना खरीदा है। मई 2026 से डबल-डिजिट में मासिक खरीद का सिलसिला जारी है।
पोलैंड साल-दर-साल (YTD) में सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। इसने 2026 में अब तक 90 टन सोना जोड़ा है। देश का कुल सोने का भंडार 640 टन पहुंच चुका है, जो 700 टन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और कुल रिजर्व का करीब 28 प्रतिशत है।
अन्य खरीदारों में चेक नेशनल बैंक (2 टन), कजाकिस्तान, मलेशिया और बोलीविया (प्रत्येक 1 टन) शामिल रहे। वहीं रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस में रूस ने 6 टन सोना बेचा, जो जुलाई में सबसे बड़ा नेट सेलर था। टर्की, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान ने भी 1-1 टन बेचा। साल 2026 में अब तक केंद्रीय बैंकों की रिपोर्टेड नेट खरीद करीब 130 टन है, जो पिछले साल की इसी अवधि के लगभग 160 टन से कम है।
क्यों खरीद रहे हैं केंद्रीय बैंक सोना?
WGC की सीनियर रिसर्च लीड मारीसा सलीम के अनुसार, उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव के लिए अपने भंडार में विविधता ला रहे हैं। सोना सुरक्षित और क्रेडिट रिस्क-फ्री एसेट के रूप में उनकी पसंद बना हुआ है। बैंक ऑफ कोरिया ने 13 साल बाद आधिकारिक रूप से सोना आवंटन की घोषणा की है, जबकि नामीबिया भी अपने सोने के भंडार को बढ़ाने की योजना बना रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
भारत में सोना लंबे समय से बचत और निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। वैश्विक केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद सोने की मांग को मजबूत आधार देती है। जब बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जैसे चीन अपने रिजर्व में सोना बढ़ा रही हैं, तो यह लंबी अवधि में कीमतों को सपोर्ट कर सकता है। मुद्रास्फीति, डॉलर की स्थिति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन का अच्छा विकल्प बना रहता है।
निष्कर्ष
केंद्रीय बैंकों की यह खरीद प्रवृत्ति बताती है कि सोना सिर्फ एक कमोडिटी नहीं, बल्कि रणनीतिक रिजर्व एसेट है। चीन का 60 टन का YTD एडिशन और पोलैंड का आक्रामक लक्ष्य इस ट्रेंड को मजबूती दे रहा है। निवेशकों को अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या फिजिकल गोल्ड पर नजर रखनी चाहिए।
(स्रोत: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और किटको न्यूज रिपोर्ट, सितंबर 2026)

कोई टिप्पणी नहीं