फेड की ‘ऑल टॉक, नो एक्शन’ नीति से सोने में 20-30% उछाल की संभावना – ऑएजी फंड्स के एरिक स्ट्रैंड
किटको न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में ऑएजी फंड्स के संस्थापक एरिक स्ट्रैंड ने कहा है कि सोना इस साल के बाकी समय में आसानी से 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उनका मानना है कि बाजार अभी ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर पर फोकस कर रहा है, लेकिन असल कहानी अमेरिकी सरकार का बढ़ता कर्ज और फेड की मजबूरी है।
स्ट्रैंड के अनुसार, फेडरल रिजर्व फिलहाल महंगाई से लड़ने का दिखावा कर रहा है, लेकिन असल में वह “ऑल टॉक, नो एक्शन” है। अमेरिकी संघीय कर्ज अब 40 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर जा चुका है। कर्ज की सर्विसिंग का खर्च इतना बढ़ गया है कि सरकार को लंबे समय के लिए कम ब्याज दरों की जरूरत है।
“उन्हें लंबे रेट पर कम ब्याज चाहिए। मेरे लिए यह बिल्कुल साफ है कि उन्हें QE करना पड़ेगा, या जो भी नाम वे दें,” स्ट्रैंड ने कहा।
महंगाई की असल वजह क्या है?
स्ट्रैंड का कहना है कि मौजूदा महंगाई डिमांड-पुल नहीं, बल्कि कॉस्ट-पुश है। यानी कमोडिटी और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से महंगाई आ रही है, न कि उपभोक्ता ज्यादा खरीद रहे हैं। ऐसे में ब्याज दरें बढ़ाने से महंगाई नहीं घटेगी, बल्कि और लागत बढ़ जाएगी।
बाजार अभी ऊंची दरों की उम्मीद में पोजीशन बना रहा है, जिससे डॉलर मजबूत और सोना दबाव में है। लेकिन जब बाजार को समझ आएगा कि फेड वास्तव में सख्ती नहीं कर सकता, तो पोजीशन बदलने से सोने में तेज उछाल आ सकता है। अगस्त में सोने ने करीब 10 प्रतिशत का रैली किया था, जो आगे आने वाले मूव का छोटा सा झलक मात्र है।
निवेशकों के लिए मौका
स्ट्रैंड ने हालिया करेक्शन को “दूसरा मौका” बताया। जिन्होंने पहले रैली मिस की, वे अब एंट्री ले सकते हैं। वे सोने के साथ-साथ प्रेशियस मेटल्स माइनर्स पर भी बहुत बुलिश हैं। माइनर्स की वैल्यूएशन अभी भी कमोडिटी प्राइस के मुकाबले सस्ती है, बैलेंस शीट मजबूत हुई है और नए माइन डेवलपमेंट की कमी से सप्लाई सीमित रहेगी।
संरचनात्मक कारण
अमेरिकी डॉलर लंबे समय तक मजबूत नहीं रह सकता।
कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा प्रिंटिंग जरूरी होगी।
जमीन से सोना और सिल्वर निकालने की मात्रा सीमित है।
डिफेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में मेटल्स की मांग बढ़ रही है।
भारतीय निवेशकों के लिए मतलब
भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश और मुद्रास्फीति से बचाव का साधन रहा है। वैश्विक स्तर पर फेड की मजबूरियां और अमेरिकी कर्ज का दबाव सोने की लंबी अवधि की मांग को सपोर्ट कर सकता है। गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड या फिजिकल गोल्ड के जरिए पोर्टफोलियो में विविधता लाना समझदारी भरा कदम हो सकता है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी बनी रह सकती है।
निष्कर्ष
एरिक स्ट्रैंड का विश्लेषण साफ संकेत देता है कि सोना सिर्फ महंगाई या ब्याज दरों का खेल नहीं है। अमेरिकी कर्ज का बोझ और फेड की सीमित क्षमता लंबे समय में सोने के पक्ष में काम करेगी। जब बाजार “ऑल टॉक, नो एक्शन” को स्वीकार करेगा, तब 20-30 प्रतिशत का मूव आसानी से संभव है।
(स्रोत: किटको न्यूज इंटरव्यू, एरिक स्ट्रैंड, सितंबर 2026)

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