60 साल की उम्र के बाद स्वास्थ्य खर्च तेजी से बढ़ने लगते हैं और साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम भी। कई लोग सोचते हैं कि इस उम्र में बीमा लेना या तो संभव नहीं या बहुत महंगा है। लेकिन आज के समय में सीनियर सिटीजन के लिए खास प्लान उपलब्ध हैं। सही रणनीति अपनाकर आप अच्छा कवरेज ले सकते हैं और प्रीमियम को कंट्रोल में रख सकते हैं।
www.beyourmoneymanager.com पर हम आपको बता रहे हैं कि 60+ उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस कैसे सस्ता और प्रभावी बनाया जा सकता है।
क्या 60 साल के बाद हेल्थ इंश्योरेंस लिया जा सकता है?
हां, अधिकांश बीमा कंपनियां सीनियर सिटीजन के लिए खास प्लान ऑफर करती हैं। उम्र के साथ स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने के कारण प्रीमियम अपेक्षाकृत अधिक होता है, लेकिन पॉलिसी की संरचना सही चुनकर इसे किफायती बनाया जा सकता है।
को-पेमेंट और डिडक्टिबल वाले प्लान चुनने से प्रीमियम काफी कम हो सकता है। आप दावे का कुछ हिस्सा खुद वहन करने पर सहमत होकर प्रीमियम में बचत कर सकते हैं।
जनवरी 2025 से IRDAI ने सीनियर सिटीजन के लिए वार्षिक रिन्यूअल प्रीमियम वृद्धि को बिना अनुमति के अधिकतम 10% तक सीमित कर दिया है। इससे रिन्यूअल कॉस्ट का अंदाजा लगाना आसान हो गया है।
बेस पॉलिसी + सुपर टॉप-अप: सबसे किफायती तरीका
उच्च सम इंश्योर्ड वाली एक बड़ी बेस पॉलिसी लेने के बजाय छोटी बेस पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप लेना बेहतर विकल्प है। सुपर टॉप-अप डिडक्टिबल के आधार पर काम करता है। पहले डिडक्टिबल राशि तक का खर्च बेस पॉलिसी से कवर होता है, उसके बाद सुपर टॉप-अप सक्रिय हो जाता है।
उदाहरण के तौर पर:
₹10 लाख बेस + ₹90 लाख सुपर टॉप-अप = कुल ₹1 करोड़ कवरेज, जो सीधे ₹1 करोड़ की बेस पॉलिसी से काफी सस्ता पड़ता है।
संकेतात्मक वार्षिक प्रीमियम रेंज (स्वस्थ सीनियर सिटीजन के लिए):
| कुल कवरेज | सुझाई गई संरचना | अनुमानित वार्षिक प्रीमियम |
|-----------|----------------------------------|---------------------------|
| ₹15 लाख | ₹5 लाख बेस + ₹10 लाख सुपर टॉप-अप | ₹22,000–₹35,000 |
| ₹20 लाख | ₹5 लाख बेस + ₹15 लाख सुपर टॉप-अप | ₹24,000–₹38,000 |
| ₹25 लाख | ₹5 लाख बेस + ₹20 लाख सुपर टॉप-अप | ₹26,000–₹42,000 |
| ₹50 लाख | ₹10 लाख बेस + ₹40 लाख सुपर टॉप-अप| ₹35,000–₹60,000 |
| ₹1 करोड़ | ₹10 लाख बेस + ₹90 लाख सुपर टॉप-अप| ₹45,000–₹75,000 |
नोट: वास्तविक प्रीमियम उम्र, शहर, मेडिकल हिस्ट्री, बीमा कंपनी और प्लान पर निर्भर करता है।
बच्चों के एम्प्लॉयर ग्रुप इंश्योरेंस का इस्तेमाल
अगर बच्चे की कंपनी डिपेंडेंट पेरेंट्स को ग्रुप हेल्थ कवर में शामिल करने की अनुमति देती है, तो यह अतिरिक्त सुरक्षा का अच्छा स्रोत हो सकता है। कई कंपनियां पेरेंटल कवर स्टैंडर्ड बेनिफिट के रूप में या थोड़े अतिरिक्त प्रीमियम पर देती हैं।
लेकिन ध्यान रखें – यह कवर रोजगार से जुड़ा होता है। नौकरी बदलने या रिटायरमेंट पर यह बंद हो सकता है। इसलिए हमेशा अपना व्यक्तिगत (रिटेल) हेल्थ इंश्योरेंस भी बनाए रखें।
फैमिली फ्लोटर या अलग पॉलिसी?
सीनियर सिटीजन के लिए ज्यादातर मामलों में अलग व्यक्तिगत पॉलिसी बेहतर होती है।
फैमिली फ्लोटर में प्रीमियम सबसे उम्रदराज सदस्य की उम्र पर आधारित होता है। माता-पिता को जोड़ने से पूरे परिवार का प्रीमियम काफी बढ़ जाता है। साथ ही, एक सदस्य के क्लेम से पूरे परिवार के नो-क्लेम बोनस और अन्य बेनिफिट प्रभावित हो सकते हैं।
अलग पॉलिसी में हर व्यक्ति का सम इंश्योर्ड स्वतंत्र रहता है और क्लेम हिस्ट्री भी अलग-अलग बनी रहती है।
आयुष्मान भारत (वाय वंदना कार्ड) को पूरक बनाएं
70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों को आयुष्मान वाय वंदना कार्ड के तहत ₹5 लाख प्रति वर्ष का कवर मिलता है। इसमें पहले से मौजूद बीमारियों के लिए भी वेटिंग पीरियड नहीं है।
यह अच्छा सुरक्षा जाल है, लेकिन निजी हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प नहीं। सीमित सम इंश्योर्ड और हॉस्पिटल नेटवर्क के कारण इसे बेस लेयर मानकर ऊपर निजी पॉलिसी या टॉप-अप जोड़ें। इससे उच्च कवरेज, व्यापक नेटवर्क, रिस्टोरेशन बेनिफिट और वेलनेस सुविधाएं मिलती हैं।
निष्कर्ष
रिटायरमेंट के बाद सिर्फ एक पॉलिसी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। व्यक्तिगत हेल्थ पॉलिसी + सुपर टॉप-अप + (उपलब्ध होने पर) बच्चों का ग्रुप कवर + आयुष्मान भारत का संयोजन सबसे संतुलित तरीका है।
सही मिश्रण आपकी उम्र, मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, बजट और जरूरतों पर निर्भर करेगा। अभी से योजना बनाएं ताकि स्वास्थ्य खर्चों का बोझ कम रहे और मन की शांति बनी रहे।

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