गलत खाते में ₹45,000 ट्रांसफर करने पर बैंक ने पैसे वापस नहीं किए, कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक को ₹65,000 चुकाने का आदेश दिया

 

गलत खाते में ₹45,000 ट्रांसफर कर दिया? बैंक की लापरवाही पर मिला ₹65,000 का मुआवजा – जानिए पूरा मामला

अगर आपने कभी गलती से किसी गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए हों और बैंक ने रिकवर करने में देरी या लापरवाही की हो, तो यह फैसला आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग ने एक प्राइवेट बैंक को सर्विस में कमी का दोषी ठहराते हुए कुल ₹65,000 चुकाने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता रुड़की की सिविल लाइंस शाखा का ग्राहक था। 10 जनवरी 2019 को उसने मोबाइल नेट बैंकिंग के जरिए किसी परिचित के खाते में ₹45,000 ट्रांसफर करने की कोशिश की। गलती से पैसे किसी और व्यक्ति के खाते में चले गए।

उन्होंने तुरंत बैंक को सूचित किया। बैंक ने आश्वासन दिया कि 2 से 4 दिनों में राशि रिकवर कर ली जाएगी और जानकारी दी जाएगी। लेकिन बार-बार संपर्क करने के बावजूद पैसे वापस नहीं आए। बैंक सिर्फ आश्वासन देता रहा।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने 19 मार्च 2019 को कानूनी नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई। बैंक ने जवाब नहीं दिया, इसलिए मामला एकतरफा (ex-parte) चलता रहा।

उपभोक्ता आयोग का फैसला

हरिद्वार जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच (अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य अमरेश रावत और रंजना गोयल) ने स्पष्ट कहा कि:

शिकायतकर्ता ने तुरंत और पर्याप्त जानकारी के साथ बैंक को सूचित किया था।

बैंक ने रिकवरी का आश्वासन दिया था, लेकिन राशि कभी रिकवर नहीं की गई।

बार-बार सिर्फ आश्वासन देना और कोई ठोस कार्रवाई न करना सर्विस में कमी (deficiency in service) है।

आयोग ने बैंक को आदेश दिया:

₹45,000 मूल राशि वापस करें

₹10,000 मानसिक पीड़ा के लिए

₹10,000 मुकदमे की लागत के रूप में  

कुल ₹65,000 का भुगतान करना होगा।

इस फैसले से क्या सीख मिलती है?

यह केस साफ दिखाता है कि गलत ट्रांसफर की जानकारी तुरंत देने के बाद भी अगर बैंक उचित कदम नहीं उठाता, तो वह जवाबदेह हो सकता है। बार-बार दिए गए आश्वासन पर्याप्त नहीं होते। बैंक को सबूतों के साथ अपना पक्ष रखना होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।

अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें?

तुरंत बैंक को लिखित में (ईमेल + शाखा में आवेदन) सूचित करें।

ट्रांजेक्शन डिटेल्स, स्क्रीनशॉट और समय का रिकॉर्ड रखें।

अगर बैंक सहयोग न करे तो कानूनी नोटिस भेजें।

जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराएं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 या अपने राज्य की हेल्पलाइन पर संपर्क करें (उत्तराखंड: 1800-180-4188)।

गलत अकाउंट ट्रांसफर एक आम समस्या है, लेकिन सही समय पर कार्रवाई और दस्तावेजी सबूत होने से आप अपना पैसा वापस पा सकते हैं। बैंक की लापरवाही पर उपभोक्ता अदालतें अब सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं।

अपने पैसे की सुरक्षा के लिए हमेशा ट्रांजेक्शन दोबारा चेक करें और गलत ट्रांसफर होने पर तुरंत कार्रवाई करें।

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