PNB को लखनऊ के ग्राहक को 6.6 लाख रुपये लौटाने का आदेश:
बैंक कर्मचारी फ्रॉड पर उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसलालखनऊ के एक आम ग्राहक की मेहनत की कमाई को बैंक कर्मचारी द्वारा निकाल लिया गया, लेकिन उपभोक्ता अदालत ने न्याय दिलाया। उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को मोहम्मद लईक कुरैशी को 6.6 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया है। यह फैसला बैंक कर्मचारियों द्वारा किए गए फ्रॉड में बैंक की जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
मामला क्या था?
मोहम्मद लईक कुरैशी ने वर्ष 2010-2011 के बीच PNB में कई बार पैसे जमा किए थे। इनमें 25,000 रुपये, 1 लाख रुपये और 4 लाख रुपये जैसी राशियां शामिल थीं। कुल 6.6 लाख रुपये उनके सेविंग अकाउंट में थे। बाद में उन्होंने पाया कि उनके अकाउंट से बिना अनुमति के पैसे निकाल लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय के ब्रांच मैनेजर सुनील कुमार चतुर्वेदी ने इन अनधिकृत ट्रांजेक्शन को अंजाम दिया।जब बैंक ने पैसे वापस नहीं किए, तो कुरैशी ने लखनऊ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। जिला आयोग ने अप्रैल 2019 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया। PNB ने इस फैसले के खिलाफ राज्य आयोग में अपील की, लेकिन राज्य आयोग ने भी बैंक की अपील खारिज कर दी और ग्राहक को राहत दी।आयोग का फैसलाPNB को 45 दिनों के अंदर 6.6 लाख रुपये चुकाने होंगे।
7% सालाना ब्याज के साथ 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च भी देने होंगे।
अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ तो ब्याज 9% हो जाएगा।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि बैंक या पोस्ट ऑफिस अपने कर्मचारियों द्वारा किए गए फ्रॉड या गलत कार्य के लिए जिम्मेदार हैं। न्याय की भावना यह है कि ग्राहक बैंक की विश्वास प्रणाली पर भरोसा करता है, इसलिए बैंक को अपने कर्मचारियों की कार्रवाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
बैंक फ्रॉड में आपकी सुरक्षा: महत्वपूर्ण टिप्स (beyourmoneymanager.com)
नियमित अकाउंट मॉनिटरिंग — हर महीने SMS, Email और बैंक ऐप से ट्रांजेक्शन चेक करें। अनजान डेबिट पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
पासवर्ड और OTP की सुरक्षा — कभी किसी को OTP या नेट बैंकिंग पासवर्ड शेयर न करें।
कर्मचारी दबाव से सावधान — कोई भी बैंक कर्मचारी अगर आपको असामान्य ट्रांजेक्शन करने के लिए कहे तो तुरंत हेड ऑफिस या कस्टमर केयर से वेरिफाई करें।
RBI गाइडलाइंस का फायदा — बैंक फ्रॉड में 3 दिन के अंदर रिपोर्ट करने पर ज्यादातर मामलों में पैसे वापस मिल जाते हैं।
स्टेटमेंट की फोटोकॉपी रखें — पुराने ट्रांजेक्शन के सबूत हमेशा सुरक्षित रखें।
डिजिटल सिक्योरिटी — UPI पिन, ATM PIN कभी शेयर न करें। Two-factor authentication हमेशा ऑन रखें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह फैसला आम ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। अक्सर बैंक कर्मचारी फ्रॉड को “आंतरिक मामला” बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन उपभोक्ता आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों कहते हैं कि बैंक की जवाबदेही बनी रहती है।
निष्कर्ष:
अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना आपका अधिकार है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो तो बिना देरी के जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत करें। कानूनी प्रक्रिया से न्याय मिल सकता है, जैसा लखनऊ के इस मामले में हुआ।
स्रोत: उत्तर प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला एवं Indian Express रिपोर्ट (1 जून 2026)।

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