RBI रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 में भारत का घरेलू क्षेत्र ऋण GDP का 45.5% हो गया है। नॉन-हाउसिंग रिटेल लोन में तेजी, उपभोग ऋण का बड़ा हिस्सा। जानें इसका आपके पर्सनल फाइनेंस पर क्या असर पड़ सकता है।
भारत में घरेलू क्षेत्र का ऋण GDP का 45.5% पहुंचा: सितंबर 2025 में RBI रिपोर्ट ने दी चेतावनी
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की नवीनतम Financial Stability Report में एक महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। सितंबर 2025 तक भारत के घरेलू क्षेत्र (Household Sector) का कुल ऋण देश की GDP का 45.5 प्रतिशत पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले पांच साल के औसत 42.9 प्रतिशत से काफी ऊपर है और घरेलू वित्तीय स्वास्थ्य पर गहरी नजर डालने की जरूरत को रेखांकित करता है।
गैर-आवासीय रिटेल लोन में तेज उछाल मुख्य वजह
RBI रिपोर्ट के अनुसार इस वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से नॉन-हाउसिंग रिटेल लोन (जैसे वाहन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड आदि) हैं। मार्च 2026 तक इनका हिस्सा कुल घरेलू उधार में 58.4 प्रतिशत पहुंच गया है। आवासीय ऋण (Housing Loans) की तुलना में ये लोन लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि:उपभोग संबंधी ऋण (Consumption Loans) कुल घरेलू उधार का लगभग आधा हिस्सा रखते हैं।
संपत्ति निर्माण (Asset Creation) और उत्पादक उद्देश्यों (Productive Purposes) के लोन की तुलना में उपभोग लोन का वर्चस्व बना हुआ है।
सकारात्मक पहलू:
उधारकर्ताओं की गुणवत्ता सुधरी
चिंता के बीच एक अच्छी खबर भी है। RBI के अनुसार प्राइम और उससे बेहतर रेटिंग वाले उधारकर्ताओं (Higher-rated Borrowers) का हिस्सा बढ़ा है। इससे डिफॉल्ट रिस्क कम होने की संभावना है। आवास ऋणों में NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) भी घटकर मार्च 2026 में मात्र 0.5 प्रतिशत रह गया है, जो कोविड पूर्व स्तर से बेहतर है।
विशेषज्ञों की चिंता क्यों?
विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावना दे रहे हैं कि बढ़ता घरेलू ऋण मुख्य रूप से डिप्रिशिएटिंग एसेट्स (जैसे कार, दोपहिया वाहन) खरीदने और उपभोग व्यय के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इससे परिवारों का भविष्य का बचत और निवेश प्रभावित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय तुलना:
उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Markets) में भारत चौथे स्थान पर है। थाईलैंड: 87.3%
मलेशिया: 69.9%
चीन: 59%
भारत: 45.5%
आपके पैसे के प्रबंधन (Money Management) के लिए क्या मतलब है?
EMI का बोझ चेक करें — अगर आपकी मासिक आय का 40-50% से ज्यादा EMI में जा रहा है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है।
उपभोग लोन सीमित करें — जरूरत से ज्यादा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड डेब्ट से बचें।
इमरजेंसी फंड और निवेश प्राथमिकता दें — ऋण चुकाने के साथ-साथ बचत और निवेश को संतुलित रखें।
हाउसिंग लोन अभी भी बेहतर विकल्प — क्योंकि यह एसेट क्रिएशन में मदद करता है और NPA दर कम है।
निष्कर्ष:
RBI रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि क्रेडिट ग्रोथ अच्छी है, लेकिन इसे सतर्कता से संभालना जरूरी है। व्यक्तिगत स्तर पर Debt-to-Income Ratio कम रखना और स्मार्ट बॉरोइंग आदतें अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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