महिला ने साइबर फ्रॉड में गंवाए ₹2.34 लाख, Axis Bank को Consumer Court ने दिया बड़ा आदेश – पूरा पैसा वापस + ₹52,000 मुआवजा


₹2.34 लाख साइबर फ्रॉड होने पर Axis Bank को Gurgaon Consumer Commission ने महिला को पूरा रिफंड + 9% ब्याज, ₹30,000 मानसिक प्रताड़ना मुआवजा और ₹22,000 खर्च देने का आदेश दिया। साइबर फ्रॉड से बचाव और बैंक शिकायत के अधिकार जानें।

महिला ने साइबर फ्रॉड में गंवाए ₹2.34 लाख, Axis Bank को Consumer Court ने पूरा पैसा लौटाने + ₹52,000 मुआवजा देने का आदेश दियानई दिल्ली/गुरुग्राम। साइबर फ्रॉड के शिकार होने पर अब बैंक भी जवाबदेह हो सकते हैं। गुरुग्राम के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने Axis Bank को एक महिला ग्राहक को ₹2.34 लाख का पूरा रिफंड करने, 9% ब्याज देने और अतिरिक्त ₹52,000 मुआवजा व खर्च चुकाने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

एक महिला ने अपनी फर्म के वेबसाइट सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल के लिए Axis Bank क्रेडिट कार्ड से दो ट्रांजेक्शन किए – ₹1,20,751 और ₹1,13,979 (कुल ₹2,34,730)। 10 फरवरी 2025 को आए ईमेल में वेबसाइट एक्सपायरी का मैसेज और रिन्यूअल लिंक था। महिला ने ईमेल को असली समझकर पेमेंट कर दिया।कुछ दिनों बाद जब फिर से वैसा ही ईमेल आया तो महिला को शक हुआ। जांच में पता चला कि यह साइबर फ्रॉड था। महिला ने तुरंत बैंक में शिकायत की, साइबर क्राइम में भी रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन बैंक ने शिकायत गलत तरीके से बंद कर दी और ट्रांजेक्शन रिवर्स नहीं किए।

Consumer Court का फैसला

महिला ने अंत में गुरुग्राम Consumer Commission का रुख किया। Axis Bank पक्ष पेश करने नहीं पहुंचा, इसलिए केस एक्स-पार्टी (एकतरफा) चला।कमीशन की बेंच (प्रेसिडेंट संजीव जिंदल और मेंबर्स ज्योति सिवाच व खुशविंदर कौर) ने बैंक को severe deficiency in service का दोषी ठहराया और कहा:₹2.34 लाख का पूरा रिफंड + 9% सालाना ब्याज (ट्रांजेक्शन की तारीख से)।

₹30,000 मानसिक प्रताड़ना और मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में।

₹22,000 मुकदमेबाजी खर्च के रूप में।

कुल मुआवजा लगभग ₹52,000। बैंक को 45 दिनों में आदेश लागू करना होगा, वरना ब्याज 12% हो जाएगा।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह फैसला साफ संदेश देता है कि:साइबर फ्रॉड में बैंक अगर शिकायत को गंभीरता से नहीं लेता या ट्रांजेक्शन रिवर्स नहीं करता, तो उसे deficiency in service माना जाएगा।

Consumer Court में बैंक अगर केस लड़ने नहीं आता, तो शिकायतकर्ता का सबूत अंतिम माना जाता है।

क्रेडिट कार्ड यूजर्स को फ्रॉड होने पर तुरंत बैंक और साइबर सेल में रिपोर्ट करना चाहिए।

साइबर फ्रॉड से बचाव के टिप्स (Money Management Advice)

अननोन ईमेल/लिंक पर कभी पेमेंट न करें। हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप से चेक करें।

दो-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू रखें।

फ्रॉड होने पर 24 घंटे के अंदर बैंक को लिखित शिकायत दें।

National Consumer Helpline (1915) या Haryana के लिए 1800-180-2087 पर संपर्क करें।

निष्कर्ष:

यह केस दिखाता है कि साइबर फ्रॉड में हार मानने की जरूरत नहीं है। सही तरीके से शिकायत और कानूनी रास्ता अपनाने पर बैंक को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।अस्वीकरण: यह आर्टिकल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।


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