पति-पत्नी में गिफ्ट: FD, शेयर या गोल्ड पर कमाई का टैक्स बचाने का प्लान क्यों फेल हो सकता है? क्लबिंग ऑफ इनकम नियम की पूरी डिटेल 2026
क्या आप अपनी पत्नी या पति को पैसे गिफ्ट करके टैक्स बचाने की प्लानिंग कर रहे हैं? FD, शेयर, म्यूचुअल फंड या गोल्ड में निवेश करने से पहले क्लबिंग ऑफ इनकम नियम को जरूर समझ लें। इनकम टैक्स एक्ट की ये धारा (मुख्य रूप से सेक्शन 64) कई टैक्सपेयर्स के टैक्स बचत प्लान को उलट देती है। गिफ्ट खुद टैक्स-फ्री है, लेकिन उससे होने वाली इनकम अक्सर गिफ्ट करने वाले व्यक्ति के हाथ में जोड़ दी जाती है।
क्लबिंग ऑफ इनकम क्या है?
क्लबिंग ऑफ इनकम इनकम टैक्स एक्ट का एक एंटी-टैक्स अवॉइडेंस प्रोविजन है। इसका मकसद ये है कि लोग अपनी कमाई या एसेट्स परिवार के सदस्यों (खासकर पति-पत्नी) को बिना पर्याप्त कंसीडरेशन (मूल्य) के ट्रांसफर करके टैक्स कम न कर सकें। अगर आपने अपनी पत्नी को पैसे गिफ्ट किए और उन्होंने उससे इनकम जेनरेट की, तो ज्यादातर मामलों में वो इनकम आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाएगी।
FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) पर ब्याज - क्लबिंग कैसे लागू होता है?मान लीजिए आपने अपनी पत्नी को ₹10 लाख गिफ्ट किए और उन्होंने FD में निवेश कर दिया। FD से मिलने वाला ब्याज आमतौर पर आपके हाथ में टैक्सेबल माना जाएगा। महत्वपूर्ण बात: अगर वो ब्याज को दोबारा निवेश करके नई इनकम कमाते हैं, तो उस अतिरिक्त इनकम पर क्लबिंग नहीं लग सकता। लेकिन मूल गिफ्टेड अमाउंट से होने वाला ब्याज क्लब होगा।शेयर, म्यूचुअल फंड और डिविडेंड/कैपिटल गेनगिफ्टेड पैसे से खरीदे गए शेयर या म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड और कैपिटल गेन (बिक्री पर लाभ) ज्यादातर मामलों में गिफ्ट करने वाले व्यक्ति की इनकम में क्लब होगा।
लॉस होने पर भी क्लबिंग प्रोविजन लागू हो सकता है, जो टैक्स प्लानिंग को और जटिल बना देता है।
गोल्ड निवेश पर कैपिटल गेन
अगर गिफ्टेड फंड से गोल्ड खरीदा गया और बाद में बेचा गया, तो कैपिटल गेन गिफ्ट करने वाले (ट्रांसफरर) के हाथ में टैक्सेबल होगा। नाम किसी के भी नाम पर क्यों न हो, फंड्स की सोर्स महत्वपूर्ण है।
गिफ्ट vs इंटरेस्ट-फ्री लोन - बड़ा अंतरगिफ्ट: क्लबिंग लागू होता है (बिना पर्याप्त कंसीडरेशन)।
लोन: अगर प्रॉपर डॉक्यूमेंटेशन (लोन एग्रीमेंट, ब्याज/रिपेमेंट रिकॉर्ड) हो तो क्लबिंग से बचाव संभव है। लेकिन ट्रांजेक्शन जेनुइन होना चाहिए।
अन्य महत्वपूर्ण क्लबिंग नियम
बहू (Daughter-in-law): बिना कंसीडरेशन एसेट ट्रांसफर करने पर इनकम क्लब हो सकती है।
नाबालिग बच्चा: बच्चे की इनकम (कुछ अपवादों को छोड़कर) माता-पिता (जिसकी इनकम ज्यादा हो) के साथ क्लब होती है।
पति-पत्नी दोनों की इनकम में से जो ज्यादा हो, उसी में क्लबिंग होती है (कुछ मामलों में)।
ITR में क्लब्ड इनकम कैसे रिपोर्ट करें?
FD ब्याज → 'Income from Other Sources'
डिविडेंड → Dividend Schedule
कैपिटल गेन (शेयर/गोल्ड) → Capital Gains Schedule
TDS किसी और के PAN पर दिखे तो भी सही डॉक्यूमेंटेशन रखें ताकि क्रेडिट क्लेम कर सकें। AIS, 26AS और SFT रिपोर्टिंग के कारण टैक्स डिपार्टमेंट आसानी से ऐसे ट्रांजेक्शन ट्रैक कर लेता है।क्लबिंग इनकम न रिपोर्ट करने के परिणामन रिपोर्ट करने पर अतिरिक्त टैक्स, ब्याज, पेनाल्टी और स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है। हमेशा सही तरीके से रिपोर्ट करें।
टैक्स बचाने के वैकल्पिक तरीके (लीगल)
पत्नी की अपनी कमाई (सैलरी/बिजनेस) से निवेश करें - क्लबिंग नहीं लगेगा।
प्रॉफेशनल क्वालिफिकेशन से जुड़ी इनकम (कुछ मामलों में) क्लबिंग से बाहर।
उचित मूल्य पर एसेट ट्रांसफर (सेल) करें।
लोन स्ट्रक्चर का इस्तेमाल (डॉक्यूमेंटेशन के साथ)।
हमेशा चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एडवाइजर से सलाह लें।
निष्कर्ष:
पत्नी या पति को गिफ्ट करना पूरी तरह वैध और टैक्स-फ्री है, लेकिन उस पैसे से होने वाली इनकम पर क्लबिंग नियम लागू होने से टैक्स बचत का फायदा सीमित रह जाता है। स्मार्ट टैक्स प्लानिंग के लिए नियमों को समझना और प्रॉफेशनल मदद लेना जरूरी है। BeYourMoneyManager पर ऐसे ही टैक्स, इन्वेस्टमेंट और पर्सनल फाइनेंस टिप्स के लिए बने रहें। ITR फाइलिंग, टैक्स सेविंग और वेल्थ मैनेजमेंट पर ज्यादा जानकारी के लिए हमारी अन्य पोस्ट पढ़ें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्ञान के लिए है। व्यक्तिगत सलाह के लिए क्वालिफाइड टैक्स कंसल्टेंट से संपर्क करें। नियम बदल सकते हैं।
('बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग के शेयर बाजार जरूर जुआ है'
((शेयर बाजार: जब तक सीखेंगे नहीं, तबतक पैसे बनेंगे नहीं!

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