Canara Bank और Bank of Baroda ने बढ़ाई लोन ब्याज दरें: क्या बढ़ जाएगी आपकी EMI? जानिए पूरा असर



Canara Bank और Bank of Baroda ने 12 जून 2026 से MCLR में बदलाव किया है। जानिए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा और किन ग्राहकों को ज्यादा असर होगा।

Canara Bank और Bank of Baroda ने बढ़ाई लोन ब्याज दरें: क्या बढ़ जाएगी आपकी EMI?

देश के लाखों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सार्वजनिक क्षेत्र के दो बड़े बैंक—Canara Bank और Bank of Baroda—ने अपनी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate (MCLR) में बदलाव की घोषणा की है। नई दरें 12 जून 2026 से लागू हो गई हैं और इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिनके लोन MCLR से जुड़े हुए हैं। 

MCLR क्या होता है?

MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) वह न्यूनतम ब्याज दर है जिसके नीचे बैंक सामान्य परिस्थितियों में लोन नहीं दे सकते। बैंक अपने फंड जुटाने की लागत, परिचालन खर्च और अन्य कारकों के आधार पर MCLR तय करते हैं। जब MCLR बढ़ता है, तो फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दरें भी बढ़ सकती हैं, जिससे EMI महंगी हो जाती है।

 क्या बदला है?

Canara Bank और Bank of Baroda ने चुनिंदा अवधि (tenure) के लिए MCLR में 5 बेसिस पॉइंट (0.05%) तक की वृद्धि की है। नई दरें 12 जून 2026 से प्रभावी हैं। बैंकों का कहना है कि फंडिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण यह संशोधन किया गया है। 

Canara Bank के कुछ प्रमुख MCLR टेन्योर में 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे नए और रीसेट अवधि वाले ग्राहकों की ब्याज दर प्रभावित हो सकती है। 

किन ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

1. MCLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन ग्राहक

यदि आपका होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR आधारित है, तो आपकी EMI बढ़ सकती है। हालांकि यह वृद्धि तुरंत सभी ग्राहकों पर लागू नहीं होगी। इसका असर आपके लोन की अगली "रीसेट डेट" पर दिखाई देगा। 

2. नए लोन लेने वाले ग्राहक

जो लोग 12 जून 2026 के बाद नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पहले की तुलना में थोड़ी अधिक ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। ([The Economic Times][1])

3. Repo Linked Loan वाले ग्राहकों को राहत

आज अधिकांश नए रिटेल लोन Repo Linked Lending Rate (RLLR) से जुड़े होते हैं। ऐसे ग्राहकों पर MCLR में बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा। उदाहरण के लिए, Canara Bank की कई रिटेल लोन योजनाएं RLLR से जुड़ी हैं।

 EMI पर कितना असर पड़ सकता है?

मान लीजिए किसी ग्राहक ने ₹50 लाख का होम लोन 20 वर्षों के लिए लिया है। यदि ब्याज दर में 0.05% की वृद्धि होती है, तो EMI में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि लंबे समय में कुल ब्याज भुगतान हजारों रुपये तक बढ़ सकता है।

यही कारण है कि छोटी दिखने वाली ब्याज दर वृद्धि भी लंबे समय के लोन पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

 क्या आपको चिंता करनी चाहिए?

घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूक रहना जरूरी है।

यदि आपका लोन MCLR आधारित है तो:

* अपनी अगली रीसेट डेट जांचें।

* बैंक द्वारा लागू नई ब्याज दर को समझें।

* यदि संभव हो तो RLLR आधारित लोन में स्विच करने का विकल्प देखें।

* अतिरिक्त प्रीपेमेंट करके कुल ब्याज बोझ कम करें।


RBI की नीतियों से क्या संबंध है?


बैंकों की लेंडिंग रेट्स अक्सर RBI की मौद्रिक नीति, बाजार की ब्याज दरों और फंडिंग कॉस्ट से प्रभावित होती हैं। जब बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा होता है, तो वे इसकी लागत ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए MCLR बढ़ा सकते हैं। 


होम लोन ग्राहकों के लिए 5 जरूरी सुझाव

1. हर 6 महीने में अपनी ब्याज दर की समीक्षा करें।

2. EMI बढ़ने पर केवल अवधि बढ़ाने के बजाय आंशिक प्रीपेमेंट पर विचार करें।

3. CIBIL स्कोर बेहतर रखें ताकि बेहतर ब्याज दर मिल सके।

4. बैंक द्वारा उपलब्ध बैलेंस ट्रांसफर विकल्पों की तुलना करें।

5. फ्लोटिंग और फिक्स्ड रेट विकल्पों के फायदे-नुकसान समझें।

 निष्कर्ष

Canara Bank और Bank of Baroda द्वारा MCLR में की गई वृद्धि भले ही केवल 5 बेसिस पॉइंट की हो, लेकिन इसका असर लाखों MCLR-लिंक्ड लोन ग्राहकों की EMI पर पड़ सकता है। ऐसे समय में वित्तीय अनुशासन, नियमित समीक्षा और सही लोन प्रबंधन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो अपनी ब्याज दर और रीसेट साइकिल पर नजर रखना समझदारी होगी। 


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