बैंकों की दोहरी नीति: बड़े लोन में लापरवाही, छोटे कर्ज पर सख्ती – सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी | BeYourMoneyManager

सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को फटकार लगाई है। बड़े कॉर्पोरेट को आसानी से भारी लोन, लेकिन आम आदमी को छोटा पर्सनल लोन लेने में परेशानी। इस लेख में पूरी डिटेल, कारण और आपके लिए सलाह।

बैंकों की दोहरी नीति: बड़े लोन में लापरवाही, छोटे कर्ज पर सख्ती – सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणीनई दिल्ली। आम आदमी जब छोटा-मोटा पर्सनल लोन या होम लोन लेने जाता है तो बैंक उसकी जिंदगी की छोटी-छोटी डिटेल तक की जांच करते हैं। लेकिन जब बात करोड़ों-हजारों करोड़ के लोन की आती है तो वही बैंक काफी ढीले पड़ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस दोहरी नीति पर तीखी टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

21 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने State Bank of India (SBI) समेत अन्य बैंकों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा:“बैंक बड़े संस्थानों को भारी भरकम लोन देते समय लापरवाही बरतते हैं, लेकिन आम लोगों को छोटे लोन के लिए इतनी सख्त शर्तें और जटिल प्रक्रिया अपनाते हैं कि कई बार यह borderline harassment (सीमा के करीब उत्पीड़न) जैसा लगता है।”

कोर्ट ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें SBI पर लोन की वसूली को लेकर सवाल उठे थे।क्यों अपनाते हैं बैंक यह दोहरी नीति?बड़े लोन पर दबाव: बड़े कॉर्पोरेट कस्टमर अक्सर राजनीतिक या औद्योगिक दबाव में आते हैं। कई बार NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बनने के बाद भी लोन माफ या रिस्ट्रक्चर कर दिए जाते हैं।

छोटे कर्ज पर जोखिम शून्य नीति: छोटे लोन में रिकवरी का खर्च ज्यादा पड़ता है, इसलिए बैंक CIBIL स्कोर, इनकम प्रूफ, गुarantor, और अतिरिक्त दस्तावेजों की भरमार लगा देते हैं।

रिस्क मैनेजमेंट: बैंक बड़े लोन में collateral या सरकारी गारंटी देखते हैं, जबकि छोटे लोन में व्यक्ति की पूरी फाइनेंशियल हिस्ट्री को खंगालते हैं।

आम आदमी पर क्या असर पड़ रहा है?पर्सनल लोन, वाहन लोन, या छोटे बिजनेस लोन लेने में कई हफ्ते लग जाते हैं।

बार-बार दस्तावेज मांगना और अनावश्यक सवाल।

अच्छा CIBIL स्कोर होने के बावजूद लोन रिजेक्ट होना।

महंगे ब्याज दरें छोटे कर्ज पर।

आपके लिए सलाह – BeYourMoneyManager

1. लोन लेने से पहले ये 5 काम जरूर करें:अपना CIBIL स्कोर 750+ रखें।

Income Tax Return, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप हमेशा तैयार रखें।

जरूरत से ज्यादा लोन न लें।

अलग-अलग बैंकों के ऑफर की तुलना करें (ऑनलाइन लेंडिंग प्लेटफॉर्म भी देखें)।

लोन लेने से पहले EMI की गणना अवश्य करें।

2. अगर बैंक सख्ती करे तो:लिखित में कारण मांगें।

बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से शिकायत करें।

RBI की गाइडलाइंस का हवाला दें।

3. बेहतर विकल्प:सरकारी योजनाएं जैसे मुद्रा लोन, PM SVANidhi, Stand Up India आदि का फायदा उठाएं।

NBFC या डिजिटल लेंडर्स (जिनके नियम थोड़े लचीले होते हैं) पर विचार करें, लेकिन ब्याज दर जरूर चेक करें।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बैंकों के लिए चेतावनी है। सरकार को छोटे कर्ज लेने वालों के लिए नीतियां बनाने की जरूरत है ताकि आम आदमी को भी आसानी से और उचित ब्याज पर फाइनेंस मिल सके।

आपका अनुभव क्या है?

क्या आपको भी बैंक से छोटा लोन लेने में परेशानी हुई है? कमेंट में बताएं।


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