मौद्रिक नीति निर्णय
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की 59वीं बैठक 4 से 6 फरवरी 2026 तक श्री संजय मल्होत्रा, गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक की अध्यक्षता में आयोजित की गई। एमपीसी के सदस्य डॉ. नागेश कुमार, श्री सौगत भट्टाचार्य, प्रो. राम सिंह, डॉ. पूनम गुप्ता और श्री इन्द्रनील भट्टाचार्य बैठक में शामिल हुए।
2. उभरते समष्टि आर्थिक और वित्तीय घटनाक्रमों तथा संभावना का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद, एमपीसी ने सर्वसम्मति से चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के अंतर्गत नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.00 प्रतिशत, तथा सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.50 प्रतिशत पर बनी रहेगी। एमपीसी ने तटस्थ रुख बनाए रखने का भी निर्णय लिया।
संवृद्धि और मुद्रास्फीति की संभावना
3. वैश्विक अर्थव्यवस्था ने 2025 में व्यापार की फ्रंट लोडिंग, प्रत्याशित प्रभाव से थोड़ा नरम टैरिफ, व्यापक राजकोषीय प्रोत्साहन और निभावकारी मौद्रिक नीति की सहायता और समर्थन के साथ उल्लेखनीय आघात-सहनीयता दिखाई। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे गिरावट के रास्ते पर है, हालांकि यह कई उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के आधार पर दरों में कटौती की उम्मीद कम होने के बीच अमेरिकी प्रतिफल में तेजी आ रही है। तकनीकी शेयरों में निरंतर निवेश से समर्थित इक्विटी में तेजी आई है, जबकि राजकोषीय तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मौद्रिक नीति विचलन से वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है।
4. घरेलू स्थिति के संबंध में, प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2025-26 में 7.4 प्रतिशत (वाई-ओ-वाई) तक बढ़ने का अनुमान है। निजी उपभोग और निश्चित निवेश ने समग्र संवृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, शुद्ध बाह्य मांग, एक रुकावट बनी रही, क्योंकि आयात, निर्यात से अधिक थे। आपूर्ति पक्ष के संबंध में 7.3 प्रतिशत की वास्तविक जीवीए संवृद्धि, तेजी से बढ़ता सेवा क्षेत्र, आघात-सह कृषि क्षेत्र और विनिर्माण गतिविधि में पुनरुद्धार से प्रेरित है।
5. आगे की ओर देखते हुए, सेवा क्षेत्र में निरंतर उछाल, जीएसटी युक्तिकरण, स्वस्थ रबी संभावनाओं, मौद्रिक सहजता और मुद्रास्फीति के अनुकूल माहौल को निजी खपत का समर्थन करना चाहिए। उच्च क्षमता उपयोग, अनुकूल वित्तीय स्थितियों, वित्तीय संस्थानों और कंपनियों के स्वस्थ तुलन-पत्र, मजबूत ऋण संवृद्धि और पूंजीगत व्यय पर सरकार के निरंतर जोर से समर्थित निवेश गतिविधि, अपनी गति बनाए रखने की उम्मीद है। इसके अलावा, मजबूत घरेलू मांग से निजी क्षेत्र द्वारा नए निवेश आकर्षित होने की संभावना है। जब कि सेवा निर्यात मजबूत रहने की उम्मीद है, अमेरिका के साथ संभावित व्यापार सौदे से वाणिज्यिक निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार सौदों के साथ यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापक व्यापार समझौते से निर्यात में विविधता लाने और बाहरी क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव, अनिश्चित वैश्विक व्यापार माहौल, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय पण्य की कीमतों के कारण संभावना के लिए नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी संवृद्धि पूर्वानुमान क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत (चार्ट 1)1 तक संशोधित किए गए हैं। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।
6. हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर 2025 में 1.3 प्रतिशत रही। जबकि खाद्य समूह अपस्फीति में रहा, ईंधन समूह के भीतर मुद्रास्फीति नवंबर और दिसंबर में मामूली रही। मूल मुद्रास्फीति (खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई) भी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बावजूद सौम्य बनी रही। स्वर्ण को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.6 प्रतिशत पर स्थिर रही।
7. निकट भविष्य की संभावना से पता चलता है कि स्वस्थ खरीफ उत्पादन, खाद्यान्न के पर्याप्त बफर स्टॉक और रबी की अनुकूल बुवाई के कारण खाद्य आपूर्ति की संभावनाएं उज्ज्वल बनी हुई हैं। कीमती धातुओं की कीमतों से उत्पन्न संभावित उतार-चढ़ाव को छोड़कर मूल मुद्रास्फीति के दायरे में आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के साथ-साथ ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के साथ मुद्रास्फीति के लिए अन्य संभावित जोखिम भी हैं। हेडलाइन मुद्रास्फीति प्रक्षेपपथ के संदर्भ में, 2024-25 की चौथी तिमाही में देखे गए मूल्यों में बड़ी गिरावट से उत्पन्न अनुकूल नहीं होने वाले आधार प्रभाव, 2025-26 की चौथी तिमाही में वर्ष-दस-वर्ष आधार पर मुद्रास्फीति में वृद्धि का कारण बनेंगे, भले ही अपेक्षित गति नियंत्रित रहे। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, 2025-26 के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि चौथी तिमाही में यह 3.2 प्रतिशत है। 2026-27 की पहली तिमाही और दूसरी तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति क्रमशः 4.0 प्रतिशत और 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है (चार्ट 2)। कीमती धातुओं को छोड़कर अंतर्निहित मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी कम बना हुआ है। जोखिम समान रूप से संतुलित हैं।

मौद्रिक नीति संबंधी निर्णयों का औचित्य
8. एमपीसी ने कहा कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां तेज हो गई हैं, हालांकि व्यापार सौदों का सफल समापन आर्थिक संभावना के लिए अच्छा है। कुल मिलाकर, निकट अवधि की घरेलू मुद्रास्फीति और संवृद्धि संभावना सकारात्मक बनेबनी हुई है।
9. हेडलाइन मुद्रास्फीति, नवंबर-दिसंबर के दौरान मुद्रास्फीति लक्ष्य की सहिष्णुता सीमा से नीचे बनी रही। 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही में सीपीआई मुद्रास्फीति के लिए संभावना लगातार सौम्य और मुद्रास्फीति लक्ष्य के करीब है। मुद्रास्फीति संभावना में मामूली संशोधन, मुख्य रूप से बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है, जो लगभग 60-70 आधार अंकों का योगदान करते हैं। अंतर्निहित मुद्रास्फीति अभी भी कम बनी हुई है।
10. संवृद्धि के संबंध में, आर्थिक गतिविधियां आघात-सह बनी हुई हैं। प्रथम अग्रिम अनुमान, चुनौतीपूर्ण बाह्य वातावरण के बीच घरेलू कारकों द्वारा संचालित सतत संवृद्धि गति का सुझाव देते हैं। संवृद्धि की संभावना अनुकूल बनी हुई है।
11. घरेलू समष्टि आर्थिक स्थितियों तथा संभावना की व्यापक समीक्षा के आधार पर एमपीसी का विचार है कि वर्तमान नीतिगत दर उचित है। तदनुसार, एमपीसी ने मौजूदा नीतिगत दर को जारी रखने के लिए वोट किया। एमपीसी तटस्थ रुख को बनाए रखने के लिए भी सहमत हुई। हालांकि, प्रो. राम सिंह ने अपने विचार को बनाए रखा कि रुख को तटस्थ से निभावकारी में बदल दिया जाए। आगे बढ़ते हुए, एमपीसी को मौद्रिक नीति के भविष्य के मार्ग को तैयार करने में उभरती समष्टि आर्थिक परिस्थितियों और नई श्रृंखला के आंकड़ों के आधार पर संभावना द्वारा निर्देशित किया जाएगा।
12. एमपीसी की बैठक के कार्यवृत्त 20 फरवरी 2026 को प्रकाशित किए जाएंगे।
13. एमपीसी की अगली बैठक 6 से 8 अप्रैल 2026 के दौरान निर्धारित है।
1 वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वानुमान, 27 फरवरी और 12 फरवरी 2026 को क्रमशः जारी की जाने वाली नई जीडीपी और सीपीआई श्रृंखला (आधार 2024=100) को सम्मिलित करने के बाद अप्रैल 2026 में घोषित होने वाले मौद्रिक नीति संकल्प में दिए जाएंगे।
(साभार- www.rbi.org.in)
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