मार्केट रेगुलेटर सेबी ने रीट्स और विदेशी फंड मैनेजर पर बड़ा फैसला लिया है। सेबी के निदेशक मंडल ने भारत में काम करने को इच्छुक विदेशी फंड मैनेजरों को राहत देने के लिए एक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत वे पोर्टफोलियो मैनेजर के तौर पर काम कर सकेंगे। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार पहले ही भारत में काम करने की इच्छा रखने वाले विदेशी फंड मैनेजरों को प्रोत्साहन देने की घोषणा कर चुकी है।
>प्रस्ताव की खास बातें:
-एक अलग सेक्शन पात्र फंड मैनेजर होगा, जिसमें पोर्टफोलियो मैनेजर के तौर पर
उनकी गतिविधियों के लिए शर्तें होंगी।
-नए नियम में सेबी में पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों को पात्र फंड मैनेजर के तौर पर
काम करने की खातिर प्रक्रिया का भी जिक्र होगा।
-सेबी भारत आकर काम करने की इच्छा रखने वाले मौजूदा विदेशी फंड मैनेजरों के पंजीकरण
की प्रक्रिया तय करेगा या फिर नए आवेदन के जरिए पात्र फंड मैनेजर के तौर पर काम करने
वालों के लिए भी प्रक्रिया होगी।
-पोर्टफोलियो मैनेजर और विदेशी फंड के बीच अनिवार्य समझौते के नियम, विदेशी फंड और
न्यूनतम निवेश की दरकार (25 लाख रुपये) जैसे नियम ऐसे विदेशी फंडों पर लागू नहीं होंगे।
>रीट्स (REITs)के नियमों में बदलाव:
सेबी ने एक और महत्वपूर्ण फैसले के तहत रीट्स (REITs) यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स के नियमों को आसान बनाने की घोषणा की है। नियम आसान बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी ताकि ये ट्रस्ट निर्माणाधीन
संपत्तियों में ज्यादा निवेश कर सकेंऔर इसके प्रायोजकों की संख्या ज्यादा हो। सेबी के निदेशक मंडल ने एसपीवी ढांचे में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) की तरफ से निवेश पर लगी पाबंदी हटाने को मंजूरी दी, वहीं संबंधित पक्षकार के लेनदेन से जुड़े नियमों को भी सरल बना दिया।
>रीट्स (REITs) पर सेबी के फैसले की खास बातें:
- इससे रीट्स 20% निवेश निर्माणाधीन परियोजनाओं में कर सकेगा, जो अभी अधिकतम 10% है।
-न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से जुड़े अनुपालन के प्रावधान में भी छूट मिलेगी
सेबी ने साल 2014 में रीट्स के नियम अधिसूचित किए थे। इस साल के बजट में सरकार ने कोई निश्चित कर लाभ की घोषणा की थी, लेकिन सेबी ने अब इस नियम को सरल बनाने का फैसला किया। सेबी ने अभी विदेशी फंड मैनेजर और रीट्स से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है और इस पर संबंधित सारे पक्षों से टिप्पणी मिलने के बाद ही नियम बनाए जाएंगे।
>प्रस्ताव की खास बातें:
-एक अलग सेक्शन पात्र फंड मैनेजर होगा, जिसमें पोर्टफोलियो मैनेजर के तौर पर
उनकी गतिविधियों के लिए शर्तें होंगी।
-नए नियम में सेबी में पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों को पात्र फंड मैनेजर के तौर पर
काम करने की खातिर प्रक्रिया का भी जिक्र होगा।
-सेबी भारत आकर काम करने की इच्छा रखने वाले मौजूदा विदेशी फंड मैनेजरों के पंजीकरण
की प्रक्रिया तय करेगा या फिर नए आवेदन के जरिए पात्र फंड मैनेजर के तौर पर काम करने
वालों के लिए भी प्रक्रिया होगी।
-पोर्टफोलियो मैनेजर और विदेशी फंड के बीच अनिवार्य समझौते के नियम, विदेशी फंड और
न्यूनतम निवेश की दरकार (25 लाख रुपये) जैसे नियम ऐसे विदेशी फंडों पर लागू नहीं होंगे।
>रीट्स (REITs)के नियमों में बदलाव:
सेबी ने एक और महत्वपूर्ण फैसले के तहत रीट्स (REITs) यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स के नियमों को आसान बनाने की घोषणा की है। नियम आसान बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी ताकि ये ट्रस्ट निर्माणाधीन
संपत्तियों में ज्यादा निवेश कर सकेंऔर इसके प्रायोजकों की संख्या ज्यादा हो। सेबी के निदेशक मंडल ने एसपीवी ढांचे में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (रीट्स) की तरफ से निवेश पर लगी पाबंदी हटाने को मंजूरी दी, वहीं संबंधित पक्षकार के लेनदेन से जुड़े नियमों को भी सरल बना दिया।
>रीट्स (REITs) पर सेबी के फैसले की खास बातें:
- इससे रीट्स 20% निवेश निर्माणाधीन परियोजनाओं में कर सकेगा, जो अभी अधिकतम 10% है।
-न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से जुड़े अनुपालन के प्रावधान में भी छूट मिलेगी
सेबी ने साल 2014 में रीट्स के नियम अधिसूचित किए थे। इस साल के बजट में सरकार ने कोई निश्चित कर लाभ की घोषणा की थी, लेकिन सेबी ने अब इस नियम को सरल बनाने का फैसला किया। सेबी ने अभी विदेशी फंड मैनेजर और रीट्स से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है और इस पर संबंधित सारे पक्षों से टिप्पणी मिलने के बाद ही नियम बनाए जाएंगे।
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