प्रधानमंत्री जी, दिल्ली और बिहार विधान सभा चुनाव के दौरान वोटर्स आपसे से दूर चले गए और अब जिन आंकड़ों को आप अपनी उपलब्धि के तौर बखान करते नहीं थकते थे, वो भी लगता है रूठ से गए हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि दुनिया में सबसे तेज गति से हम विकास कर रहे हैं, विदेशी निवेशकों की हम पहली पसंद बने हुए हैं, जिन देशों में आप जाते हैं वहां आपकी डंका बजती है, बावजूद इसके इकोनॉमी को लेकर कुछ ऐसे डाटा आ रहे हैं, जिस पर जल्द कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि दुनिया के मुहाने पर मंदी जैसी चीज आहट दे रही है।
((सितंबर तिमाही में GDP ग्रोथ@7.4%
ग्रोथ की रेस में फिर भारत ने चीन को पछाड़ा
http://beyourmoneymanager.blogspot.com/2015/11/gdp-74.html
मसलन, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले दिन 26 मई 2014 के बाद बीएसई सेंसेक्स में जितनी तेजी आई थी, वह खत्म हो गई है। जानकारों का मानना है कि दलाल स्ट्रीट पर मोदी का जादू खत्म हो रहा है। उसकी बड़ी वजह यह है कि राज्यसभा से सरकार बड़े बिल पास नहीं करवा पा रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 28 महीने के निचले लेवल पर पहुंच गया है और शेयर बाजार में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी मार्च 2015 के ऑल टाइम लेवल से 17.5% नीचे आ चुके हैं।
((भारतीय शेयर बाजार मोदी-पूर्व युग के स्तर पर, ये रहे कारण
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2016/01/blog-post_75.html
((मोदी राज, मार्केट और मुनाफा !
http://beyourmoneymanager.blogspot.com/2015/09/blog-post_6.html
भारतीय निर्यात लगातार गिर रहा है। नवंबर में सालाना आधार पर इसमें करीब 25% की गिरावट आई है। देश की ग्रोथ निर्यात की ग्रोथ से भी जुड़ा हुआ है। मसलन, जब भारत की आर्थिक विकास दर 8 फ़ीसदी की रफ़्तार से बढ़ रही थी, तब निर्यात भी सालाना 20 % से ज्यादा की दर से बढ़ रहा था।
((नवंबर में लगातार 12वें महीने गिरा एक्सपोर्ट, व्यापार घाटे में कमी
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2015/12/12.html
मोदी सरकार से जिन दो अहम सुधारों को तेजी से लागू करने की उम्मीद थी उनमें भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार और GST को लागू करना था। लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव लाने में तो सरकार पूरी तरह से नाकाम रही और अब जबकि सरकार अगले कुछ महीनों में अपना दो साल का कार्यकाल पूरे करने जा रही है, तो भी GST को लागू करना फिलहाल दूर की कौड़ी लग रहा है।
आपकी पूर्ण बहुमत वाली सरकार के सत्तासीन होने के पहले 30 सालों में अल्पमत सरकारें रहीं, लेकिन ऐसा नहीं हैं कि उन सरकारों ने कोई बड़े सुधार नहीं किए और पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हैं। देश ने बहुत उम्मीद के साथ आपको देश की बागडोर सौंपी थी, लेकिन अब तक आपकी तरफ से बड़े सुधार का इंतजार है। राज्यसभा में बहुमत नहीं होना और विपक्ष पर रोड़े अटकाने का आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेने से काम नहीं चलने वाला है, मोदी जी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 500 शीर्ष कंपनियों की बिक्री में 2015 में 0% की वृद्धि हुई है। इस साल मार्च, 2016 में खत्म हो रहे वित्तीय साल के दौरान उन्हें हानि उठानी पड़ सकती है। यह निर्यात में नकारात्मक वृद्धि दर के बाद दूसरा संकेत है जो बताता है कि भारत की विकास दर भी संकट में है। इसलिए, जागिए मोदी जी। इसके अलावा मुश्किलों को बढ़ाने वाले दूसरे संकेत भी मिल रहे हैं। साख में वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ-नई आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए क़र्ज़ लेने की स्थिति) में भी गिरावट है। भारतीय कॉरपोरेट घरानों पर भारी भरकम क़र्ज़ है और भारत के सार्वजनिक बैंकों के क़र्ज़ में बहुत बड़ी मात्रा गैर निष्पादित क़र्ज़ (नॉन पॉरफॉर्मिंग लोन्स) की है।
इसके अलावा, नवंबर IIP 4 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में
4.4% की निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई, इस साल की दिसंबर तिमाही में निराशाजनक नतीजे के संकेत
दिख रहे हैं, साथ ही महंगाई दर में भी बढ़ोतरी होने लगी है।
((नवंबर में IIP 3.2% गिरा, 4 साल की बड़ी गिरावट
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2016/01/iip-32-4.html
((दिसंबर में WPI महंगाई 0.73% घटी
http://beyourmoneymanager.blogspot.in/2016/01/wpi-073.html
((दिसंबर में CPI महंगाई 5.61% बढ़ी, आगे और बढ़ने की आशंका
http://beyourmoneymanager.blogspot.com/2016/01/cpi-561.html
वित्त मंत्री अरुण जेटली जी, हमेशा 9% विकास दर हासिल करने का दावा करते रहते हैं, लेकिन क्या हम इन कमजोर आंकड़ों के दम पर ऐसा कर पाएंगे, ये बड़ा सवाल है।
अब 'मजबूर और कमजोर मनमोहन सिंह सरकार' का समय बीत चुका है, 30 साल बाद देश में पूर्ण बहुमत वाली मजबूत और स्थिर सरकार है, देश के लिए सबसे बड़ी टेंशन कच्चा तेल 12 साल के निचले स्तर पर 30 डॉलर प्रति बैरल के नीचे, सख्त-विज़नरी-निर्णायक-स्पष्ट सोच वाले शख्स के हाथ में कमान है, मोदी जी, क्या उम्मीद करें कि सारे आंकड़े जल्द ही पटरी पर आते दिखेंगे।
((सितंबर तिमाही में GDP ग्रोथ@7.4%
ग्रोथ की रेस में फिर भारत ने चीन को पछाड़ा
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मसलन, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले दिन 26 मई 2014 के बाद बीएसई सेंसेक्स में जितनी तेजी आई थी, वह खत्म हो गई है। जानकारों का मानना है कि दलाल स्ट्रीट पर मोदी का जादू खत्म हो रहा है। उसकी बड़ी वजह यह है कि राज्यसभा से सरकार बड़े बिल पास नहीं करवा पा रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 28 महीने के निचले लेवल पर पहुंच गया है और शेयर बाजार में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी मार्च 2015 के ऑल टाइम लेवल से 17.5% नीचे आ चुके हैं।
((भारतीय शेयर बाजार मोदी-पूर्व युग के स्तर पर, ये रहे कारण
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((मोदी राज, मार्केट और मुनाफा !
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भारतीय निर्यात लगातार गिर रहा है। नवंबर में सालाना आधार पर इसमें करीब 25% की गिरावट आई है। देश की ग्रोथ निर्यात की ग्रोथ से भी जुड़ा हुआ है। मसलन, जब भारत की आर्थिक विकास दर 8 फ़ीसदी की रफ़्तार से बढ़ रही थी, तब निर्यात भी सालाना 20 % से ज्यादा की दर से बढ़ रहा था।
((नवंबर में लगातार 12वें महीने गिरा एक्सपोर्ट, व्यापार घाटे में कमी
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मोदी सरकार से जिन दो अहम सुधारों को तेजी से लागू करने की उम्मीद थी उनमें भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार और GST को लागू करना था। लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव लाने में तो सरकार पूरी तरह से नाकाम रही और अब जबकि सरकार अगले कुछ महीनों में अपना दो साल का कार्यकाल पूरे करने जा रही है, तो भी GST को लागू करना फिलहाल दूर की कौड़ी लग रहा है।
आपकी पूर्ण बहुमत वाली सरकार के सत्तासीन होने के पहले 30 सालों में अल्पमत सरकारें रहीं, लेकिन ऐसा नहीं हैं कि उन सरकारों ने कोई बड़े सुधार नहीं किए और पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हैं। देश ने बहुत उम्मीद के साथ आपको देश की बागडोर सौंपी थी, लेकिन अब तक आपकी तरफ से बड़े सुधार का इंतजार है। राज्यसभा में बहुमत नहीं होना और विपक्ष पर रोड़े अटकाने का आरोप लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेने से काम नहीं चलने वाला है, मोदी जी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 500 शीर्ष कंपनियों की बिक्री में 2015 में 0% की वृद्धि हुई है। इस साल मार्च, 2016 में खत्म हो रहे वित्तीय साल के दौरान उन्हें हानि उठानी पड़ सकती है। यह निर्यात में नकारात्मक वृद्धि दर के बाद दूसरा संकेत है जो बताता है कि भारत की विकास दर भी संकट में है। इसलिए, जागिए मोदी जी। इसके अलावा मुश्किलों को बढ़ाने वाले दूसरे संकेत भी मिल रहे हैं। साख में वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ-नई आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए क़र्ज़ लेने की स्थिति) में भी गिरावट है। भारतीय कॉरपोरेट घरानों पर भारी भरकम क़र्ज़ है और भारत के सार्वजनिक बैंकों के क़र्ज़ में बहुत बड़ी मात्रा गैर निष्पादित क़र्ज़ (नॉन पॉरफॉर्मिंग लोन्स) की है।
इसके अलावा, नवंबर IIP 4 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, नवंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में
4.4% की निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई, इस साल की दिसंबर तिमाही में निराशाजनक नतीजे के संकेत
दिख रहे हैं, साथ ही महंगाई दर में भी बढ़ोतरी होने लगी है।
((नवंबर में IIP 3.2% गिरा, 4 साल की बड़ी गिरावट
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((दिसंबर में WPI महंगाई 0.73% घटी
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((दिसंबर में CPI महंगाई 5.61% बढ़ी, आगे और बढ़ने की आशंका
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वित्त मंत्री अरुण जेटली जी, हमेशा 9% विकास दर हासिल करने का दावा करते रहते हैं, लेकिन क्या हम इन कमजोर आंकड़ों के दम पर ऐसा कर पाएंगे, ये बड़ा सवाल है।
अब 'मजबूर और कमजोर मनमोहन सिंह सरकार' का समय बीत चुका है, 30 साल बाद देश में पूर्ण बहुमत वाली मजबूत और स्थिर सरकार है, देश के लिए सबसे बड़ी टेंशन कच्चा तेल 12 साल के निचले स्तर पर 30 डॉलर प्रति बैरल के नीचे, सख्त-विज़नरी-निर्णायक-स्पष्ट सोच वाले शख्स के हाथ में कमान है, मोदी जी, क्या उम्मीद करें कि सारे आंकड़े जल्द ही पटरी पर आते दिखेंगे।

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