शुक्रवार (15 जनवरी) को ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल के साथ-साथ अमेरिकी क्रूड ऑयल 30 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बंद हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में केवल कच्चे तेल में ही फिसलन नहीं जारी है, बल्कि सोना, चांदी, तांबा, जिंक, एल्युमीनियम जैसे मेटल भी पिघल रहे हैं। जानकार आने वाले दिनों में भी इसमें कोई खास तेजी की वजह नहीं देख रहे हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि कच्चे तेल में या उससे जुड़े कामों में कारोबार करने वाली कंपनियों में जिन्होंने निवेश कर रखा है, या फिर जिनका कमोडिटीज म्युचुअल फंड स्कीम में पैसा लगा है, उनके लिए इस गिरावट के क्या संकेत हैं। (लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, इसे सलाह ना मानें)
शेयर बाजार निवेशक: भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़े इंपोर्टर होने की वजह से इसकी कीमतों में कमी की वजह से फायदा पहुंच रहा है, लेकिन अगर आपने कच्चे तेल से जुड़े कारोबार करने वाली कंपनियों के शेयर में पैसा लगा रखा है, तो क्या पिछले एक साल में उसका प्रदर्शन देखा है? अगर नहीं तो, एक बार जरूर चेक कर लीजिएगा। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से कुछ शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहा होगा, जबकि कुछ का काफी खराब। मेरे पास ONGC के शेयर हैं, जिसमें मुझे करीब 40% का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हो सकता है, आपको आपके शेयर अच्छे रिटर्न दे रहे हों। कच्चे तेल में गिरावट से अमेरिकी, यूरोपीय शेयर बाजार समेत ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी हो रहा है।
((सस्ता होता कच्चा तेल; फाइनेंशियल मार्केट का बिगाड़ेगा खेल !
कच्चा तेल $20/बैरल तक जाएगा: गोल्डमैन सैक्स
http://beyourmoneymanager.blogspot.com/2015/12/blog-post_12.html
ऑयल-गैस सेक्टर पर कीमत में गिरावट का मिला-जुला असर देखा जा रहा है। कैर्न इंडिया जैसी अपस्ट्रीम ऑयल प्राइवेट कंपनी के नेट मुनाफे में गिरावट देखी गई है। हालांकि, ONGC जैसी सरकारी कंपनी के प्रदर्शन पर तेल कीमत में गिरावट की वजह से उसके सब्सिडी बोझ में कमी से सीमित असर पड़ा है। लेकिन, तेल मार्केटिंग कंपनियों (IOC को उसकी महंगी इन्वेंटरी के कारण घाटा उठाना पड़ा) को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से फायदा हो रहा है।
पिछले कुछ सालों से ऑटो ईंधन में इथेनॉल के बढ़े इस्तेमाल से चीनी और कच्चे तेल के दाम जुड़ गए थे। मतलब, अगर ईंधन महंगा होता था तो इथेनॉल की मांग बढ़ जाती थी और इस प्रकार चीनी के दाम में भी तेजी आती थी। लेकिन, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने इस कहानी को बदल दिया है। चीनी की लागत कीमत से भी कम हो गई है, क्यों कि गन्ना किसानों को खुश करने के चक्कर के में सरकार गन्ने की कीमत, जिससे चीनी बनती है, को कम नहीं कर पा रही है। इससे शुगर मिलों को खुदको बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा उठा रहा है। उनके कुल ऑपरेशनल लागत में ATF की हिस्सेदारी करीब आधा परसेंट होती है। कच्चा तेल सस्ता होने से ATF के दाम भी कम हो रहे हैं। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर बढ़ा है।
पेंट और FMCG कंपनियों को मांग में कमी के बावजूद कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट का फायदा मिल रहा है। सिंथेटिक रबर निर्माताओं को इन दिनों दोहरा फायदा मिल रहा है। एक तरफ सिंथेटिक रबर में पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल होने से उनकी लागत घट गई है, वहीं दूसरी तरफ नैचुरल रबर की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। इससे टायर कंपनियों को बंपर मुनाफा हो रहा है। जानकार, ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों के लिए सस्ता ईंधन सकारात्मक बता रहे हैं।
म्युचुअल फंड निवेशक: जिन निवेशकों ने उन म्युचुअल फंड स्कीम में पैसा लगा रखा है, जिनका अधिक एक्सपोजर कमोडिटी सेक्टर में है, उनको अधिक सचेत रहने की जरूरत है।
कच्चे तेल में सीधे निवेश करने वाले: जानकार आने वाले दिनों में कच्चे तेल, या फिर दूसरी कमोडिटी में भी और गिरावट की संभावना जता रहे हैं। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद मजबूत डॉलर से इन कमोडिटीज पर दबाव पड़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स तो कच्चे तेल में 20 डॉलर प्रति बैरल का स्तर देख रहा है। इसलिए, कमोडिटीज में कोई भी निवेश के दौरान किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के बजाय सोच-समझकर पैसे लगाने की जरूरत है।
ऐसे में सवाल उठता है कि कच्चे तेल में या उससे जुड़े कामों में कारोबार करने वाली कंपनियों में जिन्होंने निवेश कर रखा है, या फिर जिनका कमोडिटीज म्युचुअल फंड स्कीम में पैसा लगा है, उनके लिए इस गिरावट के क्या संकेत हैं। (लेख सिर्फ जानकारी के लिए है, इसे सलाह ना मानें)
शेयर बाजार निवेशक: भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़े इंपोर्टर होने की वजह से इसकी कीमतों में कमी की वजह से फायदा पहुंच रहा है, लेकिन अगर आपने कच्चे तेल से जुड़े कारोबार करने वाली कंपनियों के शेयर में पैसा लगा रखा है, तो क्या पिछले एक साल में उसका प्रदर्शन देखा है? अगर नहीं तो, एक बार जरूर चेक कर लीजिएगा। कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से कुछ शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रहा होगा, जबकि कुछ का काफी खराब। मेरे पास ONGC के शेयर हैं, जिसमें मुझे करीब 40% का नुकसान उठाना पड़ रहा है। हो सकता है, आपको आपके शेयर अच्छे रिटर्न दे रहे हों। कच्चे तेल में गिरावट से अमेरिकी, यूरोपीय शेयर बाजार समेत ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी हो रहा है।
((सस्ता होता कच्चा तेल; फाइनेंशियल मार्केट का बिगाड़ेगा खेल !
कच्चा तेल $20/बैरल तक जाएगा: गोल्डमैन सैक्स
http://beyourmoneymanager.blogspot.com/2015/12/blog-post_12.html
ऑयल-गैस सेक्टर पर कीमत में गिरावट का मिला-जुला असर देखा जा रहा है। कैर्न इंडिया जैसी अपस्ट्रीम ऑयल प्राइवेट कंपनी के नेट मुनाफे में गिरावट देखी गई है। हालांकि, ONGC जैसी सरकारी कंपनी के प्रदर्शन पर तेल कीमत में गिरावट की वजह से उसके सब्सिडी बोझ में कमी से सीमित असर पड़ा है। लेकिन, तेल मार्केटिंग कंपनियों (IOC को उसकी महंगी इन्वेंटरी के कारण घाटा उठाना पड़ा) को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से फायदा हो रहा है।
पिछले कुछ सालों से ऑटो ईंधन में इथेनॉल के बढ़े इस्तेमाल से चीनी और कच्चे तेल के दाम जुड़ गए थे। मतलब, अगर ईंधन महंगा होता था तो इथेनॉल की मांग बढ़ जाती थी और इस प्रकार चीनी के दाम में भी तेजी आती थी। लेकिन, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने इस कहानी को बदल दिया है। चीनी की लागत कीमत से भी कम हो गई है, क्यों कि गन्ना किसानों को खुश करने के चक्कर के में सरकार गन्ने की कीमत, जिससे चीनी बनती है, को कम नहीं कर पा रही है। इससे शुगर मिलों को खुदको बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा फायदा उठा रहा है। उनके कुल ऑपरेशनल लागत में ATF की हिस्सेदारी करीब आधा परसेंट होती है। कच्चा तेल सस्ता होने से ATF के दाम भी कम हो रहे हैं। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर बढ़ा है।
पेंट और FMCG कंपनियों को मांग में कमी के बावजूद कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट का फायदा मिल रहा है। सिंथेटिक रबर निर्माताओं को इन दिनों दोहरा फायदा मिल रहा है। एक तरफ सिंथेटिक रबर में पेट्रोलियम पदार्थों का इस्तेमाल होने से उनकी लागत घट गई है, वहीं दूसरी तरफ नैचुरल रबर की कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। इससे टायर कंपनियों को बंपर मुनाफा हो रहा है। जानकार, ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों के लिए सस्ता ईंधन सकारात्मक बता रहे हैं।
म्युचुअल फंड निवेशक: जिन निवेशकों ने उन म्युचुअल फंड स्कीम में पैसा लगा रखा है, जिनका अधिक एक्सपोजर कमोडिटी सेक्टर में है, उनको अधिक सचेत रहने की जरूरत है।
कच्चे तेल में सीधे निवेश करने वाले: जानकार आने वाले दिनों में कच्चे तेल, या फिर दूसरी कमोडिटी में भी और गिरावट की संभावना जता रहे हैं। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने के बाद मजबूत डॉलर से इन कमोडिटीज पर दबाव पड़ सकता है। गोल्डमैन सैक्स तो कच्चे तेल में 20 डॉलर प्रति बैरल का स्तर देख रहा है। इसलिए, कमोडिटीज में कोई भी निवेश के दौरान किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के बजाय सोच-समझकर पैसे लगाने की जरूरत है।

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