जुलाई-सितम्बर 2015 (वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही) के लिए ऋण प्रबंधन पर तिमाही रिपोर्ट जारी
वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान 1,71,000 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियां जारी की गईं
वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान सकल उधारियां बढ़कर 3,51,000 करोड़ रुपये (बजट अनुमान का 58.5 फीसदी) के स्तर पर पहुंच गईं
वित्त वर्ष 2010-11 की अप्रैल-जून अवधि (प्रथम तिमाही) से ही वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग का बजट डिवीजन नियमित रूप से ऋण प्रबंधन पर तिमाही रिपोर्ट जारी करता रहा है। वर्तमान रिपोर्ट का वास्ता जुलाई-सितम्बर तिमाही, 2015 (वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही) से है।
वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान सरकार ने 1,71,000 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियां जारी कीं और इसके साथ ही वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान सकल उधारियां बढ़कर 3,51,000 करोड़ रुपये अथवा बजट अनुमान (बीई) के 58.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच गईं, जबकि वित्त वर्ष 2015 की प्रथम छमाही में सकल उधारियां बजट अनुमान का 58.7 फीसदी थीं। वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही में 136,928 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान के बाद शुद्ध बाजार उधारियां वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान 214071 करोड़ रुपये (बजट अनुमान का 46.9 फीसदी) आंकी गईं, जो पिछले वित्त वर्ष के बजट अनुमान के 56.0 फीसदी के स्तर से कम है।
सार्वभौमिक स्वर्ण बांड और स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के जरिये अनुमानित सरकारी उधारी को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2016 की दूसरी छमाही के लिए बाजार उधारी से जुड़े कैलेंडर को 15,000 करोड़ रुपये की कमी के साथ समायोजित किया गया है। पूर्व घोषित कैलेंडर के अनुरूप वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान नीलामियां 12 चरणों में की गईं।
परिपक्वता अवधि बढ़ाने के प्रयास तिमाही के दौरान लगातार जारी रहे। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान जारी की गई दिनांकित प्रतिभूतियों की भारित औसत परिपक्वता (डब्ल्यूएएम) अवधि 16.46 साल रही। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान जारी की गई इनकी भारित औसत प्राप्ति (कट-ऑफ या सीमा) 7.96 फीसदी आंकी गई, जबकि वित्त वर्ष 2016 की प्रथम तिमाही के दौरान यह 7.92 फीसदी दर्ज की गई थी। तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में तरलता (लिक्विडिटी) की स्थिति संतोषजनक बनी रही और यह ज्यादातर समय अधिशेष के रूप में रही। वित्त वर्ष 2015 की दूसरी तिमाही के दौरान सरकार की नकदी की स्थिति संतोषजनक थी और कुछ अवसरों को छोड़कर ज्यादातर समय यह अधिशेष के रूप में ही रही। ट्रेजरी बिलों के अंतर्गत जारी की गई राशि भी मोटे तौर पर कैलेंडर के अनुरूप ही रही।
केन्द्र सरकार का सार्वजनिक ऋण (‘सार्वजनिक खाते’ के तहत देनदारियों को छोड़कर) वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान तिमाही आधार पर अंतरिम रूप से 2.1 फीसदी ज्यादा रहा। आंतरिक ऋण सितम्बर 2015 की समाप्ति पर सार्वजनिक ऋण का 92.1 फीसदी रहा, जबकि बिक्री योग्य प्रतिभूतियां कुल सार्वजनिक ऋण का 84.5 फीसदी रहीं। बकाया स्टॉक के तकरीबन 27.2 फीसदी की शेष परिपक्वता अवधि पांच साल तक है, जिसका मतलब यही है कि अगले पांच वर्षों के दौरान, औसतन, बकाया स्टॉक के लगभग 5.4 फीसदी को हर साल आगे ले जाने (रोल ओवर) करने की जरूरत पड़ेगी। अत: कर्ज पोर्टफोलियो में रोल ओवर जोखिम लगातार निम्न स्तर पर ही बना हुआ है।
जुलाई-सितम्बर तिमाही, 2015 (वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही) के लिए सार्वजनिक ऋण प्रबंधन (पीडीएम) पर तिमाही रिपोर्ट यहां संलग्न की गई है और यह वित्त मंत्रालय की वेबसाइट finmin.nic.in पर भी उपलब्ध है।
वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान 1,71,000 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियां जारी की गईं
वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान सकल उधारियां बढ़कर 3,51,000 करोड़ रुपये (बजट अनुमान का 58.5 फीसदी) के स्तर पर पहुंच गईं
वित्त वर्ष 2010-11 की अप्रैल-जून अवधि (प्रथम तिमाही) से ही वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग का बजट डिवीजन नियमित रूप से ऋण प्रबंधन पर तिमाही रिपोर्ट जारी करता रहा है। वर्तमान रिपोर्ट का वास्ता जुलाई-सितम्बर तिमाही, 2015 (वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही) से है।
वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान सरकार ने 1,71,000 करोड़ रुपये की दिनांकित प्रतिभूतियां जारी कीं और इसके साथ ही वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान सकल उधारियां बढ़कर 3,51,000 करोड़ रुपये अथवा बजट अनुमान (बीई) के 58.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच गईं, जबकि वित्त वर्ष 2015 की प्रथम छमाही में सकल उधारियां बजट अनुमान का 58.7 फीसदी थीं। वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही में 136,928 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान के बाद शुद्ध बाजार उधारियां वित्त वर्ष 2016 की प्रथम छमाही के दौरान 214071 करोड़ रुपये (बजट अनुमान का 46.9 फीसदी) आंकी गईं, जो पिछले वित्त वर्ष के बजट अनुमान के 56.0 फीसदी के स्तर से कम है।
सार्वभौमिक स्वर्ण बांड और स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के जरिये अनुमानित सरकारी उधारी को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2016 की दूसरी छमाही के लिए बाजार उधारी से जुड़े कैलेंडर को 15,000 करोड़ रुपये की कमी के साथ समायोजित किया गया है। पूर्व घोषित कैलेंडर के अनुरूप वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान नीलामियां 12 चरणों में की गईं।
परिपक्वता अवधि बढ़ाने के प्रयास तिमाही के दौरान लगातार जारी रहे। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान जारी की गई दिनांकित प्रतिभूतियों की भारित औसत परिपक्वता (डब्ल्यूएएम) अवधि 16.46 साल रही। वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान जारी की गई इनकी भारित औसत प्राप्ति (कट-ऑफ या सीमा) 7.96 फीसदी आंकी गई, जबकि वित्त वर्ष 2016 की प्रथम तिमाही के दौरान यह 7.92 फीसदी दर्ज की गई थी। तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में तरलता (लिक्विडिटी) की स्थिति संतोषजनक बनी रही और यह ज्यादातर समय अधिशेष के रूप में रही। वित्त वर्ष 2015 की दूसरी तिमाही के दौरान सरकार की नकदी की स्थिति संतोषजनक थी और कुछ अवसरों को छोड़कर ज्यादातर समय यह अधिशेष के रूप में ही रही। ट्रेजरी बिलों के अंतर्गत जारी की गई राशि भी मोटे तौर पर कैलेंडर के अनुरूप ही रही।
केन्द्र सरकार का सार्वजनिक ऋण (‘सार्वजनिक खाते’ के तहत देनदारियों को छोड़कर) वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान तिमाही आधार पर अंतरिम रूप से 2.1 फीसदी ज्यादा रहा। आंतरिक ऋण सितम्बर 2015 की समाप्ति पर सार्वजनिक ऋण का 92.1 फीसदी रहा, जबकि बिक्री योग्य प्रतिभूतियां कुल सार्वजनिक ऋण का 84.5 फीसदी रहीं। बकाया स्टॉक के तकरीबन 27.2 फीसदी की शेष परिपक्वता अवधि पांच साल तक है, जिसका मतलब यही है कि अगले पांच वर्षों के दौरान, औसतन, बकाया स्टॉक के लगभग 5.4 फीसदी को हर साल आगे ले जाने (रोल ओवर) करने की जरूरत पड़ेगी। अत: कर्ज पोर्टफोलियो में रोल ओवर जोखिम लगातार निम्न स्तर पर ही बना हुआ है।
जुलाई-सितम्बर तिमाही, 2015 (वित्त वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही) के लिए सार्वजनिक ऋण प्रबंधन (पीडीएम) पर तिमाही रिपोर्ट यहां संलग्न की गई है और यह वित्त मंत्रालय की वेबसाइट finmin.nic.in पर भी उपलब्ध है।

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