फाइनेंशियल इनक्लूजन पर गंभीर रिजर्व बैंक

फाइनेंशियल इनक्लूजन (वित्तीय समावेशन) यानी देश के हर शख्स को फाइनेंशियल सर्विसेस से जोड़ने को लेकर रिजर्व बैंक काफी गंभीर है।

बैंकिंग, इंश्योरेंस, पेंशन जैसी फाइनेंशियल सर्विसेस को अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए, इस पर राय देने के लिए रिजर्व बैंक के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर दीपक मोहंती की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है।

कमेटी का काम:
-फाइनेंशियल इनक्लूजन की मौजूदा नीति की समीक्षा करना
-पांच साल में फाइनेंशियल इनक्लूजन के लिए एक्शन प्लान
तैयार करना
-अलग-अलग कमेटियों की सिफारिशों को ध्यान में रखते
हुए सपोर्टिव पेमेंट सिस्टम और कस्टमर प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क
तैयार करना
-पेमेंट, डिपॉजिट, क्रेडिट, सोशल सिक्योरिटी ट्रांसफर, पेंशन और इंश्योरेंस के लिए मध्यम अवधि की योजना का खाका पेश करना
-डिलीवरी मैकेनिज्म, फाइनेंशियल लिट्रेसी (वित्तीय साक्षरता) के बारे में प्लान तैयार करना

देश में फाइनेंशियल इनक्लूजन के लिए पिछले साल अगस्त में मोदी सरकार ने बैंकों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत बैंकों ने 8 जुलाई तक करीब 16 करोड़ 73 लाख अकाउंट खोले हैं। इन खातों में करीब 20 हजार करोड़ रुपए की रकम है। 

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