31 जुलाई 2026 को सैलरीड कर्मचारियों, पेंशनर्स और बिना बिजनेस इनकम वाले लोगों के लिए आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तारीख खत्म हो चुकी है। अब समय है अपना ईमेल, इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल और कंप्लायंस पोर्टल चेक करने का। क्योंकि अगर आपके ITR में कोई गलती या मिसमैच है, तो इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है।
हर नोटिस को देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। कई नोटिस सिर्फ प्रोसेसिंग कन्फर्मेशन या छोटी गलतियों को सुधारने के लिए भेजे जाते हैं। कुछ सिस्टम जनरेटेड होते हैं और विभाग सिर्फ स्पष्टीकरण या सुधार चाहता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि नोटिस मिलने पर सबसे पहले उसकी प्रामाणिकता चेक करें, मुद्दे को समझें और तय समय सीमा के अंदर जवाब दें। अगर मामला जटिल है (जैसे स्क्रूटनी या रिएसेसमेंट), तो क्वालिफाइड टैक्स प्रोफेशनल की मदद लें। समय पर सही जवाब देने से छोटी समस्या बड़ी विवाद में नहीं बदलती।
यहाँ सैलरीड कर्मचारियों को ITR फाइल करने के बाद मिलने वाले 8 आम इनकम टैक्स नोटिस और उनके जवाब देने का तरीका बताया गया है:
1. सेक्शन 143(1)(a) नोटिस
क्यों आता है?
ITR प्रोसेसिंग के दौरान कटौती, टैक्स क्रेडिट या नियोक्ता/बैंक की रिपोर्टेड जानकारी में मिसमैच या स्पष्ट गलती पाई गई हो।
क्या करें?
प्रस्तावित एडजस्टमेंट को ध्यान से पढ़ें और अपने रिकॉर्ड से मिलाएँ। सही हो तो स्वीकार करें। गलत हो तो डेडलाइन से पहले सबूतों के साथ ऑनलाइन जवाब जमा करें।
2. सेक्शन 139(9) नोटिस (डिफेक्टिव रिटर्न)
क्यों आता है?
ITR में जरूरी जानकारी गायब हो, अधूरी डिक्लोजर हो या कोई निर्धारित दोष हो।
क्या करें?
दोष सुधारकर निर्धारित समय में सही रिटर्न फाइल करें। नहीं करने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।
3. सेक्शन 142(1) नोटिस
क्यों आता है?
असेसमेंट के लिए अतिरिक्त जानकारी, दस्तावेज या स्पष्टीकरण माँगा गया हो, या रिटर्न न फाइल किया गया हो।
क्या करें?
ई-प्रोसीडिंग्स पोर्टल के जरिए निर्धारित समय में पूरी जानकारी और दस्तावेज जमा करें। जवाब पूरा और सबूतों वाला होना चाहिए।
4. सेक्शन 143(2) नोटिस (स्क्रूटनी)
क्यों आता है?
ITR को स्क्रूटनी के लिए चुना गया हो ताकि रिपोर्टेड इनकम, कटौती, छूट आदि की जाँच की जा सके।
क्या करें?
सभी प्रश्नों का सबूतों के साथ जवाब दें और असेसमेंट प्रोसीडिंग्स में सहयोग करें। समय पर जवाब देना जरूरी है।
5. सेक्शन 148 नोटिस
क्यों आता है?
असेसिंग ऑफिसर को लगता है कि कुछ आय असेसमेंट से बच गई है और रिएसेसमेंट प्रस्तावित है।
क्या करें?
नोटिस के आधार को ध्यान से जाँचें, जरूरी रिटर्न फाइल करें और विस्तृत जवाब दें। ऐसे मामलों में प्रोफेशनल सलाह लेना बेहतर है।
6. सेक्शन 245 नोटिस
क्यों आता है?
टैक्स विभाग किसी दूसरे असेसमेंट ईयर की बकाया डिमांड के खिलाफ आपके रिफंड को एडजस्ट करना चाहता है।
क्या करें?
बकाया डिमांड सही है या नहीं, जाँचें। सही हो तो स्वीकार करें। गलत या पहले से चुकाई गई हो तो सबूतों के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करें।
7. सेक्शन 154 नोटिस
क्यों आता है?
किसी ऑर्डर में क्लरिकल, अंकगणितीय या स्पष्ट गलती सुधारने के लिए।
क्या करें?
प्रस्तावित सुधार को देखें। गलती सही हो तो स्वीकार करें, नहीं तो कारणों और सबूतों के साथ आपत्ति जमा करें।
8. सेक्शन 263 नोटिस
क्यों आता है?
कमीशनर को लगता है कि असेसिंग ऑफिसर का असेसमेंट ऑर्डर गलत और राजस्व के हित के खिलाफ है, इसलिए रिवीजन प्रस्तावित है।
क्या करें?
विस्तृत लिखित जवाब दें कि ऑर्डर गलत या राजस्व के खिलाफ नहीं है। कानूनी और तथ्यात्मक सबूत लगाएँ। प्रोफेशनल प्रतिनिधित्व की सलाह दी जाती है।
महत्वपूर्ण सुझाव
हमेशा इनकम टैक्स पोर्टल (incometax.gov.in) पर नोटिस की प्रामाणिकता चेक करें।
समय सीमा का सख्ती से पालन करें।
AIS, Form 26AS और Form 16 से अपना ITR हमेशा मिलाकर फाइल करें ताकि नोटिस की संभावना कम हो।
जटिल मामलों में टैक्स एक्सपर्ट या CA की मदद लें।
ITR फाइल करने के बाद नोटिस आना आम बात हो गई है, लेकिन सही समझ और समय पर जवाब से ज्यादातर मामले आसानी से निपट जाते हैं। नियमित रूप से अपना पोर्टल चेक करते रहें और दस्तावेज व्यवस्थित रखें।
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