Punjab National Bank में पैसा रखकर या खाता खुलवाकर भूल गये हैं तो ऐसे आसानी से चेक करें और अपना पैसा वापस पाएं.. Navchetna Campaign 2026 का फायदा उठाएं

 

आपके बैंक में unclaimed deposit पड़ा है? Navchetna Campaign 2026 के तहत PNB और RBI UDGAM Portal से आसानी से चेक करें और अपना पैसा वापस पाएँ।

💰 Unclaimed Deposit कैसे चेक करें? Navchetna Campaign 2026 में अपना पैसा वापस पाएँ

क्या आपको पता है कि आपके नाम से बैंक में कोई unclaimed deposit (अदावा जमा राशि) अभी भी पड़ा हो सकता है?

कई बार लोग पुराने बैंक अकाउंट भूल जाते हैं या लंबे समय तक इस्तेमाल न करने की वजह से वह inoperative account बन जाता है। ऐसे में उसमें जमा पैसा बैंक में ही रह जाता है।

इसी समस्या को हल करने के लिए Punjab National Bank ने Navchetna Campaign 2026 शुरू किया है।

Navchetna Campaign 2026 क्या है?

यह एक विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके भूले हुए या निष्क्रिय बैंक खातों और जमा राशि के बारे में जागरूक करना है।

Campaign Period: 27 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक

इस दौरान आप आसानी से अपने पुराने खातों और जमा राशि को खोज सकते हैं।

PNB में Inoperative Account कैसे चेक करें?

अगर आपका खाता Punjab National Bank में है, तो आप इन स्टेप्स को फॉलो करें:

PNB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
"Inoperative Accounts" सेक्शन खोलें
अपनी जानकारी (नाम, जन्म तिथि आदि) दर्ज करें
अपना निष्क्रिय खाता खोजें

👉 इससे आपको पता चल जाएगा कि आपका कोई पैसा बैंक में पड़ा है या नहीं।

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Your unclaimed deposit may still be waiting.

Under "Navchetna" campaign, you can check inoperative accounts on the PNB website
pnb.bank.in/inoperactive-a…

and search unclaimed deposits across banks on RBI’s UDGAM portal
udgam.rbi.org.in

Campaign period 27 April 2026 to 30 June 2026.

Check and claim. What is yours should stay yours.

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💰 Unclaimed Deposit कैसे चेक करें? Navchetna Campaign 2026 में अपना पैसा वापस पाएँ
क्या आपको पता है कि आपके नाम से बैंक में कोई unclaimed deposit (अदावा जमा राशि) अभी भी पड़ा हो सकता है?

कई बार लोग पुराने बैंक अकाउंट भूल जाते हैं या लंबे समय तक इस्तेमाल न करने की वजह से वह inoperative account बन जाता है। ऐसे में उसमें जमा पैसा बैंक में ही रह जाता है।

इसी समस्या को हल करने के लिए Punjab National Bank ने Navchetna Campaign 2026 शुरू किया है।

📢 Navchetna Campaign 2026 क्या है?
यह एक विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य लोगों को उनके भूले हुए या निष्क्रिय बैंक खातों और जमा राशि के बारे में जागरूक करना है।

📅 Campaign Period:
27 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक

इस दौरान आप आसानी से अपने पुराने खातों और जमा राशि को खोज सकते हैं।

🏦 PNB में Inoperative Account कैसे चेक करें?
अगर आपका खाता Punjab National Bank में है, तो आप इन स्टेप्स को फॉलो करें:

PNB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ

"Inoperative Accounts" सेक्शन खोलें

अपनी जानकारी (नाम, जन्म तिथि आदि) दर्ज करें

अपना निष्क्रिय खाता खोजें

👉 इससे आपको पता चल जाएगा कि आपका कोई पैसा बैंक में पड़ा है या नहीं।

🌐 सभी बैंकों में Unclaimed Deposit कैसे खोजें?
Reserve Bank of India ने इसके लिए एक खास पोर्टल बनाया है:

🔎 UDGAM Portal क्या है?
UDGAM Portal एक centralized प्लेटफॉर्म है जहां आप सभी बैंकों में अपने unclaimed deposits खोज सकते हैं।

👉 यहाँ आप:
अलग-अलग बैंकों में जमा पैसा खोज सकते हैं
पुराने अकाउंट्स की जानकारी पा सकते हैं
अपनी पहचान के आधार पर सर्च कर सकते हैं

Inoperative Account क्या होता है?

जब कोई बैंक खाता लंबे समय (आमतौर पर 2 साल) तक इस्तेमाल नहीं किया जाता, तो वह inoperative बन जाता है।

इस स्थिति में:

अकाउंट active नहीं रहता
पैसा वहीं जमा रहता है
आप उसे भूल सकते हैं

क्यों जरूरी है अभी चेक करना?
आपका पैसा सुरक्षित है, लेकिन inactive पड़ा हुआ है
समय पर क्लेम न करने पर प्रक्रिया लंबी हो सकती है
यह अभियान सीमित समय के लिए है

👉 याद रखें:
"जो आपका है, वह आपका ही रहना चाहिए"

Pro Tip (Money Management Insight)

हमेशा:

अपने सभी बैंक अकाउंट्स का रिकॉर्ड रखें
unused accounts को बंद करें
nominee जरूर जोड़ें

निष्कर्ष

Navchetna Campaign 2026 एक बेहतरीन मौका है यह जानने का कि कहीं आपका पैसा बैंक में पड़ा तो नहीं है।

👉 आज ही चेक करें और अपना पैसा वापस पाएं — क्योंकि "What is yours should stay yours."


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1-कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले हर लोगों के लिए जरूरी किताब।
2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
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Rajanish Kant मंगलवार, 5 मई 2026
Post Office में पैसा रखने वालों के लिए जरूरी खबर: Income Tax Rules 2026 के तहत PAN अब जरूरी, जानें कौन से Transactions में जरूरी है और नए फॉर्म्स

 

पोस्ट ऑफिस में PAN अब कई महत्वपूर्ण ट्रांजेक्शन के लिए अनिवार्य हो गया है। इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत Form 97, Form 121 की जानकारी, TDS छूट और नियमों का पूरा अपडेट।

पोस्ट ऑफिस नियमों में बड़ा बदलाव: 

PAN अब कई ट्रांजेक्शन के लिए अनिवार्य, इनकम टैक्स रूल्स 2026 लागूनई दिल्ली। डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स ने पोस्ट ऑफिस के ग्राहकों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत अब पोस्ट ऑफिस की कई प्रमुख सेवाओं और ट्रांजेक्शन में Permanent Account Number (PAN) देना अनिवार्य हो गया है। अगर PAN नहीं है तो Form No. 97 भरना होगा।यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जा रहा है और इसका मकसद फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की बेहतर ट्रैकिंग और टैक्स कंप्लायंस सुनिश्चित करना है।

PAN किन ट्रांजेक्शन में अनिवार्य है?इनकम टैक्स रूल्स 2026 (Rule 159, 160, 161, 211 और 237) के अनुसार पोस्ट ऑफिस में निम्नलिखित ट्रांजेक्शन में PAN देना जरूरी है: 

जमा (Deposits) और निकासी (Withdrawals)

अकाउंट खोलना (Account Opening)

टाइम डिपॉजिट (Time Deposits/FD जैसी स्कीम्स)

अन्य निर्दिष्ट हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन

अगर PAN नहीं है तो क्या करें?

ग्राहक को Form No. 97 भरना होगा। इसमें नाम, पता, ट्रांजेक्शन की प्रकृति, राशि और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स संलग्न करने होंगे। Post Office SB Order No. 02/2026 के अनुसार यह अनिवार्य है।

TDS छूट के लिए नया फॉर्म 121

पुराने Form 15G और 15H की जगह अब एक नया Form No. 121 आ गया है।  यह फॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए है जिनकी अनुमानित कुल आय पर टैक्स शून्य (NIL) होने की संभावना है।

हर वित्तीय वर्ष के लिए अलग-अलग फाइल करना होता है।

पोस्ट ऑफिस Part A की जांच करेगा, Part B पूरा करेगा और 7 साल तक रिकॉर्ड रखेगा।

नोट: सिस्टम अपडेट होने तक पुराने 15G/15H स्वीकार किए जा सकते हैं।

Form 60 की जगह Form 97 और 98पुराना Form 60 अब Form 97 और 98 से बदल गया है।

PAN न होने पर Form 97 का इस्तेमाल होगा।

पोस्ट ऑफिस अकाउंट होल्डर्स के लिए सलाहPAN कार्ड अपडेट और लिंक्ड रखें (आधार से लिंक जरूरी)।

बड़ी राशि की जमा-निकासी या नया अकाउंट खोलने से पहले PAN तैयार रखें।

TDS बचाने के लिए Form 121 सही जानकारी के साथ भरें।

जरूरी डॉक्यूमेंट्स (आधार, पासपोर्ट, आदि) साथ रखें।

क्यों किया गया यह बदलाव?

नए नियम इनकम टैक्स विभाग को Statement of Financial Transactions (SFT) के जरिए बेहतर रिपोर्टिंग करने में मदद करेंगे। इससे टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष:

पोस्ट ऑफिस की सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीयों को इन नए नियमों की जानकारी होनी चाहिए। PAN न होने पर Form 97 भरकर काम चल सकता है, लेकिन लंबे समय में PAN बनवाना फायदेमंद रहेगा।अपडेट: यह जानकारी मई 2026 के आधिकारिक आदेश पर आधारित है। नियमों में बदलाव के लिए आधिकारिक पोस्ट ऑफिस वेबसाइट या इनकम टैक्स पोर्टल चेक करें।


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7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Rajanish Kant सोमवार, 4 मई 2026
NSE ने लॉन्च किए Electronic Gold Receipts (EGR) - भारत के गोल्ड इकोसिस्टम को मिलेगा नया आयाम | 4 मई 2026

मुंबई, 4 मई 2026 — नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) ने Electronic Gold Receipts (EGR) को नये सेगमेंट के रूप में लॉन्च कर दिया है। यह एक क्रांतिकारी कदम है, जो भारत के विशाल और परंपरागत सोने के बाजार में पारदर्शिता, दक्षता और औपचारिकता लाने के लिए तैयार किया गया है।

4 मई 2026 को हुई इस लॉन्चिंग से भौतिक सोने और वित्तीय बाजारों के बीच लंबे समय से चली आ रही खाई को पाटने की उम्मीद है। NSE अब एक नियंत्रित, सुरक्षित और अत्याधुनिक तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए सोने में ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है।


EGR क्या हैं?

Electronic Gold Receipts (EGR) डीमैटेरियलाइज्ड सिक्योरिटीज हैं, जो भौतिक सोने की मालिकाना हक का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह सोना SEBI मान्यता प्राप्त वॉल्ट्स में सुरक्षित रूप से रखा जाता है और डिपॉजिटरीज के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में होल्ड किया जाता है। प्रत्येक EGR पूरी तरह से भौतिक सोने द्वारा समर्थित होता है और एक्सचेंज पर ट्रेडेबल है। इससे सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में आसानी से शामिल किया जा सकेगा।


NSE का लक्ष्य है कि इस लॉन्च के जरिए गोल्ड ट्रेडिंग के लिए एक मजबूत और पारदर्शी इकोसिस्टम तैयार किया जाए। इससे कुशल मूल्य निर्धारण (price discovery), बाजार में ज्यादा भागीदारी और ज्वेलर्स, रिफाइनर्स, ट्रेडर्स तथा संस्थागत निवेशकों सहित सभी हितधारकों के बीच विश्वास में वृद्धि होगी।


माइलस्टोन उपलब्धि

NSE ने 1000 ग्राम के एक गोल्ड बार को सफलतापूर्वक Electronic Gold Receipt में डीमैटेरियलाइज किया। यह घटना NSE के EGR फ्रेमवर्क की परिचालन तैयारियों को दर्शाती है और भौतिक सोने को सुरक्षित, ट्रेडेबल इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट में बदलने की क्षमता को साबित करती है।


NSE के Chief Business Development Officer श्री Sriram Krishnan का बयान

“Electronic Gold Receipts की शुरुआत भारत के सबसे प्रिय संपत्ति के साथ उसके व्यवहार में एक महत्वपूर्ण विकास है। NSE की मजबूत तकनीक और लिक्विडिटी फ्रेमवर्क का लाभ उठाते हुए हम पूरे देश के निवेशकों को अभूतपूर्व पारदर्शिता और आत्मविश्वास के साथ सोने में ट्रेड करने का अवसर दे रहे हैं। हमारा विश्वास है कि सोने के निवेश के लिए एक सहज, सुरक्षित और डिजिटल रास्ता तैयार करके हम सोने को आधुनिक और एकीकृत एसेट क्लास के रूप में स्थापित कर रहे हैं। इससे खंडित बेंचमार्क्स पर निर्भरता कम होगी और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।”


EGR निवेशकों को इलेक्ट्रॉनिक होल्डिंग, आश्वस्त गुणवत्ता और भौतिक व डिजिटल फॉर्मेट के बीच आसान परिवर्तन की सुविधा देते हैं। इससे निवेशक छोटी मात्रा (denominations) में भी गोल्ड मार्केट में भाग ले सकेंगे और डीमैट फॉर्म में रखे अन्य वित्तीय साधनों जैसी लिक्विडिटी व लचीलापन प्राप्त कर सकेंगे।



NSE के बारे में

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) भारत में इलेक्ट्रॉनिक/स्क्रीन बेस्ड ट्रेडिंग लागू करने वाला पहला एक्सचेंज था। यह 1994 से संचालित है और 1995 से हर वर्ष SEBI डेटा के अनुसार इक्विटी शेयर्स के कुल और औसत दैनिक टर्नओवर के मामले में भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। NSE विश्व का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज भी है।

अधिक जानकारी के लिए: www.nseindia.comयह प्रेस रिलीज मूल दस्तावेज पर आधारित है और निवेशकों, ज्वेलर्स तथा गोल्ड बाजार से जुड़े सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।



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Rajanish Kant
साल में 7.5% से ज्यादा ब्याज देने वाले 6 सुरक्षित निवेश विकल्प 2026: SCSS, SSY, RBI फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, NSC और अन्य | Best Govt Schemes

7.5%+ ब्याज दर वाले सुरक्षित निवेश: कम रिस्क में अच्छा रिटर्न पाने के बेस्ट ऑप्शन्स (2026)

नमस्ते,आजकल बैंक FD की दरें घट रही हैं और महंगाई भी बनी हुई है, ऐसे में कम रिस्क वाले निवेश में अच्छा ब्याज चाहने वाले निवेशकों के लिए सरकारी योजनाएं अभी भी सबसे बेहतर विकल्प बनी हुई हैं। कई स्कीम्स 7.5% से लेकर 8.2% तक ब्याज दे रही हैं, साथ में सरकारी गारंटी और टैक्स बेनिफिट्स भी मिलते हैं।

यहां 6 बेहतरीन विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी गई है (मई 2026 के अनुसार दरें)।

1. Senior Citizen Savings Scheme (SCSS) – 8.2% ब्याज

सीनियर सिटीजन के लिए सबसे पॉपुलर स्कीम।  

ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्ष (तिमाही कंपाउंडिंग)  

न्यूनतम निवेश: ₹1,000  

अधिकतम सीमा: ₹30 लाख 

(एक व्यक्ति के सभी SCSS अकाउंट्स में)  

टेन्योर: 5 वर्ष (3 वर्ष के ब्लॉक में एक्सटेंड कर सकते हैं)  

टैक्स: Section 80C में छूट (पुरानी टैक्स रिजीम), ब्याज पर TDS लागू हो सकता है।

किसके लिए बेस्ट: 60+ उम्र वाले रिटायर्ड लोग जो नियमित इनकम चाहते हैं।

2. Sukanya Samriddhi Yojana (SSY) – 8.2% ब्याज

लड़की बच्ची के भविष्य (शादी/शिक्षा) के लिए बेहतरीन स्कीम।  ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्ष  

न्यूनतम: ₹250 प्रति वर्ष  

अधिकतम: ₹1.5 लाख प्रति वर्ष  

टेन्योर: 21 वर्ष (15 वर्ष तक जमा करना जरूरी)  

टैक्स: EEE स्टेटस – जमा, ब्याज और मैच्योरिटी सभी टैक्स फ्री (पुरानी रिजीम में 80C)।

किसके लिए: बेटी वाले माता-पिता।

3. RBI Floating Rate Savings Bonds – 8.05% ब्याजसबसे सुरक्षित और फ्लोटिंग रेट वाला विकल्प।  ब्याज दर: 8.05% (NSC + 0.35% स्प्रेड), हर 6 महीने रीसेट होता है  

न्यूनतम: ₹1,000  

अधिकतम: कोई लिमिट नहीं  

टेन्योर: 7 वर्ष  

ब्याज भुगतान: हर 6 महीने (1 जनवरी और 1 जुलाई)  

टैक्स: ब्याज पर टैक्स लगता है।

किसके लिए: जो लंबे समय तक सुरक्षित हाई रिटर्न चाहते हैं।

4. Post Office 5-Year Time Deposit – 7.5% ब्याजब्याज दर: 7.5% (तिमाही कंपाउंडिंग)  

टेन्योर: 5 वर्ष  

टैक्स बेनिफिट: पुरानी टैक्स रिजीम में Section 80C।

किसके लिए: मीडियम टर्म निवेश चाहने वाले।

5. National Savings Certificate (NSC) – 7.7% ब्याजब्याज दर: 7.7% (वार्षिक कंपाउंडिंग)  

न्यूनतम: ₹1,000  

अधिकतम: कोई लिमिट नहीं  

टेन्योर: 5 वर्ष  

टैक्स: 80C छूट, ब्याज पर टैक्स 

(लेकिन कंपाउंडिंग के कारण प्रभावी रिटर्न अच्छा)।

6. Public Provident Fund (PPF) – 7.1% ब्याजब्याज दर: 7.1% (तिमाही कंपाउंडिंग)  

टेन्योर: 15 वर्ष (5 वर्ष के ब्लॉक में एक्सटेंड)  

टैक्स: EEE – पूरी तरह टैक्स फ्री।  

वार्षिक लिमिट: ₹1.5 लाख।

नोट: हालांकि 7.1% है, लेकिन लंबी अवधि और टैक्स फ्री होने से प्रभावी रिटर्न बहुत अच्छा है।

तुलनात्मक सारणी (2026)


महत्वपूर्ण सलाह (Disclaimer)ब्याज दरें हर तिमाही रिव्यू होती हैं, इसलिए जानकारी पोस्ट ऑफिस, बैंक या आधिकारिक वेबसाइट से कन्फर्म करें।

अपने रिस्क प्रोफाइल, उम्र, टैक्स स्लैब और फाइनेंशियल गोल के अनुसार चुनें।

डाइवर्सिफिकेशन हमेशा अच्छा होता है – एक स्कीम में सारा पैसा न लगाएं।

अपनी वित्तीय यात्रा को मजबूत बनाएं – सुरक्षित, स्मार्ट और टैक्स एफिशिएंट निवेश के साथ!


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PPF अकाउंट मैच्योरिटी के बाद क्या करें? 2026 नियम, विकल्प और पूरी जानकारी

PPF मैच्योरिटी पर पूरा पैसा निकालें, 5 साल एक्सटेंड करें या बिना जमा के जारी रखें? जानिए 2026 के नियम, टैक्स बेनिफिट, ब्याज दर और बेस्ट स्ट्रैटजी।

PPF मैच्योरिटी नियम: अकाउंट मैच्योर होने पर निवेशक क्या करें?

Public Provident Fund (PPF) भारत का सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित सरकारी बचत योजना है। यह 15 साल की मैच्योरिटी पीरियड के साथ आती है। मैच्योरिटी पूरा होने पर अकाउंट होल्डर्स को महत्वपूर्ण फैसले लेने होते हैं। सही निर्णय से आप टैक्स-फ्री रिटर्न्स को जारी रख सकते हैं या जरूरत के अनुसार लिक्विडिटी हासिल कर सकते हैं।PPF अकाउंट पोस्ट ऑफिस, पब्लिक सेक्टर बैंकों या चुनिंदा प्राइवेट बैंकों में खोला जा सकता है। 

न्यूनतम जमा ₹100-500 प्रति माह और अधिकतम ₹1.5 लाख प्रति वित्तीय वर्ष है। 

यह EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में आता है — यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों टैक्स-फ्री हैं।

PPF मैच्योरिटी के बाद क्या विकल्प हैं?

PPF अकाउंट 15 साल बाद मैच्योर होता है। इसके बाद आपके पास मुख्य रूप से तीन विकल्प होते हैं:

पूरी राशि निकाल लें (Full Withdrawal) ..मैच्योरिटी पर आप पूरी बैलेंस (प्रिंसिपल + ब्याज) निकाल सकते हैं और अकाउंट बंद कर सकते हैं।  

कोई टैक्स नहीं लगता।  

यह विकल्प उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें घर खरीदने, शादी, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट के लिए बड़ी रकम की जरूरत है।  

निकासी के बाद फंड को दूसरे विकल्पों जैसे म्यूचुअल फंड, स्टॉक्स या अन्य सरकारी योजनाओं में लगाया जा सकता है।

PPF अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में एक्सटेंड करें

अकाउंट को अनलिमिटेड बार 5-5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

 इसमें दो सब-विकल्प हैं:

नई जमा (Contributions) के साथ एक्सटेंड करें  हर साल ₹1.5 लाख तक जमा कर सकते हैं।  

Section 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का लाभ जारी रहता है।  

टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग ब्याज (वर्तमान में 7.1% प्रति वर्ष) मिलता रहता है।  

नियम: 5 साल के ब्लॉक में बैलेंस का 60% तक ही विड्रॉल कर सकते हैं (एक वित्तीय वर्ष में एक बार)।

बिना नई जमा के एक्सटेंड करें  पुरानी राशि टैक्स-फ्री ब्याज कमाती रहती है।  

नया टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता।  

उन लोगों के लिए उपयुक्त जो तुरंत पैसे नहीं निकालना चाहते लेकिन कंपाउंडिंग जारी रखना चाहते हैं।

बिना एक्सटेंशन के जारी रखना

कुछ मामलों में अकाउंट ऑटोमैटिक रूप से जारी रह सकता है, लेकिन बेहतर है कि बैंक/पोस्ट ऑफिस में स्पष्ट रूप से विकल्प चुन लें।

मैच्योरिटी से पहले के नियम (Partial & Premature Withdrawal)

Partial Withdrawal: अकाउंट खुलने के 5 साल बाद 50% तक बैलेंस निकाल सकते हैं (बिना अकाउंट बंद किए)।

Premature Closure: 5 साल बाद कुछ विशेष परिस्थितियों (जैसे मेडिकल इमरजेंसी, उच्च शिक्षा या रेजिडेंसी बदलने) में संभव है, लेकिन ब्याज दर में 1% कटौती होती है।

वर्तमान PPF ब्याज दर (मई 2026)सरकार हर तिमाही ब्याज दर तय करती है। फिलहाल 7.1% प्रति वर्ष (वार्षिक कंपाउंडिंग) है। ब्याज महीने के 5 तारीख से अंतिम दिन तक के सबसे कम बैलेंस पर कैलकुलेट होता है और वित्तीय वर्ष के अंत में क्रेडिट किया जाता है।

PPF मैच्योरिटी पर बेस्ट स्ट्रैटजी क्या हो?

अगर फंड की जरूरत नहीं है → Contributions के साथ 5 साल एक्सटेंड करें। लंबे समय तक टैक्स-फ्री कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा।

अगर लिक्विडिटी चाहिए → मैच्योरिटी पर निकालकर बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों में निवेश करें।

रिटायरमेंट प्लानिंग → बिना जमा के एक्सटेंड करके स्टेबल इनकम सुनिश्चित करें।

हमेशा अपने फाइनेंशियल गोल्स, उम्र और रिस्क प्रोफाइल के अनुसार फैसला लें।

सलाह:

 PPF मैच्योरिटी से पहले अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस में फॉर्म जमा करके विकल्प चुनें। नियमों में बदलाव हो सकता है, इसलिए आधिकारिक सूत्रों से कन्फर्म करें।नोट: यह लेख सूचनात्मक उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से पहले प्रमाणित फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।



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2-अचानक की गई बंदी इंसान को संभलने का मौका नहीं देती। ऐसे में आनंद के साथ जीने के उपाय क्या हैं। मेरी इस किताब में पढ़िये...बंदी में कैसे रहें बिंदास" 
3-अमीर बनने के लिए पैसों से खेलना आना चाहिए। पैसों से खेलने की कला सीखने के लिए पढ़िये...
4-बच्चों को फाइनेंशियल एजुकेशन क्यों देना चाहिए पर हिन्दी में किताब- 'बेटा हमारा दौलतमंद बनेगा' - 
5-अमीर बनने की ख्वाहिश हममें से हर किसी की होती है, लेकिन इसके लिए लोगों को पैसे से पैसा बनाने की कला तो आनी चाहिए। कैसे आएगी ये कला, पढ़िये - 'आपका पैसा, आप संभालें' - 
6-इंसान के पास संसाधन या मार्गदर्शन हो या ना हो, सपने जरूर होने चाहिए। सिर्फ सपने के सहारे भी कामयाब होने वालों की दुनिया में कमी नहीं है। - 'जब सपने बन जाते हैं मार्गदर्शक' -
7-बेटियों को बहादुर बनने दीजिए और बनाइये, ये समय की मांग है,  "बेटी तुम बहादुर ही बनना " -
8 -अपनी हाउसिंग सोसायटी को जर्जर से जन्नत बनाने के लिए पढ़ें,  डेढ़ साल बेमिसाल -

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Rajanish Kant
क्या Gold Loan लेकर भारतीय चला रहे हैं अपनी रोजी रोटी, गोल्ड लोन के हैरान करने वाले आंकड़े

भारत में गोल्ड लोन 2 साल में 5 गुना बढ़कर ₹4.6 लाख करोड़ हो गए। जानें इसके पीछे के कारण, फायदे और अर्थव्यवस्था पर असर।

भारत में गोल्ड लोन का जबरदस्त उछाल

भारत में पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन (सोने के बदले लिया जाने वाला कर्ज) में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच गोल्ड लोन का कुल आकार करीब ₹93,301 करोड़ से बढ़कर ₹4.6 लाख करोड़ हो गया है, यानी लगभग 5 गुना वृद्धि।

यह वृद्धि दर्शाती है कि लोग तेजी से अपने सोने को गिरवी रखकर कर्ज ले रहे हैं।

📊 भारत में गोल्ड लोन का जबरदस्त उछाल
भारत में पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन (सोने के बदले लिया जाने वाला कर्ज) में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच गोल्ड लोन का कुल आकार करीब ₹93,301 करोड़ से बढ़कर ₹4.6 लाख करोड़ हो गया है, यानी लगभग 5 गुना वृद्धि।

यह वृद्धि दर्शाती है कि लोग तेजी से अपने सोने को गिरवी रखकर कर्ज ले रहे हैं।

📈 गोल्ड लोन बढ़ने के प्रमुख कारण
1. सोने की कीमतों में तेजी
पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे लोगों को अपने सोने के बदले ज्यादा लोन मिल रहा है, जिससे यह विकल्प और आकर्षक बन गया है।

2. आर्थिक दबाव और नकदी की जरूरत
महंगाई, रोजगार की अनिश्चितता और खर्च बढ़ने के कारण कई परिवार तुरंत नकदी के लिए गोल्ड लोन का सहारा ले रहे हैं।

3. आसान और तेज प्रक्रिया
गोल्ड लोन में

कम कागजी प्रक्रिया

जल्दी अप्रूवल

कम ब्याज दर (अन्य अनसिक्योर्ड लोन की तुलना में)
होती है, जिससे यह आम लोगों के लिए पसंदीदा विकल्प बन गया है।

⚖️ अर्थव्यवस्था के लिए क्या संकेत?

🔴 सकारात्मक पहलू
वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) बढ़ रहा है

छोटे व्यवसायों और जरूरतमंद लोगों को तुरंत फंड मिल रहा है

बैंकिंग सिस्टम में secured lending बढ़ रही है

🔴 नकारात्मक संकेत
लोग बचत (सोना) को खर्च के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं

उपभोक्ता खर्च (consumer spending) में कमी का संकेत

आर्थिक दबाव और आय में अस्थिरता का संकेत

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ट्रेंड बताता है कि लोग गैर-जरूरी खर्च कम कर रहे हैं और जरूरी जरूरतों के लिए सोना गिरवी रख रहे हैं।

🏦 गोल्ड लोन क्यों बन रहा है सबसे तेज बढ़ता सेक्टर?
यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्रेडिट सेगमेंट बन चुका है

अन्य लोन (जैसे कंज्यूमर लोन, एक्सपोर्ट क्रेडिट) की तुलना में इसकी ग्रोथ कहीं ज्यादा है

बैंक और NBFC दोनों इस सेगमेंट पर तेजी से फोकस कर रहे हैं

📌 क्या आपको गोल्ड लोन लेना चाहिए?
✔ कब सही है
अचानक पैसों की जरूरत हो

कम समय के लिए लोन चाहिए

अन्य लोन महंगे पड़ रहे हों

❌ कब सावधान रहें
आय स्थिर नहीं है

लोन चुकाने की क्षमता नहीं है

बार-बार गोल्ड गिरवी रखना पड़ रहा है

🔚 निष्कर्ष
भारत में गोल्ड लोन का 5 गुना बढ़ना केवल एक वित्तीय ट्रेंड नहीं है, बल्कि यह आम लोगों की बदलती आर्थिक स्थिति को भी दर्शाता है। जहां एक तरफ यह आसान फाइनेंस का साधन बन रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह संकेत देता है कि लोग अपने सुरक्षित निवेश (सोना) को भी खर्च के लिए उपयोग करने लगे हैं।

👉 इसलिए गोल्ड लोन लेते समय सोच-समझकर निर्णय लेना बेहद जरूरी है।



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Rajanish Kant रविवार, 3 मई 2026
₹13 लाख कैश से क्रेडिट कार्ड बिल भरने पर आया टैक्स नोटिस! ITAT ने कैसे दी राहत – जानें पूरा मामला

क्रेडिट कार्ड बिल कैश में चुकाने पर टैक्स नोटिस क्यों आता है? जानें ₹13 लाख केस में ITAT का फैसला और फैमिली गिफ्ट से जुड़े टैक्स नियम।

₹13 लाख कैश पेमेंट से क्यों आया टैक्स नोटिस?

हाल ही में एक दिलचस्प मामला सामने आया, जिसमें मुंबई के एक व्यक्ति को ₹13 लाख से अधिक नकद राशि से क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने के कारण आयकर विभाग का नोटिस मिला। दरअसल, उस व्यक्ति ने अपने ITR में करीब ₹6.3 लाख की आय दिखाई थी, लेकिन उसने कुल ₹27.65 लाख का क्रेडिट कार्ड बिल चुकाया, जिसमें लगभग ₹13.95 लाख कैश पेमेंट शामिल था।

इतनी बड़ी नकद राशि देखकर आयकर विभाग को शक हुआ कि यह अघोषित आय (Unexplained Income) हो सकती है।

⚖️ क्या था टैक्स विभाग का आरोप?

आयकर विभाग ने यह माना कि:

इतनी बड़ी नकद राशि का स्रोत स्पष्ट नहीं है
यह पैसा छुपी हुई आय (Black Money) हो सकता है
इसलिए इसे टैक्सेबल इनकम माना जाए

इस आधार पर नोटिस जारी किया गया।

करदाता ने क्या सफाई दी?

टैक्सपेयर ने अपनी सफाई में कहा कि:

यह पैसा परिवार (पत्नी, माता-पिता) से मिला गिफ्ट था
इस रकम का उपयोग उसने क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने में किया

यानी उसने इसे गिफ्ट (Gift from relatives) बताया, जो आयकर कानून के तहत कुछ शर्तों में टैक्स-फ्री होता है।

ITAT ने क्या फैसला दिया?

मामला आगे बढ़कर Income Tax Appellate Tribunal (ITAT), मुंबई तक पहुंचा।

ITAT ने:

करदाता के दिए गए स्पष्टीकरण और सबूतों को स्वीकार किया
माना कि यह वास्तव में परिवार से मिला गिफ्ट था
और टैक्स विभाग का दावा खारिज कर दिया

इस तरह करदाता को बड़ी राहत मिली।



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Rajanish Kant शनिवार, 2 मई 2026
टैक्स सेविंग FD vs रेगुलर FD: ब्याज दरें, लॉक-इन पीरियड और टैक्स बचत की पूरी तुलना 2026

टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट और नॉर्मल FD में क्या अंतर है? ब्याज दर, 5 साल का लॉक-इन, Section 80C टैक्स डिडक्शन और लिक्विडिटी की पूरी तुलना जानें। बेस्ट FD चुनने का सही तरीका।

टैक्स सेविंग FD vs रेगुलर FD: ब्याज दरें, लॉक-इन पीरियड और टैक्स बचत की पूरी तुलनाफिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भारतीय निवेशकों के बीच सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है। मई 2026 में प्रमुख बैंक सामान्य नागरिकों को 7% तक ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं, जबकि सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त 0.50% ब्याज मिलता है। अगर आप स्थिर आय और पूंजी सुरक्षा चाहते हैं तो FD बेहतरीन विकल्प है।लेकिन सवाल यह है कि टैक्स सेविंग FD लें या रेगुलर FD? दोनों में क्या अंतर है? 


आइए विस्तार से समझते हैं।

1. टैक्स सेविंग FD क्या है?

टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट Section 80C के तहत आयकर छूट प्रदान करते हैं। आप एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश करके टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। मुख्य विशेषताएं:अनिवार्य 5 साल का लॉक-इन पीरियड (पूर्वावधि निकासी नहीं हो सकती)

ब्याज दरें रेगुलर FD के लगभग समान

ब्याज आय पर पूरा टैक्स लगता है (आपकी इनकम स्लैब के अनुसार)


2. ब्याज दरों की तुलना (मई 2026)

रेगुलर FD (3 साल के आसपास):SBI: सामान्य - 6.05%, सीनियर सिटीजन - 7.05%

अन्य बैंक (BoB, PNB, HDFC, ICICI, IndusInd): 6.25% से 7% (सामान्य), 6.95% से 7.5% (सीनियर)


टैक्स सेविंग FD (5 साल):SBI: सामान्य - 6%, सीनियर सिटीजन - 6.75% से 6.90%

ICICI, HDFC, Axis Bank: 6.25% से 6.60% (सामान्य), 6.75% से 7.20% (सीनियर)


निष्कर्ष: रेगुलर FD में ज्यादातर मामलों में थोड़ी बेहतर ब्याज दर मिल सकती है, खासकर छोटी अवधि में।3. लॉक-इन पीरियड की तुलना







पैरामीटर

       रेगुलर FD

                 टैक्स सेविंग FD

लॉक-इन पीरियड

 चुनी हुई अवधि    5 साल अनिवार्य

                       (7 दिन से 10 साल)  

पूर्वावधि निकासी

 संभव (पेनाल्टी के साथ)

    नहीं

नॉन-कॉलेबल FD

उपलब्ध (उच्च ब्याज)

    लागू नहीं


4. टैक्स लाभ की तुलनारेगुलर FD:

ब्याज आय पर स्लैब रेट से टैक्स

सीनियर सिटीजन Section 80TTB के तहत ₹50,000 तक ब्याज पर छूट (पुरानी व्यवस्था)


टैक्स सेविंग FD:Section 80C - ₹1.5 लाख तक डिडक्शन

ब्याज आय पर पूरा टैक्स (TDS भी कट सकता है)

ELSS, PPF या NSC की तरह EEE स्टेटस नहीं मिलता


5. अन्य महत्वपूर्ण अंतरलोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा: रेगुलर FD में FD के विरुद्ध आसानी से लोन मिल जाता है। टैक्स सेविंग FD में 5 साल तक यह सुविधा नहीं मिलती।

लिक्विडिटी: रेगुलर FD ज्यादा लचीला है।

उद्देश्य: टैक्स बचाना है तो टैक्स सेविंग FD, लचीलापन और बेहतर रिटर्न चाहिए तो रेगुलर FD।


कौन सा FD चुनें? (आपके लिए सलाह)टैक्स सेविंग FD चुनें अगर:आप 80C लिमिट भरना चाहते हैं

5 साल के लिए पैसा लॉक कर सकते हैं

टैक्स स्लैब ऊंचा है


रेगुलर FD चुनें अगर:आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है

छोटी अवधि में बेहतर रिटर्न चाहिए

पहले से 80C लिमिट अन्य निवेशों (PPF, ELSS, NSC) से भर चुकी है

नोट: हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या ब्रांच से最新 ब्याज दरें कन्फर्म करें क्योंकि ये बदलती रहती हैं।



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