GST काउंसिल के बड़े सुधार प्रस्ताव 2026: अरेस्ट पावर खत्म, ITC में राहत और छोटे बिजनेस को आसान नियम | BeYourMoneyManager

GST काउंसिल ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण सुधारों के प्रस्ताव दिए हैं जो व्यापारियों, उद्योगों और छोटे व्यवसायियों के लिए राहत भरे साबित हो सकते हैं। ये बदलाव जीएसटी व्यवस्था को अधिक व्यापार-अनुकूल, सरल और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में हैं। यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), रिफंड, प्रॉसीक्यूशन और अनुपालन में काफी आसानी होगी।

मुख्य प्रस्तावित सुधार

  1. GST अधिकारियों की अरेस्ट पावर में बदलाव
    GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां समाप्त की जा सकती हैं। अब किसी भी अरेस्ट के लिए न्यायिक प्राधिकरण (Judicial Authorisation) की जरूरत पड़ सकती है।
  2. प्रॉसीक्यूशन की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
    अभियोजन (Prosecution) की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का सुझाव दिया गया है। इससे छोटी गलतियों पर मुकदमेबाजी कम होगी।
  3. ITC रिफंड में राहत
    प्लांट एंड मशीनरी तथा इनपुट सर्विसेज पर भी ITC रिफंड मिल सकता है। रिफंड को 5 साल में मासिक किस्तों में देने का प्रस्ताव है।
  4. व्यापक ITC की अनुमति
    कर्मचारी बीमा, वाहन, टेलीकॉम टावर और पाइपलाइनों पर भी ITC उपलब्ध हो सकता है। टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन फैक्टरी परिसर के बाहर स्थापित होने पर भी ITC मिलेगा।
  5. FMCG और फार्मा कंपनियों के लिए विशेष राहत
    एक्सपायर्ड और नष्ट हो चुके उत्पादों पर भी ITC मिलने का प्रावधान किया जा सकता है।
  6. वास्तविक खरीदारों की सुरक्षा
    सप्लायर के डिफॉल्ट करने पर भी असली खरीदार ITC बरकरार रख सकेंगे। वसूली डिफॉल्टर सप्लायर से की जाएगी।
  7. छोटे नोटिसों से मुक्ति
    10,000 रुपये से कम के मामलों में कोई SCN (Show Cause Notice) नहीं जारी किया जाएगा। लंबित मामलों पर भी यही नियम लागू हो सकता है।
  8. छोटे व्यवसायों के लिए आसान अनुपालन
    केवल उपभोक्ताओं को सप्लाई करने वाले छोटे व्यवसायों को तिमाही टैक्स भुगतान और वार्षिक रिटर्न की सुविधा मिल सकती है।
  9. एक्सपोर्ट संबंधी स्पष्टता
    • ओवरसीज ब्रांच के माध्यम से बेची गई वस्तुएं एक्सपोर्ट मानी जाएंगी।
    • विदेशी क्लाइंट्स के सामान पर भारत में किया गया काम भी एक्सपोर्ट के रूप में योग्य हो सकता है।
  10. तेज रिफंड प्रक्रिया
    रिस्क-बेस्ड चेक के बाद 90% रिफंड क्लेम तुरंत जारी किए जा सकते हैं।
  11. डेटा-ड्रिवन प्रशासन
    जीएसटी प्रशासन में डेटा-आधारित, स्वचालित और रिस्क-बेस्ड सिस्टम का अधिक उपयोग किया जाएगा।

व्यापारियों और कंपनियों पर प्रभाव

ये प्रस्ताव खासकर MSME, FMCG, फार्मा, टेलीकॉम और निर्यात से जुड़े व्यवसायों के लिए फायदेमंद हैं। ITC की उपलब्धता बढ़ने से वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होगा। छोटे व्यापारियों को रिटर्न और भुगतान की परेशानी घटेगी। वहीं, सख्त अरेस्ट पावर हटने और प्रॉसीक्यूशन थ्रेशोल्ड बढ़ने से व्यापारिक माहौल और अधिक अनुकूल बनेगा।

हालांकि ये अभी केवल प्रस्ताव हैं। GST काउंसिल की मंजूरी और आवश्यक संशोधनों के बाद ही ये लागू होंगे। व्यापारियों को आधिकारिक अधिसूचनाओं का इंतजार करना चाहिए और अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से परामर्श लेना चाहिए।

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(नोट: उपरोक्त जानकारी उपलब्ध सार्वजनिक प्रस्तावों पर आधारित है। अंतिम निर्णय और लागू होने की तिथि आधिकारिक अधिसूचना पर निर्भर करेगी।)

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