कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में अस्पताल और इंश्योरर के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। इन्फ्लेटेड बिल, देर से अप्रूवल, मनमानी कटौती और ट्रीटमेंट की जरूरत पर सवाल – इन सबके बीच पॉलिसीहोल्डर सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। कई बार मरीज को अपनी जेब से पैसे निकालने पड़ते हैं, डिस्चार्ज में देरी होती है या क्लेम आंशिक रूप से ही मिलता है।
यह समस्या हाल के दिनों में और चर्चा में आई जब महाराष्ट्र FDA ने अस्पतालों में consumables (जैसे IV सेट, सिरिंज) पर भारी मार्कअप (कभी-कभी 2500% से ज्यादा) की बात उठाई। इंश्योरर्स इसे बिल बढ़ाने का सबूत मानते हैं, जबकि अस्पताल कहते हैं कि प्राइसिंग जटिल है और ट्रीटमेंट डॉक्टर तय करते हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उंगली उठाते हैं, लेकिन नुकसान पॉलिसीहोल्डर को ही होता है।
आम समस्याएं क्या हैं?
देर से कैशलेस अप्रूवल:** IRDAI के नियम के अनुसार प्री-ऑथराइजेशन 1 घंटे और डिस्चार्ज बिल पर फाइनल अप्रूवल 3 घंटे में होना चाहिए। फिर भी कई मामलों में घंटों या दिनों की देरी होती है।
मनमानी कटौती:** रूम रेंट लिमिट से ज्यादा चार्ज, consumables (ग्लव्स, मास्क, सिरिंज) का नॉन-पेएबल होना, या ट्रीटमेंट की जरूरत पर सवाल।
अस्पताल का अतिरिक्त डिमांड:** कैशलेस अप्रूव होने के बाद भी अस्पताल अतिरिक्त पैसे मांगता है या डिपॉजिट रखता है।
पूर्व-मौजूद बीमारी या मेडिकल जरूरत पर विवाद:** कई बार इंश्योरर अस्पताल में भर्ती को अनावश्यक बताकर क्लेम रिजेक्ट कर देता है।
पॉलिसीहोल्डर क्या करें? व्यावहारिक कदम
लिखित में सब कुछ लें
कैशलेस रिजेक्शन या कटौती होने पर अस्पताल और TPA/इंश्योरर से लिखित कारण (policy clause के साथ) मांगें। मौखिक बातचीत पर्याप्त नहीं है।
तुरंत संपर्क करें
TPA या इंश्योरर के हेल्पलाइन पर कॉल करें। अक्सर अतिरिक्त दस्तावेज (डॉक्टर का नोट, रिपोर्ट्स) देने से रिजेक्शन पलट जाता है। कैशलेस रिजेक्शन अंतिम फैसला नहीं होता।
जरूरत पड़ने पर खुद भुगतान करें और बाद में reimbursement दाखिल करें
इलाज न रुकने दें। डिस्चार्ज समरी, आइटमवाइज बिल, लैब रिपोर्ट्स, प्रिस्क्रिप्शन और रिजेक्शन लेटर इकट्ठा रखें। पॉलिसी में दिए समयसीमा (आमतौर पर 30 दिन) के अंदर reimbursement क्लेम फाइल करें। कई कैशलेस रिजेक्टेड क्लेम reimbursement स्टेज पर पास हो जाते हैं।
कटौती को समझें और चुनौती दें
अपनी पॉलिसी की रूम रेंट लिमिट, consumables कवर और को-पेमेंट चेक करें।
आइटमवाइज बिल और अप्रूवल लेटर की तुलना करें। जो चार्ज अस्पताल-इंश्योरर के एग्रीड टैरिफ से ज्यादा है, वह अस्पताल की जिम्मेदारी है।
अनुचित कटौती पर इंश्योरर के Grievance Redressal Officer को लिखित शिकायत करें।
एस्केलेशन का रास्ता
इंश्योरर के GRO को शिकायत
IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल (bimabharosa.irdai.gov.in) पर रजिस्टर करें
इंश्योरेंस ओम्बड्समैन
जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता अदालत
आगे क्या सुधार हो सकते हैं?
इंश्योरर्स पारदर्शी प्राइसिंग और तेज प्रोसेस की मांग करते हैं, जबकि अस्पताल बेहतर और समयबद्ध अप्रूवल चाहते हैं। उद्योग स्तर पर roundtable, medical advisory panel और National Health Claims Exchange जैसे प्रयास चल रहे हैं। लेकिन तब तक पॉलिसीहोल्डर को खुद सक्रिय रहना होगा।
सलाह:
पॉलिसी खरीदते समय network hospitals, room rent limit, consumables cover और cashless everywhere सुविधा चेक करें।
इमरजेंसी में भी पहले इंश्योरर/TPA से संपर्क करें।
सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और समयसीमा का पालन करें।
कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस का असली फायदा तभी मिलता है जब आप अपने अधिकार जानते हों और सही कदम उठाते हों। अस्पताल और इंश्योरर के विवाद में फंसने के बजाय तैयार रहें – यही स्मार्ट मनी मैनेजमेंट है।
Website: www.beyourmoneymanager.com
(यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने इंश्योरर या वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।)

कोई टिप्पणी नहीं