₹25 लाख नकद जमा पर आयकर नोटिस (धारा 69), करदाता ने ITAT बैंगलोर में केस जीता – जानें पूरा मामला

बैंगलोर की महिला ने ₹25 लाख नकद जमा पर आयकर विभाग का नोटिस हराया। ITAT बैंगलोर का फैसला: बैंक से निकाली गई बचत का स्रोत साबित होने पर समय अंतराल से जोड़ नहीं। BeYourMoneyManager पर पढ़ें पूरी कहानी।

₹25 लाख नकद जमा पर आयकर नोटिस आया, फिर भी करदाता जीत गया – ITAT बैंगलोर का महत्वपूर्ण फैसला

क्या आपने भी बैंक में बड़ी नकद राशि जमा की है और आयकर विभाग से नोटिस आने का डर सताता है? हाल ही में बैंगलोर की एक महिला करदाता के साथ ऐसा ही हुआ। उन्होंने अपने बैंक खाते में ₹25 लाख नकद जमा किए। आयकर अधिकारी ने इसे धारा 69 के तहत अस्पष्टीकृत नकद (Unexplained Cash) मानकर नोटिस भेज दिया। लेकिन अंत में ITAT बैंगलोर ने करदाता के पक्ष में फैसला सुनाया।

यह मामला उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो संपत्ति बेचने के बाद नकद जमा करते हैं या पुरानी बचत से जमा करते हैं।

क्या था पूरा मामला?

श्रीमती नागरथना (बैंगलोर, विजयनगर) BESCOM में काम करती हैं। 29 जून 2016 को उन्होंने कॉर्पोरेशन बैंक, नृपथुंगा रोड शाखा में ₹25 लाख नकद जमा किए।

आयकर विभाग के असेसिंग ऑफिसर (AO) को शक हुआ। उन्होंने पाया कि जमा से कुछ हफ्ते पहले ही उन्होंने एक संपत्ति बेची थी। AO का निष्कर्ष था कि संपत्ति की बिक्री में अतिरिक्त नकद (अंडर-द-टेबल) मिला होगा, जो जमा किया गया। इसलिए पूरे ₹25 लाख को धारा 69 के तहत अस्पष्टीकृत आय मानकर जोड़ दिया गया।

करदाता ने स्पष्टीकरण दिया कि यह राशि उनके और उनके पति की सालों की बचत से आई है। उन्होंने बैंक स्टेटमेंट दिखाए:

खुद के खाते से लगभग ₹13.17 लाख निकासी  

पति के खाते से लगभग ₹11.95 लाख निकासी  

ये निकासी पिछले दो सालों में हुई थीं। दोनों पति-पत्नी घर खरीदने के लिए बचत कर रहे थे।

CIT(A) ने भी AO के आदेश को सही ठहराया। इसके बाद मामला ITAT बैंगलोर पहुंचा।

ITAT बैंगलोर ने क्यों दिया राहत?

ITAT बैंगलोर (सदस्य: केशव दुबे और वसीम अहमद) ने 17 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। मुख्य बातें:

स्रोत साबित हो गया – करदाता ने बैंक स्टेटमेंट, लोन स्टेटमेंट और कैश-फ्लो डिटेल्स पेश किए। कुल निकासी जमा राशि से ज्यादा थी।

विभाग कोई सबूत नहीं दे पाया – आयकर विभाग यह साबित नहीं कर सका कि निकाली गई राशि कहीं और खर्च हो गई थी या जमा के दिन उपलब्ध नहीं थी।

सिर्फ समय का अंतर पर्याप्त नहीं – संपत्ति बिक्री और नकद जमा के बीच समय का अंतर केवल शक पैदा करता है। शक सबूत नहीं बन सकता। खरीदार का कोई बयान या अतिरिक्त नकद का कोई दस्तावेज नहीं था।

पूर्व निर्णयों का सहारा – कर्नाटक हाईकोर्ट के Smt. P. Padmavathi vs ITO मामले का हवाला दिया गया। उसमें भी पहले बैंक से निकाली गई राशि को बाद में जमा करना स्वीकार किया गया था।

ITAT ने साफ कहा: यदि नकद जमा का स्रोत पहचान योग्य बैंक निकासी से जुड़ा हो, तो सिर्फ समय के अंतराल के आधार पर स्पष्टीकरण खारिज नहीं किया जा सकता। विभाग को सकारात्मक सबूत देना होगा कि पैसा कहीं और इस्तेमाल हो चुका है।

नतीजा: ₹25 लाख का जोड़ हटा दिया गया और करदाता की अपील मंजूर कर ली गई।

आम करदाताओं के लिए सबक

सबूत रखें**: बैंक निकासी, कैश बुक, बचत का रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रखें।

समय का अंतर अकेला आधार नहीं**: पुरानी बचत को बाद में जमा करने पर भी राहत मिल सकती है, बशर्ते स्रोत साफ हो।

धारा 69 का दुरुपयोग**: विभाग केवल शक के आधार पर जोड़ नहीं लगा सकता। सबूत का बोझ विभाग पर भी है।

दस्तावेज तैयार रखें**: संपत्ति बिक्री, बैंक स्टेटमेंट और कैश फ्लो का पूरा विवरण हमेशा तैयार रखें।

यह फैसला उन करदाताओं के लिए राहत भरा है जो ईमानदारी से बचत करते हैं और नकद लेन-देन करते हैं। हालांकि, हर मामले के तथ्य अलग होते हैं। अगर आपको भी ऐसा नोटिस मिला है तो योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स एडवोकेट से सलाह जरूर लें।

BeYourMoneyManager.com पर हम नियमित रूप से ऐसे महत्वपूर्ण टैक्स फैसलों, व्यक्तिगत वित्त टिप्स और आयकर संबंधी अपडेट लाते रहते हैं। अपने पैसे को समझदारी से मैनेज करें!

(नोट: यह आर्टिकल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित मूल लेख है। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले प्रोफेशनल सलाह लें।)


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