दिल्ली के यात्री का RAC-43 टिकट चार्ट तैयार होने के बाद WL-44 हो गया। बिना सूचना के पूरी यात्रा खड़े रहनी पड़ी। दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने रेलवे को ₹5000 मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा। पूरी कहानी पढ़ें।RAC टिकट वेटलिस्ट में बदल गया, यात्री को खड़े-खड़े पूरी यात्रा करनी पड़ी – रेलवे से मिला ₹5000 मुआवजा
क्या आपने कभी RAC टिकट बुक किया है और यात्रा के दिन अचानक वेटिंग लिस्ट में बदलने का अनुभव किया है? दिल्ली के एक यात्री के साथ ठीक यही हुआ। उन्होंने रेलवे के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट में केस लड़ा और जीत हासिल की। दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने रेलवे को ₹5,000 मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा।
क्या हुआ था पूरा मामला?
अक्टूबर 2012 में दिल्ली के उत्तम नगर निवासी श्री सिंह (सरोज कुमार सिंह) ने अपने गांव बिहार जाने के लिए सिमानचल एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास का टिकट बुक किया। बुकिंग के समय टिकट का स्टेटस RAC-43 था और किराया सिर्फ ₹399 था।
RAC का मतलब होता है Reservation Against Cancellation। इसमें आप ट्रेन में सफर कर सकते हैं, लेकिन बर्थ किसी और यात्री के साथ शेयर करनी पड़ती है। यात्री को उम्मीद थी कि यात्रा की तारीख (31 अक्टूबर 2012) तक टिकट कन्फर्म हो जाएगा।
लेकिन 31 अक्टूबर को सुबह 6:30 बजे जब वे आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो चार्ट में उनका टिकट WL-44 (वेटिंग लिस्ट 44) दिखा। रेलवे कर्मचारियों और TTE से बात करने पर पता चला कि टेक्निकल वजह से एक कोच हटा दिया गया था, जिसके कारण उनका RAC स्टेटस वेटिंग में बदल गया।
नतीजा? यात्री को आनंद विहार से कटिहार जंक्शन तक पूरी यात्रा खड़े-खड़े करनी पड़ी।
रेलवे से मुआवजे की मांग
यात्रा के बाद श्री सिंह ने एडवोकेट के जरिए रेलवे को लीगल नोटिस भेजा। रेलवे ने जवाब में कोच हटने की बात तो मानी, लेकिन मुआवजे का कोई जिक्र नहीं किया।
इसके बाद उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। मार्च 2020 में दिल्ली के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कमीशन ने रेलवे को मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए ₹5,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
रेलवे ने इस आदेश के खिलाफ दिल्ली स्टेट कंज्यूमर कमीशन में अपील की। 27 फरवरी 2026 को जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य बिमला कुमारी की पीठ ने रेलवे की अपील खारिज कर दी और डिस्ट्रिक्ट कमीशन के आदेश को सही ठहराया।
कमीशन ने क्यों माना रेलवे की गलती?
कमीशन ने स्पष्ट कहा कि:
टिकट का स्टेटस टेक्निकल वजह से बदला था, यात्री की कोई गलती नहीं थी।
रेलवे ने स्टेटस बदलाव की समय पर कोई सूचना नहीं दी।
यात्री को स्टेशन पहुंचने के बाद ही पता चला, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था करने का मौका नहीं मिला।
यह सेवा में कमी (deficiency in service) माना गया।
रेलवे का यह तर्क भी खारिज कर दिया गया कि कंज्यूमर फोरम के पास क्षेत्राधिकार नहीं है। कमीशन ने कहा कि सेवा में कमी से जुड़े मामले कंज्यूमर कोर्ट में दायर किए जा सकते हैं।
यात्रियों के लिए सबक
यह केस उन लाखों यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है जो अक्सर RAC या वेटिंग टिकट पर यात्रा करते हैं। रेलवे अगर बिना पूर्व सूचना के टिकट का स्टेटस बदल दे और यात्री को परेशानी हो, तो कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
अगर आपके साथ भी कभी ऐसी स्थिति आए तो:
स्टेशन पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
चार्ट और टिकट की कॉपी सुरक्षित रखें।
जरूरत पड़ने पर कंज्यूमर फोरम या रेलवे हेल्पलाइन का सहारा लें।
BeYourMoneyManager पर हम आपको ऐसे ही कानूनी और वित्तीय मामलों की सही जानकारी देते हैं, ताकि आप अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें।
क्या आपके साथ कभी रेलवे यात्रा में ऐसी समस्या हुई है? कमेंट में बताएं!
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