सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने छोटे कर्जदारों से 74% वसूली की, बड़े डिफॉल्टर्स से सिर्फ 14.5% – RTI का चौंकाने वाला खुलासा | BeYourMoneyManager

 
क्या आप जानते हैं कि सार्वजनिक बैंक छोटे कर्जदारों से ज्यादा पैसा वसूलते हैं, जबकि बड़े डिफॉल्टर्स के हजारों करोड़ रुपये आसानी से राइट-ऑफ कर दिए जाते हैं? सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 10 साल के RTI डेटा ने यही सच्चाई सामने ला दी है।

पूना के RTI एक्टिविस्ट विवेक वेलंकर (सजग नागरिक मंच) द्वारा मांगी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने:

छोटे कर्जदार (₹1 करोड़ से कम)  

वसूली: ₹5,004 करोड़  

राइट-ऑफ: ₹6,774 करोड़  

रिकवरी रेट: लगभग 74%

बड़े कर्जदार (प्रत्येक ₹100 करोड़ से अधिक)  

वसूली: ₹3,874 करोड़  

राइट-ऑफ: ₹26,702 करोड़  

रिकवरी रेट: महज 14.5%

बैंक ने छोटे डिफॉल्टर्स से बड़े डिफॉल्टर्स की तुलना में ज्यादा राशि वसूल ली, फिर भी अमीर और बड़े कर्जदारों के लिए लगभग चार गुना ज्यादा राशि माफ कर दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक ने इन बड़े डिफॉल्टर्स में से एक का भी नाम बताने से इनकार कर दिया।

यह दोहरा मापदंड क्यों मायने रखता है?

सार्वजनिक बैंक का पैसा आम नागरिकों का पैसा है – जमाकर्ताओं का, टैक्सपेयर्स का। जब छोटे कर्जदार (होम लोन, पर्सनल लोन, MSME) डिफॉल्ट करते हैं तो रिकवरी एजेंट, नोटिस, प्रॉपर्टी अटैचमेंट जैसी कार्रवाई तेजी से होती है। लेकिन बड़े कर्जदारों के मामले में नाम छुपाना, कम रिकवरी और बड़े राइट-ऑफ आम हो गए हैं।

यह सिर्फ एक बैंक की कहानी नहीं है। कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ऐसी प्रवृत्ति देखी गई है। इससे बैंकों की बैलेंस शीट पर दबाव पड़ता है, ब्याज दरें प्रभावित हो सकती हैं और अंततः आम आदमी को महंगे लोन का सामना करना पड़ता है।

आम आदमी के लिए सबक (BeYourMoneyManager की सलाह)

लोन लेते समय सावधानी बरतें – अपनी आय के 40-50% से ज्यादा EMI न रखें। जरूरत से ज्यादा लोन लेने से बचें।  

CIBIL और क्रेडिट स्कोर मजबूत रखें – समय पर EMI भरने से न सिर्फ अच्छा स्कोर बनता है, बल्कि भविष्य में बेहतर ब्याज दर भी मिलती है।  

डॉक्यूमेंट्स और ट्रांसपेरेंसी का ध्यान रखें – लोन एग्रीमेंट, रिकवरी प्रक्रिया और अपने अधिकारों को समझें। आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत रिकवरी एजेंट्स के कुछ नियम होते हैं।  

विविधीकरण और इमरजेंसी फंड – सिर्फ लोन पर निर्भर न रहें। बचत, म्यूचुअल फंड और इमरजेंसी कॉर्पस बनाएं ताकि मुश्किल समय में डिफॉल्ट की स्थिति न बने।  

बड़े डिफॉल्टर्स पर नजर – सार्वजनिक धन की जवाबदेही मांगना हमारा अधिकार है। RTI और जागरूकता से पारदर्शिता बढ़ सकती है।

छोटा कर्जदार पीछा किया जाता है, बड़ा कर्जदार राइट-ऑफ हो जाता है – यही सच्चाई इस RTI ने दोहराई है। पैसे का सही प्रबंधन ही आपको सुरक्षित रखता है।

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(नोट: यह आर्टिकल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध RTI डेटा और रिपोर्ट्स पर आधारित मूल लेख है। डेटा स्रोत: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का RTI जवाब, MoneyLife और अन्य रिपोर्ट्स।)

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