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AY 2026-27 के लिए CBDT ने ITR स्क्रूटिनी के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जानिए किन मामलों में आयकर विभाग आपकी रिटर्न की जांच कर सकता है और नोटिस से कैसे बचें।
AY 2026-27 में ITR स्क्रूटिनी के नए नियम: किन करदाताओं को मिल सकता है आयकर विभाग का नोटिस?
आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के बाद अधिकांश करदाता यह मान लेते हैं कि उनका काम पूरा हो गया है। लेकिन अब आयकर विभाग की डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली पहले से कहीं अधिक सक्रिय हो चुकी है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनिवार्य स्क्रूटिनी (Mandatory Scrutiny) के नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत कुछ मामलों में आयकर विभाग स्वतः जांच शुरू कर सकता है।
यदि आपकी आय, खर्च, निवेश या कर विवरण में कोई असंगति दिखाई देती है, तो आपको आयकर विभाग से नोटिस प्राप्त हो सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि किन परिस्थितियों में आपकी ITR स्क्रूटिनी के लिए चुनी जा सकती है।
ITR स्क्रूटिनी क्या होती है?
स्क्रूटिनी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आयकर विभाग आपकी रिटर्न में दी गई जानकारी की जांच करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि आपने अपनी आय, कटौतियों, कर भुगतान और निवेश संबंधी विवरण सही तरीके से घोषित किए हैं। स्क्रूटिनी का मतलब यह नहीं है कि आपने कोई कर चोरी की है, बल्कि विभाग को कुछ तथ्यों की पुष्टि करनी होती है।
AY 2026-27 में किन मामलों में होगी अनिवार्य स्क्रूटिनी?
1. सर्वे (Survey) वाले मामले
यदि आपके व्यवसाय या प्रतिष्ठान पर आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत 1 अप्रैल 2024 या उसके बाद सर्वे किया गया है, तो आपकी रिटर्न अनिवार्य रूप से स्क्रूटिनी के लिए चुनी जा सकती है।
2. सर्च और सीज़र (Search & Seizure) केस
जिन करदाताओं के यहां धारा 132 के तहत छापा (Search) या धारा 132A के तहत दस्तावेजों की जब्ती की गई है, उनकी रिटर्न विस्तृत जांच के दायरे में आएगी। ([CAalley][1])
3. री-असेसमेंट (Reassessment) वाले मामले
यदि किसी करदाता को धारा 148 के तहत पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) का नोटिस जारी किया गया है, तो उसकी रिटर्न भी अनिवार्य जांच के लिए चुनी जा सकती है।
4. ट्रस्ट और संस्थाओं के मामले
जो संस्थाएं ITR-7 दाखिल करती हैं और जिनकी धारा 12A, 12AB या 10(23C) के अंतर्गत पंजीकरण या कर छूट रद्द हो चुकी है, लेकिन फिर भी वे छूट का दावा करती हैं, उन्हें स्क्रूटिनी का सामना करना पड़ सकता है।
5. पहले से विवादित आय वाले मामले
यदि पिछले वर्षों में आपकी आय में विभाग द्वारा बड़ी वृद्धि (Addition) की गई थी और वह अपील में भी बरकरार रही, तो समान प्रकार की विसंगति दोबारा मिलने पर आपकी रिटर्न जांच के लिए चुनी जा सकती है। महानगरों में यह सीमा 50 लाख रुपये और अन्य शहरों में 20 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
6. कर चोरी से जुड़ी विशेष सूचना
यदि किसी जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ED), CBI, इंटेलिजेंस एजेंसी या नियामक संस्था से कर चोरी संबंधी कोई विशेष सूचना प्राप्त होती है, तो संबंधित करदाता की रिटर्न स्क्रूटिनी के लिए चयनित हो सकती है।
कौन-सी गलतियां नोटिस का कारण बन सकती हैं?
भले ही आपका मामला अनिवार्य स्क्रूटिनी की श्रेणी में न आता हो, फिर भी कुछ सामान्य गलतियां नोटिस का कारण बन सकती हैं:
* FD और बचत खाते के ब्याज को आय में शामिल न करना
* गलत TDS क्रेडिट का दावा करना
* बिना दस्तावेजों के कर छूट या कटौती लेना
* परिवार के सदस्य के नाम निवेश से होने वाली आय घोषित न करना
* AIS, Form 26AS और ITR में आंकड़ों का मेल न होना
* घोषित आय की तुलना में अत्यधिक खर्च या निवेश दिखना
हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर विभाग की नजर
आज आयकर विभाग केवल आपकी रिटर्न नहीं देखता, बल्कि आपके वित्तीय व्यवहार का समग्र विश्लेषण करता है। निम्नलिखित लेनदेन विशेष रूप से निगरानी में रहते हैं:
* बड़े क्रेडिट कार्ड खर्च
* महंगी विदेशी यात्राएं
* सोना और आभूषण खरीद
* म्यूचुअल फंड या शेयर निवेश
* उच्च मूल्य की संपत्ति खरीद
* बड़े नकद जमा
यदि आपकी घोषित आय इन खर्चों से मेल नहीं खाती, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
नोटिस मिलने पर क्या करें?
यदि आपको आयकर विभाग से स्क्रूटिनी नोटिस प्राप्त होता है:
1. घबराएं नहीं।
2. आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
3. नोटिस को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
4. मांगे गए दस्तावेज समय पर अपलोड करें।
5. आवश्यकता होने पर किसी टैक्स विशेषज्ञ की सहायता लें।
नोटिस से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
* समय पर ITR दाखिल करें।
* सभी आय स्रोतों का सही खुलासा करें।
* AIS, Form 26AS और TDS विवरण का मिलान करें।
* केवल वैध और प्रमाणित कटौतियों का दावा करें।
* सभी वित्तीय दस्तावेज सुरक्षित रखें।
* बड़े लेनदेन की उचित व्याख्या तैयार रखे
निष्कर्ष
AY 2026-27 के लिए आयकर विभाग की स्क्रूटिनी प्रक्रिया पहले से अधिक डेटा-आधारित और तकनीकी हो चुकी है। अब केवल बड़े उद्योगपति ही नहीं, बल्कि सामान्य करदाता भी जांच के दायरे में आ सकते हैं यदि उनकी आय और खर्च में असंगति दिखाई देती है। इसलिए पारदर्शिता, सही जानकारी और समय पर अनुपालन ही किसी भी आयकर नोटिस से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।
**(यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी विशेष कर स्थिति के लिए योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)**
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