Gold Loans 50% बढ़कर ₹19 लाख करोड़ पहुंचे FY26 में | सोने के दामों में उछाल से रिटेल लोन में तेजी | BeYourMoneyManager


FY26 में गोल्ड लोन 50% उछलकर ₹19 लाख करोड़ हो गए, जो रिटेल एडवांस का सबसे तेज बढ़ने वाला सेगमेंट बन गया। सोने की कीमतों में 36% बढ़ोतरी और आसान लिक्विडिटी की वजह से लोग अब गोल्ड लोन को पहली पसंद बना रहे हैं। पूरी डिटेल्स, फायदे और सावधानियां पढ़ें।

Gold Loans में भारी उछाल: FY26 में 50% बढ़कर ₹19 लाख करोड़ पहुंचा आंकड़ा – क्या आप भी सोच रहे हैं Gold Loan लेने का?भारत में गोल्ड लोन (Loans Against Gold Jewellery) ने FY26 में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी CRIF High Mark के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक गोल्ड लोन का कुल आउटस्टैंडिंग ₹19 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 50% की भारी बढ़ोतरी है। इससे यह रिटेल लोन का सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन गया है।क्यों हुआ इतना तेज़ विकास?सोने की कीमतों में तेज उछाल — पिछले 12 महीनों में सोना डॉलर टर्म्स में करीब 36% महंगा हुआ। इससे गोल्ड ज्वेलरी का वैल्यू बढ़ा और लोग ज्यादा लोन अमाउंट हासिल कर पाए।

बदलती सोच — पहले लोग गोल्ड लोन को आखिरी विकल्प मानते थे, लेकिन अब इसे अस्थायी लिक्विडिटी टूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। शादी, बिजनेस, घरेलू जरूरतें या निवेश के लिए आसानी से पैसे निकाल रहे हैं।

बैंक्स और NBFC का जोर — दोनों ही सेगमेंट में गोल्ड लोन पर फोकस बढ़ा है। LTV (Loan to Value) 75-85% तक allowed है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सुरक्षित रहने के लिए कम ही दिया जाता है।


रिटेल लोन मार्केट पर असरगोल्ड लोन की इस तेज रफ्तार ने पूरे रिटेल क्रेडिट को भी सपोर्ट किया। कुल रिटेल लोन FY26 में 17% बढ़कर ₹170 लाख करोड़ हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट क्वालिटी भी बेहतर हुई है – डिलिंक्वेंसी (NPA) ज्यादातर सेगमेंट में घटी है।दक्षिण भारत (Tamil Nadu, Andhra Pradesh, Karnataka, Telangana, Kerala) अभी भी गोल्ड लोन का हॉटस्पॉट बना हुआ है, जहां कुल आउटस्टैंडिंग का बड़ा हिस्सा आता है।Gold Loan के फायदे (Money Manager के नजरिए से)तुरंत कैश — न्यूनतम डॉक्यूमेंट्स, कभी-कभी सिर्फ गोल्ड और ID प्रूफ पर।

कम ब्याज दर — unsecured पर्सनल लोन की तुलना में आमतौर पर सस्ता (7-12% p.a. तक, बैंक/NBFC पर निर्भर)।

कोई CIBIL इफेक्ट नहीं (अगर EMI समय पर चुकाई जाए)।

ओवर-बॉरोइंग से बचाव — क्योंकि सिक्योर्ड लोन है, लोन अमाउंट गोल्ड वैल्यू से बंधा रहता है।


सावधानियां और रिस्कगोल्ड की वैल्यूएशन सही हो – अलग-अलग कंपनियां अलग valuation देती हैं।

ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस ध्यान से चेक करें।

समय पर चुकाना जरूरी, वरना गोल्ड नीलामी का खतरा।

केवल जरूरत के हिसाब से लें, क्योंकि भाव बढ़ने पर भी भाव घटने का रिस्क रहता है।


Be Your Money Manager सलाह:

अगर आपके पास पुराना गोल्ड है और शॉर्ट-टर्म फंड की जरूरत है तो गोल्ड लोन अच्छा ऑप्शन हो सकता है। लेकिन लॉन्ग-टर्म फाइनेंसिंग के लिए होम लोन या अन्य सिक्योर्ड ऑप्शन्स बेहतर रहते हैं। हमेशा 2-3 बैंक्स/NBFCs (Muthoot, Manappuram, Federal Bank, SBI आदि) की rates की तुलना करें।

निष्कर्ष

FY26 का यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि भारतीय लोग अब गोल्ड को सिर्फ निवेश या आभूषण नहीं, बल्कि स्मार्ट फाइनेंशियल टूल के रूप में देख रहे हैं। अगर आप भी गोल्ड लोन लेने की सोच रहे हैं तो पहले अपनी जरूरत, EMI affordability और ब्याज दर अच्छे से समझ लें।



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