बेंगलुरु के रिटायर्ड प्रोफेसर के खाते से 13 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी पर NCDRC ने SBI को पूरा पैसा लौटाने का आदेश दिया। जानिए RBI के Zero Liability Rule और आपके बैंकिंग अधिकार।
भारत में बढ़ते डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के बीच एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने State Bank of India को आदेश दिया कि वह बेंगलुरु के एक रिटायर्ड प्रोफेसर को लगभग 13 लाख रुपये वापस करे, जो उनके खाते से ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए निकाल लिए गए थे।
यह फैसला सिर्फ एक ग्राहक की जीत नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।
क्या था पूरा मामला?
बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर के. पी. श्रीनाथ के SBI खाते में रिटायरमेंट के बाद लगभग 25 लाख रुपये जमा हुए थे। अप्रैल 2019 में उनके खाते से कई अनधिकृत ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 12.93 लाख रुपये निकाल लिए गए।
जब प्रोफेसर को इस फ्रॉड की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत बैंक, साइबर क्राइम पुलिस और बैंकिंग ओम्बड्समैन से शिकायत की। बाद में मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
SBI ने क्या दलील दी?
SBI का कहना था कि ग्राहक ने खुद OTP या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा की होगी, जिसकी वजह से फ्रॉड हुआ। बैंक ने यह भी कहा कि ग्राहक को SMS अलर्ट भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
हालांकि बैंक अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस तकनीकी रिकॉर्ड या सिस्टम लॉग पेश नहीं कर पाया।
NCDRC ने SBI के खिलाफ फैसला क्यों दिया?
NCDRC ने RBI के 6 जुलाई 2017 के “Customer Protection – Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions” सर्कुलर का हवाला दिया। आयोग ने कहा:
अगर ग्राहक की गलती साबित नहीं होती,
और ग्राहक तीन कार्यदिवस के भीतर शिकायत कर देता है,
तो ग्राहक “Zero Liability” सुरक्षा का हकदार होता है।
RBI का Zero Liability Rule क्या है?
RBI के नियमों के अनुसार:
ग्राहक की Zero Liability कब लागू होती है?
यदि:
बैंकिंग सिस्टम में किसी तीसरे पक्ष की वजह से फ्रॉड हुआ हो,
ग्राहक की लापरवाही साबित न हो,
और ग्राहक 3 दिनों के भीतर रिपोर्ट कर दे।
ऐसी स्थिति में पूरा नुकसान बैंक को उठाना पड़ सकता है।
यह फैसला सिर्फ एक ग्राहक की जीत नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण उदाहरण भी है।
क्या था पूरा मामला?
बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर के. पी. श्रीनाथ के SBI खाते में रिटायरमेंट के बाद लगभग 25 लाख रुपये जमा हुए थे। अप्रैल 2019 में उनके खाते से कई अनधिकृत ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 12.93 लाख रुपये निकाल लिए गए।
जब प्रोफेसर को इस फ्रॉड की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत बैंक, साइबर क्राइम पुलिस और बैंकिंग ओम्बड्समैन से शिकायत की। बाद में मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
SBI ने क्या दलील दी?
SBI का कहना था कि ग्राहक ने खुद OTP या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा की होगी, जिसकी वजह से फ्रॉड हुआ। बैंक ने यह भी कहा कि ग्राहक को SMS अलर्ट भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
हालांकि बैंक अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस तकनीकी रिकॉर्ड या सिस्टम लॉग पेश नहीं कर पाया।
इस फैसले से आम बैंक ग्राहकों को क्या सीख मिलती है?
1. तुरंत शिकायत करें
जैसे ही अनधिकृत ट्रांजैक्शन दिखे, तुरंत:
बैंक हेल्पलाइन,
शाखा,
साइबर क्राइम पोर्टल,
और ईमेल के जरिए शिकायत दर्ज करें।
2. स्क्रीनशॉट और रिकॉर्ड संभालकर रखें
SMS, बैंक स्टेटमेंट और शिकायत नंबर भविष्य में कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।
3. बैंक हमेशा सही नहीं होता
अगर बैंक आपकी शिकायत खारिज कर दे, तब भी:
Banking Ombudsman,
District Consumer Commission,
State Commission,
और NCDRC तक जाने का अधिकार आपके पास है।
4. OTP कभी शेयर न करें
हालांकि इस केस में बैंक ग्राहक की गलती साबित नहीं कर पाया, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में OTP साझा करना गंभीर जोखिम बन सकता है।
भारत में बढ़ रहे हैं डिजिटल बैंकिंग विवाद
हाल के वर्षों में उपभोक्ता अदालतें कई मामलों में ग्राहकों के पक्ष में फैसले दे चुकी हैं। कहीं बैंकों को ATM फ्रॉड का पैसा लौटाना पड़ा, तो कहीं गलत सर्विस चार्ज या ओवरबिलिंग पर कंपनियों को मुआवजा देना पड़ा।
यह दिखाता है कि उपभोक्ता अधिकार अब पहले से ज्यादा मजबूत हो रहे हैं।
निष्कर्ष
डिजिटल बैंकिंग ने सुविधा बढ़ाई है, लेकिन साइबर फ्रॉड का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। बेंगलुरु प्रोफेसर केस में आया यह फैसला बताता है कि यदि ग्राहक सतर्क रहे और समय पर शिकायत करे, तो कानून उसके साथ खड़ा हो सकता है।
हर बैंक ग्राहक को RBI के “Zero Liability” नियम की जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि सही समय पर उठाया गया कदम लाखों रुपये बचा सकता है।
Source: Indian Express Report



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