सोने में अभी क्या करें: शॉर्ट टर्म रिस्क हाई हैं, लेकिन अगले 12 महीनों में गोल्ड की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं: BCA रिसर्च की रौकाया इब्राहिम | BeYourMoney Manager

Kitco न्यूज के साथ एक विशेष साक्षात्कार में मॉन्ट्रियल स्थित BCA रिसर्च की चीफ कमोडिटी स्ट्रैटेजिस्ट रौकाया इब्राहिम ने कहा कि भले ही शॉर्ट टर्म में सोने (Gold) पर कई टैक्टिकल रिस्क हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में 2027 की शुरुआत तक गोल्ड की कीमतें और ऊंचे स्तर पर जा सकती हैं। BCA रिसर्च साल 2022 के अंत से ही गोल्ड को लेकर बुलिश है। शुरुआती 2026 में टैक्टिकल सावधानी बरती गई, लेकिन लॉन्ग टर्म पोजिशनिंग अब भी मजबूत बनी हुई है।गोल्ड का बुल मार्केट किन चरणों में चला?

रौकाया इब्राहिम के अनुसार, गोल्ड का मौजूदा बुल मार्केट तीन मुख्य चरणों में आगे बढ़ा है:

सेंट्रल बैंक की भारी खरीदारी (पहला चरण)

जियोपॉलिटिकल डिमांड में बढ़ोतरी

स्पेकुलेटिव इनफ्लो का तीसरा चरण (सबसे हालिया और सबसे जोखिम भरा)

उन्होंने कहा, “लेटेस्ट फेज बहुत ज्यादा स्पेकुलेटिव रहा है। खासकर एशियाई निवेशकों (मुख्य रूप से ETF के जरिए) का इनफ्लो बहुत तेज रहा। समस्या यह है कि कीमतें गिरनी शुरू होते ही ये फ्लो उलटे दिशा में तेजी से जा सकते हैं, जिससे मार्केट और कमजोर हो सकता है।”गोल्ड अब रिस्क एसेट जैसा क्यों व्यवहार कर रहा है?हाल के महीनों में गोल्ड की इक्विटी (शेयर बाजार) के साथ पॉजिटिव कोरिलेशन बढ़ गई है, जो इसे रिस्क एसेट जैसा बना रही है। साथ ही, रियल इंटरेस्ट रेट्स के साथ इसका पारंपरिक उल्टा संबंध (Inverse Relationship) फिर से मजबूत हुआ है।

सप्लाई शॉक में गोल्ड का ऐतिहासिक पैटर्न:

इब्राहिम ने बताया कि सप्लाई ड्रिवन इन्फ्लेशन शॉक के शुरुआती दौर में गोल्ड अक्सर दबाव में रहता है क्योंकि बॉन्ड यील्ड्स बढ़ते हैं और मॉनेटरी पॉलिसी टाइट होती है। लेकिन 12 महीने बाद जब शॉक ग्रोथ स्लोडाउन में बदल जाता है, तो गोल्ड रिकवर करता है।“गोल्ड आमतौर पर सप्लाई शॉक के शुरुआती चरण में गिरता है, लेकिन 12 महीने बाद रिकवर करता है। मुख्य बदलाव तब आता है जब शॉक इन्फ्लेशन से ग्रोथ ड्रिवन हो जाता है – इससे यील्ड्स गिरते हैं और गोल्ड को सपोर्ट मिलता है।”

जियोपॉलिटिक्स और ऑयल का रोल: मध्य पूर्व और एनर्जी मार्केट से जुड़े डिसरप्शन गोल्ड के आउटलुक के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर ऑयल फ्लो सामान्य होते हैं और इन्फ्लेशन कंसर्न कम होते हैं, तो गोल्ड का बुलिश केस फिर मजबूत हो जाएगा।

सेंट्रल बैंक डिमांड – स्ट्रक्चरल सपोर्टलॉन्ग टर्म में सबसे बड़ा सपोर्ट सेंट्रल बैंक्स की लगातार खरीदारी है। इब्राहिम के अनुसार यह “स्ट्रक्चरल फ्लोर” प्रदान करती है, भले ही यह कीमतों को तेजी से ऊपर न धकेल रही हो।हालांकि, अगर कोई बड़ा देश गोल्ड रिजर्व बेचना शुरू कर दे तो यह सपोर्ट कमजोर पड़ सकता है (जैसे तुर्की ने अस्थायी रूप से किया)।

सिल्वर पर सतर्क रुख:

गोल्ड की तुलना में सिल्वर पर BCA रिसर्च ज्यादा सतर्क है। सिल्वर में सेंट्रल बैंक डिमांड नहीं है और यह इंडस्ट्रियल डिमांड पर ज्यादा निर्भर है। इसलिए ग्लोबल ग्रोथ कमजोर पड़ने पर सिल्वर ज्यादा प्रभावित होगा।आगे क्या?

रौकाया इब्राहिम 12 महीने के होराइजन पर गोल्ड को अभी भी पसंदीदा एसेट मानती हैं। हालांकि निकट अवधि में नया एंट्री पॉइंट चुनने से पहले वे जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और इन्फ्लेशन एक्सपेक्टेशन के रिस्क को और कम होते देखना चाहती हैं।वे मानती हैं कि अगर इकोनॉमिक कंडीशंस बिगड़ती हैं तो फेडरल रिजर्व ग्रोथ को इन्फ्लेशन से ज्यादा प्राथमिकता देगा, जो अंततः गोल्ड के लिए पॉजिटिव रहेगा।निष्कर्ष:

शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी और करेक्शन का खतरा बना हुआ है, लेकिन स्ट्रक्चरल बुलिश फैक्टर्स (सेंट्रल बैंक खरीदारी + भविष्य में ग्रोथ स्लोडाउन) के कारण अगले 12 महीनों में गोल्ड की कीमतें नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकती हैं।

अस्वीकरण: यह लेख BCA रिसर्च की रौकाया इब्राहिम के किटको इंटरव्यू पर आधारित है। निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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