बैंक ऋण का क्षेत्रवार अभिनियोजन – दिसंबर 2025
वर्ष 2025 के दिसंबर माह के लिए 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से जुटाए गए बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन संबंधी आंकड़े,1 जो सभी एससीबी के कुल खाद्येतर ऋण का लगभग 95 प्रतिशत होता है, विवरण I और II में दिए गए हैं।
वर्ष-दर-वर्ष (व-द-व) आधार पर, खाद्येतर बैंक ऋण2 31 दिसंबर 2025 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार 14.4 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 11.1 प्रतिशत था (अर्थात, 27 दिसंबर 2024)।
31 दिसंबर 2025 को समाप्त पखवाड़े की स्थिति के अनुसार बैंक ऋण के क्षेत्रवार अभिनियोजन की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
कृषि और संबद्ध कार्यकलापों हेतु प्रदत्त ऋण में 12.1 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 12.5 प्रतिशत)।
उद्योग क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में 13.3 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में यह 7.5 प्रतिशत थी। जहां ‘सूक्ष्म एवं लघु’ को प्रदत्त ऋण में तेज वृद्धि हुई, वहीं, ‘मध्यम’ उद्योगों में मजबूत विस्तार जारी रहा। वृहत उद्योंगों के ऋण में भी वृद्धि हुई। प्रमुख उद्योगों में, ‘आधारभूत संरचना’, ‘सभी इंजीनियरिंग’, ‘मूल धातु और धातु उत्पाद’, ‘रसायन और रासायनिक उत्पाद’, ‘कपड़ा’, और ‘पेट्रोलियम, कोयला उत्पाद एवं परमाणु ईंधन’ के बकाया ऋण में वर्ष-दर-वर्ष सुदृढ़ वृद्धि दर्ज की गई।
सेवा क्षेत्र को प्रदत्त ऋण में वर्ष-दर-वर्ष 15.3 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज की गई (पिछले वर्ष के इसी पखवाड़े में 11.5 प्रतिशत), जो ‘गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों’ (एनबीएफसी), ‘व्यापार’ और ‘वाणिज्यिक स्थावर संपदा’ जैसे खंडों में उच्चतर वृद्धि से समर्थित था।
वैयक्तिक ऋण खंड हेतु प्रदत्त ऋण में 14.4 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक वर्ष पहले यह 12.0 प्रतिशत थी। जहां ‘वाहन ऋण’ और ‘स्वर्ण आभूषणों पर ऋण’ जैसे खंड़ों में प्रदत्त ऋण में निरंतर वृद्धि जारी रही, ‘आवास’ में स्थिर वृद्धि बनी रही, वहीं, ‘क्रेडिट कार्ड बकाया’ की वृद्धि में कमी पाई गई।
(साभार- www.rbi.org.in)
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