भारत में जमा बीमा के लिए जोखिम-आधारित प्रीमियम ढांचा
1 अक्तूबर 2025 के विकासात्मक और विनियामकीय नीतियों पर वक्तव्य में की गई घोषणा के अनुसरण में निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) ने भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के अनुमोदन से आज बीमाकृत बैंकों को जोखिम आधारित प्रीमियम (आरबीपी) ढांचे के कार्यान्वयन के बारे में सूचित किया है। इस ढांचे का उद्देश्य बैंकों द्वारा सुदृढ़ जोखिम प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और बेहतर रेटिंग वाले बैंकों द्वारा भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम को कम करना है।
पृष्ठभूमि: डीआईसीजीसी 1962 से एकसमान-दर प्रीमियम प्रणाली पर जमा बीमा का परिचालन कर रहा है [वर्तमान में मूल्यांकन योग्य जमाराशियों (एडी) के प्रति ₹100 पर 12 पैसे]। एकसमान-दर प्रीमियम प्रणाली को समझना और प्रशासित करना सरल है लेकिन यह जोखिमों को बेहतर ढंग से संचालित करने वाले बैंकों को पृथक रूप से व्यवहृत नहीं करता है। डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 [धारा 15(1)] बीमाकृत बैंकों की विभिन्न श्रेणियों के लिए विभेदक प्रीमियम दर प्रदान करता है। जमा बीमा के लिए आरबीपी लागू करने का प्रस्ताव भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड द्वारा 19 दिसंबर 2025 को अनुमोदित किया गया है।
आरबीपी ढांचे की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
उक्त ढांचे में दो जोखिम मूल्यांकन मॉडल होंगे - टियर 1 मॉडल और टियर 2 मॉडल। टियर 1 मॉडल क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के अलावा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू है और पर्यवेक्षी रेटिंग, मात्रात्मक मूल्यांकन (कैमल्स मापदंड) और बीमाकृत बैंकों की विफलता के मामले में जमा बीमा निधि (डीआईएफ) में संभावित हानि पर आधारित है।
आरआरबी और सहकारी बैंकों पर लागू टियर 2 मॉडल, बीमाकृत बैंकों की विफलता के मामले में मात्रात्मक मूल्यांकन (कैमल्स मापदंड) और डीआईएफ़ की संभावित हानि पर आधारित है।
अधिकतम जोखिम_मॉडल_प्रोत्साहन, कार्ड दर से 33.33% अधिक होगा।
इसके अतिरिक्त, आरबीपी ढांचा विंटेज (जो बिना किसी बड़े संकट या डीआईसीजीसी से भुगतान के लिए दावा न करने के बावजूद, डीआईसीजीसी की निक्षेप बीमा निधि में काफी समय से किए गए अंशदान को रेखांकित करता है) का लाभ भी प्रदान करता है। अधिकतम 25% तक का विंटेज-प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
अतः, प्रभावी प्रीमियम दर की गणना निम्नानुसार की जाएगी:

इस ढांचा में प्रारंभिक जोखिम रेटिंग के बाद किसी प्रतिकूल महत्वपूर्ण सूचना/क्रियाकलाप के मामले में रेटिंग अभीभावी नीति को भी शामिल किया गया है।
बैंकों के लिए यह आवश्यक होगा कि वे रेटिंग की गोपनीयता बनाए रखें और डीआईसीजीसी को अदा किए गए प्रीमियम की राशि या रेटिंग प्रकट नहीं करें।
स्थानीय क्षेत्र बैंक (एलएबी) और भुगतान बैंक (पीबी), कार्ड दर (अर्थात्, प्रति वर्ष एडी के ₹100 के लिए 12 पैसे) पर प्रीमियम का भुगतान करना जारी रखेंगे क्योंकि उन्हें आरबीपी मॉडल में लाने के लिए डेटा पॉइंट सीमाएं निर्धारित की गई हैं (संग्रहित प्रीमियम का 1% से कम उनसे प्राप्त होता है)।
भारतीय रिज़र्व बैंक के पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचे (एसएएफ)/त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के अंतर्गत आने वाले सभी यूसीबी 12 पैसे की कार्ड दर का भुगतान करना जारी रखेंगे और बैंक जिस वर्ष में एसएएफ़/पीसीए से बाहर निकलता है उसके बाद के वित्तीय वर्ष से आरबीपी के लिए विचार किया जाएगा।
आरबीपी ढांचा 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और इसकी समीक्षा तीन वर्षों में कम से कम एक बार की जाएगी।
(साभार- www.rbi.org.in)
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