सीबीआई ने फरार हीरा व्यापारी जतिन मेहता के खिलाफ दो नयी प्राथमिकी दर्ज की हैं। यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 587.55 करोड़ रुपये की कथित ऋण धोखाधड़ी की शिकायत से जुड़ा है।
अधिकारियों ने बताया कि दो सरकारी बैंकों की शिकायत के अनुसार मेहता की कथित ऋण धोखाधड़ी से बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 323.40 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 264.15 करोड़ रुपये नुकसान हुआ है।
दोनों बैंकों की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने मेहता और उसकी कंपनी विंसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी के खिलाफ दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।
सीबीआई ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शिकायत पर कंपनी, उसके मूल प्रवर्तक मेहता, पूर्ण कालिक निदेशक रमेश आई. पारेख और रविचंद्रन रामास्वामी, स्वतंत्र निदेशक हरीश रतिलाल मेहता और जॉर्डन के हाथयम सलमान अली अबू ओबेदाहा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
वहीं यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर कंपनी, मेहता, बॉम्बे डायमंड्स कंनपनी लिमिटेड और ओबेदाहा को आरोपी बनाया है।
दोनों बैंक उन 14 बैंकों के समूह का हिस्सा हैं जिन्होंने विंसम डायमंड को 4,600 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा दी थी।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि बैंको को घोटाले की भनक लगने से पहले मेहता देश छोड़कर भाग गया था। उसके कैरिबयाई द्वीप में से एक सेंट किट्स पर होने की संभावना है।
सीबीआई ने उसके खिलाफ सात एफआईआर दर्ज की हैं।
(साभार: पीटीआई भाषा)
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