ब्रिग्जिट (Brexit) क्या है? जानिए सबकुछ विस्तार से

>ब्रिग्जिट (Brexit): कुछ तथ्य
-23 जून के जमनत संग्रह में क्या हुआ। कितने % यूरोपीय संघ के साथ रहने (Bremain)
और कितने % यूरोपीय संघ से बाहर निकलने (Brexit) के पक्ष में वोट पड़े...
                       Brexit %                 Bremain%
यूके                    51.9                       48.1
इंग्लैंड                 53.4                       46.6
उत्तरी आयरलैंड    44.2                       55.8
स्कॉटलैंड             38.0                       62.0
वेल्स                   52.5                       47.5

>आबादी (मिलियन में):
इंग्लैंड:               53.0
लंदन:                8.5
स्कॉटलैंड:           5.3
वेल्स:                 3.0
उत्तरी आयरलैंड:   1.8
-1975 के जनमत संग्रह ने 67.2% लोगों ने यूरोपीय संघ के साथ रहने के पक्ष में
वोट डाला था।
>ब्रिग्जिट (Brexit) के बाद अब क्या :
-यूरोपीय संघ से ब्रिटेन को अलग होने में दो साल का समय लगेगा। इसके लिए यूरोपीय परिषद
को पहले जानकारी देनी होगी।

>ब्रिग्जिट का भारत, यूके और बाजार के लिए मायने:
-भारत: कमजोर पौंड से यूके में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता का बोझ कम होगा। लेकिन,
वहां रहन-सहन महंगा (लिविंग कॉस्ट) होने से कम राहत की संभावना। यूके में सैरसपाटा करना
सस्ता होगा। भारतीय सरकार ब्रिटेन के अलग होने का इकोनॉमी पर मध्यम या दीर्घ अवधि में
कोई खास असर नहीं देख रही है।
-भारतीय निवेशकों के लिए अनिश्चितता: भारत यूके का तीसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। इसका
सबसे बड़ा नियोक्ता (Employer) टाटा ग्रुप है जिसे जनमतसंग्रह के मतगणना यानी 24 जून के दिन
30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
-यूके: लंदन को दुनिया की आर्थिक या वित्तीय राजधानी का दर्जा हासिल है लेकिन यूरोपीय संघ से
अलग होने के बाद इस रुतबे में कमी आ सकती है। कारण है कि यहां से कई बैंक और कंपनियां अपना
मुख्यालय कहीं और ले जा सकते हैं। यूके पर मंदी का साया मंडरा रहा है क्योंकि स्कॉटलैंड और उत्तरी
आयरलैंड ने यूरोपीय संघ के साथ रहने के पक्ष में वोट डाला है। इससे यूके में नयाे राजनीतिक संकट
पैदा हो सकता है।
-बाजार:निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। निवेशक बिकवाली कर सकते हैं जिससे बाजार में
आगे गिरावट संभव। डॉलर के मुकाबले रुपया के और कमजोर होने की आशंका। बॉन्ड यील्ड अधिक
रह सकते हैं क्योंकि रिजर्व बैंक द्वारा दरों में आगे और कटौती की गुंजाइश कम हुई। कच्चा तेल और
दूसरे कमोडिटी के दाम नरम रह सकते हैं।
>यूके और यूरोपीय संघ में बड़े एक्सपोजर वाली कंपनियां:
A-वो कंपनियां जिनका यूके में ऑपरेशन है
-टाटा मोटर्स:UK/EU से 35% रेवेन्यू आता है।
-भारत फोर्ज: यूरोप से 40% रेवेन्यू और 25% प्रॉफिट आता है।
-महिंद्रा CIE: यूरोप से 65% रेवेन्यू और 70% प्रॉफिट आता है।
-टाटा स्टील: यूके से 30% बिक्री जबकि यूरोपीय संघ से 16% बिक्री
यूके या यूरोपीय संघ की ग्रोथ में कमी से इन कंपनियों के प्रदर्शन पर अच्छा-खासा असर पड़ेगा।
B-वो कंपनियां जो यूके में एक्सपोर्ट करती हैं 
-कुल भारतीय आईटी(TCS, HCL, इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा) एक्सपोर्ट में यूके की हिस्सेदारी 17%
-बालकृष्ण इंडस्ट्रीज: यूरोपी से 55% रेवेन्यू
-कमिन्स इंडिया (Cummins India): कुल बिक्री का 4% यूरोप एक्सपोर्ट

-वा टेक वैवाग (VA TECH WABAG): यूरोप में 32%  बिक्री


इस महीने की 23 तारीख को यूरोप में एक महत्वपूर्ण घटना घटने जा रही है। दुनियाभर की नजर उस घटना पर है। आपको याद होगा कुछ समय पहले अंतर्राष्ट्रीय खबरों में Grexit (Greece Exit) छाया था। ग्रीस में इस बात पर जनमत संग्रह करवाया गया था कि वह 28 देशों के संगठन यूरोपीय संघ में रहना चाहता है या उससे बाहर निकलना चाहता (Grexit) है। ग्रीस की बहुसंख्यक आबादी ने जनमत संग्रह के दौरान यूरोपीय संघ में रहने की हामी भरी। अब ब्रिग्जिट (Brexit) की चर्चा हो रही है। 23 जून को इस पर ब्रिटेन में जनमत संग्रह होने वाला है।

आखिर क्या है ब्रिग्जिट(Brexit) और यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के निकलने पर दोनों पक्षों पर आर्थिक रूप से
क्या असर पड़ने वाला है? जानकार इसके आकलन में उलझे हुए हैं कि इससे ब्रिटेन और यूरोपीय संघ में से किस को ज्यादा नुकसान या ज्यादा फायदा पहुंचेगा। इसके अलावा इससे कौन सा सेक्टर पर ज्यादा प्रभावित होगा,

बाजार इस बात को लेकर भी गंभीर है। यूरोपीय संघ से निकलने के बाद क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिटेन की हैसियत कम होगी या बढ़ेगी, इस बात पर भी जानकारों में चर्चा है। ब्रिटेन की मुद्रा पौंड की ताकत विश्व की दूसरी महत्वपूर्ण मुद्राओं मसलन, यूरो, अमेरिकी डॉलर, जापानी येन के मुकाबले कहां टिकेगी, इस पर भी नजर है।

-ब्रिग्जिट(Brexit) का मतलब- ब्रिग्जिट (Brexit)  मुख्यत: अंग्रेजी के दो शब्दों Britain और Exit से बना है जिसका मतलब होता है ब्रिटेन का बाहर निकलना। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए वहां जनमतसंग्रह इस महीने की 23 तारीख को प्रस्तावित है। इसे ही ब्रिग्जिट (Brexit) कहा जा रहा है।

ब्रिग्जिट (Brexit) को लेकर ब्रिटेन के लोग बंटे हुए हैं। प्रधानमंत्री डेविड कैमरन देश को यूरोपीय संघ में बने रहने का हिमायत कर रहे हैं। कैमरन ने यूरोपीय संघ (ईयू) से देश के बाहर होने को लेकर 23 जून को प्रस्तावित जनमत संग्रह पर चेतावनी देते हुए इसका समर्थन करने वालों के दावों को झूठा करार दिया है और देशवासियों से यूरोपीय संघ में बने रहने के उनके निर्णय का समर्थन करने की मांग की है।

उधर, ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने की वकालत करने वाले संगठन ‘वोट लीव’ ने कैमरन के इस अपील का जवाब देते हुए कहा कि वह जनमत संग्रह को लेकर डरे हुए हैं। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने
का अभियान चलाने वालों का कहना है कि , “अगर आप लीव यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के पक्ष में वोट करते हैं, तो यूरोपीय संघ के कानून की सर्वोच्चता समाप्त होगी और ब्रिटेन का अपनी सीमाओं, लोकतंत्र तथा अर्थव्यवस्था पर अपना नियंत्रण होगा।”

वहीं, ब्रिटेन में भारतीय मूल के सांसदों ने पार्टी लाइन से अलग हटकर आगामी 23 जून को होने वाले जनमत संग्रह में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ में बने रहने के लिए प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।

भारतीय मूल के 15 ब्रिटिश सांसदों की ओर से ब्रिटिश इंडियंस फॉर इन नामक अभियान की शुरूआत की गई है। इन सांसदों में कीथ वाज, शैलेश वारा, लॉर्ड करण बिलिमोरिया, वीरेंद्र शर्मा और सीमा मल्होत्रा शामिल हैं।

उन्होंने कहा, हम इस विश्वास को लेकर एकजुट हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ के सदस्य के तौर पर अधिक
मजबूत, सुरक्षित और बेहतर है। हमारा यह मानना है कि यूरोपीय संघ की हमारी सदस्यता से भारत जैसे देशों
के साथ ब्रिटेन की साझेदारी को बढ़ाने और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

-क्या है यूरोपीय संघ (यूरोपियन यूनियन) : मुख्यत: यूरोप में स्थित 28 देशों का एक राजनैतिक एवंएवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है। इसके सदस्य देशों में शामिल है-आस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातीविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, स्पेन, स्वीडन, युनाइटेड किंगडम.क्रोएशिया।

इसका अभ्युदय 1957 में रोम की संधि द्वारा यूरोपिय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपिय देशों की आर्थिक भागीदारी से हुआ था। तब से इसमें सदस्य देशों की संख्या में लगातार बढोत्तरी होती रही और इसकी नीतियों में बहुत से परिवर्तन भी शामिल किये गये। 1993 में मास्त्रिख संधि द्वारा इसके आधुनिकवैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी। दिसम्बर 2007 में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया 1 जनवरी 2008 से शुरु की गयी है।

यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की चार तरह की स्वतंत्रताएँ सुनिश्चित करता है:- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी का स्वतंत्र आदान-प्रदान. संघ सभी सदस्य राष्ट्रों के लिए एक तरह की व्यापार, मत्स्य, क्षेत्रीय विकास की नीति पर अमल करता है।

1999 में यूरोपिय संघ ने साझी मुद्रा यूरो की शुरुआत की जिसे पंद्रह सदस्य देशों ने अपनाया। संघ ने
साझी विदेश, सुरक्षा, न्याय नीति की भी घोषणा की। सदस्य राष्ट्रों के बीच पासपोर्ट नियंत्रण भी समाप्त कर दिया
गया।

यूरोपिय संघ में लगभग 500 मिलियन नागरिक हैं, एवं यह विश्व के सकल घरेलू उत्पाद का 31% योगदानकर्ता है जो 2007 में लगभग (यूएस$16.6 ट्रिलियन) था।

यूरोपीय संघ समूह आठ संयुक्त राष्ट्रसंघ एवं विश्व व्यापार संगठन में अपने सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है।
यूरोपीय संघ के 21 देश नाटो के भी सदस्य हैं। यूरोपीय संघ के महत्वपूर्ण संस्थानों में यूरोपियन कमीशन,यूरोपीय संसद, यूरोपीय संघ परिषद, यूरोपीय न्यायलय एवं यूरोपियन सेंट्रल बैंक इत्यादि शामिल हैं। यूरोपीय संघ के नागरिक हर पाँच वर्ष में अपनी संसदीय व्यवस्था के सदस्यों को चुनती है।

यूरोपीय संघ को वर्ष 2012 में यूरोप में शांति और सुलह, लोकतंत्र और मानव अधिकारों की उन्नति में अपने योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

>जानकारों की नजर में अगर ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग होता है तो क्या होगा
-बाजार में कुछ हद तक अनिश्चितता की आशंका, लेकिन अगर सही नीति बनाई गई तो लंबी अवधि
में अच्छी आर्थिक सेहत की उम्मीद।

-दूसरे देशों के साथ आर्थिक मोर्चे पर अपने पक्ष में मोल-भाव करने की हैसियत में कमी आएगी। कहां करीब 50 करोड़ आबादी वाला यूरोपीय संघ और कहां महज करीब साढे छह करोड़ उपभोक्ता वाला देश ब्रिटेन। ताकत में तो कमी आना लाजिमी है।

-अभी यूरोपीय संघ का जापान और अमेरिका समेत कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता है जिसका
फायदा ब्रिटेन को भी मिल रहा है। अगर ब्रिटेन अलग होता है तो उसे फिर से इन देशों के अलावा यूरोपीय देशों के साथ भी इस तरह के करार करने होंगे। लेकिन तब सवाल उठेगा कि क्या ब्रिटेन अकेले दम पर अपने पक्ष में करार को मोड़ दे पाएगा या नहीं।

-ब्रिटेनवासी यूरोपीय संघ सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की मिली चार तरह की स्वतंत्रताएँ :- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी  का स्वतंत्र आदान-प्रदान से भी वंचित हो जाएंगे। इसके अलावा संघ के सभी सदस्य राष्ट्र अभी जो एक तरह की व्यापार, मत्स्य, क्षेत्रीय विकास की नीति पर अमल करते हैं, जिसका फायदा अलग होकर ब्रिटेन नहीं उठा पाएगा।

इसके अलावा, संघ साझी विदेश, सुरक्षा, न्याय नीति पर अमल करता है और सदस्य राष्ट्रों के बीच पासपोर्ट नियंत्रण भी समाप्त कर दिया गया है। जाहिर है अकेले ब्रिटेन को इन सब सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।

-इसके अलावा, यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने का एक डर ये भी सता रहा है कि कहीं विदेशी कंपनियां वहां से अपना निवेश निकाल ना ले और अपना मुख्यालय किसी दूसरे देश में ना लेकर चली जाए।

-अगर ब्रिटेन बाहर निकलता है तो यूरोपीय यूनियन बजट के लिए हर साल उसके द्वारा दिया जाने वाला करोड़ों पाउंड का योगदान बच जाएगा, जिसका इस्तेमाल वह अपनी तरक्की के लिए कर सकता है।

-सीबीआई यानी Confederation of British Industry ने मार्च में कहा था कि ब्रिटेन अगर यूरोपीय संघ से बाहर निकलता है तो ब्रिटेन की इकोनॉमी को 100 करोड़ पाउंड का झटका लग सकता है।

लेकिन, अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि ब्रिटेन अगर यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का फैसला करते है तो किन शर्तों पर ऐसा होगा।

>जनमत संग्रह में किसको हिस्सा लेने की अनुमति है?
ब्रिटिश, आयरिश और कॉमनवेल्थ देशों के नागरिक जो यूके में रहते हैं। साथ ब्रिटिश जिन्हें विदेश में रहते हुए 15 साल से कम समय हुआ है। जिनकी उम्र 18 साल या उससे अधिक है, वही जनमत संग्रह में वोट देने के हकदार हैं।

लेकिन, आयरलैंड, माल्टा और सायप्रस जो कि कॉमनवेल्थ का हिस्सा हैं के नागरिकों को छोड़कर दूसरे यूरोपीय देशों के नागरिकों को इस जनमत संग्रह में वोट देने का अधिकार नहीं होगा।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, भारत, पाकिस्तान और नाइजीरिया समेत 56 कॉमनवेल्थ देशों से पलायन कर ब्रिटेन में बसे लोगों को भी वोट देने की अनुमति मिली हुई है।


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