FMC का SEBI में हुआ विलय

आज से कमोडिटीज डेरिवेटिव्ज मार्केट (जिंस वायदा) भी मार्केट रेगुलेटर सेबी के क्षेत्राधिकार में आ गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अब तक जिंस वायदा को रेगुलेट करने वाले वायदा बाजार आयोग (FMC)-सेबी के विलय को औपचारिक स्वरूप प्रदान करने के लिए पारंपरिक घंटा बजाया।

वायदा बाजार आयोग का सेबी में विलय की नई व्यवस्था में जिंस बाजार के कामकाज की निगरानी सेबी के पूर्णकालिक सदस्य राजीव कुमार अग्रवाल करेंगे। सेबी ने बताया कि जिंस खंड के ब्रोकरों और अन्य का नियमन शेयर बाजार के समकक्षों के अनुरूप होगा, साथ ही अनुपालन के लिए एक साल मिलेगा।

बता दें कि सेबी की स्थापना 1988 में हुई थी लेकिन 1992 में पूंजी बाजार के रेगुलेटर के तौर पर इसे पूरा अधिकार और आजादी दी गई। वहीं FMC 1953 से कमोडिटीज मार्केट को रेगुलेट कर रहा है लेकिन पर्याप्त अधिकार नहीं मिलने से वह कमोडिटीज मार्केट की गड़बड़ी और सट्टेबाजी को रोकने में नाकाम रहा है। इस साल आम बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने FMC का सेबी में विलय की घोषणा की थी।

((FMC का SEBI में विलय सोमवार को 
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((28 सितंबर से SEBI-FMC विलय पर अधिसूचना जारी 
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((सेबी-एफएमसी विलय 28 सितंबर से लागू
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((सेबी की बोर्ड बैठक, FMC के विलय पर चर्चा मुमकिन 
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